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छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
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छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
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छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को करना होगा स्ट्रेस मैनेजमेंट का ऑनलाइन कोर्स, 31 अक्टूबर तक की डेडलाइन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यस्थल पर तनाव कम करने और काम करने के तरीके में सुधार के लिए ऑनलाइन कोर्स करना अनिवार्य किया गया है। राज्य शासन ने मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर उपलब्ध दो कोर्स 31 अक्टूबर तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों को आदेश जारी किया है। इन कोर्स का उद्देश्य कर्मचारियों को कामकाज के दौरान होने वाले तनाव को संभालने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करना है। दो ऑनलाइन कोर्स करना अनिवार्य सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दो कोर्स निर्धारित किए हैं। दोनों कोर्स iGOT पोर्टल पर उपलब्ध हैं। सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित समयसीमा में इन्हें पूरा करना होगा। 3 नवंबर तक शासन को देनी होगी रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों से समय पर दोनों कोर्स पूरे करवाएं। किसी भी कर्मचारी का कोर्स लंबित नहीं रहना चाहिए। विभागों को कोर्स पूरा होने की जानकारी 3 नवंबर तक शासन को भेजनी होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकारी दफ्तरों में कामकाज सुधारने पर जोर सरकारी कार्यालयों में कामकाज की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद लोगों को कई बार शिकायतों के निराकरण में देरी का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे आम लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों ने ये कोर्स पूरे नहीं किए हैं। इसी को देखते हुए शासन ने 31 अक्टूबर तक दोनों कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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छत्तीसगढ़ के भूपेन्द्र नाग बने भाजयुमो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अनमोल झा को भी मिली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह

छत्तीसगढ़ के कांकेर निवासी भूपेन्द्र नाग को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देश पर जारी नियुक्ति सूची में उन्हें राष्ट्रीय टीम में जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, छत्तीसगढ़ से अनमोल झा को भी भाजयुमो की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। प्रदेश उपाध्यक्ष से राष्ट्रीय टीम तक का सफर भूपेन्द्र नाग इससे पहले छत्तीसगढ़ भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। प्रदेश स्तर पर संगठन के लिए काम करने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली है। उनकी नियुक्ति से भाजयुमो के राष्ट्रीय संगठन में छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व मिला है। इसे प्रदेश के युवा भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए भी अहम माना जा रहा है। कई राज्यों के नेताओं को मिली जिम्मेदारी भाजपा की ओर से जारी सूची में भूपेन्द्र नाग के अलावा जम्मू-कश्मीर की विधायक शगुन परिहार, उत्तर प्रदेश के निखिल मणि तिवारी, नागालैंड के अरविंद दमानी, तेलंगाना की मालोथ कोमली नाइक, बिहार के राज राजेंद्र सिंह और पश्चिम बंगाल के विधायक सौमेन करफा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर ओडिशा की अर्पिता अपराजिता बड़जेना, उत्तर प्रदेश के हर्ष वर्धन सिंह और आंध्र प्रदेश के मिटल वामशी कृष्णा को जिम्मेदारी दी गई है। जारी सूची के अनुसार, सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
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रायपुर में घर का ताला तोड़कर 8 लाख के गहने चोरी, नाबालिग पकड़ा गया; पुलिस ने जेवर किए बरामद

रायपुर के सरोना आजाद नगर में घर का ताला तोड़कर करीब 8 लाख रुपए के सोने-चांदी के गहने चोरी करने के मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की निशानदेही पर चोरी के गहने बरामद कर लिए गए हैं। मामला आमानाका थाना क्षेत्र का है। मां के साथ बाहर गई थी महिला, लौटने पर हुई चोरी की जानकारी पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि वह 18 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे घर में ताला लगाकर अपनी मां के साथ भानुप्रतापपुर गई थी। 19 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे जब वह वापस लौटी, तो घर के कमरे में सामान बिखरा हुआ था। महिला ने जांच की तो अलमारी का लॉक और अंदर बना लॉकर टूटा मिला। उसमें रखे सोने-चांदी के गहने गायब थे। चोरी हुए सामान में सोने की दो चेन, दो लॉकेट, दो चूड़ियां, नाक की दो नथ, चेन वाली सोने की बालियां और चांदी के पायल समेत अन्य गहने शामिल हैं। पीछे का दरवाजा तोड़कर घर में घुसा चोर महिला की शिकायत के अनुसार, चोर घर की पिछली दीवार फांदकर पीछे के दरवाजे तक पहुंचा। इसके बाद दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर घुसा और अलमारी का लॉकर तोड़कर गहने लेकर फरार हो गया। शिकायत के आधार पर आमानाका थाने में अपराध क्रमांक 355/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) और 305(a) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पूछताछ में चोरी स्वीकार करने का दावा, गहने बरामद मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी पश्चिम जोन रॉबिन्सन गुड़िया, अतिरिक्त डीसीपी राहुल देव शर्मा और एसीपी पुरानी बस्ती देवांश सिंह राठौर ने पुलिस टीम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित महिला सहित आसपास के लोगों से पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, संदेह के आधार पर एक विधि से संघर्षरत बालक को पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उसने चोरी की वारदात स्वीकार की। उसकी निशानदेही पर चोरी के गहने बरामद किए गए। पुलिस ने बताया कि वैधानिक कार्रवाई पूरी करने के बाद बालक को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया।
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NIT रायपुर के नए कुलसचिव बने अशोक कुमार गुप्ता, 20 साल से अधिक का है प्रशासनिक अनुभव

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर में अशोक कुमार गुप्ता ने 16 अक्टूबर 2026 से कुलसचिव (रजिस्ट्रार) का कार्यभार संभाल लिया है। वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई से प्रतिनियुक्ति पर NIT रायपुर आए हैं। नए पद पर वे संस्थान के प्रशासनिक कामकाज और कार्यालय से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगे। तीन प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में काम करने का अनुभव अशोक कुमार गुप्ता को शैक्षणिक संस्थानों के प्रशासनिक क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव है। NIT रायपुर में नियुक्ति से पहले वे दिसंबर 2017 से IIT भिलाई में अपर कुलसचिव और उप कुलसचिव के पदों पर कार्यरत थे। इससे पहले उन्होंने जुलाई 2010 से जून 2017 तक धनबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स में सहायक कुलसचिव के रूप में सेवाएं दीं। वहीं, नवंबर 2004 से जून 2010 तक वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी में सीएलए के पद पर कार्यरत रहे। NIT रायपुर में संभालेंगे प्रशासनिक जिम्मेदारी अलग-अलग प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में काम करने के दौरान गुप्ता ने प्रशासनिक व्यवस्था और संस्थानों के संचालन से जुड़ा व्यापक अनुभव हासिल किया है। अब NIT रायपुर में कुलसचिव के रूप में वे संस्थान के कार्यालय का नेतृत्व करेंगे और पद से संबंधित प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
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रायपुर में 6 जगह होगा रावण दहन, खारून नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर प्रतिबंध

रायपुर में दशहरा और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर नगर निगम ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। 20 अक्टूबर को शहर में 6 स्थानों पर रावण दहन किया जाएगा। वहीं, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए खारून नदी में सीधे दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन करने पर प्रतिबंध रहेगा। प्रतिमाओं को नदी के पास बनाए गए निर्धारित विसर्जन कुंड में ही विसर्जित करना होगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने अधिकारियों की समिति गठित की है। समिति को विसर्जन स्थलों पर जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। रावणभाठा और WRS कॉलोनी में होंगे प्रमुख आयोजन दशहरा पर रावण दहन के प्रमुख आयोजन रावणभाठा और WRS कॉलोनी में होंगे। इसके अलावा चौबे कॉलोनी, राजेंद्र नगर, शंकर नगर और रामकुंड में स्वामी विवेकानंद आश्रम के पास भी रावण दहन किया जाएगा। नगर निगम ने त्योहार के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने और पर्यावरण संबंधी निर्देशों का पालन कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। विसर्जन के 24 घंटे के भीतर हटाना होगा मलबा नगर निगम के निर्देशों के मुताबिक, प्रतिमा विसर्जन से पहले पूजन सामग्री को अलग करके निर्धारित स्थान पर रखना होगा। विसर्जन कुंड में जमा मलबा, बांस-बल्लियां और अन्य सामग्री 24 घंटे के भीतर बाहर निकालनी होगी, ताकि पानी प्रदूषित न हो। इसके साथ ही ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विसर्जन कुंड पर रोशनी, फायर ब्रिगेड और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने दशहरा आयोजन और विसर्जन कुंड की व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों की समिति बनाई है। इसमें अपर आयुक्त विनोद पांडेय, उपायुक्त स्वास्थ्य जसदेव सिंह बाबरा, जोन-2 के कमिश्नर संतोष पांडेय, जोन-5 के कमिश्नर राकेश शर्मा और जोन-6 की कमिश्नर प्रीति सिंह सहित इंजीनियरिंग और जल विभाग के अधिकारी शामिल हैं। समिति की जिम्मेदारी विसर्जन स्थलों पर शामियाना, रोशनी, माइक, फायर ब्रिगेड और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। नगर निगम ने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ सभी जरूरी इंतजाम प्राथमिकता से पूरे करने के निर्देश दिए हैं।
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रायपुर में नौकरी छोड़ने की बात पर कैशियर से मारपीट का आरोप, रेस्टोरेंट मालिक और मैनेजर पर FIR

रायपुर में नौकरी छोड़ने की बात कहने पर रेस्टोरेंट के कैशियर के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। कर्मचारी का आरोप है कि उसने रेस्टोरेंट मालिक से कैश का हिसाब करने को कहा और अगले दिन से ड्यूटी पर नहीं आने की बात कही। इससे नाराज होकर मालिक ने मैनेजर के साथ मिलकर उसकी पिटाई कर दी। मारपीट में कर्मचारी के गाल, गले और पीठ पर चोटें आई हैं। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रात 1:40 बजे कैश के हिसाब को लेकर हुआ विवाद शिकायत के मुताबिक, पीड़ित उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के बारा थाना क्षेत्र के बवंधर गांव का रहने वाला है। वह बीएससी कर चुका है और रायपुर स्थित गुलाटी बाय एमपीएस किचन रेस्टोरेंट में कैशियर के पद पर काम करता है। घटना 18 अक्टूबर की दरम्यानी रात करीब 1:40 बजे की बताई गई है। रेस्टोरेंट बंद होने के दौरान कर्मचारी ने मालिक विशाल गुलाटी से कैश का हिसाब करने को कहा। उसने यह भी बताया कि वह अगले दिन से ड्यूटी पर नहीं आएगा। आरोप है कि इस बात पर मालिक नाराज हो गया और उसने मैनेजर पारस टंडन को बुलाकर कर्मचारी को ऑफिस में ले जाने के लिए कहा। गाली देने से मना करने पर मारपीट का आरोप कर्मचारी के मुताबिक, ऑफिस में मालिक ने बिना हिसाब किए नौकरी छोड़ने की बात को लेकर उसे अश्लील गालियां दीं। जब उसने गाली देने से मना किया, तो आरोप है कि विशाल गुलाटी और मैनेजर पारस टंडन ने उसे जान से मारने की धमकी दी और हाथ-मुक्कों से पीटना शुरू कर दिया। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि मारपीट के दौरान उसके गाल, गले और पीठ पर चोटें आईं। घटना के समय रेस्टोरेंट में काम करने वाले हरिश और बिट्टू भी वहां मौजूद थे। कर्मचारी ने पुलिस से दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने दर्ज की FIR, जांच जारी पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
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अंबिकापुर की सुरबिल दास बनीं मशरूम उत्पादन की नेशनल ट्रेनर, 500 से अधिक लोगों को दे चुकी हैं प्रशिक्षण

अंबिकापुर की सुरबिल दास मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक के ग्राम गोरता की रहने वाली सुरबिल पिछले पांच वर्षों से मशरूम की खेती कर रही हैं। अपनी मेहनत और नवाचार के दम पर वे मशरूम उत्पादन की नेशनल ट्रेनर बन चुकी हैं। इसके साथ ही वे सुभाष महिला स्व-सहायता समूह का भी सक्रिय रूप से संचालन कर रही हैं। सुरबिल की विशेषज्ञता और प्रशिक्षण कौशल को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, अंबिकापुर ने उन्हें 20×28 आकार के दो सेटअप और उत्पादन के लिए जगह उपलब्ध कराई है। वे साल में दो सीजन में मशरूम का उत्पादन करती हैं। पिछले साल उन्होंने 2.5 टन ऑयस्टर मशरूम और 1.50 टन बटन मशरूम का उत्पादन किया था। इस साल भी उन्होंने ऑयस्टर मशरूम की खेती शुरू कर दी है, जबकि बटन मशरूम के लिए कम्पोस्ट तैयार है। मशरूम के कचरे से बनाती हैं जैविक खाद सुरबिल की खेती की सबसे खास बात उनकी शून्य अपशिष्ट तकनीक है। वे मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले अवशेषों को फेंकने के बजाय उनसे जैविक खाद तैयार करती हैं। इस तरह कृषि अपशिष्ट का दोबारा उपयोग होता है और खेती में रासायनिक पदार्थों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। वे जरूरत के अनुसार तैयार जैविक खाद की बिक्री भी करती हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है। इस तकनीक के जरिए वे मशरूम उत्पादन के साथ-साथ खेती के दूसरे कामों में भी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर रही हैं। मशरूम से बड़ी, अचार और पापड़ बनाकर बढ़ा रहीं आमदनी सुरबिल केवल मशरूम उगाने तक सीमित नहीं हैं। वे खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी काम कर रही हैं। मशरूम से बड़ी, अचार और पापड़ जैसे उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचती हैं। इससे मशरूम का बेहतर उपयोग होता है और तैयार उत्पादों के जरिए अतिरिक्त आय का रास्ता खुलता है। उनका प्रयास है कि महिलाएं केवल कच्चे उत्पाद के उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि उससे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करके अपनी कमाई बढ़ा सकें। 500 से अधिक लोगों को दे चुकी हैं प्रशिक्षण सुरबिल दास अब तक 500 से अधिक लोगों को मशरूम उत्पादन की तकनीक सिखा चुकी हैं। वे सरगुजा जिले के 20 से 25 गांवों में जाकर महिलाओं को मशरूम उगाने के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण भी देती हैं। उनका उद्देश्य महिलाओं को ऐसी तकनीक और कौशल से जोड़ना है, जिनकी मदद से वे घर पर ही मशरूम उत्पादन और उससे जुड़े उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उद्यानिकी कॉलेज के विद्यार्थियों को भी दे रहीं मार्गदर्शन सुरबिल की विशेषज्ञता का लाभ अब कृषि और उद्यानिकी के विद्यार्थियों को भी मिल रहा है। वे सिलफिली स्थित महात्मा गांधी उद्यानिकी कॉलेज में मशरूम उत्पादन शुरू कराने और तकनीकी मार्गदर्शन देने का काम कर रही हैं। एक महिला किसान के रूप में सुरबिल दास की यह यात्रा दिखाती है कि मेहनत, नवाचार और प्रशिक्षण के जरिए खेती को आय के बेहतर अवसरों में बदला जा सकता है। साथ ही, उनका काम ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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छत्तीसगढ़ में सरकारी कॉलेजों के युक्तियुक्तकरण की तैयारी, 7 कॉलेजों में जीरो एडमिशन; 23 में 100 से कम छात्र

छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के बाद अब शासकीय कॉलेजों के युक्तियुक्तकरण की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश के 7 सरकारी कॉलेजों में पिछले सत्र में एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया, जबकि 23 कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या 100 तक नहीं पहुंची। इसके अलावा 38 कॉलेज ऐसे हैं, जहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर कुल दर्ज विद्यार्थियों की संख्या 200 से कम है। इन आंकड़ों के बाद उच्च शिक्षा संचालनालय ने सरकारी कॉलेजों की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके लिए सभी संबंधित कॉलेजों से पिछले पांच वर्षों के दाखिले, स्वीकृत सीटें, शिक्षकों के पद, रिक्त पदों और सरकारी बजट का ब्योरा मांगा गया है। कॉलेजों के आसपास स्थित दूसरे महाविद्यालयों की दूरी और स्कूली स्तर पर उपलब्ध विद्यार्थियों की संख्या की जानकारी भी जुटाई जा रही है। चार श्रेणियों में बांटे गए कॉलेज उच्च शिक्षा संचालनालय ने विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर कॉलेजों को चार श्रेणियों में बांटा है। इनमें शून्य छात्र संख्या, 1 से 100, 101 से 200 और 201 से 300 विद्यार्थियों वाले कॉलेज शामिल हैं। कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2021-22 से 2025-26 तक का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा। इसमें बीए, बीकॉम, बीएससी सहित अलग-अलग पाठ्यक्रमों में स्वीकृत सीटों और दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की साल-दर-साल जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों में छात्र संख्या में हुई वृद्धि या कमी का प्रतिशत भी बताना होगा। इससे पता चलेगा कि किन पाठ्यक्रमों में दाखिले बढ़े हैं और किनमें लगातार गिरावट आई है। इस जानकारी के आधार पर कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। आगे चलकर कॉलेजों के विलय या अन्य बदलावों को लेकर फैसला लिया जा सकता है। इन 23 कॉलेजों में 100 से कम छात्रों ने लिया दाखिला शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रदेश के 23 सरकारी कॉलेजों में 100 से कम विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। इनमें शामिल हैं: इन 7 कॉलेजों में पिछले सत्र में नहीं हुआ एक भी दाखिला पिछले शैक्षणिक सत्र में सात सरकारी कॉलेजों में दाखिले की संख्या शून्य दर्ज की गई। इनमें शामिल हैं: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर दर्ज विद्यार्थियों की संख्या शून्य थी। प्रदेश में 343 शासकीय कॉलेज, पांच साल में खुले 64 नए संस्थान छत्तीसगढ़ में फिलहाल उच्च शिक्षा से संबद्ध 343 शासकीय महाविद्यालय हैं। वर्ष 2009-10 में इनकी संख्या 159 थी, जो समय के साथ बढ़ती गई। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 64 नए सरकारी कॉलेज खोले गए। हालांकि, कई कॉलेजों में भवन और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी सामने आता रहा है। कुछ संस्थान खुद के भवन के बिना चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। कई जगह प्रयोगशालाओं और लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल उठते रहे हैं। क्षेत्रीय कार्यालयों से मांगी गई जानकारी उच्च शिक्षा संचालनालय ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर संचालकों को पत्र भेजकर कॉलेजों की विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें विद्यार्थियों की संख्या, स्वीकृत सीटें, शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त पद, बजट और आसपास के अन्य कॉलेजों की स्थिति शामिल है। फिलहाल विभाग आंकड़े जुटाकर कॉलेजों की स्थिति का आकलन कर रहा है। इस प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन संस्थानों में बदलाव या युक्तियुक्तकरण की जरूरत मानी जाती है।
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Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।

eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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