शिवसेना (UBT) को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसके छह लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इन सांसदों ने पहले अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया पूरी की और उसके बाद शिंदे गुट में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। एकनाथ शिंदे ने इसे अपनी पार्टी की मजबूती बताते हुए कहा कि उनकी शिवसेना लगातार विस्तार कर रही है। वहीं, शिंदे गुट के कई नेताओं ने संकेत दिए कि आने वाले समय में और भी नेता उनके संपर्क में हैं। उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुंचे चार जनप्रतिनिधि सांसदों के जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने विधानसभा के मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए पार्टी के सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक बुलाई। इस बैठक का मकसद संगठन की एकजुटता दिखाना और विपक्ष की भूमिका को मजबूत करना था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में तीन विधायक और एक एमएलसी मौजूद नहीं रहे। इनमें संजय पोटनिस, राहुल पाटिल, डेरकर और विधान परिषद सदस्य सुनील शिंदे का नाम सामने आया। उनकी गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सभी ने पहले ही अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दे दी थी और इसके पीछे व्यक्तिगत या पूर्व निर्धारित कार्यक्रम थे। लेकिन विपक्ष इस दलील से संतुष्ट नहीं दिख रहा है। ‘Operation Tiger’ की फिर होने लगी चर्चा छह सांसदों के जाने और अब विधायकों की गैरहाजिरी के बाद एक बार फिर “Operation Tiger” चर्चा का विषय बन गया है। शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि यह राजनीतिक अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरे उनके साथ आ सकते हैं। हालांकि, शिवसेना (UBT) की ओर से इन दावों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी का कहना है कि कुछ नेताओं की अनुपस्थिति को बगावत से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी बैठक में मौजूद नेताओं के साथ उद्धव ठाकरे ने आगामी विधानसभा सत्र की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। पार्टी ने फैसला किया है कि किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, महंगाई, कानून-व्यवस्था और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना ही इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। क्या फिर बदलेंगे महाराष्ट्र की राजनीति के समीकरण? साल 2022 में हुई बड़ी बगावत के बाद शिवसेना (UBT) लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। छह सांसदों का साथ छोड़ना और उसके तुरंत बाद महत्वपूर्ण बैठक में चार जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दी है। हालांकि अभी तक किसी विधायक ने पार्टी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!