आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलDelhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना◆BREAKINGBreaking NewsSupreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति◆BREAKINGदेश-हरपलDelhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई◆BREAKINGधर्म-कर्मNavratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र◆BREAKINGदेश-हरपलमेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR◆BREAKINGदेश-हरपलSIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप◆BREAKINGस्पोर्ट्सबांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका◆BREAKINGदेश-हरपलDelhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना◆BREAKINGBreaking NewsSupreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति◆BREAKINGदेश-हरपलDelhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई◆BREAKINGधर्म-कर्मNavratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र◆BREAKINGदेश-हरपलमेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR◆BREAKINGदेश-हरपलSIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप◆BREAKINGस्पोर्ट्सबांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका◆

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

Latest Posts

Meta

India AI Meta और Reliance मिलकर बनाएंगे पहला AI Data Center, जामनगर बनेगा नया Tech Hub

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। सोशल मीडिया और टेक दिग्गज Meta (Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी) और भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Reliance Industries ने मिलकर देश में पहला AI आधारित डेटा सेंटर बनाने की योजना बनाई है। यह प्रोजेक्ट भारत के डिजिटल भविष्य को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। कहाँ बनेगा यह AI Data Center? यह अत्याधुनिक AI डेटा सेंटर गुजरात के जामनगर (Jamnagar) में स्थापित किया जाएगा। जामनगर पहले से ही Reliance के बड़े एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता है, और अब यह शहर AI टेक्नोलॉजी का नया केंद्र बनने जा रहा है। Meta और Reliance की बड़ी साझेदारी इस प्रोजेक्ट में दो दिग्गज कंपनियों की साझेदारी शामिल है: Reliance इस डेटा सेंटर को डिजाइन और डेवलप करेगी, जबकि Meta इसकी AI कंप्यूटिंग क्षमता को लीज पर इस्तेमाल करेगी। यह मॉडल भारत में बड़े स्तर पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कितना बड़ा होगा यह प्रोजेक्ट? यह डेटा सेंटर भारत में AI वर्कलोड को लोकल स्तर पर प्रोसेस करने में मदद करेगा, जिससे स्पीड और एफिशिएंसी दोनों बढ़ेंगी। क्यों है यह प्रोजेक्ट खास? यह सिर्फ एक डेटा सेंटर नहीं बल्कि एक बड़ी टेक क्रांति की शुरुआत है: जामनगर क्यों बना पसंदीदा लोकेशन? जामनगर को इस प्रोजेक्ट के लिए चुनने के पीछे कई अहम वजहें हैं: भारत के लिए क्या मायने रखता है यह कदम? इस AI डेटा सेंटर से भारत को कई स्तरों पर फायदा मिलेगा: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
नरेंद्र मोदी

4399 Days as PM: नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास, कैबिनेट में तालियों से स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4399 दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। इस मौके पर कैबिनेट बैठक में माहौल सामान्य राजनीतिक बैठक से थोड़ा अलग नजर आया, जहां मंत्रियों ने खड़े होकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया और तालियां बजाईं। सरकार इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि और स्थिर नेतृत्व का संकेत बता रही है, जबकि विपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे “संदिग्ध उपलब्धि” कहा है। कैबिनेट में दिखा खास माहौल कैबिनेट बैठक की शुरुआत से पहले कई मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। बैठक में मौजूद मंत्रियों ने खड़े होकर तालियां बजाईं, जिससे पूरा माहौल कुछ देर के लिए औपचारिक से अधिक भावनात्मक और उत्सव जैसा हो गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह जनता के विश्वास और लगातार मजबूत नेतृत्व का नतीजा है, जिसने सरकार को लंबे समय तक स्थिर रखा है। Nehru का रिकॉर्ड टूटा, ऐतिहासिक आंकड़ा भारतीय राजनीतिक इतिहास में जवाहरलाल नेहरू लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता थे। अब 4399 दिनों के कार्यकाल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह रिकॉर्ड पार कर लिया है। भाजपा समर्थक इसे लोकतंत्र में स्थिरता और नेतृत्व की निरंतरता के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचक इसे केवल कार्यकाल की लंबाई तक सीमित उपलब्धि मान रहे हैं। Congress का रिएक्शन: “संदिग्ध उपलब्धि” कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि देश में असली मुद्दे जैसे महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियाँ ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे “संदिग्ध उपलब्धि” बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में सफलता का पैमाना केवल लंबे कार्यकाल से नहीं तय किया जा सकता। BJP का पक्ष: जनता का भरोसा सबसे बड़ा कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि यह उपलब्धि जनता के भरोसे और लगातार चुनावी समर्थन का परिणाम है। पार्टी नेताओं ने इसे “मजबूत लोकतंत्र और स्थिर सरकार” का उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर भी समर्थकों ने इस उपलब्धि को लेकर उत्साह जताया और इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया। राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के संकेत राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तेज बहस का कारण बनेगा। सरकार इसे उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे सवालों के घेरे में रख रहा है। कुल मिलाकर यह घटना भारतीय राजनीति में नेतृत्व, रिकॉर्ड और लोकतांत्रिक मूल्य—तीनों पर नई चर्चा को जन्म दे रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Delhi

Delhi Hotel Fire Mystery: कर्मचारी के नाम License, मालिक पर बढ़ा Suspense

Delhi में हुए होटल आग हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पता चला है कि जिस होटल में आग लगी, उसका लाइसेंस असली मालिक के नाम पर नहीं बल्कि एक कर्मचारी के नाम पर जारी किया गया था। इस जानकारी के सामने आते ही पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हादसे के बाद पुलिस, फायर विभाग और नगर निगम लगातार होटल से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। वहीं होटल के अकाउंटेंट के बयान ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। अकाउंटेंट बोला- आग में जल गए सारे जरूरी कागजात जांच के दौरान होटल के अकाउंटेंट ने दावा किया कि आग लगने के बाद होटल से जुड़े सभी अहम दस्तावेज जलकर राख हो गए। उसने पुलिस को बताया कि घटना के समय वह होटल में मौजूद नहीं था और मेट्रो से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में घूम रहा था। हालांकि पुलिस सिर्फ बयान पर भरोसा नहीं कर रही। अधिकारियों ने उसकी मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। जांच टीम को शक है कि कुछ जरूरी दस्तावेज पहले ही हटाए जा चुके थे। License कर्मचारी के नाम, असली मालिक कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर होटल का संचालन कौन कर रहा था। जांच में सामने आया कि होटल का आधिकारिक लाइसेंस एक कर्मचारी के नाम पर था। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि कानूनी जिम्मेदारियों और कार्रवाई से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया हो सकता है। अब पुलिस होटल के वास्तविक मालिक और उससे जुड़े कारोबारियों की पहचान करने में जुटी है। कई वित्तीय रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। Fire Safety को लेकर भी बड़ा खुलासा हादसे के बाद होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि होटल में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। कई जगहों पर आपातकालीन निकास और सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई। फायर विभाग अब होटल की फायर एनओसी, सुरक्षा प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी मंजूरियों की जांच कर रहा है। अगर लापरवाही साबित होती है तो होटल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। दिल्ली में शुरू हुआ बड़ा Checking Campaign इस घटना के बाद दिल्ली प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। राजधानी के कई होटल, गेस्ट हाउस और कमर्शियल बिल्डिंग्स की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी मिलेगी, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी। दिल्ली होटल आग कांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम में मौजूद लापरवाही और नियमों की अनदेखी की बड़ी कहानी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस केस में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Sushmita Dev

Mamata Banerjee को एक और झटका, Rajya Sabha सांसद Sushmita Dev ने छोड़ा पद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद और ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं को हवा दी है, बल्कि विपक्ष को भी TMC पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। बीते कुछ दिनों से पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे में सुष्मिता देव का इस्तीफा TMC के लिए एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लगातार इस्तीफों से बढ़ी TMC की परेशानी सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी TMC से दूरी बना चुके हैं। एक हफ्ते के भीतर दो बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव और संगठनात्मक बदलावों के बाद पार्टी के अंदर कई नेताओं में नाराजगी बढ़ी है। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। कांग्रेस से TMC तक का सफर सुष्मिता देव लंबे समय तक कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रही हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं और असम की राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। साल 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर TMC जॉइन की थी। पार्टी ने उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी भी दी थी। राज्यसभा में भी वह TMC की सक्रिय और मुखर सांसदों में शामिल थीं। इस्तीफे के पीछे क्या है वजह? हालांकि सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के अंदर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असहमति इसके पीछे की बड़ी वजह हो सकती है। कुछ राजनीतिक जानकार इसे आने वाले समय में TMC के अंदर बड़े बदलावों का संकेत भी मान रहे हैं। विपक्ष को मिला हमला बोलने का मौका सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद भाजपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने TMC पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और यही वजह है कि नेता लगातार किनारा कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सुष्मिता देव आगे कौन-सा राजनीतिक कदम उठाती हैं और TMC इस बढ़ते संकट से कैसे निपटती है। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल सुष्मिता देव का इस्तीफा सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा चर्चा में रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Weather

Weather कहीं बारिश तो कहीं Dust Storm, UP-Bihar से Mumbai तक मौसम का कहर

देशभर में मौसम (Weather) का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कहीं तेज आंधी और बारिश लोगों की परेशानी बढ़ा रही है तो कहीं रेतीले तूफान और लैंडस्लाइड जैसी घटनाएं डर पैदा कर रही हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में बुधवार को आई तेज आंधी और बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया। वहीं मुंबई में लगातार बारिश के बीच लैंडस्लाइड की घटना सामने आई, जबकि राजस्थान में धूल भरी आंधी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। UP-Bihar में तेज हवाओं और बारिश से बिगड़े हालात उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में अचानक मौसम बदल गया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन इसके साथ कई परेशानियां भी लेकर आई। करीब 100 से ज्यादा जगहों पर पेड़ और बिजली के पोल गिर गए, जिससे कई इलाकों में बिजली सप्लाई बाधित हो गई। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, पटना और गया समेत कई शहरों में सड़कों पर पानी भर गया। ऑफिस से लौट रहे लोगों और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगह ट्रैफिक भी प्रभावित रहा। स्थानीय प्रशासन की टीमें रातभर गिरे हुए पेड़ों को हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने में जुटी रहीं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई है। Mumbai Landslide: मलबे में दबीं 5 कारें मुंबई में मानसून से पहले ही भारी बारिश का असर दिखने लगा है। शहर के एक पहाड़ी इलाके में अचानक लैंडस्लाइड हो गया, जिससे वहां खड़ी 5 कारें मलबे में दब गईं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत और बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन ने लोगों को संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। मुंबई में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए बीएमसी और मौसम विभाग अलर्ट मोड पर हैं। Rajasthan Dust Storm ने बढ़ाई मुश्किलें राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में तेज रेतीला तूफान देखने को मिला। धूल भरी आंधी की वजह से विजिबिलिटी काफी कम हो गई, जिससे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई इलाकों में दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवाओं के कारण घरों और दुकानों में भी धूल भर गई। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के असर से राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल रहा है। IMD ने जारी किया Alert भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पुराने पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 48 घंटों में उत्तर और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और धूल भरी हवाएं चल सकती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
Read more
Strait of Hormuz

Strait of Hormuz Crisis: भारत का बड़ा दांव, Gujarat–Oman Gas Pipeline से बदलेगी Energy Strategy

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करने के लिए अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। यह वही समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस की सप्लाई होती है, लेकिन लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Risks) ने इसे बेहद संवेदनशील बना दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत और ओमान के बीच एक पुराने लेकिन महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को फिर से गति मिली है—गुजरात से ओमान तक सीधा ऊर्जा और व्यापार कॉरिडोर। India–Oman Corridor: क्या है पूरा प्लान? इस प्रस्तावित योजना के तहत ओमान के रणनीतिक पोर्ट्स जैसे Duqm और Sohar को भारत के गुजरात स्थित प्रमुख बंदरगाहों—मुंद्रा और कांडला—से जोड़ा जाएगा। इसका मकसद सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि एक मजबूत alternate supply route तैयार करना है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट में भारत की ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो। सबसे बड़ा गेमचेंजर: Deep Sea Gas Pipeline Project इस पूरे प्लान का सबसे अहम हिस्सा है प्रस्तावित डीप-सी गैस पाइपलाइन, जो ओमान से सीधे गुजरात तक बिछाई जा सकती है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भारत को मध्य-पूर्व की सप्लाई चेन पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम लेकिन सबसे जोखिम भरा तेल मार्ग माना जाता है। इसीलिए भारत अब “single route dependency” से निकलकर multi-route energy strategy अपना रहा है। 30 साल पुराना सपना, अब क्यों हो रहा एक्टिव? भारत–ओमान ऊर्जा सहयोग की यह सोच नई नहीं है। यह योजना पिछले करीब 30 साल से चर्चा में थी, लेकिन कभी तकनीकी तो कभी राजनीतिक कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी। अब बदलते वैश्विक हालात, ऊर्जा संकट और समुद्री सुरक्षा चिंताओं ने इस प्रोजेक्ट को फिर से प्राथमिकता दिलाई है। ओमान क्यों है भारत के लिए इतना अहम? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
CID

West Bengal Politics: TMC विधायकों की शिकायत पर CID जांच, ममता आवास के बाहर रुकी टीम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ विधायकों की शिकायत के बाद CID (Criminal Investigation Department) की टीम ममता बनर्जी के आवास तक पहुंच गई। मामला विधानसभा में नेता विपक्ष (Leader of Opposition) चुनने से जुड़े प्रस्ताव पर कथित फर्जी दस्तखत (Fake Signature Allegation) का बताया जा रहा है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मोड़ तब आया जब CID टीम को ममता बनर्जी के घर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए जांच टीम को बाहर ही रोक दिया गया, जिससे मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया। क्या है पूरा पूरा विवाद? सूत्रों के मुताबिक, TMC के कुछ विधायकों ने आरोप लगाया है कि नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर बिना अनुमति के या कथित तौर पर फर्जी तरीके से किए गए। इसी शिकायत के आधार पर CID टीम जांच के लिए मुख्यमंत्री आवास पहुंची थी। लेकिन अंदर प्रवेश न मिलने के कारण जांच प्रक्रिया वहीं अटक गई। बंगाल पॉलिटिक्स में बढ़ा सियासी तापमान इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय में TMC की अंदरूनी राजनीति पर भी असर डाल सकता है। आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CID इस मामले की जांच को आगे कैसे बढ़ाती है और क्या विधायकों के आरोपों में कोई सच्चाई सामने आती है या नहीं। अगर फर्जी दस्तखत के आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला TMC और बंगाल की राजनीति दोनों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Driving License

Driving License को लेकर बड़ी राहत, 50 साल तक वैध रखने पर सरकार का विचार

देश में ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) से जुड़े नियमों में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ऐसे प्रस्ताव पर काम कर रही है, जिसमें लोगों का DL सीधे 50 साल की उम्र तक वैध रखने पर विचार किया जा रहा है। अगर यह नियम लागू होता है, तो करोड़ों वाहन चालकों को बार-बार लाइसेंस रिन्यू कराने की परेशानी से राहत मिल सकती है। आज के समय में हर छोटे-बड़े काम के लिए लोगों को RTO के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लाइसेंस रिन्यूअल भी उन्हीं प्रक्रियाओं में शामिल है, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। ऐसे में सरकार अब इस सिस्टम को आसान और डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अभी क्या हैं Driving License के नियम? फिलहाल भारत में ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता एक तय अवधि तक रहती है। सामान्य तौर पर DL 20 साल या फिर 40-50 वर्ष की उम्र तक मान्य होता है। इसके बाद वाहन चालक को दोबारा रिन्यूअल कराना पड़ता है। रिन्यूअल के दौरान कई दस्तावेज जमा करने होते हैं और कई बार मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी देना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह प्रक्रिया कई बार काफी मुश्किल बन जाती है। सरकार किन बदलावों पर कर रही है विचार? रिपोर्ट्स के मुताबिक सड़क परिवहन मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कई सेवाओं को आसान बनाने की तैयारी में है। इसके तहत सिर्फ DL की वैधता बढ़ाने ही नहीं, बल्कि कई प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने पर भी काम चल रहा है। संभावित बदलावों में शामिल हैं: सरकार का फोकस लोगों को तेज और पारदर्शी सेवाएं देने पर है, ताकि आम नागरिकों को कम परेशानी हो। 50 साल के बाद क्या बदल सकता है? सूत्रों के अनुसार 50 वर्ष की उम्र के बाद ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराने के लिए मेडिकल फिटनेस जरूरी हो सकती है। यानी उम्र बढ़ने के साथ ड्राइविंग क्षमता और स्वास्थ्य की जांच की जाएगी, ताकि सड़क सुरक्षा बनी रहे। अभी भी 50 साल के बाद DL रिन्यूअल के समय मेडिकल सर्टिफिकेट देना पड़ता है। माना जा रहा है कि नए नियमों में भी यह व्यवस्था जारी रह सकती है। आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा? अगर सरकार यह नया नियम लागू करती है, तो इसका सीधा फायदा करोड़ों वाहन चालकों को मिलेगा। खास बात यह है कि डिजिटल प्रक्रिया बढ़ने से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर भी लगाम लग सकती है। अभी नहीं आया Final Notification हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। फिलहाल यह प्रस्ताव चर्चा और विचार के स्तर पर है। अंतिम फैसला आने के बाद ही नए नियम लागू होंगे। लेकिन अगर यह बदलाव मंजूर हो जाता है, तो यह देश के करोड़ों ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Jaipur

Jaipur Blast Update: तेज धमाकों के बाद फैक्ट्री में लगी आग, इलाके में मची अफरा-तफरी

राजस्थान की राजधानी जयपुर (Jaipur) में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को हिला दिया। शहर के रिहायशी इलाके में चल रही एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते फैक्ट्री से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं और कई जोरदार धमाके सुनाई दिए। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों का इलाज जयपुर के SMS अस्पताल में जारी है। अचानक हुए धमाकों से मची अफरा-तफरी स्थानीय लोगों के मुताबिक शुरुआत में फैक्ट्री से धुआं निकलता दिखाई दिया, लेकिन कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए। तेज धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। इलाके में भगदड़ जैसे हालात बन गए। मौके पर पहुंची दमकल विभाग की टीम ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के घरों को खाली कराया। गंभीर हालत में भर्ती हैं घायल हादसे में झुलसे 5 लोगों को तुरंत SMS अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों का शरीर 90 प्रतिशत तक जल चुका है। अस्पताल में उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। आबादी के बीच फैक्ट्री संचालन पर उठे सवाल घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा देखने को मिला। लोगों का कहना है कि पटाखा फैक्ट्री लंबे समय से आबादी के बीच चलाई जा रही थी। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। अब हादसे के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इतनी खतरनाक फैक्ट्री को रिहायशी इलाके में चलाने की अनुमति कैसे मिली। जांच शुरू, प्रशासन अलर्ट घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। शुरुआती जांच में सुरक्षा नियमों में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। फैक्ट्री के लाइसेंस और सुरक्षा इंतजामों की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल पूरे इलाके में डर और मातम का माहौल है। हादसे के बाद प्रशासन ने भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
1 … 81 82 83 84 85 … 237

Trending News

Editor's Picks

Delhi

Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना

Delhi-NCR में मौसम का मिजाज बदल गया है। कई इलाकों में धूल भरी आंधी चलने के बाद अब बारिश और ओलावृष्टि की संभावना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग (IMD) ने 15 अक्टूबर को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Delhi Weather Today: तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान दिल्ली-NCR में मौसम बदलने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी गतिविधियां अहम मानी जा रही हैं। इसके प्रभाव से आसमान में बादल छाने, गरज-चमक होने और कई जगह बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज झोंकों के दौरान यह गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। Delhi-NCR Rain Alert: किन इलाकों में दिखेगा असर? दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। अलग-अलग इलाकों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, हर इलाके में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देख लें। तापमान में गिरावट से मिलेगी राहत? अक्टूबर के महीने में दिल्ली-NCR में मौसम आमतौर पर धीरे-धीरे सुहावना होने लगता है। ऐसे में बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे दिन की गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बारिश के बाद उमस और स्थानीय मौसम की स्थिति के आधार पर लोगों को अलग-अलग अनुभव हो सकता है। तापमान में कितनी गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा। आंधी और बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान मौसम में अचानक बदलाव के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहतर रहेगा। 16 अक्टूबर से मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं। इसके बाद दिल्ली-NCR में भी मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के कारण पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम को हल्के में न लें। बारिश से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज हवाओं, बिजली चमकने और ओलावृष्टि की आशंका के बीच सतर्क रहना सबसे बेहतर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति

धर्म बदलने के बाद क्या आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और इसके बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया था। Supreme Court के फैसले के मुताबिक, केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु की अधिसूचित पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में अपने आप शामिल नहीं हो सकता। इस फैसले ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण की पात्रता से जुड़े कानूनी सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। Supreme Court का क्या है पूरा फैसला? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति की पहले की जातिगत पहचान के कारण उसे दूसरी धार्मिक श्रेणी में आरक्षण का पात्र अपने आप नहीं माना जा सकता। संबंधित आरक्षण श्रेणी के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इस मामले में फैसला तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए इसे देश में सभी तरह के आरक्षण पर लागू होने वाले एक समान प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कैसे शुरू हुआ धर्म परिवर्तन और Reservation का मामला? इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत कुछ ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी, जो पहले पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया था। सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 जून 2026 को हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने से किसी व्यक्ति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी नहीं कि बदल जाएं। इसी आधार पर सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले में सरकार की चुनौती सफल नहीं रही। क्या धर्म बदलने पर खत्म हो जाएगा SC और OBC Reservation? Supreme Court के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अब किसी भी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले को समझते समय अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। यह फैसला मुख्य रूप से तमिलनाडु की Backward Class (Muslim) श्रेणी में पात्रता से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए हर प्रकार के आरक्षण पर एक समान रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और राज्य की विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े नियम Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 में दिए गए हैं। वहीं, अन्य श्रेणियों में पात्रता संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी व्यक्ति को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह उसकी संबंधित श्रेणी और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। तमिलनाडु सरकार की दलील क्यों थी अहम? तमिलनाडु सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था। सरकार की दलील थी कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, मामले में सवाल यह था कि क्या पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर किसी व्यक्ति को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग की अधिसूचित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विवाद में संबंधित आरक्षण श्रेणी की पात्रता और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया है। आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल धर्म परिवर्तन या पुरानी जातिगत पहचान को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित श्रेणी के नियमों के तहत पात्रता साबित करना जरूरी है। धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की भी अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी एक मामले के फैसले को सभी राज्यों और सभी आरक्षण श्रेणियों पर सीधे लागू मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई

Delhi में CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने का मामला लगातार चर्चा में है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा। तीनों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी मांगी गई है। अब गुरुवार, 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। अब अदालत यह देखेगी कि इन कदमों से उसके पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ या नहीं। Internet Shutdown: केंद्र सरकार ने क्या सफाई दी? केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। सरकार ने कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। केंद्र के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद की गई थीं। सरकार ने इसके पीछे संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। केंद्र ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित इलाके और तय समय के लिए लगाया गया था। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। Delhi Metro के 45 स्टेशनों पर क्यों लगी पाबंदी? प्रदर्शन के दिन दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित कर दिया गया था। इस फैसले के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मेट्रो सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर पाबंदियां लगाई गई थीं। कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उस दिन 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 चक्कर लगाए। DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि संबंधित पाबंदियां दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद लागू की गई थीं। मेट्रो प्रबंधन ने भी बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। CJP Protest में 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मुद्दा भी अहम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित अव्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, लोगों को अस्थायी केंद्रों में ले जाया गया और कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित न करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए अवमानना नोटिस जारी किए। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC ने अपने हलफनामे दाखिल कर माफी मांगी है और अपने फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है। CJP प्रदर्शन की वजह क्या थी? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित कर दी गई। इंटरनेट बंद होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे आम लोगों के संचार और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने को लेकर सवाल उठे। आज की Supreme Court Hearing में क्या होगा? 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC के जवाबों पर विचार करेगी। इस दौरान इंटरनेट बंद करने, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों की माफी स्वीकार करेगा या कथित अवमानना के मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अदालत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े निर्देशों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है। अब अदालत के फैसले से साफ होगा कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.