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इंदौर में महिलाओं से छेड़छाड़ के तीन मामले आए सामने, प्रेमी, भतीजे और जीजा पर केस दर्ज

इंदौर में महिलाओं और युवतियों से छेड़छाड़ के तीन अलग-अलग मामले सामने आए हैं। द्वारकापुरी और खजराना थाना क्षेत्रों में दर्ज शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तीनों मामलों में पीड़िताओं ने अलग-अलग तरह के उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए हैं। शादी का दबाव बनाने वाले प्रेमी पर केस द्वारकापुरी क्षेत्र की 20 वर्षीय युवती ने अपने परिचित लक्की पंसोरिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। युवती के अनुसार दोनों एक ही कार्यस्थल पर काम करते थे और पिछले करीब एक साल से एक-दूसरे को जानते थे। पीड़िता का आरोप है कि शराब की लत के कारण उसने आरोपी से बातचीत बंद कर दी थी। इसके बाद आरोपी उस पर शादी करने का दबाव बनाने लगा। युवती ने शिकायत में बताया कि आरोपी ने फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने तथा आत्महत्या कर उसे फंसाने की धमकी भी दी। साथ ही उसका पीछा करने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। विवाहिता ने भतीजे पर लगाए आरोप खजराना क्षेत्र की एक विवाहिता ने अपने भतीजे राहुल के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि आरोपी काफी समय से उस पर गलत नजर रखता था। शिकायत के मुताबिक कुछ दिन पहले आरोपी ने बाथरूम में झांकने की कोशिश की थी। महिला ने उसे फटकार भी लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद उसने दोबारा आपत्तिजनक हरकत की। इसके बाद पीड़िता ने परिवार को जानकारी देकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। नाबालिग ने जीजा के खिलाफ दर्ज कराया मामला खजराना थाना क्षेत्र में ही 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने अपने जीजा सोहेल के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने रास्ते में रोककर उसे जबरन बाइक पर बैठाने की कोशिश की और अनुचित व्यवहार किया। घटना के बाद नाबालिग ने घर पहुंचकर परिजनों को पूरी जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस कर रही जांच पुलिस ने तीनों मामलों में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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Ram Mandir

Ram Mandir Controversy: सोना मिलने के मामले में नया मोड़, टिन्नू की पत्नी बोलीं- सच जल्द सामने आएगा

अयोध्या में राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारी टिन्नू के घर से कथित तौर पर सोना मिलने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर विशेष जांच दल (SIT) लगातार तीसरे दिन भी जांच में जुटा रहा, वहीं दूसरी ओर टिन्नू की पत्नी सामने आईं और उन्होंने परिवार का पक्ष रखते हुए कई सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच पूरी होने से पहले ही उनके परिवार को सार्वजनिक रूप से बदनाम किया जा रहा है। उनका कहना है कि लोगों को धैर्य रखना चाहिए और आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। “हमारे परिवार को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा” मीडिया से बातचीत के दौरान टिन्नू की पत्नी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनका परिवार मानसिक दबाव से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने आने से पहले ही कई तरह की बातें फैलाकर परिवार की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाए और अफवाहों पर भरोसा न किया जाए। परिवार को उम्मीद है कि जांच पूरी होने के बाद सच सभी के सामने होगा। तीसरे दिन भी जारी रही SIT की पड़ताल सोना बरामदगी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गठित SIT लगातार जांच कर रही है। जांच टीम ने तीसरे दिन भी संबंधित दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारियों की जांच की। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों का मुख्य फोकस यह जानने पर है कि बरामद सोने का स्रोत क्या है और उससे जुड़े लेनदेन किस प्रकार हुए। मामले से जुड़े कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई है। BJP नेता के बयान से बढ़ी राजनीतिक चर्चा मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के एक नेता ने कहा कि “बिना आग के धुआं नहीं उठता।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी को दोषी या निर्दोष ठहराने का फैसला जांच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने के बाद ही होना चाहिए। आखिर क्या है पूरा मामला? हाल ही में राम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारी टिन्नू के घर पर हुई कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में सोना मिलने की खबर सामने आई थी। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और जांच के लिए SIT का गठन किया। तब से जांच एजेंसियां लगातार इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि बरामद संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या है और क्या इसमें किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता शामिल है। जांच रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल मामले में जांच जारी है और कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। एक ओर परिवार खुद को निर्दोष बताते हुए बदनाम किए जाने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां तथ्यों और सबूतों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। अब सभी की नजर SIT की अगली रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जबलपुर SP ऑफिस में जनसुनवाई के दौरान दो महिलाओं में मारपीट, परिसर में मचा हंगामा

जबलपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब दो महिलाएं आपस में भिड़ गईं। देखते ही देखते दोनों के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई। घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने दोनों महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे एसपी कार्यालय में जनसुनवाई चल रही थी। इसी दौरान परिसर में मौजूद दो महिलाओं के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। कुछ ही देर में दोनों ने एक-दूसरे के बाल पकड़ लिए और मारपीट करने लगीं। पुलिस ने मौके पर संभाला मामला विवाद बढ़ता देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी और महिला पुलिस स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचे। काफी प्रयास के बाद दोनों महिलाओं को अलग कराया गया। इसके बाद सिविल लाइन थाना पुलिस को सूचना दी गई और दोनों को पूछताछ के लिए थाने भेजा गया। एक महिला खुद को बताती है यूट्यूबर एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार विवाद में शामिल महिलाओं में से एक खुद को यूट्यूबर बताती है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और विवाद के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। महिला ने लगाए परेशान करने के आरोप सिविल लाइन थाना पुलिस के मुताबिक कैंट क्षेत्र निवासी पिंकी नामक महिला अपने पति से जुड़े मामले की शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंची थी। इसी दौरान उसकी दूसरी महिला से बहस हो गई। पिंकी का आरोप है कि दूसरी महिला लंबे समय से उसे परेशान कर रही है और खुद को पत्रकार बताती है। उसने आरोप लगाया कि जनसुनवाई के दौरान बच्चों के सामने गाली-गलौज की गई, विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई। मेडिकल जांच के लिए भेजा गया मारपीट में दोनों महिलाओं को चोटें आई हैं। पुलिस ने दोनों को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा है। अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों की शिकायतें लेकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पहले भी हो चुका है विवाद पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों महिलाओं के बीच पहले भी विवाद हो चुका है, जिसकी शिकायत गढ़ा थाने में दर्ज कराई गई थी। वहीं एक महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे पहले फोन पर धमकी दी गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें http://www.deshharpal.com
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‘धन दोगुना’ करने का झांसा देकर व्यापारी से 2.50 लाख की ठगी, खुद को अयोध्या का पंडित बताने वाला आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर में एक व्यापारी को रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाकर 2.50 लाख रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने खुद को अयोध्या का पंडित (महाराज) बताकर व्यापारी को अपने जाल में फंसाया था। वारदात को अंजाम देने के बाद वह दुर्ग में जाकर छिप गया था, जहां से पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम रोगदा निवासी 57 वर्षीय जनकराम साहू किराना व्यवसायी हैं। 12 जून को वे खरीदारी के लिए बिलासपुर के व्यापार विहार पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात दो व्यक्तियों से हुई, जिन्होंने खुद को अयोध्या का पंडित बताकर उनसे बातचीत शुरू की। अमीर बनाने का दिया लालच आरोपियों ने व्यापारी को विश्वास में लेकर दावा किया कि वे विशेष पूजा और विधि के जरिए धन को दोगुना कर सकते हैं। उनकी बातों में आकर जनकराम साहू ने अपने पैसों से भरा बैग आरोपियों को सौंप दिया। मौका मिलते ही दोनों ठग 2 लाख 50 हजार रुपए लेकर फरार हो गए। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच ठगी का अहसास होने पर व्यापारी ने तारबाहर थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर तारबाहर थाना और एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित की गई। CCTV और तकनीकी जांच से मिला सुराग पुलिस टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी दुर्ग जिले में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस ने दुर्ग के केला बाड़ी क्षेत्र में दबिश देकर मुख्य आरोपी हैदर अली अंसारी (60) को गिरफ्तार कर लिया। पहले भी दर्ज हैं कई मामले पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ पहले से चोरी और धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। वहीं इस मामले का दूसरा आरोपी वासिम खान अभी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि धन दोगुना करने, चमत्कार दिखाने या तंत्र-मंत्र के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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गुना में खाई में गिरी स्लीपर बस, 5 गंभीर घायल: महाकाल दर्शन को जा रहे श्रद्धालुओं में मची चीख-पुकार

गुना जिले में नेशनल हाईवे-46 पर मंगलवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। कानपुर से उज्जैन होते हुए रतलाम जा रही समय शताब्दी ट्रेवल्स की स्लीपर बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में जा गिरी और पेड़ों से टकरा गई। हादसे में बस चालक, हेल्पर समेत 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार हादसा सुबह करीब 4:30 बजे बिलोनिया के पास गुना बायपास मोड़ से पहले हुआ। बस यात्रियों से भरी हुई थी। इसमें छोटे बच्चों के साथ बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु भी सवार थे, जो उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए जा रहे थे। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस जैसे ही खाई में पलटी और पेड़ों से टकराई, स्लीपर सीटों पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े। अचानक हुए हादसे से बस में चीख-पुकार मच गई। कई यात्री घबरा गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे। पुलिस ने चलाया रेस्क्यू अभियान घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों में कानपुर निवासी अतुल वाजपेयी और उनकी पत्नी अल्का वाजपेयी के अलावा रेलवे भर्ती परीक्षा देने जा रहे प्रशांत गौतम भी शामिल हैं। बस चालक राहुल मिश्रा और हेल्पर इमरान को भी गंभीर चोटें आई हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना के कारणों को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। अस्पताल में भर्ती चालक राहुल मिश्रा ने बताया कि बस का ऑयल अचानक निकल गया था, जिससे स्टीयरिंग जाम हो गया और बस पर नियंत्रण नहीं रहा। हादसे की वजह पर अलग-अलग दावे वहीं, कुछ यात्रियों का आरोप है कि रास्ते में ड्राइवर की शिफ्ट बदली गई थी और नए चालक को नींद का झोंका आने के कारण हादसा हुआ। जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी और चालक की लापरवाही सहित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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मदनमहल रेलवे स्टेशन की लिफ्ट में फंसे यात्री, 50 मिनट बाद सुरक्षित निकाले गए

जबलपुर के तेजी से विकसित हो रहे मदनमहल रेलवे स्टेशन पर रविवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर लगी लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई और उसमें सवार यात्री अंदर फंस गए। करीब 50 मिनट तक लिफ्ट में बंद रहे यात्रियों को गर्मी और घुटन का सामना करना पड़ा। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, रात में अमरकंटक एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन से बाहर निकलने के लिए लिफ्ट का उपयोग कर रहे थे। इसी दौरान करीब 15 यात्री अपने सामान के साथ लिफ्ट में सवार हो गए। क्षमता से अधिक भार होने के कारण लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और लॉक हो गई। लिफ्ट बंद होते ही अंदर मौजूद यात्रियों में घबराहट फैल गई। बच्चों और महिलाओं के रोने-चिल्लाने की आवाजें बाहर तक सुनाई देने लगीं। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। मुख्य स्टेशन से बुलाना पड़ा विशेषज्ञ मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने लिफ्ट को चालू करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद मुख्य रेलवे स्टेशन से लिफ्ट विशेषज्ञ को बुलाया गया। तकनीकी सुधार के बाद करीब 50 मिनट बाद लिफ्ट को सुरक्षित नीचे लाया गया और सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। ओवरलोडिंग बनी वजह रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लिफ्ट में क्षमता से अधिक यात्री और भारी सामान होने के कारण तकनीकी समस्या आई। घटना रात करीब 9:40 बजे से 10:30 बजे के बीच की बताई जा रही है। यात्रियों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल घटना के बाद यात्रियों ने स्टेशन पर तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे व्यस्त रेलवे स्टेशन पर हर समय तकनीकी स्टाफ मौजूद रहना चाहिए ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि लिफ्ट का उपयोग करते समय निर्धारित क्षमता और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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महिला पत्रकार के खिलाफ FIR और चार्जशीट रद्द, हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करते हुए कहा है कि बिना किसी ठोस कारण के जांच और चार्जशीट दाखिल करने में 6 साल से अधिक की देरी करना आरोपी को प्रताड़ित करने के समान है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले त्वरित न्याय और शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन माना। यह फैसला रमेश सिन्हा और रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। 2018 की घटना से जुड़ा मामला याचिकाकर्ता श्रिया पांडेय वर्ष 2018 में एक न्यूज चैनल में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थीं। उस दौरान पुलिसकर्मियों का आंदोलन चल रहा था। 20 जून 2018 को आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों की पत्नियों को महिला थाने में बैठाए जाने की सूचना मिलने पर श्रिया अपनी टीम के साथ जानकारी लेने महिला थाना पहुंची थीं। पत्रकार पर दर्ज कर दिया गया था केस याचिका के अनुसार, जानकारी मांगने पर पुलिसकर्मियों ने सहयोग नहीं किया और बाद में श्रिया पांडेय के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर दिया गया था। हाईकोर्ट पहुंची पत्रकार पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए श्रिया पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना वर्ष 2018 की थी, जबकि पुलिस ने चार्जशीट नवंबर 2024 में पेश की। इस छह साल की देरी को लेकर पुलिस विभाग कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका। कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मिला अदालत ने केस डायरी और चार्जशीट का अवलोकन करने के बाद कहा कि पूरा मामला केवल पुलिसकर्मियों और उनसे जुड़े गवाहों के बयानों पर आधारित था। घटनास्थल पर कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं और पत्रकार द्वारा अपराध किए जाने का कोई प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। कानून के दुरुपयोग पर अदालत की टिप्पणी डिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसे मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल तक मुकदमे की प्रक्रिया में उलझाकर रखना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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राम मंदिर दान राशि पर जयवर्धन सिंह का भाजपा पर हमला, बोले- आस्था के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाई गई दान राशि को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और विश्वास के साथ योगदान दिया था, ऐसे में दान राशि को लेकर सामने आ रही खबरें गंभीर सवाल खड़े करती हैं। भाजपा सनातन धर्म की ठेकेदार नहीं जयवर्धन सिंह ने कहा कि भाजपा एक राजनीतिक दल है, जबकि सनातन धर्म हजारों वर्षों पुरानी परंपरा है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल स्वयं को सनातन धर्म का ठेकेदार नहीं बता सकता। सनातन धर्म करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन शैली का हिस्सा है, किसी एक संगठन की संपत्ति नहीं। राम मंदिर निर्माण में सभी का योगदान पूर्व मंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दिया था। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार ने भी मंदिर निर्माण में सहयोग राशि प्रदान की थी। उनके अनुसार यह मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी रही है। दान राशि को लेकर उठाए सवाल जयवर्धन सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़ी दान राशि में कथित आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि यदि ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। प्राण-प्रतिष्ठा का किया उल्लेख उन्होंने कहा कि जिस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में स्वयं नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे और जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हैं, वहां किसी भी प्रकार के वित्तीय विवाद या भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर विषय हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। धर्म और राजनीति को अलग रखने की बात जयवर्धन सिंह ने कहा कि धर्म और राजनीति दो अलग-अलग विषय हैं। धार्मिक आस्था का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम और अयोध्या के नाम पर राजनीति कर रही है, जो उचित नहीं है। साधु-संतों को मिले संचालन की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री ने कहा कि अयोध्या की धार्मिक परंपराओं से जुड़े पुराने साधु-संतों को मंदिर संचालन में प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि स्थानीय संत समाज और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। अयोध्या के चुनाव परिणामों का भी किया जिक्र उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या क्षेत्र में भाजपा को जिस प्रकार चुनावी नुकसान उठाना पड़ा, उसके पीछे स्थानीय स्तर पर असंतोष भी एक कारण माना जा सकता है। उनका दावा था कि कई संत और पुजारी मौजूदा व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं थे। भाजपा की नीतियों पर निशाना अपने बयान में जयवर्धन सिंह ने भाजपा की कार्यप्रणाली और नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि लोगों की आस्था और विश्वास कायम रह सके। नोट: राम मंदिर दान राशि को लेकर लगाए गए आरोप जयवर्धन सिंह के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस विषय पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया आना बाकी है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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भोपाल में पत्रकार से चाकू की नोक पर लूट: बंधक बनाकर खातों में ट्रांसफर कराए 32 हजार रुपए

भोपाल। राजधानी भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में एक पत्रकार के साथ कथित लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। आरोप है कि घर लौट रहे पत्रकार को कुछ बदमाशों ने चाकू की नोक पर बंधक बनाकर एक कमरे में ले गए और परिचितों से ऑनलाइन पैसे मंगवाकर अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले में करीब 32 हजार रुपए की लूट होने की बात सामने आई है। लिफ्ट मांगने के बहाने रोका जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे की है। पत्रकार अनुज मीणा अपना काम खत्म कर दोपहिया वाहन से घर लौट रहे थे। इसी दौरान निशातपुरा इलाके में एक युवक ने उनसे लिफ्ट मांगी। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने लिफ्ट देने से मना कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद एक अन्य युवक अचानक उनकी बाइक के सामने आ गया, जिससे उनका वाहन अनियंत्रित होकर गिर गया। चाकू दिखाकर कमरे में ले गए अनुज मीणा का आरोप है कि बाइक गिरते ही वहां पहले से मौजूद तीन अन्य युवक भी पहुंच गए। बदमाशों ने उनकी गर्दन पर चाकू अड़ा दिया और जबरन पास के एक कमरे में ले गए। कमरे में आरोपियों ने उनसे नकदी की मांग की। पर्याप्त रकम नहीं मिलने पर उन्होंने जान से मारने की धमकी दी और परिचितों से ऑनलाइन पैसे मंगवाने का दबाव बनाया। खातों में ट्रांसफर कराए 32 हजार रुपए पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग माध्यमों से कुल 32 हजार रुपए अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। वारदात के बाद बदमाशों ने उन्हें करीब रात 3 बजे छोड़ा। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस निशातपुरा थाना प्रभारी मनोज पटवा ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस को मिली है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जा सके। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पीड़ित के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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CJP

Jaipur Violence: CJP Chief Abhijeet Dipke पर हमला, RSS पर लगे गंभीर आरोप, मचा बवाल

जयपुर में हुए एक राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके पर अचानक हुए हमले ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। यह घटना 15 जून 2026 को शहीद स्मारक क्षेत्र में हुई, जहाँ बड़ी संख्या में समर्थक और युवा प्रदर्शन में शामिल थे। अचानक हुई इस घटना ने न सिर्फ मौके पर अफरा-तफरी मचा दी, बल्कि देशभर में राजनीतिक बहस भी शुरू कर दी। प्रदर्शन के बीच अचानक हमला प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके भीड़ के बीच मौजूद थे। तभी कुछ लोगों ने उनके पास पहुंचकर धक्का-मुक्की शुरू कर दी और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया। वीडियो फुटेज में उन्हें कई बार थप्पड़ मारे जाने की बात सामने आई है, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है। RSS पर लगाए आरोप, बढ़ा विवाद हमले के बाद अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि उनके ऊपर हमला करने वाले लोग “RSS से जुड़े हो सकते हैं”। उन्होंने कहा कि जो भी उनके विचारों के खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे डराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी तक पुलिस या किसी जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है। दीपके ने यह भी कहा कि— “हम डरने वाले नहीं हैं, आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।” राजनीतिक बयानबाज़ी तेज इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। सोशल मीडिया पर असर, फॉलोअर्स को लेकर चर्चा इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर CJP को लेकर भारी चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंडिंग बना हुआ है और लोग अलग-अलग राय रख रहे हैं। क्या है CJP? कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक युवा-आधारित सोशल मीडिया आंदोलन है, जो बेरोजगारी, परीक्षा विवाद और सरकारी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए जाना जाता है। हाल के महीनों में यह संगठन तेजी से चर्चा में आया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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पूर्व जज संजय किशन कौल का पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर निशाना, बोले- जजों की नियुक्ति में सरकार के प्रति ज्यादा झुके थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के रवैए पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कौल ने आरोप लगाया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा झुके हुए थे। कौल के मुताबिक, नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने की प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। कौल ने किताब में कॉलेजियम की उस बैठक का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की छह रिक्तियों को भरने के लिए नामों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेदों के कारण चंद्रचूड़ के साथ उनके संबंधों में तनाव आया। कॉलेजियम बैठक में छठे नाम को लेकर मतभेद कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के छह जजों की नियुक्ति पर विचार के दौरान पांच नामों पर पहले सहमति बन चुकी थी। बैठक से ठीक पहले तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार का नाम उनके सामने रखा। कौल ने बताया कि चंद्रचूड़ उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और पूछा कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए। कौल ने द वायर से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था, लेकिन नामों पर पहले उनके साथ चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि छठे उम्मीदवार के नाम पर उनकी सहमति नहीं थी और उन्हें लगा कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी उस नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। कौल के अनुसार, बैठक में वही हुआ और छठे नाम पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद चंद्रचूड़ ने इस नाम सहित अन्य नामों को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की मंजूरी ले ली थी। नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने पर आपत्ति जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार के साथ नामों पर विचार-विमर्श करने की परंपरा चिंता पैदा करती है। उनके मुताबिक, सरकार से सलाह लेना और पहले से मंजूरी लेना दो अलग-अलग बातें हैं। कौल का मानना है कि कॉलेजियम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नियुक्तियों से पहले सरकार की सहमति लेने की प्रक्रिया परंपरा बन जाती है, तो भविष्य में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए इससे अलग चलना मुश्किल हो सकता है। NJAC पर भी रखी अपनी राय किताब में कौल ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति व्यवस्था को लेकर आमने-सामने बैठकर चर्चा की जा सकती थी। कौल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और उसके तौर-तरीकों में बदलाव की गुंजाइश थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार के नाम पर नियुक्तियों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की परंपरा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। PMLA मामले को दूसरी बेंच में भेजने पर भी सवाल कौल ने अपनी बेंच के एक फैसले से जुड़े मामले को दूसरी बेंच में भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) से जुड़े फैसले के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करने से संबंधित था। कौल का कहना था कि किसी मामले को इस आशंका के आधार पर एक बेंच से दूसरी बेंच में नहीं भेजा जाना चाहिए कि फैसला किस दिशा में जा सकता है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया कौल की किताब अभी बाजार में नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों के आधार पर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि कौल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार के दखल से जुड़ी चिंताएं सामने रखी हैं। रमेश के मुताबिक, इनमें कॉलेजियम की बैठकों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक न्यायाधीश की जाति को लेकर सरकार की ओर से पूछताछ का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कौल ने इन विषयों को नपे-तुले शब्दों में दर्ज किया है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रखने की जरूरत से जोड़कर देखा है। कौल बोले- भविष्य के CJI के लिए परंपरा बदलना मुश्किल होगा कौल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल सीमित होता है, लेकिन उनके फैसलों से बनी परंपराएं आगे भी जारी रह सकती हैं। उनके मुताबिक, यदि नियुक्तियों से पहले सरकार से चर्चा करने की प्रक्रिया सामान्य बन जाती है, तो बाद में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए उससे अलग रास्ता अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चंद्रचूड़ को इस तरह की प्रक्रिया से बचने की सलाह देने की कोशिश की।

भोपाल में 1.50 लाख की MD ड्रग्स के साथ दो युवक गिरफ्तार, बाइक-मोबाइल समेत 3 लाख का सामान जब्त

भोपाल। राजधानी भोपाल में परवलिया सड़क थाना पुलिस ने बायपास रोड पर घेराबंदी कर दो युवकों को MD ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक बाइक से MD ड्रग्स लेकर थाना क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित कर बायपास रोड पर घेराबंदी की गई। रात करीब 1:40 बजे पुलिस को बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। तरुण सराठे और अखिलेश मेहरा गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तरुण सराठे (24), निवासी छावनी पठार, बिलखिरिया के पास से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई। बाइक पर उसके साथ मौजूद अखिलेश मेहरा (24), निवासी छावनी पठार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स के अलावा तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई गई है। दोनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, तरुण सराठे के खिलाफ बिलखिरिया थाने में मारपीट और आर्म्स एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। वहीं, अखिलेश मेहरा के खिलाफ मारपीट के चार प्रकरण पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

हरमनप्रीत और दीप्ति के शतक, भारत ने जिम्बाब्वे को दिया 329 रन का टारगेट

वडोदरा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाए। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में रविवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने शतक लगाए। दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 153 रन की अहम साझेदारी हुई। भारत की शुरुआत खराब, 19 रन पर गिरे 2 विकेट भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। स्मृति मंधाना पारी की चौथी गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। तीसरे ओवर में भारत का स्कोर 19 रन पर 2 विकेट हो गया। मुश्किल समय में प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला। दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। वह 22.2 ओवर में 143 रन के स्कोर पर आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों पर बनाए 126 रन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके लगाए। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक रहा। हालांकि, पारी के दौरान उनके तीन कैच भी छूटे। हरमनप्रीत का विकेट 46.2 ओवर में गिरा। उस समय भारतीय टीम 301 रन बना चुकी थी। पारी के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद धूप में खेलना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में रन बना रही हो, तो स्ट्राइक बदलते रहना और साझेदारी को आगे बढ़ाना जरूरी होता है। दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों में जड़ा शतक छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर 106 रन की पारी खेली। उन्होंने 15 चौके लगाए। दीप्ति ने 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और पारी के आखिरी ओवर में चौका लगाकर वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। दीप्ति ने हरमनप्रीत के साथ मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 137 गेंदों पर 153 रन की साझेदारी की। इस दौरान दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी। दीप्ति शर्मा ने बनाए तीन रिकॉर्ड आखिरी 10 ओवर में बने 72 रन भारतीय टीम ने आखिरी 10 ओवर में 72 रन जोड़े और इस दौरान 2 विकेट गंवाए। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद ऋचा घोष भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। वह 9 गेंदों पर 7 रन बनाकर 47.6 ओवर में आउट हुईं। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाकर जिम्बाब्वे के सामने 329 रन का लक्ष्य रखा। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना (कप्तान), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, तेजल हसब्निस, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), श्री चरणी, जिंतिमणि कलिता, सयाली सतघरे और वैष्णवी शर्मा। जिम्बाब्वे: मोडेस्टर मुपाचिकवा (विकेटकीपर), लोरिन फिरी, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, बिलव्ड बिजा, जोसेफिन नकोमो (कप्तान), न्याशा ग्वांजुरा, चिएद्जा धुरुरु, मिशेल मावुंगा, नोमवेलो सिबांडा, तेंदाई मकुशा और ओलिंडर चारे।
BSF

BSF Action: कच्छ के Sir Creek में पकड़े गए 4 Pakistani Fishermen

गुजरात के कच्छ से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सर क्रीक के संवेदनशील इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ लिया। इस दौरान उनकी फाइबर से बनी मछली पकड़ने वाली नाव भी जब्त की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चारों मछुआरे कथित तौर पर केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। घटना के बाद एक बार फिर कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। BSF ने कैसे पकड़े चार पाकिस्तानी मछुआरे? India Today की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद जवानों ने सर क्रीक इलाके में कार्रवाई करते हुए चारों को पकड़ लिया। पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थैमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थैमोर और अहसान जाट के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान उनकी फाइबर की नाव भी जब्त की गई। फिलहाल, पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आखिर क्या है मछुआरों का अपराध? इस मामले में सबसे अहम सवाल है कि चारों मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में क्यों पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना या वहां अवैध रूप से मछली पकड़ना संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी। अभी तक सामने आई रिपोर्ट में चारों मछुआरों के जासूसी या किसी अन्य गंभीर गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानना सही नहीं होगा। कच्छ का Sir Creek इलाका क्यों है संवेदनशील? गुजरात का कच्छ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। सर क्रीक एक ज्वारीय जलमार्ग है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और दलदली इलाके के कारण सीमा पर निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए नावों की आवाजाही होती है। समुद्री सीमा के आसपास होने के कारण किसी दूसरे देश की नाव का भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बन जाता है। BSF यहां नियमित गश्त और निगरानी करती है। संदिग्ध नाव या गतिविधि दिखाई देने पर जवान संबंधित लोगों से पूछताछ करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। Kutch Border पर हाल की घटनाओं से बढ़ी निगरानी कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों और नावों से जुड़े दूसरे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। 19 अक्टूबर को कोटेश्वर के पास क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान BSF ने एक पाकिस्तानी नागरिक को नाव के साथ पकड़ा था। शुरुआती जांच में नाव से मछली पकड़ने के उपकरण मिलने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाए जाने की खबर भी सामने आई। 20 अक्टूबर को कच्छ के लखपत और आसपास के क्रीक क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की भी रिपोर्ट आई थी। इन मामलों में नावों, पाकिस्तानी नागरिकों और तलाशी अभियान का जिक्र किया गया था। हालांकि, ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इन्हें 25 अक्टूबर को पकड़े गए चार मछुआरों के मामले से अलग समझना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच समुद्री सीमा पर निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। फिर भी, केवल इन घटनाओं के आधार पर किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। क्या पाकिस्तानी नाव से कोई संदिग्ध सामान मिला? 25 अक्टूबर की घटना से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट में फाइबर की नाव जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, नाव से किसी हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान की बरामदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी का दावा नहीं किया जा सकता। आगे की जांच में नाव, मछुआरों की गतिविधियों और भारतीय जलक्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। अब आगे क्या होगा? चारों मछुआरों को पकड़े जाने के बाद अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित अधिकारी उनकी पहचान, भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSF ने गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ा है और उनकी नाव जब्त की है। वे भारतीय जलक्षेत्र में किन परिस्थितियों में पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में BSF की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मामले में आधिकारिक अपडेट आने पर आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Indian Air Force

Indian Air Force: ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारत की ताकत, AP Singh का बड़ा बयान

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) की ताकत और ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों को लेकर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उनके इस बयान को भारत की सैन्य क्षमता और भविष्य की रक्षा तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने किस तरह आधुनिक तकनीक, सटीक हथियारों और बेहतर तालमेल का इस्तेमाल किया, यह चर्चा का प्रमुख विषय रहा है। एपी सिंह ने इस अभियान से मिली सीख का जिक्र करते हुए बताया कि आने वाले समय में वायुसेना को अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा। Operation Sindoor में दिखी Indian Air Force की क्षमता वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की कार्रवाई लगभग 1,200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक फैली थी। इस अभियान ने दिखाया कि आधुनिक सैन्य ऑपरेशन में केवल लड़ाकू विमानों की संख्या ही मायने नहीं रखती, बल्कि सही जानकारी, सटीक निशाना और अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल भी बेहद जरूरी है। आज के दौर में युद्ध की रणनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए वायुसेना को अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल करना होता है। ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था Operation Sindoor ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान में भारतीय वायुसेना की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। कार्रवाई के दौरान आधुनिक हथियारों, निगरानी प्रणालियों और सैन्य संसाधनों के समन्वित इस्तेमाल पर जोर दिया गया। वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत की सैन्य तैयारियों में क्षमता और तकनीक दोनों की अहम भूमिका है। उनका संदेश साफ है कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए लगातार सुधार करना जरूरी है। स्वदेशी हथियारों और तकनीक पर बढ़ रहा जोर भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों ने भी स्वदेशी हथियार प्रणालियों और आधुनिक तकनीक की उपयोगिता को चर्चा में ला दिया है। भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उपकरणों के विकास का उद्देश्य विदेशी निर्भरता कम करना और जरूरत के समय देश में ही रक्षा संसाधन उपलब्ध कराना है। वायुसेना के लिए आधुनिक लड़ाकू विमान, सटीक निशाना लगाने वाले हथियार, बेहतर निगरानी प्रणाली और मजबूत संचार नेटवर्क बेहद जरूरी हैं। इन सभी क्षमताओं का आपसी तालमेल किसी भी सैन्य अभियान को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करता है। Pakistan के ड्रोन और हवाई हमलों से निपटने में Air Defence की भूमिका आधुनिक युद्ध में ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियार बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। ऐसे में भारत के Air Defence System यानी वायु रक्षा तंत्र की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायु रक्षा प्रणालियों, निगरानी नेटवर्क और अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल पर विशेष ध्यान दिया गया। ऐसी प्रणालियों का उद्देश्य संभावित हवाई खतरों का समय रहते पता लगाना और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करना है। आने वाले समय में ड्रोन रोधी तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और बेहतर निगरानी क्षमता भारतीय वायुसेना की तैयारियों का अहम हिस्सा बने रहेंगे। AI और Modern Technology से बदलेगी भविष्य की Air Force भविष्य के सैन्य अभियानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा विश्लेषण और ऑटोमेटेड सिस्टम की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है। इन तकनीकों से बड़ी मात्रा में मिलने वाली जानकारी का तेजी से विश्लेषण करने और फैसले लेने में मदद मिल सकती है। भारतीय वायुसेना को मजबूत बनाने के लिए कई क्षेत्रों पर ध्यान देना जरूरी है: इन तैयारियों का उद्देश्य केवल मौजूदा चुनौतियों से निपटना नहीं, बल्कि भविष्य में बदलते युद्ध के तरीकों के अनुसार खुद को तैयार रखना भी है। Theatre Command पर भी वायुसेना प्रमुख ने रखी बात भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल के लिए थिएटर कमांड व्यवस्था पर भी चर्चा जारी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य तीनों सेनाओं के संसाधनों और रणनीतियों को एकीकृत करके सैन्य अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, ऐसी व्यवस्था तैयार करते समय प्रत्येक सेना की अलग-अलग जरूरतों और परिचालन क्षमताओं का ध्यान रखना भी जरूरी है। वायुसेना के लिए तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचना और जरूरत के मुताबिक संसाधनों का इस्तेमाल करना विशेष महत्व रखता है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से मिले अनुभव भविष्य की सैन्य योजनाओं और संयुक्त कार्रवाई की रणनीति तैयार करने में उपयोगी हो सकते हैं। 2047 तक Modern Aerospace Force बनाने की तैयारी भारत का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दिशा में स्वदेशी तकनीक, अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक एयरोस्पेस सिस्टम पर काम किया जा रहा है। वायुसेना को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए बेहतर उपकरणों के साथ प्रशिक्षित कर्मियों, मजबूत रखरखाव व्यवस्था और तकनीकी विकास की भी जरूरत होगी। एपी सिंह के बयान का मुख्य संदेश यही है कि सैन्य ताकत को लगातार विकसित करना पड़ता है। किसी एक अभियान की सफलता के बाद रुकने के बजाय उससे मिली सीख को भविष्य की तैयारियों में शामिल करना जरूरी है। Operation Sindoor के बाद भारत की Defence Strategy में क्या अहम है? ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना की रणनीति, तकनीकी क्षमता और सैन्य तालमेल को लेकर कई महत्वपूर्ण सवालों को सामने रखा। आधुनिक युद्ध में सटीक कार्रवाई के साथ-साथ खुफिया जानकारी, वायु रक्षा और अलग-अलग हथियार प्रणालियों का सही समय पर इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है। वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का बयान इसी बात पर जोर देता है कि भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाना होगा। स्वदेशी तकनीक, आधुनिक हथियारों और मजबूत रक्षा नेटवर्क के जरिए भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की तैयारी जारी रहेगी।...

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