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खंडवा में रिटायर असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला पर घमासान, 61 ट्रांसफर आदेश रद्द, जांच कमेटी गठित

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में जनजातीय कार्य विभाग से रिटायर हुए संतोष शुक्ला अब गंभीर विवादों में घिर गए हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद उनके द्वारा जारी आदेशों को निरस्त कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है। 61 ट्रांसफर आदेश रद्द, जांच शुरू प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के हस्तक्षेप के बाद शुक्ला द्वारा जारी सभी 61 ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। शिकायतों में लेन-देन, अवैध वसूली और नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, शुक्ला ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए अपने फैसलों को नियमों के तहत बताया है। रिटायरमेंट से पहले बनाया “प्लान” सूत्रों के मुताबिक, संतोष शुक्ला ने रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश जारी किए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बाद किसे जिम्मेदारी मिलेगी, इसका भी प्लान तैयार कर लिया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने एक चहेते शिक्षक को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाने के लिए नोटशीट तक बढ़ाई थी। कलेक्टर ने बदला फैसला यह मामला जब कलेक्टर ऋषव गुप्ता के पास पहुंचा, तो उन्होंने सीनियरिटी के आधार पर नीरज पाराशर का नाम आगे बढ़ाया। लेकिन शुक्ला और पाराशर के बीच पहले से विवाद था। शुक्ला नहीं चाहते थे कि पाराशर को चार्ज मिले। इसके बाद मामला मंत्री विजय शाह तक पहुंचा। आखिरकार विवाद बढ़ने पर कलेक्टर ने तीसरे विकल्प के रूप में डिप्टी कलेक्टर बजरंग बहादुर को असिस्टेंट कमिश्नर का प्रभार सौंप दिया। एक शिक्षक पर 4-4 पदों की जिम्मेदारी जिस शिक्षक नारायणसिंह को आगे बढ़ाया गया था, वह पहले से ही तीन स्कूलों के प्राचार्य और बीईओ (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक व्यक्ति एक साथ चार-चार जिम्मेदारियां कैसे निभा सकता है। जांच अधिकारी को ही मिला प्रभार! दिलचस्प बात यह भी है कि जिन्हें असिस्टेंट कमिश्नर का प्रभार दिया गया, वही पहले विभागीय शिकायतों की जांच कमेटी का नेतृत्व कर चुके हैं। उनकी पुरानी जांच रिपोर्ट अभी तक लंबित है, जिससे नए फैसले पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब क्या आगे? पूरा मामला अब जांच के दायरे में है। रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी। 👉 मामले से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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भाजपा का 47वां स्थापना दिवस: 17 जिलों में नए कार्यालयों का भूमिपूजन, गांव-बस्ती अभियान की घोषणा

आज भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) ने अपना 47वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया। इस खास मौके पर मध्यप्रदेश के 17 जिलों में पार्टी कार्यालयों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया। राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्राथमिक और सक्रिय सदस्यों का बड़ा सम्मेलन आयोजित हुआ। यहां से मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल वर्चुअली जुड़कर कार्यक्रम का हिस्सा बने। सीएम का बयान: मजबूत नेतृत्व से हर समस्या का समाधान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो अपने दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब देता है। उन्होंने कहा कि मजबूत और सक्षम नेतृत्व होने पर देश की हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश और पार्टी दोनों मजबूत हुए हैं। सीएम ने भाजपा की तुलना फीनिक्स पक्षी से करते हुए कहा कि पार्टी की विचारधारा अटल और अमर है, जो हर चुनौती के बाद और मजबूत होकर उभरती है। अटल जी के दौर को भी किया याद मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व को याद करते हुए कहा कि गठबंधन की सरकार होने के बावजूद उन्होंने 24 दलों के साथ सफलतापूर्वक शासन चलाया और अपने वादे पूरे किए। 62 जिलों में कार्यालय बनाने का लक्ष्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी की विचारधारा सहभागिता पर आधारित है। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल जी के विचारों को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने बताया कि फिलहाल 17 जिलों में कार्यालय निर्माण शुरू हो रहा है और लक्ष्य है कि अगले स्थापना दिवस से पहले प्रदेश के सभी 62 जिलों में भाजपा के अपने कार्यालय हों। हर कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और पुस्तकालय भी होगा, जहां संगठन और विचारधारा से जुड़ी किताबें उपलब्ध रहेंगी। दिवंगत नेताओं के परिवारों का सम्मान सम्मेलन के दौरान पार्टी के दिवंगत नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजनों को सम्मानित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद मंच से उतरकर पूर्व विधायक स्वर्गीय रमेश शर्मा के परिजनों से मिलने पहुंचे, जिसने कार्यक्रम को भावुक बना दिया। 7 से 12 अप्रैल तक ‘गांव-बस्ती चलो अभियान’ भाजपा 7 से 12 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में ‘गांव-बस्ती चलो अभियान’ चलाएगी। इस अभियान में सांसद, विधायक और सभी बड़े नेता गांव-गांव पहुंचेंगे। पार्टी ने निर्देश दिए हैं कि नेता सिर्फ भाषण न दें, बल्कि जनता के बीच जाकर योजनाओं का वास्तविक प्रभाव समझें और उसे सोशल मीडिया पर साझा करें। 👉 अधिक जानकारी और ताजा अपडेट के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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जबलपुर में डायल-112 की हालत खराब: बच्चों से धक्का लगवाकर स्टार्ट करनी पड़ी पुलिस गाड़ी

मध्य प्रदेश के जबलपुर से पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां डायल-112 की इमरजेंसी वाहन को स्टार्ट करने के लिए बच्चों से धक्का लगवाना पड़ा। धक्का देकर स्टार्ट करनी पड़ी गाड़ी कटंगी थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात डायल-112 (FRV) गाड़ी अचानक बंद हो गई। बैटरी खराब होने की वजह से गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई, जिसके बाद उसे धक्का देकर चालू करना पड़ा। इस घटना का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें कुछ बच्चे पुलिस वाहन को धक्का देते नजर आ रहे हैं। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश पुलिस की डायल-112 गाड़ियों की ऐसी हालत सामने आई हो। इससे पहले सितंबर 2025 में भी जबलपुर में नई गाड़ी को धक्का देने के बाद भी स्टार्ट नहीं किया जा सका था, तब उसे क्रेन से मैकेनिक के पास ले जाना पड़ा था। इमरजेंसी सेवा पर उठे सवाल डायल-112 जैसी इमरजेंसी सेवा का उद्देश्य लोगों को तुरंत मदद पहुंचाना है। लेकिन अगर गाड़ियां ही समय पर स्टार्ट न हों, तो गंभीर स्थिति में लोगों तक मदद कैसे पहुंचेगी, यह बड़ा सवाल बन गया है। सीएम ने दिखाई थी हरी झंडी गौरतलब है कि 14 अगस्त 2025 को डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से डायल-112 सेवा की शुरुआत की थी। इसके तहत पूरे प्रदेश में करीब 1200 गाड़ियां तैनात की गईं। जबलपुर जिले को 47 वाहन दिए गए थे, जिन्हें आधुनिक तकनीक से लैस बताया गया था। आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं गाड़ियां डायल-112 वाहनों में GPS, वायरलेस, डिजिटल नेविगेशन और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं, ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। यह सेवा पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सभी आपात सेवाओं को एक ही नंबर 112 पर उपलब्ध कराती है। अधिकारियों ने कंपनी को दी चेतावनी वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने वाहन उपलब्ध कराने वाली कंपनी से बात कर भविष्य में ऐसी स्थिति न बनने की हिदायत दी है। यह घटना एक बार फिर सिस्टम की हकीकत सामने लाती है, जहां कागजों में आधुनिक सुविधाएं हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और सच्ची खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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सागर में घर में घुसी कोबरा नागिन: सो रही बच्ची के तकिए के पास बैठी, समय रहते टली बड़ी घटना

मध्य प्रदेश के सागर जिले के बड़तूमा गांव में शनिवार सुबह एक डराने वाली घटना सामने आई, जहां एक जहरीली कोबरा नागिन घर के अंदर घुस गई और सो रही बच्ची के बिल्कुल पास पहुंच गई। तकिए के पास बैठी थी नागिन जानकारी के मुताबिक, बड़तूमा निवासी प्रशांत ठाकुर के घर में उनकी छोटी बच्ची सो रही थी। तभी करीब ढाई फीट लंबी कोबरा प्रजाति की नागिन चुपचाप आकर उसके तकिए के पास बैठ गई। जैसे ही परिवार के लोगों की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने आवाज की, नागिन तुरंत भागकर फ्रिज के नीचे छिप गई। घबराए माता-पिता ने बिना देर किए बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। स्नेक कैचर को दी गई सूचना घटना की जानकारी तुरंत स्नेक कैचर बबलू पवार को दी गई। उन्होंने परिवार को सांप पर नजर बनाए रखने को कहा और खुद मौके पर पहुंचे। फ्रिज हटाकर किया गया रेस्क्यू स्नेक कैचर ने बताया कि नागिन फ्रिज के नीचे छिपी हुई थी। काफी सावधानी के साथ फ्रिज को हटाया गया और फिर सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। उन्होंने बताया कि यह बेहद जहरीली कोबरा नागिन थी, जिसकी लंबाई करीब ढाई फीट थी। जंगल में छोड़ा गया सुरक्षित रेस्क्यू के बाद नागिन को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि समय रहते बच्ची को बाहर निकाल लिया गया, वरना कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि घरों में भी सतर्क रहना कितना जरूरी है, खासकर गांव और खुले इलाकों में। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और जागरूक करने वाली खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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उज्जैन सड़क हादसा: मिनी बस-ट्रैक्टर टक्कर में युवक की मौत, गुस्साए ग्रामीणों ने बस में लगाई आग

c के उज्जैन में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। गरोठ रोड पर मिनी बस और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। कैसे हुआ हादसा पुलिस के मुताबिक, दिल्ली से श्रद्धालुओं को लेकर आ रही मिनी बस ने तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रैक्टर खाई में गिरकर पलट गया। इस हादसे में 21 वर्षीय विजय सोलंकी ट्रॉली के नीचे दब गया। वह करीब एक घंटे तक फंसा रहा और समय पर मदद नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। चार लोग घायल, दो की हालत गंभीर हादसे में ट्रैक्टर सवार राजेश शर्मा, बस ड्राइवर शिवकुमार (अमृतसर), और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार (दिल्ली) घायल हो गए। सभी को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां दो लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें ICU में भर्ती किया गया। गुस्साए ग्रामीणों ने किया हंगामा युवक की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आरोप है कि हादसे के बाद क्रेन समय पर नहीं पहुंची, जिससे घायल युवक को निकालने में देरी हुई। इसी लापरवाही से नाराज होकर ग्रामीणों ने बस में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। बस में रखा सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। पुलिस ने संभाला मोर्चा मौके पर तीन थानों की पुलिस पहुंची और हालात को काबू में किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद जाम खुलवाया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि बस में सवार सभी श्रद्धालु पहले ही सुरक्षित उतर चुके थे और उन्हें दूसरे वाहनों से उज्जैन भेज दिया गया। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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खंडवा जनजातीय विभाग ट्रांसफर विवाद: रिटायरमेंट से पहले 61 तबादले, वसूली के आरोपों से मचा बवाल

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जनजातीय कार्य विभाग में रिटायरमेंट से ठीक पहले बड़े पैमाने पर हुए ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रिटायरमेंट से पहले 61 ट्रांसफर आदेश असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला ने 26 से 31 मार्च के बीच 61 ट्रांसफर के आदेश जारी किए। इनमें शिक्षक, हॉस्टल अधीक्षक और भृत्य शामिल हैं। कुछ मामलों में प्रमोशन भी दिए गए, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। बिना मंजूरी के आदेश जारी करने के आरोप आरोप है कि इन तबादलों में न तो प्रभारी मंत्री की मंजूरी ली गई और न ही कलेक्टर को इसकी जानकारी दी गई। खास बात यह है कि संतोष शुक्ला 31 मार्च को रिटायर हो चुके हैं, जिसके बाद अब उनके खिलाफ विभागीय जांच की मांग उठ रही है। वसूली के गंभीर आरोप जय आदिवासी युवा संगठन ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ट्रांसफर और पोस्टिंग के बदले पैसे लिए गए। बताया गया कि हॉस्टल अधीक्षक हेमंत सिन्हा के जरिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से पैसे वसूले गए। कई लोगों ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए रकम ट्रांसफर की। इसके अलावा आरोप है कि हॉस्टल अधीक्षकों से हर महीने 1500 से 2000 रुपए तक की अवैध वसूली की जाती थी, जबकि प्रमोशन के नाम पर 5 से 10 हजार रुपए तक लिए गए। कई स्थानों पर अनियमितताओं का आरोप राजगढ़, पंधाना, हरसूद, खंडवा, मोजवाड़ी, जामन्या, बेदीमाल, खुटला, आसा और नेटीसराय जैसे कई स्थानों पर पोस्टिंग, निर्माण कार्य और वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। रिटायर्ड अधिकारी ने दी सफाई इस मामले में संतोष शुक्ला ने कहा कि उनकी तबीयत खराब थी और रिटायरमेंट वाले दिन वे दफ्तर भी नहीं गए थे। उन्होंने दावा किया कि सभी ट्रांसफर नियमों के अनुसार किए गए हैं। प्रभारी मंत्री का बड़ा बयान खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने साफ कहा कि इन ट्रांसफर में उनकी कोई मंजूरी नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ है, तो सभी ट्रांसफर आदेश निरस्त कराए जाएंगे। पहले भी विवादों में रह चुके हैं अधिकारी संतोष शुक्ला पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन पर पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त कार्रवाई कर चुका है। साथ ही, 2023 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी उन्हें एक मामले में फटकार लगाई थी। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। 👉 ऐसी ही एक्सक्लूसिव और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com Permalink (SEO Friendly):khandwa-tribal-department-transfer-scam-61-posting-controversy
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सीहोर में कांग्रेस का जनआक्रोश प्रदर्शन: किसानों की गेहूं तुलाई और महंगाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अहमदपुर (देवीपुरा) में शुक्रवार को कांग्रेस ने जनआक्रोश प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। किसानों के मुद्दों पर घिरी सरकार जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने कहा कि किसानों की गेहूं तुलाई शुरू न करना सरकार की सबसे बड़ी विफलता है। उन्होंने इसे किसानों के साथ सीधा धोखा बताया और कहा कि इससे किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। महंगाई और जरूरी सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी इस प्रदर्शन में सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि आम जनता से जुड़े कई मुद्दों को उठाया गया। कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई, गैस सिलेंडर की कमी, बिजली दरों में बढ़ोतरी और पेट्रोल-डीजल की समस्या को लेकर सरकार को घेरा। सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप राजीव गुजराती ने आरोप लगाया कि सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार को न किसानों की चिंता है और न ही आम लोगों की परेशानियों की कोई परवाह है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के साथ अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता जल्द ही इसका जवाब देगी। पहले भी हो चुका है प्रदर्शन गौरतलब है कि कांग्रेस इससे पहले भी सीहोर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर चुकी है। उस दौरान भी किसानों और आम जनता की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें deshharpal.com
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सागर रानगिर मंदिर ब्लास्ट: पत्नी के मायके वालों को फंसाने के लिए रची खौफनाक साजिश, स्पीकर बम से 3 घायल

मध्य प्रदेश के सागर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स ने अपनी ही पत्नी के मायके वालों को फंसाने के लिए खौफनाक साजिश रच डाली। यह घटना रानगिर देवी धाम मंदिर की है, जहां आरोपी ने ब्लूटूथ स्पीकर में बम फिट कर मंदिर परिसर में रख दिया। 17 मार्च को जैसे ही स्पीकर चालू हुआ, जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में 11 साल की मासूम बच्ची समेत तीन लोग घायल हो गए, जिनमें बच्ची की हालत गंभीर है और उसका इलाज भोपाल में चल रहा है। कैसे हुआ पूरा हादसा? 16 मार्च को आरोपी मंदिर के पास पहुंचा और प्रसाद की दुकान के बाहर स्पीकर रखकर चला गया। दुकान संचालक राधेश्याम रैकवार को लगा कि कोई गलती से स्पीकर भूल गया है, इसलिए उन्होंने उसे घर के अंदर रख लिया। अगले दिन रात को उनकी नातिन संजना ने जब स्पीकर ऑन किया, तो तेज धमाका हो गया। इस विस्फोट में संजना बुरी तरह घायल हो गई, जबकि राधेश्याम और उनकी पत्नी भी जख्मी हो गए। पहले मोबाइल ब्लास्ट बताया गया, फिर खुली सच्चाई शुरुआत में इस घटना को मोबाइल बैटरी फटने का मामला बताया गया, लेकिन डॉक्टरों ने इतनी गंभीर चोटों पर सवाल उठाए। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज की। मौके से वायर और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिलने पर फोरेंसिक जांच कराई गई, जिसमें बारूद से ब्लास्ट होने की पुष्टि हुई। एक मैसेज से खुला पूरा राज पुलिस को जांच के दौरान एक बड़ा सुराग मिला। घटना से पहले मंदिर के पुजारी को एक संदिग्ध मैसेज भेजा गया था, जिसमें कुछ लोगों के नाम लेकर बम ब्लास्ट की साजिश बताई गई थी। इसी मैसेज के जरिए पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। पत्नी के मायके वालों को फंसाने की थी साजिश जांच में सामने आया कि आरोपी गोलू उर्फ इमारत पटेल ने अपनी पत्नी के मायके वालों से बदला लेने के लिए यह प्लान बनाया था। पत्नी उससे नाराज होकर मायके चली गई थी और वापस नहीं आ रही थी। गुस्से में आकर आरोपी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर स्पीकर बम तैयार किया और उसे मंदिर में रख दिया, ताकि यह आतंकी घटना लगे और पत्नी के परिवार वाले इस केस में फंस जाएं। पहले से शादीशुदा थी पत्नी, बढ़ा विवाद आरोपी ने 2025 में अपने से 11 साल बड़ी महिला से शादी की थी। बाद में उसे पता चला कि महिला पहले से शादीशुदा है और उसके चार बच्चे भी हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और महिला फरवरी 2026 में मायके लौट गई। यूट्यूब से सीखा बम बनाना पुलिस के अनुसार आरोपी पहले माइंस में काम कर चुका है, इसलिए उसे बारूद की जानकारी थी। उसने डेटोनेटर खरीदा और यूट्यूब की मदद से स्पीकर बम तैयार किया। फिलहाल पुलिस ने आरोपी और उसके साथी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है, वहीं एक मासूम बच्ची की जिंदगी पर इसका गहरा असर पड़ा है। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें deshharpal.com
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ईरान-इजराइल जंग का असर MP में: खाने-पीने की चीजें महंगी, आम आदमी की जेब पर डबल मार

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के शहरों में साफ दिखने लगा है। गैस की कमी और बढ़ती लागत के कारण खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। इंदौर में स्ट्रीट फूड महंगा, ग्राहक कम इंदौर के मशहूर 56 दुकान और सराफा बाजार में खाने-पीने के दाम ₹1 से ₹10 तक बढ़ गए हैं।पोहा, चाय, समोसा, कचौरी से लेकर चाइनीज फूड तक सब महंगा हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि गैस, तेल और कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण रेट बढ़ाना मजबूरी है।ग्राहक सावन इंगले बताते हैं कि पहले दो लोगों का खाना ₹400-₹500 में हो जाता था, अब वही ₹700-₹800 तक पहुंच गया है। इसका असर ग्राहकों की संख्या पर भी पड़ा है—लोग अब बाहर कम खाने लगे हैं। भोपाल में भी खाने का खर्च बढ़ा भोपाल में रोजमर्रा का खाना महंगा हो गया है। जबलपुर में नाश्ता महंगा जबलपुर में कमर्शियल गैस की कमी और महंगे तेल की वजह से नाश्ते के दाम बढ़ गए हैं।समोसा ₹20 हो चुका है और जल्द ₹25 होने की संभावना है। जलेबी ₹240 से बढ़कर ₹300 प्रति किलो हो गई है। ग्वालियर में किराना और ड्राई फ्रूट्स महंगे ग्वालियर में एलपीजी की कमी के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। व्यापारियों का कहना है कि अगर युद्ध जल्द नहीं रुका, तो महंगाई और बढ़ सकती है। रीवा में पानी तक महंगा रीवा में गर्मी के साथ महंगाई ने भी लोगों को परेशान कर दिया है। 20 लीटर पानी का जार जो पहले ₹25-₹30 में मिलता था, अब ₹40 में मिल रहा है। गैस की कमी बनी बड़ी वजह दुकानदारों और होटल संचालकों के अनुसार, एलपीजी सिलेंडर की कमी और महंगे ईंधन के कारण लागत 20-25% तक बढ़ गई है। कई जगह कम प्रॉफिट में काम करना पड़ रहा है, जबकि नई बुकिंग बढ़े हुए रेट पर ही हो रही है। यह स्थिति साफ बताती है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब सीधे आम लोगों की थाली तक पहुंच गया है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। 👉 ऐसी ही जमीनी और असरदार खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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खंडवा में बड़ा हादसा: जर्जर रेलवे भवन गिरा, कर्मचारी की मौत, एक घायल

मध्यप्रदेश के खंडवा में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। कोतवाली थाना क्षेत्र के तीन पुलिया इलाके में पुराने रेलवे भवन का हिस्सा अचानक गिर पड़ा, जिसमें एक कर्मचारी की जान चली गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया। जर्जर इमारत बनी हादसे की वजह जानकारी के मुताबिक, मीटर गेज का यह पुराना रेलवे कार्यालय लंबे समय से खंडहर बना हुआ था। यहां से लोहा (स्क्रैप) निकालने का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक इमारत का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया और वहां काम कर रहे कर्मचारी मलबे में दब गए। मौके पर ही मौत, साथी घायल हादसे में रेलवे के मास्टर क्राफ्ट्समैन शशिकांत की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके सहायक वीरेंद्र के हाथ में गंभीर चोट आई है, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेसीबी से चला रेस्क्यू ऑपरेशन घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। जेसीबी मशीन की मदद से मलबा हटाकर कर्मचारियों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक शशिकांत की मौत हो चुकी थी। जांच में जुटी पुलिस हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि जर्जर भवन में काम के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि खंडहर और खतरनाक इमारतों में काम करते समय सुरक्षा को कितना नजरअंदाज किया जाता है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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