भोपाल। राजधानी भोपाल में एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े होने के संदेह में एक युवक को हिरासत में लिया है। युवक की पहचान मोहम्मद फराज के रूप में हुई है। ATS ने उसे शुक्रवार सुबह काजी कैंप इलाके में नन्हें बी की मस्जिद के पास से पकड़ा। फिलहाल उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद फराज एक डॉक्टर के क्लीनिक में काम करता था। जांच एजेंसियों को उसकी गतिविधियों से जुड़े कुछ इनपुट मिले थे, जिसके बाद उस पर निगरानी रखी जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह कथित तौर पर विशेष ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था।
मोबाइल से मिले संदिग्ध दस्तावेज
ATS का दावा है कि आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजे गए कथित जिहादी दस्तावेजों की पीडीएफ फाइलें बरामद हुई हैं। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि वह कुछ डार्क एप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध समूहों के संपर्क में था।
मार्शल आर्ट ट्रेनिंग और विदेशी संपर्कों की जांच
जांच एजेंसियों के मुताबिक युवक मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था। ATS अब उसके विदेशी संपर्कों, डिजिटल गतिविधियों और सोशल मीडिया नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के देवबंद से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है, जिनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

UAPA और राष्ट्रद्रोह की धाराओं में केस
मामले में आरोपी के खिलाफ यूएपीए (UAPA) और राष्ट्रद्रोह से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अदालत ने उसे 16 जून तक रिमांड पर भेजा है। इस दौरान जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क, संपर्कों और कथित गतिविधियों के बारे में विस्तृत पूछताछ करेंगी।
सोशल मीडिया और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
सूत्रों के अनुसार, आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां उसके चैट, ऑनलाइन गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाल रही हैं। हालांकि, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।
गोपनीय तरीके से हुई कार्रवाई
बताया जा रहा है कि ATS ने पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी। स्थानीय पुलिस को भी कार्रवाई की जानकारी बाद में दी गई। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
नोट: जांच अभी जारी है। एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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