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Mamata Banerjee

Mamata Banerjee कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं CM ममता, दायर की अहम याचिका

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) पहुंचना और एक नई याचिका दायर करना। इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी ने हाई कोर्ट में ऐसी याचिका दाखिल की है जो राज्य में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों या हाल की परिस्थितियों से जुड़ी मानी जा रही है। हालांकि याचिका की पूरी डिटेल अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन इसे बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले भी कोर्ट पहुंच चुकी हैं ममता यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी सीधे अदालत पहुंची हों। इससे पहले भी वे पोस्ट-पोल हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में कलकत्ता हाई कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रख चुकी हैं। उस दौरान भी उन्होंने प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे। बंगाल की राजनीति में बढ़ी गर्माहट इस नए घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।विपक्ष पहले से ही राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर हमलावर है, वहीं TMC इसे प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है। राज्य में पहले से ही कई विवाद, जांच और राजनीतिक बयानबाज़ी चल रही है, ऐसे में यह मामला और ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। हाई कोर्ट पर टिकी नजरें अब सबकी निगाहें कलकत्ता हाई कोर्ट पर हैं कि वह इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है। कोर्ट का अगला कदम राज्य की राजनीति और प्रशासनिक फैसलों पर असर डाल सकता है। क्या होगा आगे? आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल यह साफ है कि ममता बनर्जी का यह कदम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Update अरब सागर में अटका मानसून, MP में 5 दिन बाद बारिश के संकेत

देश के कई राज्यों में लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon) फिलहाल अरब सागर और तेलंगाना क्षेत्र में अटका हुआ है। तेलंगाना में पिछले 6 दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ पाया, जिसका असर अब मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी दिखाई देने लगा है। तेज गर्मी और उमस के बीच लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, वहीं किसान भी खेतों की तैयारी के बाद आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। आखिर क्यों रुक गया मानसून? मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर में बने मौसम सिस्टम और कमजोर हवा के दबाव के कारण मानसून की गति धीमी हो गई है। आमतौर पर जून के दूसरे सप्ताह तक मानसून मध्य भारत के बड़े हिस्से में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी चाल काफी सुस्त बनी हुई है। तेलंगाना में मानसून पिछले 6 दिनों से लगभग स्थिर है। यही वजह है कि मध्य भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रही हैं। MP में कब पहुंचेगा मानसून? मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अगले करीब 5 दिनों में हो सकती है। शुरुआत में बालाघाट, छिंदवाड़ा, मंडला और जबलपुर जैसे जिलों में हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में फिलहाल बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं, लेकिन भारी बारिश के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। किसानों की बढ़ी चिंता मानसून में देरी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान अभी इंतजार कर रहे हैं। सोयाबीन, धान और मक्का जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में कई किसान खेत तैयार करके बैठे हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से बुवाई शुरू नहीं हो पा रही। अगर अगले सप्ताह तक मानसून सक्रिय हो जाता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है। गर्मी और उमस से लोग बेहाल मानसून की देरी का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दिन में तेज गर्मी और शाम को उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। कई शहरों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अगले सप्ताह बदल सकता है मौसम मौसम विभाग का अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में नए सिस्टम बनने के बाद मानसून को फिर से गति मिल सकती है। इसके बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। फिलहाल लोगों और किसानों दोनों की नजरें आने वाले कुछ दिनों के मौसम पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Cough Syrup

Government Action on Cough Syrup: बिना Prescription दवा बेचने पर होगी कार्रवाई

देशभर में अब कफ सिरप (Cough Syrup) खरीदना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि अब बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप और दूसरी सिरप आधारित दवाएं मेडिकल स्टोर पर नहीं मिलेंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद यह नियम पूरे देश में लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि पिछले कुछ समय में कफ सिरप के गलत इस्तेमाल और मिलावटी दवाओं के कई मामले सामने आए थे। खासकर बच्चों और युवाओं में बिना सलाह के दवाएं लेने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी थी। अब मेडिकल स्टोर पर क्या बदलेगा? नई गाइडलाइन लागू होने के बाद अब मेडिकल दुकानदारों को कफ सिरप बेचने से पहले डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन देखनी होगी। बिना पर्ची दवा बेचने पर कार्रवाई भी हो सकती है। इसके साथ ही कई दुकानों को दवा बिक्री का रिकॉर्ड रखने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। अब तक सामान्य खांसी-जुकाम में लोग सीधे मेडिकल स्टोर से सिरप खरीद लेते थे, लेकिन नए नियम के बाद पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? दरअसल, बीते कुछ वर्षों में भारत में बने कुछ कफ सिरप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे थे। कई मामलों में दूषित सिरप की वजह से बच्चों की मौत तक की खबरें सामने आई थीं। इसके अलावा कुछ लोग कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के तौर पर भी कर रहे थे, जिसे रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जांच और सलाह के लंबे समय तक कफ सिरप लेना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कुछ सिरप में ऐसे तत्व होते हैं जो अधिक मात्रा में लेने पर गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकते हैं। आम लोगों पर क्या होगा असर? इस फैसले के बाद लोगों को छोटी बीमारी में भी डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है। हालांकि शुरुआत में इससे थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इससे दवाओं का गलत उपयोग कम होगा और मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार लोग बच्चों को भी बिना सलाह के सिरप दे देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में यह फैसला भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है। Health Experts ने फैसले को बताया जरूरी दवा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि भारत में लंबे समय से दवाओं की ओवर-द-काउंटर बिक्री पर सख्ती की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब नए नियम से मेडिकल सिस्टम में ज्यादा पारदर्शिता आएगी और मरीजों को सुरक्षित इलाज मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य साफ है—लोगों तक सुरक्षित दवाएं पहुंचाना और कफ सिरप के अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक लगाना। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ayodhya

Ayodhya Ram Mandir Case: चढ़ावे में गड़बड़ी पर SIT Action, आज हो सकती है बड़ी कार्रवाई

Ayodhya के Ram Mandir में चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और गड़बड़ी का मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक आज इस मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की जा सकती हैं। वहीं SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने मंदिर परिसर में बंद कमरे में कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी कैसे हुई। इसी को लेकर कर्मचारियों से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। कर्मचारियों से पूछे गए अहम सवाल SIT ने पूछताछ के दौरान कर्मचारियों से यह जानने की कोशिश की कि मंदिर में ड्यूटी खत्म होने के बाद किसी प्रकार की चेकिंग होती थी या नहीं। इसके अलावा यह भी पूछा गया कि चढ़ावे की रकम को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया क्या थी और किन लोगों को उस जगह तक पहुंचने की अनुमति थी। जांच एजेंसियों ने कर्मचारियों की एंट्री-एग्जिट व्यवस्था, CCTV निगरानी और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से जानकारी जुटाई है। माना जा रहा है कि कई रिकॉर्ड और फुटेज को दोबारा खंगाला जा रहा है। दो FIR दर्ज होने की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहली FIR चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और गबन को लेकर दर्ज हो सकती है। वहीं दूसरी FIR सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और नियमों की अनदेखी को लेकर की जा सकती है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच की गंभीरता को देखते हुए आने वाले दिनों में बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालुओं में नाराजगी, प्रशासन पर उठे सवाल राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मंदिर जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा मजबूत होनी चाहिए थी। फिलहाल SIT पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। CCTV फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और कर्मचारियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में आखिर कौन-कौन लोग सामने आते हैं और प्रशासन क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Telegram

Telegram पर अस्थाई रोक: RE-NEET Exam से पहले सरकार का बड़ा Action

देशभर में होने जा रहे RE-NEET 2026 एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मैसेजिंग ऐप Telegram पर अस्थाई रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि कुछ Telegram चैनलों और ग्रुप्स के जरिए फर्जी पेपर लीक, अफवाहें और ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे थे। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है ताकि परीक्षा निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से कराई जा सके। जानकारी के मुताबिक, यह अस्थाई रोक 22 जून 2026 तक लागू रहेगी। वहीं Telegram के message editing फीचर को भी 30 जून तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार को शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग पुराने मैसेज एडिट कर उन्हें “पहले से लीक पेपर” बताकर वायरल कर रहे थे। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच डर और भ्रम का माहौल बन गया था। Paper Leak के नाम पर छात्रों से ठगी जांच एजेंसियों के अनुसार कई Telegram चैनल्स छात्रों को कथित “लीक पेपर” देने का दावा कर रहे थे। इसके बदले हजारों से लेकर लाखों रुपये तक मांगे जा रहे थे। कुछ मामलों में छात्रों और अभिभावकों से ऑनलाइन पेमेंट लेने के बाद चैनल गायब भी हो गए। सूत्रों के मुताबिक, कई राज्यों में साइबर सेल और पुलिस ने ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ चैनल लगातार नए नामों से दोबारा एक्टिव हो रहे थे ताकि कार्रवाई से बचा जा सके। NTA ने छात्रों से की अपील National Testing Agency (NTA) ने छात्रों से किसी भी वायरल मैसेज, स्क्रीनशॉट या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करने की अपील की है। एजेंसी ने साफ कहा है कि परीक्षा पूरी सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के बीच आयोजित की जाएगी। NTA ने यह भी कहा कि अगर किसी छात्र को पेपर लीक या फर्जी दावे से जुड़ी जानकारी मिलती है तो तुरंत आधिकारिक पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। 21 जून को होगा RE-NEET Exam गौरतलब है कि RE-NEET 2026 परीक्षा 21 जून को आयोजित होने वाली है। इस परीक्षा में देशभर के लाखों छात्र शामिल होंगे। ऐसे में सरकार और एजेंसियां किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं। सरकार का मानना है कि Telegram पर अस्थाई रोक लगाने से अफवाहों और फर्जी दावों पर काफी हद तक रोक लगेगी। वहीं छात्रों और अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी शॉर्टकट के झांसे में न आएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Voter ID

30 Crore Voter ID Cards होंगे अपडेट, पहचान और Verification होगा आसान

देशभर के करोड़ों मतदाताओं के लिए जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चुनाव आयोग पुराने वोटर आईडी कार्ड्स को अपडेट करने की तैयारी में है। इस अभियान के तहत करीब 30 करोड़ Voter ID Cards में मौजूद धुंधले फोटो बदले जाएंगे और जिन कार्ड्स में मकान नंबर की जगह “00” लिखा है, वहां पूरा और सही पता दर्ज किया जाएगा। दरअसल, लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई वोटर कार्ड्स में फोटो इतने पुराने या धुंधले हैं कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है। वहीं कई कार्ड्स में अधूरा पता होने से वोटिंग के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब चुनाव आयोग इन खामियों को दूर करने के लिए बड़ा अपडेट अभियान शुरू करने जा रहा है। Blur Photo और गलत Address बने परेशानी की वजह ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे वोटर कार्ड पाए गए हैं, जिनमें फोटो साफ दिखाई नहीं देते। कई मामलों में कार्ड पर सिर्फ “00” लिखा होने से सही पता पता नहीं चल पाता। इससे मतदान केंद्रों पर पहचान सत्यापन में समय ज्यादा लगता है और कई बार विवाद जैसी स्थिति भी बन जाती है। इसी को देखते हुए अब रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से फर्जी मतदान रोकने में भी मदद मिलेगी। कैसे होगा Voter Card Update? जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग चरणबद्ध तरीके से यह प्रक्रिया पूरी करेगा। जरूरत पड़ने पर मतदाताओं से नया फोटो और सही पता मांगा जा सकता है। कई जगह ऑनलाइन अपडेट की सुविधा भी दी जाएगी ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अगर किसी मतदाता के कार्ड में फोटो साफ नहीं है या पता गलत दर्ज है, तो उसे अपडेट करवाने का मौका मिलेगा। आयोग का फोकस डेटा को पूरी तरह साफ और आधुनिक बनाने पर है। चुनाव से पहले रिकॉर्ड सुधारने की तैयारी आने वाले चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग मतदाता सूची और पहचान संबंधी रिकॉर्ड को मजबूत करना चाहता है। साफ फोटो और सही एड्रेस होने से मतदान प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान करोड़ों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, क्योंकि लंबे समय से लोग पुराने और खराब प्रिंट वाले वोटर कार्ड्स की समस्या झेल रहे थे।
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S Jaishankar

3 भारतीयों की मौत से भारत सख्त, US Secretary S Jaishankar की अहम बातचीत

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों की मौत को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री S Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता और विरोध दर्ज कराया। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है और इससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। क्या है पूरा मामला? हाल ही में मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में एक कॉमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित परिवारों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना बेहद दुखद है। भारत ने क्या कहा? विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत में कहा कि समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में कॉमर्शियल जहाजों पर हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार और कई देशों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस तरह की घटनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। Middle East Tension पर बढ़ी चिंता मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई देशों ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और कूटनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। भारत भी लगातार शांति और सुरक्षित समुद्री व्यापार की वकालत करता रहा है। भारत सरकार की नजर स्थिति पर सरकार ने कहा है कि प्रभावित भारतीयों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस घटना के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Abhishek Banerjee

रात 3 बजे Abhishek Banerjee Residence पर Police Raid, सेंट्रल फोर्स भी तैनात

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee के कोलकाता स्थित आवास पर देर रात करीब 3 बजे पुलिस की टीम ने छापेमारी की। अचानक हुई इस कार्रवाई ने न सिर्फ इलाके में तनाव पैदा कर दिया, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। रात 3 बजे अचानक पहुंची पुलिस टीम जानकारी के मुताबिक, पुलिस टीम बिना पूर्व सूचना के देर रात घर पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई करीब चार घंटे तक चली, जिसमें घर के हर हिस्से की बारीकी से जांच की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सेंट्रल फोर्स के जवानों को भी मौके पर तैनात किया गया, जिससे पूरा इलाका हाई अलर्ट जैसा माहौल बन गया। “ताला तोड़कर अंदर घुसी पुलिस” – लगा गंभीर आरोप इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब यह आरोप सामने आया कि पुलिस ने कथित तौर पर ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया। हालांकि, इस आरोप की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। राजनीति गरमाई, विपक्ष ने उठाए सवाल छापेमारी के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह गर्म हो गई है। TMC समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे लेकर पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। अब तक प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है। क्या आगे और बढ़ेगा विवाद? फिलहाल स्थिति साफ नहीं है, लेकिन जिस तरह से रात में यह छापेमारी हुई और उसके बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए हैं, उससे साफ है कि यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मिसाइल

भारत की नई सुरक्षा ढाल: 5000 KM तक मिसाइल रोकने वाला डिफेंस सिस्टम सफल

भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाई है। देश के अत्याधुनिक मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया है, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ भारत की एयर डिफेंस क्षमता के लिए “गेम चेंजर” मान रहे हैं। इस टेस्ट के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की उन्नत तकनीक मौजूद है। क्या है Multi-Layered Missile Defence System? यह एक एडवांस्ड बहु-स्तरीय एयर डिफेंस शील्ड है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह अलग-अलग ऊंचाई और दूरी पर आने वाले हवाई खतरों को रोक सके। इस सिस्टम का विकास भारत की रक्षा अनुसंधान एजेंसी DRDO द्वारा किया गया है, जो लगातार देश की सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाने पर काम कर रही है। कैसे काम करता है यह सिस्टम? इस सिस्टम की खासियत इसकी “डिफेंस इन लेयर्स” तकनीक है: सीधे शब्दों में कहें तो यह सिस्टम आसमान में एक मजबूत “सुरक्षा ढाल” की तरह काम करता है। क्यों खास है यह सफलता? इस सफल परीक्षण ने भारत की रक्षा क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है: भारत के लिए इसका मतलब क्या है? यह सिर्फ एक तकनीकी टेस्ट नहीं है, बल्कि भारत की बदलती सुरक्षा सोच का संकेत है। अब देश केवल खतरे को रोकने पर ही नहीं, बल्कि उसे हवा में ही खत्म करने की क्षमता पर भी आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि आने वाले समय में भारत को वैश्विक रक्षा मंच पर और मजबूत पहचान दिला सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Assam

Indian Air Force Plane Crash in Assam: Jorhat में लैंडिंग के तुरंत बाद हादसा

Assam के जोरहाट से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां भारतीय वायुसेना (IAF) का एक विमान हादसे का शिकार हो गया। जानकारी के मुताबिक विमान ने एयरबेस पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी, लेकिन लैंडिंग के कुछ ही देर बाद उसमें अचानक आग लग गई। देखते ही देखते पूरा विमान आग की चपेट में आ गया और एयरबेस परिसर में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद धुएं का घना गुबार आसमान में फैल गया और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरबेस को तुरंत सील कर दिया गया और फायर ब्रिगेड व राहत टीमों को मौके पर भेजा गया। कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विमान ने लैंडिंग के बाद सामान्य स्थिति में आना शुरू ही किया था कि अचानक उसमें आग लग गई। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हादसा तकनीकी खराबी का परिणाम था या किसी अन्य कारण से हुआ। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे के बाद तुरंत एयरफोर्स और इमरजेंसी टीमें सक्रिय हो गईं। आग पर काबू पाने के लिए कई फायर टेंडर लगाए गए। हालांकि, आग लगने की वजह से विमान को काफी नुकसान पहुंचा है। अभी क्या स्थिति है? फिलहाल: जांच शुरू होने की उम्मीद भारतीय वायुसेना इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लैंडिंग के बाद विमान में आग कैसे लगी। विशेषज्ञों की टीम भी घटना की तकनीकी जांच में शामिल हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना

Delhi-NCR में मौसम का मिजाज बदल गया है। कई इलाकों में धूल भरी आंधी चलने के बाद अब बारिश और ओलावृष्टि की संभावना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग (IMD) ने 15 अक्टूबर को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Delhi Weather Today: तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान दिल्ली-NCR में मौसम बदलने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी गतिविधियां अहम मानी जा रही हैं। इसके प्रभाव से आसमान में बादल छाने, गरज-चमक होने और कई जगह बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज झोंकों के दौरान यह गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। Delhi-NCR Rain Alert: किन इलाकों में दिखेगा असर? दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। अलग-अलग इलाकों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, हर इलाके में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देख लें। तापमान में गिरावट से मिलेगी राहत? अक्टूबर के महीने में दिल्ली-NCR में मौसम आमतौर पर धीरे-धीरे सुहावना होने लगता है। ऐसे में बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे दिन की गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बारिश के बाद उमस और स्थानीय मौसम की स्थिति के आधार पर लोगों को अलग-अलग अनुभव हो सकता है। तापमान में कितनी गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा। आंधी और बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान मौसम में अचानक बदलाव के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहतर रहेगा। 16 अक्टूबर से मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं। इसके बाद दिल्ली-NCR में भी मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के कारण पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम को हल्के में न लें। बारिश से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज हवाओं, बिजली चमकने और ओलावृष्टि की आशंका के बीच सतर्क रहना सबसे बेहतर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति

धर्म बदलने के बाद क्या आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और इसके बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया था। Supreme Court के फैसले के मुताबिक, केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु की अधिसूचित पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में अपने आप शामिल नहीं हो सकता। इस फैसले ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण की पात्रता से जुड़े कानूनी सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। Supreme Court का क्या है पूरा फैसला? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति की पहले की जातिगत पहचान के कारण उसे दूसरी धार्मिक श्रेणी में आरक्षण का पात्र अपने आप नहीं माना जा सकता। संबंधित आरक्षण श्रेणी के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इस मामले में फैसला तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए इसे देश में सभी तरह के आरक्षण पर लागू होने वाले एक समान प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कैसे शुरू हुआ धर्म परिवर्तन और Reservation का मामला? इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत कुछ ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी, जो पहले पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया था। सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 जून 2026 को हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने से किसी व्यक्ति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी नहीं कि बदल जाएं। इसी आधार पर सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले में सरकार की चुनौती सफल नहीं रही। क्या धर्म बदलने पर खत्म हो जाएगा SC और OBC Reservation? Supreme Court के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अब किसी भी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले को समझते समय अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। यह फैसला मुख्य रूप से तमिलनाडु की Backward Class (Muslim) श्रेणी में पात्रता से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए हर प्रकार के आरक्षण पर एक समान रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और राज्य की विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े नियम Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 में दिए गए हैं। वहीं, अन्य श्रेणियों में पात्रता संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी व्यक्ति को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह उसकी संबंधित श्रेणी और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। तमिलनाडु सरकार की दलील क्यों थी अहम? तमिलनाडु सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था। सरकार की दलील थी कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, मामले में सवाल यह था कि क्या पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर किसी व्यक्ति को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग की अधिसूचित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विवाद में संबंधित आरक्षण श्रेणी की पात्रता और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया है। आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल धर्म परिवर्तन या पुरानी जातिगत पहचान को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित श्रेणी के नियमों के तहत पात्रता साबित करना जरूरी है। धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की भी अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी एक मामले के फैसले को सभी राज्यों और सभी आरक्षण श्रेणियों पर सीधे लागू मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई

Delhi में CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने का मामला लगातार चर्चा में है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा। तीनों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी मांगी गई है। अब गुरुवार, 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। अब अदालत यह देखेगी कि इन कदमों से उसके पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ या नहीं। Internet Shutdown: केंद्र सरकार ने क्या सफाई दी? केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। सरकार ने कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। केंद्र के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद की गई थीं। सरकार ने इसके पीछे संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। केंद्र ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित इलाके और तय समय के लिए लगाया गया था। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। Delhi Metro के 45 स्टेशनों पर क्यों लगी पाबंदी? प्रदर्शन के दिन दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित कर दिया गया था। इस फैसले के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मेट्रो सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर पाबंदियां लगाई गई थीं। कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उस दिन 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 चक्कर लगाए। DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि संबंधित पाबंदियां दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद लागू की गई थीं। मेट्रो प्रबंधन ने भी बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। CJP Protest में 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मुद्दा भी अहम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित अव्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, लोगों को अस्थायी केंद्रों में ले जाया गया और कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित न करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए अवमानना नोटिस जारी किए। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC ने अपने हलफनामे दाखिल कर माफी मांगी है और अपने फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है। CJP प्रदर्शन की वजह क्या थी? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित कर दी गई। इंटरनेट बंद होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे आम लोगों के संचार और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने को लेकर सवाल उठे। आज की Supreme Court Hearing में क्या होगा? 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC के जवाबों पर विचार करेगी। इस दौरान इंटरनेट बंद करने, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों की माफी स्वीकार करेगा या कथित अवमानना के मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अदालत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े निर्देशों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है। अब अदालत के फैसले से साफ होगा कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

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