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India Weather 5 राज्यों में बारिश-ओले Delhi Fog और पहाड़ों पर Snowfall

मार्च के आखिरी दिनों में मौसम ने अचानक ऐसा रुख बदला कि देश के कई हिस्सों में लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई। मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 5 राज्यों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि ने किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं पहाड़ी इलाकों में हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के द्रास में ताज़ा बर्फबारी ने ठंड को फिर से बढ़ा दिया। दूसरी ओर राजधानी दिल्ली सुबह धुंध की चादर में लिपटी नजर आई। MP और Rajasthan में बारिश-ओलों से बढ़ी किसानों की चिंता मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय Western Disturbance (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में यह बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और सागर संभाग में कई जगह तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। कुछ जिलों में ओले गिरने से खेतों में खड़ी गेहूं, चना और सब्जियों की फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसानों के लिए यह बारिश राहत कम और चिंता ज्यादा लेकर आई है। राजस्थान में भी मौसम का यही असर देखने को मिला। जयपुर, कोटा, बूंदी और भीलवाड़ा जैसे इलाकों में अचानक बदले मौसम ने लोगों को गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया। कई जगह सड़क पर पानी भरने और ट्रैफिक धीमा होने की स्थिति भी बनी। Himachal और Drass में ताज़ा Snowfall से बढ़ी ठंड पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी ने एक बार फिर सर्द माहौल बना दिया है। शिमला, कुल्लू और आसपास के क्षेत्रों में ताज़ा बर्फ गिरने से पर्यटकों के चेहरे खिल उठे। वहीं लद्दाख के द्रास में नई बर्फ की परत जमने से तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। स्थानीय लोगों के लिए यह मौसम रोजमर्रा की चुनौतियां भी साथ लाता है, क्योंकि कई रास्तों पर फिसलन बढ़ जाती है। Delhi-NCR में धुंध और हल्की बारिश से ट्रैफिक प्रभावित उधर Delhi-NCR में सुबह धुंध और हल्के कोहरे ने विजिबिलिटी को प्रभावित किया। ऑफिस जाने वाले लोगों को ट्रैफिक में धीमी रफ्तार का सामना करना पड़ा। कुछ इलाकों में हल्की बारिश और ठंडी हवाओं से मौसम सुहाना जरूर हुआ, लेकिन सुबह की धुंध ने सफर को मुश्किल बना दिया। अगले 48 घंटे अहम, मौसम विभाग ने दी सलाह मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 48 घंटों तक यह सिस्टम सक्रिय रह सकता है। ऐसे में कई राज्यों में बारिश, thunderstorm, hailstorm और पहाड़ों में snowfall जारी रहने की संभावना है। किसानों, यात्रियों और पहाड़ी इलाकों में जाने वाले पर्यटकों को मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LPG

War Crisis का असर हर घर पर Commercial LPG कमी से Plastic Units बंद, महंगाई बढ़ने की आशंका

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात की गर्मी अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर भारत के घरों की रसोई, छोटे कारोबार और आम परिवारों के मासिक बजट तक महसूस होने लगा है। Commercial LPG crisis, प्लास्टिक यूनिट्स की बंदी और सप्लाई चेन में रुकावट ने रोजमर्रा की जरूरतों को महंगा करने की जमीन तैयार कर दी है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसका असर उन चीजों पर पड़ सकता है, जिनके बिना एक सामान्य परिवार का दिन नहीं चलता—दूध, किराना, दवाइयां, पैक्ड फूड और घरेलू प्लास्टिक सामान। Commercial LPG shortage से क्यों बढ़ रही है महंगाई? देश के कई हिस्सों में कमर्शियल LPG की कमी के कारण हजारों plastic manufacturing units और छोटे उद्योग प्रभावित हुए हैं। कई यूनिट्स ने उत्पादन कम कर दिया है, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया। प्लास्टिक इंडस्ट्री सिर्फ बाल्टी या पाइप तक सीमित नहीं है। दूध के पाउच, दवाइयों की पैकिंग, बिस्किट-नमकीन के रैपर, पानी की बोतलें, कंटेनर—सब इसी सप्लाई चेन का हिस्सा हैं। जैसे ही उत्पादन लागत बढ़ती है, उसका सीधा असर बाजार की कीमतों पर दिखने लगता है। Milk, Kirana और Daily Essentials पर सीधा असर एक आम परिवार सुबह की शुरुआत दूध से करता है। लेकिन अगर पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और कोल्ड स्टोरेज की लागत बढ़ेगी, तो milk price hike लगभग तय माना जा रहा है। इसी तरह किराना में इस्तेमाल होने वाले पैक्ड आइटम—तेल, मसाले, बिस्किट, स्नैक्स, साबुन और डिटर्जेंट—भी महंगे हो सकते हैं। भले ही हर प्रोडक्ट पर बढ़ोतरी ₹2 से ₹5 लगे, लेकिन महीने के अंत में यही छोटी बढ़ोतरी जेब पर बड़ा असर डालती है। यही वह हिस्सा है जो हर मध्यमवर्गीय परिवार को सबसे ज्यादा परेशान करता है—कमाई वही, लेकिन खर्च धीरे-धीरे बढ़ता हुआ। Medical bills भी बढ़ सकते हैं इस संकट का असर सिर्फ खाने-पीने तक नहीं रहेगा। अस्पतालों और दवाइयों में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें—जैसे IV bottles, syringes, medicine containers और diagnostic plastic items—पेट्रोकेमिकल बेस्ड होती हैं। अगर कच्चा माल महंगा हुआ, तो medical treatment cost भी बढ़ सकती है। यानी बीमारी का इलाज भी पहले से थोड़ा महंगा महसूस हो सकता है। घर की छोटी जरूरतें भी होंगी costly रोज इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक सामान जैसे: इनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है। आमतौर पर लोग इन खर्चों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन यही छोटी-छोटी खरीदारी हर महीने बजट को प्रभावित करती है। Human impact: सबसे ज्यादा दबाव किस पर? इस तरह की महंगाई का सबसे ज्यादा असर middle class families, छोटे दुकानदारों और daily budget पर चलने वाले घरों पर पड़ता है। जहां पहले महीने का राशन एक तय रकम में आ जाता था, अब वही लिस्ट धीरे-धीरे महंगी होती दिख सकती है। परिवारों को या तो कुछ चीजें कम करनी पड़ेंगी या बजट फिर से बनाना होगा। युद्ध की खबरें अक्सर टीवी स्क्रीन पर दूर की लगती हैं, लेकिन जब उसी का असर रसोई के दूध, बच्चों के टिफिन और मेडिकल स्टोर के बिल पर दिखे, तब उसकी सच्चाई ज्यादा करीब महसूस होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Assam

Assam Election 2026 BJP का बड़ा Manifesto, UCC और Love Jihad Law पर फोकस

Assam विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना बहुप्रतीक्षित संकल्प पत्र (Manifesto) जारी कर दिया है। गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में Nirmala Sitharaman की मौजूदगी में इसे पेश किया गया, जहां पार्टी ने साफ संकेत दिया कि इस बार चुनाव सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि पहचान और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी लड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में भाजपा ने 31 वादों के जरिए राज्य के लिए अपना रोडमैप सामने रखा है। इस घोषणापत्र में जहां एक ओर इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर ‘लव जिहाद’, अवैध घुसपैठ और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दे भी केंद्र में हैं। पहचान और कानून व्यवस्था पर फोकस घोषणापत्र की सबसे ज्यादा चर्चा उन वादों की हो रही है, जिनमें ‘Love Jihad’ और ‘Land Jihad’ के खिलाफ सख्त कानून लाने की बात कही गई है। भाजपा का कहना है कि इन कानूनों के जरिए सामाजिक संतुलन बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही पार्टी ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया है। सरकार बनने पर कथित तौर पर कब्जाई गई जमीन को वापस दिलाने के लिए अभियान चलाने की बात भी कही गई है। यह मुद्दा असम की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील रहा है और इस बार भी चुनावी बहस का केंद्र बनने वाला है। UCC पर बड़ा संकेत भाजपा ने अपने घोषणापत्र में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने का भी वादा किया है। हालांकि, इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही गई है, ताकि स्थानीय और पारंपरिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा जा सके। Himanta Biswa Sarma पहले भी इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय रख चुके हैं। रोजगार और विकास का वादा राज्य के युवाओं को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देने की योजनाएं भी शामिल हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में पार्टी ने अगले पांच वर्षों में करीब ₹5 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है। इसमें सड़क, रेलवे, एयर कनेक्टिविटी, मेडिकल कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार पर खास जोर दिया गया है। भाजपा ने “One District, One Medical College” और बाढ़-मुक्त असम जैसे विजन भी पेश किए हैं, जो राज्य की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को संबोधित करने की कोशिश हैं। चुनावी रणनीति क्या कहती है? राजनीतिक नजरिए से देखें तो भाजपा ने इस बार विकास + पहचान की राजनीति का मिश्रण अपनाया है। एक तरफ रोजगार, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए युवा और मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ UCC, घुसपैठ और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों के जरिए अपने कोर वोटबैंक को मजबूत करने का प्रयास। जनता के लिए क्या मायने? आम लोगों के लिए यह घोषणापत्र कई उम्मीदें लेकर आता है—रोजगार के नए अवसर, बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं, और सुरक्षा से जुड़े वादे। लेकिन इन वादों का असली असर तभी दिखेगा जब वे जमीन पर उतरेंगे। असम की जनता अब यह तय करेगी कि इन वादों पर कितना भरोसा किया जाए। चुनावी माहौल गर्म हो चुका है, और आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि किसकी रणनीति मतदाताओं के दिल तक पहुंचती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FASTag

1अप्रैल से बदल जाएंगे 10 बड़े नियम Toll Cashless, FASTag महंगा, Tax और PAN Update

हर साल 1 अप्रैल सिर्फ नया वित्त वर्ष ही नहीं लाता, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई जरूरी बदलाव भी साथ लेकर आता है। इस बार भी टोल पेमेंट, FASTag, Income Tax, PAN और बैंकिंग से जुड़े नियम बदलने जा रहे हैं, जिनका असर सीधे आम लोगों की यात्रा, खर्च और टैक्स प्लानिंग पर पड़ेगा। अगर आप हाईवे पर सफर करते हैं, सैलरी पाते हैं या टैक्स बचाने की तैयारी में हैं, तो यह बदलाव आपके लिए बेहद अहम हैं। Cashless Toll System: अब टोल प्लाजा पर कैश लगभग खत्म 1 अप्रैल 2026 से देशभर के कई राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा cashless toll collection system पर शिफ्ट होंगे। इसका मतलब है कि अब FASTag या डिजिटल पेमेंट सबसे जरूरी माध्यम बन जाएगा। यह कदम लंबी लाइनों को कम करने और सफर को तेज बनाने के लिए उठाया जा रहा है।जो लोग अभी भी कैश देकर टोल पार करने की सोच रहे हैं, उन्हें आगे चलकर डबल टोल या अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि सफर से पहले FASTag बैलेंस जरूर चेक कर लें। FASTag Annual Pass Update: आज सस्ता, कल महंगा नियमित हाईवे यूज़र्स के लिए एक और बड़ा अपडेट है। FASTag annual pass की कीमत ₹3,000 से बढ़कर ₹3,075 हो सकती है। रकम भले छोटी लगे, लेकिन रोज हाईवे इस्तेमाल करने वालों के लिए यह बदलाव मायने रखता है।अगर आप अक्सर रोड ट्रिप, बिज़नेस ट्रैवल या डेली अप-डाउन करते हैं, तो आज ही पुरानी दर पर इसे रिन्यू करना फायदे का सौदा हो सकता है। Income Tax New Rules: Tax Year का नया कॉन्सेप्ट 1 अप्रैल से टैक्स सिस्टम में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब पुराने Assessment Year और Previous Year की जगह Tax Year शब्द का इस्तेमाल ज्यादा होगा, जिससे टैक्स फाइलिंग भाषा आसान बनेगी।इसके साथ नई टैक्स व्यवस्था में ₹12 लाख तक राहत की चर्चा ने मिडिल क्लास और salaried लोगों को राहत की उम्मीद दी है। ऐसे में 31 मार्च तक अपने 80C, NPS, HRA और insurance proofs जरूर अपडेट कर लेना समझदारी होगी। PAN-Aadhaar Rules: छोटी गलती पड़ सकती है भारी PAN और Aadhaar से जुड़े नियम भी सख्त हो रहे हैं। अगर आपके नाम, जन्मतिथि या दस्तावेज़ों में mismatch है, तो PAN correction या नए आवेदन में परेशानी आ सकती है।कई लोग इस काम को टालते रहते हैं, लेकिन बाद में बैंक KYC, ITR filing और loan process में यही छोटी गलती बड़ी दिक्कत बन जाती है। इसलिए आज ही documents cross-check कर लें। आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है? सीधी भाषा में समझें तो 1 अप्रैल के बाद: यानी आज के 10 मिनट, कल का extra खर्च बचा सकते हैं। अक्सर लोग ऐसे बदलावों को छोटी खबर समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन बाद में यही penalty, double toll या tax issue की वजह बनते हैं।
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Bihar Temple Tragedy शीतलाष्टमी में श्रद्धालुओं की भीड़ भक्तों के बीच भगदड़, कई की मौत

बिहार के नालंदा जिले के मघड़ा स्थित प्राचीन शीतला मंदिर (Shitala Temple) में चैत्र माह के आखिरी मंगलवार को भारी भीड़ के बीच भयावह भगदड़ (stampede) की घटना हुई। पूजा के दौरान उमड़ी भीड़ के कारण अफरातफरी फैल गई और लोगों के ऊपर गिरने से 8 लोगों की जान चली गई जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। क्या हुआ था? शीतलाष्टमी के पावन अवसर पर श्रद्धालु सुबह‑सुबह मंदिर में माता शीतला के दर्शन और पूजा करने पहुंचे थे। अचानक भीड़ अनुशासन खो बैठी और भगदड़ मच गई। कई लोग दबकर घायल हो गए और अफरातफरी के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। स्थानीय प्रशासन और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत‑बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कर इलाज दिया गया। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों का शोक गहरा है। भीड़ और आयोजन की स्थिति शीतलाष्टमी हिंदू परंपरा में माता शीतला की पूजा का विशेष पर्व है। इस दिन दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आते हैं। बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की कमी अक्सर इसी तरह के हादसों का कारण बनती है। प्रभाव और प्रशासन की प्रतिक्रिया प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य को तुरंत तेज किया और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने तथा घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। श्रद्धालु आस्था के साथ पहुंचे थे, लेकिन भीड़ नियंत्रण की कमी ने इस पावन दिन को दुःखद हादसे में बदल दिया। इस घटना ने फिर से यह साबित कर दिया कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और प्रवेश‑निकास मार्गों की सही व्यवस्था बेहद जरूरी है। भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए आयोजकों और प्रशासन को सतर्क रहना होगा, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था सुरक्षित रहे और किसी की जान खतरे में न पड़े। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Census 2027

Census 2027 India 33 सवालों के साथ शुरू होगा First Phase Live-in Couple भी होंगे Married Count

भारत में जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर तैयारियां अब जमीन पर दिखने लगी हैं। लंबे इंतजार के बाद सरकार ने पहले चरण यानी House Listing and Housing Census के लिए 33 अहम सवालों की सूची जारी कर दी है। Online Self-Enumeration Portal: घर बैठे भरें जानकारी इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लोग Online Self-Enumeration Portal के जरिए खुद जानकारी दर्ज कर सकेंगे। अब सिर्फ गणनाकर्मी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। परिवार का जिम्मेदार सदस्य मोबाइल नंबर और OTP के जरिए पोर्टल पर लॉगिन करके अपने घर की जानकारी पहले से भर सकता है। बाद में जब census enumerator घर आएगा, तो वह सिर्फ जानकारी का सत्यापन करेगा। इससे लोगों का समय बचेगा और डेटा की accuracy भी बढ़ेगी। पहले चरण के 33 सवाल: घर और जीवन स्तर की पूरी जानकारी पहले चरण में पूछे जाने वाले सवाल सीधे घर और जीवन स्तर से जुड़े हैं। इनमें शामिल हैं: सरकार का उद्देश्य यह है कि इन आंकड़ों से देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की सही तस्वीर सामने आए और welfare schemes को ground reality के अनुसार डिजाइन किया जा सके। Stable Live-in Couples भी होंगे Married Count में इस बार का सबसे चर्चित बदलाव है stable live-in couples को married category में गिनना। यदि कोई जोड़ा लंबे समय से साथ रह रहा है और उसका रिश्ता स्थिर पारिवारिक इकाई की तरह है, तो जनगणना में उन्हें “married” के रूप में दर्ज किया जाएगा। ध्यान रहे, यह सिर्फ census classification के लिए है और इसका कानूनी विवाह से कोई संबंध नहीं है। क्यों महत्वपूर्ण है Census 2027 का डेटा मानवीय नजरिए से देखें तो यह बदलाव भारत के बदलते सामाजिक ढांचे को भी दर्शाता है। बड़े शहरों में live-in relationships, nuclear families और डिजिटल भागीदारी अब आम होती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि Census 2027 data आने वाले वर्षों में housing, sanitation, internet access, urban planning और welfare schemes के लिए निर्णायक साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बंगाल

BJP vs TMC बंगाल में Election Hijack का दावा, Assam में Congress-AIUDF Clash से बढ़ा तनाव

चुनाव से पहले बंगाल में सियासी पारा हाई पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें खुले तौर पर धमकाने की कोशिश हो रही है। इसी मुद्दे को लेकर BJP ने चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की मांग की है। BJP का आरोप: वोटर्स को डराया जा रहा BJP नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC कार्यकर्ता बूथ स्तर पर माहौल अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का दावा है कि कुछ संवेदनशील इलाकों में वोटर्स को डराने की वजह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि इस बार बंगाल का चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि free and fair election की बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है। TMC का पलटवार और बढ़ता राजनीतिक तनाव दूसरी तरफ, TMC लगातार BJP पर पलटवार करते हुए चुनावी एजेंसियों और प्रशासनिक फैसलों के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगा रही है। मतदाता सूची, अधिकारियों के तबादले और बूथ प्रबंधन को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जमीनी स्तर पर यह तनाव कई जगह कार्यकर्ताओं की झड़पों के रूप में भी दिखाई दे रहा है, जिससे चुनावी हिंसा की आशंका बढ़ गई है। Assam में Congress-AIUDF कार्यकर्ताओं के बीच झड़प इसी बीच असम से भी राजनीतिक तनाव की खबर सामने आई है। यहां कांग्रेस और AIUDF कार्यकर्ताओं के बीच झड़प होने की सूचना है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विवाद स्थानीय स्तर पर समर्थकों की मौजूदगी और बूथ प्रभाव को लेकर शुरू हुआ, जो देखते ही देखते टकराव में बदल गया। हालांकि प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हालात को संभाल लिया, लेकिन इस घटना ने राज्य की चुनावी गर्मी को और बढ़ा दिया है। क्या कहते हैं चुनावी संकेत? बंगाल और असम की इन घटनाओं से साफ है कि चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष और आक्रामक होता जा रहा है। मतदाताओं की नजर अब चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले दिनों में दोनों राज्यों का चुनावी माहौल और भी हाई-वोल्टेज होने के संकेत दे रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitish Kumar

Bihar Politics Nitish Kumar ने छोड़ा पद बोले अशोक चौधरी- दूसरा नीतीश नहीं

बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा देकर एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी। इसी के साथ भाजपा नेता Nitin Nabin ने भी अपने विधायक (MLA) पद से त्यागपत्र दे दिया। दोनों नेताओं के इस कदम ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में दोनों नेताओं के Rajya Sabha के लिए चुने जाने के बाद यह इस्तीफा लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन जैसे ही इसकी औपचारिक घोषणा हुई, बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया। Ashok Choudhary Emotional: “देश में दूसरा नीतीश नहीं हो सकता” इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री Ashok Choudhary भावुक नजर आए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा,“देश में दूसरा नीतीश नहीं हो सकता।” यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि Nitish Kumar सिर्फ एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति की एक ऐसी धुरी हैं, जिनके आसपास पिछले कई वर्षों से सत्ता की दिशा तय होती रही है। उनकी भावुक प्रतिक्रिया ने जेडीयू कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी एक अलग भावनात्मक माहौल बना दिया। Rajya Sabha में नई पारी, Bihar Politics में नई चर्चा Nitish Kumar के राज्यसभा जाने को सिर्फ एक संसदीय बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे Bihar Politics 2026 का बड़ा turning point भी कहा जा रहा है। विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषद के बाद अब राज्यसभा में उनकी एंट्री उन्हें उन चुनिंदा नेताओं में शामिल करती है, जिन्हें भारतीय लोकतंत्र के लगभग हर बड़े सदन का अनुभव है। यही वजह है कि उनके इस फैसले को राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Nitin Nabin Resignation से Bankipur सीट पर बढ़ी हलचल वहीं भाजपा नेता Nitin Nabin के MLA पद छोड़ने के बाद Bankipur Assembly Seat पर उपचुनाव की संभावना तेज हो गई है। पटना की इस अहम सीट पर अब सभी दलों की नजर टिक गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीट आने वाले समय में NDA और विपक्ष, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकती है। क्या Bihar को मिलेगा नया CM? Nitish Kumar के इस कदम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बिहार को जल्द नया मुख्यमंत्री मिल सकता है? हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ साफ नहीं है, लेकिन सत्ता के गलियारों में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है। कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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China

North Korea के लिए China की सीधी उड़ान 6 साल बाद शुरू Asia Geopolitics में बढ़ी हलचल

करीब 6 साल बाद चीन (China) और उत्तर कोरिया (North Korea) के बीच सीधी हवाई सेवा फिर से शुरू हो गई है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से बंद पड़ी Beijing to Pyongyang direct flight service अब दोबारा शुरू होने जा रही है, जिससे एशिया की कूटनीति और क्षेत्रीय संपर्क को नया मोड़ मिल सकता है। Air China ने लिया बड़ा फैसला China की राष्ट्रीय एयरलाइन Air China ने बीजिंग से प्योंगयांग के लिए सीधी यात्री उड़ान सेवा बहाल करने का फैसला लिया है। यह सेवा फिलहाल सप्ताह में एक दिन संचालित होगी। कोविड महामारी के दौरान 2020 में यह रूट पूरी तरह बंद कर दिया गया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क लगभग खत्म हो गया था। Flight के साथ Train Service भी हुई शुरू दिलचस्प बात यह है कि केवल फ्लाइट ही नहीं, बल्कि हाल ही में China-North Korea passenger train service भी दोबारा शुरू की गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों देश धीरे-धीरे अपने पुराने संपर्कों को सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। Trade और Diplomacy पर पड़ेगा असर विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ ट्रैवल सुविधा नहीं, बल्कि trade, diplomacy और people-to-people connection को मजबूत करने की एक अहम कोशिश है। चीन पहले से ही उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है, ऐसे में इस फैसले का असर आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है। लोगों के लिए राहत भरी खबर मानवीय नजरिए से देखें तो यह खबर उन परिवारों, राजनयिक अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के लिए राहत लेकर आई है, जो पिछले कई वर्षों से आसान यात्रा सुविधा का इंतजार कर रहे थे। सीमाओं के लंबे बंद दौर के बाद यह कदम दोनों देशों के बीच भरोसे की वापसी जैसा भी माना जा रहा है। Asia Geopolitics में क्यों अहम है यह कदम एशिया की भू-राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच चीन और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती यह नजदीकी आने वाले समय में regional power balance को भी प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि इस direct flight restart को सिर्फ एक ट्रैवल अपडेट नहीं, बल्कि एक बड़े geopolitical संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ईरान

Middle East Crisis ईरान जंग, Oil Prices और Global Tension की पूरी कहानी

मध्य पूर्व में जारी Iran War 2026 अब सिर्फ एक क्षेत्रीय टकराव नहीं रहा, बल्कि यह पूरी दुनिया की राजनीति, तेल बाज़ार और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाला बड़ा संकट बन चुका है। दुनिया भर में लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं—क्या ईरान जंग जल्द खत्म होगी, या यह और बड़ा रूप ले सकती है? हाल की घटनाओं को एक साथ देखें तो तस्वीर दो हिस्सों में बंटी दिखती है। एक तरफ सैन्य तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे, वहीं दूसरी तरफ बैक-चैनल diplomacy तेज़ हो गई है। यही वजह है कि इस संघर्ष ने लोगों के मन में डर के साथ उम्मीद भी जगा दी है। क्या शांति की शुरुआत हो चुकी है? सूत्रों के अनुसार अमेरिका की तरफ से ईरान को एक विस्तृत ceasefire proposal दिया गया है। इसमें sanctions relief, missile limits, nuclear monitoring और Gulf shipping routes को सुरक्षित करने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर सीधे संवाद से दूरी बनाई है, लेकिन प्रस्ताव को पूरी तरह नकारा भी नहीं है। यही वह बिंदु है जहां दुनिया को राहत की उम्मीद दिखाई देती है। आम लोगों के लिए इसका मतलब सिर्फ राजनीतिक समझौता नहीं, बल्कि तेल की कीमतों में राहत, शेयर बाजार में स्थिरता और वैश्विक तनाव में कमी भी है। जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हालांकि बातचीत की खबरें उम्मीद देती हैं, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी नाजुक हैं। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं, अमेरिकी और सहयोगी बल हाई अलर्ट पर हैं, जबकि ईरान समर्थित समूहों की सक्रियता ने पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है। इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि diplomacy और military pressure दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। यह रणनीति अक्सर तब अपनाई जाती है जब दोनों पक्ष बिना पूरी तरह झुके बेहतर शर्तों पर समझौता चाहते हों। Oil Crisis और India पर असर इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर global oil supply पर देखा जा रहा है। होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे ने crude oil और LNG supply chain को प्रभावित किया है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल, डीज़ल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर पड़ता है। एक आम परिवार के नजरिए से देखें तो यह सिर्फ विदेश नीति की खबर नहीं है। इसका असर रसोई गैस, यात्रा खर्च, ऑनलाइन डिलीवरी फीस और महंगाई तक महसूस हो सकता है। यही human side इस युद्ध को दुनिया के हर घर तक पहुंचाती है। युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं होता हर जंग की सबसे बड़ी कीमत आम लोग चुकाते हैं। ईरान, खाड़ी देशों और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले परिवार लगातार अनिश्चितता में जी रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, कारोबार, रोज़गार और सामान्य जीवन सबसे पहले प्रभावित होता है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी लोग तेल और बाजार की मार झेलते हैं। यही कारण है कि लोग सिर्फ यह नहीं जानना चाहते कि कौन जीतेगा, बल्कि यह जानना चाहते हैं कि शांति कब लौटेगी। अगले 7–14 दिन क्यों अहम हैं? अगर मौजूदा ceasefire talks सकारात्मक दिशा में बढ़ती हैं, तो आने वाले 7–14 दिन इस Iran conflict के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। सीमित युद्धविराम, strategic deal या temporary truce की संभावना बनी हुई है। लेकिन अगर किसी बड़े oil facility, military base या shipping route पर हमला होता है, तो यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir

Ram Mandir Donation Case: चढ़ावा चोरी पर SIT का बड़ा खुलासा, सरकार को सौंपी 150 पेज की रिपोर्ट

Ram Mandir में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी लगभग 150 पेज की विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने और मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन (Trust Reconstitution) की सिफारिश की गई है। अब इस रिपोर्ट पर सरकार के फैसले का इंतजार है, क्योंकि आगे की कार्रवाई इसी के आधार पर तय होगी। रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया? SIT की जांच के दौरान मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच के बाद टीम ने सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें सरकार करेगी कानूनी और प्रशासनिक समीक्षा सूत्रों के अनुसार, सरकार ने SIT की रिपोर्ट प्राप्त कर ली है और अब इसकी कानूनी व प्रशासनिक समीक्षा की जाएगी। रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर विचार करने के बाद यह तय होगा कि FIR दर्ज होगी या नहीं और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक बदलाव कब लागू किए जाएंगे। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? राममंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा था। शिकायतों के आधार पर जांच के लिए SIT का गठन किया गया था। जांच टीम ने संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और कई लोगों के बयान दर्ज किए। अब रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद मामले ने फिर से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। आगे क्या हो सकता है? यदि सरकार SIT की सिफारिशों को स्वीकार करती है, तो आने वाले दिनों में मामले में FIR दर्ज होने, विस्तृत जांच शुरू होने और मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Oracle

Oracle Layoffs AI और Restructuring के बीच वायरल हुई 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की खबर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में बदलाव का दौर जारी है। इसी बीच टेक कंपनी Oracle को लेकर सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी ने 21,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है और आने वाले समय में छंटनी का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि, जब इस दावे की पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। आइए जानते हैं कि आखिर Oracle में क्या हो रहा है और कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है। क्या सच में Oracle ने 21,000 कर्मचारियों को निकाला? सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ ऑनलाइन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Oracle ने एक साथ 21 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। लेकिन अब तक कंपनी की ओर से इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। Oracle ने सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया है, जिसमें 21,000 कर्मचारियों को निकालने की बात कही गई हो। इसलिए इस संख्या को फिलहाल पुष्टि की गई जानकारी नहीं माना जा सकता। फिर चर्चा क्यों हो रही है? दरअसल, Oracle पिछले कुछ समय से अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव कर रही है। कंपनी का फोकस अब Cloud Services, Artificial Intelligence, Data Infrastructure और Enterprise Technology पर तेजी से बढ़ रहा है। इसी वजह से कई विभागों में संगठनात्मक बदलाव (Restructuring) किए जा रहे हैं। टेक इंडस्ट्री में यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, जहां कंपनियां नई तकनीकों और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अपने संसाधनों को व्यवस्थित करती हैं। AI की वजह से बढ़ी कर्मचारियों की चिंता AI के आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या मशीनें इंसानों की नौकरियां ले लेंगी। Oracle समेत कई बड़ी कंपनियां अब ऐसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं, जो पहले कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कई काम तेजी से पूरा कर सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि AI केवल कुछ तरह के कामों को ऑटोमेट करेगा। इसके साथ ही AI, Machine Learning, Cloud Computing, Cyber Security और Data Analytics जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियां भी पैदा होंगी। इसलिए केवल AI को ही हर छंटनी की वजह मानना सही नहीं होगा। Oracle का फोकस अब किस पर है? कंपनी लगातार अपने क्लाउड बिजनेस और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश कर रही है। Oracle का उद्देश्य भविष्य की तकनीकों में अपनी स्थिति मजबूत करना है। यही कारण है कि कुछ पुराने विभागों में बदलाव किए जा रहे हैं, जबकि नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। क्या आगे भी हो सकती है Layoffs? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में टेक सेक्टर में सीमित स्तर पर और छंटनी देखने को मिल सकती है। लेकिन इसके पीछे केवल AI नहीं, बल्कि लागत कम करना, बदलती बाजार स्थितियां, बिजनेस रणनीति और निवेश की प्राथमिकताएं भी अहम कारण हैं। इसलिए किसी भी कंपनी में होने वाली हर छंटनी को सीधे AI से जोड़ना पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। कर्मचारियों के लिए क्या है सीख? बदलते दौर में नई तकनीक सीखना सबसे बड़ा निवेश है। AI, Cloud Computing, Data Science और Cyber Security जैसी स्किल्स रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में समय के साथ खुद को अपडेट रखना ही भविष्य में बेहतर करियर का सबसे मजबूत आधार बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon

Monsoon Update: यूपी में आंधी-बारिश का कहर, पंजाब में 2 की मौत, Mumbai में 24 घंटे में दस्तक देगा मानसून

देशभर में Monsoon तेजी से करवट बदल रहा है। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई शहरों में तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के पोल उखड़ गए, जबकि कुछ जगहों पर पेड़ कारों के ऊपर गिर गए। पंजाब में खराब मौसम के बीच हुए हादसे में दो लोगों की जान चली गई। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राहत भरी खबर देते हुए कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 24 घंटे के भीतर मुंबई पहुंच सकता है। यूपी में आंधी और बारिश से जनजीवन प्रभावित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सोमवार देर शाम और रात के दौरान तेज आंधी के साथ बारिश हुई। तेज हवाओं ने कई इलाकों में तबाही मचाई। सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया, जबकि कई बिजली के पोल भी गिर गए, जिससे घंटों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। कुछ स्थानों पर खड़ी कारों के ऊपर पेड़ गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। राहत की बात यह रही कि अधिकांश घटनाओं में बड़ा जनहानि का मामला सामने नहीं आया। नगर निगम और बिजली विभाग की टीमें पूरी रात रास्ते साफ करने और बिजली बहाल करने में जुटी रहीं। मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली का खतरा मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी मौसम ने अचानक करवट ली। गरज-चमक के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, खेत, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। कई जिलों में अगले 48 घंटे तक बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। पंजाब में दर्दनाक हादसा, पेड़ गिरने से दो लोगों की मौत पंजाब में तेज आंधी के दौरान बड़ा हादसा हुआ। तेज हवाओं के कारण एक विशाल पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। राज्य के कई इलाकों में पेड़ उखड़ने और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे सामान्य जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। हरियाणा और राजस्थान में भी बदला मौसम हरियाणा के कई जिलों में तेज हवाओं के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई। कई जगह बिजली के पोल और पेड़ गिरने की खबरें मिली हैं। वहीं राजस्थान के कुछ हिस्सों में धूलभरी आंधी के बाद हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है। 24 घंटे में मुंबई पहुंचेगा मानसून भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले 24 घंटे के भीतर मानसून मुंबई में दस्तक दे सकता है। मानसून के मुंबई पहुंचने के बाद महाराष्ट्र के कई हिस्सों में व्यापक बारिश होने की संभावना है। इसका असर गुजरात, मध्य भारत और उत्तर भारत के कुछ इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। IMD ने जारी की अहम सलाह मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें। एक ओर जहां बारिश ने भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं तेज आंधी और आकाशीय बिजली ने कई इलाकों में परेशानी भी बढ़ा दी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pune

Pune शादी से पहले युवक की मौत का सच! Lohagad Fort Case में Fiancée समेत 8 लोगों पर हत्या का आरोप

Pune में लोहागढ़ किले (Lohagad Fort) पर हुई एक युवक की मौत ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। शुरुआत में इसे ट्रेकिंग के दौरान हुआ एक दर्दनाक हादसा माना गया था, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो मामला पूरी तरह बदल गया। अब इस केस में मृतक की मंगेतर (Fiancée) समेत आठ लोगों के खिलाफ हत्या (Murder) और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है। इस घटनाक्रम ने लोगों को चर्चित “सोनम केस” की याद दिला दी है, हालांकि पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं। क्या है पूरा मामला? मृतक की पहचान केतन विशाल अग्रवाल (26) के रूप में हुई है। वह पुणे के गहुंजे इलाके का रहने वाला था और परिवार के रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा हुआ था। कुछ महीनों बाद उसकी शादी होने वाली थी और घर में तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। 14 जून को केतन अपनी मंगेतर का जन्मदिन मनाने के लिए दोस्तों के साथ लोनावला स्थित प्रसिद्ध लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के लिए पहुंचा था। बताया गया कि ट्रेकिंग के दौरान फोटो खींचते समय उसका संतुलन बिगड़ गया और वह करीब 400 फीट गहरी खाई में गिर गया। रेस्क्यू टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद उसका शव बाहर निकाला था। शुरुआती जांच में इसे एक दुर्घटना माना गया। जांच में आया बड़ा Twist घटना के बाद पुलिस ने मौके से मिले सबूत, मोबाइल रिकॉर्ड, साथ मौजूद लोगों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों की गहन जांच की। जांच के दौरान कई ऐसी बातें सामने आईं, जिनसे पुलिस को शक हुआ कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। इसी आधार पर पुलिस ने मृतक की मंगेतर, उसके एक करीबी दोस्त और अन्य सहयोगियों सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ हत्या (IPC की संबंधित धाराएं) और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है। फिलहाल सभी आरोपों की जांच की जा रही है और पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर पहलू की पड़ताल कर रही है। शादी की खुशियां पलभर में बदलीं मातम में परिजनों के मुताबिक, केतन की शादी जल्द होने वाली थी। घर में विवाह की तैयारियां चल रही थीं और परिवार खुशियों में डूबा हुआ था। लेकिन लोहागढ़ किले पर हुई इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। पहले इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा माना गया, लेकिन अब हत्या के केस दर्ज होने के बाद परिवार न्याय की मांग कर रहा है। ‘सोनम केस’ से क्यों हो रही तुलना? सोशल मीडिया पर कई लोग इस मामले की तुलना चर्चित ‘सोनम केस’ से कर रहे हैं। वजह यह है कि दोनों मामलों में शुरुआत में दुर्घटना की बात सामने आई थी और बाद में हत्या की आशंका ने जांच की दिशा बदल दी। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों का आपस में कोई संबंध नहीं है और पुणे मामले की जांच पूरी तरह स्वतंत्र रूप से की जा रही है। पुलिस ने क्या कहा? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और जांच पूरी होने का इंतजार करें।
UBT

Maharashtra Politics: Shiv Sena UBT में बढ़ी बेचैनी, उद्धव ठाकरे की अहम बैठक से 4 नेता रहे नदारद

शिवसेना (UBT) को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसके छह लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इन सांसदों ने पहले अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया पूरी की और उसके बाद शिंदे गुट में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। एकनाथ शिंदे ने इसे अपनी पार्टी की मजबूती बताते हुए कहा कि उनकी शिवसेना लगातार विस्तार कर रही है। वहीं, शिंदे गुट के कई नेताओं ने संकेत दिए कि आने वाले समय में और भी नेता उनके संपर्क में हैं। उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुंचे चार जनप्रतिनिधि सांसदों के जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने विधानसभा के मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए पार्टी के सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक बुलाई। इस बैठक का मकसद संगठन की एकजुटता दिखाना और विपक्ष की भूमिका को मजबूत करना था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में तीन विधायक और एक एमएलसी मौजूद नहीं रहे। इनमें संजय पोटनिस, राहुल पाटिल, डेरकर और विधान परिषद सदस्य सुनील शिंदे का नाम सामने आया। उनकी गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सभी ने पहले ही अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दे दी थी और इसके पीछे व्यक्तिगत या पूर्व निर्धारित कार्यक्रम थे। लेकिन विपक्ष इस दलील से संतुष्ट नहीं दिख रहा है। ‘Operation Tiger’ की फिर होने लगी चर्चा छह सांसदों के जाने और अब विधायकों की गैरहाजिरी के बाद एक बार फिर “Operation Tiger” चर्चा का विषय बन गया है। शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि यह राजनीतिक अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरे उनके साथ आ सकते हैं। हालांकि, शिवसेना (UBT) की ओर से इन दावों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी का कहना है कि कुछ नेताओं की अनुपस्थिति को बगावत से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी बैठक में मौजूद नेताओं के साथ उद्धव ठाकरे ने आगामी विधानसभा सत्र की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। पार्टी ने फैसला किया है कि किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, महंगाई, कानून-व्यवस्था और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना ही इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। क्या फिर बदलेंगे महाराष्ट्र की राजनीति के समीकरण? साल 2022 में हुई बड़ी बगावत के बाद शिवसेना (UBT) लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। छह सांसदों का साथ छोड़ना और उसके तुरंत बाद महत्वपूर्ण बैठक में चार जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दी है। हालांकि अभी तक किसी विधायक ने पार्टी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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