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Bihar Politics में बड़ा सियासी ट्विस्ट, Bankipur हार के बाद PM Modi से मिले Nitish Kumar

Table of Content

Bihar की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट के नतीजे के बाद हलचल बढ़ गई है। बीजेपी को मिली हार के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात संसद भवन में हुई। इसके बाद बिहार की सियासत में इस बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बांकीपुर का चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे समय में नीतीश कुमार का पीएम मोदी से मिलना राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

Bankipur Result के बाद हुई अहम मुलाकात

बांकीपुर सीट का नतीजा सामने आने के बाद बीजेपी और एनडीए के राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया।

संसद भवन में हुई इस मुलाकात को बिहार के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि चुनावी नतीजों के बाद एनडीए की आगे की रणनीति क्या रहती है।

BJP की हार ने खड़े किए कई सवाल

बांकीपुर को पटना की अहम विधानसभा सीटों में माना जाता है। यहां बीजेपी की हार के बाद पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव परिणाम को लेकर विपक्ष भी एनडीए पर निशाना साध रहा है और इसे बिहार की राजनीति में बदलते माहौल का संकेत बता रहा है।

हालांकि, किसी एक सीट के परिणाम को पूरे राज्य की राजनीति का सीधा संकेत मानना सही नहीं होगा। फिर भी बांकीपुर का नतीजा बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय जरूर बन गया है।

Nitish Kumar और PM Modi की बैठक पर टिकी नजरें

नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब बिहार में चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक में किसी बड़े राजनीतिक फैसले पर चर्चा हुई। फिलहाल इतना जरूर है कि बांकीपुर के नतीजे के बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार की Politics को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

आगे क्या होगी NDA की रणनीति?

बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू लंबे समय से महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। चुनावी नतीजों के बाद दोनों दलों के लिए आगे की रणनीति तय करना अहम होगा। खासकर उन सीटों पर पार्टी संगठन और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की जा सकती है जहां उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आए।

अब सबकी नजरें आने वाले राजनीतिक बयानों और एनडीए की अगली गतिविधियों पर हैं। बांकीपुर का नतीजा और उसके बाद नीतीश कुमार की पीएम मोदी से मुलाकात फिलहाल बिहार की सियासत में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

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Yukta

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Bihar

Bihar Politics में बड़ा सियासी ट्विस्ट, Bankipur हार के बाद PM Modi से मिले Nitish Kumar

Bihar की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट के नतीजे के बाद हलचल बढ़ गई है। बीजेपी को मिली हार के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात संसद भवन में हुई। इसके बाद बिहार की सियासत में इस बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बांकीपुर का चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे समय में नीतीश कुमार का पीएम मोदी से मिलना राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। Bankipur Result के बाद हुई अहम मुलाकात बांकीपुर सीट का नतीजा सामने आने के बाद बीजेपी और एनडीए के राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया। संसद भवन में हुई इस मुलाकात को बिहार के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि चुनावी नतीजों के बाद एनडीए की आगे की रणनीति क्या रहती है। BJP की हार ने खड़े किए कई सवाल बांकीपुर को पटना की अहम विधानसभा सीटों में माना जाता है। यहां बीजेपी की हार के बाद पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव परिणाम को लेकर विपक्ष भी एनडीए पर निशाना साध रहा है और इसे बिहार की राजनीति में बदलते माहौल का संकेत बता रहा है। हालांकि, किसी एक सीट के परिणाम को पूरे राज्य की राजनीति का सीधा संकेत मानना सही नहीं होगा। फिर भी बांकीपुर का नतीजा बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय जरूर बन गया है। Nitish Kumar और PM Modi की बैठक पर टिकी नजरें नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब बिहार में चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक में किसी बड़े राजनीतिक फैसले पर चर्चा हुई। फिलहाल इतना जरूर है कि बांकीपुर के नतीजे के बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार की Politics को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। आगे क्या होगी NDA की रणनीति? बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू लंबे समय से महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। चुनावी नतीजों के बाद दोनों दलों के लिए आगे की रणनीति तय करना अहम होगा। खासकर उन सीटों पर पार्टी संगठन और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की जा सकती है जहां उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आए। अब सबकी नजरें आने वाले राजनीतिक बयानों और एनडीए की अगली गतिविधियों पर हैं। बांकीपुर का नतीजा और उसके बाद नीतीश कुमार की पीएम मोदी से मुलाकात फिलहाल बिहार की सियासत में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Air India

Air India Flight Turbulence: फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में जोरदार झटके, 12 यात्री घायल

फुकेट से दिल्ली आ रही Air India की फ्लाइट उस वक्त मुश्किल में फंस गई, जब उड़ान के दौरान विमान को अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। हवा में लगे जोरदार झटकों से विमान के अंदर बैठे यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना में करीब 12 यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। टर्बुलेंस के दौरान विमान को कई बार तेज झटके महसूस हुए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि विमान के अंदर की सीलिंग में भी दरारें आने की बात सामने आई है। हालांकि, पायलट ने हालात को संभालते हुए फ्लाइट को सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कराया। अचानक लगे झटकों से घबराए यात्री फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरने के बाद फ्लाइट सामान्य रूप से अपने सफर पर थी। इसी दौरान रास्ते में विमान अचानक तेज हवा के प्रभाव में आ गया। देखते ही देखते विमान में जोरदार झटके महसूस होने लगे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से यात्रियों में घबराहट बढ़ गई। जिन यात्रियों को चोटें आईं, उन्हें दिल्ली पहुंचने के बाद मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। घटना के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति को लेकर जरूरी इंतजाम किए गए। विमान की सीलिंग में आई दरार इस घटना में सबसे ज्यादा ध्यान विमान के अंदर हुए नुकसान ने खींचा है। तेज टर्बुलेंस के बाद विमान की सीलिंग में दरार आने की जानकारी सामने आई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उड़ान के दौरान हवा के झटके कितने तेज रहे होंगे। दिल्ली में लैंडिंग के बाद विमान की तकनीकी स्थिति की जांच की जा रही है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि टर्बुलेंस के कारण विमान के किन हिस्सों को नुकसान पहुंचा और उसकी गंभीरता कितनी थी। पायलट ने संभाली स्थिति, दिल्ली में सुरक्षित Landing तेज टर्बुलेंस के बावजूद फ्लाइट के पायलट और क्रू ने स्थिति को संभाले रखा। विमान को सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा गया। लैंडिंग के बाद घायल यात्रियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता दी गई। यात्रियों के लिए विमान में सीट बेल्ट बांधकर रखना ऐसे हालात में बेहद महत्वपूर्ण होता है। टर्बुलेंस कब और कितनी तेजी से आएगा, इसका हमेशा सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं होता। क्या होता है Turbulence? टर्बुलेंस दरअसल हवा के प्रवाह में अचानक होने वाला बदलाव है। जब विमान अलग-अलग गति या दिशा से चल रही हवा के क्षेत्र से गुजरता है, तो यात्रियों को विमान में झटके महसूस हो सकते हैं। हल्का टर्बुलेंस आमतौर पर सामान्य माना जाता है, लेकिन तेज टर्बुलेंस में यात्रियों को चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि उड़ान के दौरान सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है। Air India Flight Incident पर नजर फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में हुई इस घटना ने एक बार फिर विमान यात्रा के दौरान Turbulence Safety को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। फिलहाल यात्रियों के घायल होने और विमान को हुए नुकसान से जुड़ी जानकारी सामने आ रही है। घटना की विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। फिलहाल राहत की बात यह रही कि तेज झटकों के बावजूद फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कर गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
WhatsApp

WhatsApp Account Ban: अचानक हजारों Accounts हुए बंद, ‘Under Review’ Message से Users परेशान

WhatsApp यूजर्स के लिए अचानक एक ऐसी परेशानी सामने आई, जिसने कई लोगों को चिंता में डाल दिया। बिना किसी स्पष्ट Warning के बड़ी संख्या में WhatsApp Accounts को अचानक बंद कर दिया गया। अकाउंट खोलने पर यूजर्स को ‘Under Review’ का मैसेज दिखाई दिया। इसके बाद WhatsApp के कई जरूरी फीचर्स का इस्तेमाल भी प्रभावित हुआ। अचानक आई इस कार्रवाई से उन लोगों की परेशानी बढ़ गई, जो WhatsApp का इस्तेमाल रोजाना बातचीत के साथ-साथ काम और जरूरी संपर्कों के लिए भी करते हैं। कई यूजर्स का कहना है कि उन्हें अकाउंट पर किसी कार्रवाई से पहले कोई साफ चेतावनी नहीं मिली थी। WhatsApp Accounts क्यों हुए Under Review? WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग तरह के सिस्टम का इस्तेमाल करता है। इन सिस्टम के जरिए Spam, फर्जी गतिविधियों और WhatsApp की नीतियों के संभावित उल्लंघन पर नजर रखी जाती है। अगर किसी अकाउंट की गतिविधि सिस्टम को संदिग्ध लगती है, तो उसे जांच के लिए Under Review किया जा सकता है। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई में कभी-कभी ऐसे अकाउंट भी प्रभावित हो सकते हैं, जिनके यूजर्स का दावा है कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा। यही वजह है कि अचानक हुए Account Ban को लेकर यूजर्स के बीच नाराजगी और confusion देखने को मिला। बिना Warning बंद हुए कई Features अकाउंट पर Review लगने के बाद यूजर्स को WhatsApp की सामान्य सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी हुई। कई मामलों में मैसेजिंग और दूसरे फीचर्स प्रभावित होने की शिकायत सामने आई। यूजर्स के लिए सबसे ज्यादा परेशानी की बात यह रही कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि आखिर उनका अकाउंट किस वजह से Review में गया है। WhatsApp का सिस्टम अगर किसी गतिविधि को संदिग्ध मानता है तो जांच पूरी होने तक अकाउंट पर कुछ restrictions लग सकती हैं। WhatsApp ने माना- कभी-कभी हो सकती है गलती इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि WhatsApp की ओर से यह माना गया है कि automated systems से कभी-कभी गलत पहचान भी हो सकती है। यानी किसी यूजर का अकाउंट गलती से भी Review के दायरे में आ सकता है। ऐसी स्थिति में यूजर्स के लिए Review Request का विकल्प मददगार हो सकता है। कंपनी की ओर से जांच किए जाने के बाद अगर कार्रवाई गलत पाई जाती है, तो अकाउंट को दोबारा चालू किया जा सकता है। Account Ban होने पर क्या करें? अगर आपके WhatsApp Account पर भी ‘Under Review’ दिखाई दे रहा है, तो सबसे पहले घबराने के बजाय WhatsApp में दिए गए आधिकारिक Request a Review विकल्प का इस्तेमाल करें। इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट से Account Unban कराने का दावा करने वाली सर्विस न लें। WhatsApp Account से जुड़ी जानकारी, OTP या अन्य निजी विवरण किसी के साथ शेयर करना नुकसानदायक हो सकता है। यूजर्स को यह भी सलाह दी जाती है कि WhatsApp के अनऑफिशियल या Modified Versions का इस्तेमाल न करें। ऐसे ऐप्स अकाउंट की सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की नीतियों से जुड़ी परेशानी पैदा कर सकते हैं। Users के लिए क्यों बड़ी चिंता है यह मामला? आज WhatsApp सिर्फ दोस्तों और परिवार से बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। छोटे-बड़े कारोबार, ऑफिस Communication, स्कूल-कॉलेज और रोजमर्रा के जरूरी कामों में भी इसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में बिना किसी स्पष्ट Warning के Account का अचानक बंद होना यूजर के लिए काफी परेशान करने वाला अनुभव हो सकता है। खासकर तब, जब स्क्रीन पर सिर्फ ‘Under Review’ लिखा दिखाई दे और कार्रवाई की वजह साफ न हो। फिलहाल प्रभावित यूजर्स के लिए सबसे सही रास्ता आधिकारिक Review Process का इस्तेमाल करना है। अगर कार्रवाई सिस्टम की गलती के कारण हुई है, तो जांच के बाद अकाउंट दोबारा Restore होने की संभावना रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Priyanka Gandhi

Bihar Politics में घमासान, Bankipur पर Priyanka का BJP पर वार; Giriraj बोले- ज्यादा खुश न हों

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सीट पर सामने आए राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोग अब भाजपा से थक चुके हैं। प्रियंका के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी पलटवार किया और विपक्ष को ज्यादा खुश नहीं होने की नसीहत दे दी। बांकीपुर को लेकर नेताओं के बीच जुबानी जंग ने बिहार की राजनीति का माहौल और गर्म कर दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ जनता के बदलते मूड के तौर पर देख रहा है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेता इन दावों को लेकर सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं। प्रियंका गांधी ने BJP पर साधा निशाना प्रियंका गांधी ने बांकीपुर के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जनता अब भाजपा से थक चुकी है। उनके बयान को विपक्ष की ओर से बीजेपी के खिलाफ माहौल बनने के दावे के तौर पर देखा जा रहा है। बांकीपुर जैसी चर्चित सीट पर इस तरह की राजनीतिक टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां का चुनावी मुकाबला लंबे समय से बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार सरकार और बीजेपी की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Giriraj Singh का Priyanka Gandhi को जवाब प्रियंका गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष को बांकीपुर के राजनीतिक समीकरणों को लेकर जल्दबाजी में उत्साहित नहीं होने की सलाह दी। गिरिराज सिंह का कहना है कि चुनावी राजनीति में किसी एक घटनाक्रम या बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। उन्होंने विपक्ष को संकेत दिया कि अभी ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है और तस्वीर आगे और साफ होगी। Bankipur में बढ़ी Political हलचल बांकीपुर की राजनीति में इस बयानबाजी के बाद हलचल बढ़ गई है। एक ओर प्रियंका गांधी का बयान कांग्रेस और विपक्ष के लिए उत्साह बढ़ाने वाला माना जा रहा है, वहीं गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया बीजेपी के आत्मविश्वास को दिखाती है। दरअसल, बिहार की राजनीति में हर चुनावी सीट का अपना महत्व है, लेकिन बांकीपुर पर होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर खास नजर रहती है। यही वजह है कि यहां से जुड़े नेताओं के बयान भी तेजी से चर्चा में आ जाते हैं। जनता के मूड पर टिकी निगाहें फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांकीपुर में जनता का मूड किस ओर है। राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा। प्रियंका गांधी के ‘लोग BJP से थक चुके हैं’ वाले बयान और गिरिराज सिंह के ‘ज्यादा खुश न हों’ वाले पलटवार ने बिहार की सियासत में नया राजनीतिक वार-पलटवार जरूर शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में इस सीट को लेकर और बयान सामने आने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment Fee

अगर आप रोजाना UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद आने वाले समय में कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने का रास्ता खुल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी UPI पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकार के पास कुछ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था करने का विकल्प होगा। 2020 में खत्म कर दिया गया था MDR UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने साल 2020 में UPI के जरिए होने वाले Merchant Payments पर MDR को खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा दुकानदारों और कारोबारियों को मिला और डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे UPI छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े Shopping Platforms तक पहुंच गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक QR Code से Payment करना आम बात हो चुकी है। लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक और Payment Companies लगातार टेक्नोलॉजी, सर्वर, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से लंबे समय से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model की जरूरत पर चर्चा होती रही है। Payment Act में बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है? वित्त मंत्रालय ने कानून के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बदलना है। अगर संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार आगे यह तय कर सकती है कि किन पेमेंट सिस्टम, कारोबारियों या ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए। यानी अभी सरकार ने यह नहीं कहा है कि हर UPI Payment पर शुल्क लगेगा। फिलहाल मामला कानूनी बदलाव के प्रस्ताव तक सीमित है। क्या आम UPI Users को देना होगा पैसा? यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम लोगों के सामान्य UPI Payments पर सीधे शुल्क लगाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। संभावना यह जताई जा रही है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसका फोकस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों या कुछ खास तरह के Merchant Transactions पर हो सकता है। इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को Payment करना या रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना फिलहाल शुल्क के दायरे में आने की पुष्टि नहीं हुई है। बड़े कारोबारियों पर क्यों हो सकता है असर? UPI का इस्तेमाल अब बड़े E-commerce Platforms, Food Delivery Apps, Travel Companies और दूसरे बड़े कारोबारों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन कंपनियों के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार बड़े कारोबारियों के कुछ UPI Transactions पर MDR लागू करती है तो सबसे पहले इसका असर इसी वर्ग पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि किस Merchant को कितना MDR देना होगा और इसकी दर क्या होगी। छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा? छोटे व्यापारियों के लिए UPI लंबे समय से एक आसान और कम लागत वाला Payment Option रहा है। इसलिए सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि MDR की व्यवस्था बनाते समय छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। अगर भविष्य में शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों और निर्धारित श्रेणी के Transactions तक सीमित रखा जाता है तो छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रह सकता है। UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है? इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हो सकती हैं कि अब हर UPI Payment पर Fee लगेगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। अभी UPI Payment पर नई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। सरकार ने सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आगे संसद की प्रक्रिया, सरकार के नियम और संबंधित Notification के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। UPI के Future के लिए बड़ा फैसला UPI ने भारत में Payment करने का तरीका ही बदल दिया है। छोटी रकम से लेकर लाखों रुपये के Business Transactions तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में MDR की संभावित वापसी सिर्फ फीस से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के पूरे Digital Payment Ecosystem के भविष्य से जुड़ा फैसला है। सरकार के सामने दो बड़ी जरूरतें हैं—एक तरफ आम लोगों के लिए UPI को आसान और किफायती बनाए रखना और दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम को चलाने वाले बैंकों और Payment Companies के लिए टिकाऊ Revenue Model तैयार करना। फिलहाल नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि UPI पर MDR किन लोगों और किन Transactions पर लागू होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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