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Ethanol Petrol

Ethanol Petrol सरकार का बड़ा फैसला, E20 Fuel पर Tax खत्म लेकिन जनता परेशान

भारत सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोलियम नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। नए फैसले के अनुसार 20% से अधिक Ethanol Petrol (E20 और उससे ऊपर) पर एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह कदम देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता (Energy Independence) की ओर तेजी से ले जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत थोड़ी अलग नजर आ रही है। पेट्रोल पंपों पर E20 फ्यूल की कीमतों में किसी तरह की बड़ी गिरावट नहीं दिखी है, जिससे आम उपभोक्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर टैक्स खत्म होने का फायदा उन्हें क्यों नहीं मिल रहा। पेट्रोल पंप पर असर नहीं, जनता की उम्मीदें अधूरी सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पेट्रोल के दामों में कुछ राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल E20 पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कई वाहन चालकों का कहना है कि वे राहत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन फिलहाल स्थिति पहले जैसी ही है। सरकार का तर्क: पर्यावरण और किसानों दोनों को फायदा सरकारी पक्ष का कहना है कि यह नीति केवल कीमत कम करने के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुधार के लिए है। एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को गन्ना और अन्य फसलों का बेहतर बाजार मिलेगा। साथ ही, इससे प्रदूषण कम करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स की राय: असर दिखने में लगेगा समय ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की ईंधन नीति में बड़ा बदलाव है, लेकिन इसका सीधा फायदा आम जनता को तुरंत नहीं मिलेगा। इसका असर धीरे-धीरे आने वाले वर्षों में दिखेगा, जब एथेनॉल सप्लाई चेन और फ्यूल सिस्टम पूरी तरह स्थिर हो जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prakash Chik Baraik

Mamata Banerjee को बड़ा झटका! TMC सांसद Prakash Chik Baraik ने छोड़ी पार्टी

पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगातार बढ़ रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक (Prakash Chik Baraik) के इस्तीफे ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि यह सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि TMC के अंदर चल रही बड़ी राजनीतिक खींचतान का संकेत है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई नेता मौजूदा नेतृत्व से खुश नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में कई बड़े नाम TMC से दूरी बनाते नजर आए हैं। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद अब ममता बनर्जी पर विपक्ष के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के भीतर से दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्यसभा से इस्तीफा, लेकिन वजह पर सस्पेंस प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी बड़ी वजह का खुलासा नहीं किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और असंतोष इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती है। सूत्रों की मानें तो TMC के कई सांसद और नेता पार्टी की रणनीति और फैसलों से नाराज बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि बंगाल की राजनीति में बगावत की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पहले भी सामने आ चुके हैं बागी सुर प्रकाश चिक बराइक से पहले भी कई नेता पार्टी लाइन से अलग राय रखते दिखाई दिए थे। सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर रॉय जैसे नेताओं के नाम पहले ही चर्चाओं में आ चुके हैं। इसके अलावा कुछ सांसदों के दूसरे दलों के नेताओं से संपर्क में होने की खबरों ने TMC की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में और नेता पार्टी छोड़ते हैं, तो इसका असर संसद से लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति तक दिखाई दे सकता है। BJP ने साधा निशाना बीजेपी ने इस पूरे मामले को लेकर ममता बनर्जी सरकार और TMC नेतृत्व पर हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और लगातार हो रहे इस्तीफे उसी का परिणाम हैं। वहीं दूसरी तरफ TMC अभी भी इस संकट को संभालने की कोशिश में लगी हुई है। पार्टी की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर ज्यादा बयान नहीं दिया गया है, लेकिन अंदरखाने बैठकों का दौर लगातार जारी बताया जा रहा है। बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर असंतुष्ट नेताओं की संख्या बढ़ती है, तो TMC के लिए यह बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ममता बनर्जी इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को किस तरह संभालती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather यूपी में तूफान का कहर, राजस्थान में आंधी-बारिश; देशभर में मौसम बदला

देशभर में मौसम (Weather) का मिजाज तेजी से बदल रहा है। जून की शुरुआत के साथ लोगों को मानसून से राहत की उम्मीद थी, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून पिछले 7 दिनों से एक ही क्षेत्र में ठहरा हुआ है। हालांकि, देश के कई राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसके चलते आंधी, बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। UP में तूफान का कहर, ऑडिटोरियम की छत उड़ी उत्तर प्रदेश में तेज तूफान और बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया। कई इलाकों में अचानक मौसम बिगड़ने से जनजीवन प्रभावित हो गया। तेज हवाओं के कारण एक ऑडिटोरियम की छत उड़ गई, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इसके अलावा कई जिलों में पेड़ गिरने और बिजली सप्लाई बाधित होने की खबरें भी सामने आई हैं। मौसम विभाग ने यूपी के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। Rajasthan Weather: आंधी-बारिश से मिली गर्मी से राहत राजस्थान में पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी के बीच अब मौसम ने करवट ली है। जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर और आसपास के इलाकों में धूलभरी आंधी और हल्की बारिश दर्ज की गई। कई जगह तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी से राहत मिली। IMD ने राजस्थान के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों तक तेज हवाएं और बारिश जारी रह सकती है। 22 राज्यों में Rain और Thunderstorm Alert मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर समेत 22 राज्यों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण मौसम में अचानक बदलाव हो रहा है। यही वजह है कि कई राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां मजबूत हो गई हैं। MP में अगले 72 घंटे अहम मध्य प्रदेश में भी मौसम तेजी से बदल रहा है। भोपाल, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले 72 घंटे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे और जल्द ही मानसून की एंट्री हो सकती है। दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में Heavy Rain केरल, कर्नाटक, असम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में लगातार भारी बारिश जारी है। कई इलाकों में जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। लोगों के लिए जरूरी सलाह हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

Bengal Politics में हलचल! TMC की बागी लिस्ट में बड़े नाम, अब तक खामोश हैं Shatrughan और Yusuf

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की खबरों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। कथित “TMC Rebel List” सामने आने के बाद पार्टी के कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें अभिनेत्री और सांसद सयानी घोष, वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि लिस्ट सामने आने के 24 घंटे बाद भी इन तीनों नेताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। न किसी ने इन खबरों का खंडन किया और न ही खुलकर समर्थन में कुछ कहा। यही चुप्पी अब बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर रही है। 19 सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TMC के करीब 19 सांसदों के एक अलग गुट में शामिल होने की चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि यह गुट पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहा है और भविष्य की रणनीति पर लगातार बैठकें कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ नेता NDA के संपर्क में हैं, हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि बागी गुट दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश में लगा है। अगर ऐसा होता है तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। इन बड़े नेताओं के नाम आए सामने कथित बागी सांसदों की सूची में शत्रुघ्न सिन्हा, सयानी घोष, यूसुफ पठान, माला रॉय, काकोली घोष दस्तीदार और दीपक अधिकारी जैसे नेताओं के नाम सामने आए हैं। इन नामों के सामने आने के बाद TMC समर्थकों के बीच भी बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस पूरी लिस्ट को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को लेकर TMC पर निशाना साध रहे हैं। TMC के भीतर बढ़ रही नाराजगी? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष बढ़ रहा था। कई नेताओं को संगठन और फैसलों में अपनी अनदेखी महसूस हो रही थी। ऐसे में अब बगावत की खबरों ने उन चर्चाओं को और हवा दे दी है। इसी बीच कुछ नेताओं के इस्तीफे और दिल्ली में हुई राजनीतिक बैठकों ने भी अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। हालांकि TMC नेतृत्व लगातार पार्टी में सब कुछ सामान्य होने का दावा कर रहा है। तीन चेहरों की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सवाल इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा शत्रुघ्न सिन्हा, सयानी घोष और यूसुफ पठान की चुप्पी को लेकर हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ये तीनों नेता अब तक सामने क्यों नहीं आए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में इन नेताओं का बयान बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। अगर बगावत की खबरें सही साबित होती हैं तो इसका असर सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nipah Virus

Kerala Nipah Virus Update: कोझिकोड में नया केस, अस्पताल स्टाफ क्वारंटीन, सरकार अलर्ट मोड में

केरल में एक बार फिर निपाह वायरस (Nipah Virus) ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल राज्य में पहला मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। वहीं संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अस्पताल स्टाफ और मरीज के संपर्क में आए लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया है। कोझिकोड में मिला नया निपाह केस केरल के कोझिकोड जिले में एक 43 वर्षीय व्यक्ति में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। शुरुआती लक्षणों के बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। जी से एक्टिव हुआ स्वास्थ्य विभाग मामले की पुष्टि होते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कदम उठाए— क्यों चिंता बढ़ाता है निपाह वायरस? निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। खासकर चमगादड़ों को इसका प्रमुख स्रोत माना जाता है। कुछ मामलों में यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। इस वायरस के संक्रमण से दिमाग में सूजन (encephalitis), तेज बुखार और सांस लेने में गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं, जिससे स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। केरल में पहले भी हो चुके हैं मामले यह पहली बार नहीं है जब केरल में निपाह का मामला सामने आया हो। प्रशासन पूरी तरह सतर्क फिलहाल राज्य में स्वास्थ्य टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। मरीज के संपर्क में आए हर व्यक्ति की पहचान की जा रही है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके। अस्पतालों में आइसोलेशन और इमरजेंसी प्रोटोकॉल को और मजबूत कर दिया गया है।
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TMC

TMC में अंदरूनी बगावत? 20 MPs की लिस्ट आई सामने, Shatrughan Sinha-Yusuf Pathan के नाम चर्चा में

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी राजनीति को लेकर बड़ी हलचल सामने आ रही है। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसदों के बीच असंतोष बढ़ा है और करीब 20 सांसदों का एक अलग रुख या गुट बनाने जैसी चर्चा ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी भी स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और मामला पूरी तरह से बयानबाजी और अटकलों के बीच घूम रहा है। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ TMC सांसदों ने लोकसभा में अलग पहचान या ग्रुपिंग को लेकर संकेत दिए हैं। कहा जा रहा है कि इस कथित गुट में कई सांसद शामिल हैं, और चर्चा यह भी है कि कुछ सांसद NDA के साथ बैठने या सहयोग की दिशा में जा सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ पार्टी के कई नेताओं ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “बेबुनियाद और भ्रामक” बताया है। किन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा? इस पूरे विवाद में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वे हैं: ध्यान देने वाली बात यह है कि इन नामों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, लेकिन किसी भी सांसद ने खुलकर बगावत की पुष्टि नहीं की है। शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान की स्थिति TMC का रिएक्शन TMC नेतृत्व ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए कहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की टूट या गुटबाजी नहीं हुई है। पार्टी का कहना है कि इस तरह की खबरें राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सांसदों में असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं तो इसका असर संसद में TMC की रणनीति पर पड़ सकता है। राजनीतिक असर और सियासी मायने अगर यह विवाद आगे बढ़ता है तो: लेकिन फिलहाल यह पूरा मामला अफवाहों, रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bharat Mandapam

NDA Meeting in Bharat Mandapam: PM Modi का ‘Jhalmuri Moment’ Viral, नेताओं के साथ दिखा अनोखा अंदाज़

नई दिल्ली के Bharat Mandapam में हुई National Democratic Alliance की अहम बैठक के बाद एक ऐसा पल सामने आया, जिसने पूरे सोशल मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बैठक खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi का एक सहज और अनौपचारिक अंदाज़ लोगों को देखने को मिला, जब वे नेताओं को अपने हाथ से झालमुरी परोसते नजर आए। मीटिंग के बाद दिखा हल्का-फुल्का और अपनापन भरा माहौल राजनीति की गंभीर चर्चाओं के बीच जब बैठक समाप्त हुई, तो माहौल अचानक काफी सहज और दोस्ताना हो गया। पीएम मोदी नेताओं के बीच खुद पहुंचे और मुस्कुराते हुए सभी को झालमुरी ऑफर की। यह छोटा सा पल कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में नेताओं के बीच बातचीत और हंसी-मजाक का माहौल साफ नजर आता है, जो आमतौर पर औपचारिक बैठकों में कम ही देखने को मिलता है। Bharat Mandapam बना बड़े राजनीतिक आयोजनों का केंद्र Bharat Mandapam हाल के वर्षों में देश के बड़े राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस बार भी यहां हुई NDA की बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और संगठन की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई। National Democratic Alliance की इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर आने वाले चुनावी समीकरणों और रणनीतियों के संदर्भ में। सोशल मीडिया पर चर्चा में आया ‘PM Modi Jhalmuri Video’ जैसे ही यह वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह तेजी से फैल गया। लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की “सादगी और सहजता” बताया, जबकि कुछ ने इसे एक हल्के-फुल्के और मानवीय पल के रूप में देखा। वीडियो ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीतिक बैठकों के बीच भी छोटे-छोटे इंसानी पल लोगों के दिलों को छू लेते हैं और तेजी से वायरल हो जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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West Bengal

West Bengal Politics: CM का बड़ा फैसला, Home Ministry अपने पास, नए मंत्रियों को मिले अहम विभाग

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion 2026) के बाद राज्य सरकार ने मंत्रियों के बीच विभागों का औपचारिक बंटवारा शुरू कर दिया है। इस फैसले के साथ ही सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 35 मंत्रियों की नई टीम, सरकार ने दिया बड़ा संदेश नई सरकार में कुल 35 विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री दोनों शामिल हैं। इस बड़े विस्तार को राजनीतिक जानकार सरकार की “नए सिरे से टीम स्ट्रक्चर” की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। सरकार का दावा है कि नई टीम में: CM ने रखा Home Ministry अपने पास, मजबूत नियंत्रण का संकेत सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने सबसे अहम विभागों में से एक गृह मंत्रालय (Home Ministry) अपने पास ही रखा है। यह फैसला राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण बनाए रखने के उद्देश्य से देखा जा रहा है। इसके अलावा प्रशासनिक और समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही रहेंगे। Swapan Dasgupta को मिली Finance Ministry की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) को राज्य का वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) सौंपा गया है। उनके पास अब राज्य की आर्थिक नीति, बजट तैयार करना और वित्तीय सुधारों की बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति आर्थिक प्रबंधन को मजबूत करने और नई वित्तीय रणनीति लागू करने की दिशा में अहम कदम है। कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार के फैसलों और मंत्री चयन पर सवाल उठा रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासन को तेज और प्रभावी बनाने के लिए किया गया है। क्या बदल सकता है आगे? विशेषज्ञों के अनुसार यह नया कैबिनेट ढांचा आने वाले समय में: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengal Cabinet में विभागों का बंटवारा: शपथ के 10 दिन बाद ममता सरकार ने नए मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी

Bengal Cabinet में विभागों का बंटवारा: शपथ के 10 दिन बाद ममता सरकार ने नए मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी

West Bengal में नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के करीब 10 दिन बाद आखिरकार विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने नए मंत्रियों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपते हुए विभिन्न विभागों का आवंटन किया है। इससे राज्य सरकार के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हाल ही में कैबिनेट विस्तार के दौरान शामिल किए गए मंत्रियों को अब उनके मंत्रालय मिल गए हैं। लंबे इंतजार के बाद जारी की गई सूची में कई नेताओं को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बंटवारे को आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि विभागों का आवंटन मंत्रियों के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि विकास कार्यों को गति दी जा सके और जनता से जुड़े मुद्दों का तेजी से समाधान हो सके। किस मंत्री को मिला कौन-सा विभाग? राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार नए मंत्रियों को विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें प्रशासन, विकास, जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई अहम मंत्रालय शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों का यह बंटवारा ममता बनर्जी की टीम को और मजबूत करेगा। साथ ही सरकार आगामी चुनौतियों और चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए अपने संगठनात्मक ढांचे को भी सुदृढ़ कर रही है। जनता की उम्मीदें बढ़ीं नए मंत्रियों को जिम्मेदारी मिलने के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि वे अपने-अपने विभागों में कितना प्रभावी काम कर पाते हैं। खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विभागों में जनता को बेहतर परिणामों की उम्मीद है। विभागों का बंटवारा होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार का नया प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह सक्रिय हो गया है और अब सभी विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों पर काम शुरू करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gurugram

Mega Search Operation in Gurugram: पुलिस ने शुरू की सघन छापेमारी, दस्तावेजों की हो रही जांच

गुरुग्राम (Gurugram) में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने बड़ा Mega Search Operation in Gurugram शुरू किया है। इस अभियान के तहत शहर के कई इलाकों में एक साथ तलाशी और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अचानक शुरू हुए इस अभियान से कई इलाकों में हलचल देखने को मिली, क्योंकि पुलिस टीमें अलग-अलग जगहों पर पहुंचकर किरायेदारों और बाहरी लोगों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। शहर में कई इलाकों में एक साथ चला सर्च अभियान पुलिस ने यह कार्रवाई एक साथ कई टीमों के जरिए शुरू की है। झुग्गी बस्तियों से लेकर हाई-राइज सोसायटी तक, हर जगह संदिग्ध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा रही है। किन जगहों पर हो रही जांच? दस्तावेजों की गहन जांच इस अभियान में पुलिस आधार कार्ड, पहचान पत्र, किरायानामा और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। खास तौर पर ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जा रहा है जो बिना वैध दस्तावेजों के शहर में रह सकते हैं। पुलिस का साफ संदेश अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना है। वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों के साथ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों और RWA से अपील प्रशासन ने नागरिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से अपील की है कि वे अपने यहां रहने वाले किरायेदारों और कर्मचारियों का Police Verification जरूर कराएं। इससे भविष्य में किसी भी तरह की सुरक्षा समस्या से बचा जा सकता है। Gurugram Security Operation पर असर इस मेगा सर्च ऑपरेशन से शहर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना

Delhi-NCR में मौसम का मिजाज बदल गया है। कई इलाकों में धूल भरी आंधी चलने के बाद अब बारिश और ओलावृष्टि की संभावना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग (IMD) ने 15 अक्टूबर को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Delhi Weather Today: तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान दिल्ली-NCR में मौसम बदलने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी गतिविधियां अहम मानी जा रही हैं। इसके प्रभाव से आसमान में बादल छाने, गरज-चमक होने और कई जगह बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज झोंकों के दौरान यह गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। Delhi-NCR Rain Alert: किन इलाकों में दिखेगा असर? दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। अलग-अलग इलाकों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, हर इलाके में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देख लें। तापमान में गिरावट से मिलेगी राहत? अक्टूबर के महीने में दिल्ली-NCR में मौसम आमतौर पर धीरे-धीरे सुहावना होने लगता है। ऐसे में बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे दिन की गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बारिश के बाद उमस और स्थानीय मौसम की स्थिति के आधार पर लोगों को अलग-अलग अनुभव हो सकता है। तापमान में कितनी गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा। आंधी और बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान मौसम में अचानक बदलाव के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहतर रहेगा। 16 अक्टूबर से मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं। इसके बाद दिल्ली-NCR में भी मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के कारण पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम को हल्के में न लें। बारिश से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज हवाओं, बिजली चमकने और ओलावृष्टि की आशंका के बीच सतर्क रहना सबसे बेहतर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति

धर्म बदलने के बाद क्या आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और इसके बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया था। Supreme Court के फैसले के मुताबिक, केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु की अधिसूचित पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में अपने आप शामिल नहीं हो सकता। इस फैसले ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण की पात्रता से जुड़े कानूनी सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। Supreme Court का क्या है पूरा फैसला? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति की पहले की जातिगत पहचान के कारण उसे दूसरी धार्मिक श्रेणी में आरक्षण का पात्र अपने आप नहीं माना जा सकता। संबंधित आरक्षण श्रेणी के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इस मामले में फैसला तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए इसे देश में सभी तरह के आरक्षण पर लागू होने वाले एक समान प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कैसे शुरू हुआ धर्म परिवर्तन और Reservation का मामला? इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत कुछ ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी, जो पहले पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया था। सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 जून 2026 को हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने से किसी व्यक्ति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी नहीं कि बदल जाएं। इसी आधार पर सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले में सरकार की चुनौती सफल नहीं रही। क्या धर्म बदलने पर खत्म हो जाएगा SC और OBC Reservation? Supreme Court के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अब किसी भी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले को समझते समय अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। यह फैसला मुख्य रूप से तमिलनाडु की Backward Class (Muslim) श्रेणी में पात्रता से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए हर प्रकार के आरक्षण पर एक समान रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और राज्य की विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े नियम Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 में दिए गए हैं। वहीं, अन्य श्रेणियों में पात्रता संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी व्यक्ति को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह उसकी संबंधित श्रेणी और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। तमिलनाडु सरकार की दलील क्यों थी अहम? तमिलनाडु सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था। सरकार की दलील थी कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, मामले में सवाल यह था कि क्या पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर किसी व्यक्ति को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग की अधिसूचित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विवाद में संबंधित आरक्षण श्रेणी की पात्रता और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया है। आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल धर्म परिवर्तन या पुरानी जातिगत पहचान को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित श्रेणी के नियमों के तहत पात्रता साबित करना जरूरी है। धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की भी अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी एक मामले के फैसले को सभी राज्यों और सभी आरक्षण श्रेणियों पर सीधे लागू मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई

Delhi में CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने का मामला लगातार चर्चा में है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा। तीनों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी मांगी गई है। अब गुरुवार, 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। अब अदालत यह देखेगी कि इन कदमों से उसके पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ या नहीं। Internet Shutdown: केंद्र सरकार ने क्या सफाई दी? केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। सरकार ने कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। केंद्र के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद की गई थीं। सरकार ने इसके पीछे संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। केंद्र ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित इलाके और तय समय के लिए लगाया गया था। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। Delhi Metro के 45 स्टेशनों पर क्यों लगी पाबंदी? प्रदर्शन के दिन दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित कर दिया गया था। इस फैसले के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मेट्रो सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर पाबंदियां लगाई गई थीं। कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उस दिन 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 चक्कर लगाए। DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि संबंधित पाबंदियां दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद लागू की गई थीं। मेट्रो प्रबंधन ने भी बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। CJP Protest में 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मुद्दा भी अहम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित अव्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, लोगों को अस्थायी केंद्रों में ले जाया गया और कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित न करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए अवमानना नोटिस जारी किए। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC ने अपने हलफनामे दाखिल कर माफी मांगी है और अपने फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है। CJP प्रदर्शन की वजह क्या थी? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित कर दी गई। इंटरनेट बंद होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे आम लोगों के संचार और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने को लेकर सवाल उठे। आज की Supreme Court Hearing में क्या होगा? 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC के जवाबों पर विचार करेगी। इस दौरान इंटरनेट बंद करने, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों की माफी स्वीकार करेगा या कथित अवमानना के मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अदालत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े निर्देशों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है। अब अदालत के फैसले से साफ होगा कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

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