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Gold Price

Gold Price Today India: सोना हुआ सस्ता तो चांदी चमकी, जानें आने वाले दिनों में कीमतों का हाल

सोने-चांदी की खरीदारी करने वालों के लिए आज बाजार से मिली-जुली खबर सामने आई है। एक तरफ जहां Gold Price में गिरावट देखने को मिली है, वहीं दूसरी ओर Silver Rate लगातार तेजी पकड़ रहा है। सोने की कीमत करीब ₹476 घटकर ₹1.42 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर आ गई है, जबकि चांदी ₹849 महंगी होकर ₹2.19 लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है। कीमती धातुओं के बाजार में यह बदलाव निवेशकों के साथ-साथ आम ग्राहकों के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। खासतौर पर चांदी की तेज रफ्तार ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में चांदी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। Gold Price Today: सोने के भाव में गिरावट क्यों आई? सोने की कीमतों में आई गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेत और निवेशकों की बदलती रणनीति को बड़ी वजह माना जा रहा है। सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद विकल्प रहा है, लेकिन फिलहाल कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिल रही है। बाजार जानकारों के मुताबिक, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक हालात और ब्याज दरों से जुड़े फैसले सोने की कीमतों पर सीधा असर डालते हैं। हालांकि, लंबी अवधि में सोने की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। Silver Price Today: चांदी की चमक लगातार बढ़ी दूसरी ओर Silver Price में तेजी का दौर जारी है। चांदी की कीमत ₹849 बढ़कर ₹2.19 लाख रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण चांदी को लगातार सपोर्ट मिल रहा है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में चांदी की बढ़ती जरूरत इसकी कीमतों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभा रही है। यही कारण है कि निवेशकों की नजर अब चांदी पर भी बनी हुई है। Silver Rate Target: क्या ₹2.80 लाख तक पहुंच सकती है चांदी? मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर वैश्विक मांग मजबूत रहती है और इंडस्ट्रियल सेक्टर में तेजी जारी रहती है, तो चांदी इस साल ₹2.80 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर तक पहुंच सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश में जोखिम जुड़ा होता है। इसलिए निवेशकों को बाजार की स्थिति को समझकर ही फैसला लेना चाहिए। Gold vs Silver Investment: कहां निवेश करना बेहतर? सोने को आमतौर पर स्थिर और सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि चांदी में तेजी के साथ-साथ उतार-चढ़ाव भी ज्यादा देखने को मिलता है। जिन लोगों का लक्ष्य लंबे समय के लिए निवेश करना है, वे दोनों धातुओं में संतुलित निवेश की रणनीति अपना सकते हैं। अगर आप गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कीमतों में होने वाले बदलाव पर नजर रखना फायदेमंद हो सकता है। वहीं, निवेश के लिए खरीदारी करने वालों को जल्दबाजी के बजाय सही समय का इंतजार करना चाहिए। Gold Silver Market Outlook फिलहाल बुलियन मार्केट में सोना थोड़ा कमजोर और चांदी मजबूत नजर आ रही है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान, महंगाई के आंकड़े और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां Gold और Silver की कीमतों की दिशा तय करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk,

Sonam Wangchuk Hunger Strike: लद्दाख के मुद्दे पर जारी आंदोलन, 3 Idiots के Omi Vaidya ने जताई चिंता

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk (सोनम वांगचुक) की Hunger Strike (भूख हड़ताल) का आज 17वां दिन है। लद्दाख के अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे इस आंदोलन ने अब देशभर में चर्चा तेज कर दी है। लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में चिंता बढ़ती जा रही है। इस बीच बॉलीवुड से भी उनके समर्थन में आवाजें उठने लगी हैं। फिल्म 3 Idiots में ‘चतुर रामलिंगम’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता Omi Vaidya (ओमी वैद्य) ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि सोनम वांगचुक को किसी तरह का नुकसान पहुंचे और इस मामले का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए। Zeenat Aman ने भी की Government से बातचीत की अपील दिग्गज अभिनेत्री Zeenat Aman (जीनत अमान) ने भी सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत कर इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश करे। क्यों कर रहे हैं Sonam Wangchuk Protest? सोनम वांगचुक लद्दाख के लोगों के लिए कई अहम मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की Sixth Schedule (छठी अनुसूची) के तहत सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा शामिल है। उनका कहना है कि लद्दाख की अलग भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यहां के लोगों के हितों की सुरक्षा जरूरी है। 17 दिनों के अनशन से बढ़ी चिंता लगातार 17 दिनों से जारी भूख हड़ताल के चलते सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द बातचीत शुरू करनी चाहिए। वहीं, सोनम वांगचुक लगातार अपने आंदोलन के जरिए लद्दाख के पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने रख रहे हैं। Social Media पर भी छाया Ladakh Movement सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है। कई लोग उनके मुद्दों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत को सबसे बेहतर रास्ता बता रहे हैं। 3 Idiots फिल्म के बाद सोनम वांगचुक पहले से ही युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं। शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके काम को लेकर उन्हें देशभर में पहचान मिली है। अब आगे क्या? सोनम वांगचुक की Hunger Strike के 17वें दिन पहुंचने के बाद सभी की नजरें सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले का कोई सकारात्मक रास्ता निकलेगा, जिससे लद्दाख से जुड़े मुद्दों का समाधान हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Govind Giri

मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: Govind Giri का बड़ा दावा, बोले- गलत बताए जा रहे चोरी के आंकड़े

मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर अब गोविंद गिरी महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चोरी की रकम को लेकर चल रही चर्चाओं पर सफाई देते हुए कहा कि घटना में नुकसान को लेकर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे वास्तविकता से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं। गोविंद गिरी के मुताबिक, चोरी की राशि 3 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। बिना आधिकारिक पुष्टि के बड़ी रकम के दावे करना सही नहीं है, क्योंकि इससे लोगों में भ्रम फैलता है। Govind Giri ने क्या कहा? Govind Giri ने चढ़ावा चोरी मामले पर बोलते हुए कहा कि मंदिरों में आने वाला दान और चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है। इसलिए इस तरह के मामलों में सही जानकारी सामने आना बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि चोरी की रकम को लेकर कुछ जगहों पर जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, वे वास्तविक स्थिति से काफी अलग हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। चोरी की रकम को लेकर बना हुआ है विवाद चढ़ावा चोरी की खबर सामने आने के बाद से ही नुकसान की राशि को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी रकम का जिक्र किया गया था, जिसके बाद यह मामला काफी चर्चा में आ गया। अब गोविंद गिरी के बयान के बाद एक बार फिर चोरी की वास्तविक राशि को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कुल कितना नुकसान हुआ है। जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई फिलहाल मामले की जांच जारी है। संबंधित अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चोरी कैसे हुई और इसमें कितनी राशि या सामान का नुकसान हुआ। गोविंद गिरी ने उम्मीद जताई कि जांच के बाद पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल इस घटना के बाद धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिरों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन जरूरी है। मंदिरों में आने वाला चढ़ावा लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा होता है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CBSE

CBSE Education Rule 2026: Third Language Assessment में फेल हुए तो नहीं मिलेगा 10वीं का Certificate

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए भाषा शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब छात्रों को Class 10 Pass Certificate पाने के लिए Third Language (तीसरी भाषा) में भी सफल होना जरूरी होगा। हालांकि, थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन स्कूल द्वारा कराए जाने वाले Internal Assessment में पास होना अनिवार्य रहेगा। यह नया नियम उन छात्रों पर लागू होगा जो Academic Session 2026-27 में Class 9 में प्रवेश लेंगे और 2027-28 में Class 10 Board Exam देंगे। CBSE का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छात्रों में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। CBSE Third Language Rule: क्या बदला है? अब तक कई छात्र तीसरी भाषा को केवल एक अतिरिक्त विषय के रूप में देखते थे, लेकिन नए नियम के बाद इसकी अहमियत बढ़ जाएगी। CBSE के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। नए नियम की मुख्य बातें: Third Language में Fail होने पर क्या होगा? CBSE ने छात्रों को राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई छात्र Third Language Internal Assessment में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे सुधार का मौका दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में: NEP 2020 के तहत क्यों आया यह बदलाव? CBSE का मानना है कि आज के समय में भाषा का ज्ञान केवल परीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 में छात्रों को कई भाषाओं को समझने और सीखने पर जोर दिया गया है। Third Language को अनिवार्य करने का उद्देश्य है कि छात्र: Students और Parents के लिए जरूरी जानकारी नए नियम को लेकर छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं। उन्हें ध्यान रखना होगा कि: CBSE Education System में बड़ा बदलाव CBSE का यह फैसला स्कूल शिक्षा प्रणाली में भाषा सीखने के तरीके को बदल सकता है। अब छात्रों को केवल मुख्य विषयों पर ही नहीं, बल्कि भाषा कौशल पर भी ध्यान देना होगा। छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे Third Language को बोझ न समझें, बल्कि इसे नई भाषा सीखने और अपनी क्षमता बढ़ाने के अवसर के रूप में देखें।
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FIFA World Cup 2026

FIFA World Cup 2026: France vs Spain का हाई-वोल्टेज Semifinal, 20 साल पुरानी राइवलरी फिर होगी ताजा

FIFA World Cup 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। फुटबॉल प्रेमियों की नजरें मंगलवार को अमेरिका के डलास स्थित AT&T Stadium पर टिकी होंगी, जहां टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल France और Spain के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सिर्फ फाइनल में पहुंचने की जंग नहीं है, बल्कि दो ऐसी टीमों की भिड़ंत भी है, जिन्होंने पिछले कई वर्षों में विश्व फुटबॉल पर अपनी अलग छाप छोड़ी है। इस मैच की सबसे खास बात यह है कि फ्रांस और स्पेन 20 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबले में आमने-सामने होंगे। आखिरी बार दोनों टीमें 2006 विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में भिड़ी थीं, जहां फ्रांस ने 3-1 से जीत दर्ज कर स्पेन का सफर समाप्त कर दिया था। 20 साल पुरानी यादें फिर होंगी ताजा 2006 के उस मुकाबले में जिदान की कप्तानी वाली फ्रांस टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था। अब दो दशक बाद तस्वीर बदल चुकी है। दोनों टीमों में नए सितारे हैं, नई रणनीतियां हैं और लक्ष्य सिर्फ एक—विश्व कप के फाइनल में जगह बनाना। फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों टीमें इस समय बेहतरीन फॉर्म में हैं और पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करते हुए अंतिम चार तक पहुंची हैं। Mbappe vs Lamine Yamal: मैच का सबसे बड़ा आकर्षण अगर इस सेमीफाइनल की सबसे बड़ी व्यक्तिगत टक्कर की बात करें तो सभी की नजरें किलियन एम्बाप्पे और लामिन यमाल पर रहेंगी। फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे इस विश्व कप में अब तक 8 गोल कर चुके हैं। उनकी गति, शानदार फिनिशिंग और बड़े मैचों में दबाव झेलने की क्षमता फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। गोल्डन बूट की रेस में भी वे सबसे आगे हैं। वहीं, स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल ने अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन ड्रिब्लिंग और आक्रामक खेल से दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। कम उम्र में जिस आत्मविश्वास के साथ वह बड़े मुकाबले खेल रहे हैं, उसने उन्हें इस टूर्नामेंट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। दोनों टीमों का सेमीफाइनल तक का सफर फ्रांस ने पूरे टूर्नामेंट में संतुलित प्रदर्शन किया है। मजबूत डिफेंस और तेज काउंटर अटैक के दम पर टीम ने हर चुनौती का सामना किया। क्वार्टर फाइनल में मोरक्को को हराकर फ्रांस ने अंतिम चार में जगह बनाई। दूसरी ओर, स्पेन ने अपनी पारंपरिक पासिंग फुटबॉल और युवा खिलाड़ियों के दम पर शानदार प्रदर्शन किया। बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल जीतने के बाद टीम पूरे आत्मविश्वास के साथ सेमीफाइनल में उतरेगी। फ्रांस बनाएगा रिकॉर्ड या स्पेन लिखेगा नया इतिहास? फ्रांस के पास लगातार तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने का मौका है। अगर टीम जीत हासिल करती है तो यह आधुनिक फुटबॉल के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में शामिल होगा। वहीं स्पेन की कोशिश 2010 के बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी जीतने की उम्मीदों को मजबूत करने की होगी। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम के पास इतिहास बदलने का सुनहरा अवसर है। डलास में होगा हाई-वोल्टेज मुकाबला अमेरिका का AT&T Stadium इस महामुकाबले का गवाह बनेगा। स्टेडियम में हजारों दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है, जबकि दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल फैंस टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस मैच को देखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकाबला केवल स्टार खिलाड़ियों का नहीं, बल्कि दोनों कोचों की रणनीति की भी परीक्षा होगी। जहां फ्रांस तेज काउंटर अटैक पर भरोसा करेगा, वहीं स्पेन गेंद पर नियंत्रण रखते हुए विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश करेगा। फाइनल का टिकट दांव पर इस मुकाबले की विजेता टीम सीधे FIFA World Cup 2026 Final में पहुंचेगी, जहां उसका सामना दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच किसी फाइनल से कम नहीं है। फुटबॉल प्रेमियों को उम्मीद है कि France vs Spain का यह मुकाबला रोमांच, गति, शानदार गोल और यादगार पलों से भरपूर होगा। एक ओर एम्बाप्पे का अनुभव है तो दूसरी ओर यमाल का युवा जोश। अब देखना दिलचस्प होगा कि डलास की इस जंग में जीत किसकी होती है और विश्व कप ट्रॉफी की ओर एक कदम आगे कौन बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

IMD Weather Alert: Monsoon Break का असर, उत्तर भारत में थमी बारिश, Arunachal में ITBP के 15 जवान फंसे

देशभर में मानसून (Monsoon) की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। जुलाई के मध्य में जहां आमतौर पर कई राज्यों में झमाझम बारिश होती है, वहीं इस बार मौसम ने अलग ही तस्वीर पेश की है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 11 साल में तीसरी बार ऐसा Monsoon Break देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर, पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बारिश और भूस्खलन से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश में ITBP के 15 जवान खराब मौसम के कारण दुर्गम इलाके में फंस गए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए राहत अभियान जारी है। क्या है Monsoon Break और क्यों हुआ? Monsoon Break वह स्थिति होती है, जब कुछ दिनों के लिए मानसून की सक्रियता अचानक कम हो जाती है। इस दौरान उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश लगभग रुक जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया है। UP और MP में बारिश की कमी बढ़ी चिंता मानसून की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ने लगा है। बारिश कम होने से धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कई जिलों में किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने लगे हैं। राजस्थान, दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ी उमस मानसून कमजोर पड़ने का असर राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी महसूस किया जा रहा है। इन इलाकों में दिन का तापमान बढ़ा है और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। Arunachal Pradesh में ITBP के जवान फंसे पूर्वोत्तर भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। इसी बीच ITBP के 15 जवान एक दुर्गम इलाके में फंस गए। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मौसम साफ होते ही जवानों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश तेज की जाएगी। किसानों की बढ़ी चिंता जुलाई का महीना खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे समय में बारिश कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती, तो कई क्षेत्रों में फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनाएं। IMD ने क्या कहा? भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है, तो उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में फिलहाल बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LPG Cylinder

10kg Gas Cylinder: अब भारी सिलेंडर से मिलेगी राहत, जानें नया LPG Cylinder कब होगा उपलब्ध

देशभर के करोड़ों LPG उपभोक्ताओं के लिए जल्द एक नई सुविधा शुरू हो सकती है। सरकारी तेल कंपनियां 10kg के नए Lightweight LPG Cylinder को बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही हैं। यह सिलेंडर खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर भारी लगता है या जिनके घर में गैस की खपत कम होती है। हालांकि, इस योजना को लागू करने से पहले सरकार की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग शहरों में उपलब्ध कराया जाएगा। क्या है 10kg LPG Cylinder की खासियत? नया 10kg LPG सिलेंडर वजन में हल्का होगा और इसे उठाना, ले जाना व इस्तेमाल करना पहले की तुलना में काफी आसान रहेगा। तेल कंपनियों का मानना है कि यह सिलेंडर छोटे परिवारों और सीमित गैस उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह नया विकल्प पारंपरिक 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की जगह नहीं लेगा, बल्कि ग्राहकों को एक अतिरिक्त सुविधा देगा। किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? 10kg LPG Cylinder कई वर्गों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। इनमें शामिल हैं— हल्का होने की वजह से इसे बदलना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान होगा। 10kg LPG Cylinder की कितनी होगी कीमत? फिलहाल तेल कंपनियों ने इसकी आधिकारिक कीमत का ऐलान नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिलेंडर को कमर्शियल कैटेगरी में उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे में इसकी कीमत शहर और उस समय लागू LPG दरों के आधार पर तय होगी। सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कीमत को लेकर अंतिम घोषणा अभी बाकी है। क्या बंद हो जाएगा 14.2kg घरेलू LPG Cylinder? इस सवाल का जवाब है—नहीं। 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर पहले की तरह मिलता रहेगा। नया 10kg सिलेंडर केवल एक अतिरिक्त विकल्प होगा, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सही सिलेंडर चुन सकें। अभी कितनी है घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत? वर्तमान में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत अलग-अलग शहरों में अलग है। दिल्ली में इसकी कीमत करीब ₹942 है। वहीं कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें भी समय-समय पर तेल कंपनियों द्वारा संशोधित की जाती हैं। कब से शुरू होगी 10kg LPG Cylinder की सुविधा? अभी तक इसकी लॉन्च डेट तय नहीं की गई है। तेल कंपनियां इस योजना पर काम कर रही हैं और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद इसे पहले चुनिंदा शहरों में शुरू किया जा सकता है। बाद में इसकी उपलब्धता पूरे देश में बढ़ाई जाएगी। उपभोक्ताओं के लिए क्यों है यह बड़ी खबर? बदलती जीवनशैली और छोटे परिवारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 10kg LPG Cylinder एक बेहतर विकल्प बन सकता है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार गैस सिलेंडर चुनने की सुविधा मिलेगी। खासकर ऐसे लोग जो कम गैस का इस्तेमाल करते हैं या भारी सिलेंडर उठाने में असुविधा महसूस करते हैं, उनके लिए यह योजना काफी राहत देने वाली साबित हो सकती है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो आने वाले समय में लाखों उपभोक्ताओं को हल्का, सुविधाजनक और जरूरत के हिसाब से LPG सिलेंडर का नया विकल्प मिल सकेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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लालू यादव

Deoghar Fodder Scam: लालू यादव को Supreme Court से बड़ी राहत, जमानत रद्द करने से इनकार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला (Fodder Scam) मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने CBI की उस याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल लालू यादव की जमानत बरकरार रहेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब चारा घोटाले से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख को लालू यादव के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। क्या है देवघर Fodder Scam Case? देवघर ट्रेजरी से पशुपालन विभाग के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने से करीब 89 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला चर्चित चारा घोटाले का हिस्सा है। इस मामले में विशेष CBI अदालत ने लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए CBI सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और जमानत रद्द करने की मांग की थी। Supreme Court में CBI की दलील सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत में कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कानूनी पहलुओं का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया। जांच एजेंसी का कहना था कि लालू यादव द्वारा सजा पूरी करने की अवधि और अलग-अलग मामलों की गणना को लेकर हाईकोर्ट का निष्कर्ष उचित नहीं था। इसी आधार पर CBI ने जमानत रद्द करने की अपील की। कोर्ट ने क्यों नहीं दी CBI को राहत? सुप्रीम कोर्ट ने CBI की दलीलों पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश में कोई बदलाव नहीं किया और लालू यादव की जमानत जारी रहने दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इतने पुराने मामलों का जल्द निपटारा होना जरूरी है। इस फैसले के बाद लालू यादव को फिलहाल किसी नई कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। बचाव पक्ष ने क्या कहा? लालू यादव की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है और वे कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें राहत दी थी। बचाव पक्ष ने कहा कि जमानत रद्द करने का कोई ठोस आधार नहीं है। क्या है पूरा चारा घोटाला? बिहार का बहुचर्चित चारा घोटाला देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में शामिल है। इसमें पशुपालन विभाग के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी का आरोप है। इस मामले में कई अलग-अलग ट्रेजरी से जुड़ी FIR दर्ज हुई थीं और लालू प्रसाद यादव को कई मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में कानूनी प्रक्रिया अब भी जारी है और कई याचिकाओं पर अदालतों में सुनवाई चल रही है। बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सिर्फ कानूनी राहत ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच लालू यादव को मिली यह राहत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। हालांकि, कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। चारा घोटाले से जुड़े अन्य मामलों में आगे भी सुनवाई जारी रहेगी और भविष्य में अदालत के फैसले इस मामले की दिशा तय करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Operation Sindoor

Operation Sindoor के बाद Long-Term War Strategy पर फोकस, ₹10 लाख करोड़ की Defence Projects को मिली रफ्तार

भारत की सुरक्षा रणनीति में पिछले कुछ महीनों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश का रास्ता खोलते हुए लगभग ₹10 लाख करोड़ की रक्षा खरीद और सैन्य आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों और लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। Defence Procurement का बदला पूरा पैटर्न बीते 14 महीनों में रक्षा खरीद की रणनीति पहले के मुकाबले काफी अलग नजर आई है। अब ध्यान सिर्फ नए हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीक पर भी है जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा कर सके। मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर सुरक्षा और निगरानी तकनीक जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही तीनों सेनाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। किन क्षेत्रों में हो रहा है सबसे बड़ा निवेश? सरकार जिन रक्षा परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है, उनमें कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी का उद्देश्य भारतीय सेना को तकनीकी रूप से पहले से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। ‘Make in India’ को मिला बड़ा बढ़ावा रक्षा क्षेत्र में सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक स्वदेशी उत्पादन है। कई बड़े रक्षा सौदों में भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि विदेशी आयात पर निर्भरता कम हो और देश में ही अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण हो सके। इस रणनीति से रक्षा उद्योग को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। तीनों सेनाओं की क्षमता होगी और मजबूत भारतीय सेना को नई पीढ़ी के हथियार, ड्रोन और लंबी दूरी तक हमला करने वाले सिस्टम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू बेड़े और एयर डिफेंस नेटवर्क को आधुनिक बना रही है। दूसरी ओर, नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने के लिए नए युद्धपोत, पनडुब्बियां और समुद्री निगरानी प्रणालियों को अपने बेड़े में शामिल कर रही है। भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनी रणनीति रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। ड्रोन हमले, साइबर अटैक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और लंबी दूरी की मिसाइलें आज किसी भी संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। इसी कारण भारत अपनी रक्षा तैयारियों को पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ नई तकनीकों से भी मजबूत कर रहा है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके। भारत की सुरक्षा नीति में दिख रहा बड़ा बदलाव पिछले कुछ वर्षों में रक्षा खरीद की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज हुई है। सरकार अब केवल हथियारों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और समय पर उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दे रही है। रक्षा क्षेत्र में हो रहा यह निवेश आने वाले वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है और देश की सामरिक स्थिति को और मजबूत बना सकता है।
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India

India vs England ODI Series: Bumrah की Comeback Story, Rohit-Virat की वापसी से Team India हुई मजबूत

India और England के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज मंगलवार को एजबेस्टन (Edgbaston), बर्मिंघम में होगा। टी20 सीरीज के बाद अब दोनों टीमें 50 ओवर के फॉर्मेट में आमने-सामने होंगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस मुकाबले पर इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि भारतीय टीम में कई बड़े खिलाड़ियों की वापसी हो रही है। खास तौर पर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, कप्तान रोहित शर्मा और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली लंबे समय बाद एक साथ वनडे टीम का हिस्सा होंगे। 968 दिन बाद ODI क्रिकेट खेलेंगे Jasprit Bumrah भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह करीब 968 दिनों के लंबे इंतजार के बाद वनडे क्रिकेट में वापसी करने जा रहे हैं। उन्होंने अपना पिछला वनडे मुकाबला 2023 विश्व कप के फाइनल में खेला था। चोट से उबरने के बाद उनकी वापसी भारतीय गेंदबाजी के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। नई गेंद से विकेट लेने की उनकी क्षमता इंग्लैंड की मजबूत बल्लेबाजी के सामने टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है। Rohit Sharma और Virat Kohli की वापसी से बढ़ा अनुभव इस सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली की वापसी ने भारतीय टीम को और मजबूत बना दिया है। दोनों दिग्गज बल्लेबाज लंबे समय से भारत के वनडे अभियान की रीढ़ रहे हैं। इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इन दोनों खिलाड़ियों का अनुभव टीम के लिए बेहद अहम रहेगा। फैंस को उम्मीद है कि दोनों खिलाड़ी एक बार फिर बड़ी पारियां खेलकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाएंगे। Team India के पास लगातार छठी जीत का मौका भारत का हालिया रिकॉर्ड इंग्लैंड के खिलाफ शानदार रहा है। टीम इंडिया ने इंग्लैंड के खिलाफ अपने पिछले पांच वनडे मुकाबले लगातार जीते हैं। ऐसे में भारतीय टीम जीत की इस लय को बरकरार रखते हुए लगातार छठी जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। दूसरी ओर मेजबान इंग्लैंड घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर भारत के विजयी अभियान को रोकना चाहेगा। England ने भी तैयार की मजबूत Playing XI इंग्लैंड ने पहले वनडे के लिए संतुलित टीम चुनी है। अनुभवी बल्लेबाज जो रूट की वापसी से मध्यक्रम मजबूत हुआ है, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज जोस बटलर अपने करियर का 200वां वनडे मैच खेलने उतरेंगे। घरेलू मैदान पर इंग्लैंड भारतीय टीम को कड़ी चुनौती देने की पूरी कोशिश करेगा। दोनों टीमों के बीच होगी हाई-वोल्टेज टक्कर भारत और इंग्लैंड के बीच मुकाबले हमेशा रोमांच से भरपूर रहे हैं। एक ओर टीम इंडिया अनुभवी खिलाड़ियों और मजबूत गेंदबाजी के दम पर जीत हासिल करना चाहेगी, वहीं इंग्लैंड घरेलू दर्शकों के सामने शानदार प्रदर्शन कर सीरीज की विजयी शुरुआत करना चाहेगा। एजबेस्टन में होने वाला पहला वनडे दोनों टीमों के लिए सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि आगामी बड़े आईसीसी टूर्नामेंटों की तैयारियों का अहम पड़ाव भी माना जा रहा है। क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें अब इस बात पर रहेंगी कि क्या जसप्रीत बुमराह अपनी वापसी को यादगार बना पाएंगे, रोहित शर्मा और विराट कोहली बल्ले से दम दिखाएंगे और टीम इंडिया इंग्लैंड के खिलाफ लगातार छठी वनडे जीत दर्ज कर पाएगी या नहीं।
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Xi Jinping

BRICS Summit 2026: 7 साल बाद भारत पहुंचे Xi Jinping, Modi-Xi Meeting पर सबकी नजर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) शनिवार को नई दिल्ली पहुंच गए। वह BRICS Summit 2026 में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है, इसलिए उनके दिल्ली पहुंचते ही भारत-चीन रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिनपिंग का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत और चीन के रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य होने की कोशिश कर रहे हैं। 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव आया था। ऐसे में सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति का भारत आना अपने आप में अहम माना जा रहा है। 7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच महाबलीपुरम में अनौपचारिक मुलाकात हुई थी। इसके बाद सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। अब लंबे अंतराल के बाद जिनपिंग की दिल्ली यात्रा से यह उम्मीद जगी है कि दोनों देश बातचीत के जरिए अपने रिश्तों में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं। Modi-Xi Meeting पर सबसे ज्यादा नजर BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात सबसे बड़ा आकर्षण हो सकती है। दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध जैसे मुद्दे अहम रहेंगे। भारत और चीन के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन व्यापार असंतुलन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक से आर्थिक मोर्चे पर भी कुछ सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है। गलवान के बाद रिश्तों में आई थी दूरी 2020 के गलवान विवाद ने भारत-चीन संबंधों को मुश्किल दौर में पहुंचा दिया था। सीमा पर तनाव बढ़ने के साथ दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत हुई। पिछले कुछ समय में हालात को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों के साथ दोनों देशों के बीच उड़ान, वीजा और अन्य संपर्कों को भी धीरे-धीरे बेहतर करने की कोशिश हुई है। हालांकि, सीमा विवाद अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है। BRICS Summit में जुटे बड़े नेता नई दिल्ली में हो रहा BRICS Summit 2026 वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और Global South से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेता भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, BRICS की भूमिका पर भी खास चर्चा हो रही है। भारत-चीन रिश्तों के लिए अहम मौका शी जिनपिंग का भारत दौरा सिर्फ BRICS Summit तक सीमित नहीं है। इसे भारत और चीन के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण मौके के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब सबकी नजर Modi-Xi Meeting पर है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत अगर सकारात्मक रहती है, तो इससे सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर भी आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, शी जिनपिंग का सात साल बाद भारत पहुंचना ही दोनों देशों के रिश्तों में एक नए chapter की शुरुआत की उम्मीद जगा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saudi

Saudi Pipeline Shutdown: ड्रोन हमले से मचा हड़कंप, Hormuz Crisis के बीच Oil Supply पर नया संकट

मिडिल ईस्ट में तनाव का असर अब सीधे Global Oil Supply पर दिखाई देने लगा है। ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी एक अहम East-West Oil Pipeline को बंद कर दिया है। यह वही पाइपलाइन है, जिसके जरिए रोजाना करीब 50 लाख बैरल तक कच्चा तेल Red Sea के रास्ते भेजा जा रहा था। सऊदी का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब Strait of Hormuz को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। ऐसे में एक और बड़े Oil Route का प्रभावित होना दुनिया के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। ड्रोन हमले के बाद लिया गया फैसला रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के रियाद और मदीना क्षेत्र में पाइपलाइन से जुड़े ठिकानों को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। घटना के बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पाइपलाइन का ऑपरेशन रोक दिया गया। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। घटना के बाद इराक की ओर से भी कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है। क्या है East-West Oil Pipeline? सऊदी अरब की East-West Pipeline देश के तेल कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को Red Sea के किनारे स्थित Yanbu तक पहुंचाती है। इस रूट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि तेल को Hormuz Strait से होकर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी समुद्री रास्ते में परेशानी होने पर यह पाइपलाइन Saudi Arabia के लिए एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर काम करती है। हाल में इससे करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल प्रतिदिन भेजे जाने की बात सामने आई है। Hormuz के बाद Pipeline बंद होना क्यों अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण Oil Shipping Routes में से एक है। यहां तनाव बढ़ने पर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की Supply को लेकर चिंता रहती है। ऐसे समय में सऊदी की East-West Pipeline का बंद होना अलग तरह की चुनौती पैदा करता है। जिस रास्ते को Hormuz के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, उस पर भी अब सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। Red Sea Route पर भी दबाव मिडिल ईस्ट में संकट सिर्फ Hormuz तक सीमित नहीं है। Red Sea और Bab el-Mandeb क्षेत्र में भी लंबे समय से सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन इलाकों में तनाव बढ़ने से कई बार Shipping Companies को अपने रास्ते बदलने पड़े हैं। अब Saudi Oil Infrastructure पर हुए ड्रोन हमले ने Energy Supply को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। Oil Prices पर कितना असर पड़ेगा? सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े Oil Producers में शामिल है। इसलिए वहां तेल की Supply या Infrastructure में किसी बड़ी रुकावट का असर International Market पर पड़ सकता है। अगर पाइपलाइन जल्द दोबारा शुरू हो जाती है, तो बाजार में दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन अगर बंदी लंबी खिंचती है और Hormuz तथा Red Sea में भी स्थिति सामान्य नहीं होती, तो Crude Oil Prices में तेजी का खतरा बढ़ सकता है। महंगे कच्चे तेल का असर आगे चलकर Transport और Manufacturing से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक दिखाई दे सकता है। दुनिया की नजर अब Saudi Arabia पर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब East-West Pipeline को कब तक बंद रखता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में Middle East में ड्रोन हमले और Shipping Security की स्थिति किस दिशा में जाती है। एक तरफ Hormuz में तनाव और दूसरी तरफ Saudi Oil Pipeline पर हमला—इन घटनाओं ने Global Energy Market की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में तेल की Supply और कीमतों पर इसका असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Uttarakhand में 170 फीट लंबा पुल बहा, छत्तीसगढ़ में 3 छात्र नदी में लापता

Uttarakhand में 170 फीट लंबा पुल बहा, छत्तीसगढ़ में 3 छात्र नदी में लापता

देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। Uttarakhand से लेकर बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक बारिश और बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। कहीं पुल बह गए हैं तो कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। Uttarakhand में 170 फीट लंबा पुल बहा उत्तराखंड में भारी बारिश के बीच एक करीब 170 फीट लंबा पुल नदी के तेज बहाव में बह गया। पुल के बह जाने से आसपास के इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन और राहत दल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ में नदी में बहे 3 कॉलेज छात्र छत्तीसगढ़ में भी बारिश के बीच बड़ा हादसा सामने आया है। नदी में नहाने गए तीन कॉलेज छात्र लापता हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन को सूचना दी गई। राहत और बचाव दलों ने छात्रों की तलाश शुरू कर दी है। नदी के तेज बहाव के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भी मुश्किलें आ रही हैं। बिहार में 47 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से करीब 47 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में पानी घरों और सड़कों तक पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है तथा प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। MP और राजस्थान में भी बारिश का दौर मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है। लोगों को नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। बारिश के इस दौर में प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। खासकर नदियों और तेज बहाव वाले इलाकों में जाने से बचना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Black Dog

Black Dog New Packaging: 140 साल पुरानी विरासत को मिला Modern Look

करीब 140 साल पुरानी विरासत वाले स्कॉच व्हिस्की ब्रांड Black Dog ने अपनी पैकेजिंग में बड़ा बदलाव किया है। नए पैक के जरिए ब्रांड ने अपनी पारंपरिक पहचान को बरकरार रखते हुए इसे आज के दौर के हिसाब से नया रूप देने की कोशिश की है। इस बदलाव के साथ ब्रांड ने ‘Savour the Sip’ संदेश को भी सामने रखा है। 1883 से शुरू हुई Black Dog की कहानी Black Dog की शुरुआत वर्ष 1883 में सर वाल्टर मिलार्ड से जुड़ी मानी जाती है। स्कॉटलैंड से शुरू हुआ यह ब्रांड समय के साथ भारत सहित कई बाजारों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। कंपनी के मुताबिक, नए पैकेजिंग डिजाइन में ब्रांड की पुरानी विरासत और आधुनिक विजुअल स्टाइल को एक साथ रखा गया है। पैक पर बारीक डिटेलिंग और प्रीमियम फिनिश के जरिए Black Dog की पहचान को और उभारने की कोशिश की गई है। ‘Savour the Sip’ बना नया Brand Message नई पैकेजिंग के साथ ‘Savour the Sip’ को ब्रांड के प्रमुख संदेश के तौर पर पेश किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह विचार तेज रफ्तार जिंदगी के बीच लोगों को अनुभवों को ठहरकर महसूस करने की सोच से जुड़ा है। ब्रांड की ओर से बताया गया है कि इसकी स्कॉच व्हिस्की स्कॉटलैंड की चुनिंदा डिस्टिलरी में तैयार की जाती है। इनमें Linkwood Distillery भी शामिल है। कंपनी अपने उत्पादों की खासियत को अलग-अलग कास्क में परिपक्व होने की प्रक्रिया और स्कॉटिश माल्ट्स से जोड़ती है। Portfolio में दो प्रमुख Variants नए पैकेजिंग बदलाव के साथ Black Dog के पोर्टफोलियो में दो प्रमुख वेरिएंट को भी अलग पहचान के साथ पेश किया गया है। Black Dog Black Reserve को चुनिंदा स्कॉटिश माल्ट्स से तैयार किया गया मिश्रण बताया गया है। कंपनी के अनुसार इसमें ओक, शेरी और माल्टी फ्लेवर की परतें शामिल हैं। वहीं Black Dog Triple Gold Reserve को ट्रिपल-कास्क मैच्योर्ड स्कॉच के तौर पर पेश किया गया है। कंपनी के मुताबिक इसमें ओक, टॉफी और वनीला जैसे फ्लेवर नोट्स देखने को मिलते हैं। नई Generation पर फोकस ब्रांड का यह बदलाव केवल पैकेजिंग तक सीमित नहीं है। नए डिजाइन और संदेश के जरिए Black Dog बदलते उपभोक्ता वर्ग के साथ अपनी पहचान को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। Diageo India के वाइस प्रेसिडेंट और पोर्टफोलियो हेड वरुण कूरिच के मुताबिक, नई पैकेजिंग ब्रांड की विरासत का सम्मान करते हुए उसे आधुनिक समय के अनुरूप पेश करती है। कंपनी का फोकस ऐसे उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर है जो उत्पाद के पीछे की कारीगरी और अनुभव को महत्व देते हैं। कुल मिलाकर, Black Dog की नई Packaging उसके पुराने heritage और modern branding के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। करीब 140 साल पुरानी पहचान को बरकरार रखते हुए ब्रांड ने अपने visual identity और communication में बदलाव किया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
China Southern Airlines

China Southern Airlines: 21 सितंबर से ग्वांगझू-दिल्ली सीधी उड़ान, 6 साल बाद Air Connectivity बहाल

भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय बाद एक और सकारात्मक संकेत देखने को मिला है। चीन की China Southern Airlines 21 सितंबर 2026 से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच सीधी उड़ान सेवा फिर शुरू करने जा रही है। करीब छह साल से बंद इस Direct Flight के दोबारा शुरू होने की खबर ऐसे समय आई है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान दोनों देशों के बीच सीधी यात्री उड़ानें बंद हो गई थीं। इसके बाद लंबे समय तक हवाई संपर्क पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया। अब China Southern Airlines के इस फैसले से दोनों देशों के बीच यात्रियों और कारोबारी गतिविधियों को राहत मिलने की उम्मीद है। 21 सितंबर से शुरू होगी Direct Flight China Southern Airlines की ग्वांगझू-दिल्ली उड़ान सेवा 21 सितंबर 2026 से दोबारा शुरू होगी। इससे भारत और चीन के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को एक और सीधा विकल्प मिलेगा। ग्वांगझू चीन का एक प्रमुख कारोबारी और औद्योगिक शहर है। ऐसे में दिल्ली के साथ सीधा हवाई संपर्क बहाल होने से बिजनेस ट्रैवल, पर्यटन और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को बढ़ावा मिल सकता है। शी जिनपिंग के भारत दौरे के बीच बड़ा अपडेट इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। उनके दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात पर भी दुनिया की नजर है। भारत और चीन के रिश्तों में 2020 के सीमा विवाद के बाद काफी तनाव देखने को मिला था। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं। ऐसे में Direct Flight की वापसी को दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे सामान्य होते संबंधों के एक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। यात्रियों और कारोबारियों को क्या फायदा होगा? सीधी उड़ान शुरू होने से भारत और चीन के बीच यात्रा करने वाले लोगों को कनेक्टिंग फ्लाइट पर निर्भरता कम होगी। इससे समय की बचत हो सकती है और यात्रा पहले के मुकाबले आसान हो सकती है। खासकर कारोबारी यात्रियों, छात्रों और परिवारों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ने की स्थिति में हवाई कनेक्टिविटी की भूमिका और भी अहम हो जाएगी। China-India Relations में धीरे-धीरे बदलाव भारत और चीन के संबंध अभी भी कई संवेदनशील मुद्दों से जुड़े हुए हैं। सीमा विवाद के अलावा व्यापार और रणनीतिक मामलों पर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। इसके बावजूद हाल के महीनों में बातचीत और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम दिखाई दिए हैं। छह साल बाद ग्वांगझू-दिल्ली Direct Flight की वापसी इसी बदलाव की एक कड़ी मानी जा सकती है। अब सबकी नजर BRICS Summit के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत और उसके बाद दोनों देशों के रिश्तों की अगली दिशा पर रहेगी। कुल मिलाकर, शी जिनपिंग के भारत दौरे के बीच चीन की तीसरी एयरलाइन द्वारा भारत के लिए उड़ान सेवा शुरू करने का फैसला सिर्फ Aviation Sector के लिए ही नहीं, बल्कि India-China Relations के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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