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शहर में फर्जी सिम कार्ड का बड़ा नेटवर्क उजागर, सैकड़ों सिम एक ही फोटो से एक्टिव

शहर में फर्जी सिम कार्ड बनाने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में एक पॉइंट ऑफ सेल (POS) शॉप संचालक ने हैरान करने वाला खेल खेला—एक ही व्यक्ति के आधार कार्ड और फोटो का इस्तेमाल कर सैकड़ों लोगों के नाम पर सिम कार्ड जारी कर दिए गए। इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ, जब जिस व्यक्ति की फोटो बार-बार सिम फॉर्म में लगाई जा रही थी, वह खुद पुलिस के पास पहुंच गया। इसके बाद जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। पुलिस को शक है कि इन फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड में किया गया होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के खुलने से कई पुराने साइबर अपराधों की कड़ियां भी जुड़ सकती हैं। एएसपी विदिता डागर के अनुसार, जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी उमेश कुशवाह (निवासी गिरवाई, मूल रूप से भिंड) ने अपने साथी आशीष नागर को लालच देकर इस काम में शामिल किया था। आशीष का काम ग्राहकों की जगह अपनी फोटो लगाकर सिम एक्टिवेट करना था। इसके बदले उसे हर सिम पर करीब 500 रुपए मिलते थे, जबकि आरोपी एक सिम के लिए 1000 से 1500 रुपए तक वसूलता था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही मुख्य आरोपी ने इंस्टाग्राम मैसेंजर के जरिए अपने साथी को अंडरग्राउंड होने की सलाह दी थी। इसी तरीके से एक ही फोटो और आधार का इस्तेमाल कर सैकड़ों फर्जी सिम एक्टिव कर दिए गए। ऑपरेशन ‘FACE’ के तहत पहली बड़ी कार्रवाई भोपाल पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘FACE’ (Facial Authentication Compliance Enforcement) के तहत ग्वालियर में यह पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। झांसी रोड थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। एक ही इलाके के नाम पर जारी किए गए सिम अब तक पुलिस ने 7 फर्जी सिम बरामद किए हैं। ये सभी सिम गुढ़ा-गुढ़ी का नाका क्षेत्र की प्रीतमपुर कॉलोनी और कुम्हारों के मोहल्ले के लोगों के नाम पर जारी किए गए थे, जबकि उनमें एक ही व्यक्ति की फोटो लगी हुई थी। आगे और बड़े खुलासे संभव पुलिस का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, फर्जी सिम नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही कई ऑनलाइन फ्रॉड मामलों में इन सिम कार्ड्स के इस्तेमाल की बात भी सामने आ सकती है। 👉 ऐसे ही अपडेट्स और खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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LPG

LPG Cylinder चोरी से बढ़ी चिंता गैस की किल्लत के बीच सिलेंडर चोरी बढ़ी, मुंबई से भोपाल तक हड़कंप

गैस की बढ़ती मांग के बीच नई चिंता देश के कई हिस्सों में रसोई गैस को लेकर बढ़ती मांग और सप्लाई की चुनौतियों के बीच अब LPG सिलेंडर चोरी के मामले भी तेजी से सामने आने लगे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के मुंबई में हुई एक बड़ी वारदात ने इस समस्या को फिर चर्चा में ला दिया है। यहां चोरों ने एक खड़े टेम्पो का लॉक तोड़कर उसमें रखे 27 LPG सिलेंडर चुरा लिए। मुंबई में टेम्पो का लॉक तोड़कर 27 सिलेंडर चोरी घटना मुंबई के कांदिवली इलाके के चारकोप क्षेत्र की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, गैस सिलेंडर से भरा टेम्पो डिलीवरी के लिए खड़ा किया गया था। देर रात कुछ अज्ञात लोगों ने वाहन का ताला तोड़ा और एक-एक कर 27 सिलेंडर लेकर फरार हो गए। सुबह जब चालक मौके पर पहुंचा तो उसे चोरी का पता चला, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है। देश के कई शहरों से सामने आ रहे ऐसे मामले मुंबई की इस घटना ने गैस एजेंसियों और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, यह कोई अकेला मामला नहीं है। देश के कई शहरों से हाल के दिनों में गैस सिलेंडर चोरी और कालाबाज़ारी की खबरें सामने आई हैं। दिल्ली में पुलिस ने हाल ही में अवैध रूप से जमा किए गए LPG सिलेंडरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में सिलेंडर बरामद किए और तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इसी तरह गुजरात के अहमदाबाद में भी एक इलाके से नौ सिलेंडर चोरी होने की शिकायत दर्ज की गई है। भोपाल में भी CCTV में कैद हुई सिलेंडर चोरी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी ऐसी ही घटना सामने आई, जहां एक घर के बाहर रखा गैस सिलेंडर चोर उठा ले गए। यह पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। क्यों बढ़ रही हैं सिलेंडर चोरी की घटनाएं विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी जरूरी चीज की मांग बढ़ जाती है और सप्लाई प्रभावित होती है, तो अवैध गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। LPG सिलेंडर भी अब उसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। कुछ लोग चोरी किए गए सिलेंडर को ब्लैक मार्केट में ज्यादा कीमत पर बेचने की कोशिश करते हैं। प्रशासन और गैस एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत इस बीच प्रशासन और गैस एजेंसियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सिलेंडर की सुरक्षित ढुलाई, स्टोरेज और निगरानी को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं ताकि ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। आम लोगों को भी रहना होगा सतर्क आम लोगों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है। अगर कहीं संदिग्ध तरीके से सिलेंडर की खरीद-फरोख्त या असामान्य गतिविधि दिखाई दे, तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसी या पुलिस को देना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ये घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि रसोई गैस जैसी जरूरी सुविधा की सुरक्षा और आपूर्ति दोनों पर एक साथ ध्यान देने की जरूरत है, ताकि लोगों को बिना परेशानी के LPG सिलेंडर मिल सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Mohan Yadav

CM Mohan Yadav का जन्मदिन Special हाई‑टेक Auditorium का भूमि पूजन

आज 25 मार्च 2026 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने अपने जन्मदिन के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास (CM House) परिसर में हाई‑टेक ऑडिटोरियम (High‑Tech Auditorium) का भूमि पूजन किया। यह ऑडिटोरियम लगभग 1800 लोगों की क्षमता वाला होगा और इसकी लागत लगभग 45 करोड़ रुपये है। यह प्रोजेक्ट राज्य में सरकारी कार्यक्रमों, सम्मेलनों और बड़े आयोजन‑सम्मेलनों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मंच प्रदान करेगा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस ऑडिटोरियम का निर्माण 2 से 4 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे आधुनिक तकनीक और सुविधाओं के साथ बनाया जाएगा ताकि राज्य के बड़े कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में इसका प्रभावशाली उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। जन्मदिन पर विकास और conservation की पहल CM Mohan Yadav ने अपने जन्मदिन पर सिर्फ ऑडिटोरियम का भूमि पूजन नहीं किया, बल्कि सागर जिले के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन्होंने कछुओं को संरक्षण केंद्र से छोड़ा और चीता बाड़े के लिए विशेष पूजा‑अर्चना में हिस्सा लिया। इसके अलावा, सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना के तहत कृषकों को लाभ पहुँचाने वाले कार्यक्रमों का भी शुभारंभ किया गया। CM Mohan Yadav का विकास दृष्टिकोण CM Mohan Yadav मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हैं। उनके नेतृत्व में प्रदेश में विकास, निवेश, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह हाई‑टेक ऑडिटोरियम न केवल सरकारी कार्यक्रमों के लिए मंच उपलब्ध कराएगा, बल्कि जनता के लिए सुविधाजनक और पेशेवर अनुभव भी सुनिश्चित करेगा। जनता और शुभकामनाएँ इस खास मौके पर प्रदेशभर से मुख्यमंत्री को शुभकामनाएँ और बधाइयाँ मिल रही हैं। यह परियोजना न केवल एक नई इमारत का प्रतीक है, बल्कि जनता के प्रति सीएम की प्रतिबद्धता और विकास‑उन्मुख सोच को भी दर्शाती है। हाई‑टेक ऑडिटोरियम से भविष्य में राज्य में आयोजित कार्यक्रमों का अनुभव और भी यादगार और पेशेवर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सोम डिस्टिलरीज के 8 लाइसेंस सस्पेंड करने की कार्रवाई सही

मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में Som Distilleries से जुड़ी याचिका खारिज कर दी और एक्साइज कमिश्नर द्वारा 8 लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई को सही ठहराया। जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने अपने 32 पन्नों के फैसले में साफ कहा कि शराब का व्यापार कोई मौलिक अधिकार नहीं है और नियमों का उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई पूरी तरह वैध है। क्या है पूरा मामला? एक्साइज विभाग ने 4 फरवरी 2026 को आदेश जारी करते हुए Som Distilleries Pvt. Ltd. और Som Distilleries and Breweries Pvt. Ltd. के कुल 8 लाइसेंस सस्पेंड कर दिए थे। यह कार्रवाई 26 फरवरी 2024 को जारी शो-कॉज नोटिस के आधार पर हुई, जिसमें फर्जी परमिट के जरिए शराब परिवहन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। कंपनियों की दलील क्या थी? कंपनियों ने कोर्ट में कहा कि यह नोटिस पुराने वित्तीय वर्ष (2023-24) से जुड़ा था और 31 मार्च 2024 को उनके लाइसेंस खत्म हो चुके थे। नए लाइसेंस मिलने के बाद पुराने नोटिस के आधार पर कार्रवाई को उन्होंने गलत बताया। वहीं राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि एक्साइज एक्ट के तहत विभाग को कार्रवाई का पूरा अधिकार है और नियमों का पालन हर हाल में जरूरी है। कोर्ट ने क्या कहा? हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि: धोखाधड़ी पर सख्त रुख कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर धोखाधड़ी साबित होती है तो बाकी दलीलें कमजोर पड़ जाती हैं। डिस्टिलिंग, ब्रूइंग और बॉटलिंग जैसी गतिविधियों में गंभीर गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। कोर्ट के मुताबिक यह फैसला “प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट” पर खरा उतरता है, यानी की गई कार्रवाई आरोपों के हिसाब से उचित है। 👉 अधिक अपडेट्स और ऐसी ही खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भोपाल: मुस्लिम समाज ने उठाई मांग—गाय को मिले राष्ट्रीय पशु का दर्जा

भोपाल के पुराने शहर स्थित इतवारा चौराहे पर मंगलवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के बैनर तले मुस्लिम समाज के लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और “गौ माता का सम्मान करो” जैसे नारे भी लगाए गए। प्रदर्शन के दौरान कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि इस्लाम धर्म में गाय का मांस खाना और उसका वध करना हराम माना गया है। उन्होंने बताया कि उनके मजहब में गाय के दूध और घी को उपयोगी बताया गया है, जिसका लोग नियमित इस्तेमाल भी करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश में गाय और बछड़ों को लेकर जो तनाव का माहौल बन रहा है, वह चिंता का विषय है और इस मुद्दे को गलत दिशा में ले जाया जा रहा है। शमशुल हसन ने सवाल उठाया कि जब समाज गाय को माता का दर्जा देता है, तो उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने में देरी क्यों हो रही है। प्रदर्शन के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री से अपील की कि जल्द से जल्द इस मांग पर निर्णय लिया जाए। उनका मानना है कि ऐसा होने से गायों के वध से जुड़े विवाद और अफवाहों पर रोक लगेगी और असली दोषियों की पहचान करना भी आसान हो जाएगा। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि यह मांग खुद मुस्लिम समाज की ओर से सामने आई, जिससे सामाजिक सौहार्द और आपसी समझ का संदेश देने की कोशिश भी दिखी। 👉 अधिक अपडेट्स और ऐसी ही खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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RGPV

RGPV कैंटीन मामला Students बोले खाना में छिपकली, Staff ने कहा शिमला मिर्च

RGPV (राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) के कैंटीन में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने छात्रों और स्टाफ के बीच हलचल मचा दी है। कुछ छात्रों ने खाने में छिपकली (Lizard) पाए जाने का दावा किया, लेकिन कैंटीन स्टाफ ने इसे उठाकर खा लिया और कहा कि यह शिमला मिर्च (Capsicum) है। घटना 18 मार्च को हुई, जब छात्रों ने खाने में संदिग्ध चीज़ देखी और तुरंत कैंटीन स्टाफ को बुलाया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि स्टाफ उस वस्तु को खाते हुए कहता है, “यह Lizard नहीं, शिमला मिर्च है।” वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और छात्रों में नाराजगी फैल गई। छात्रों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया हलचल छात्रों का कहना है कि कैंटीन की स्वच्छता और खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया और छात्रों ने उच्च स्तर पर जांच की मांग की। प्रशासन और कैंटीन स्टाफ का बयान कैंटीन संचालक का दावा है कि खाना पूरी तरह सुरक्षित था और यह केवल शिमला मिर्च का टुकड़ा था। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत जांच समिति गठित कर दी है ताकि सच सामने आए। स्वच्छता और सुरक्षा पर बहस इस घटना ने कैंटीन में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों पर बहस को और तेज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सागर में चलती कार बनी आग का गोला: डॉक्टर की पत्नी जिंदा जली, मामला संदिग्ध

मध्य प्रदेश के सागर से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। शनिवार तड़के करीब 4 बजे गढ़ाकोटा रोड पर चलती कार में अचानक आग लग गई। इस हादसे में कार में सवार डॉक्टर की पत्नी की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि डॉक्टर समय रहते बाहर निकलकर बच गए। चलती कार में अचानक लगी आग जानकारी के मुताबिक, कार में आग सामने वाले हिस्से से शुरू हुई थी। उस वक्त महिला पीछे की सीट पर बैठी थीं और उनकी हालत भी ठीक नहीं बताई जा रही थी। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया और महिला बुरी तरह झुलस गईं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इलाज के लिए ले जा रहे थे सागर बताया जा रहा है कि गढ़ाकोटा निवासी डॉ. नीलेश कुर्मी (42) अपनी पत्नी सीमा कुर्मी (38) को इलाज के लिए सागर ला रहे थे। तभी रास्ते में चनाटोरिया के पास अचानक कार में आग भड़क उठी। कार में CNG किट लगी होने की बात भी सामने आई है। फिलहाल फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है। परिजनों ने जताई साजिश की आशंका मामले ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब मृतका के भाई लोकेश पटेल ने घटना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर यह सिर्फ हादसा होता, तो मौके पर उसके साफ निशान मिलते। लोकेश ने आरोप लगाया कि उनकी बहन और जीजा के बीच अक्सर विवाद होता था। उन्होंने आशंका जताई कि उनकी बहन को पहले बेहोश किया गया या उनकी हत्या की गई और फिर कार में लाया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस बोली – हर एंगल से जांच जारी सानौधा थाना प्रभारी भरत सिंह ठाकुर के मुताबिक, कार में आग लगने से महिला की मौत हुई है। एफएसएल टीम मौके से सबूत जुटा रही है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। फिलहाल यह मामला हादसा है या साजिश, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो पाएगा 👉 इस खबर से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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खंडवा कांग्रेस में बवाल: नियुक्तियों पर उठे सवाल, इस्तीफा और विरोध शुरू

मध्य प्रदेश के खंडवा में कांग्रेस संगठन के भीतर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में ब्लॉक अध्यक्षों और किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष की नियुक्तियों के बाद पार्टी के अंदर ही विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस के कई नेता अब खुलकर सोशल मीडिया पर संगठन के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। आरोप है कि बाहरी लोगों, बिना दावेदारी करने वालों और चुनाव के दौरान कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं को पद दे दिए गए। इंदौर के नेता बने खंडवा के जिलाध्यक्ष विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष की लिस्ट सामने आई। इसमें इंदौर निवासी सोनू गुर्जर पहलवान को खंडवा का जिलाध्यक्ष बना दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि लिस्ट में नाम तो सोनू गुर्जर का था, लेकिन मोबाइल नंबर संजय पाटीदार का लिखा हुआ था, जिन्होंने इस पद के लिए दावेदारी की थी। बताया जा रहा है कि सोनू गुर्जर को रॉबर्ट वाड्रा का करीबी माना जाता है, जबकि संजय पाटीदार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नजदीकी बताए जाते हैं। इस पर कांग्रेस नेता नारायण सिंह तोमर ने तंज कसते हुए कहा— “गुर्जर को बधाई देने फोन लगाया तो पाटीदार को लग गया… क्या खंडवा में कोई किसान नहीं मिला?” भाजपा से जुड़े लोगों को पद? विवाद सिर्फ यहीं नहीं रुका। छैगांवमाखन ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में जयेश पटेल की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी छाया मोरे का समर्थन किया था। स्थानीय नेताओं का कहना है कि वर्तमान में भी जयेश पटेल भाजपा विधायक के करीबी हैं, ऐसे में उनकी नियुक्ति से कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। इस्तीफा और बढ़ता विरोध इस पूरे विवाद के बीच खालवा ब्लॉक के कांग्रेस नेता वीरेंद्र प्रजापति ने नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, सिंगोट उपब्लॉक में केदार पाटीदार को अध्यक्ष बनाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस पद के लिए न तो आवेदन किया था और न ही कोई बायोडाटा दिया था। संगठन के खिलाफ खुलकर आवाज अब कांग्रेस प्रत्याशी रही रूपाली बारे के समर्थक भी इन नियुक्तियों को लेकर विरोध की तैयारी में हैं और जल्द ही संगठन प्रभारी से शिकायत करने वाले हैं। खंडवा कांग्रेस में उठे इस विवाद ने साफ कर दिया है कि संगठन के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। 👉 इस खबर से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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इंदौर EV हादसा: चार्जिंग के दौरान ब्लास्ट का शक, 8 लोगों की दर्दनाक मौत

इंदौर में हुए दिल दहला देने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) हादसे को लेकर अब बिजली कंपनी की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, इस रिपोर्ट को अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन जो जानकारी सामने आई है, वह काफी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, आग की शुरुआत घर में लगे EV चार्जिंग पॉइंट से हुई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि घर के लिए 15 किलोवॉट का बिजली लोड स्वीकृत था, लेकिन आमतौर पर 2 से 9 किलोवॉट तक ही बिजली का इस्तेमाल हो रहा था। ऐसे में ओवरलोड की संभावना कम बताई जा रही है। चार्जिंग के दौरान हुआ धमाका बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि हादसे के समय कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। स्मार्ट मीटर के डिजिटल डेटा से यह पुष्टि हुई है कि देर रात EV चार्जिंग चल रही थी। कंपनी ने पिछले 3 महीनों का डेटा खंगालकर यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चार्जिंग के दौरान पहले ऑटो कट-ऑफ हुआ, लेकिन करीब आधे घंटे बाद दोबारा चार्जिंग शुरू हुई। इसके बाद कार की बैटरी में जोरदार ब्लास्ट हो गया, जो आग का कारण बना। रोज रात होती थी चार्जिंग जांच में यह भी सामने आया कि कार रोज रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक चार्ज होती थी। हादसे वाली रात भी यही क्रम था। जैसे ही चार्जिंग शुरू होती, घर का कुल बिजली लोड 2 किलोवॉट से बढ़कर करीब 9 किलोवॉट तक पहुंच जाता था। रहवासियों ने क्या बताया पास में रहने वाले लोगों के मुताबिक, रात करीब 3 से 3:15 बजे के बीच कार से धुआं उठता देखा गया था। लोगों ने तुरंत आसपास के लोगों को जगाया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। लेकिन दमकल की गाड़ियां करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचीं। 8 लोगों की गई जान यह हादसा बेहद दर्दनाक साबित हुआ। आग ने देखते ही देखते तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू समेत कुल 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि आग ने घर के अंदर रखे गैस सिलेंडरों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे एक के बाद एक धमाके हुए। घर में लगे डिजिटल लॉक भी समय पर नहीं खुल सके, जिसके कारण लोग बाहर नहीं निकल पाए। जिम्मेदारी से बचने की कोशिश? सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में जिम्मेदारी तय होने से बचने के लिए कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी अपने कर्मचारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी। 👉 इस खबर से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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Indore

Indore EV Fire Case इंदौर में EV Charging से लगी आग, Digital Lock Fail होने से 8 की मौत

इंदौर (Indore) से आई यह खबर दिल दहला देने वाली है। एक साधारण सी लगने वाली रात अचानक चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गई, जब EV (Electric Vehicle) चार्जिंग के दौरान लगी आग ने 8 लोगों की जान ले ली। इस हादसे में 4 लोग घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। एक छोटी सी चिंगारी, बड़ा हादसा प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बिल्डिंग के अंदर इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे परिसर में फैल गया। लोगों को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। कई परिवार अपने घरों में ही फंसे रह गए—कुछ सो रहे थे, कुछ ने दरवाजे खोलने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। Digital Lock बना जानलेवा जाल इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू था डिजिटल लॉक सिस्टम का फेल होना। आग लगते ही बिजली सप्लाई बंद हो गई, जिससे दरवाजों के डिजिटल लॉक काम करना बंद कर गए। लोग अंदर ही कैद हो गए। सोचिए, जब बाहर आग हो और अंदर से दरवाजा ही न खुले—यह स्थिति कितनी भयावह रही होगी। अपनों को खोने का दर्द इस हादसे में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह सिर्फ एक खबर नहीं, जिंदगी भर का जख्म है। पड़ोसियों के अनुसार, कई लोग मदद के लिए पुकारते रहे, लेकिन धुएं और आग ने किसी को मौका नहीं दिया। राहत और जांच जारी दमकल विभाग और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता चल सके कि: क्या हम सुरक्षित हैं? यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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