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Bhopal

Exam Stress का असर Bhopal Carmel School में छात्रा ने लगाई Jump, अस्पताल में भर्ती

भोपाल में बड़ा हादसा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) के मशहूर Carmel Convent School से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कक्षा 10वीं की एक छात्रा ने अचानक स्कूल की बिल्डिंग से छलांग लगा दी। घटना स्कूल के CCTV कैमरे में कैद हो गई और अब सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। छात्रा की हालत गंभीर नहीं छात्रा के छलांग लगाने के बाद स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उसके हाथ और पैर में फ्रैक्चर हुआ है, लेकिन खतरे से बाहर है। छात्रा फिलहाल इलाज के अधीन है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। CCTV फुटेज में पूरा सच CCTV फुटेज के मुताबिक, छात्रा अचानक क्लास से बाहर निकली और सीधे ऊपरी मंजिल से कूद गई। यह सब कुछ चंद सेकंड में हुआ जिससे वहां मौजूद लोग कुछ कर ही नहीं पाए। क्यों लगाई छात्रा ने छलांग? प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि छात्रा Exam Pressure और Stress के चलते मानसिक रूप से परेशान थी। पुलिस और स्कूल प्रबंधन इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि असली वजह सामने आ सके। स्कूल और प्रशासन की प्रतिक्रिया स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि छात्रा को तुरंत मेडिकल मदद दी गई और उसकी हर ज़रूरत का ख्याल रखा जा रहा है। वहीं, पुलिस ने कहा कि CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और छात्रा व उसके परिवार से पूछताछ के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal Aishbagh ROB Update CM Mohan Yadav बोले – सुधार के बाद ही होगा Inauguration

Bhopal शहर में पहली बार बने Aishbagh Railway Over Bridge (ROB) को लेकर जमकर चर्चा हो रही है। लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल की लंबाई 648 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर है। इसे पुरानी रेलवे क्रॉसिंग से राहत दिलाने के लिए बनाया गया, लेकिन इसका 90 डिग्री का तीखा मोड़ अब विवाद का कारण बन गया है। क्यों है Aishbagh ROB Controversial? इस पुल पर वाहन चालकों को अचानक तीखा मोड़ लेना पड़ता है, जिससे road accidents का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग इसे “Engineering Marvel” और “Design Disaster” दोनों तरह से टैग कर रहे हैं। Railway की Warning अनसुनी! अप्रैल 2024 में ही Indian Railways ने PWD (लोक निर्माण विभाग) को चेतावनी दी थी कि यह डिज़ाइन “कार्यक्षम नहीं” है और इससे इंजीनियरों की छवि खराब हो सकती है। इसके बावजूद ROB को इसी स्ट्रक्चर में बना दिया गया। सरकार और PWD की सफाई विवाद के बाद PWD ने कहा कि – CM Mohan Yadav का बयान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साफ कहा कि जब तक तकनीकी खामी दूर नहीं होगी, तब तक Aishbagh ROB का Inauguration नहीं किया जाएगा। साथ ही, दोषी इंजीनियरों और अधिकारियों पर कार्रवाई के भी संकेत दिए। Public Reaction हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal Metro

Bhopal Metro Launch 2025 अक्टूबर से शुरू होगी Subhash Nagar-AIIMS Metro सुविधा

भोपाल के नागरिकों के लिए खुशखबरी है। Bhopal Metro (Bhoj Metro) की सेवाएँ अब अक्टूबर 2025 से शुरू होने की संभावना है। पहले चरण में सुबाश नगर से AIIMS तक की लाइन चालू होगी, जो लगभग 7.5 किलोमीटर लंबी है। CMRS (Commissioner of Metro Rail Safety) द्वारा सुरक्षा निरीक्षण पूरा होने के बाद ही यह सेवा जनता के लिए शुरू होगी। प्राथमिक कॉरिडोर और टाइमलाइन Phase 1 और Blue Line अपडेट भोपाल शहर में इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधा Bhopal Metro न केवल शहर के यातायात को तेज करेगी बल्कि शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं में भी सुधार लाएगी। मेट्रो सेवाओं के साथ सड़क, जल आपूर्ति और अन्य शहरी परियोजनाएँ भी प्रगति पर हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vedic Clock

Bhopal में लगी Vikramaditya Vedic Clock वैदिक Time System और Modern Technology का संगम

Bhopal में सोमवार (1 सितंबर 2025) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने नए आवास के प्रवेश द्वार पर लगी अनोखी Vikramaditya Vedic Clock (विक्रमादित्य वैदिक घड़ी) का शुभारंभ किया। इस खास मौके पर उन्होंने Vedic Clock App भी लॉन्च किया, जिसमें पंचांग और समय से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। क्या है Vikramaditya Vedic Clock? Vedic Clock App की खासियत मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया। इसमें यूज़र्स को मिलेंगे: युवाओं का “India’s Time – Earth’s Time” मार्च लोकार्पण कार्यक्रम से पहले युवाओं ने “India’s Time – Earth’s Time” थीम पर मार्च निकाला। यह यात्रा शौर्य स्मारक से सीएम हाउस तक पहुंची, जो परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक बनी। किसने बनाई यह घड़ी? यह घड़ी Aarohan Institute, Lucknow के इंजीनियर अरोहन श्रीवास्तव और उनकी टीम ने तैयार की है। इसमें Dongla Observatory की गणनाओं और Maharaja Vikramaditya Research Institute का सहयोग लिया गया। पहले Ujjain में भी लगी थी Vedic Clock याद दिला दें कि 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन के Jantar Mantar पर पहली वैदिक घड़ी का शुभारंभ किया था। भोपाल सीएम हाउस पर लगी घड़ी उसी परियोजना का दूसरा चरण है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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OBC

Madhya Pradesh OBC आरक्षण 27% को लेकर CM Mohan Yadav का बड़ा कदम

मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहा OBC Reservation (ओबीसी आरक्षण) विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने गुरुवार (28 अगस्त 2025) को सीएम हाउस में सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें बीजेपी, कांग्रेस, आप, बसपा, सपा, CPI और अन्य दलों के नेता शामिल हुए। 27% OBC Quota पर सर्वसम्मति बैठक में सभी दलों ने यह ठोस प्रस्ताव पारित किया कि ओबीसी समाज को पूरा 27% आरक्षण मिलना चाहिए। फिलहाल प्रदेश में केवल 14% आरक्षण लागू है, जबकि 2019 में कमलनाथ सरकार ने 27% कोटा तय किया था, लेकिन वह अदालत में अटका रहा। सीएम मोहन यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट 22 सितंबर 2025 से इस मामले पर रोज़ाना सुनवाई (Daily Hearing) करेगा। इसलिए सभी राजनीतिक दलों और उनके वकीलों को मिलकर एक मजबूत कानूनी रणनीति बनानी होगी ताकि अदालत में सरकार का पक्ष मज़बूत रहे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती जून 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि अब तक 27% आरक्षण लागू क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने साफ कर दिया था कि इसके रास्ते में कोई कानूनी रुकावट नहीं है। इसी दबाव के चलते अब सरकार और विपक्ष एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। सरकार की तैयारी Political Significance (राजनीतिक महत्व) यह सर्वदलीय सहमति मध्यप्रदेश की राजनीति में Rare Unity (दुर्लभ एकता) का उदाहरण है। जहां आमतौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहते हैं, वहीं इस बार सामाजिक न्याय और OBC अधिकारों के मुद्दे पर सब एक मंच पर आए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हर काल और हर युग में रही है उज्जैन की गौरव गाथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में 79.27 करोड़ के विकास कार्यो का किया भूमि-पूजन25 करोड़ रूपये से अधिक की लागत से रीगल टॉकीज का होगा उन्नयन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की सात पवित्र नगरियों में अवंतिका (उज्जैन) भी शामिल है। यहां राजा विक्रमादित्य, महाकवि कालिदास, सम्राट अशोक, चंद्र प्रद्योत के नाम अजर-अमर हो चुके हैं। हमारे पास राष्ट्र वीर दुर्गादास राठौर की ऐतिहासिक विरासत भी है। आज उनकी छत्री के जीर्णोद्धार के लिए भूमिपूजन किया गया है। हर काल और युग में उज्जैन की गौरवशाली गाथा रही है। हम एक नये दौर में प्रवेश कर रहे है। उज्जैन गोपाल मंदिर क्षेत्र स्थित रीगल टॉकीज का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। यहां भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी निकलती है, सिंहस्थ के दौरान यहां से पेशवाई निकलती है और यह स्थान हरि और हर के मिलन का साक्षी भी होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को उज्जैन में गोपाल मंदिर छत्री चौक स्थित कार्यक्रम में 79.27 करोड़ रूपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 25.15 करोड़ रूपये की लागत से रीगल टॉकीज के विकास कार्य, आगामी सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत 22.30 करोड़ रूपये की लागत से गदा पुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंह पुरा होते हुए लालपुल ब्रिज तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य और 31.83 करोड़ रूपये की लागत से गाड़ी अड्डा चौराहे से वी.डी क्लाथ मार्केट, निकास चौराहा, खजूर वाली मस्जिद, के.डी. गेट मार्ग वाया जूना सोमवारिया से बड़ी पुलिया तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य का भूमिपूजन किया गया है। कार्यक्रम में रीगल टॉकीज के उन्नयन पर आधारित लघु फिल्प का प्रसारण भी किया गया। रीगल टॉकीज का निर्माण कार्य 36 हजार स्क्वेयर फीट क्षेत्र में किया जाएगा।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन शहर का हर काल में विशेष महत्व रहा है। आगामी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए विकास के कार्य निरंतर किये जा रहे हैं। आज उज्जैन को कुल 107 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात मिली है। आगामी सिंहस्थ महापर्व में स्नान क्षिप्रा नदी के जल से ही होगा। सेवरखेडी – सिलारखेड़ी परियोजना से क्षिप्रा नदी में पूरे वर्ष जल रहेगा, क्षिप्रा सदैव प्रवहमान रहेगी। सिंहस्थ में सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही उज्जैन को नई 4 लेन सड़क की सौगात मिलने वाली है। साथ ही लगभग 10 हजार करोड़ की लागत से नई मेट्रो लाइन उज्जैन से इंदौर और पीथमपुर को कनेक्ट करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रम उद्योगपुरी में इंडस्ट्रियल सैट अप किया गया है और यहां से हम विश्व स्तरीय उत्पाद बनाकर विश्व के कई देशों को सप्लाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी योजना ने बहनों का सशक्तिकरण किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी से प्रेरणा लेकर बहनों के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना शुरू की है, जिसमें बहनों को अभी 1250 रुपए की राशि दी जा रही है। जल्दी ही बहनों को प्रतिमाह 1500 रुपए की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने माताओं-बहनों को स्थानीय निकाय चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। अब ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं। सरकार हर वर्ग के विकास के लिए कार्य कर रही है। अब प्रदेश में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 32 मैडिकल कॉलेज हो जाएंगे। वर्ष 2002-03 के बाद मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले डेढ़ साल में 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है।                                                       कार्यक्रम में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेडा, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री संजय अग्रवाल, श्री कैलाश प्रजापत, गणमान्य नागरिक मौजूद थे। आभार प्रर्दशन एमआईसी सदस्य श्री शिवेंद्र तिवारी ने किया। मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने 52 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उज्जैन में एक अन्य कार्यक्रम में 52 करोड़ 69 लाख रुपए से अधिक की लागत से राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री के संरक्षण संवर्धन एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय तथा मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री रवि सोलंकी, श्री संजय अग्रवाल आदि उपस्थित रहे। वीर दुर्गादास छत्री पर किया माल्यार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत तथा अन्य अतिथियों द्वारा राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री पर पहुंचकर माल्यार्पण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को राष्ट्र वीर दुर्गादास के पराक्रम एवं शौर्य एवं देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने के लिए विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इनमें राष्ट्र वीर दुर्गादास की प्रतिमा स्थापना के साथ ही पैदल पुल, बगीचा, एक्टिविटीज जोन, रिटेनिंग वॉल, पार्किंग, हॉर्स ट्रैकिंग जोन, ओपन एयर थिएटर, संग्रहालय निर्माण आदि कार्य सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तावित निर्माण कार्यों का नक्शे पर अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal में पहली बार Body Donation को मिला राजकीय सम्मान, Guard of Honor के साथ विदाई

Bhopal में बना इतिहास भोपाल (Bhopal) के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में पहली बार किसी Body Donation को Rajkiya Samman (राजकीय सम्मान) दिया गया। 79 वर्षीय महिला, जिन्होंने अपनी मृत्यु के बाद देहदान (Body Donation) किया, उन्हें राज्य सरकार की ओर से Guard of Honor देकर विदाई दी गई। इस दौरान GMC के डॉक्टर, स्टाफ और परिजन मौजूद रहे। सरकार की नई पहल: Body Donation को मिलेगा सम्मान कुछ महीने पहले मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने घोषणा की थी कि अंगदान (Organ Donation) और देहदान (Body Donation) करने वाले व्यक्तियों को राजकीय सम्मान दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को देहदान व अंगदान के लिए प्रेरित करना है। नीमच और अन्य जिलों में भी हुआ सम्मान भोपाल से पहले नीमच (Neemuch) जिले में भी एक महिला के बॉडी डोनेशन पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। अब धीरे-धीरे यह पहल प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू की जा रही है। समाज को मिला बड़ा संदेश मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि देहदान (Body Donation) मेडिकल स्टूडेंट्स की पढ़ाई और रिसर्च के लिए बेहद जरूरी है। जब सरकार ऐसे दानदाताओं को सम्मान देती है, तो समाज में यह संदेश जाता है कि Body Donation समाज सेवा और मानवता की सबसे बड़ी मिसाल है। बढ़ रही जागरूकता और प्रेरणा भोपाल की यह घटना साबित करती है कि अब लोग बॉडी डोनेशन को सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि मानवता और समाज के प्रति योगदान मानने लगे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को भी अंगदान और देहदान के लिए प्रेरित करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jabalpur

मध्य प्रदेश का Modern Flyover Jabalpur में, Traffic Jam से मिलेगी राहत और मिलेगा Children Park

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर (Jabalpur) को आज एक नई सौगात मिली है। यहां Madan Mahal से Damoh Naka तक फैला हुआ राज्य का सबसे बड़ा और मॉडर्न फ्लाईओवर (Flyover) बनकर तैयार हो गया है। यह फ्लाईओवर न सिर्फ ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) से राहत देगा बल्कि इसके नीचे बने Basketball Court, Open Gym और Children Park इसे और खास बना रहे हैं। Jabalpur Flyover की खास बातें Traffic में बड़ा बदलाव पहले मदनमहल से दमोह नाका तक पहुंचने में 40–45 मिनट लगते थे। अब इस Flyover के जरिए यह दूरी महज 6–8 मिनट में पूरी हो जाएगी। इससे समय और ईंधन की बचत होगी तथा शहर के व्यापार को नई गति मिलेगी। Flyover के नीचे Sports & Fitness Hub इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि फ्लाईओवर के नीचे लोगों की सेहत और मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया है। इससे यह जगह केवल ट्रैफिक समाधान नहीं बल्कि एक सामुदायिक और सामाजिक गतिविधियों का हब भी बन जाएगी। उद्घाटन कब होगा? इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन 23 अगस्त 2025 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहान यादव करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Archana Tiwari

Archana Tiwari Safe: लापता सिविल जज Aspirant 12 दिन बाद मिली GRP ने बरामद

भोपाल, 20 अगस्त 2025: 12 दिन से लापता अर्चना तिवारी (Archana Tiwari), जो कटनी की रहने वाली हैं और एक Law Graduate व Civil Judge Aspirant हैं, आज सुरक्षित भोपाल लौट आई हैं। उन्हें नेपाल बॉर्डर के पास उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से GRP (Government Railway Police) ने बरामद किया। कैसे हुई लापता Archana Tiwari 7 अगस्त 2025 को इंदौर से कटनी जाने वाली नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रा कर रही थीं। बताया गया कि वह रानी कमलापति स्टेशन के पास शौचालय जाने के लिए उठीं और फिर ट्रेन में वापस नहीं लौटीं। इसके बाद उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई और पुलिस ने खोजबीन शुरू की। खोजबीन और पुलिस की कार्रवाई बरामदगी और परिवार से मिलना 20 अगस्त को GRP ने अर्चना को लखीमपुर खीरी के पास नेपाल बॉर्डर से बरामद किया और उन्हें भोपाल लाया गया। परिवार से मिलते ही उनके खुशी के पल देखे गए। आगे की जांच पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि Archana Tiwari 12 दिनों के दौरान कहाँ थीं और उनके लापता होने में किसी की भूमिका थी या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal बनेगा Electronics Hub: MP Cabinet ने 371 Cr Cluster, Kaynes Investment और Scholarship को दी मंजूरी

Bhopal । मध्यप्रदेश सरकार ने राजधानी भोपाल को Electronics & Semiconductor Hub बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई MP Cabinet Meeting में कई अहम फैसले लिए गए जिनमें 371.95 करोड़ का Electronics Manufacturing Cluster (EMC), Kaynes Technology का 352 करोड़ का निवेश, Geeta Bhavan Wellness Center और नई Scholarship Schemes शामिल हैं। 371 करोड़ का Electronics Manufacturing Cluster in Bhopal MP Semiconductor Policy 2025 का बड़ा विज़न Kaynes Electronics का 352 Cr Investment Geeta Bhavan Wellness Center & Scholarship मध्यप्रदेश सरकार के ये फैसले राज्य को Electronics Manufacturing और Semiconductor Industry में नई पहचान देंगे। इससे न केवल Industrial Growth और Job Opportunities बढ़ेंगी बल्कि भोपाल को Innovation और Technology Hub बनाने का सपना भी पूरा होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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