राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ संयुक्त रूप से पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है।
यह पैदल मार्च शुक्रवार शाम 4:30 बजे जहांगीराबाद स्थित जिंसी चौकी से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव वापस लेने की मांग करेंगे।
स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताया
जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे।
उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला ने विदेशों में रहकर भारत की आजादी की लड़ाई को मजबूत किया और देश की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई थी। ऐसे व्यक्तित्व के नाम को हटाने का प्रयास स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का अपमान है।
नए विश्वविद्यालय खोलने की मांग
मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि प्रदेश को नए और विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की जरूरत है, न कि पुराने संस्थानों के नाम बदलने की।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी नए नाम से संस्थान स्थापित करना चाहती है तो नए विश्वविद्यालय खोले जाएं, लेकिन ऐतिहासिक पहचान और विरासत से जुड़े संस्थानों के नाम नहीं बदले जाने चाहिए।
प्रस्ताव वापस लेने की मांग
विरोध कर रहे संगठनों ने सरकार से कार्य परिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह फैसला भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर सीधा आघात है।
संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
नागरिकों से शामिल होने की अपील
आयोजकों ने शहरवासियों, छात्र-छात्राओं और समाज के सभी वर्गों से पैदल मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक नाम का मुद्दा नहीं, बल्कि इतिहास और विरासत को बचाने की लड़ाई है।
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