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भोपाल में जीन्स पहनने के विवाद में हत्या:बड़े भाई ने छोटे भाई का गला रेत दिया, भागने से पहले स्टेशन से पकड़ा गया

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के भीमनगर इलाके में रविवार-सोमवार की रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक 22 वर्षीय युवक ने अपने छोटे भाई की सिर्फ इस बात पर गला रेतकर हत्या कर दी कि उसने उसकी जीन्स पहन ली थी। यह सनसनीखेज वारदात घरेलू विवाद से शुरू हुई और खून-खराबे में तब्दील हो गई। पुलिस ने आरोपी बड़े भाई ओमकार गिरी को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। घर में मामूली विवाद ने ली जान मामला अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, भीमनगर निवासी 55 वर्षीय मुन्ना गिरी के दो बेटे थे – ओमकार गिरी (22) और विवेक गिरी (19)। दोनों भाई शादी समारोहों में वेटर का काम करते थे। विवेक रविवार रात करीब 1 बजे घर लौटा था और उसने अपने बड़े भाई की जीन्स पहन रखी थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जो मारपीट तक पहुंच गया। गुस्से में आकर ओमकार ने रसोई में रखे चाकू से विवेक की गर्दन पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पिता और पड़ोसियों ने बताई घटना की भयावहता मृतक के पिता मुन्ना गिरी ने बताया कि झगड़ा पहले घर के अंदर हुआ, फिर दोनों बाहर निकलकर भी भिड़े। उसके बाद जब दोनों फिर घर में लौटे, तो ओमकार ने विवेक पर जानलेवा हमला कर दिया। सुबह करीब 5:30 बजे पड़ोसी दीपक पाल ने शोर सुनकर पुलिस को सूचना दी। तब तक विवेक का शव घर में ही पड़ा हुआ था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोपी ने लगाया छोटे भाई पर दुर्व्यवहार का आरोप आरोपी ओमकार ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसका छोटा भाई विवेक अक्सर उसके कपड़े और जूते पहन लेता था और टोकने पर गाली-गलौज करता था। साथ ही, उसने आरोप लगाया कि विवेक पिता के साथ भी मारपीट करता था। दोनों भाइयों के बीच पहले भी थाने में कई बार शिकायतें हो चुकी हैं। पुलिस का मानना है कि वारदात के बाद ओमकार भागने की फिराक में था। उसे भोपाल रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच जारी, पिता की भूमिका भी शक के घेरे में एसआई राजेश तिवारी ने बताया कि हत्या की घटना रात करीब 1 बजे हुई। हत्या के बाद आरोपी फरार हो गया था और मृतक काफी देर तक तड़पता रहा। आशंका जताई जा रही है कि पिता ने देर से मदद मांगी, इसलिए उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है https://deshharpal.com/इस दुखद घटना से जुड़ी सभी अपडेट्स आपके सामने लाता रहेगा।
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विक्रांत भूरिया बोले-एमपी रेप और शराब कैपिटल बनता रहा:दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा-पूर्णकालिक गृहमंत्री की जरूरत, सीएम से मंत्रालय नहीं संभल रहा

खंडवा जिले में आदिवासी महिला के साथ हुए बर्बर गैंगरेप और हत्या के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दिल दहला देने वाली घटना को लेकर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और शिवराज सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। डॉ. भूरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 31 मई को भोपाल दौरे पर निशाना साधते हुए कहा कि, “पीएम महिला सम्मेलन में आने से पहले यह सुनिश्चित करें कि मध्यप्रदेश में बहनों की सुरक्षा कैसे होगी?” “देश की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन आवाज दबा दी जाती है” डॉ. भूरिया ने कहा कि गांवों में जो जघन्य अपराध हो रहे हैं, वे अक्सर मुख्यधारा की मीडिया की नजरों से दूर रह जाते हैं। “खंडवा में जो हुआ, उसे आदिवासी निर्भया कांड कहा जा रहा है। एक 45 वर्षीय आदिवासी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और फिर आरोपियों ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। उनकी बच्चादानी बाहर निकाल दी गई और आंतें भी बाहर आ गईं।” 16 वर्षीय बेटी ने मां को तड़पती हालत में देखा, हो गई बेहोश पीड़िता की 16 वर्षीय बेटी जब घटनास्थल पर पहुंची तो मां की हालत देखकर वह बेहोश हो गई। डॉ. भूरिया ने कहा, “मैं खुद एक डॉक्टर हूं, सोच सकता हूं उस महिला ने कितनी पीड़ा सही होगी। आरोपियों को एक बार भी दया नहीं आई।” उन्होंने आगे कहा कि जब यह मामला सामने आया तब प्रशासन चुप बैठा रहा। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर तक हैरान थे कि ऐसी क्रूरता संभव है। “मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था फेल है” विक्रांत भूरिया ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सीधा हमला करते हुए कहा, “जब से मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री का पद अपने पास रखा है, तब से प्रदेश में बलात्कार के मामलों में 18% की बढ़ोतरी हुई है। इनमें 26% घटनाएं आदिवासी महिलाओं के खिलाफ हैं।” उन्होंने भोपाल की एक घटना का भी जिक्र किया जिसमें एक नाबालिग बच्ची के साथ सरकारी कार्यक्रम के दौरान दुष्कर्म हुआ, लेकिन उसे एफआईआर दर्ज कराने के लिए 600 किलोमीटर दूर मऊगंज भेजा गया। “मध्यप्रदेश बनता जा रहा है रेप और शराब कैपिटल” डॉ. भूरिया ने कहा, “मप्र में शराबबंदी की बातें तो होती हैं लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आदिवासी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा शराब बेची जा रही है। शराब माफियाओं पर कोई लगाम नहीं है और आदिवासी इलाके लॉन्चपैड की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं।” भूरिया की मांगें: “कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी, सड़क पर लड़ेगी” डॉ. भूरिया ने कहा कि आदिवासी कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने खंडवा पहुंच चुका है। उन्होंने कहा, “सरकार की महिला विरोधी नीतियों के खिलाफ कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी।” https://deshharpal.com/ इस मामले से जुड़ी हर अपडेट को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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एम्बुलेंस चालक और वार्ड बॉय के बीच मारपीट का वीडियो:गुना में मरीज को ले जाने की बात पर विवाद; ड्राइवर पर कार्रवाई की मांग

गुना जिला अस्पताल में मरीजों की सेवा में लगे कर्मचारियों के बीच ही गुरुवार देर रात जमकर हंगामा हो गया। रात करीब 1 बजे अस्पताल के अंदर एक प्राइवेट एम्बुलेंस चालक और वार्ड बॉय के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला मारपीट तक जा पहुंचा। इस पूरी घटना का वीडियो अब सामने आया है, जो अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुआ। मृत व्यक्ति की ECG को लेकर हुआ विवाद वार्ड बॉय अमन शर्मा ने बताया कि उसे डॉक्टरों ने एक मृत व्यक्ति की ECG कराने के लिए कहा था, लेकिन प्राइवेट एम्बुलेंस चालक छोटू उसे जल्दी ले जाने का दबाव बना रहा था। जब अमन ने डॉक्टरों के निर्देश के अनुसार कार्य करने की कोशिश की, तो छोटू भड़क गया और मारपीट करने लगा। “सरकारी अस्पताल में प्राइवेट चालकों का दखल बढ़ा” – अमन शर्मा अमन शर्मा ने इस घटना की शिकायत सिविल सर्जन से की है। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में लिखा कि प्राइवेट एम्बुलेंस चालक अस्पताल के अंदर तक घुस आते हैं और मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने का दबाव बनाते हैं। “इनका अस्पताल परिसर में आना बंद किया जाए, वरना मरीजों की सही देखभाल और व्यवस्था पर असर पड़ेगा,” अमन ने कहा। वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा प्रशासनिक दबाव(deshharpal.com) सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। आम लोगों का सवाल है कि जब अस्पताल के कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो मरीजों की सुरक्षा कैसे होगी? जनता की मांग – अस्पताल परिसर में अनुशासन हो सख्त इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट सेवा देने वाले लोगों की मनमानी पर कोई लगाम है? आम नागरिकों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल परिसर में अनुशासन और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
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वन-वे पर ऑटो-रिक्शा को एंट्री देने की मांग:सागर में चालकों ने हड़ताल की चेतावनी दी; रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे

शहर के मोतीनगर चौराहे से तीनबत्ती तिराहे तक के मार्ग को वन-वे घोषित करने के फैसले का विरोध अब तेज हो गया है। इस मार्ग पर तीन और चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी ऑटो चालकों और आम लोगों को हो रही है। कलेक्टर ऑफिस पहुंचे ऑटो चालक, सौंपा ज्ञापन शुक्रवार को ऑटो चालकों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि वन-वे लागू होने के बाद अब उन्हें बड़े बाजार वाले इलाके में एंट्री नहीं मिल रही, जिससे न केवल उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है बल्कि मरीजों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने को मजबूर लोग, बंद हो रही ऑटो चालकों की कमाई ज्ञापन में बताया गया कि लोग अब तीनबत्ती तक पैदल चलने को मजबूर हैं क्योंकि ऑटो अंदर तक नहीं जा पा रहे। बुजुर्गों और बीमारों के लिए यह बेहद मुश्किल हो गया है। वहीं ऑटो चालकों की रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है। आंदोलन की चेतावनी, विधायक से करेंगे मुलाकात ऑटो यूनियन के अध्यक्ष पप्पू तिवारी ने कहा, “वन-वे नियम में ऑटो और ई-रिक्शा को भी एंट्री नहीं दी जा रही है। इससे न केवल हमारी कमाई बंद हो रही है बल्कि आम लोग भी बेहद परेशान हैं। हमने प्रशासन को ज्ञापन सौंप दिया है और अब शनिवार को सागर विधायक शैलेंद्र जैन से भी मुलाकात करेंगे। अगर फिर भी हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हमें मजबूरन हड़ताल करनी पड़ेगी।” जनता भी कर रही समर्थन(deshharpal.com) इस मुद्दे को लेकर सिर्फ ऑटो चालक ही नहीं, आम जनता भी चिंता जता रही है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि इस इलाके में ऑटो की सुविधा न होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। बाजारों तक पहुंचने के लिए अब लंबा पैदल सफर करना पड़ रहा है।
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सीहोर में व्यापारी के घर हुई चोरी का वीडियो:सो रहे परिवार को कमरे में बंद किया; कार समेत 3 लाख नकदी लेकर भागे चोर

सीहोर जिले के छिदगांव में एक दिल दहला देने वाली चोरी की घटना सामने आई है। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात, अज्ञात नकाबपोश चोरों ने एक व्यापारी के घर में घुसकर करीब डेढ़ घंटे तक लूटपाट मचाई। चोर न सिर्फ 3.20 लाख रुपये नकद और सामान लेकर भागे, बल्कि पांच लाख रुपये की कार भी ले उड़े। सीसीटीवी में कैद हुए तीन नकाबपोश चोर व्यापारी कमलेश शर्मा के घर और दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में तीन नकाबपोश चोर साफ दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने पहले घर के मेन गेट की जाली काटी और फिर अंदर घुसकर इत्मीनान से चोरी की। कमलेश शर्मा ने बताया: “चोरों ने हमारे घर को पूरी तरह खंगाल डाला। जिस कमरे में हम सो रहे थे, वहीं से उन्होंने कैश और गाड़ी की चाबी उठाई और हमें कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद दुकान से तेल के डिब्बे, नकदी और कोल्ड ड्रिंक व ड्राय फ्रूट्स तक लेकर चले गए।” बच्चे उठे तो खुला राज – दरवाजा बाहर से था बंद रात करीब 4 बजे जब बच्चे पानी पीने के लिए उठे, तो उन्होंने देखा कि कमरा बाहर से बंद है। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा खोला गया। बाहर निकलते ही परिवार के होश उड़ गए – सामान बिखरा पड़ा था और घर की कार गायब थी। वारदात से एक दिन पहले ही निकाले थे पैसे कमलेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने गेहूं की बिक्री के पैसे केसीसी खाते में जमा कराने के लिए एक दिन पहले ही बैंक से पैसे निकाले थे और शाम को घर लाए थे। उन्हें शक है कि किसी ने बैंक से लेकर घर तक उनकी रेकी की और फिर रात में वारदात को अंजाम दिया। 36 घंटे बाद भी चोर फरार, जांच में जुटी पुलिस घटना को हुए 36 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक चोरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेब) की टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और अन्य साक्ष्य इकट्ठे किए हैं। टीआई घनश्याम सिंह दांगी ने बताया: “हम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” 👉 चिंता की बात (deshharpal.com)इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से चोरों ने डेढ़ घंटे तक घर और दुकान में आराम से चोरी की, वह पुलिस की गश्त और सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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भोपाल में पेड़ से टकराई कार, 3 की मौत:गाड़ी के परखच्चे उडे़, एयरबैग फटे; चेसिस टूटने से दो हिस्सों में बंट गई

भोपाल के खजूरी सड़क थाना क्षेत्र में गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात एक भयानक सड़क हादसा हुआ। तेज रफ्तार से जा रही हुंडई वेन्यू कार पहले एक गुमटी से टकराई, फिर सीधे पेड़ से जा भिड़ी। हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। मरने वालों की पहचान प्रीत आहूजा, विशाल डाबी और पंकज सिसोदिया के रूप में हुई है। घायल युवक राहुल कंडारे का इलाज चिरायु अस्पताल में चल रहा है। खाना खाकर लौट रहे थे दोस्त, बीच रास्ते मौत ने घेरा परिजनों के मुताबिक, चारों दोस्त सीहोर के दरबार होटल में खाना खाने गए थे। रात में भोपाल लौटते समय, इंदौर-भोपाल हाईवे पर उनकी कार अनियंत्रित होकर गुमटी और फिर पेड़ से टकरा गई। कार चला रहा था प्रीत, उसके बगल में विशाल बैठा था, जबकि पीछे राहुल और पंकज थे। कार के परखच्चे उड़ गए, दो टुकड़ों में बंट गई हादसा इतना भीषण था कि कार दो टुकड़ों में बंट गई। एयरबैग तक फट गए, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि स्पीड 120 किमी/घंटे से ज्यादा रही होगी। प्रीत और विशाल कार के डैशबोर्ड के नीचे बुरी तरह फंस गए थे। रेस्क्यू टीम को गेट और डैशबोर्ड काटकर शव निकालने में एक घंटे से ज्यादा का समय लगा। परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ पंकज अपने परिवार का इकलौता सहारा था। मां की पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है, और उसके पिता नेत्रहीन हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। पंकज ही घर की पूरी जिम्मेदारी निभा रहा था। उसकी मौत ने पिता को पूरी तरह बेसहारा कर दिया। प्रीत भोपाल में कपड़ों की दुकान चलाता था, जबकि विशाल उसी दुकान में काम करता था। दोनों 12वीं तक पढ़े थे। तीनों स्कूल के दोस्त थे। दुख की बात ये है कि प्रीत अपने भाई कमलेश आहूजा की गाड़ी (MP04 EA 6004) बिना बताए लेकर निकला था। चश्मदीद बोले- एक घंटे बाद पहुंची पुलिस और एम्बुलेंस स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की सूचना देने के करीब एक घंटे बाद पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। समय रहते मदद मिल जाती, तो शायद किसी की जान बच सकती थी। थाना प्रभारी का बयान खजूरी थाना प्रभारी नीरज वर्मा ने कहा कि हादसे का मुख्य कारण तेज रफ्तार है। उन्होंने देरी के आरोपों को खारिज किया और बताया कि “मैं उस समय फंदा टोल नाके पर वाहनों की चेकिंग कर रहा था, जो घटनास्थल से करीब 20 किमी दूर है। हमारी प्राथमिकता घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाना था, जिससे उसकी जान बच सकी।” 👉 सोचने वाली बात(deshharpal.com)हर बार की तरह इस हादसे में भी लापरवाही और तेज रफ्तार ने तीन जिंदगियों को लील लिया। एक पल की जल्दबाज़ी ने तीन परिवारों को मातम में डुबो दिया। ये हादसा एक सबक है – सड़क पर सावधानी ही सुरक्षा है।
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Road Accident

भोपाल Road Accident: कार पेड़ और Lamp Post से टकराई, तीन की मौत, 1 घायल

भोपाल में भीषण सड़क हादसा, तेज रफ्तार कार ने मचाई तबाही भोपाल के खजूरी सड़क इलाके में शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे एक भयंकर road accident हुआ। तेज रफ्तार कार पहले सड़क किनारे लगे पेड़ से टकराई और फिर बिजली के lamp post से जा टकराई। इस दुर्घटना में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतकों की पहचान और घायल की हालत मृतकों की पहचान प्रीत आहूजा, सत्यम डाबी और पंकज सिसोदिया के रूप में हुई है। प्रीत आहूजा कपड़ों की दुकान के मालिक थे और सत्यम वहां सहायक के रूप में काम करते थे। घायल चौथे व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। पुलिस जांच जारी, ड्राइवर की पहचान नहीं हो सकी पुलिस ने बताया कि हादसे के वक्त कार कौन चला रहा था, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की जांच जारी है। वहीं, राहत कार्य में देरी की वजह से आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP की सागर नगर मंडल की कार्यकारिणी घोषित:6 मंडल उपाध्यक्ष-2 महामंत्री बनाए; आईटी सेल की जिम्मेदारी जयश्री को सौंपी

भारतीय जनता पार्टी ने सागर विधानसभा के अंतर्गत सागर नगर मंडल की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। यह सूची मंडल अध्यक्ष अमित बैसाखिया ने भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी की सहमति से जारी की। नई टीम में प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं: इसके अलावा मंडल की कार्यकारिणी में 43 अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। पार्टी संगठन ने इन नियुक्तियों के जरिए मंडल को और अधिक सक्रिय और सशक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। — देश हरपल https://deshharpal.com/ पल-पल की खबर हरपल
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ब्लैकमेलिंग से तंग आकर हेड f ने किया सुसाइड:इंदौर में युवती रुपए मांग रही थी,झूठे केस में फंसाने की दे रही थी धमकी

इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब वहां स्थित सरकारी क्वार्टर में तैनात हेड कांस्टेबल विनोद यादव ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में सामने आया है कि कनाड़िया क्षेत्र की एक युवती उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी। वह रुपये नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही थी। बुधवार देर रात पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना की जानकारी मिलते ही एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह, एएसपी सोनू डाबर, टीआई आर.डी. कानवा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डिप्रेशन में थे कांस्टेबल पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विनोद यादव काफी समय से मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन में थे। टीआई सीबी सिंह ने दी जानकारी: “घटना एमआईजी थाने के पीछे बने सरकारी क्वार्टर की है। विनोद यादव परदेशीपुरा थाने में पदस्थ थे और बुधवार को ड्यूटी खत्म करने के बाद उन्होंने फांसी लगा ली।” मौके पर एफएसएल टीम भी पहुंची और साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह साफ हो गया है कि आत्महत्या के पीछे मानसिक तनाव और ब्लैकमेलिंग एक बड़ी वजह रही है। पुलिस अब युवती से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। deshharpal.com — पल-पल की खबर हरपल
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NEET UG रिजल्ट मामले में आज सुनवाई:अब उज्जैन सहित 50 से ज्यादा याचिककर्ता; रिज्वाइंडर के लिए मांगा जाएगा समय, रिएक्जाम कराने की मांग भी

NEET-UG परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों और बिजली कटौती के चलते प्रभावित हुए छात्रों की याचिका पर आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आज रिवाइंडर दाखिल किया जाएगा। इस मामले में 25 से अधिक परीक्षा केंद्रों से जुड़े 50 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। इन छात्रों की प्रमुख मांग है कि दोबारा परीक्षा (Re-exam) कराई जाए ताकि उनका भविष्य खराब न हो। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट मृदुल भटनागर ने बताया कि इन छात्रों में कई ऐसे हैं जिन्होंने तीन-चार बार परीक्षा दी है और उन्होंने कड़ी मेहनत की थी। क्या है मामला? 4 मई को हुई NEET-UG परीक्षा के दौरान इंदौर और उज्जैन सहित कई शहरों में तेज आंधी और बारिश के कारण बिजली गुल हो गई थी। इंदौर के 49 सेंटरों में से लगभग 25 केंद्रों पर छात्रों को अंधेरे में परीक्षा देनी पड़ी। कई जगहों पर छात्रों ने मोमबत्तियों और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पेपर हल किया। घुप्प अंधेरे में कई छात्र प्रश्नपत्र तक ठीक से नहीं पढ़ पाए। उज्जैन के शासकीय माधव महाविद्यालय में भी बिजली जाने से परीक्षा बाधित हुई। यहां छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ कक्षों में लाइट जाने के बाद अतिरिक्त समय मिला, लेकिन रूम नंबर 212 के छात्रों को न तो अतिरिक्त समय मिला और न ही समय पर परीक्षा शुरू हो सकी। अब उज्जैन के भी 5 से ज्यादा छात्र याचिकाकर्ताओं में शामिल हो चुके हैं। NTA की दलील क्या रही? 16 मई को हुई पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NTA की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट में पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि पूरे परिणाम पर रोक लगाने से सैकड़ों छात्रों पर असर पड़ेगा। हालांकि NTA ने यह स्वीकार किया कि कुछ केंद्रों पर बिजली की समस्या हुई थी, लेकिन वहां मोमबत्ती और जनरेटर के जरिए व्यवस्था की गई थी। NTA का यह भी कहना है कि परीक्षा समर सीज़न में थी और सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे। लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वास्तविक हालात NTA के दावों से काफी अलग थे। क्या है छात्रों की मांग? प्रभावित छात्रों की स्पष्ट मांग है कि जिन 25 परीक्षा केंद्रों में परीक्षा प्रभावित हुई, वहां फिर से परीक्षा कराई जाए। छात्रों का कहना है कि खराब व्यवस्था के कारण उनका एक साल बर्बाद होने की कगार पर है, क्योंकि NEET के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं है—न मेडिकल, न नर्सिंग, न आयुर्वेद या होम्योपैथी। क्या हो सकता है अगला कदम? आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष कोर्ट से दोबारा परीक्षा की मांग को लेकर मजबूत तर्क पेश करेगा। साथ ही कोर्ट से अनुरोध किया जाएगा कि रिवाइंडर दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट NTA और बिजली कंपनी के जवाबों के आधार पर क्या फैसला सुनाता है। “देश हरपल”https://deshharpal.com/ इस अहम मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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