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छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: स्टार्टअप-NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़, कर्मचारियों की उम्र सीमा 45 साल

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं, कर्मचारियों, निर्यात और न्यायिक अधोसंरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन के तहत 500 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सरकारी और संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत दी गई है। अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। वहीं, छत्तीसगढ़ को प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी गई है। स्टार्टअप और NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़ कैबिनेट ने युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन को मंजूरी दी है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें औपचारिक रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी दी है। नीति के तहत मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना भी नीति का प्रमुख लक्ष्य होगा। नवा रायपुर में 200 करोड़ की लागत से बनेगा NSTI कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम तेंदुवा में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए 10 एकड़ शासकीय भूमि केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को मुफ्त उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और हॉस्टल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। NSTI में हर साल दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों के तहत करीब 1,000 प्रशिक्षुओं और अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। सरकारी कर्मचारियों की अधिकतम आयु सीमा 45 साल कैबिनेट ने राज्य शासन के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के साथ निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों और नगर सैनिकों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। अब दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने का फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले से संबंधित कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे। इसके लिए राज्य शासन की ओर से एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। दुर्ग में बनेगा नया जिला न्यायालय भवन दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन के निर्माण का रास्ता भी कैबिनेट के फैसले से साफ हो गया है। सरकार ने ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के पास 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों जमीनों का वर्तमान मूल्य लगभग समान बताया गया है। इस फैसले के बाद दुर्ग में आधुनिक सुविधाओं से लैस और सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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RTE पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा हर स्कूल का पूरा डेटा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत बच्चों के प्रवेश और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कार्यभार संभालने के पहले ही दिन RTE से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से छत्तीसगढ़ के हर स्कूल से जुड़ा RTE का पूरा डेटा भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। RTE की धारा 12(1)(c) पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी समेत 13 अन्य लोगों ने RTE के क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों पर लगातार सुनवाई चल रही है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए फिलहाल कौन सी SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू है। हर स्कूल की आरक्षित और खाली सीटों का देना होगा ब्योरा हाईकोर्ट ने सरकार को एक विस्तृत चार्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें छत्तीसगढ़ के हर स्कूल में RTE के तहत आरक्षित कुल सीटों की संख्या बतानी होगी। इसके साथ ही सरकार को यह जानकारी भी देनी होगी कि प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया है और कितनी सीटें अभी खाली हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह हलफनामा और जरूरी चार्ट राज्य सरकार के किसी सक्षम अधिकारी के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर पेश किया जाए। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित करने का अनुरोध किया। सरकार की ओर से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि तब तक हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कर लिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से 7 दिन पहले हलफनामा दाखिल किया जाए। साथ ही इसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। पहले ही दिन RTE मामले पर दिखाई गंभीरता चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने कार्यभार संभालने के पहले दिन डिवीजन बेंच में जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के साथ कई मामलों की सुनवाई की। इसी दौरान RTE से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई हुई। स्कूली बच्चों के प्रवेश और RTE कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने विस्तृत जानकारी मांगते हुए सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामे और स्कूलवार डेटा पर अगली सुनवाई में कोर्ट की नजर रहेगी।
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रायपुर में पुरानी रंजिश को लेकर युवक से मारपीट, बाइक लूटने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर में पुरानी रंजिश को लेकर एक युवक से मारपीट कर उसकी बाइक लूटने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि बदमाशों ने युवक को घेरकर गाली-गलौज की, हाथ-मुक्कों से मारपीट की और जान से मारने की धमकी देने के बाद उसकी दोपहिया लेकर फरार हो गए। मामले में एक आरोपी अभी फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल दो बाइक और एक स्कूटी भी जब्त की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राज मिश्रा, यश मिश्रा उर्फ रोहन मिश्रा और अभिषेक पटेल उर्फ सोनू के रूप में हुई है। मंदिर के पास युवक को घेरकर की मारपीट पुलिस के अनुसार, बलराम साहू (38) ने 23 अगस्त को डीडीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 19 अगस्त की सुबह करीब 4 बजे वह मोटरसाइकिल से रायपुरा स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर, महादेव घाट गए थे। मंदिर के गेट के पास बाइक खड़ी करने के बाद जब वह वापस लौटे, तभी कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने पुरानी रंजिश को लेकर उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर हाथ-मुक्कों से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। मारपीट में नाक और पैर में आई चोट हमले के दौरान बलराम साहू के नाक और दाहिने पैर में चोट आई। इसके बाद आरोपी उनकी बाइक लेकर मौके से फरार हो गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़ा डीडीनगर थाना पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद राज मिश्रा (22), यश मिश्रा उर्फ रोहन मिश्रा (22) और अभिषेक पटेल उर्फ सोनू (20) को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल दो बाइक और एक स्कूटी बरामद की है। तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस मामले में फरार चौथे आरोपी की तलाश कर रही है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
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रायपुर में रक्षाबंधन पर चोरी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, बच्चों को ढाल बनाकर चुराते थे जेवर; 7 वारदातों का खुलासा

रक्षाबंधन के मौके पर रायपुर के भीड़भाड़ वाले बाजारों में महिलाओं और बच्चों के गले से सोने-चांदी के आभूषण चोरी करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। एसीसीयू और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरोह से जुड़ी दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों महिलाओं ने शहर के अलग-अलग इलाकों में चोरी की 7 वारदातें करना स्वीकार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 12 लाख रुपए का सामान, जिसमें लगभग 10 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण भी शामिल हैं, बरामद किया गया है। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान नंदनी राजपूत और सानिया मरकाम के रूप में हुई है। बच्चे के गले से लॉकेट चोरी के बाद खुला मामला रविवार को रक्षाबंधन की खरीदारी के लिए मालवीय रोड पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इसी दौरान पैदल पेट्रोलिंग कर रही पुलिस को एक बच्चे के गले से सोने का लॉकेट चोरी होने की सूचना मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं महिलाओं और बच्चों के आसपास घूमती नजर आईं। हुलिए के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और दोनों महिलाओं को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान शहर में हुई चोरी की अन्य घटनाओं का भी खुलासा हुआ। बच्चों को बनाती थीं चोरी के लिए ढाल पुलिस जांच में सामने आया कि नंदनी अपने बच्चों को साथ लेकर भीड़भाड़ वाले बाजारों में जाती थी। बच्चों के साथ होने के कारण उस पर लोगों को आसानी से शक नहीं होता था। आरोप है कि भीड़ का फायदा उठाकर वह बच्चों के गले से चेन और लॉकेट चोरी करती थी। इसके बाद चोरी के जेवर अपनी साथी सानिया को सौंप देती थी, जो सामान लेकर वहां से निकल जाती थी। 7 वारदातों में 12 लाख का सामान बरामद पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने गोलबाजार, महादेव घाट, इतवारी बाजार और मेला स्थलों में चोरी की 7 घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने करीब 10 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण, 9,700 रुपए नकद, एक एक्टिवा और 5 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपए बताई गई है। पति जेल में, पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी नंदनी राजपूत का पति मोहन राजपूत गुढ़ियारी थाने का हिस्ट्रीशीटर है और फिलहाल नारकोटिक एक्ट के मामले में जेल में सजा काट रहा है। पुलिस अब गिरफ्तार महिलाओं से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनकी संभावित दूसरी वारदातों के बारे में जानकारी जुटा रही है। त्योहारों के दौरान बाजारों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने पैदल पेट्रोलिंग और CCTV निगरानी भी बढ़ा दी है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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छत्तीसगढ़ में NSUI जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर रोक, यूथ कांग्रेस चुनाव के बीच गुटबाजी तेज

छत्तीसगढ़ में यूथ कांग्रेस चुनाव के बीच कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। गुटबाजी की शिकायतों के बाद पांच जिलों में की गई NSUI जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि बिलासपुर NSUI अध्यक्ष रंजित सिंह के भूपेश बघेल गुट के प्रत्याशी सत्येंद्र चेलक के समर्थन में प्रचार करने के बाद संगठन के भीतर विवाद बढ़ा। मामले की शिकायत राष्ट्रीय कार्यालय तक पहुंची, जिसके बाद 20 अगस्त को जारी नियुक्ति आदेश को होल्ड कर दिया गया। अब चर्चा है कि यूथ कांग्रेस चुनाव पूरा होने के बाद ही NSUI के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। 5 जिलों में हुई थी NSUI अध्यक्षों की नियुक्ति NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने 20 अगस्त को पांच जिलों में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का आदेश जारी किया था। इनमें रंजेश सिंह क्षत्री को बिलासपुर ग्रामीण, समर्थ मिरानी को बिलासपुर शहर, दुर्गांत आर्या को मुंगेली, उस्मान रजा को बालोद और रोशन सिंह ठाकुर को खैरागढ़-छुईखदान-गंडई का जिला अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि, रविवार को जारी नए आदेश में इन सभी नियुक्तियों को फिलहाल रोक दिया गया है। यूथ कांग्रेस चुनाव का दिया गया हवाला नियुक्तियों पर रोक लगाने वाले आदेश में छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस चुनाव का हवाला दिया गया है। बताया गया कि राष्ट्रीय कार्यालय से चर्चा के बाद 20 अगस्त को जारी किए गए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति आदेश को फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। इसके बाद संगठन के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि NSUI की नई नियुक्तियों का फैसला अब यूथ कांग्रेस चुनाव के बाद ही हो सकता है। रंजित सिंह के समर्थन में सामने आए नेता बिलासपुर NSUI अध्यक्ष रंजित सिंह को हटाकर शहर और ग्रामीण के लिए अलग-अलग जिला अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद संगठन के भीतर विरोध शुरू हो गया था। रंजित सिंह वर्ष 2023 से बिलासपुर NSUI जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सक्रियता दिखाई है। नई नियुक्तियों का बिलासपुर के अलावा रायपुर के कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा भी विरोध किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद मामला राष्ट्रीय कार्यालय तक पहुंचा और नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। सत्येंद्र चेलक के प्रचार को लेकर विवाद विवाद की एक बड़ी वजह रंजित सिंह का भूपेश बघेल समर्थित प्रत्याशी सत्येंद्र चेलक के समर्थन में प्रचार करना बताया जा रहा है। रंजित सिंह उनके दौरे के दौरान साथ नजर आए थे। इसी को लेकर संगठन के दूसरे खेमे की ओर से राष्ट्रीय कार्यालय में शिकायत किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, इस मामले में अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं। रंजित सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष पर लगाए गुटबाजी के आरोप रंजित सिंह ने NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गुटबाजी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संगठन में फैसले किसी व्यक्ति या गुट के फायदे के लिए नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और संगठन के हित को ध्यान में रखकर होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिलासपुर NSUI को शहर और ग्रामीण में बांटकर बिना उनकी जानकारी के नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। रंजित सिंह ने इस प्रक्रिया को संगठन के नियमों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में NSUI के आंतरिक चुनाव भी होने हैं। ऐसे में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का फैसला संगठन के चुनाव को प्रभावित कर सकता है। 30 अगस्त से शुरू होना है युवा कांग्रेस का सदस्यता अभियान रंजित सिंह के मुताबिक, 30 अगस्त से युवा कांग्रेस का सदस्यता अभियान भी शुरू होने वाला है। उनका कहना है कि सदस्यता और संगठन चुनाव की प्रक्रिया में कार्यकर्ताओं को अपने नेतृत्व का चुनाव करने का अधिकार मिलना चाहिए। फिलहाल पांच जिलों में NSUI अध्यक्षों की नियुक्ति पर रोक लगने के बाद संगठन के अगले फैसले का इंतजार है। अब देखना होगा कि यूथ कांग्रेस चुनाव के बाद इन नियुक्तियों को बरकरार रखा जाता है या संगठन नए सिरे से फैसला करता है।
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बिलासपुर में स्मार्ट मीटर से बढ़ी बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी, कहीं 6 महीने से बिल नहीं तो कहीं 5 हजार तक पहुंचा

बिलासपुर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। कई उपभोक्ता बिलिंग में गड़बड़ी और मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। विभाग के अधिकारी इन तकनीकी दिक्कतों के लिए मीटर लगाने वाली जीनस कंपनी की व्यवस्था को जिम्मेदार बता रहे हैं। नेहरू नगर स्थित सीएसईबी के सिटी डिविजन कार्यालय में लगातार ऐसे उपभोक्ता पहुंच रहे हैं, जिनकी शिकायत स्मार्ट मीटर, बिल नहीं आने या अचानक ज्यादा बिल आने से जुड़ी है। थ्री-फेज कनेक्शन लिया, लेकिन नहीं लगा स्मार्ट मीटर कई उपभोक्ताओं ने गर्मियों में बिजली की बढ़ी खपत को देखते हुए थ्री-फेज कनेक्शन लिया था। इसके लिए जांच प्रक्रिया पूरी करने और शुल्क जमा करने के बाद भी उनके यहां नया स्मार्ट मीटर नहीं लगाया गया। ऐसे में कुछ घरों में अभी भी पुराने मीटर से ही बिजली सप्लाई जारी है। विभाग के मुताबिक, फिलहाल ऐसे करीब 20 मामले सामने आए हैं, हालांकि वास्तविक संख्या इससे ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है। नए स्मार्ट मीटर नहीं लग पाने के कारण इन उपभोक्ताओं को बिलिंग में परेशानी हो रही है। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें छह महीने से ज्यादा समय से बिजली का बिल ही नहीं मिला। किसी का बिल 5 हजार, किसी का महीनों से नहीं आया स्मार्ट मीटर और बिलिंग से जुड़ी शिकायतों को लेकर शशिलता श्रीवास निवासी चड्डा बाड़ी, नेहरू नगर और एसके चतुर्वेदी निवासी कुदुदंड सहित कई उपभोक्ता नेहरू नगर कार्यालय पहुंचे। वहीं प्रकाश यादव और भरत कश्यप ने बिजली की खपत के मुकाबले ज्यादा बिल आने की शिकायत की है। ‘प्लंबर हूं, पूरी कमाई बिजली बिल में जा रही’ कस्तूरबा नगर निवासी प्रकाश यादव ने बताया कि वह प्लंबर का काम करते हैं। सामान्य मीटर के समय उनका बिजली बिल करीब 300 से 400 रुपए प्रतिमाह आता था। अब यह बढ़कर 4 से 5 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। उनका कहना है कि आसपास रहने वाले कई लोगों की भी इसी तरह की शिकायत है। प्रकाश यादव के मुताबिक, इतनी अधिक राशि का बिल आने से उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा बिजली बिल चुकाने में चला जा रहा है। ‘गर्मियों में 2-2.5 हजार, अब 5-6 हजार का बिल’ नगर निगम में विपक्ष के नेता भरत कश्यप ने बताया कि नेहरू नगर स्थित उनके घर में सामान्य मीटर के दौरान गर्मियों में भी बिजली का बिल 2 से 2.5 हजार रुपए से ज्यादा नहीं आया। उनका कहना है कि अब बारिश के मौसम में बिजली की खपत कम होने के बावजूद बिल 5 से 6 हजार रुपए महीने तक पहुंच गया है। विभाग ने माना तकनीकी दिक्कत से हो रही परेशानी सीएसईबी नेहरू नगर के एई गिरीश श्रीवास्तव ने बताया कि नेहरू नगर जोन में करीब 15 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने माना कि मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याएं सामने आती रहती हैं। उनके मुताबिक, डेटा अपडेट करने का अथॉराइजेशन जीनस कंपनी के पास है और तकनीकी समस्या होने पर कंपनी से इसे क्लियर कराया जाता है। उन्होंने यह भी माना कि कभी-कभी इस प्रक्रिया में देरी हो जाती है। अधिकारी के अनुसार, किसी शिकायत के समाधान में छह महीने का समय नहीं लगना चाहिए और अगर इतना समय लग रहा है तो इसे विभाग की चूक माना जाएगा। खपत कम होने के बावजूद ज्यादा बिल पर सवाल सीएसपीडीसीएल के ईडी अम्बष्ट से बिजली खपत और बिलिंग को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने बताया कि जून की तुलना में वर्तमान समय में बिजली की खपत करीब 50 प्रतिशत कम हो चुकी है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि यदि खपत कम हो गई है तो कुछ उपभोक्ताओं के बिल पहले की तुलना में ज्यादा क्यों आ रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया। दोबारा संपर्क करने पर भी कॉल रिसीव नहीं किया गया। फिलहाल स्मार्ट मीटर की तकनीकी गड़बड़ी, डेटा अपडेट और बिलिंग में अंतर को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी बनी हुई है। विभाग का कहना है कि शिकायतों का जल्द निराकरण करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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रायपुर में करंट लगने से मां-बेटे की मौत, बचाने पहुंचा बेटा भी चपेट में आया

रायपुर में एक दर्दनाक हादसे में मां और बेटे की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब मां बालकनी में सूख रहे कपड़े लेने गई थीं। कपड़े उतारते समय उन्होंने जैसे ही जीआई पाइप को छुआ, वह करंट की चपेट में आ गईं। मां को करंट से चिपका देखकर उनका बेटा उन्हें बचाने के लिए पहुंचा, लेकिन वह भी बिजली की चपेट में आ गया। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है। बेटी से मिलने रायपुर आए थे मां-बेटे जानकारी के मुताबिक, महिला अपने बेटे के साथ रायपुर में रहने वाली अपनी बेटी से मिलने आई थीं। बेटी किराए के मकान में रहती है। इसी मकान की बालकनी में यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि बालकनी में कपड़े सूख रहे थे। महिला कपड़े उतारने पहुंचीं और जीआई पाइप को छूते ही करंट की चपेट में आ गईं। मां को बचाने पहुंचा बेटा भी झुलसा महिला को करंट से चिपका देखकर उनका बेटा मदद के लिए दौड़ा। उसने मां को बचाने की कोशिश की, लेकिन जीआई पाइप में फैले करंट की चपेट में वह भी आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। कूलर से पाइप में फैला था करंट शुरुआती जांच में सामने आया है कि मकान में लगे कूलर से करंट जीआई पाइप में फैल गया था। पाइप में करंट आने की वजह से महिला जैसे ही उसे छूने पहुंचीं, हादसा हो गया। सूचना मिलने के बाद टिकरापारा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों और बिजली कनेक्शन की स्थिति की भी जांच कर रही है।
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रायपुर में चोरी की एक्टिवा से मोबाइल स्नेचिंग, युवक और नाबालिग गिरफ्तार; 5 मोबाइल बरामद

रायपुर में चोरी की एक्टिवा से मोबाइल छीनने वाले एक युवक और नाबालिग को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों पर सरस्वती नगर इलाके में मोबाइल स्नेचिंग की दो वारदातों के साथ मोबाइल चोरी की तीन अन्य घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन और चोरी की एक्टिवा बरामद की है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला से मोबाइल छीना पुलिस के मुताबिक, 19 अगस्त की सुबह कोटा निवासी उन्नति ठाकुर मॉर्निंग वॉक के लिए निकली थीं। दिशा कॉलेज रोड पर रेयांश किचन के सामने ग्रे रंग की एक्टिवा पर सवार दो युवकों ने उनका मोबाइल झपट लिया और फरार हो गए। इसी सुबह चौबे कॉलोनी निवासी युवराज मेहर कॉलेज जा रहे थे। उसी इलाके में बाइक सवार युवकों ने उनका मोबाइल भी इसी तरह छीन लिया। दोनों घटनाओं की शिकायत सरस्वती नगर थाने में दर्ज कराई गई थी। मेडिकल कॉलेज की पार्किंग से चोरी हुई थी एक्टिवा पुलिस जांच में सामने आया कि मोबाइल स्नेचिंग में इस्तेमाल की गई एक्टिवा CG 04 KS 6757 भी चोरी की थी। पुलिस के अनुसार, यह एक्टिवा 21 जुलाई को मेडिकल कॉलेज की पार्किंग से चोरी हुई थी। इस संबंध में मौदहापारा थाने में मामला दर्ज था। पुलिस ने स्नेचिंग की घटनाओं के CCTV फुटेज खंगाले तो दोनों वारदातों में इसी चोरी की एक्टिवा का इस्तेमाल दिखाई दिया। इसके बाद तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। एमजी रोड पर घेराबंदी कर पकड़ा पुलिस टीम को सूचना मिली कि चोरी की एक्टिवा पर दो युवक एमजी रोड इलाके में घूम रहे हैं। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में एक आरोपी ने अपना नाम वरुण साहू (23), निवासी राम नगर, गुढ़ियारी बताया। दूसरा आरोपी नाबालिग है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने एक्टिवा चोरी करने के साथ इसी वाहन से मोबाइल स्नेचिंग की दो वारदात और तीन अन्य मोबाइल चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है। आरोपियों के पास से 5 मोबाइल बरामद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 5 मोबाइल फोन और चोरी की एक्टिवा बरामद की है। पुलिस अब उन तीन अन्य मोबाइल चोरी की घटनाओं के संबंध में भी जांच कर रही है, जिन्हें आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है। यह कार्रवाई डीसीपी वेस्ट जोन रॉबिंसन गुड़िया के निर्देशन, एडीसीपी राहुल देव शर्मा के मार्गदर्शन और एसीपी आजाद चौक ईशू अग्रवाल के नेतृत्व में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और सरस्वती नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने की।
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बिलासपुर में मकान के बेसमेंट से टनों कृषि दवाइयां जब्त, बिना लाइसेंस भंडारण का आरोप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कृषि विभाग ने एक मकान के बेसमेंट से बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां जब्त की हैं। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो कृषि दवाओं और खाद के भंडारण से जुड़े जरूरी लाइसेंस और दस्तावेज नहीं मिले। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा काफी ज्यादा है और इसकी तौल व लिस्टिंग का काम किया जा रहा है। आशंका है कि कृषि दवाइयां उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मंगाई गई थीं और बिलासपुर में बिक्री के लिए रखी गई थीं। लोखंडी के मकान में मिला स्टॉक कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि लोखंडी इलाके में एक मकान के बेसमेंट में बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि दवाइयां रखी गई हैं। सूचना के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बेसमेंट की जांच शुरू की। जांच के दौरान बड़ी संख्या में कृषि दवाइयां और अन्य सामग्री मिली। विभाग अब बरामद स्टॉक से जुड़े दस्तावेज और लाइसेंस की जांच कर रहा है। एक्सपायर या नकली दवाओं की भी आशंका कार्रवाई के दौरान मिली कुछ कृषि दवाओं के एक्सपायर या नकली होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं के सैंपल की जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कोई दवा नकली या निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है। अगर ऐसा पाया जाता है तो मामले में आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बिना लाइसेंस भंडारण की जांच कृषि दवाओं और कीटनाशकों के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित नियम और लाइसेंस जरूरी होते हैं। बेसमेंट में इतनी बड़ी मात्रा में कृषि सामग्री मिलने के बाद विभाग ने संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि दवाइयां कहां से लाई गईं, किसके नाम पर थीं और इन्हें रखने या बेचने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। कार्रवाई के दौरान मकान मालिक नहीं मिला जिस मकान के बेसमेंट से कृषि दवाइयां बरामद हुई हैं, वह गाजियाबाद निवासी आशु सिंह पाल का बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। फिलहाल कृषि विभाग ने बरामद सामग्री को जब्त कर लिया है। स्टॉक की गिनती और तौल के बाद पूरी सूची तैयार की जा रही है। दस्तावेजों और दवाओं की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। एसएसपी ने पुलिस टीम को भेजा मामले की जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने भी इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सकरी थाना पुलिस की टीम को मौके पर भेजा। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा टनों में है। फिलहाल उसकी गिनती, तौल और लिस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है। कार्रवाई के दौरान संयुक्त संचालक कृषि राजेश राठौर, सहायक संचालक कृषि अनिल शुक्ला, सहायक संचालक शशांक शिंदे समेत कृषि विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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बिलासपुर में तालाब में डूबे दो सगे भाई, छोटे को बचाने के लिए बड़े भाई ने लगाई छलांग

बिलासपुर के पचपेड़ी थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में दो सगे भाइयों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। दोनों बच्चे अपने पिता के साथ तालाब के पास गए थे। इसी दौरान छोटा भाई पानी में फिसलकर गहरे हिस्से में चला गया। उसे बचाने के लिए बड़ा भाई भी तालाब में कूद गया, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण दोनों डूब गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। एक साथ दो बेटों की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता से कुछ दूर जाते ही हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, चिल्हाटी निवासी भक्त प्रहलाद पैकरा किसान हैं। गुरुवार शाम वह अपने दोनों बेटों दीपू पैकरा (7) और चींटू पैकरा (4) को लेकर तालाब के पास गए थे। बताया जा रहा है कि पिता बच्चों को तालाब किनारे छोड़कर कुछ दूर चले गए और मोबाइल पर बात करने लगे। इसी दौरान तालाब के पास खेल रहा चार वर्षीय चींटू अचानक फिसलकर पानी में गिर गया और गहरे हिस्से में चला गया। छोटे भाई को बचाने तालाब में कूदा बड़ा भाई छोटे भाई को पानी में डूबता देखकर सात वर्षीय दीपू उसे बचाने के लिए तालाब में कूद गया। बताया जा रहा है कि तालाब की गहराई अधिक थी और बच्चों को इसका अंदाजा नहीं था। देखते ही देखते दोनों बच्चे पानी में डूब गए। युवक ने देखा तो ग्रामीणों को बुलाया हादसे के दौरान एक युवक की नजर तालाब में डूब रहे दोनों बच्चों पर पड़ी। उसने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तालाब में उतरकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला। परिजन और ग्रामीण दोनों बच्चों को लेकर तत्काल पचपेड़ी अस्पताल पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मस्तूरी अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित किया मस्तूरी अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पचपेड़ी पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। एक साथ दो मासूम बेटों की मौत से परिवार में गम का माहौल है। गांव में भी इस हादसे के बाद शोक की लहर है।
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छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भोपाल में पहले बिक चुका प्लॉट दोबारा बेचा, 3 लाख रुपए की धोखाधड़ी का केस दर्ज

भोपाल के नीलबड़ स्थित गोरा गांव में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कमलेश राजपूत ने पहले ही बिक चुके 800 वर्गफीट के प्लॉट का दोबारा सौदा कर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से 3 लाख रुपए एडवांस ले लिए। रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने आरोपी कमलेश राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम देखकर किया सौदा पुलिस के अनुसार, आरोपी ने प्लॉट के ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपना नाम दिखाकर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से सौदा किया था। 800 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 3.30 लाख रुपए तय हुई थी। इसके बाद धर्मेंद्र ने किस्तों में आरोपी को 3 लाख रुपए एडवांस दे दिए। हालांकि, जांच में सामने आया कि आरोपी करीब दो महीने पहले ही यह प्लॉट शुभम यादव को बेच चुका था। शुभम के नाम पर प्लॉट की रजिस्ट्री भी हो चुकी थी, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं हुआ था। रजिस्ट्री कराने नहीं पहुंचा आरोपी पुलिस के मुताबिक, रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं होने का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर प्लॉट का दोबारा सौदा कर रकम ले ली। जब रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, तो धर्मेंद्र को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। टीटी नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी ने किस तरह प्लॉट का दोबारा सौदा किया और रकम लेने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

इंदौर में ‘Gen Z Protest 2.0’ जारी, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े युवा

इंदौर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन जारी है। 5 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने अपने आंदोलन को ‘Gen Z Protest 2.0’ नाम दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। 19 अक्टूबर को भंवरकुआं चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने उन्हें समय रहते हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इसके बाद उन्हें करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा गया। रिहा होने के बाद युवाओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुटने की अपील की गई थी। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान और महात्मा गांधी की तस्वीरें थीं। इसके अलावा, उन्होंने अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियों के जरिए अपनी मांगें भी रखीं। 50-60 पुलिसकर्मियों ने हटाया, प्रदर्शनकारी का दावा प्रदर्शनकारी योगित गुप्ता के मुताबिक, 19 अक्टूबर को वह अपने 10 साथियों के साथ भंवरकुआं चौराहे पर पहुंचे थे। उनके पास पेट्रोल से भरी बोतलें थीं और वे आत्मदाह करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान करीब 50 से 60 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया। योगित ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें आत्मदाह करने से रोकने के बाद करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और वे अपनी मांग को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे।
Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

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