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PM Modi

F-22 Stealth Jets, PM Modi Israel Tour और बढ़ता US-Iran Conflict क्या होने वाला है आगे

दुनिया इस समय एक बेहद संवेदनशील geopolitical स्थिति से गुजर रही है। अमेरिका के F-22 स्टेल्थ फाइटर जेट्स (F-22 Stealth Jets) इज़राइल में तैनात किए गए हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का इज़राइल दौरा (Israel Visit) भी चल रहा है। इन घटनाओं के बीच US-Iran तनाव (US-Iran Tension) और भारत-इज़राइल संबंध (India-Israel Relations) पर भी ध्यान केंद्रित है। अमेरिका के F-22 Jets इज़राइल में क्यों? अमेरिका ने हाल ही में 12 F-22 रैप्टर फाइटर जेट्स को इज़राइल में तैनात किया। ये विमान दुनिया के सबसे एडवांस स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से हैं। इनके पास रडार से बचने और दुश्मन एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने की उच्च क्षमता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम ईरान के साथ बढ़ते तनाव (Rising Tension with Iran) का संकेत है। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य बल और संसाधनों को बढ़ा दिया है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित सैन्य प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहा जा सके। US-Iran Tension: वर्तमान स्थिति अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, खासकर परमाणु समझौते और क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर डिप्लोमैटिक समाधान नहीं निकला, तो कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। ईरान ने भी कहा है कि अगर उन पर हमला हुआ, तो वह जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि सैन्य विकल्प संभव हैं, लेकिन कूटनीति अभी भी प्राथमिकता में है। PM Modi का इज़राइल दौरा – क्यों खास है? प्रधानमंत्री मोदी 25-26 फरवरी 2026 को इज़राइल के दो दिवसीय दौरे (Two-day Visit) पर हैं। यह उनकी दूसरी यात्रा है और इसका उद्देश्य दोनों देशों के रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग (Strategic & Defence Partnership) को मजबूत करना है। मोदी इज़राइल की संसद Knesset को संबोधित करेंगे और नेतन्याहू के साथ उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। चर्चा के मुख्य मुद्दे हैं: India-Israel Relations: नए अवसर भारत और इज़राइल पहले से ही रक्षा और तकनीकी सहयोग में साझेदार हैं। इस दौरे के दौरान: इस दौरे से भारत-इज़राइल संबंधों में नई दिशा और गहराई आने की उम्मीद है। क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव यह दौरा और F-22 जेट्स की तैनाती ऐसे समय में हो रही हैं जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौर वैश्विक राजनीति और रणनीतिक संतुलन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala

Kerala का नाम बदलेगा अब “Keralam” होगा आधिकारिक नाम

देश की राजनीति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने केरल (Kerala) का नाम बदलकर “केरलम (Keralam)” करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले के बाद अब आधिकारिक रूप से राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह प्रस्ताव पहले ही केरल विधानसभा द्वारा पारित किया जा चुका था। विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र से आग्रह किया था कि राज्य का पारंपरिक और स्थानीय नाम “केरलम” ही संविधान और सभी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किया जाए। मलयालम भाषा में राज्य को लंबे समय से “केरलम” कहा जाता रहा है, इसलिए इसे औपचारिक मान्यता देने की मांग उठी थी। क्यों बदला जा रहा है Kerala का नाम? राज्य सरकार का कहना है कि “केरल” नाम अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में प्रचलित रूप है, जबकि स्थानीय भाषा मलयालम में सही उच्चारण और ऐतिहासिक पहचान “केरलम” है। इस बदलाव को सांस्कृतिक सम्मान और भाषाई अस्मिता से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। उनका तर्क था कि जब कई राज्यों ने अपने पारंपरिक नामों को आधिकारिक रूप दिया है, तो केरल भी अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। अब आगे क्या होगा? कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला कदम संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाना होगा। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत और पहली अनुसूची में संशोधन के जरिए “केरल” की जगह “केरलम” दर्ज किया जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा। इसके बाद सरकारी दस्तावेज, आधिकारिक वेबसाइटें, साइनबोर्ड और अन्य प्रशासनिक अभिलेखों में भी नया नाम अपडेट किया जाएगा। राजनीतिक और सांस्कृतिक मायने यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की चर्चा भी तेज हो रही है। हालांकि सरकार इसे पूरी तरह सांस्कृतिक और भाषाई सम्मान से जुड़ा कदम बता रही है। कई लोगों के लिए यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और परंपरा को पहचान देने का प्रयास है। “केरलम” शब्द राज्य की मिट्टी, भाषा और इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prayagraj Controversy शंकराचार्य को गिरफ्तारी का अंदेशा, IPS अधिकारी पर साजिश का आरोप

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि प्रयागराज में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और प्रशासनिक तंत्र उनके विरुद्ध सक्रिय है। इस घटनाक्रम ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? शंकराचार्य का आरोप है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि हाल के दिनों में जिस तरह की प्रशासनिक गतिविधियां हुई हैं, उससे उन्हें अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि बिना निष्पक्ष जांच के कोई कठोर कदम न उठाया जाए। करीबी सूत्रों के मुताबिक, शंकराचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत और संस्थागत तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “सारा सिस्टम” उनके खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है। हाईकोर्ट से क्या मांग? याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं: कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि अदालत को प्रथम दृष्टया मामला गंभीर लगा, तो अंतरिम राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही होगा। क्यों बढ़ी चर्चा? यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं है। एक प्रमुख धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा खुले तौर पर गिरफ्तारी की आशंका जताना कई सवाल खड़े करता है। समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक आवाज को दबाने की कोशिश है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? अब सभी की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत प्रशासन से जवाब तलब कर सकती है और यह तय करेगी कि शंकराचार्य को तत्काल राहत मिलेगी या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal किसान महाचौपाल Bharat-US Deal के विरोध में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन

Bhopal में आयोजित किसान महाचौपाल के दौरान राजनीति का पारा चढ़ गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस बड़े कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge विशेष रूप से शामिल होने पहुंचे। मंच से नेताओं ने भारत-US डील को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि यह समझौता किसानों के हितों पर असर डाल सकता है। किसानों के मुद्दों पर सीधा संवाद महाचौपाल में बड़ी संख्या में किसान और पार्टी कार्यकर्ता जुटे। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले देश के अन्नदाता की राय और सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि प्रस्तावित भारत-US डील से कृषि बाजार में विदेशी प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और स्थानीय मंडियों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। राहुल गांधी ने किसानों से सीधा संवाद करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज़ संसद से सड़क तक उठाई जाएगी। वहीं खड़गे ने कहा कि पार्टी किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेगी। प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव कार्यक्रम के बाद भारत-US डील के विरोध में कार्यकर्ताओं ने नारेबाज़ी की। इसी दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस भी हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया था, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और उसी के तहत कदम उठाए गए। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने की कोशिश की गई। राजनीतिक असर और आगे की राह Bhopal की यह किसान महाचौपाल केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसने भारत-US डील पर नई बहस छेड़ दी है। मध्य प्रदेश की राजनीति में भी इस घटनाक्रम के बाद हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा किसानों, विपक्ष और सरकार के बीच बड़ा राजनीतिक केंद्र बन सकता है। कुल मिलाकर, भोपाल की सड़कों पर उठी यह आवाज़ केवल एक प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि उन किसानों की चिंता भी थी जो अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। अब देखना होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव किस दिशा में जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP

MP Cabinet Decision उड़द पर ₹600 Bonus, Tribal जिलों में होगी Agriculture Meeting

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए राहत और उत्साह की खबर है। Mohan Yadav की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उड़द (Urad) पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस देने को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले से खासकर खरीफ सीजन में उड़द की खेती करने वाले किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। किसानों को MSP के साथ मिलेगा अतिरिक्त लाभ सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह ₹600 प्रति क्विंटल की राशि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त दी जाएगी। यानी किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम सुनिश्चित होगा। लंबे समय से किसान दलहन फसलों पर प्रोत्साहन की मांग कर रहे थे, ऐसे में यह निर्णय उनके लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में खेती सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदों से जुड़ी होती है। ऐसे में जब फसल का दाम अच्छा मिलता है, तो घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और भविष्य की योजनाएं भी साकार होती हैं। Tribal Districts में होगी Agriculture Cabinet Meeting मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आगामी कृषि कैबिनेट बैठक जनजातीय बहुल (Tribal Majority) जिलों में आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य है कि सरकार सीधे किसानों से संवाद कर सके और उनकी जमीनी समस्याओं को समझ सके। जनजातीय क्षेत्रों में अक्सर संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं की कमी महसूस की जाती है। वहां बैठक आयोजित करने से स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाई जा सकेंगी और कृषि निवेश को बढ़ावा मिलेगा। दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उड़द पर बोनस से प्रदेश में दलहन (Pulses) उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है। सरकार का यह फैसला सिर्फ एक आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम है। जब नीति और नीयत दोनों साथ हों, तो खेतों की हरियाली ही प्रदेश की समृद्धि बनती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Silver

Silver Price Today 2 दिन में ₹16,000 की छलांग, Gold Rate भी ₹5,000 उछला

सर्राफा बाजार में इस हफ्ते जबरदस्त हलचल देखने को मिली। Silver Price यानी चांदी के भाव में महज दो दिनों के भीतर करीब ₹16,000 प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद चांदी की कीमत बढ़कर लगभग ₹2.67 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। वहीं Gold Rate Today भी पीछे नहीं रहा—सोना करीब ₹5,000 महंगा होकर 10 ग्राम के लिए लगभग ₹1.60 लाख के आसपास पहुंच गया। यह तेजी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की चिंता और उम्मीदों से भी जुड़ी है जो निवेश, शादी-ब्याह या भविष्य की सुरक्षा के लिए सोना-चांदी खरीदते हैं। Silver Price में तेज उछाल क्यों? चांदी की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख करते हैं। यही कारण है कि हाल के दिनों में चांदी में तेज खरीदारी देखने को मिली। Gold Rate Today: सोना भी चमका सोने की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। करीब ₹5,000 की तेजी के बाद 10 ग्राम सोने का भाव लगभग ₹1.60 लाख तक पहुंच गया है। शादी के सीजन और निवेश की बढ़ती मांग ने भी कीमतों को सहारा दिया है। कई निवेशकों का मानना है कि सोना लंबे समय में स्थिर रिटर्न देने वाला विकल्प है। यही वजह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इसकी मांग बनी रहती है। आम लोगों पर क्या असर? कीमतों में इस उछाल का असर आम ग्राहकों पर साफ दिख रहा है। सर्राफा बाजार के जानकारों का मानना है कि फिलहाल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय बाजार की दिशा को समझना जरूरी है। आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक आर्थिक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक सोना और चांदी में तेजी बनी रह सकती है। हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली के कारण हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Nitish

Bihar Political Drama लाठीचार्ज मुद्दे पर विधानसभा में टकराव, CM Nitish ने दिया करारा जवाब

बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चौकीदारों और दफेदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा ऐसा उठा कि सदन में तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे का माहौल बन गया। बात इतनी बढ़ी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बीच खुली नोकझोंक देखने को मिली। क्या है पूरा मामला? हाल ही में पटना में अपनी मांगों को लेकर चौकीदार और दफेदार सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना था कि वे लंबे समय से वेतन, सेवा शर्तों और सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसे विपक्ष ने “अनावश्यक लाठीचार्ज” बताया। इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और जवाब की मांग की। सदन में क्यों बढ़ी तल्खी? बहस के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) ने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका इशारा इस ओर था कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ रहे थे। लेकिन भाई वीरेंद्र ने सरकार के इस पक्ष को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठी क्यों चली? इसी बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने माहौल और गर्म कर दिया। RJD का हमला, सरकार का बचाव मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इसे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार समय रहते संवाद करती, तो नौबत लाठीचार्ज तक नहीं पहुंचती। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

Emergency Tariff Controversy कोर्ट का फैसला, लेकिन Trump का सख्त संदेश बरकरार

अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार जगत में इस समय सबसे बड़ी चर्चा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को लेकर है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद इन टैरिफ की वसूली पर रोक लगा दी गई है। 24 फरवरी से अमेरिकी कस्टम विभाग ने संबंधित शुल्क लेना बंद कर दिया है। यह फैसला उन देशों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से अतिरिक्त आयात शुल्क का सामना कर रहे थे। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती — ट्रम्प की ओर से आई नई चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार माहौल को फिर से गर्म कर दिया है। क्या था पूरा मामला? ट्रम्प प्रशासन ने अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे। तर्क यह दिया गया था कि ये कदम अमेरिकी उद्योग, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी हैं। हालांकि, अदालत ने माना कि आपातकालीन शक्तियों का उपयोग इतने व्यापक व्यापारिक शुल्क लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर टैरिफ को अवैध ठहराते हुए उनकी वसूली रोकने का आदेश दिया गया। किन देशों को राहत? भारत, चीन समेत कई एशियाई और यूरोपीय देशों को इस फैसले से तत्काल राहत मिली है। इन देशों के निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत का बोझ कम होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि, पहले से वसूले गए अरबों डॉलर के टैरिफ वापस होंगे या नहीं — इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। यह आने वाले समय में कानूनी और कूटनीतिक बातचीत का अहम मुद्दा बन सकता है। ट्रम्प की सख्त चेतावनी फैसले के तुरंत बाद ट्रम्प ने कहा कि अगर कोई देश व्यापार समझौतों में “गेम खेलने” की कोशिश करता है या शर्तों से पीछे हटता है, तो अमेरिका और भी ऊंचे टैरिफ लगाने से नहीं हिचकेगा। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अन्य कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बयान ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। Global Market पर असर इस घटनाक्रम का असर शेयर बाजारों में भी देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदार आपसी संवाद से रास्ता निकालते हैं, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। लेकिन अगर बयानबाजी और सख्ती बढ़ी, तो नया Trade War शुरू होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। आगे क्या? फिलहाल टैरिफ वसूली पर रोक से निर्यातकों और उद्योग जगत को राहत जरूर मिली है। लेकिन ट्रम्प के ताजा बयान से यह साफ है कि व्यापार नीति आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी। एक तरफ अदालत का फैसला संतुलन की बात करता है, तो दूसरी ओर सख्त चेतावनी यह संकेत देती है कि वैश्विक व्यापार की राह अभी भी आसान नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Share Bazaar Today Sensex 566 और Nifty 152 अंक फिसला, IT Sector में मचा हड़कंप

नई दिल्ली, 24 फरवरी 2026। हफ्ते की शुरुआत निवेशकों के लिए झटका लेकर आई। भारतीय शेयर बाजार में आज तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं। दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा और आईटी शेयरों में आई कमजोरी ने बाजार की रफ्तार और धीमी कर दी। कारोबार के दौरान BSE Sensex 566 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 152 अंक लुढ़क गया। शुरुआती घंटों से ही बाजार में कमजोरी दिखने लगी थी और दोपहर तक गिरावट और गहरी हो गई। क्यों टूटा बाजार? आज की गिरावट के पीछे कई वजहें रहीं, जिनका असर सीधे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ा— 1. Global Market Pressure:अमेरिका और एशिया के बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने घरेलू बाजार की धारणा पर असर डाला। 2. IT Stocks में भारी बिकवाली:आईटी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। विदेशी बाजारों में टेक कंपनियों पर दबाव का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ा। 3. FII Selling:विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार में नकदी का प्रवाह कमजोर हुआ। 4. Crude Oil की बढ़ती कीमतें:कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और आर्थिक संतुलन को लेकर चिंता बढ़ी। निवेशकों पर कितना असर? आज की गिरावट से बाजार पूंजीकरण में भारी कमी आई। लाखों छोटे निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो की वैल्यू घटती देखी। हालांकि, बाजार के जानकार इसे घबराने की स्थिति नहीं मानते। उनका कहना है कि इस तरह की गिरावटें बाजार का हिस्सा होती हैं। अब क्या करें निवेशक? बाजार में उतार-चढ़ाव नया नहीं है, लेकिन समझदारी और धैर्य से लिया गया फैसला ही लंबी दौड़ में फायदा देता है। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI Summit

AI Summit हंगामा 2026 Youth Congress अध्यक्ष Uday Bhanu Chib Arrested, अब तक 8 गिरफ्तार

नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के दौरान हुई अप्रत्याशित घटना ने राजनीतिक और सामाजिक सुर्खियों को छा दिया। इस हंगामे के बाद Youth Congress के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को गिरफ्तार किया गया, और अब तक इस मामले में कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझें। क्या हुआ था — AI Summit में शर्टलेस प्रदर्शन 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस प्रदर्शन किया। उन्होंने टी‑शर्ट पर सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ संदेश लिखकर विरोध जताया। इस दौरान कार्यक्रम में व्यवधान और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर अशांति और अव्यवस्था उत्पन्न हुई, जिसके बाद कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी और पूछताछ अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुईं इस मामले में 8 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से Youth Congress के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हैं। कुछ गिरफ्तारियां दिल्ली में हुईं, जबकि कुछ अन्य स्थानों से भी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। FIR और कानूनी कार्रवाई दिल्ली पुलिस ने Tilak Marg पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में कई गंभीर धाराओं को शामिल किया है, जैसे: इन धाराओं के तहत पुलिस अब मामले की पूरी जांच कर रही है। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया इस विवाद ने लोकतंत्र बनाम कानून व्यवस्था की बहस को और तेज कर दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

Lucknow

Lucknow Fire Breaking इंस्टीट्यूट में आग से मची अफरा-तफरी, कई छात्र घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक इंस्टीट्यूट में अचानक लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद छात्र-छात्राएं और स्टाफ घबरा गए। धुआं भरते ही बिगड़े हालात प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही आग लगी, पूरे भवन में घना धुआं फैल गया और बाहर निकलने के रास्ते बंद होने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती इस हादसे में कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। एक छात्र के नीचे गिरने से लोहे की ग्रिल से टकराने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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