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NEET UG Result

NEET UG Result 2026: Aryan Gupta-Panshul Bansal बने Topper, 715/720 Score से चमकाया नाम

NEET UG 2026 Result: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी हो गया है। लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए यह दिन बेहद खास रहा। लंबे समय की मेहनत, तैयारी और इंतजार के बाद अब छात्रों को अपने स्कोर और रैंक की जानकारी मिल गई है। इस साल 11.21 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने NEET UG परीक्षा में सफलता हासिल की है। रिजल्ट जारी होते ही देशभर में सफल छात्रों के चेहरों पर खुशी देखने को मिली। कई छात्रों ने अपनी मेहनत के दम पर शानदार स्कोर हासिल किया और मेडिकल कॉलेज में दाखिले की ओर अपना पहला कदम बढ़ाया। Punjab-Haryana के छात्रों का दबदबा, 715/720 अंक के साथ बने Topper NEET UG 2026 में इस बार टॉप रैंक पर पंजाब और हरियाणा के छात्रों ने अपनी जगह बनाई है। Punjab के Aryan Gupta और Haryana के Panshul Bansal ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है। दोनों छात्रों ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर देशभर में शानदार प्रदर्शन किया। टॉपर्स की इस सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, बेहतर टाइम मैनेजमेंट और परीक्षा की सही रणनीति को अहम वजह माना जा रहा है। उनकी उपलब्धि NEET की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है। 690+ Score करने वाले छात्रों की संख्या भी रही शानदार NEET UG 2026 के परिणामों में हाई स्कोर करने वाले उम्मीदवारों की संख्या भी काफी अधिक रही। इस बार 138 छात्रों ने 690 या उससे ज्यादा अंक हासिल किए हैं। वहीं कई उम्मीदवारों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी मजबूत तैयारी का प्रदर्शन किया। 720 अंकों की परीक्षा में इतने बड़े स्कोर हासिल करना छात्रों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कठिन मेहनत को दिखाता है। 11 लाख से ज्यादा छात्रों का Medical College Admission का रास्ता साफ NEET UG परीक्षा के जरिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन मिलता है। रिजल्ट जारी होने के बाद अब सफल उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया यानी Counselling और Seat Allotment का इंतजार रहेगा। काउंसलिंग के दौरान छात्रों को उनकी रैंक, कैटेगरी और उपलब्ध सीटों के आधार पर मेडिकल कॉलेज चुनने का मौका मिलेगा। Students की मेहनत का मिला फल, परिवारों में खुशी का माहौल NEET जैसी कठिन परीक्षा को पास करना हर मेडिकल उम्मीदवार का सपना होता है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी सफलता की कहानी साझा की और बताया कि लगातार पढ़ाई, धैर्य और परिवार के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। वहीं, जिन छात्रों को उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले हैं, उनके लिए भी आगे कई अवसर मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक परीक्षा किसी छात्र की पूरी क्षमता तय नहीं करती। Result Highlights NEET UG 2026: लाखों युवाओं के डॉक्टर बनने की राह हुई आसान NEET UG का रिजल्ट सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्रों की मेहनत का नतीजा है जिन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा है। टॉपर्स की सफलता से लेकर लाखों छात्रों की खुशी तक, इस बार का रिजल्ट कई यादगार कहानियां लेकर आया है। अब सभी सफल उम्मीदवारों की नजर मेडिकल कॉलेज एडमिशन और नई शुरुआत पर है। आने वाले दिनों में काउंसलिंग प्रक्रिया के साथ छात्रों के डॉक्टर बनने के सफर की अगली शुरुआत होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hormuz Strait

Hormuz Strait Alert: भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा कदम, नई पोस्टिंग पर रोक

Hormuz Strait Crisis के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने शिपिंग कंपनियों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और क्रू भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर नए भारतीय नाविकों (Indian Seafarers) की तैनाती न की जाए। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और हालिया समुद्री हमलों को देखते हुए यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया है। क्यों लिया गया यह फैसला? बीते कुछ समय से होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने समुद्री क्षेत्र से जुड़ी सभी कंपनियों को नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक भारतीय नाविकों को इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नियुक्त करने से बचा जाए। भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह एहतियाती है। किसी भी भारतीय नागरिक की जान जोखिम में न पड़े, इसलिए पहले से ही सावधानी बरती जा रही है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी नए निर्देश जारी किए जा सकते हैं। हालिया हमलों के बाद बढ़ी चिंता हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाज हमलों का निशाना बने हैं। इन घटनाओं में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए। इन हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा की ओर खींचा है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने शिपिंग सेक्टर के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन जारी करते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। जहाजों को भी दिए गए हाई अलर्ट निर्देश सरकार ने केवल नई तैनाती रोकने का फैसला नहीं लिया, बल्कि इस क्षेत्र में पहले से संचालित जहाजों को भी हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। जहाजों के कप्तानों और ऑपरेटरों से कहा गया है कि वे समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की एडवाइजरी का पालन करें, नेविगेशन अलर्ट पर लगातार नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। हजारों भारतीय नाविक अब भी क्षेत्र में कार्यरत भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय कार्गो और तेल टैंकरों पर काम करते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हजारों भारतीय नाविक अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में विभिन्न जहाजों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सभी संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। क्यों महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या समुद्री यातायात प्रभावित होता है, तो इसका असर केवल शिपिंग उद्योग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra: उज्जैन में रचा इतिहास, पहली बार जगन्नाथ-बलभद्र-सुभद्रा के लिए तैयार हुए 3 अलग-अलग रथ

उज्जैन में इस बार Jagannath Rath Yatra 2026 आस्था, परंपरा और भव्यता का अद्भुत संगम बन गई। धार्मिक नगरी में पहली बार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथ यात्रा तीन अलग-अलग रथों पर निकाली गई। हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने और पूरा शहर जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंज उठा। इस भव्य यात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ का 35 फीट ऊंचा नंदीघोष रथ (Nandighosh Rath) रहा। आकर्षक सजावट और पारंपरिक शैली में तैयार किए गए इस विशाल रथ पर भगवान जगन्नाथ विराजमान हुए। रथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त सड़क किनारे मौजूद रहे और भगवान की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। ढाई लाख की खास पोशाक में सजे भगवान जगन्नाथ इस बार भगवान जगन्नाथ का श्रृंगार भी बेहद खास रहा। प्रभु को पहनाई गई विशेष पोशाक को जापानी धागों, मोतियों और बारीक कारीगरी से तैयार किया गया है। इस पोशाक की कीमत करीब 2.5 लाख रुपये बताई जा रही है। पोशाक में पारंपरिक डिजाइन के साथ आधुनिक कारीगरी का सुंदर मेल देखने को मिला। भगवान के इस दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्तों ने इसे रथ यात्रा का सबसे आकर्षक पल बताया। Ujjain में पहली बार 3 Rath Yatra का आयोजन उज्जैन में पहली बार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए अलग-अलग रथ तैयार किए गए। इससे यात्रा का स्वरूप पहले से ज्यादा भव्य दिखाई दिया। आयोजन समिति की ओर से यात्रा को सफल बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। रथों की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई स्तरों पर तैयारियां की गईं। यात्रा मार्ग पर भक्तों ने फूलों की बारिश कर भगवान का स्वागत किया। भक्ति में डूबा उज्जैन, हजारों भक्त बने साक्षी रथ यात्रा के दौरान उज्जैन का माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचते नजर आए। लोगों ने भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। उज्जैन की यह Jagannath Rath Yatra न सिर्फ धार्मिक आयोजन रही, बल्कि शहर की संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक बनी। तीन रथों पर निकली यह यात्रा आने वाले वर्षों में भी श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार आयोजन के रूप में याद की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Koel Mallick

West Bengal Politics Update: Koel Mallick Resigns, TMC के सामने खड़ी हुई नई चुनौती

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक (Koel Mallick) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कोयल मल्लिक के इस्तीफे को टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब टीएमसी के अंदर संगठन और नेतृत्व को लेकर कई मुद्दे चर्चा में हैं। पार्टी पहले ही कुछ नेताओं के रुख बदलने और अंदरूनी मतभेदों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में एक राज्यसभा सांसद का पद छोड़ना पार्टी के लिए चिंता बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। Koel Mallick Resignation: TMC के लिए क्यों अहम है यह झटका? कोयल मल्लिक बंगाली फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम रही हैं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने टीएमसी के साथ अपनी नई पारी शुरू की और पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। उनकी पहचान सिर्फ एक सांसद के तौर पर ही नहीं, बल्कि बंगाल के सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े चेहरे के रूप में भी रही है। उनके इस्तीफे से टीएमसी को संसद के उच्च सदन में एक सीट का नुकसान हुआ है। साथ ही पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। Mamata Banerjee की बढ़ी मुश्किलें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए पिछले कुछ समय से पार्टी को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है। बंगाल की राजनीति में लगातार बदलते समीकरणों के बीच नेताओं के फैसले पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कोयल मल्लिक का इस्तीफा केवल एक सांसद का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह टीएमसी के अंदर चल रहे बदलावों की ओर भी इशारा कर सकता है। हालांकि, कोयल मल्लिक के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। West Bengal Politics में बढ़ी हलचल कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। टीएमसी अब इस नुकसान को कैसे संभालती है और पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोयल मल्लिक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या फैसला लेती हैं और क्या उनका यह कदम बंगाल के सियासी समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव लाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delimitation Bill

Congress Strategy on Delimitation Bill: परिसीमन बिल को लेकर पार्टी की हाईलेवल मीटिंग

परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति को धार देने के लिए बुधवार को बड़ी बैठक की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस बैठक में शामिल हुए। बैठक में परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े राजनीतिक, संवैधानिक और चुनावी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर नजर आ रही है, क्योंकि भविष्य में होने वाले लोकसभा सीटों के पुनर्गठन (Lok Sabha Seat Reorganisation) का असर देश की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। Delimitation Bill को लेकर कांग्रेस की क्या चिंता है? कांग्रेस नेताओं का मानना है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है तो उन राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, जिन्होंने पिछले वर्षों में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतर काम किया है। पार्टी खासतौर पर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को सामने रख रही है। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी परिसीमन प्रक्रिया में सभी राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कम न हो। Rahul Gandhi और Kharge ने नेताओं के साथ बनाई रणनीति बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी नेताओं से इस मुद्दे पर राय ली। कांग्रेस की कोशिश है कि संसद के अंदर और बाहर परिसीमन बिल को लेकर अपनी स्थिति मजबूती से रखी जाए। पार्टी इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत कर सकती है, ताकि एक साझा रणनीति तैयार की जा सके। Women Reservation और सीटों के समीकरण पर भी चर्चा परिसीमन के साथ महिला आरक्षण कानून (Women Reservation Law) और नई लोकसभा सीटों के संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने के साथ-साथ राज्यों के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक संतुलन का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। Election Strategy के लिए अहम मुद्दा कांग्रेस के लिए परिसीमन का मुद्दा आने वाले चुनावों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी इसे संविधान, राज्यों के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। बैठक के बाद कांग्रेस जल्द ही Delimitation Bill को लेकर अपनी आगे की रणनीति और राजनीतिक रुख स्पष्ट कर सकती है। वहीं, इस पूरे मामले पर अब सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Price Today: 24K Gold ₹1.42 लाख के करीब, Silver ₹2.20 लाख पहुंची

देश में Gold Silver Price Today को लेकर बाजार में हलचल बनी हुई है। गुरुवार को सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली, जबकि चांदी ने तेजी पकड़ ली। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹189 गिरकर ₹1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Silver Price में ₹680 की बढ़ोतरी दर्ज की गई और चांदी का भाव करीब ₹2.20 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गया। सोना-चांदी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह बदलाव अहम है, क्योंकि छोटी सी गिरावट या बढ़ोतरी भी बड़ी खरीदारी पर काफी असर डालती है। खासकर शादी-ब्याह और निवेश के लिए सोना खरीदने वाले लोग लगातार बाजार के रुख पर नजर बनाए हुए हैं। Gold Rate Today: 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने का भाव सोने की कीमत उसकी शुद्धता यानी Carat के हिसाब से तय होती है। बाजार में सबसे ज्यादा मांग 24 कैरेट और 22 कैरेट गोल्ड की रहती है। 24K Gold को सबसे शुद्ध माना जाता है और इसका इस्तेमाल ज्यादातर निवेश के लिए किया जाता है। वहीं 22K Gold से ज्वेलरी तैयार की जाती है क्योंकि यह ज्यादा मजबूत होता है। Silver Price Today: चांदी की कीमतों में उछाल सोने में जहां मामूली गिरावट आई, वहीं चांदी की चमक बढ़ती नजर आई। Silver Price Today में करीब ₹680 की तेजी दर्ज की गई और चांदी ₹2.20 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे औद्योगिक मांग, वैश्विक बाजार की स्थिति और निवेशकों की बढ़ती रुचि को प्रमुख कारण माना जा रहा है। Gold Price में उतार-चढ़ाव क्यों जारी है? सोने और चांदी की कीमतें सिर्फ घरेलू मांग से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कई कारणों से प्रभावित होती हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखते हैं। खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है: क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? सोने की कीमतें अभी भी रिकॉर्ड स्तरों के आसपास बनी हुई हैं। ऐसे में निवेशकों और ग्राहकों को बाजार की चाल समझकर फैसला लेना चाहिए। छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, जबकि लंबे समय के निवेश के लिए सोने को अब भी एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Share Market

Share Market Today: निवेशकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, Sensex-Nifty में बढ़त

भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में गुरुवार को कारोबार के दौरान सकारात्मक माहौल देखने को मिला। Sensex करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 77,400 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 50 अंकों की तेजी दर्ज की गई। बाजार में इस तेजी के पीछे IT और Media सेक्टर के शेयरों में हुई मजबूत खरीदारी को अहम वजह माना जा रहा है। सुबह से ही बाजार में निवेशकों का रुख थोड़ा उत्साहित नजर आया। लंबे समय से उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार कर रहे निवेशकों को आज IT कंपनियों और मीडिया स्टॉक्स में बेहतर अवसर दिखाई दिए, जिसके चलते इन सेक्टर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी। IT Stocks में तेजी, टेक सेक्टर को मिला सपोर्ट आज के कारोबार में IT Stocks में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में मांग बढ़ने और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से आने वाले समय में इस क्षेत्र को फायदा मिल सकता है। IT शेयरों में आई मजबूती ने बाजार के सेंटीमेंट को भी सकारात्मक बनाया। Media Stocks में भी दिखी बढ़त IT के साथ-साथ Media Stocks में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। मीडिया कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के कारण सेक्टर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर जाने में मदद की। Global Market Signals पर निवेशकों की नजर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल संकेतों की अहम भूमिका बनी हुई है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर-रुपये की चाल पर निवेशक लगातार नजर बनाए हुए हैं। आगे कैसी रह सकती है Market की चाल? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बचते हुए मजबूत कंपनियों और अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल Sensex और Nifty में आई तेजी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Petrol

Diesel ATF Export Duty Hike: सरकार का बड़ा फैसला, Petrol Export Duty में कटौती

देश में Petrol की सप्लाई को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ा दी है, जबकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी दरें 16 जुलाई से लागू हो गई हैं। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना और बाजार में फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखना है। Diesel और ATF Export Duty में बढ़ोतरी क्यों? सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है। डीजल देश के परिवहन क्षेत्र, उद्योगों और कृषि गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण ईंधन है, जबकि ATF विमानन सेक्टर की जरूरतों को पूरा करता है। सरकार चाहती है कि तेल कंपनियां पहले घरेलू बाजार की मांग को पूरा करें, ताकि देश में ईंधन की कमी जैसी स्थिति पैदा न हो। बढ़ी हुई एक्सपोर्ट ड्यूटी से कंपनियों के लिए विदेशों में इन उत्पादों की बिक्री पहले की तुलना में महंगी हो सकती है। Petrol Export Duty हुई कम, क्या बदलेगा? जहां डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है। सरकार का यह फैसला पेट्रोलियम सेक्टर में संतुलन बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की मांग, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू जरूरतों को देखते हुए सरकार समय-समय पर एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव करती रहती है। Fuel Supply को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी भारत अपनी जरूरतों के लिए कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर आयात करता है और उसे रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार करता है। ऐसे में घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना सरकार की बड़ी प्राथमिकता है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी व्यवस्था के जरिए सरकार घरेलू खपत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बनाना चाहती है। आम लोगों पर पड़ेगा क्या असर? इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की संभावना कम है। एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का मुख्य प्रभाव तेल कंपनियों और निर्यातकों पर पड़ेगा। हालांकि, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी बाजार की स्थिति और रुपये की मजबूती के आधार पर ईंधन कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। 16 July से लागू हुई नई दरें सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था 16 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है। अब तेल कंपनियों को नई एक्सपोर्ट ड्यूटी के अनुसार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की Energy Security को मजबूत करने और घरेलू बाजार में फ्यूल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD

IMD Weather UP-Bihar के 18 जिलों में Heavy Rain Alert, Assam-Arunachal में बाढ़ का संकट

देश में मानसून इस समय दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक ओर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दूसरी तरफ असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। UP-Bihar में Heavy Rain का Alert मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। Assam Flood: 99 गांव पानी में डूबे असम में लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राज्य के 99 गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी तथा स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। Arunachal Pradesh में 1 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित अरुणाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई नदियां उफान पर हैं और कई सड़कें बंद होने से गांवों का संपर्क टूट गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब एक लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। MP के 35 जिलों में बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता जहां देश के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी IMD ने भारी बारिश वाले राज्यों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में जिन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। एक ही मानसून, लेकिन अलग-अलग तस्वीर इस बार मानसून ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग असर दिखाया है। पूर्वोत्तर, उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग बाढ़ और भारी बारिश से जूझ रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के कई किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मौसम का यह असंतुलन सिर्फ आम जनजीवन ही नहीं, बल्कि खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की चाल कैसी रहती है, इस पर लाखों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन, राहत एजेंसियां और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपदा से समय रहते निपटा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rohingya

Bay of Bengal Boat Accident: Rohingya शरणार्थियों से भरी दो नावें डूबीं, UN ने जताई गहरी चिंता

Rohingya Boat Tragedy ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर दिया है। सुरक्षित जीवन की तलाश में समुद्र का रास्ता चुनने वाले सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया। संयुक्त राष्ट्र (UN) की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में दो अलग-अलग नाव हादसों में 500 से अधिक लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। अगर यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री मानवीय त्रासदियों में गिना जाएगा। समुद्र में गायब हुईं दो नावें संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के रखाइन राज्य और बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों से रवाना हुई थीं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक नाव समुद्र में निकलने के कुछ समय बाद ही लापता हो गई, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास खराब मौसम के बीच पलट गई। शुरुआती आकलन में दोनों हादसों में 500 से ज्यादा लोगों के डूबने की आशंका जताई गई है। राहत एजेंसियां अभी भी लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। आखिर क्यों समुद्र का खतरनाक रास्ता चुन रहे हैं रोहिंग्या? रोहिंग्या समुदाय कई वर्षों से म्यांमार में हिंसा, भेदभाव और नागरिकता से जुड़े संकट का सामना कर रहा है। 2017 में बड़े पैमाने पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे, जहां वे आज भी शरणार्थी शिविरों में सीमित संसाधनों के बीच जीवन गुजार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खराब होती आर्थिक स्थिति, रोजगार की कमी, घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लोगों को मानव तस्करों के भरोसे समुद्री रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रही है। यह सफर जितना लंबा होता है, उतना ही जानलेवा भी साबित होता है। मानसून बना सबसे बड़ा खतरा बंगाल की खाड़ी में इस समय मानसून का मौसम चल रहा है। तेज हवाएं, ऊंची लहरें और लगातार खराब मौसम छोटी नावों के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। इसके बावजूद तस्कर ओवरलोडेड नावों में लोगों को समुद्र के रास्ते भेजते हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। UN ने जताई गंभीर चिंता संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए क्षेत्र के देशों से अपील की है कि समुद्र में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान तेज किए जाएं। साथ ही मानव तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सुरक्षित एवं कानूनी रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। UN का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में ऐसे हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। Rohingya Crisis पर फिर उठे बड़े सवाल यह हादसा केवल दो नावों के डूबने की घटना नहीं है, बल्कि उस मानवीय संकट की तस्वीर है जो वर्षों से दुनिया के सामने मौजूद है। जब तक म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के लिए सुरक्षित माहौल, नागरिक अधिकार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र के रास्ते पलायन करने को मजबूर रहेंगे। फिलहाल राहत एजेंसियां मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि करने में जुटी हैं। वहीं इस त्रासदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रोहिंग्या संकट का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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भारत ने चीन को 1-0 से हराकर जीता जूनियर विमेंस एशिया कप 2026, लगातार तीसरी बार बना चैंपियन

भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जूनियर विमेंस एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। रविवार को चीन के मोकी में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने मेजबान चीन को 1-0 से मात दी। भारत की ओर से सानिका चंद्रकांत माने ने 17वें मिनट में गोल किया, जो पूरे मैच का निर्णायक गोल साबित हुआ। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में लगातार तीसरी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इसके अलावा भारत ने FIH जूनियर वर्ल्ड कप के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है। हर खिलाड़ी को 3 लाख रुपये का इनाम खिताब जीतते ही हॉकी इंडिया ने भारतीय टीम की खिलाड़ियों के लिए बड़ा इनाम घोषित किया। टीम की हर खिलाड़ी को 3 लाख रुपये का कैश प्राइज दिया जाएगा। इसके अलावा सपोर्ट स्टाफ के लिए भी नकद पुरस्कार की घोषणा की गई है। पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही भारतीय टीम भारत ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया और एक भी मुकाबला नहीं गंवाया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को 5-1 से हराया था, जबकि क्वार्टर फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 19-0 की बड़ी जीत दर्ज की। ग्रुप चरण में भारत का चीन के साथ मुकाबला 0-0 से ड्रॉ रहा था। इसके बाद टीम ने जापान को 7-0 और मलेशिया को 11-1 से करारी शिकस्त दी। टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबले में भी भारत ने साउथ कोरिया को 4-1 से हराया था। साउथ कोरिया के नाम सबसे ज्यादा खिताब जूनियर विमेंस एशिया कप के इतिहास में साउथ कोरिया सबसे सफल टीम रही है। उसने अब तक 4 बार खिताब जीता है। भारत और चीन के नाम 3-3 खिताब हैं। भारत ने इससे पहले 2023 और 2024 में भी खिताब जीता था और अब 2026 में लगातार तीसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की है। चीन इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 6 बार रनर-अप रह चुका है। वहीं जापान अब तक खिताब नहीं जीत सका है, लेकिन टीम 3 बार तीसरे स्थान पर रही है।
Congress Gen-Z Connect: इंदौर में युवाओं को जोड़ने की तैयारी, 19 सितंबर को Rahul Gandhi से संवाद

Congress Gen-Z Connect: इंदौर में युवाओं को जोड़ने की तैयारी, 19 सितंबर को Rahul Gandhi से संवाद

मध्य प्रदेश में कांग्रेस अब Gen-Z Connect पर खास फोकस करती नजर आ रही है। पार्टी ने युवाओं और खासकर छात्रों के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए इंदौर में एक स्पेशल टीम को सक्रिय किया है। इसी अभियान के तहत 19 सितंबर को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है, जिसमें कांग्रेस नेता Rahul Gandhi छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोजन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए म्यूजिक और एंटरटेनमेंट का भी सहारा लिया जा रहा है। Rahul Gandhi से छात्रों का सीधा संवाद 19 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में राहुल गांधी के सामने बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं की मौजूदगी रहने की बात कही जा रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और उनकी राय को सीधे सुनना बताया जा रहा है। कांग्रेस की रणनीति में इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के साथ संवाद बढ़ाना अहम हिस्सा बनता जा रहा है। Raghav Chaitanya और Rapper Lash-Kari देंगे Performance कार्यक्रम को सिर्फ राजनीतिक सभा तक सीमित नहीं रखा गया है। युवाओं को जोड़ने के लिए Raghav Chaitanya और Rapper Lash-Kari की Performance भी रखी गई है। म्यूजिक और लाइव परफॉर्मेंस के जरिए कार्यक्रम को युवाओं के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस की स्पेशल टीम इसी तरह के Format के जरिए Gen-Z तक पहुंच बनाने पर काम कर रही है। इंदौर में कांग्रेस का Gen-Z Focus कांग्रेस की कोशिश है कि युवाओं के साथ संवाद सिर्फ चुनावी दौर तक सीमित न रहे। कॉलेज स्टूडेंट्स, युवा प्रोफेशनल्स और पहली बार वोट करने वाले युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए पार्टी नए त
Swine Flu in Bhopal: 12 दिन में 45 मरीज, पहली मौत; कुल केस 65 पहुंचे

Swine Flu in Bhopal: 12 दिन में 45 मरीज, पहली मौत; कुल केस 65 पहुंचे

भोपाल में Swine Flu को लेकर चिंता बढ़ गई है। शहर में स्वाइन फ्लू से पहली मौत सामने आने की खबर है। बताया जा रहा है कि पिछले 12 दिनों में ही 45 नए मरीज मिले हैं। इसके साथ ही भोपाल में स्वाइन फ्लू के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है। मरीजों की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी बढ़ गई है। खास बात यह है कि स्वाइन फ्लू की जांच फिलहाल AIIMS Bhopal में ही होने की जानकारी सामने आई है। 12 दिन में मिले 45 नए मरीज जानकारी के मुताबिक, पिछले 12 दिनों में स्वाइन फ्लू के 45 नए मामले सामने आए हैं। इससे पहले भी शहर में कुछ मरीजों की पुष्टि हो चुकी थी। नए मामलों के बाद कुल संख्या 65 तक पहुंच गई है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर जिन लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, उन्हें लापरवाही नहीं करनी चाहिए। भोपाल में Swine Flu से पहली मौत स्वाइन फ्लू से भोपाल में पहली मौत की खबर सामने आने के बाद चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, किसी मरीज की स्थिति को लेकर सही जानकारी के लिए स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल की आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है। फ्लू से जुड़े मामलों में समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण रहती है। जांच सिर्फ AIIMS में होने की जानकारी रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा फिलहाल AIIMS Bhopal में उपलब्ध है। ऐसे में संदिग्ध मरीजों की जांच और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते मामलों का कितना असर पड़ रहा है और जांच की सुविधा को आगे बढ़ाया जाएगा या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर है। किन लक्षणों पर रहें Alert? स्वाइन फ्लू एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा संक्रमण है। इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में बीमारी ज्यादा गंभीर भी हो सकती है। अगर फ्लू जैसे लक्षण लगातार बने रहें या हालत बिगड़ती महसूस हो, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
Top Jobs This Week: MP में कॉन्स्टेबल समेत 7500 पदों पर भर्ती, RRB NTPC में 5165 वैकेंसी

Top Jobs This Week: MP में कॉन्स्टेबल समेत 7500 पदों पर भर्ती, RRB NTPC में 5165 वैकेंसी

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह हफ्ता काफी अहम रहा। अलग-अलग विभागों और भर्ती बोर्डों की ओर से हजारों पदों पर Government Jobs के नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं। इस सप्ताह करीब 17,697 पदों पर भर्तियां सामने आई हैं। इनमें मध्य प्रदेश में कॉन्स्टेबल समेत करीब 7,500 पदों पर भर्ती और RRB NTPC में 5,165 वैकेंसी जैसी बड़ी भर्तियां शामिल हैं। अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो इन भर्तियों की योग्यता, आवेदन की आखिरी तारीख और Official Notification जरूर देख लें। MP में कॉन्स्टेबल समेत 7,500 पदों पर मौका मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी भर्ती सामने आई है। राज्य में कॉन्स्टेबल समेत अलग-अलग पदों पर करीब 7,500 वैकेंसी निकली हैं। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा अलग-अलग हो सकती है। उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले संबंधित भर्ती का नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासकर पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है। RRB NTPC में 5,165 पदों पर भर्ती रेलवे में नौकरी का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए भी इस सप्ताह अच्छी खबर आई। Railway Recruitment Board (RRB) की NTPC भर्ती में कुल 5,165 पदों पर वैकेंसी निकली है। रेलवे की नौकरी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहती है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार हर साल RRB की परीक्षाओं में शामिल होते हैं। NTPC भर्ती में आवेदन करने से पहले उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक योग्यता, उम्र और अन्य पात्रता शर्तों को जरूर जांच लें।
Women’s Asia Cup 2026 Final: 2024 की हार का बदला लेने उतरेगी Team India, श्रीलंका से फिर खिताबी मुकाबला

Women’s Asia Cup 2026 Final: 2024 की हार का बदला लेने उतरेगी Team India, श्रीलंका से फिर खिताबी मुकाबला

महिला एशिया कप 2026 का फाइनल आज भारत और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा। दो साल पहले इसी टूर्नामेंट के फाइनल में श्रीलंका ने भारत को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम किया था। अब Team India के पास उस हार का हिसाब बराबर करने और ट्रॉफी वापस जीतने का मौका है। भारत ने इस टूर्नामेंट में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है और एक भी मुकाबला नहीं गंवाया। वहीं श्रीलंका भी अजेय रहते हुए फाइनल तक पहुंचा है। ऐसे में आज का मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद अहम होने वाला है। 2024 के फाइनल की हार अभी भी याद 2024 के Women’s Asia Cup Final में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 165 रन बनाए थे। जवाब में श्रीलंका ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए लक्ष्य हासिल कर लिया था और 8 विकेट से मुकाबला जीतकर अपना पहला महिला एशिया कप खिताब जीता था। उस मैच में चमारी अट्टापट्टू और हर्षिता समरविक्रमा ने श्रीलंका की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। इस बार भारतीय टीम के सामने वही टीम फिर खड़ी है। इस बार Team India का शानदार सफर 2026 एशिया कप में भारतीय महिला टीम ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत ने ग्रुप स्टेज में अपने सभी मुकाबले जीते और सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 40 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई। भारत की बल्लेबाजी में शैफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने शानदार प्रदर्शन किया है। वहीं गेंदबाजी में दीप्ति शर्मा ने भी अपनी छाप छोड़ी है। शैफाली ने टूर्नामेंट में 168 रन और स्मृति ने 154 रन बनाए हैं, जबकि दीप्ति के नाम 11 विकेट हैं। श्रीलंका भी नहीं हारा एक भी मैच दूसरी तरफ श्रीलंका ने भी इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। टीम ने पाकिस्तान को सेमीफाइनल में 4 विकेट से हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया। शुरुआती झटकों के बाद श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने धैर्य दिखाया और टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान चमारी अट्टापट्टू श्रीलंका की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल हैं। भारतीय गेंदबाजों को उनके साथ-साथ हर्षिता समरविक्रमा से भी सावधान रहना होगा। भारत के पास आठवीं बार चैंपियन बनने का मौका भारत महिला एशिया कप का सबसे सफल देश है और अब टीम की नजर रिकॉर्ड आठवें खिताब पर है। दूसरी ओर श्रीलंका मौजूदा चैंपियन है और लगातार दूसरी बार ट्रॉफी जीतने के इरादे से मैदान पर उतरेगा। दोनों टीमों की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए मुकाबला रोमांचक होने की उम्मीद है। भारत के सामने जहां 2024 की हार का बदला लेने का मौका है, वहीं श्रीलंका अपने खिताब को बचाने की कोशिश करेगा।

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