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वक्फ संशोधन विधेयक 2025: आज लोकसभा में पेश होगा, NDA के समर्थन के बावजूद विपक्ष हमलावर

नई दिल्ली: लोकसभा में आज वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे इसे सदन में चर्चा के लिए रखेंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस बिल पर 8 घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया है, जिसमें से NDA को 4 घंटे 40 मिनट का समय मिलेगा, जबकि शेष समय विपक्ष को दिया गया है। TDP और JDU का समर्थन, सभी सांसदों को व्हिप जारी विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इन दोनों दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप भी जारी किया है। TDP और JDU के समर्थन के बाद NDA के पास सदन में विधेयक को पारित कराने की पर्याप्त संख्या बल है। विपक्ष हमलावर, चर्चा का समय बढ़ाने की मांग विपक्ष इस विधेयक के विरोध में एकजुट हो रहा है। मुख्य विपक्षी दलों के अलावा, कुछ तटस्थ मानी जाने वाली पार्टियां भी विरोध में आ गई हैं। इनमें तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक (AIADMK), नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) और के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (BRS) शामिल हैं। इन दलों ने भी I.N.D.I.A गठबंधन के दलों के साथ मिलकर विधेयक का विरोध करने का फैसला किया है। बिल पर अपनी रणनीति तय करने के लिए बीते दिन I.N.D.I.A ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन में बैठक की। विपक्ष का कहना है कि 8 घंटे का समय पर्याप्त नहीं है, इसलिए उन्होंने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग की है। रिजिजू बोले- समय बढ़ाने पर विचार संभव इस मांग के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा,“देश भी जानना चाहता है कि किस पार्टी का क्या स्टैंड है। अगर विपक्ष को और समय चाहिए, तो हम इस पर विचार कर सकते हैं।” क्या है वक्फ संशोधन विधेयक 2025? वक्फ संपत्तियों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव लाने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है। इस विधेयक को लेकर सरकार का कहना है कि इससे वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष को इसमें कई आपत्तियां हैं और वे इसे संप्रदाय विशेष के खिलाफ बताया जा रहा है। क्या होगा आगे? आज लोकसभा में होने वाली चर्चा के दौरान इस पर तीखी बहस होने की संभावना है। जहां NDA के पास इस बिल को पारित कराने के लिए संख्याबल है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने के मूड में है। अगर चर्चा का समय बढ़ाया जाता है, तो विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए और अधिक अवसर मिलेंगे। अब देखना होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस पर क्या समझौता होता है और विधेयक किन संशोधनों के साथ पारित होता है। देश हरपल के लिए रिपोर्टिंग 🚩
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Mod. Yunus

चिकन नेक कॉरिडोर पर यूनुस का बयान: ‘हम बांग्लादेश को तोड़कर समंदर तक अपना रास्ता बना सकते हैं…’, पूर्वोत्तर में भड़के विरोध के स्वर

नई दिल्ली। बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के एक बयान ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। यूनुस ने कथित तौर पर कहा कि अगर बांग्लादेश भारत के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो वह समुद्र तक अपना रास्ता बना सकता है। यह टिप्पणी भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर की गई, जिसे देश के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाली पतली ज़मीन की पट्टी माना जाता है। यूनुस का विवादित बयान और पृष्ठभूमि खबरों के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस हाल ही में चीन की यात्रा पर थे, जहां उन्होंने कथित तौर पर बांग्लादेश को चीन के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश एक लैंडलॉक्ड (चारों ओर से भूमि से घिरा) देश नहीं है और अगर वह भारत से टकराने को तैयार हो, तो समुद्र तक अपनी पहुंच बना सकता है। यूनुस के इस बयान के बाद पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई नेताओं और संगठनों ने इसे भारत की अखंडता के खिलाफ खुली धमकी बताया है। क्या है चिकन नेक कॉरिडोर? चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए एक अत्यंत संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र है। यह सिर्फ 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि पट्टी है, जो देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ती है। चीन और बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब स्थित इस क्षेत्र को रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। यदि इस क्षेत्र पर किसी तरह का बाहरी खतरा उत्पन्न होता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों का भारत से संपर्क कट सकता है। पूर्वोत्तर में भड़का गुस्सा यूनुस के बयान के बाद असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया है। असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के नेताओं ने इस बयान को पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर खतरा बताया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा,“भारत का कोई भी हिस्सा, खासकर पूर्वोत्तर, बाहरी ताकतों के लिए कभी कमजोर नहीं रहा। हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और कोई भी व्यक्ति या देश हमारी संप्रभुता को चुनौती नहीं दे सकता।” इसके अलावा, कई राष्ट्रवादी संगठनों और छात्र संघों ने भी यूनुस के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत की सुरक्षा पर असर? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बांग्लादेश के भीतर ऐसी भावनाएं पनपती हैं, तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, भारत और बांग्लादेश के रिश्ते अभी तक सकारात्मक रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत हैं। लेकिन इस तरह की बयानबाजी से पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया अब तक बांग्लादेश सरकार की ओर से यूनुस के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, बांग्लादेश के कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस बयान को व्यक्तिगत विचार बताते हुए कहा कि यह सरकारी नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। निष्कर्ष मोहम्मद यूनुस का यह बयान भारत के लिए सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल में ऐसे बयान आग में घी डालने का काम कर सकते हैं। अब देखना होगा कि भारत सरकार और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा एजेंसियां इस मामले पर क्या कदम उठाती हैं।
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BREAKING NEWS:वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में कल 12 बजे होगी चर्चा: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, बड़ा सियासी संग्राम तय

नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विधेयक कल दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिस पर 8 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। हालांकि, विपक्ष ने इस चर्चा को 12 घंटे तक बढ़ाने की मांग की है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा टकराव हो सकता है। क्या है वक्फ संशोधन विधेयक? वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को नियंत्रित करता है। हालांकि, समय-समय पर इस अधिनियम को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए संशोधन में क्या बदलाव किए जा रहे हैं? विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे समुदाय के खिलाफ बताया और कहा,“सरकार बिना सभी पक्षों को सुने यह विधेयक लाना चाहती है, जो पूरी तरह अनुचित है। यह मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे।” कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा,“यह कानून देश के लाखों लोगों को प्रभावित करेगा, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। केवल 8 घंटे की चर्चा काफी नहीं है।” योगी आदित्यनाथ का समर्थन, कहा- बदलाव समय की मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा,“देश में वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग बहुत ज़रूरी है। यह संशोधन पारदर्शिता लाने और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जा रहा है।” योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि,“वक्फ संपत्तियों को लेकर वर्षों से विवाद और अनियमितताएं रही हैं। अगर कोई बदलाव किया जा रहा है, तो वह राष्ट्रहित और समाजहित में है।” विधेयक के समर्थक और विरोधी कौन? इस विधेयक को लेकर दो खेमे बन चुके हैं।✅ समर्थक (BJP, JDU, AIADMK) – इन दलों का कहना है कि यह विधेयक संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करेगा और भ्रष्टाचार को रोकेगा।❌ विरोधी (SP, Congress, TMC, AIMIM, Left) – विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार इस कानून के ज़रिए वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करना चाहती है और अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अब आगे क्या होगा? निष्कर्ष: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है। सरकार इसे भ्रष्टाचार रोकने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ साजिश करार दे रहा है। कल संसद में होने वाली बहस के बाद ही यह तय होगा कि यह विधेयक पास होगा या नहीं।
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क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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Social Media

Social Media Controversy: Biryani वाले बयान पर बड़ा एक्शन, नौकरी खत्म

Social Media पर दिया गया एक हल्का-फुल्का बयान एक शख्स के लिए भारी पड़ गया। “बिरयानी के 370 वसूलूंगा” कहने के बाद शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उसकी नौकरी चली गई और मामला पूरी तरह सुर्खियों में आ गया। वायरल पोस्ट से बढ़ा मामला जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद एक वायरल पोस्ट या वीडियो से जुड़ा है, जिसमें व्यक्ति ने मजाकिया अंदाज में यह टिप्पणी की थी। लेकिन कुछ ही समय में यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ यूजर्स ने इसे मजाक माना, तो कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और गलत बताया। कंपनी ने लिया सख्त एक्शन मामला बढ़ता देख संबंधित कंपनी ने भी सख्त रुख अपनाया। आंतरिक जांच के बाद कंपनी ने फैसला लेते हुए उस व्यक्ति को नौकरी से हटा दिया। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों का सोशल मीडिया व्यवहार भी संस्थान की छवि को प्रभावित करता है, इसलिए इस तरह के मामलों में कार्रवाई जरूरी हो जाती है। इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट विवाद और बढ़ते ऑनलाइन ट्रोलिंग के बीच उस शख्स ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया, जिससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी जरूरी यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर कही गई छोटी-सी बात भी तेजी से वायरल होकर बड़ा विवाद बन सकती है। एक मजाकिया कमेंट भी कभी-कभी करियर और निजी जिंदगी पर गहरा असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
सोशल मीडिया

3 Lakh का Birthday Gift लेकर अगले दिन Breakup! Viral Story से सोशल मीडिया हैरान

सोशल मीडिया पर एक ऐसी कहानी तेजी से वायरल हो रही है जिसने लोगों को हैरान भी किया है और रिश्तों को लेकर सोचने पर मजबूर भी कर दिया है। मामला एक कपल से जुड़ा है, जहां बॉयफ्रेंड ने अपनी गर्लफ्रेंड के बर्थडे को खास बनाने के लिए करीब 3 लाख रुपये का महंगा गिफ्ट दिया, लेकिन अगले ही दिन रिश्ता टूट गया। जानकारी के अनुसार, युवक ने पूरी तैयारी के साथ अपनी पार्टनर का जन्मदिन सेलिब्रेट किया था। उसने प्यार और उम्मीदों के साथ महंगा तोहफा दिया ताकि यह दिन यादगार बन जाए। पार्टी और गिफ्ट के समय सब कुछ सामान्य और खुशहाल दिख रहा था। लेकिन कहानी ने अचानक मोड़ ले लिया जब अगले दिन लड़की ने ब्रेकअप का फैसला ले लिया और युवक को मैसेज के जरिए रिश्ते को खत्म करने की जानकारी दी। इस फैसले से युवक पूरी तरह शॉक में आ गया और उसे समझ नहीं आया कि आखिर इतनी जल्दी क्या बदल गया। Social Media Viral Story: लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया यह मामला वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे “emotional manipulation” बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि रिश्तों में भरोसा और communication की कमी ऐसी situations को जन्म देती है। कई यूजर्स ने इसे “gift culture pressure” से भी जोड़कर देखा है, जहां रिश्तों में महंगे गिफ्ट्स उम्मीदों और emotional imbalance को बढ़ा देते हैं। Relationship Trust पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के रिश्तों में trust और understanding कमजोर हो रही है? या फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली stories हमेशा पूरी सच्चाई नहीं दिखातीं? फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई official statement सामने नहीं आया है, लेकिन यह कहानी लगातार चर्चा में बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
West Bengal

West Bengal Politics: CM का बड़ा फैसला, Home Ministry अपने पास, नए मंत्रियों को मिले अहम विभाग

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion 2026) के बाद राज्य सरकार ने मंत्रियों के बीच विभागों का औपचारिक बंटवारा शुरू कर दिया है। इस फैसले के साथ ही सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 35 मंत्रियों की नई टीम, सरकार ने दिया बड़ा संदेश नई सरकार में कुल 35 विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री दोनों शामिल हैं। इस बड़े विस्तार को राजनीतिक जानकार सरकार की “नए सिरे से टीम स्ट्रक्चर” की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। सरकार का दावा है कि नई टीम में: CM ने रखा Home Ministry अपने पास, मजबूत नियंत्रण का संकेत सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने सबसे अहम विभागों में से एक गृह मंत्रालय (Home Ministry) अपने पास ही रखा है। यह फैसला राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण बनाए रखने के उद्देश्य से देखा जा रहा है। इसके अलावा प्रशासनिक और समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही रहेंगे। Swapan Dasgupta को मिली Finance Ministry की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) को राज्य का वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) सौंपा गया है। उनके पास अब राज्य की आर्थिक नीति, बजट तैयार करना और वित्तीय सुधारों की बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति आर्थिक प्रबंधन को मजबूत करने और नई वित्तीय रणनीति लागू करने की दिशा में अहम कदम है। कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार के फैसलों और मंत्री चयन पर सवाल उठा रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासन को तेज और प्रभावी बनाने के लिए किया गया है। क्या बदल सकता है आगे? विशेषज्ञों के अनुसार यह नया कैबिनेट ढांचा आने वाले समय में: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bengal Cabinet में विभागों का बंटवारा: शपथ के 10 दिन बाद ममता सरकार ने नए मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी

Bengal Cabinet में विभागों का बंटवारा: शपथ के 10 दिन बाद ममता सरकार ने नए मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी

West Bengal में नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के करीब 10 दिन बाद आखिरकार विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने नए मंत्रियों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपते हुए विभिन्न विभागों का आवंटन किया है। इससे राज्य सरकार के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हाल ही में कैबिनेट विस्तार के दौरान शामिल किए गए मंत्रियों को अब उनके मंत्रालय मिल गए हैं। लंबे इंतजार के बाद जारी की गई सूची में कई नेताओं को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बंटवारे को आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि विभागों का आवंटन मंत्रियों के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि विकास कार्यों को गति दी जा सके और जनता से जुड़े मुद्दों का तेजी से समाधान हो सके। किस मंत्री को मिला कौन-सा विभाग? राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार नए मंत्रियों को विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें प्रशासन, विकास, जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई अहम मंत्रालय शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों का यह बंटवारा ममता बनर्जी की टीम को और मजबूत करेगा। साथ ही सरकार आगामी चुनौतियों और चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए अपने संगठनात्मक ढांचे को भी सुदृढ़ कर रही है। जनता की उम्मीदें बढ़ीं नए मंत्रियों को जिम्मेदारी मिलने के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि वे अपने-अपने विभागों में कितना प्रभावी काम कर पाते हैं। खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विभागों में जनता को बेहतर परिणामों की उम्मीद है। विभागों का बंटवारा होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार का नया प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह सक्रिय हो गया है और अब सभी विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों पर काम शुरू करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gurugram

Mega Search Operation in Gurugram: पुलिस ने शुरू की सघन छापेमारी, दस्तावेजों की हो रही जांच

गुरुग्राम (Gurugram) में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने बड़ा Mega Search Operation in Gurugram शुरू किया है। इस अभियान के तहत शहर के कई इलाकों में एक साथ तलाशी और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अचानक शुरू हुए इस अभियान से कई इलाकों में हलचल देखने को मिली, क्योंकि पुलिस टीमें अलग-अलग जगहों पर पहुंचकर किरायेदारों और बाहरी लोगों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। शहर में कई इलाकों में एक साथ चला सर्च अभियान पुलिस ने यह कार्रवाई एक साथ कई टीमों के जरिए शुरू की है। झुग्गी बस्तियों से लेकर हाई-राइज सोसायटी तक, हर जगह संदिग्ध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा रही है। किन जगहों पर हो रही जांच? दस्तावेजों की गहन जांच इस अभियान में पुलिस आधार कार्ड, पहचान पत्र, किरायानामा और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। खास तौर पर ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जा रहा है जो बिना वैध दस्तावेजों के शहर में रह सकते हैं। पुलिस का साफ संदेश अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना है। वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों के साथ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों और RWA से अपील प्रशासन ने नागरिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से अपील की है कि वे अपने यहां रहने वाले किरायेदारों और कर्मचारियों का Police Verification जरूर कराएं। इससे भविष्य में किसी भी तरह की सुरक्षा समस्या से बचा जा सकता है। Gurugram Security Operation पर असर इस मेगा सर्च ऑपरेशन से शहर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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