/ Apr 29, 2026
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Tariff

Trump Greenland Threat ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी से बढ़ा वैश्विक तनाव, कनाडा-डेनमार्क आमने-सामने

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump) एक बार फिर अपने बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। इस बार मामला दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड (Greenland) का है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर दूसरे देश अमेरिका के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की योजना का समर्थन नहीं करते, तो उन पर भारी टैरिफ (Tariff Threat) लगाए जा सकते हैं। उनके इस बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस और चिंता को जन्म दे दिया है। ट्रंप की धमकी और अमेरिका का तर्क Trump का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए बेहद अहम है। उन्होंने आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका अपने हितों की अनदेखी नहीं कर सकता। ट्रंप के मुताबिक, टैरिफ लगाना उन देशों पर दबाव बनाने का एक तरीका हो सकता है जो अमेरिका की इस रणनीति के रास्ते में खड़े हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड का सख्त रुख Trump के बयान के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया भी उतनी ही साफ और सख्त रही। डेनमार्क ने दो टूक कहा कि ग्रीनलैंड उसकी संप्रभुता के अंतर्गत आता है और किसी भी तरह की धमकी या सौदेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं ग्रीनलैंड के स्थानीय नेताओं ने भावनात्मक लहजे में कहा कि यह द्वीप “बिकाऊ नहीं है” और वहां के लोग अपने भविष्य का फैसला खुद करेंगे। कनाडा और यूरोपीय देशों का समर्थन इस पूरे विवाद में कनाडा भी खुलकर सामने आया है। कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश हर हाल में ग्रीनलैंड के साथ खड़ा है और उसकी संप्रभुता का सम्मान करता है। इसके अलावा कई यूरोपीय देशों और नाटो सहयोगियों ने भी ट्रंप की टैरिफ धमकी को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र पर जबरन कब्जे की सोच आधुनिक विश्व व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। क्यों इतना अहम है ग्रीनलैंड? ग्रीनलैंड केवल बर्फ से ढका एक द्वीप नहीं है। यह इलाका के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण यहां नए रास्ते और संसाधन सामने आ रहे हैं, जिससे बड़ी ताकतों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। ग्रीनलैंड को लेकर Trump की टैरिफ धमकी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीति में शक्ति और हितों की टकराहट कितनी गहरी हो सकती है। जहां अमेरिका अपने सुरक्षा हितों की बात कर रहा है, वहीं ग्रीनलैंड, डेनमार्क और उनके समर्थक देश संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर जोर दे रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Maharashtra

Maharashtra Municipal Result 2026 BJP+ का शहरी स्ट्रॉन्गहोल्ड, Congress को Latur और Chandrapur में राहत

महाराष्ट्र (Maharashtra) नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। 29 नगर निगमों में हुए चुनावों के रुझानों और नतीजों में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन (BJP+) ने बड़ा दबदबा दिखाया है। शुरुआती और लगभग अंतिम रुझानों के मुताबिक 23 से 25 नगर निगमों में BJP+ को बढ़त या जीत मिली है, जबकि कुछ जगहों पर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। Mumbai, Pune, Nagpur में BJP+ का दमदार प्रदर्शन राज्य के तीन सबसे बड़े और अहम नगर निगम—मुंबई (BMC), पुणे और नागपुर—में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने बढ़त बना ली है। इन नतीजों को शहरी मतदाताओं के बीच बीजेपी की पकड़ के रूप में देखा जा रहा है, खासकर विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर प्रशासन जैसे मुद्दों को लेकर। Latur और Chandrapur में Congress को राहत जहां एक तरफ BJP+ का दबदबा दिखा, वहीं लातूर और चंद्रपुर जैसे नगर निगमों में कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर या मजबूत बढ़त बनाकर राहत की सांस ली है। इन इलाकों में स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और संगठन की पकड़ ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। अन्य नगर निगमों का हाल मतदाता रुझान और राजनीतिक संकेत इन चुनावों में शहरी मतदाताओं का रुझान साफ तौर पर स्थिरता और मजबूत नेतृत्व की ओर झुका दिखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी संकेत देने वाले हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Update 16 Jan 2026 Sensex-Nifty Today Highlights और Top Movers

आज, 16 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में जोरदार तेजी देखने को मिली। BSE Sensex ने लगभग 700 पॉइंट्स की बढ़त दर्ज की और Nifty 50 25,800 के ऊपर ट्रेड कर रहा है। निवेशकों का भरोसा IT और Banking सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन से बढ़ा, जबकि बड़ी कंपनियों के तिमाही परिणाम ने बाजार को नई ऊर्जा दी। आज के Market Movers – IT और Tech Stocks की चमक Banking और Financial Stocks भी चमके Other Stocks on Radar Sensex और Nifty Levels Summary – क्या सीखें आज के Market से? 16 जनवरी 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक और उत्साहजनक रहा। आज का दिन यह साबित करता है कि सही सेक्टर और सही स्टॉक्स में निवेश, मार्केट मूड को बदल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold & Silver Today चांदी ₹2.89 लाख/kg और सोना ₹1.47 लाख/10g तक पहुंचा

देश के बुलियन मार्केट (Bullion Market) में 2026 की शुरुआत में ही एक जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। चांदी (Silver) और सोना (Gold) दोनों ने नया ऑल टाइम हाई (All-Time High) छू लिया है, जिससे निवेशकों और ज्वैलर्स में उत्साह और उत्सुकता दोनों बढ़ गई है। चांदी (Silver) का नया रिकॉर्ड चांदी की कीमत ने लगभग ₹2,89,000 प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर पार किया। केवल पिछले चार दिनों में इसकी कीमत में ₹40,000 से अधिक की तेजी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तेजी वैश्विक मार्केट अनिश्चितताओं, कमज़ोर डॉलर और औद्योगिक मांग में वृद्धि के कारण हो रही है। चांदी न केवल निवेश का सुरक्षित माध्यम है, बल्कि यह सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग होने के कारण भी डिमांड बढ़ा रही है। सोना (Gold) की लगातार बढ़ती कीमत सोने ने भी रिकॉर्ड बनाया और आज ₹1,47,300 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। जनवरी की शुरुआत से लगभग 7% का उछाल देखा गया है। सोने की इस तेजी के पीछे निवेशक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक अस्थिरताओं में सुरक्षा तलाशते हुए इसमें निवेश कर रहे हैं। क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? निवेशकों के लिए टिप्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वर्तमान स्तर पर निवेश लाभ लेने और सावधानी के संतुलन के साथ किया जाए। मार्केट रुझान लगातार बदल रहे हैं, इसलिए अपडेटेड जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है। आज का सारांश धातु वर्तमान कीमत (India) ट्रेंड चांदी (Silver) ₹2,89,000 / kg तेजी में सोना (Gold) ₹1,47,300 / 10g रिकॉर्ड हाई हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Yashwant Varma

Justice Yashwant Varma के खिलाफ Parliamentary Committee की जांच जारी Supreme Court ने रोक नहीं लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश Justice Yashwant Varma के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनके उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ गठित Parliamentary Investigation Committee को चुनौती दी थी। इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ लगे corruption allegations की संसदीय जांच पूरी तरह से जारी रह सकेगी। मामला क्या है? जस्टिस यशवंत वर्मा तब विवादों में आए थे जब दिल्ली हाईकोर्ट में उनका official residence आग की घटना के बाद खुलासा हुआ कि वहां बड़ी मात्रा में unaccounted cash मिली। इसके बाद उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और उन्हें बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। संसदीय कार्रवाई की शुरुआत लोकसभा में उनके खिलाफ impeachment motion पेश किया गया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति का काम है आरोपों की निष्पक्ष जांच करना। हालांकि, राज्यसभा में यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका क्योंकि उपसभापति ने इसे पहले ही रिजेक्ट कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा की दलील जस्टिस वर्मा ने दलील दी कि जब तक दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार नहीं होता, तब तक संसदीय जांच समिति का गठन कानूनी रूप से सही नहीं है। उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष ने एकतरफा निर्णय लिया, जो कानून के खिलाफ है। कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि: इस निर्णय के बाद संसदीय जांच समिति को जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच जारी रखने का हक मिल गया। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायिक जवाबदेही और transparency की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जस्टिस यशवंत वर्मा के लिए यह एक बड़ा झटका है, जबकि संसद को उनके खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच जारी रखने का अधिकार मिल गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Venezuela

US–Venezuela Relations मचाडो का भावनात्मक कदम, Trump को दिया Nobel Prize पदक

Venezuela Politics से जुड़ी एक बड़ी और भावनात्मक खबर सामने आई है। वेनेज़ुएला की चर्चित विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (Maria Corina Machado) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को अपने Nobel Peace Prize का पदक प्रतीकात्मक रूप से सौंपा है। इस मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा कि उन्हें अब “अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा है”। यह मुलाकात वॉशिंगटन में हुई, जिसने न सिर्फ वेनेज़ुएला की राजनीति बल्कि US–Venezuela Relations को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। Nobel Prize देना प्रतीकात्मक, नियम नहीं बदले मारिया कोरिना मचाडो को हाल ही में Venezuela में लोकतंत्र, मानवाधिकार और तानाशाही के खिलाफ संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। ट्रंप को दिया गया पदक केवल एक प्रतीकात्मक सम्मान है। नोबेल समिति पहले ही साफ कर चुकी है कि नोबेल पुरस्कार किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता और आधिकारिक तौर पर यह सम्मान मचाडो के नाम पर ही रहेगा। President बनने की चर्चा थी, लेकिन Trump का खुला समर्थन नहीं पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा तेज थी कि मचाडो वेनेज़ुएला (Venezuela) की अगली राष्ट्रपति बन सकती हैं। उन्हें देश के भीतर और बाहर लोकतंत्र समर्थक चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने उनके राष्ट्रपति बनने का खुलकर समर्थन नहीं किया। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका वेनेज़ुएला में मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। इससे साफ है कि अमेरिका की नीति अभी पूरी तरह किसी एक नेता पर केंद्रित नहीं है। बदला हुआ रुख, भरोसे का संदेश दिलचस्प बात यह है कि पहले मचाडो ट्रंप की नीतियों को लेकर सतर्क नजर आती थीं। लेकिन अब उनका बयान बदला हुआ दिखता है। पदक सौंपने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और ट्रंप वेनेज़ुएला में लोकतंत्र बहाल करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उनके इस कदम को कई लोग एक राजनीतिक अपील के तौर पर देख रहे हैं, ताकि अमेरिका का समर्थन उनके आंदोलन को और मजबूती दे सके। Expert View: इसका मतलब क्या है? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम एक कूटनीतिक संदेश है। इससे साफ है कि वेनेज़ुएला की सत्ता को लेकर तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है। Trump–Machado Meeting और Nobel Peace Prize का यह प्रतीकात्मक कदम भावनात्मक जरूर है, लेकिन इससे तुरंत कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होना तय नहीं माना जा रहा। मचाडो को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है, पर वेनेज़ुएला की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता अब भी लंबा और मुश्किल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Maharashtra

Maharashtra Civic Polls 2026 मुंबई नगर निगम में कड़ा मुकाबला, Nagpur में BJP का दबदबा

महाराष्ट्र (Maharashtra) में नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मतगणना के रुझानों से साफ है कि इस बार BJP+ (महायुति) गठबंधन ने कई बड़े महानगरों में मजबूत बढ़त बना ली है। खास तौर पर मुंबई और नागपुर जैसे अहम शहरों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जहां मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव का भी है। Mumbai BMC Result: कड़ा मुकाबला, लेकिन BJP+ आगे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई नगर निगम (BMC) में इस बार चुनावी जंग बेहद दिलचस्प रही। अब तक सामने आए रुझानों के अनुसार BJP+ गठबंधन करीब 44 सीटों पर आगे चल रहा है। वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और उसके सहयोगी लगभग 24 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।कई वार्डों में मुकाबला इतना नजदीकी है कि हर राउंड के साथ समीकरण बदलते दिखे। फिर भी, मौजूदा रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि मुंबई की नगर राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। Nagpur Municipal Result: BJP का दबदबा बरकरार नागपुर नगर निगम में तस्वीर कहीं ज्यादा साफ नजर आ रही है। यहां BJP+ गठबंधन लगभग 63 सीटों पर आगे चल रहा है। यह शहर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है और इस चुनाव में भी पार्टी ने अपनी पकड़ कायम रखी है। विपक्षी दल नागपुर में प्रभावी चुनौती देने में फिलहाल पीछे दिख रहे हैं। अन्य महानगरों में क्या रहा हाल मुंबई और नागपुर के अलावा पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, वसई-विरार जैसे प्रमुख नगर निगमों में भी BJP+ को बढ़त मिलती दिख रही है। कुछ जगहों पर कांग्रेस, NCP और शिवसेना (UBT) ने टक्कर जरूर दी, लेकिन कुल मिलाकर रुझान महायुति के पक्ष में रहे हैं। राजनीतिक मायने क्या हैं इन नगर निगम चुनाव परिणामों को सिर्फ स्थानीय निकाय तक सीमित नहीं देखा जा रहा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि शहरी इलाकों में BJP+ की बढ़त आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकती है। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) के लिए यह चुनाव आत्ममंथन का मौका भी माना जा रहा है। फिलहाल ये सभी आंकड़े मतगणना के रुझानों पर आधारित हैं और अंतिम परिणाम आना अभी बाकी है। लेकिन इतना तय है कि Maharashtra Nagar Nigam Election Result 2026 ने यह साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में राजनीतिक हवा किस दिशा में बह रही है। आने वाले घंटों में जब अंतिम नतीजे सामने आएंगे, तब यह तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mohan Yadav

AI Conference में CM Mohan Yadav का बड़ा बयान Yantra–Mantra–Tantra में उलझी दुनिया

देश में तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया के बीच एक अहम बयान सामने आया है। एक AI कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने बुद्धि (Intelligence) के तीन प्रकार बताते हुए समाज और टेक्नोलॉजी के रिश्ते पर गहरी बात रखी। उनका कहना था कि आज की दुनिया यंत्र, मंत्र और तंत्र में उलझ चुकी है और इन सब पर किसी न किसी तरह का षड्यंत्र हावी होता जा रहा है। क्या हैं बुद्धि के तीन प्रकार? CM Mohan Yadav के अनुसार, आधुनिक समाज तीन तरह की बुद्धि से संचालित हो रहा है: 1. यंत्र बुद्धि (Machine Intelligence)यह वह बुद्धि है जो मशीनों, कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में दिखाई देती है। तेज़ फैसले लेना, डेटा का विश्लेषण करना और काम को आसान बनाना इसकी पहचान है। 2. मंत्र बुद्धि (Mantra Intelligence)यह इंसान की सोच, विचार, संस्कृति और नैतिकता से जुड़ी होती है। यही वह ताकत है जो सही और गलत का फर्क बताती है और समाज को दिशा देती है। 3. तंत्र बुद्धि (System Intelligence)यह सरकार, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और संस्थाओं की व्यवस्था से जुड़ी बुद्धि है, जो पूरे समाज को चलाने का काम करती है। “इन पर षड्यंत्र भारी है” का मतलब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चिंता जताई कि आज इन तीनों शक्तियों – यंत्र, मंत्र और तंत्र – का उपयोग कई बार जनहित से ज़्यादा निजी फायदे और सत्ता के लिए किया जा रहा है।AI, डेटा और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लोगों को सशक्त बनाने के बजाय कभी-कभी उन्हें नियंत्रित करने या भ्रमित करने के लिए भी होने लगा है। यही वह “षड्यंत्र” है जिसकी ओर उन्होंने इशारा किया। AI कॉन्फ्रेंस में यह बात क्यों अहम है? आज जब AI हर क्षेत्र में घुस चुका है – शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और शासन तक – तब यह ज़रूरी हो जाता है कि टेक्नोलॉजी के साथ-साथ मानवीय मूल्य और नैतिक सोच भी आगे बढ़े। CM Mohan Yadav का साफ संदेश था कि अगर मशीनें तेज़ हैं तो इंसानों की सोच और भी जिम्मेदार होनी चाहिए। आगे का रास्ता उन्होंने कहा कि AI और टेक्नोलॉजी इंसान की मदद के लिए हों, उस पर हावी होने के लिए नहीं। अगर यंत्र और तंत्र को मंत्र यानी नैतिकता और विवेक से नहीं जोड़ा गया, तो समाज असंतुलन की ओर जा सकता है। CM Mohan Yadav का यह बयान सिर्फ़ टेक्नोलॉजी पर नहीं, बल्कि हमारे भविष्य पर भी एक अहम सवाल खड़ा करता है –क्या हम मशीनों को दिशा देंगे या मशीनें हमें चलाएंगी? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ED

ED vs I-PAC Case Supreme Court से Mamata Government को बड़ा झटका, FIR पर रोक

राजनीति और कानून के टकराव से निकला ED vs I-PAC मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट, के केंद्र में है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद में अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी (Enforcement Directorate) के अधिकारियों पर दर्ज FIR पर रोक लगा दी है। इस फैसले को ममता बनर्जी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। क्या है पूरा मामला? (What is ED vs I-PAC?) जनवरी की शुरुआत में ED ने कोलकाता में I-PAC (Indian Political Action Committee) से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई कथित कोयला घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी बताई गई।I-PAC वही संस्था है जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राजनीतिक रणनीति में सलाह देती रही है—यही वजह है कि मामला सीधे राजनीतिक बहस में बदल गया। छापेमारी के बाद बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों पर FIR दर्ज कर दी, आरोप लगाए गए कि छापे के दौरान अवैध तरीके अपनाए गए और डराने-धमकाने जैसी बातें हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? ED इस FIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला संवैधानिक और बेहद संवेदनशील है।अदालत ने: इसका सीधा मतलब है कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, ED अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। ED के गंभीर आरोप ED ने कोर्ट में दावा किया कि: ED का कहना है कि अगर राज्य पुलिस केंद्रीय एजेंसी की जांच रोकने लगे, तो कानून-व्यवस्था और न्याय दोनों खतरे में पड़ेंगे। ममता बनर्जी सरकार का पक्ष ममता बनर्जी और उनकी सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। उनका कहना है कि: TMC का दावा है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा रहा है। यह मामला इतना अहम क्यों है? क्योंकि यह सिर्फ एक छापेमारी नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों की शक्तियों की सीमा का सवाल बन चुका है।अगर राज्य पुलिस केंद्रीय एजेंसी पर केस दर्ज कर देती है, तो जांच का भविष्य क्या होगा—यही सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने है। ED vs I-PAC केस अब सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं रहा—यह संघीय ढांचे, चुनावी राजनीति और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।सुप्रीम कोर्ट का FIR पर रोक लगाना बताता है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह केस बंगाल की राजनीति और देश की संस्थागत व्यवस्था—दोनों पर असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने सी.आर.सी. भोपाल में दिव्यांगजनों के लिए पतंग महोत्सव में भाग लिया

सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने मकर संक्रांति के अवसर पर समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सी.आर.सी.), भोपाल में आयोजित दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, भारत सरकार द्वारा आयोजित पतंग महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर मंत्री ने दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों से संवाद किया और उन्हें पर्व की शुभकामनाएँ दीं। मकर संक्रांति: सामाजिक समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे आयोजनों से दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को बढ़ावा मिलता है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा हैं और उनके सशक्तिकरण, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। दिव्यांगजनों को वितरित किए गए सहायक उपकरण कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री सारंग ने दिव्यांगजनों को 03 बैटरी संचालित ट्राइसाइकिल और 02 टीचिंग लर्निंग मटेरियल (TLM) किट सहित अन्य सहायक उपकरण वितरित किए। उन्होंने कहा कि ये उपकरण दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन को सहज बनाने और उन्हें शिक्षा एवं स्वावलंबन की दिशा में प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सी.आर.सी., भोपाल परिसर का दौरा और गतिविधियों की जानकारी मंत्री श्री सारंग ने कार्यक्रम के बाद सी.आर.सी. परिसर का भ्रमण किया और संस्थान में संचालित विभिन्न पुनर्वास, शैक्षणिक और प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सी.आर.सी. भोपाल समावेशी विकास और दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है। आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश मंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सकारात्मक सोच किसी भी चुनौती को पार करने की कुंजी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे सशक्तिकरण के लिए सतत प्रयास करते रहें और समाज में अपने योगदान को बढ़ाएं। पतंग उत्सव में बच्चों का उत्साह कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों द्वारा पतंग निर्माण और पतंग उड़ाने की गतिविधियाँ उत्साहपूर्वक आयोजित की गईं। इन गतिविधियों से बच्चों में सृजनात्मकता, सहभागिता और आत्मविश्वास का विकास हुआ। बच्चों ने पूरे उत्साह और खुशी के साथ पर्व का आनंद लिया। इस अवसर पर सी.आर.सी., भोपाल के निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार, संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी, दिव्यांगजनों के अभिभावक और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

खंडवा में बैंक के कब्जे वाले मकान में घुसा परिवार, 4 पर केस दर्ज

खंडवा के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक जैन परिवार के खिलाफ जबरन कब्जे का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि बैंक द्वारा सील किए गए मकान में परिवार ने पीछे के दरवाजे से घुसकर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। 86 लाख का लोन नहीं चुकाया मामला सौमित्र नगर का है, जहां चंद्रकुमार जैन ने एयू बैंक से अपने मकान को गिरवी रखकर 86 लाख 67 हजार रुपए का लोन लिया था। लंबे समय तक लोन नहीं चुकाने पर बैंक ने संपत्ति को अपने आधिपत्य में लेकर मकान सील कर दिया था। कलेक्टर के आदेश पर बैंक को मिला कब्जा जानकारी के अनुसार, बैंक ने बकाया राशि को लेकर नोटिस जारी किए थे, लेकिन परिवार ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद मामला कलेक्टर तक पहुंचा, जहां से बैंक के पक्ष में आदेश जारी हुआ। तहसीलदार की मौजूदगी में बैंक को मकान का कब्जा दिलाया गया। पीछे के गेट से घुसकर कब्जे की कोशिश आरोप है कि इसके बावजूद जैन परिवार पीछे के रास्ते से मकान में घुस गया और दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। बैंक अधिकारियों ने इसकी शिकायत पुलिस से की। परिवार के 4 सदस्यों पर केस पुलिस ने शिकायत के आधार पर नवीन कुमार जैन, प्रवीण कुमार जैन, निर्मला जैन और चंद्रकुमार जैन के खिलाफ जबरन कब्जे की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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अब पेट्रोल में होगा बड़ा बदलाव! गाड़ियां चलेंगी ‘शराब वाले फ्यूल’ से

भारत सरकार ने पेट्रोल में 85% तक एथेनॉल मिलाने (E85 Fuel) का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। जानिए इसका आपकी गाड़ी, माइलेज और जेब पर क्या असर पड़ेगा। E85 Petrol: देश में फ्यूल सिस्टम बदलने की तैयारी भारत में अब पेट्रोल का खेल बदलने वाला है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) करने का बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस प्रस्ताव के तहत न सिर्फ E85 बल्कि E100 (100% एथेनॉल) फ्यूल को भी शामिल करने की तैयारी है, यानी आने वाले समय में गाड़ियां पूरी तरह “अल्कोहल बेस्ड फ्यूल” पर चल सकती हैं। क्या है E85 Fuel? (Simple भाषा में समझें) अब तक देश में E20 लागू हो चुका है, लेकिन सरकार इससे आगे बढ़कर E85 की दिशा में काम कर रही है। सरकार ऐसा क्यों कर रही है? इस फैसले के पीछे कई बड़े कारण हैं: 👉 तेल आयात पर निर्भरता कम करना👉 पेट्रोल खर्च घटाना👉 पर्यावरण को कम नुकसान (कम कार्बन उत्सर्जन)👉किसानों को फायदा (एथेनॉल गन्ना/मक्का से बनता है) भारत पहले ही E20 लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब अगला कदम E85 है। क्या आपकी गाड़ी में चलेगा E85? यह सबसे बड़ा सवाल है 👇 ❌ अभी की ज्यादातर गाड़ियां E85 के लिए तैयार नहीं हैं✔ इसके लिए Flex Fuel Vehicles (FFV) चाहिए होंगी✔ कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी लानी पड़ेगी यानी तुरंत बदलाव नहीं होगा, लेकिन आने वाले सालों में नई गाड़ियां इस हिसाब से डिजाइन होंगी। क्या होंगे इसके असर? गाड़ियों पर असर पेट्रोल पंप पर बदलाव आपकी जेब पर असर Auto कंपनियों की चिंता भी बढ़ी ऑटो इंडस्ट्री इस बदलाव को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं है। कंपनियों का कहना है कि: आगे क्या होगा? E85 Fuel भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।लेकिन सच यह भी है कि यह बदलाव धीरे-धीरे ही लागू होगा। 👉 अभी के लिए घबराने की जरूरत नहीं👉 लेकिन भविष्य में गाड़ी खरीदते समय “Flex Fuel” जरूर ध्यान में रखें

दलबदल मामले में हाईकोर्ट की सख्ती, 720 दिन की देरी पर सवाल

सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में दायर याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह याचिका नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की है, जिसमें उनकी विधायकी खत्म करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा और मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। “90 दिन में फैसला होना चाहिए, 720 दिन क्यों लगे?” चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दलबदल मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर निर्णय देने की समय सीमा तय की है। ऐसे में 720 दिन बीत जाने के बाद भी फैसला नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन स्पीकर के संज्ञान में लाई जाए। स्पीकर के पास लंबित है मामला महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले की सुनवाई विधानसभा स्पीकर के समक्ष जारी है और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच की जा रही है। वहीं उमंग सिंघार के वकील विभोर खंडेलवाल ने भी मांग की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 90 दिन की समय सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए। बीजेपी कार्यक्रम में दिखने के बाद बढ़ा विवाद दरअसल, निर्मला सप्रे ने 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ बीजेपी के मंच पर नजर आई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई थी। 5 जुलाई 2024 को उमंग सिंघार ने स्पीकर के समक्ष याचिका लगाकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की। जब इस पर फैसला नहीं हुआ, तो नवंबर 2024 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किए 12वीं बोर्ड के नतीजे

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस साल कुल 83.04% छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। टॉप-10 मेरिट लिस्ट में कुल 43 छात्रों ने जगह बनाई है। जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप बलौदाबाजार जिले के पलारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र जिज्ञासु वर्मा ने 98.60% अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर बेमेतरा जिले की छात्रा ओमनी वर्मा रहीं, जिन्होंने 98.20% अंक हासिल किए।तीसरे स्थान पर रायगढ़ जिले के छात्र कृष महंत रहे, जिनके 97.80% अंक आए। इन जिलों के छात्रों का दबदबा रायगढ़, जशपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और कांकेर जैसे जिलों के छात्रों ने टॉप-10 में जगह बनाई है। इससे साफ है कि छोटे शहरों के छात्र भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टॉपर्स को मिलेंगे 1.5 लाख रुपए राज्य सरकार ने टॉपर्स को 1.5 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। टॉपर जिज्ञासु वर्मा ने बताया कि वे आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहते हैं। उनके पिता एक किराना दुकान चलाते हैं। टॉप-10 स्टूडेंट्स लिस्ट (CGBSE 12th 2026) इन वेबसाइट्स पर देख सकते हैं रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट CGBSE की आधिकारिक वेबसाइट सहित कुल 9 वेबसाइट्स पर देख सकते हैं। (स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपना रोल नंबर तैयार रखें) 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
E85 Petrol

Petrol vs Ethanol: E85 Petrol Launch से बदल जाएगा India का Fuel System

भारत के फ्यूल सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है। केंद्र सरकार ने E85 Petrol(85% Ethanol + 15% Petrol) को लेकर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। अगर यह लागू होता है, तो आने वाले समय में हमारी गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल के बजाय ज्यादा “ग्रीन फ्यूल” पर दौड़ती नजर आ सकती हैं। यह सिर्फ एक टेक्निकल बदलाव नहीं है—बल्कि इसका असर आपकी जेब, किसानों की आय और देश की ऊर्जा नीति तक पड़ेगा। क्या है E85 Petrol? (Simple समझें) E85 एक हाई एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है, जिसमें: अभी भारत में E20 फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन E85 उससे कहीं आगे का स्टेप माना जा रहा है। सरकार का प्लान क्या है? सरकार चाहती है कि भारत धीरे-धीरे पेट्रोल-डिपेंडेंसी से बाहर निकले। इसी दिशा में: फिलहाल यह ड्राफ्ट स्टेज में है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। क्यों जरूरी है E85? (Big Reasons) 1. Import Bill होगा कम भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। एथेनॉल बढ़ने से यह खर्च कम हो सकता है 2. Pollution में कमी Ethanol एक क्लीनर फ्यूल है इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को राहत मिलेगी 3. Farmers को सीधा फायदा क्या आपकी Car E85 पर चल पाएगी? यहीं पर सबसे बड़ा ट्विस्ट है। हर गाड़ी E85 पर नहीं चल सकती मतलब साफ है—नई टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियां ही इस बदलाव का पूरा फायदा उठा पाएंगी। आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

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