/ Apr 29, 2026
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Trump Tariff Policy ईरान से कारोबार किया तो अमेरिका में 25% टैक्स तय

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस देश पर अमेरिका के साथ होने वाले पूरे व्यापार पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने इसे “तुरंत लागू और अंतिम फैसला” बताया है। यह घोषणा सोशल मीडिया के ज़रिए आई, लेकिन असर पूरी दुनिया के बाज़ारों और कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ता दिख रहा है। क्या है Trump Iran Tariff Policy? सरल शब्दों में कहें तो ट्रंप का कहना है— “अगर कोई देश ईरान से खरीद-फरोख्त करता है, तो उसे अमेरिका से होने वाले हर व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैक्स देना होगा।” मतलब यह कि ईरान के साथ तेल, गैस, केमिकल, फूड या किसी भी तरह का कारोबार करने वाले देशों को अमेरिकी बाज़ार में अपने सामान को 25% महंगे शुल्क के साथ बेचना पड़ेगा। यह फैसला क्यों लिया गया? यह कदम ऐसे समय पर आया है जब ईरान में राजनीतिक अशांति और विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर दबाव बनाना चाहता है ताकि उसकी नीतियों में बदलाव आए।ट्रंप की रणनीति साफ दिखती है—ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना ताकि उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़े। कौन-कौन से देश होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित? ईरान के साथ व्यापार करने वाले कई बड़े देश अब मुश्किल में हैं, जिनमें शामिल हैं: इन देशों को अब दो रास्तों में से एक चुनना होगा—या तो ईरान के साथ व्यापार घटाएँ, या अमेरिका के साथ अपने निर्यात को महंगा होने दें। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत का ईरान के साथ सीधा तेल आयात पहले से कम है, लेकिन खाद्य सामग्री, रसायन, फार्मा और मशीनरी जैसे कई सेक्टरों में व्यापार अब भी चलता है।अगर भारत ईरान के साथ यह कारोबार जारी रखता है, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात 25% टैरिफ के कारण महंगा हो सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा घटेगी। दूसरी ओर, ईरान भारत के लिए रणनीतिक साझेदार भी रहा है—चाहे वह चाबहार पोर्ट हो या मध्य एशिया तक पहुंच का रास्ता। ऐसे में भारत के सामने आर्थिक और कूटनीतिक संतुलन साधने की चुनौती होगी। वैश्विक बाजारों में क्यों मची हलचल? ट्रंप का यह टैरिफ सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है।विशेषज्ञों का मानना है कि इससे: कई देशों के लिए यह स्थिति “या तो अमेरिका, या ईरान” जैसा कठिन चुनाव बन सकती है। कानूनी और व्यावहारिक सवाल हालांकि ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा कर दी है, लेकिन इसके कानूनी ढांचे और लागू करने के तरीके अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं।क्या यह सभी उत्पादों पर लगेगा?क्या कुछ सेक्टरों को छूट मिलेगी?इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि यह नीति कितनी सख्ती से लागू होती है। Trump Iran Tariff News केवल ईरान की कहानी नहीं है—यह पूरी दुनिया के व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित करने वाला फैसला है।अगर यह नीति पूरी ताकत से लागू होती है, तो कई देशों को अपनी विदेश नीति और व्यापार रणनीति दोबारा सोचनी पड़ेगी। दुनिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ आर्थिक फैसले सीधे राजनीति को और राजनीति सीधे आम लोगों की जेब को प्रभावित करती है। अब देखना यह है कि देश इस चुनौती से कैसे निपटते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TCS

Tata Consultancy Services Q3 Report TCS Profit Down, लेकिन Business Growth मजबूत

भारत की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की कमाई पर थोड़ा दबाव रहा, लेकिन कारोबार की रफ्तार बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। मुनाफा घटा, लेकिन कारोबार बढ़ा इस तिमाही में TCS का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 14% घटकर ₹10,657 करोड़ रहा। पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब ₹12,380 करोड़ था। यानी कंपनी ने कमाई की, लेकिन लागत और कुछ एक-बार के खर्चों के कारण लाभ कम हुआ। वहीं दूसरी ओर, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 5% बढ़कर ₹67,087 करोड़ पर पहुंच गया। यह साफ संकेत है कि ग्राहकों से मिलने वाला काम और डील्स मजबूत बनी हुई हैं। डिविडेंड ने शेयरधारकों को दिया सुकून नतीजों के साथ TCS ने ₹57 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया, जिसमें इंटरिम और स्पेशल डिविडेंड शामिल है। ऐसे समय में जब मुनाफा दबाव में है, यह कदम निवेशकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। मुनाफा क्यों घटा? कंपनी के अनुसार, इस तिमाही में कुछ एक-बार के खर्च और ऑपरेशनल लागत बढ़ने से प्रॉफिट पर असर पड़ा। हालांकि, यह कमजोरी कारोबार की मांग में गिरावट की वजह से नहीं, बल्कि अस्थायी खर्चों के कारण रही। यही वजह है कि कई निवेशक इसे लंबे समय के नजरिये से अभी भी सकारात्मक मान रहे हैं। AI और डिजिटल सेवाओं से उम्मीद TCS तेजी से AI, क्लाउड और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस बढ़ा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में यही सेक्टर रेवेन्यू और मुनाफे को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। कई बड़े क्लाइंट्स पहले ही इन सेवाओं में निवेश बढ़ा रहे हैं। शेयर बाजार की प्रतिक्रिया नतीजों के बाद TCS के शेयरों में ज्यादा बड़ी गिरावट नहीं दिखी। निवेशकों ने कमजोर मुनाफे से ज्यादा ध्यान रेवेन्यू ग्रोथ और डिविडेंड पर दिया, जिससे शेयर को सपोर्ट मिला। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump का India Visit अगले 1-2 साल में संभव भारत बनेगा Pax Silica का सदस्य

अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने आशा जताई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अगले एक-दो साल में भारत (India) का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करते हैं और यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा कर सकता है। भारत को मिलेगा Pax Silica Group का हिस्सा राजदूत गोर ने यह भी बताया कि भारत को अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica समूह में शामिल होने का निमंत्रण मिलेगा। यह समूह सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिज, एआई और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देता है।भारत के शामिल होने के बाद यह समूह जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और इज़राइल जैसे देशों के साथ मिलकर काम करेगा। औपचारिक घोषणा अगले महीने होने की उम्मीद है। व्यापार वार्ता में नई उम्मीदें गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता (India-US Trade Talks) जल्द ही फिर से शुरू होगी, और 13 जनवरी को नई बातचीत आयोजित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक मतभेदों का समाधान निकाला जाएगा।उनके इस बयान से भारतीय शेयर बाजारों में तेजी आई और सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) में सकारात्मक उछाल देखा गया। अमेरिका-भारत रिश्ते: सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका सहयोग केवल व्यापार तक नहीं, बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक, आतंकवाद विरोधी प्रयास, शिक्षा और स्वास्थ्य तक फैला है। उन्होंने इसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बताया। ट्रंप का भारत दौरा अगले 1-2 साल में संभव है। भारत Pax Silica समूह का हिस्सा बनेगा। व्यापार वार्ता में सुधार और बाजारों में सकारात्मक प्रभाव। द्विपक्षीय सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि तकनीक और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran Anti-Government Protest तेहरान से Mashhad तक प्रदर्शन जारी

ईरान (Iran) में सरकार-विरोधी प्रदर्शन अब 16वें दिन भी लगातार जारी हैं। ये आंदोलन पहले आर्थिक संकट और गिरती हुई रियाल के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब ये व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की मांग में बदल गया है। तेहरान, मशहद, तब्रिज, क़ोम और जहेदान जैसे शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर Supreme Leader आयतोल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ा दमन किया है। इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, हजारों लोग गिरफ्तार हुए हैं और कई जगहों पर गोलियों का उपयोग भी किया गया है। इसके कारण दर्जनों लोग मारे गए और हजारों लोग हिरासत में हैं। विदेशों को दोष देने का आरोप Iran के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल इन विरोध प्रदर्शनों को भड़काने में शामिल हैं। अराघची ने कहा कि ये देश शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक संघर्ष में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, तेहरान ने इस बाबत UN Security Council को पत्र भेजा है। हालांकि, विशेषज्ञ और मानवाधिकार संगठन मानते हैं कि यह प्रदर्शन देश के अंदर की समस्याओं — जैसे आर्थिक संकट, राजनीतिक दबाव और लंबे समय से चली आ रही नाराजगी — के कारण हैं। विदेशी हस्तक्षेप का आरोप अक्सर सरकार की कठोर कार्रवाई को सही ठहराने के लिए लगाया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती सरकार ने हाल ही में उन लोगों पर सख्त कार्रवाई की है, जिन पर इज़राइल की खुफिया एजेंसी Mossad के लिए जासूसी का आरोप था। यह कदम विरोध प्रदर्शन और विदेशी हस्तक्षेप के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है। जनता की उम्मीद और आंदोलन ईरानी जनता अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गई है। यह आंदोलन अब राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की दिशा में बढ़ रहा है। हर दिन नए शहरों में प्रदर्शन होते हैं, और लोगों की आवाज़ तेज़ होती जा रही है। Iran Protest 2026 न सिर्फ़ एक आर्थिक संघर्ष है, बल्कि यह जनता की आवाज़, उम्मीद और बदलाव की मांग का प्रतीक बन गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mamata Banerjee

ED vs Mamata Banerjee Supreme Court में I-PAC Raid विवाद पर नया मोड़

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ Enforcement Directorate (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Writ Petition) दायर की है। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने I-PAC जांच के दौरान ED अधिकारियों को धमकाया और उनकी जांच में बाधा डाली। याचिका में ED के अधिकारियों निशांत कुमार, विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडिला ने कहा है कि जब वे कोलकाता में छानबीन (Search & Seizure) कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अचानक मौके पर पहुंचे। ED का दावा है कि इस दौरान उनके दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जबरन ले लिए गए, जिससे मामले की जांच प्रभावित हुई। ED ने सुप्रीम कोर्ट से अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही, ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील भी की गई है। मामले की पृष्ठभूमि (Background) यह विवाद I-PAC और कोयला हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। पहले ED ने इसे कोलकाता हाई कोर्ट में उठाया था, लेकिन सुनवाई स्थगित (Adjourned) कर दी गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने Supreme Court में Caveat दाखिल किया ताकि कोर्ट किसी भी आदेश से पहले उनकी दलील सुने। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ (Political Reactions) यह मामला अब Supreme Court में विचाराधीन है और आने वाले दिनों में सुनवाई होने की उम्मीद है। I-PAC raid और ED vs Mamata Banerjee की यह लड़ाई न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि कानूनी और संवैधानिक (Legal & Constitutional) दृष्टि से भी ध्यान आकर्षित कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Price Alert सोने और चांदी की Record रैली, कब करें Investment

सोना (Gold) और चांदी (Silver) ने जनवरी 2026 की शुरुआत में इतिहास रच दिया है। दुनियाभर के बाजारों में ये दोनों धातुएं रिकॉर्ड हाई पर पहुँच गई हैं, और निवेशकों के लिए यह एक नई चर्चा का विषय बन गई हैं। International Market में सोना Gold और चांदी Silver की रफ्तार Global uncertainty और डॉलर की कमजोरी ने सोना और चांदी को और attractive बना दिया है। तेजी के मुख्य कारण (Reasons Behind Surge) इन तीन कारणों ने मिलकर Gold और Silver के भाव को इतिहास की ऊंचाई पर पहुँचाया। Investors और Buyers के लिए सुझाव Summary: Gold और Silver की Current Situation Gold और Silver आज निवेशकों के लिए opportunities और challenges दोनों लेकर आए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi in Gujarat सोमनाथ की आस्था और Rajkot का विकास एक साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का तीन दिन का गुजरात दौरा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी विरासत और भविष्य की दिशा को एक साथ दिखाने वाला सफर बन गया।सोमनाथ के पवित्र तट से लेकर राजकोट के निवेश मंच तक, हर पड़ाव पर भारत के गौरव और विकास की झलक साफ दिखाई दी। Somnath Swabhiman Parv: इतिहास जो आज भी जीवित है गिर सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ इस यात्रा का सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक हिस्सा रहा।प्रधानमंत्री मोदी ने यहां शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया, जिसमें घोड़ों का जुलूस, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भव्य ड्रोन शो शामिल था। सोमनाथ मंदिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की जिजीविषा का प्रतीक है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि— सोमनाथ की कहानी हार की नहीं, बल्कि हर बार फिर उठ खड़े होने की कहानी है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे महमूद गजनवी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं के हमलों के बावजूद यह मंदिर बार-बार पुनर्निर्मित हुआ और आज भी उतनी ही मजबूती से खड़ा है।यह संदेश सिर्फ अतीत के लिए नहीं, बल्कि आज के भारत के आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। Rajkot में Vibrant Gujarat Regional Conference सोमनाथ से सीधे राजकोट पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने Vibrant Gujarat Regional Conference (Kutch–Saurashtra) का उद्घाटन किया।यह मंच गुजरात की निवेश क्षमता, उद्योग और भविष्य की अर्थव्यवस्था को दुनिया के सामने रखने के लिए था। पीएम मोदी (PM Modi) ने बताया कि कच्छ और सौराष्ट्र अब भारत के ग्रीन एनर्जी हब बन रहे हैं।कच्छ में बन रहा 30 GW का हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी पार्क दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक होगा। उन्होंने कहा कि गुजरात अब सिर्फ उद्योगों का राज्य नहीं, बल्किग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, MSME और स्टार्टअप्स का नया सेंटर बन चुका है। Investment, Jobs और Youth की नई दिशा राजकोट सम्मेलन में निवेशकों और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा किगुजरात में अब इंटरनेशनल एजुकेशन हब, स्किल यूनिवर्सिटी और डिफेंस लॉजिस्टिक्स ट्रेनिंग पर खास फोकस किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा युवाओं को मिलेगा —नौकरियां, स्टार्टअप्स और ग्लोबल लेवल पर काम करने के मौके। India Growth Story में Gujarat की बड़ी भूमिका PM Modi ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और गुजरात इस विकास की रीढ़ बना हुआ है।पोर्ट, इंडस्ट्री, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर गुजरात भारत को Viksit Bharat 2047 की ओर ले जा रहा है। सोमनाथ से राजकोट तक: एक भारत की दो तस्वीरें इस पूरे दौरे में दो भारत एक साथ दिखाई दिए— यही PM Modi की गुजरात यात्रा की असली पहचान रही —जहां विरासत भी है और विज़न भी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PSLV-C62

ISRO PSLV-C62 Anvesha Mission तीसरे Stage की गड़बड़ी

आज सुबह श्रीहरिकोटा से जब ISRO का PSLV-C62 आसमान में उठा, तो देश की धड़कनें उसके साथ तेज़ हो गईं। यह भारत का 2026 का पहला स्पेस मिशन था और इसके केंद्र में था DRDO का ‘अन्वेषा (EOS-N1)’ सैटेलाइट—एक ऐसा उपग्रह, जिससे देश की अर्थ-अवलोकन और रणनीतिक क्षमताएँ नई ऊँचाई पर पहुँचने वाली थीं। शुरुआत बिलकुल सटीक रही, लेकिन कहानी ने तीसरे चरण में अचानक मोड़ ले लिया। लॉन्च से लेकर उम्मीदों तक PSLV-C62 ने तय समय पर उड़ान भरी और पहले दो चरणों ने योजना के मुताबिक काम किया। मिशन में अन्वेषा के साथ कई सह-यात्री उपग्रह भी थे—भारत और विदेशों के छोटे-बड़े पेलोड, जो विज्ञान, संचार और पृथ्वी अवलोकन से जुड़े अहम काम करने वाले थे। तीसरे स्टेज (PS3) में क्या हुआ? जैसे ही रॉकेट का तीसरा चरण सक्रिय हुआ, फ्लाइट-पाथ में विचलन (deviation) दर्ज किया गया। ISRO ने इसे एक तकनीकी अनोमली बताया और साफ कहा कि उस पल से मिशन का ऑर्बिट-इन्सर्शन प्रभावित हो गया। शुरुआती संकेत यही हैं कि उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका और टेलीमेट्री डेटा का विश्लेषण जारी है। मिशन निदेशक की भाषा में कहें तो “तीसरे चरण के अंत में वाहन के व्यवहार में असामान्यता दिखी”—यही वह पल था जिसने उम्मीदों की उड़ान को थाम लिया। अन्वेषा’ क्यों था इतना खास? अन्वेषा (EOS-N1) को भारत की उन्नत Earth Observation और निगरानी क्षमताओं के लिए बनाया गया है। बेहतर स्पेक्ट्रल इमेजिंग से लेकर तेज़ डेटा-डिलीवरी तक, यह उपग्रह सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और संसाधन निगरानी जैसे क्षेत्रों में बड़ा योगदान दे सकता था। इसलिए इस मिशन का भावनात्मक और रणनीतिक महत्व दोनों ही बहुत बड़ा था। झटका, लेकिन हौसला बरकरार PSLV भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट रहा है। हर असफलता—या आंशिक असफलता—से ISRO ने सीखा है और और भी मज़बूत होकर लौटा है। इस बार भी डेटा-ड्रिवन जांच चल रही है, ताकि तीसरे स्टेज की जड़ तक पहुँचा जा सके और अगला मिशन और सुरक्षित बने। ISRO जल्द ही विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट साझा करेगा—क्या प्रेशर में गिरावट आई, थ्रस्ट में असंगति थी या किसी सेंसर ने गलत संकेत दिया? जवाब आएँगे। और उनके साथ आएगा अगला लॉन्च—ज़्यादा सावधानी, ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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US

US Sanctions Law 2025 रूस से तेल खरीदने पर 500% Tariff का खतरा

अमेरिका ने रूस के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए “Sanctioning Russia Act 2025” को हरी झंडी दे दी है। इस नए कानून की सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत रूस से तेल और ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।इस फैसले का असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है, बल्कि India, China, Brazil जैसे देशों और पूरी दुनिया के Stock Market पर भी दिखने लगा है। US Sanctions Law 2025 क्या है? (What is Sanctioning Russia Act?) इस कानून का मकसद रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना है, ताकि उसकी तेल और गैस से होने वाली कमाई पर रोक लग सके।अमेरिका का मानना है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। इसी वजह से अमेरिका अब ऐसे देशों पर: India पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है? भारत पिछले कुछ समय से रूस से कच्चा तेल सस्ते दामों पर खरीद रहा है। इससे: लेकिन अगर अमेरिका ने यह 500% Tariff लागू कर दिया, तो: यानी सस्ता तेल मिलने का फायदा कहीं महंगा न पड़ जाए। Stock Market क्यों गिरा? (Market Fall Reasons) इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में डर साफ दिखा। असल में बाजार को सबसे ज्यादा डर अनिश्चितता (Uncertainty) का है। निवेशक नहीं जानते कि यह कानून कब और कितनी सख्ती से लागू होगा। Global Oil Market में क्या बदलेगा? अगर रूस से तेल खरीदना मुश्किल हुआ तो: हालांकि इसी बीच अमेरिका ने Venezuela Oil Sanctions में राहत के संकेत दिए हैं, जिससे भारत को कुछ वैकल्पिक रास्ते मिल सकते हैं। यह भारत के लिए एक छोटी लेकिन अहम राहत मानी जा रही है। India-US Relations पर असर पड़ेगा? भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार हैं, लेकिन यह कानून दोनों देशों के रिश्तों की परीक्षा ले सकता है।अब भारत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं: आने वाले दिनों में Diplomatic Talks और Trade Negotiations तेज होने की संभावना है। आगे क्या हो सकता है? (What’s Next?) अभी यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी संसद में आगे की प्रक्रिया बाकी है।लेकिन इतना तय है कि: निवेशकों और सरकारों – दोनों को अब हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kolkata

Kolkata ED Raid IPAC Chief Prateek Jain के घर और ऑफिस पर कार्रवाई, ममता बनर्जी ने जताया गुस्सा

Kolkata में आज IPAC (Indian Political Action Committee) के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और उनके सॉल्ट लेक स्थित ऑफिस पर Enforcement Directorate (ED) ने छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित money laundering और financial irregularities की जांच के तहत की जा रही है। सुबह से ED की टीम दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में जुटी हुई है। इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी现场 पहुंचीं। उन्होंने ED के अधिकारियों से बातचीत की और मीडिया के सामने इसे राजनीतिक targeting करार दिया। ममता ने कहा कि ED केवल IPAC से TMC के अंदरूनी दस्तावेज और sensitive जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि केंद्र की एजेंसियां राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में सीधे हस्तक्षेप कर रही हैं। ममता बनर्जी की यह कदम भावनात्मक और साहसिक दोनों नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि TMC और उसके सहयोगियों को दबाव में लाने की यह कोशिश चुनावों से पहले की गई है। दूसरी ओर, BJP नेताओं ने इस मामले को TMC पर आरोप लगाने का मौका बताया। उनका कहना है कि ममता और उनकी पार्टी अनियमितताओं को छिपा रही हैं। बीजेपी ने इसे accountability और governance से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि IPAC जैसी राजनीतिक consultancy कंपनियों की कार्रवाई अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। IPAC चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए उनके financial records पर जांच राजनीति में महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। इस ED छापेमारी ने राज्य और केंद्र के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कानूनी और राजनीतिक developments पर सभी की नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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खंडवा में बैंक के कब्जे वाले मकान में घुसा परिवार, 4 पर केस दर्ज

खंडवा के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक जैन परिवार के खिलाफ जबरन कब्जे का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि बैंक द्वारा सील किए गए मकान में परिवार ने पीछे के दरवाजे से घुसकर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। 86 लाख का लोन नहीं चुकाया मामला सौमित्र नगर का है, जहां चंद्रकुमार जैन ने एयू बैंक से अपने मकान को गिरवी रखकर 86 लाख 67 हजार रुपए का लोन लिया था। लंबे समय तक लोन नहीं चुकाने पर बैंक ने संपत्ति को अपने आधिपत्य में लेकर मकान सील कर दिया था। कलेक्टर के आदेश पर बैंक को मिला कब्जा जानकारी के अनुसार, बैंक ने बकाया राशि को लेकर नोटिस जारी किए थे, लेकिन परिवार ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद मामला कलेक्टर तक पहुंचा, जहां से बैंक के पक्ष में आदेश जारी हुआ। तहसीलदार की मौजूदगी में बैंक को मकान का कब्जा दिलाया गया। पीछे के गेट से घुसकर कब्जे की कोशिश आरोप है कि इसके बावजूद जैन परिवार पीछे के रास्ते से मकान में घुस गया और दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। बैंक अधिकारियों ने इसकी शिकायत पुलिस से की। परिवार के 4 सदस्यों पर केस पुलिस ने शिकायत के आधार पर नवीन कुमार जैन, प्रवीण कुमार जैन, निर्मला जैन और चंद्रकुमार जैन के खिलाफ जबरन कब्जे की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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अब पेट्रोल में होगा बड़ा बदलाव! गाड़ियां चलेंगी ‘शराब वाले फ्यूल’ से

भारत सरकार ने पेट्रोल में 85% तक एथेनॉल मिलाने (E85 Fuel) का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। जानिए इसका आपकी गाड़ी, माइलेज और जेब पर क्या असर पड़ेगा। E85 Petrol: देश में फ्यूल सिस्टम बदलने की तैयारी भारत में अब पेट्रोल का खेल बदलने वाला है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) करने का बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस प्रस्ताव के तहत न सिर्फ E85 बल्कि E100 (100% एथेनॉल) फ्यूल को भी शामिल करने की तैयारी है, यानी आने वाले समय में गाड़ियां पूरी तरह “अल्कोहल बेस्ड फ्यूल” पर चल सकती हैं। क्या है E85 Fuel? (Simple भाषा में समझें) अब तक देश में E20 लागू हो चुका है, लेकिन सरकार इससे आगे बढ़कर E85 की दिशा में काम कर रही है। सरकार ऐसा क्यों कर रही है? इस फैसले के पीछे कई बड़े कारण हैं: 👉 तेल आयात पर निर्भरता कम करना👉 पेट्रोल खर्च घटाना👉 पर्यावरण को कम नुकसान (कम कार्बन उत्सर्जन)👉किसानों को फायदा (एथेनॉल गन्ना/मक्का से बनता है) भारत पहले ही E20 लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब अगला कदम E85 है। क्या आपकी गाड़ी में चलेगा E85? यह सबसे बड़ा सवाल है 👇 ❌ अभी की ज्यादातर गाड़ियां E85 के लिए तैयार नहीं हैं✔ इसके लिए Flex Fuel Vehicles (FFV) चाहिए होंगी✔ कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी लानी पड़ेगी यानी तुरंत बदलाव नहीं होगा, लेकिन आने वाले सालों में नई गाड़ियां इस हिसाब से डिजाइन होंगी। क्या होंगे इसके असर? गाड़ियों पर असर पेट्रोल पंप पर बदलाव आपकी जेब पर असर Auto कंपनियों की चिंता भी बढ़ी ऑटो इंडस्ट्री इस बदलाव को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं है। कंपनियों का कहना है कि: आगे क्या होगा? E85 Fuel भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।लेकिन सच यह भी है कि यह बदलाव धीरे-धीरे ही लागू होगा। 👉 अभी के लिए घबराने की जरूरत नहीं👉 लेकिन भविष्य में गाड़ी खरीदते समय “Flex Fuel” जरूर ध्यान में रखें

दलबदल मामले में हाईकोर्ट की सख्ती, 720 दिन की देरी पर सवाल

सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में दायर याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह याचिका नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की है, जिसमें उनकी विधायकी खत्म करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा और मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। “90 दिन में फैसला होना चाहिए, 720 दिन क्यों लगे?” चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दलबदल मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर निर्णय देने की समय सीमा तय की है। ऐसे में 720 दिन बीत जाने के बाद भी फैसला नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन स्पीकर के संज्ञान में लाई जाए। स्पीकर के पास लंबित है मामला महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले की सुनवाई विधानसभा स्पीकर के समक्ष जारी है और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच की जा रही है। वहीं उमंग सिंघार के वकील विभोर खंडेलवाल ने भी मांग की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 90 दिन की समय सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए। बीजेपी कार्यक्रम में दिखने के बाद बढ़ा विवाद दरअसल, निर्मला सप्रे ने 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ बीजेपी के मंच पर नजर आई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई थी। 5 जुलाई 2024 को उमंग सिंघार ने स्पीकर के समक्ष याचिका लगाकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की। जब इस पर फैसला नहीं हुआ, तो नवंबर 2024 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किए 12वीं बोर्ड के नतीजे

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस साल कुल 83.04% छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। टॉप-10 मेरिट लिस्ट में कुल 43 छात्रों ने जगह बनाई है। जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप बलौदाबाजार जिले के पलारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र जिज्ञासु वर्मा ने 98.60% अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर बेमेतरा जिले की छात्रा ओमनी वर्मा रहीं, जिन्होंने 98.20% अंक हासिल किए।तीसरे स्थान पर रायगढ़ जिले के छात्र कृष महंत रहे, जिनके 97.80% अंक आए। इन जिलों के छात्रों का दबदबा रायगढ़, जशपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और कांकेर जैसे जिलों के छात्रों ने टॉप-10 में जगह बनाई है। इससे साफ है कि छोटे शहरों के छात्र भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टॉपर्स को मिलेंगे 1.5 लाख रुपए राज्य सरकार ने टॉपर्स को 1.5 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। टॉपर जिज्ञासु वर्मा ने बताया कि वे आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहते हैं। उनके पिता एक किराना दुकान चलाते हैं। टॉप-10 स्टूडेंट्स लिस्ट (CGBSE 12th 2026) इन वेबसाइट्स पर देख सकते हैं रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट CGBSE की आधिकारिक वेबसाइट सहित कुल 9 वेबसाइट्स पर देख सकते हैं। (स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपना रोल नंबर तैयार रखें) 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
E85 Petrol

Petrol vs Ethanol: E85 Petrol Launch से बदल जाएगा India का Fuel System

भारत के फ्यूल सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है। केंद्र सरकार ने E85 Petrol(85% Ethanol + 15% Petrol) को लेकर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। अगर यह लागू होता है, तो आने वाले समय में हमारी गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल के बजाय ज्यादा “ग्रीन फ्यूल” पर दौड़ती नजर आ सकती हैं। यह सिर्फ एक टेक्निकल बदलाव नहीं है—बल्कि इसका असर आपकी जेब, किसानों की आय और देश की ऊर्जा नीति तक पड़ेगा। क्या है E85 Petrol? (Simple समझें) E85 एक हाई एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है, जिसमें: अभी भारत में E20 फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन E85 उससे कहीं आगे का स्टेप माना जा रहा है। सरकार का प्लान क्या है? सरकार चाहती है कि भारत धीरे-धीरे पेट्रोल-डिपेंडेंसी से बाहर निकले। इसी दिशा में: फिलहाल यह ड्राफ्ट स्टेज में है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। क्यों जरूरी है E85? (Big Reasons) 1. Import Bill होगा कम भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। एथेनॉल बढ़ने से यह खर्च कम हो सकता है 2. Pollution में कमी Ethanol एक क्लीनर फ्यूल है इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को राहत मिलेगी 3. Farmers को सीधा फायदा क्या आपकी Car E85 पर चल पाएगी? यहीं पर सबसे बड़ा ट्विस्ट है। हर गाड़ी E85 पर नहीं चल सकती मतलब साफ है—नई टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियां ही इस बदलाव का पूरा फायदा उठा पाएंगी। आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

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