TMC में अंदरूनी कलह ने बढ़ाई चिंता
पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों बड़ा राजनीतिक तूफान देखने को मिल रहा है। Mamata Banerjee की अगुवाई वाली Trinamool Congress (TMC) अब अंदरूनी कलह और बगावत के दौर से गुजर रही है। पार्टी के कई सांसदों के नाराज होने की खबरों ने न सिर्फ बंगाल बल्कि दिल्ली की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है।
काकोली घोष के बयान से मचा सियासी हड़कंप
दरअसल, TMC सांसद Kakoli Ghosh Dastidar के बयान के बाद यह विवाद और गहरा गया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसद NDA के समर्थन में खड़े हैं। इतना ही नहीं, बागी सांसदों की ओर से लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखे जाने की खबर ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
BJP नेताओं से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में कुछ बागी नेताओं की भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात भी हुई। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि TMC के भीतर दो अलग-अलग गुट बन चुके हैं। राजनीतिक जानकार इसे ममता बनर्जी के लिए बड़ा चेतावनी संकेत मान रहे हैं।
पार्टी नेतृत्व पर खुलकर उठे सवाल
काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी संगठन और नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब “झुकने” का समय नहीं है। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुली नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है।
कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर साधा निशाना
वहीं TMC सांसद और पूर्व क्रिकेटर Kirti Azad ने बागी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को कमजोर दिखाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि TMC आज भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पूरी तरह मजबूत है। कीर्ति आजाद ने यह भी कहा कि अगर 20 सांसद बागी हैं तो उनके नाम सामने आने चाहिए।
कल्याण बनर्जी ने बागियों को बताया ‘गद्दार’
इधर पार्टी के वरिष्ठ नेता Kalyan Banerjee ने भी बागी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने ऐसे नेताओं को “गद्दार” बताते हुए कहा कि भाजपा बंगाल की राजनीति में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही है।
बंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नाराजगी आगे बढ़ती है तो इसका असर संसद में TMC की ताकत पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ असंतोष है या फिर बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुचुनौती
फिलहाल TMC के अंदर मचे इस घमासान पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी को एकजुट रखने की है।
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