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परीक्षा संशोधन बिल

Education Reform Update: परीक्षा संशोधन बिल पर विपक्ष का विरोध, Student Issues पर बहस की मांग

संसद में Exam Reform Bill पर शुरू नहीं हो सकी चर्चा संसद में Exam Reform Bill (परीक्षा संशोधन बिल) पर चर्चा शुरू होने से पहले ही सदन का माहौल गर्म हो गया। विपक्षी दलों ने छात्रों से जुड़े एक मामले को लेकर जोरदार विरोध किया और मांग की कि इस मुद्दे पर पहले विस्तार से चर्चा की जाए। हंगामे के कारण बिल पर होने वाली बहस आगे नहीं बढ़ सकी। छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष ने उठाई आवाज विपक्ष का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सांसदों ने छात्रों के साथ हुई कथित पिटाई की घटना का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और इस मामले पर सदन में तत्काल चर्चा कराने की मांग की। विपक्षी नेताओं ने कहा कि Education System और Exam Process में सुधार केवल कानून बनाने से संभव नहीं है, बल्कि छात्रों की सुरक्षा, परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है। परीक्षा सुधार बिल को लेकर सरकार का पक्ष सरकार की ओर से पेश किए गए परीक्षा संशोधन बिल का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। सरकार का मानना है कि नए प्रावधानों के जरिए परीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा और भविष्य में होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है। सदन में हंगामे के बीच स्पीकर की अपील विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच स्पीकर ने सभी दलों से सहयोग करने और आपसी सहमति बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना होगा। आगे क्या होगा? अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या नहीं और Exam Reform Bill पर संसद में चर्चा कब शुरू होगी। छात्रों से जुड़े मुद्दों और परीक्षा सुधारों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
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Sonam Wangchuk

Medanta Hospital से Sonam Wangchuk Discharged: स्वास्थ्य में सुधार

लंबे इलाज के बाद लद्दाख के पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने स्वास्थ्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब उनके शरीर में पहले जैसी ऊर्जा वापस आ रही है और वह खुद को पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं। मेदांता अस्पताल से निकलने के बाद सोनम वांगचुक राजघाट के लिए रवाना हुए, जहां वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। उन्होंने कहा कि बापू को नमन करने के बाद वह अपनी आगे की यात्रा शुरू करेंगे और जल्द ही वापस लद्दाख (Ladakh) जाएंगे। VIDEO जारी कर दी स्वास्थ्य की जानकारी Sonam Wangchuk ने वीडियो के जरिए लोगों को बताया कि इलाज के दौरान उन्हें काफी सहयोग मिला। उन्होंने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी दुआओं और समर्थन से उन्हें हिम्मत मिली। उन्होंने कहा कि अब स्वास्थ्य में सुधार है और शरीर में फिर से ताकत महसूस हो रही है। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि वह जल्द ही अपनी जिम्मेदारियों और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम शुरू करेंगे। राजघाट पहुंचकर बापू को देंगे श्रद्धांजलि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने सबसे पहले राजघाट जाने का फैसला किया। उनका कहना है कि महात्मा गांधी के विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं। वांगचुक लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी मांगों और विचारों को सामने रखते रहे हैं। उन्होंने कई बार पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाई है। स्वास्थ्य ठीक होने के बाद Ladakh लौटने की तैयारी सोनम वांगचुक अब अपनी आगे की यात्रा को लेकर तैयार हैं। उन्होंने बताया कि राजघाट में श्रद्धांजलि देने के बाद उनका अगला लक्ष्य लद्दाख लौटना है। लद्दाख में पर्यावरण, शिक्षा और स्थानीय लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर सोनम वांगचुक लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके डिस्चार्ज की खबर सामने आने के बाद समर्थकों और शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली है। समर्थकों ने जताई खुशी सोनम वांगचुक के अस्पताल से बाहर आने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने खुशी जाहिर की। कई लोगों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की और आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। Sonam Wangchuk Health Update के अनुसार, फिलहाल उनका पूरा ध्यान बेहतर स्वास्थ्य के साथ आगे की यात्रा और लद्दाख से जुड़े अपने कार्यों को जारी रखने पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Delhi Police Action on PM Modi Posts: सोशल मीडिया पर विवादित Content हटाने की तैयारी

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक पोस्ट, वीडियो और कमेंट्स के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अब ऐसे कंटेंट की पहचान कर रही है, जो नियमों का उल्लंघन करता है या जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे मामलों में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजकर विवादित सामग्री हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। Social Media Posts पर Delhi Police की नजर आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर किसी भी पोस्ट या वीडियो का असर तेजी से फैलता है। इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। पुलिस उन पोस्ट्स, वीडियो और कमेंट्स की जांच कर रही है, जिन पर आपत्ति जताई गई है। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि आपत्तिजनक सामग्री किस अकाउंट से पोस्ट की गई और इसे कितने लोगों तक पहुंचाया गया। इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे। Platforms से Content Removal के लिए मांगा जाएगा सहयोग दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया कंपनियों से सहयोग लेकर ऐसे कंटेंट को हटाने की तैयारी में है। पुलिस का उद्देश्य सोशल मीडिया पर फैलने वाली ऐसी सामग्री को रोकना है, जो किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आपत्तिजनक हो सकती है या सामाजिक माहौल को प्रभावित कर सकती है। नोटिस जारी होने के बाद प्लेटफॉर्म्स से संबंधित पोस्ट, वीडियो और कमेंट्स को हटाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर अकाउंट से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने को भी कहा जा सकता है। कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में यदि किसी व्यक्ति की ओर से कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की गलत जानकारी या विवादित सामग्री से परेशानी न बढ़े। Online Content Monitoring पर बढ़ा फोकस पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हुई हैं। दिल्ली पुलिस भी लगातार ऐसे मामलों की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों और कंपनियों के साथ मिलकर कार्रवाई कर रही है। फिलहाल प्रधानमंत्री से जुड़े इस मामले में जांच जारी है। पुलिस की अगली कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ITR

Income Tax Return Update: ITR Filing की डेडलाइन करीब, 4 करोड़ पार हुआ रिटर्न का आंकड़ा

अगर आपने अभी तक Income Tax Return (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो अब देर करना भारी पड़ सकता है। ITR फाइल करने की अंतिम तारीख तेजी से नजदीक आ रही है और आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 4 करोड़ से ज्यादा करदाता अपना रिटर्न दाखिल कर चुके हैं। विभाग ने बाकी टैक्सपेयर्स से भी समय रहते ITR फाइल करने की अपील की है ताकि अंतिम समय की भागदौड़ और तकनीकी परेशानियों से बचा जा सके। तेजी से बढ़ रही ITR Filing, अंतिम दिनों में बढ़ सकता है दबाव हर साल की तरह इस बार भी अंतिम तारीख नजदीक आते ही ITR फाइल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नौकरीपेशा कर्मचारी, कारोबारी, फ्रीलांसर और अन्य करदाता लगातार अपना रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आखिरी कुछ दिनों में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक होने से सर्वर स्लो होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। यही वजह है कि करदाताओं को सलाह दी जा रही है कि वे अंतिम दिन का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपनी फाइलिंग पूरी कर लें। समय पर ITR भरने के क्या हैं फायदे? समय सीमा के भीतर ITR दाखिल करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। यदि आपका टैक्स रिफंड बनता है तो उसकी प्रक्रिया जल्दी शुरू हो जाती है। इसके अलावा लेट फीस और अन्य संभावित जुर्माने से भी बचाव होता है। आज के समय में ITR केवल टैक्स से जुड़ा दस्तावेज नहीं है। बैंक लोन, होम लोन, एजुकेशन लोन, वीजा आवेदन और कई वित्तीय प्रक्रियाओं में भी इसकी अहम भूमिका होती है। ITR फाइल करने से पहले इन दस्तावेजों की कर लें जांच रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना बेहद जरूरी है। इनमें शामिल हैं— सभी जानकारियों का मिलान करने के बाद ही रिटर्न सबमिट करें, ताकि बाद में संशोधित रिटर्न दाखिल करने की जरूरत न पड़े। सिर्फ ITR फाइल करना ही काफी नहीं कई करदाता रिटर्न दाखिल तो कर देते हैं, लेकिन e-Verification करना भूल जाते हैं। आयकर नियमों के अनुसार, ITR दाखिल करने के बाद उसका सत्यापन भी जरूरी होता है। बिना e-Verification के रिटर्न की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती। अंतिम समय की जल्दबाजी से बचें विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम तारीख के करीब पोर्टल पर भारी ट्रैफिक रहने की संभावना रहती है। ऐसे में लॉगिन, OTP या दस्तावेज अपलोड जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए यदि आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं किया है, तो इसे टालने के बजाय जल्द पूरा कर लेना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Paper Leak

Punjab Paper Leak Update: CJP के अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, बोले- ‘अभी रणनीति तैयार कर रहे हैं’

Punjab Paper Leak मामले को लेकर राज्य में बहस तेज होती जा रही है। परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच CJP से जुड़े अभिजीत दीपके का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि “हम अभी इसके लिए प्लानिंग कर रहे हैं।” उनके इस बयान के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर कोई नई पहल या कार्रवाई देखने को मिल सकती है। Punjab Paper Leak मामले पर क्यों बढ़ा विवाद? कथित पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ऐसी घटनाएं परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर डालती हैं और मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल भी प्रभावित होता है। CJP के अभिजीत दीपके ने क्या कहा? मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि “हम अभी इसके लिए प्लानिंग कर रहे हैं।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह योजना किस प्रकार की होगी और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने फिलहाल किसी संभावित कार्रवाई या कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। उनके इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी किसी नई पहल की घोषणा नहीं की गई है। जांच और पारदर्शिता की उठ रही मांग पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद कई पक्षों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। छात्रों का कहना है कि यदि किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच पूरी होने से परीक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार की जा सकेगी। अब किस पर टिकी हैं निगाहें? फिलहाल सभी की नजर पंजाब सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों पर है। जांच की दिशा और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित पेपर लीक के आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। इस बीच छात्र लगातार यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही स्थिति साफ होगी और उनके भविष्य को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता नहीं रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon Session

Monsoon Session 2026: Rajya Sabha में Rule 267 पर टकराव, विपक्ष ने तत्काल चर्चा की उठाई मांग

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) का सोमवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने Rule 267 के तहत चर्चा कराने की मांग करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने छात्रों से जुड़े हालिया घटनाक्रम और कथित पुलिस कार्रवाई को बेहद गंभीर बताते हुए इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस” करार दिया। विपक्ष ने मांग की कि सदन की सामान्य कार्यवाही रोककर इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराई जाए, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी और सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। Rule 267 को लेकर क्यों गरमाई Rajya Sabha? संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने Rule 267 के तहत नोटिस देकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन, कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों पर विशेष चर्चा की मांग की। विपक्ष का कहना था कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है, इसलिए इसे प्राथमिकता के साथ उठाया जाना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में कहा कि ऐसे मामलों पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि सरकार अपना पक्ष रख सके और विपक्ष अपनी चिंताओं को सामने ला सके। खड़गे ने सरकार पर साधा निशाना चर्चा की मांग करते हुए खड़गे ने कहा कि छात्रों के साथ जो घटनाएं सामने आई हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि संसद ऐसे विषयों पर चर्चा से पीछे नहीं हट सकती। विपक्षी दलों का आरोप है कि छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। सरकार ने क्या कहा? सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि वह किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन संसद की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगी। सरकार ने विपक्ष पर अनावश्यक हंगामा कर सदन का समय बर्बाद करने का आरोप भी लगाया। सत्ता पक्ष का कहना है कि यदि सभी दल निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें तो हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा संभव है। हंगामे की वजह से प्रभावित हुई कार्यवाही विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। कुछ समय तक सदन में शोर-शराबा जारी रहा, जिसके बाद कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। लोकसभा में भी विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। क्या है Rule 267? राज्यसभा का Rule 267 ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत किसी अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक जनहित के मुद्दे पर सदन की निर्धारित कार्यवाही रोककर तुरंत चर्चा कराई जा सकती है। हालांकि, इस नियम के तहत चर्चा की अनुमति देना पूरी तरह सभापति के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि सभापति को मामला पर्याप्त महत्वपूर्ण लगता है, तभी इस नियम के तहत चर्चा की अनुमति दी जाती है। आगे भी जारी रह सकता है टकराव मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। माना जा रहा है कि छात्रों से जुड़े मामलों, शिक्षा व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में भी संसद का माहौल गर्म रह सकता है। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वह सदन के भीतर अपना विरोध जारी रखेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सुप्रीम कोर्ट

Protest Rights: सुप्रीम कोर्ट ने Police Action पर जताई चिंता, SOP बनाने के दिए निर्देश

देशभर में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठते सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस की बर्बरता को उचित नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शनकारी पुलिस पर हमला करते हैं या हिंसा का सहारा लेते हैं, तो वह भी उतना ही गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को सुझाव दिया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक Standard Operating Procedure (SOP) तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध हों। लोकतंत्र में Protest की अहम भूमिका सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने और सरकार के फैसलों का शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। यह अधिकार भारतीय संविधान से मिलता है और इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और इससे आम जनता के अधिकारों या सार्वजनिक व्यवस्था पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए। Police Action पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में देखने को मिला है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस को केवल उतना ही बल इस्तेमाल करना चाहिए, जितना स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हो। न्यायालय ने कहा कि कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना भी है। इसलिए हर कार्रवाई संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुरूप होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की हिंसा भी चिंता का विषय अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं है। यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया जाता है, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है या हिंसा भड़काई जाती है, तो ऐसे कृत्य भी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। SOP बनने से क्या होगा फायदा? अदालत का मानना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका, भीड़ नियंत्रण, बल प्रयोग की सीमा और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट SOP बनाई जाती है, तो भविष्य में विवाद और टकराव की घटनाओं में कमी आ सकती है। इससे पुलिस को भी तय नियमों के तहत काम करने में सुविधा होगी और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। नागरिक अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब नागरिकों के अधिकार और कानून-व्यवस्था दोनों का समान सम्मान किया जाए। अदालत की यह टिप्पणी आने वाले समय में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत के सुझावों के अनुरूप स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार होता है, तो इससे प्रदर्शन के दौरान होने वाले विवादों में कमी आएगी और नागरिकों तथा पुलिस के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Update: MP और Rajasthan में तेज बारिश का अलर्ट, Himachal में 135 सड़कें बंद

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मध्य प्रदेश (MP) और राजस्थान (Rajasthan) में सोमवार से भारी बारिश का नया दौर शुरू हो गया है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश (UP) में चार नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई सड़कें बंद हैं और जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। MP और Rajasthan में फिर सक्रिय हुआ मानसून भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसून ट्रफ के कारण मध्य प्रदेश और राजस्थान में तेज बारिश की स्थिति बन गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, कोटा, जयपुर, उदयपुर और आसपास के कई जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना है। बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों के उफान पर आने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। UP Flood Update: चार नदियां खतरे के निशान से ऊपर उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर अब नदियों के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राज्य की चार प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगी है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के आसपास न जाने की अपील की गई है। Himachal Pradesh में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है। बीते 27 दिनों में बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बारिश के कारण 135 सड़कें बंद हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन सड़कें खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है। कई राज्यों के लिए जारी हुआ Rain Alert मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं, बिजली गिरने और अचानक जलभराव की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। लोगों के लिए जरूरी सावधानियां आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 3 से 5 दिनों तक उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में यदि आप बारिश प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम का ताजा अपडेट देखकर ही घर से निकलें। थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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धर्मेंद्र प्रधान

Parliament Session धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान, विपक्ष के हंगामे से Lok Sabha और Rajya Sabha की कार्यवाही प्रभावित

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोमवार का दिन संसद में कई अहम घटनाओं का गवाह बना। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे, जहां एनडीए (NDA) के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए शॉल ओढ़ाई और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। वहीं दूसरी ओर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम संसद के मौजूदा सत्र का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन गया। संसद पहुंचते ही धर्मेंद्र प्रधान का हुआ भव्य स्वागत शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए के कई सांसद पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह पहुंचे, सांसदों ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और पारंपरिक मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान सांसदों ने उनके शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की सराहना की। कई नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सम्मान के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। इसे भाजपा और एनडीए की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के प्रति भरोसे और सम्मान का सार्वजनिक संदेश भी माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद भी पार्टी नेतृत्व और सहयोगी दलों का उनके साथ खड़ा दिखना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इधर संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा जहां संसद परिसर में सम्मान का माहौल था, वहीं सदन के भीतर तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष लगातार अपनी मांगों पर चर्चा कराने की मांग करता रहा, जबकि सरकार अपने तय एजेंडे के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाना चाहती थी। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया। 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही लगातार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। पीठासीन अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहने पर दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस वजह से कई महत्वपूर्ण विधायी और सरकारी कार्य भी तय समय पर नहीं हो सके। शिक्षा मंत्रालय की कमान अब नए मंत्री के हाथों में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया है। अब नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। शिक्षा जगत की नजर अब नए नेतृत्व के अगले कदमों पर टिकी है। संसद का दिन क्यों रहा खास? सोमवार का दिन संसद में दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आया। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान चर्चा का विषय बना, तो दूसरी तरफ विपक्ष के हंगामे ने संसदीय कार्यवाही को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद का सत्र और अधिक गर्म रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कर्नाटक के पूर्व CM सिद्धारमैया का बड़ा ऐलान, 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे

बेंगलुरु। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि वह वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सक्रिय राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और जनता के मुद्दों के लिए पहले की तरह काम करते रहेंगे। शनिवार को मंड्या जिले के के.आर. पेट में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही। उनके अनुसार, आज की राजनीति में भ्रष्टाचार बढ़ गया है और ईमानदार राजनीति के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी उम्र अब 79 वर्ष हो चुकी है और मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक वह 81-82 वर्ष के हो जाएंगे। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अब पहले जैसी ऊर्जा के साथ चुनावी राजनीति करना संभव नहीं है। इसी वजह से उन्होंने भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। जनता की सेवा जारी रखने का संकल्प सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में सिद्धारमैया ने बताया कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोग उन्हें एक बार फिर चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपना निर्णय बदलने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब कार्यकर्ता और जनता चुनाव जिताने के लिए हरसंभव सहयोग करते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और चुनाव लड़ने के लिए नेताओं को ही पैसे खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 तक उनके राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इस लंबे सफर में उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हमेशा जनता के हितों को प्राथमिकता दी। आगे भी उनका जीवन जनता की सेवा के लिए समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद आया बयान सिद्धारमैया का यह बयान मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लगभग दो महीने बाद आया है। उन्होंने 28 मई 2026 को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश और रोटेशनल मुख्यमंत्री व्यवस्था के तहत अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में लंबे समय तक सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं चलती रहीं। अंततः पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हुआ और सिद्धारमैया ने पद छोड़ दिया। राजनीति से दूरी नहीं, चुनावी राजनीति से विराम सिद्धारमैया ने साफ किया कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन कांग्रेस और जनता के बीच सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे तथा राज्य और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अधिक राजनीतिक खबरों और ताजा अपडेट के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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