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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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Govind Giri

मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: Govind Giri का बड़ा दावा, बोले- गलत बताए जा रहे चोरी के आंकड़े

मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर अब गोविंद गिरी महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चोरी की रकम को लेकर चल रही चर्चाओं पर सफाई देते हुए कहा कि घटना में नुकसान को लेकर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे वास्तविकता से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं। गोविंद गिरी के मुताबिक, चोरी की राशि 3 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। बिना आधिकारिक पुष्टि के बड़ी रकम के दावे करना सही नहीं है, क्योंकि इससे लोगों में भ्रम फैलता है। Govind Giri ने क्या कहा? Govind Giri ने चढ़ावा चोरी मामले पर बोलते हुए कहा कि मंदिरों में आने वाला दान और चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है। इसलिए इस तरह के मामलों में सही जानकारी सामने आना बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि चोरी की रकम को लेकर कुछ जगहों पर जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, वे वास्तविक स्थिति से काफी अलग हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। चोरी की रकम को लेकर बना हुआ है विवाद चढ़ावा चोरी की खबर सामने आने के बाद से ही नुकसान की राशि को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी रकम का जिक्र किया गया था, जिसके बाद यह मामला काफी चर्चा में आ गया। अब गोविंद गिरी के बयान के बाद एक बार फिर चोरी की वास्तविक राशि को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कुल कितना नुकसान हुआ है। जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई फिलहाल मामले की जांच जारी है। संबंधित अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चोरी कैसे हुई और इसमें कितनी राशि या सामान का नुकसान हुआ। गोविंद गिरी ने उम्मीद जताई कि जांच के बाद पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल इस घटना के बाद धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिरों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन जरूरी है। मंदिरों में आने वाला चढ़ावा लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा होता है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CBSE

CBSE Education Rule 2026: Third Language Assessment में फेल हुए तो नहीं मिलेगा 10वीं का Certificate

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए भाषा शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब छात्रों को Class 10 Pass Certificate पाने के लिए Third Language (तीसरी भाषा) में भी सफल होना जरूरी होगा। हालांकि, थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन स्कूल द्वारा कराए जाने वाले Internal Assessment में पास होना अनिवार्य रहेगा। यह नया नियम उन छात्रों पर लागू होगा जो Academic Session 2026-27 में Class 9 में प्रवेश लेंगे और 2027-28 में Class 10 Board Exam देंगे। CBSE का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छात्रों में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। CBSE Third Language Rule: क्या बदला है? अब तक कई छात्र तीसरी भाषा को केवल एक अतिरिक्त विषय के रूप में देखते थे, लेकिन नए नियम के बाद इसकी अहमियत बढ़ जाएगी। CBSE के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। नए नियम की मुख्य बातें: Third Language में Fail होने पर क्या होगा? CBSE ने छात्रों को राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई छात्र Third Language Internal Assessment में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे सुधार का मौका दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में: NEP 2020 के तहत क्यों आया यह बदलाव? CBSE का मानना है कि आज के समय में भाषा का ज्ञान केवल परीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 में छात्रों को कई भाषाओं को समझने और सीखने पर जोर दिया गया है। Third Language को अनिवार्य करने का उद्देश्य है कि छात्र: Students और Parents के लिए जरूरी जानकारी नए नियम को लेकर छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं। उन्हें ध्यान रखना होगा कि: CBSE Education System में बड़ा बदलाव CBSE का यह फैसला स्कूल शिक्षा प्रणाली में भाषा सीखने के तरीके को बदल सकता है। अब छात्रों को केवल मुख्य विषयों पर ही नहीं, बल्कि भाषा कौशल पर भी ध्यान देना होगा। छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे Third Language को बोझ न समझें, बल्कि इसे नई भाषा सीखने और अपनी क्षमता बढ़ाने के अवसर के रूप में देखें।
FIFA World Cup 2026

FIFA World Cup 2026: France vs Spain का हाई-वोल्टेज Semifinal, 20 साल पुरानी राइवलरी फिर होगी ताजा

FIFA World Cup 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। फुटबॉल प्रेमियों की नजरें मंगलवार को अमेरिका के डलास स्थित AT&T Stadium पर टिकी होंगी, जहां टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल France और Spain के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सिर्फ फाइनल में पहुंचने की जंग नहीं है, बल्कि दो ऐसी टीमों की भिड़ंत भी है, जिन्होंने पिछले कई वर्षों में विश्व फुटबॉल पर अपनी अलग छाप छोड़ी है। इस मैच की सबसे खास बात यह है कि फ्रांस और स्पेन 20 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबले में आमने-सामने होंगे। आखिरी बार दोनों टीमें 2006 विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में भिड़ी थीं, जहां फ्रांस ने 3-1 से जीत दर्ज कर स्पेन का सफर समाप्त कर दिया था। 20 साल पुरानी यादें फिर होंगी ताजा 2006 के उस मुकाबले में जिदान की कप्तानी वाली फ्रांस टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था। अब दो दशक बाद तस्वीर बदल चुकी है। दोनों टीमों में नए सितारे हैं, नई रणनीतियां हैं और लक्ष्य सिर्फ एक—विश्व कप के फाइनल में जगह बनाना। फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों टीमें इस समय बेहतरीन फॉर्म में हैं और पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करते हुए अंतिम चार तक पहुंची हैं। Mbappe vs Lamine Yamal: मैच का सबसे बड़ा आकर्षण अगर इस सेमीफाइनल की सबसे बड़ी व्यक्तिगत टक्कर की बात करें तो सभी की नजरें किलियन एम्बाप्पे और लामिन यमाल पर रहेंगी। फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे इस विश्व कप में अब तक 8 गोल कर चुके हैं। उनकी गति, शानदार फिनिशिंग और बड़े मैचों में दबाव झेलने की क्षमता फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। गोल्डन बूट की रेस में भी वे सबसे आगे हैं। वहीं, स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल ने अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन ड्रिब्लिंग और आक्रामक खेल से दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। कम उम्र में जिस आत्मविश्वास के साथ वह बड़े मुकाबले खेल रहे हैं, उसने उन्हें इस टूर्नामेंट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। दोनों टीमों का सेमीफाइनल तक का सफर फ्रांस ने पूरे टूर्नामेंट में संतुलित प्रदर्शन किया है। मजबूत डिफेंस और तेज काउंटर अटैक के दम पर टीम ने हर चुनौती का सामना किया। क्वार्टर फाइनल में मोरक्को को हराकर फ्रांस ने अंतिम चार में जगह बनाई। दूसरी ओर, स्पेन ने अपनी पारंपरिक पासिंग फुटबॉल और युवा खिलाड़ियों के दम पर शानदार प्रदर्शन किया। बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल जीतने के बाद टीम पूरे आत्मविश्वास के साथ सेमीफाइनल में उतरेगी। फ्रांस बनाएगा रिकॉर्ड या स्पेन लिखेगा नया इतिहास? फ्रांस के पास लगातार तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने का मौका है। अगर टीम जीत हासिल करती है तो यह आधुनिक फुटबॉल के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में शामिल होगा। वहीं स्पेन की कोशिश 2010 के बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी जीतने की उम्मीदों को मजबूत करने की होगी। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम के पास इतिहास बदलने का सुनहरा अवसर है। डलास में होगा हाई-वोल्टेज मुकाबला अमेरिका का AT&T Stadium इस महामुकाबले का गवाह बनेगा। स्टेडियम में हजारों दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है, जबकि दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल फैंस टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस मैच को देखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकाबला केवल स्टार खिलाड़ियों का नहीं, बल्कि दोनों कोचों की रणनीति की भी परीक्षा होगी। जहां फ्रांस तेज काउंटर अटैक पर भरोसा करेगा, वहीं स्पेन गेंद पर नियंत्रण रखते हुए विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश करेगा। फाइनल का टिकट दांव पर इस मुकाबले की विजेता टीम सीधे FIFA World Cup 2026 Final में पहुंचेगी, जहां उसका सामना दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच किसी फाइनल से कम नहीं है। फुटबॉल प्रेमियों को उम्मीद है कि France vs Spain का यह मुकाबला रोमांच, गति, शानदार गोल और यादगार पलों से भरपूर होगा। एक ओर एम्बाप्पे का अनुभव है तो दूसरी ओर यमाल का युवा जोश। अब देखना दिलचस्प होगा कि डलास की इस जंग में जीत किसकी होती है और विश्व कप ट्रॉफी की ओर एक कदम आगे कौन बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon

IMD Weather Alert: Monsoon Break का असर, उत्तर भारत में थमी बारिश, Arunachal में ITBP के 15 जवान फंसे

देशभर में मानसून (Monsoon) की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। जुलाई के मध्य में जहां आमतौर पर कई राज्यों में झमाझम बारिश होती है, वहीं इस बार मौसम ने अलग ही तस्वीर पेश की है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 11 साल में तीसरी बार ऐसा Monsoon Break देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर, पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बारिश और भूस्खलन से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश में ITBP के 15 जवान खराब मौसम के कारण दुर्गम इलाके में फंस गए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए राहत अभियान जारी है। क्या है Monsoon Break और क्यों हुआ? Monsoon Break वह स्थिति होती है, जब कुछ दिनों के लिए मानसून की सक्रियता अचानक कम हो जाती है। इस दौरान उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश लगभग रुक जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया है। UP और MP में बारिश की कमी बढ़ी चिंता मानसून की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ने लगा है। बारिश कम होने से धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कई जिलों में किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने लगे हैं। राजस्थान, दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ी उमस मानसून कमजोर पड़ने का असर राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी महसूस किया जा रहा है। इन इलाकों में दिन का तापमान बढ़ा है और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। Arunachal Pradesh में ITBP के जवान फंसे पूर्वोत्तर भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। इसी बीच ITBP के 15 जवान एक दुर्गम इलाके में फंस गए। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मौसम साफ होते ही जवानों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश तेज की जाएगी। किसानों की बढ़ी चिंता जुलाई का महीना खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे समय में बारिश कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती, तो कई क्षेत्रों में फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनाएं। IMD ने क्या कहा? भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है, तो उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में फिलहाल बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
LPG Cylinder

10kg Gas Cylinder: अब भारी सिलेंडर से मिलेगी राहत, जानें नया LPG Cylinder कब होगा उपलब्ध

देशभर के करोड़ों LPG उपभोक्ताओं के लिए जल्द एक नई सुविधा शुरू हो सकती है। सरकारी तेल कंपनियां 10kg के नए Lightweight LPG Cylinder को बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही हैं। यह सिलेंडर खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर भारी लगता है या जिनके घर में गैस की खपत कम होती है। हालांकि, इस योजना को लागू करने से पहले सरकार की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग शहरों में उपलब्ध कराया जाएगा। क्या है 10kg LPG Cylinder की खासियत? नया 10kg LPG सिलेंडर वजन में हल्का होगा और इसे उठाना, ले जाना व इस्तेमाल करना पहले की तुलना में काफी आसान रहेगा। तेल कंपनियों का मानना है कि यह सिलेंडर छोटे परिवारों और सीमित गैस उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह नया विकल्प पारंपरिक 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की जगह नहीं लेगा, बल्कि ग्राहकों को एक अतिरिक्त सुविधा देगा। किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? 10kg LPG Cylinder कई वर्गों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। इनमें शामिल हैं— हल्का होने की वजह से इसे बदलना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान होगा। 10kg LPG Cylinder की कितनी होगी कीमत? फिलहाल तेल कंपनियों ने इसकी आधिकारिक कीमत का ऐलान नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिलेंडर को कमर्शियल कैटेगरी में उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे में इसकी कीमत शहर और उस समय लागू LPG दरों के आधार पर तय होगी। सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कीमत को लेकर अंतिम घोषणा अभी बाकी है। क्या बंद हो जाएगा 14.2kg घरेलू LPG Cylinder? इस सवाल का जवाब है—नहीं। 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर पहले की तरह मिलता रहेगा। नया 10kg सिलेंडर केवल एक अतिरिक्त विकल्प होगा, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सही सिलेंडर चुन सकें। अभी कितनी है घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत? वर्तमान में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत अलग-अलग शहरों में अलग है। दिल्ली में इसकी कीमत करीब ₹942 है। वहीं कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें भी समय-समय पर तेल कंपनियों द्वारा संशोधित की जाती हैं। कब से शुरू होगी 10kg LPG Cylinder की सुविधा? अभी तक इसकी लॉन्च डेट तय नहीं की गई है। तेल कंपनियां इस योजना पर काम कर रही हैं और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद इसे पहले चुनिंदा शहरों में शुरू किया जा सकता है। बाद में इसकी उपलब्धता पूरे देश में बढ़ाई जाएगी। उपभोक्ताओं के लिए क्यों है यह बड़ी खबर? बदलती जीवनशैली और छोटे परिवारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 10kg LPG Cylinder एक बेहतर विकल्प बन सकता है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार गैस सिलेंडर चुनने की सुविधा मिलेगी। खासकर ऐसे लोग जो कम गैस का इस्तेमाल करते हैं या भारी सिलेंडर उठाने में असुविधा महसूस करते हैं, उनके लिए यह योजना काफी राहत देने वाली साबित हो सकती है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो आने वाले समय में लाखों उपभोक्ताओं को हल्का, सुविधाजनक और जरूरत के हिसाब से LPG सिलेंडर का नया विकल्प मिल सकेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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