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Rahul Gandhi

Maharashtra Politics भिवंडी में Rahul Gandhi की पेशी कहा कानून का सामना करूंगा, माफी नहीं मांगूंगा

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi)ने साफ शब्दों में कहा है कि वे किसी भी कीमत पर माफी नहीं मांगेंगे और कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे। यह बयान उस समय सामने आया जब वे महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित अदालत में एक आपराधिक मानहानि मामले में पेश हुए। क्या है पूरा मामला? यह मामला Maharashtra के Bhiwandi की अदालत में चल रहा है। शिकायत एक पुराने बयान को लेकर दर्ज की गई थी, जिसमें कथित तौर पर एक संगठन से जुड़े लोगों की मानहानि का आरोप लगाया गया है। अदालत में पेशी के दौरान Rahul Gandhi ने कहा कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और अपना पक्ष अदालत में मजबूती से रखेंगे, लेकिन माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। उनके इस रुख ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। कोर्ट परिसर के बाहर गरमाया माहौल पेशी के दिन अदालत के बाहर माहौल तनावपूर्ण रहा। Bharatiya Janata Party (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। राजनीतिक मायने क्या हैं? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। एक तरफ कांग्रेस इसे विचारों की लड़ाई बता रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और अदालत में सच सामने आएगा। राहुल गांधी का “माफी नहीं, ट्रायल फेस करूंगा” वाला रुख उनके समर्थकों के बीच दृढ़ता की छवि बना रहा है। वहीं विरोधी इसे राजनीतिक बयानबाज़ी बता रहे हैं। आगे क्या? अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। महाराष्ट्र की सियासत में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और भी हलचल पैदा कर सकता है। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला सिर्फ कोर्टरूम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक मंचों पर भी इसकी गूंज सुनाई देती रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trade

Global Trade 18% से 10% पर आया भारत का टैरिफ, ट्रम्प की नई नीति लागू

अमेरिका की व्यापार नीति में एक बड़ा और अचानक बदलाव देखने को मिला है। Donald Trump ने सभी देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10% का नया यूनिवर्सल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया जब इससे कुछ घंटे पहले ही Supreme Court of the United States ने एक पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत भारत पर 18% का विशेष टैरिफ लागू था। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? पहले भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ उत्पादों पर 18% तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। इससे भारतीय निर्यातकों—खासतौर पर स्टील, इंजीनियरिंग गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर—को सीधा असर झेलना पड़ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह 18% टैरिफ समाप्त हो गया। लेकिन उसी के तुरंत बाद 10% का नया सार्वभौमिक टैरिफ लागू करने की घोषणा ने तस्वीर बदल दी। भारत के लिए राहत या नई चुनौती? सीधी बात करें तो 18% से घटकर 10% होना भारत के लिए आंशिक राहत है।मतलब: लेकिन 10% टैरिफ पूरी तरह राहत नहीं है। इससे लागत बढ़ेगी और मुनाफे पर असर पड़ेगा। Global Trade पर क्या असर पड़ेगा? यह फैसला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सभी देशों पर समान 10% शुल्क लगाने से: विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। आम लोगों पर क्या असर? यह सवाल भी अहम है।अगर आयात महंगे होंगे तो अमेरिका में उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं भारत में निर्यात से जुड़े उद्योगों और कामगारों के लिए यह राहत और चिंता—दोनों का मिश्रण है। आगे क्या? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत सरकार इस नए 10% टैरिफ को लेकर क्या रुख अपनाती है। क्या द्विपक्षीय व्यापार वार्ता तेज होगी? क्या कुछ सेक्टर को छूट मिल सकती है? फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिका की यह नई टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित करेगी, और भारत को भी अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI

AI Summit Controversy भारत मंडपम में Youth Congress का Protest, लगे “Modi is Compromised” के नारे

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल एआई (AI) समिट उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। इस समिट में देश-विदेश से टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, उद्योगपति और नीति-निर्माता शामिल हुए थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी भी चर्चा का केंद्र थी। अचानक बदला माहौल कार्यक्रम अपने निर्धारित एजेंडे के अनुसार चल रहा था, तभी कुछ युवक अपनी सीटों से खड़े हुए और टी-शर्ट उतारकर नारे लगाने लगे। “Modi is Compromised” के नारे कुछ मिनटों तक गूंजते रहे। वहां मौजूद लोगों के लिए यह एक अप्रत्याशित पल था—तकनीक और भविष्य की बातों के बीच अचानक राजनीतिक विरोध ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को बाहर ले जाया। थोड़ी देर की अफरा-तफरी के बाद कार्यक्रम फिर सामान्य रूप से जारी रहा। विरोध की वजह क्या है? यूथ कांग्रेस से जुड़े प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर उनकी चिंताएं हैं। उनका आरोप है कि इस तरह के समझौते से छोटे उद्योगों, किसानों और स्थानीय व्यापारियों पर दबाव बढ़ सकता है। उनका मानना है कि सरकार को किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले व्यापक चर्चा और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी तेज घटना के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताया, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने इसे एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम करार दिया। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि वैश्विक साझेदारियों और आर्थिक नीतियों को लेकर देश के भीतर अलग-अलग मत मौजूद हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल भारत मंडपम जैसे उच्च-सुरक्षा वाले स्थल पर इस तरह का विरोध कैसे हुआ, इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया गया था और किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं आई। तकनीक के मंच पर राजनीति की गूंज एआई समिट का मकसद भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना था। लेकिन इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि देश में आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर भावनाएं कितनी प्रबल हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tharoor

PR Show या Progress Delhi AI Summit पर Tharoor और Rahul आमने-सामने

नई दिल्ली में आयोजित Delhi AI Summit 2026 इन दिनों सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ यह समिट भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने की कोशिश के रूप में पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर के कार्यक्रमों में छोटी-मोटी गड़बड़ियां होना असामान्य नहीं है। उनका मानना है कि भारत को नई तकनीकों, खासकर AI, के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच बेहद जरूरी हैं। थरूर ने संकेत दिया कि कमियों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन सकारात्मक पहल को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस समिट को “PR तमाशा” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े आयोजनों के जरिए अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रही है, जबकि असली जरूरत रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की है। क्या है Delhi AI Summit का मकसद? सरकार के अनुसार, इस समिट का उद्देश्य भारत को AI इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और नीति-निर्माण में वैश्विक सहयोग बढ़ाना है। कई देशी-विदेशी विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति-निर्माताओं की भागीदारी इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का आयोजन बना रही है। राजनीतिक हलकों में क्यों बढ़ी चर्चा? दिलचस्प बात यह है कि एक ही पार्टी के दो बड़े नेताओं के अलग-अलग रुख ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। थरूर का संतुलित समर्थन और राहुल गांधी की कड़ी आलोचना इस बात की ओर इशारा करती है कि AI समिट अब तकनीकी मंच से आगे बढ़कर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब? तकनीकी समिट की चर्चा भले ही बड़े मंचों पर हो रही हो, लेकिन आम नागरिक के मन में सवाल यही है—क्या इससे रोजगार बढ़ेंगे? क्या युवाओं को नए अवसर मिलेंगे? क्या भारत सच में AI क्षेत्र में अग्रणी बन पाएगा? फिलहाल, Delhi AI Summit 2026 ने एक बात साफ कर दी है—AI सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीति, विकास और भविष्य की दिशा तय करने वाला विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Himachal

Himachal Road Trip 2026 नई Entry Fee लागू, अब सफर होगा महंगा

अगर आप इस साल गर्मियों में Himachal Trip प्लान कर रहे हैं, तो आपके बजट पर थोड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। Himachal Pradesh सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगने वाली Entry Fee/Green Tax में बड़ा इजाफा कर दिया है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। इस फैसले का सीधा असर उन पर्यटकों पर पड़ेगा जो अपनी गाड़ी से Shimla, मनाली या धर्मशाला जैसी जगहों की यात्रा करते हैं। क्या है नया Entry Fee Structure? सरकार द्वारा जारी नई दरों के अनुसार: कुछ श्रेणियों में फीस लगभग ढाई गुना तक बढ़ाई गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह शुल्क केवल बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड वाहनों पर लागू होगा। हिमाचल में पंजीकृत गाड़ियों को इससे छूट मिलेगी। क्यों बढ़ाई गई फीस? राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्राकृतिक आपदाओं और वित्तीय दबाव के बीच सरकार नए संसाधन जुटाने की कोशिश कर रही है। सरकार का तर्क है कि पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा बुनियादी ढांचे और सड़कों के रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। आम यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा? साफ है कि अब हिमाचल की यात्रा पहले से थोड़ी महंगी हो जाएगी। हालांकि कई पर्यटक मानते हैं कि हिमाचल की खूबसूरती और ठंडी वादियां आज भी हर खर्च को जायज़ ठहराती हैं। फिर भी, अगर आप Road Trip प्लान कर रहे हैं, तो अब अपने बजट में Entry Tax को जरूर शामिल करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

India-Pak Tension पर Trump का बड़ा दावा 200% टैरिफ की धमकी और 11 Fighter Jets की कहानी

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों को 200% टैरिफ (Import Duty) लगाने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद हालात काबू में आए और संभावित युद्ध टल गया। यह बयान उन्होंने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां उन्होंने खुद को “शांति स्थापित करने वाला नेता” बताया। क्या है ट्रंप का दावा? Trump के अनुसार, मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हालात बेहद गंभीर थे। सीमा पर हवाई टकराव हो रहे थे और कई फाइटर जेट गिराए गए थे। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में कुल 11 महंगे लड़ाकू विमान गिराए गए। उनका कहना है कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से सीधे बात की। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि अगर लड़ाई जारी रही तो अमेरिका दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगा देगा और व्यापारिक रिश्ते प्रभावित होंगे। Trump ने अपने अंदाज में कहा, “पैसे से बड़ी कोई ताकत नहीं होती।” उनका दावा है कि इसी आर्थिक दबाव के बाद संघर्ष रुक गया और लाखों लोगों की जान बची। भारत का क्या कहना है? भारत सरकार ने पहले भी ऐसे दावों को खारिज किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया था कि संघर्षविराम (Ceasefire) दोनों देशों के बीच सीधे संवाद से हुआ था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से। नई दिल्ली का साफ रुख है कि भारत और पाकिस्तान के मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इन्हें आपसी बातचीत से ही सुलझाया जाता है। जेट गिरने का दावा कितना सही? ट्रंप ने अलग-अलग मंचों पर जेट गिराए जाने की संख्या बदलकर बताई है—कभी 5, कभी 7 और अब 11। अब तक किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या आधिकारिक सैन्य रिपोर्ट में 11 जेट गिरने की पुष्टि नहीं हुई है। यही कारण है कि उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। पृष्ठभूमि: मई 2025 का तनाव मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा था। रिपोर्टों के अनुसार, आतंकी घटना के बाद भारत ने सीमित सैन्य कार्रवाई की थी। इसके जवाब में सीमा पर गोलाबारी और हवाई गतिविधियां बढ़ीं। कुछ दिनों बाद दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा की और हालात धीरे-धीरे सामान्य हुए। राजनीतिक संदेश या कूटनीतिक सच? विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति और उनकी विदेश नीति की छवि से भी जुड़ा हो सकता है। वे अक्सर खुद को मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति वाला नेता बताते रहे हैं। हालांकि, भारत की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट है—किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि सीधे संवाद से तनाव कम हुआ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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राहुल गांधी

Defamation Case में राहुल गांधी का बयान सुल्तानपुर कोर्ट के बाहर नजर आया ‘सत्यमेव जयते’

सुल्तानपुर, 20 फरवरी 2026: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज सुल्तानपुर कोर्ट पहुंचे, जहां उनका Defamation Case (मानहानि मुकदमा) सुनवाई के लिए निर्धारित था। यह मामला 2018 का है, जब स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी। राहुल गांधी सुबह कोर्ट पहुंचे और उन्होंने सीधे अपनी बयानबाजी की। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। कोर्ट परिसर के बाहर कांग्रेस समर्थकों ने ‘सत्यमेव जयते’ जैसे पोस्टर लगाकर सत्य और न्याय का संदेश फैलाया। केस की पृष्ठभूमि इस मानहानि केस में राहुल गांधी ने कथित रूप से अमित शाह (केंद्र गृह मंत्री) के खिलाफ बयान दिया था, जिसे वादी ने मानहानि बताया। पिछले पाँच साल से यह मामला कोर्ट में चल रहा है। दिसंबर 2023 में राहुल गांधी की गैरमौजूदगी के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ था। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और दो जमानतें (प्रत्येक ₹25,000) पर जमानत दी गई। राहुल गांधी ने अपनी बयानबाजी में खुद को निर्दोष बताया और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। कोर्ट ने वादी को साक्ष्य पेश करने का निर्देश दिया था, और आज की सुनवाई में राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज करवाया। राजनीतिक और सामाजिक असर यह मामला न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि चुनावी माहौल पर भी असर डाल सकता है। कोर्ट के बाहर लगे पोस्टर और समर्थकों का उत्साह इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यह केस जनता और मीडिया की नजरों में है। संक्षेप: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Karachi

Karachi Gas Leak Tragedy सुबह 4 बजे हुए धमाके ने ली 16 लोगों की जान

पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। सोल्जर बाजार इलाके में तड़के हुए भीषण गैस धमाके (Gas Explosion) में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। धमाका इतना शक्तिशाली था कि एक रिहायशी इमारत का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा और कई परिवार कुछ ही सेकंड में तबाही का शिकार हो गए। सुबह की शांति टूटी, चीखों से गूंजा इलाका यह हादसा सोल्जर बाजार की गुल राणा कॉलोनी में सुबह करीब 4:15 बजे हुआ। उस वक्त ज्यादातर लोग घरों में सो रहे थे, जबकि कुछ परिवार रमज़ान के चलते सहरी की तैयारी में जुटे थे। अचानक हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया। लोगों ने बताया कि पहले तेज धमाके की आवाज आई, फिर इमारत गिरने की गड़गड़ाहट और उसके बाद मदद के लिए पुकारती आवाजें। स्थानीय निवासियों ने बिना समय गंवाए मलबा हटाना शुरू कर दिया। कई लोग अपने हाथों से पत्थर और ईंटें हटाते दिखे, क्योंकि हर किसी को उम्मीद थी कि शायद कोई अभी भी जिंदा हो। क्या था Blast का कारण? प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमाका गैस रिसाव (Gas Leakage) या सिलेंडर फटने की वजह से हुआ। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल किसी आतंकी एंगल के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच के बाद ही की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने इलाकों में जर्जर गैस पाइपलाइन और अनियमित कनेक्शन अक्सर बड़े हादसों की वजह बनते हैं। यह घटना भी उसी लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। Rescue Operation कई घंटों तक जारी धमाके के तुरंत बाद Rescue 1122, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया। बचावकर्मी घंटों तक मलबे में दबे लोगों को निकालते रहे। अस्पतालों में भर्ती घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार कुछ की हालत गंभीर है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, और कुछ अब भी अपनों की तलाश में अस्पतालों और घटनास्थल के बीच भटक रहे हैं। प्रशासन की प्रतिक्रिया स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगर किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Om Birla

Speaker Om Birla AI Controversy लोकसभा विशेषाधिकार विभाग का कांग्रेस के 8 नेताओं को नोटिस

देश की राजनीति में एक बार फिर डिजिटल कंटेंट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) से जुड़े एक कथित AI-जनित वीडियो को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मीडिया सेल को लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में पार्टी के आठ नेताओं से जवाब मांगा गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर किया गया, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से तैयार बताया जा रहा है। आरोप है कि वीडियो में लोकसभा स्पीकर के संदर्भ में आपत्तिजनक और भ्रामक प्रस्तुति की गई। शिकायत के मुताबिक, इससे न केवल एक संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि संसद के विशेषाधिकार का भी संभावित उल्लंघन हुआ है। डिजिटल दौर में इस तरह की सामग्री तेजी से वायरल होती है और आम लोगों तक कुछ ही मिनटों में पहुंच जाती है। यही वजह है कि यह मामला राजनीतिक दायरे से निकलकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। शिकायत के बाद कैसे बढ़ा मामला? बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने इस वीडियो को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि वीडियो भ्रामक है और इससे लोकसभा की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। शिकायत मिलने के बाद लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग ने संज्ञान लेते हुए कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी कर दिया। किन नेताओं को मिला नोटिस? नोटिस के दायरे में कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत समेत कुल आठ पदाधिकारी शामिल हैं। सभी से तीन दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार, जवाब मिलने के बाद उसे स्पीकर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। AI और राजनीति: क्यों बढ़ रही चिंता? यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीति में AI और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग न हो, तो इससे भ्रम, गलतफहमियां और संस्थाओं की साख पर असर पड़ सकता है। आम नागरिकों के लिए भी यह एक याद दिलाने वाला क्षण है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज पूरी तरह सच हो—यह जरूरी नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold & Silver Price सोना 1.55 लाख पर, चांदी एक दिन में ₹8,432 महंगी

भारतीय सर्राफा बाजार में आज फिर हलचल देखने को मिली। Gold Price Today में जोरदार उछाल दर्ज हुआ है। 24 कैरेट सोना ₹3,151 महंगा होकर करीब ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Silver Price Today में भी बड़ी बढ़त दर्ज की गई और चांदी एक ही दिन में ₹8,432 प्रति किलो तक महंगी हो गई। यह तेजी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की जेब और निवेश योजनाओं पर भी असर डाल रही है। शादी-ब्याह का सीजन हो या लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट, सोने-चांदी की कीमतें हर घर की चर्चा का हिस्सा बन चुकी हैं। इस साल Gold Price में ₹21,000 की बढ़ोतरी साल 2026 की शुरुआत से अब तक सोना लगभग ₹21,000 प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती की वजह से सोने को सपोर्ट मिल रहा है। जब भी दुनिया भर में अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। Silver Price Today: क्यों बढ़ रहे हैं दाम? चांदी की कीमतों में आई ₹8,432 प्रति किलो की तेजी ने बाजार को चौंका दिया है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों में ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर इंडस्ट्री में भी होता है। औद्योगिक मांग बढ़ने से इसके दाम में तेजी देखी जा रही है। आम लोगों पर क्या असर? कई परिवार जो सोना खरीदने की योजना बना रहे थे, वे अब कीमतों में थोड़ी स्थिरता का इंतजार कर सकते हैं। वहीं, कुछ निवेशक इसे लंबी अवधि के लिए अच्छा अवसर मान रहे हैं। आगे क्या हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, अमेरिकी डॉलर की स्थिति और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने-चांदी की दिशा तय करेंगी। अगर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी रहती है, तो कीमतों में और तेजी संभव है। हालांकि, बीच-बीच में मुनाफावसूली से हल्की गिरावट भी आ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lucknow

Lucknow Fire Breaking इंस्टीट्यूट में आग से मची अफरा-तफरी, कई छात्र घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक इंस्टीट्यूट में अचानक लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद छात्र-छात्राएं और स्टाफ घबरा गए। धुआं भरते ही बिगड़े हालात प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही आग लगी, पूरे भवन में घना धुआं फैल गया और बाहर निकलने के रास्ते बंद होने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती इस हादसे में कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। एक छात्र के नीचे गिरने से लोहे की ग्रिल से टकराने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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