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Sanjeev Arora

Punjab ED Raid: मंत्री Sanjeev Arora के ठिकानों पर छापेमारी, Kejriwal बोले- डरेंगे नहीं

पंजाब की राजनीति में सोमवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora) से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ED की यह कार्रवाई चंडीगढ़, लुधियाना, दिल्ली और गुरुग्राम समेत कई शहरों में की गई, जिसके बाद राज्य की सियासत गर्मा गई है। किन आरोपों में हुई ED की कार्रवाई? सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला कथित मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी GST बिलिंग और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी को शक है कि कुछ कंपनियों के जरिए बड़े स्तर पर फर्जी मोबाइल फोन ट्रेडिंग और एक्सपोर्ट दिखाकर वित्तीय गड़बड़ी की गई। ED अधिकारियों ने रेड के दौरान कई अहम दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी पिछले कुछ समय से इस नेटवर्क पर नजर बनाए हुए थी और शुरुआती जांच में कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए थे। Kejriwal ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि विपक्षी नेताओं को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “घबराने की जरूरत नहीं है, हम मजबूती से मुकाबला करेंगे।” केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में AAP सरकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब भी विपक्ष मजबूत होता है, तब केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो जाती है। BJP ने क्या कहा? वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि ED कानून के तहत काम कर रही है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसियों को अपना काम स्वतंत्र तरीके से करने देना चाहिए। पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस रेड का असर आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है। फिलहाल ED की जांच जारी है और एजेंसी आने वाले समय में कुछ और बड़े खुलासे कर सकती है। पंजाब में ED की इस कार्रवाई ने एक बार फिर राजनीति और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आगे क्या निकलकर सामने आता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mamata Banerjee

Mamata Banerjee को बड़ा झटका, TMC में अंदरूनी कलह पर Kirti Azad का तंज

TMC में अंदरूनी कलह ने बढ़ाई चिंता पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों बड़ा राजनीतिक तूफान देखने को मिल रहा है। Mamata Banerjee की अगुवाई वाली Trinamool Congress (TMC) अब अंदरूनी कलह और बगावत के दौर से गुजर रही है। पार्टी के कई सांसदों के नाराज होने की खबरों ने न सिर्फ बंगाल बल्कि दिल्ली की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। काकोली घोष के बयान से मचा सियासी हड़कंप दरअसल, TMC सांसद Kakoli Ghosh Dastidar के बयान के बाद यह विवाद और गहरा गया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसद NDA के समर्थन में खड़े हैं। इतना ही नहीं, बागी सांसदों की ओर से लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखे जाने की खबर ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। BJP नेताओं से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में कुछ बागी नेताओं की भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात भी हुई। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि TMC के भीतर दो अलग-अलग गुट बन चुके हैं। राजनीतिक जानकार इसे ममता बनर्जी के लिए बड़ा चेतावनी संकेत मान रहे हैं। पार्टी नेतृत्व पर खुलकर उठे सवाल काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी संगठन और नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब “झुकने” का समय नहीं है। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुली नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर साधा निशाना वहीं TMC सांसद और पूर्व क्रिकेटर Kirti Azad ने बागी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को कमजोर दिखाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि TMC आज भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पूरी तरह मजबूत है। कीर्ति आजाद ने यह भी कहा कि अगर 20 सांसद बागी हैं तो उनके नाम सामने आने चाहिए। कल्याण बनर्जी ने बागियों को बताया ‘गद्दार’ इधर पार्टी के वरिष्ठ नेता Kalyan Banerjee ने भी बागी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने ऐसे नेताओं को “गद्दार” बताते हुए कहा कि भाजपा बंगाल की राजनीति में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही है। बंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नाराजगी आगे बढ़ती है तो इसका असर संसद में TMC की ताकत पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ असंतोष है या फिर बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत। ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुचुनौती फिलहाल TMC के अंदर मचे इस घमासान पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी को एकजुट रखने की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Alert: Kerala-Karnataka में Red Alert, Rajasthan में Heatwave से हाल बेहाल

देशभर में मौसम (Weather) तेजी से करवट ले रहा है। कहीं तेज बारिश लोगों को गर्मी से राहत दे रही है तो कहीं लू अब भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले 5 दिनों में करीब 13 राज्यों तक पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान तेज आंधी और बारिश देखने को मिली। कई शहरों में अचानक बदले मौसम ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी। वहीं दूसरी ओर केरल और कर्नाटक में भारी बारिश के चलते रेड अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान के कई जिलों में अभी भी हीटवेव का खतरा बना हुआ है। MP और UP में बारिश से बदला मौसम भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत महसूस की। उत्तर प्रदेश की बात करें तो लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी सहित कई शहरों में शाम के समय मौसम अचानक बदल गया। तेज हवाओं और बूंदाबांदी के कारण गर्मी का असर कम हुआ। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई है। Kerala-Karnataka में Heavy Rain का खतरा दक्षिण भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। केरल और कर्नाटक के कई इलाकों में लगातार भारी बारिश हो रही है। स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी भी दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। Rajasthan में Heatwave जारी जहां देश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, वहीं राजस्थान अभी भी तेज गर्मी की मार झेल रहा है। जयपुर, बीकानेर, चूरू और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक हीटवेव चलने की संभावना जताई है। लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और ज्यादा पानी पीने की सलाह दी गई है। अगले 5 दिन क्यों अहम हैं? मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के कारण मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही तो जल्द ही महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में अच्छी बारिश शुरू हो सकती है। किसानों के लिए राहत भरी खबर मानसून की तेजी किसानों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। कई राज्यों में किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। अच्छी बारिश से धान, मक्का और सोयाबीन की खेती को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखें और प्रशासन की सलाह का पालन करें।
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Khan Sir

Khan Sir कोर्ट से मिली बड़ी राहत, केस डायरी पेश करने का आदेश

देश के चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर खान (Khan Sir)सर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गोली चलने के मामले में दर्ज केस को लेकर अदालत ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुलिस से केस डायरी पेश करने को कहा है, वहीं सुनवाई के दौरान खान सर के वकील ने दावा किया कि गोली “Self Defence” में चलाई गई थी। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया से लेकर छात्रों के बीच तक इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट ने पुलिस से मांगी पूरी रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया कि केस से जुड़े सभी दस्तावेज और केस डायरी कोर्ट में पेश किए जाएं। अदालत ने अगली सुनवाई तक खान सर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी रहनी चाहिए। कोर्ट के इस आदेश को खान सर के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। वकील का दावा- जान बचाने के लिए चली गोली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि घटना के समय हालात बेहद तनावपूर्ण थे। खान सर को अपनी सुरक्षा का खतरा महसूस हुआ, जिसके बाद आत्मरक्षा में गोली चलाई गई। वकील ने यह भी कहा कि मामले को एकतरफा तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि घटना की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। पुलिस जांच अभी जारी हालांकि गिरफ्तारी पर रोक लगी है, लेकिन पुलिस की जांच लगातार जारी है। जांच टीम घटना से जुड़े सबूत, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि कोर्ट में सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए जाएंगे। सोशल मीडिया पर बंटी राय जैसे ही कोर्ट का फैसला सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। खान सर के समर्थकों ने इसे राहत भरा फैसला बताया, जबकि कुछ लोग मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों के बीच भी इस पूरे मामले को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। अगली सुनवाई पर सबकी नजर फिलहाल अदालत से मिली राहत के बाद खान सर को बड़ी कानूनी मदद जरूर मिली है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां केस डायरी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nuclear Power

India Nuclear Power भारत की परमाणु ताकत में बड़ा बदलाव, 190 एटमी हथियार तक पहुंचा स्टॉक

भारत की परमाणु क्षमता (Nuclear Power) को लेकर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि देश ने पहली बार 12 परमाणु बम तैनात किए हैं। साथ ही पिछले दो वर्षों में भारत के कुल परमाणु हथियारों की संख्या 180 से बढ़कर करीब 190 तक पहुंच गई है। यह संख्या पाकिस्तान की तुलना में लगभग 20 अधिक बताई जा रही है। हालांकि यह पूरा आकलन अंतरराष्ट्रीय रक्षा रिपोर्ट्स और थिंक टैंक के अनुमानों पर आधारित है, जिनकी आधिकारिक पुष्टि सरकारें आमतौर पर सार्वजनिक रूप से नहीं करतीं। भारत की न्यूक्लियर क्षमता में लगातार बढ़ोतरी रिपोर्ट्स के अनुसार भारत अपनी रणनीतिक सुरक्षा और डिटरेंस क्षमता को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में: यह बढ़ोतरी भारत की बदलती सुरक्षा जरूरतों और क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। South Asia Nuclear Balance: क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर दक्षिण एशिया पहले से ही दुनिया के सबसे संवेदनशील परमाणु क्षेत्रों में गिना जाता है। भारत और पाकिस्तान दोनों के पास परमाणु हथियार होने के कारण यहां का रणनीतिक संतुलन हमेशा चर्चा में रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, परमाणु क्षमता में बदलाव से देशों की डिटरेंस पॉलिसी मजबूत होती है, लेकिन इसके साथ ही क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। Nuclear Reports क्या बताते हैं? हर साल कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा संस्थान और थिंक टैंक वैश्विक परमाणु हथियारों का अनुमान जारी करते हैं। ये आंकड़े पूरी तरह आधिकारिक नहीं होते, लेकिन दुनिया के सैन्य संतुलन को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत को एक उभरती हुई परमाणु शक्ति के रूप में देखा जाता है, जिसकी क्षमता लगातार बढ़ रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

Education System Crisis: NEET-CBSE Controversy और Voter List Row ने बढ़ाई टेंशन

देश में शिक्षा व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने CBSE और NEET परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और SIR वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। खड़गे ने साफ कहा है कि लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और इसके लिए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए। NEET और CBSE Controversy: छात्रों के भविष्य पर सवाल NEET और CBSE परीक्षा प्रणाली को लेकर विपक्ष ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं: इन घटनाओं के चलते देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। SIR Voter List Issue: करोड़ों नाम हटाने का आरोप विपक्ष का आरोप है कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान: इस मुद्दे को लेकर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बता रहा है, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। INDIA Bloc का अगला कदम: CJI को Letter की तैयारी इस पूरे विवाद को गंभीर बताते हुए INDIA ब्लॉक ने कहा है कि वे जल्द ही देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखेंगे। उनका कहना है कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है ताकि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आए। Political Heat Rising in India इस पूरे विवाद ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। छात्रों से लेकर मतदाताओं तक, दोनों मुद्दों ने आम लोगों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

West Bengal Politics: TMC में घमासान, 20 सांसदों की बगावत से सियासी हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़े राजनीतिक भूचाल के संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के करीब 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक संयुक्त पत्र लिखा है, जिससे संगठन में गहरी असहमति और संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह मामला सिर्फ एक औपचारिक शिकायत नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और अलग राजनीतिक रास्ता तलाशने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। क्या है पूरा TMC MPs Letter Controversy? सूत्रों के अनुसार, 20 सांसदों ने स्पीकर को भेजे गए पत्र में अपनी अलग राजनीतिक पहचान और गुट को लेकर मांग उठाई है। इस पत्र के बाद सियासी हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या ये सांसद आगे चलकर एक नई राजनीतिक इकाई बना सकते हैं। हालांकि अभी तक न तो पार्टी नेतृत्व और न ही सांसदों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है। अंदरूनी नाराजगी की वजहें क्या हैं? राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को अचानक नहीं मान रहे हैं। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं: इन मुद्दों ने कथित तौर पर पार्टी के भीतर तनाव को और बढ़ा दिया है। क्या बनने वाली है नई Party? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गुट वास्तव में अलग पार्टी का रूप ले सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि: हालांकि यह अभी सिर्फ अटकलों के स्तर पर है। TMC के लिए कितना बड़ा झटका? अगर यह अंदरूनी विवाद बढ़ता है, तो इसका असर तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक ताकत पर पड़ सकता है: राजनीतिक माहौल गर्म दिल्ली से लेकर कोलकाता तक इस खबर ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। विपक्षी दल भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि आम जनता के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर पार्टी के भीतर चल क्या रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Khan Sir

Khan Sir Update: FIR को लेकर विवाद, कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल

देश के चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर खान सर से जुड़े मामले में नया अपडेट सामने आया है। खान सर (Khan Sir) की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Application) दाखिल की गई है। यह कदम उस FIR के बाद उठाया गया है, जो उनके खिलाफ दर्ज की गई है। मामले को लेकर उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि FIR किसी दबाव या “दूसरे पक्ष की संतुष्टि” के आधार पर दर्ज की गई है। वकील का कहना है कि शिकायत में तथ्यों को सही तरीके से पेश नहीं किया गया है और पूरे मामले को एकतरफा तरीके से दिखाया गया है। वकील ने कोर्ट में क्या कहा? खान सर की ओर से पेश वकील ने कई अहम बातें रखीं, जिनमें शामिल हैं: वकील ने यह भी कहा कि मामला विवादित परिस्थितियों में दर्ज हुआ है और इसमें सभी तथ्यों को ठीक से सामने लाना जरूरी है। अब आगे क्या होगा? अब इस पूरे मामले में अदालत में सुनवाई होनी है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे, जिसके बाद कोर्ट यह तय करेगा कि खान सर को अग्रिम जमानत दी जाए या नहीं। फिलहाल यह केस विचाराधीन है और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। क्यों चर्चा में है यह केस? खान सर देशभर में अपने पढ़ाने के अनोखे अंदाज और लाखों छात्रों के बीच लोकप्रिय हैं। ऐसे में उनके खिलाफ FIR और जमानत याचिका की खबर ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बढ़ा दी है। समर्थक भी लगातार मामले पर नजर बनाए हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

TMC vs BJP: दिल्ली में बड़ी सियासी मुलाकात, भूपेंद्र यादव से बागी TMC नेताओं की मीटिंग से बढ़ी टेंशन

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री Bhupender Yadav से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ बागी सांसदों और नेताओं की मुलाकात ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है। इस मुलाकात को सिर्फ एक औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि आने वाले समय में बड़े सियासी बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari भी मौजूद रहे। शुभेंदु अधिकारी, जो पहले खुद TMC का हिस्सा थे, अब बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और लगातार ममता सरकार पर हमलावर रहते हैं। TMC में अंदरूनी असंतोष की चर्चा तेज बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल कुछ TMC नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी भी जताई है। हालांकि अभी तक किसी तरह के आधिकारिक इस्तीफे या पार्टी टूट की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस मुलाकात ने अंदरूनी खींचतान की चर्चा को और हवा दे दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकती है। क्या बदल रहे हैं बंगाल के सियासी समीकरण? क्या है आगे की तस्वीर? फिलहाल इस मुलाकात पर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बंगाल की सियासत में बड़े बदलाव की शुरुआती दस्तक माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Congress

MP Election Buzz: Congress में अंदरूनी खींचतान या रणनीति? मीनाक्षी का बड़ा बयान

मध्य प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल अब खुलकर दिखाई देने लगी है। नेताओं के बयान, पार्टी के भीतर की गतिविधियां और लगातार बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। इसी बीच Congress नेता मीनाक्षी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनाव में पार्टी मजबूती से जीत दर्ज करेगी। हालांकि, मीनाक्षी के इस बयान के बीच कांग्रेस को एक बड़ा झटका भी लगा है। दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले नेता ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। Meenakshi का भरोसा- Congress मजबूत है मीडिया से बातचीत के दौरान मीनाक्षी ने कहा कि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता और नेता मिलकर चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब बदलाव चाहती है और कांग्रेस लोगों के मुद्दों को लेकर पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठन कमजोर नहीं होता। कांग्रेस पहले भी चुनौतियों से उभरी है और इस बार भी जनता का समर्थन पार्टी को मिलेगा। Digvijaya समर्थक Gyanchandani का इस्तीफा बना चर्चा का विषय कांग्रेस के भीतर उस समय हलचल तेज हो गई जब दिग्विजय सिंह समर्थक माने जाने वाले ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के अंदर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह किसी व्यक्ति का निजी फैसला है और पार्टी पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। संगठन अभी भी पूरी तरह सक्रिय और मजबूत है। Kailash Vijayvargiya ने Congress पर साधा निशाना बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि विकास चाहने वाले लोग बीजेपी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीजेपी सरकार ने लगातार विकास कार्य किए हैं और जनता इन्हीं कामों के आधार पर वोट करेगी। विजयवर्गीय ने कहा कि सड़क, बिजली, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सरकार ने कई बड़े काम किए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर केवल बयानबाजी और अंदरूनी राजनीति करने का आरोप लगाया। चुनाव नजदीक, सियासी बयानबाजी तेज जैसे-जैसे मध्य प्रदेश में चुनाव करीब आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं के बयान और राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होती जा रही हैं। कांग्रेस जहां खुद को एकजुट दिखाने में लगी है, वहीं बीजेपी विकास के मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है। अब आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों बड़ी पार्टियां चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना

Delhi-NCR में मौसम का मिजाज बदल गया है। कई इलाकों में धूल भरी आंधी चलने के बाद अब बारिश और ओलावृष्टि की संभावना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग (IMD) ने 15 अक्टूबर को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Delhi Weather Today: तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान दिल्ली-NCR में मौसम बदलने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी गतिविधियां अहम मानी जा रही हैं। इसके प्रभाव से आसमान में बादल छाने, गरज-चमक होने और कई जगह बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज झोंकों के दौरान यह गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। Delhi-NCR Rain Alert: किन इलाकों में दिखेगा असर? दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। अलग-अलग इलाकों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, हर इलाके में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देख लें। तापमान में गिरावट से मिलेगी राहत? अक्टूबर के महीने में दिल्ली-NCR में मौसम आमतौर पर धीरे-धीरे सुहावना होने लगता है। ऐसे में बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे दिन की गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बारिश के बाद उमस और स्थानीय मौसम की स्थिति के आधार पर लोगों को अलग-अलग अनुभव हो सकता है। तापमान में कितनी गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा। आंधी और बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान मौसम में अचानक बदलाव के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहतर रहेगा। 16 अक्टूबर से मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं। इसके बाद दिल्ली-NCR में भी मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के कारण पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम को हल्के में न लें। बारिश से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज हवाओं, बिजली चमकने और ओलावृष्टि की आशंका के बीच सतर्क रहना सबसे बेहतर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति

धर्म बदलने के बाद क्या आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और इसके बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया था। Supreme Court के फैसले के मुताबिक, केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु की अधिसूचित पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में अपने आप शामिल नहीं हो सकता। इस फैसले ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण की पात्रता से जुड़े कानूनी सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। Supreme Court का क्या है पूरा फैसला? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति की पहले की जातिगत पहचान के कारण उसे दूसरी धार्मिक श्रेणी में आरक्षण का पात्र अपने आप नहीं माना जा सकता। संबंधित आरक्षण श्रेणी के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इस मामले में फैसला तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए इसे देश में सभी तरह के आरक्षण पर लागू होने वाले एक समान प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कैसे शुरू हुआ धर्म परिवर्तन और Reservation का मामला? इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत कुछ ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी, जो पहले पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया था। सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 जून 2026 को हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने से किसी व्यक्ति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी नहीं कि बदल जाएं। इसी आधार पर सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले में सरकार की चुनौती सफल नहीं रही। क्या धर्म बदलने पर खत्म हो जाएगा SC और OBC Reservation? Supreme Court के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अब किसी भी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले को समझते समय अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। यह फैसला मुख्य रूप से तमिलनाडु की Backward Class (Muslim) श्रेणी में पात्रता से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए हर प्रकार के आरक्षण पर एक समान रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और राज्य की विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े नियम Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 में दिए गए हैं। वहीं, अन्य श्रेणियों में पात्रता संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी व्यक्ति को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह उसकी संबंधित श्रेणी और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। तमिलनाडु सरकार की दलील क्यों थी अहम? तमिलनाडु सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था। सरकार की दलील थी कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, मामले में सवाल यह था कि क्या पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर किसी व्यक्ति को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग की अधिसूचित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विवाद में संबंधित आरक्षण श्रेणी की पात्रता और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया है। आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल धर्म परिवर्तन या पुरानी जातिगत पहचान को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित श्रेणी के नियमों के तहत पात्रता साबित करना जरूरी है। धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की भी अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी एक मामले के फैसले को सभी राज्यों और सभी आरक्षण श्रेणियों पर सीधे लागू मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई

Delhi में CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने का मामला लगातार चर्चा में है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा। तीनों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी मांगी गई है। अब गुरुवार, 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। अब अदालत यह देखेगी कि इन कदमों से उसके पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ या नहीं। Internet Shutdown: केंद्र सरकार ने क्या सफाई दी? केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। सरकार ने कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। केंद्र के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद की गई थीं। सरकार ने इसके पीछे संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। केंद्र ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित इलाके और तय समय के लिए लगाया गया था। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। Delhi Metro के 45 स्टेशनों पर क्यों लगी पाबंदी? प्रदर्शन के दिन दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित कर दिया गया था। इस फैसले के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मेट्रो सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर पाबंदियां लगाई गई थीं। कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उस दिन 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 चक्कर लगाए। DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि संबंधित पाबंदियां दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद लागू की गई थीं। मेट्रो प्रबंधन ने भी बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। CJP Protest में 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मुद्दा भी अहम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित अव्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, लोगों को अस्थायी केंद्रों में ले जाया गया और कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित न करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए अवमानना नोटिस जारी किए। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC ने अपने हलफनामे दाखिल कर माफी मांगी है और अपने फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है। CJP प्रदर्शन की वजह क्या थी? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित कर दी गई। इंटरनेट बंद होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे आम लोगों के संचार और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने को लेकर सवाल उठे। आज की Supreme Court Hearing में क्या होगा? 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC के जवाबों पर विचार करेगी। इस दौरान इंटरनेट बंद करने, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों की माफी स्वीकार करेगा या कथित अवमानना के मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अदालत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े निर्देशों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है। अब अदालत के फैसले से साफ होगा कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

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