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Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने दिया Resign

Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने दिया Resign

Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा समूह के भीतर पिछले कुछ समय से नेतृत्व और भविष्य की रणनीतियों को लेकर मतभेद सामने आ रहे थे। बताया जा रहा है कि नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच कुछ अहम मुद्दों पर विचारों का अंतर था। इसके साथ ही टाटा ट्रस्ट के भीतर भी खींचतान और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज थी, जिसे इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। एन. चंद्रशेखरन ने साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े फैसले लिए और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत किया। एयर इंडिया के अधिग्रहण से लेकर विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में विस्तार तक, उनके कार्यकाल को महत्वपूर्ण माना जाता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में टाटा समूह नए नेतृत्व की तलाश और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर फोकस करेगा। फिलहाल कंपनी की ओर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आधिकारिक प्रक्रिया जारी है। टाटा समूह के करोड़ों निवेशकों, कर्मचारियों और कारोबार से जुड़े लोगों की नजर अब इस बात पर है कि चंद्रशेखरन के बाद समूह की कमान किसके हाथों में जाएगी और भविष्य की रणनीति क्या होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Share Market

Share Market Crash: Crude Oil से Global Tension तक, क्यों लाल हुआ बाजार?

बुधवार को शेयर बाजार (Share Market) खुलते ही माहौल कुछ ऐसा रहा कि निवेशकों की नजरें स्क्रीन पर टिक गईं। Sensex करीब 600 अंक तक फिसल गया, वहीं Nifty 50 में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से बाजार का कुल मार्केट कैप भी घटा और निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹2 लाख करोड़ तक की कमी आने की बात सामने आई। आखिर बाजार में अचानक इतनी गिरावट क्यों आई? इसके पीछे घरेलू के साथ-साथ कई Global Factors भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। Crude Oil ने बढ़ाई Market की चिंता शेयर बाजार की गिरावट में सबसे अहम वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से भारत के लिए आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये और महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। महंगा तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ा सकता है। यही वजह है कि Crude Oil में तेजी आते ही बाजार में अक्सर सावधानी बढ़ जाती है। Middle East Tension का असर मध्य पूर्व में तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। खासकर तेल की सप्लाई और Strait of Hormuz से जुड़े घटनाक्रम पर दुनियाभर के बाजारों की नजर है। अगर तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने का खतरा बना रहता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह अच्छी खबर नहीं मानी जाती। Global Market से भी नहीं मिला मजबूत Support भारतीय शेयर बाजार अकेले नहीं चलता। दुनिया के बड़े बाजारों में होने वाली हलचल का असर यहां भी दिखाई देता है। अमेरिका समेत प्रमुख बाजारों में आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रखा। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए बिकवाली कर सकते हैं, जिससे घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है। Inflation Data पर Investors की नजर महंगाई के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि Inflation का अगला रुख ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को किस तरह प्रभावित करेगा। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर शेयरों में Volatility बढ़ना स्वाभाविक है। कौन-कौन से Sector दबाव में रहे? बाजार में गिरावट का असर कई सेक्टर्स पर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बड़ी संख्या में सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। हालांकि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों, खासकर Metal और PSU Bank Stocks, में खरीदारी भी देखने को मिली। इससे साफ है कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में ज्यादा सावधानी से पैसा लगा रहे हैं। क्या Investors को घबराने की जरूरत है? Sensex में 600 अंकों की गिरावट निश्चित रूप से बड़ी नजर आती है, लेकिन सिर्फ एक दिन की कमजोरी को देखकर इसे बड़ी Market Crash की शुरुआत मानना सही नहीं होगा। फिलहाल बाजार की नजर Crude Oil Prices, Middle East Tension, Global Cues और Inflation Data पर है। इन मोर्चों पर हालात सुधरते हैं तो बाजार में तेजी से रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी बाजार की परेशानी बढ़ा सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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N Chandrasekaran

N Chandrasekaran Resigns: Tata Sons में बड़ा फेरबदल, फरवरी 2027 के बाद कौन संभालेगा कमान?

Tata Group के कॉरपोरेट स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। N Chandrasekaran ने Tata Sons के चेयरमैन पद से हटने का फैसला किया है। हालांकि, यह बदलाव तुरंत नहीं होगा। चंद्रशेखरन अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा। चंद्रशेखरन के इस फैसले ने Tata Group के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। खासकर इसलिए क्योंकि पिछले कुछ समय से Tata Trusts और Tata Sons के बीच governance और leadership को लेकर मतभेदों की खबरें आती रही हैं। AGM से पहले आया बड़ा फैसला Tata Sons की Annual General Meeting यानी AGM 18 अगस्त 2026 को होने वाली है। इस बैठक से पहले चंद्रशेखरन का पद छोड़ने का फैसला सामने आया है। ऐसे में AGM और उसके बाद होने वाली गतिविधियों पर कारोबारी जगत की नजर बनी हुई है। चंद्रशेखरन फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे, इसलिए Tata Sons को नए चेयरमैन के लिए तैयारी करने का समय मिल जाएगा। फरवरी 2027 के बाद समूह की कमान किसके हाथ में होगी, यह आने वाले महीनों में सबसे बड़ा सवाल रहने वाला है। Noel Tata से मतभेद की खबरों ने बढ़ाई हलचल चंद्रशेखरन के फैसले के साथ Noel Tata का नाम भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स में Tata Trusts और Tata Sons के नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की बात कही गई है। इनमें Tata Sons की future strategy, board representation और कंपनी की संभावित public listing जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन कथित मतभेदों को लेकर सभी दावे आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इसलिए इन्हें फिलहाल रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से ही देखा जाना चाहिए। 2017 में संभाली थी Tata Sons की जिम्मेदारी N Chandrasekaran ने 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह TCS के CEO और MD रह चुके थे। Tata Sons की कमान संभालने वाले वह Tata परिवार से बाहर के प्रमुख प्रोफेशनल चेहरों में से एक रहे हैं। उनके कार्यकाल में Tata Group ने कई बड़े कारोबारी फैसले किए। Air India की Tata Group में वापसी, अलग-अलग कारोबारों में निवेश और समूह की global presence बढ़ाने की दिशा में भी इस दौरान महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। Tata Trusts की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है? Tata सिर्फ एक सामान्य holding company नहीं है। यह Tata Group के कई बड़े कारोबारों के लिए केंद्रीय भूमिका निभाती है। TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power और Air India जैसे बड़े नाम समूह का हिस्सा हैं। अब सबसे बड़ा सवाल—अगला चेयरमैन कौन? चंद्रशेखरन के फैसले के बाद अब Tata Group में succession planning पर सबकी नजर रहेगी। फरवरी 2027 तक उनके पद पर बने रहने से नए नेतृत्व की तलाश और transition को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का समय मिलेगा। यह बदलाव सिर्फ एक चेयरमैन के जाने तक सीमित नहीं है। Tata Group जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें अगला चेयरमैन कंपनी की growth strategy, governance और future expansion में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निवेशकों की भी नजर Tata Group की listed कंपनियों में निवेश करने वाले लोगों के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। नेतृत्व में बदलाव का असर आगे चलकर समूह की रणनीति और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी शेयर पर सिर्फ इस खबर के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा। फिलहाल तस्वीर साफ है—N Chandrasekaran फरवरी 2027 तक Tata Sons की कमान संभालेंगे, लेकिन उसके बाद Tata Group को नया नेतृत्व मिलेगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है और Tata Trusts की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में कितनी अहम रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BSE

BSE को मिली Nifty 50 में जगह, Wipro बाहर; जानें 30 सितंबर से क्या बदलेगा

भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े benchmark index Nifty 50 में जल्द ही बड़ा बदलाव होने वाला है। NSE Indices की छमाही समीक्षा में BSE Ltd. को Nifty 50 में शामिल करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही दिग्गज IT कंपनी Wipro Ltd. अब इस प्रमुख इंडेक्स का हिस्सा नहीं रहेगी। यह बदलाव 30 सितंबर 2026 से लागू होगा। यानी 29 सितंबर को बाजार बंद होने के बाद Nifty 50 की नई तस्वीर सामने आएगी। BSE को क्यों मिली Nifty 50 में जगह? NSE Indices के मुताबिक BSE का 6 महीने का औसत free-float market capitalisation करीब ₹1.41 लाख करोड़ रहा। वहीं Nifty 50 की सबसे छोटी मौजूदा कंपनी Wipro का औसत free-float market cap करीब ₹55,930 करोड़ था। इंडेक्स में शामिल होने के नियमों के मुताबिक BSE का औसत free-float market cap Wipro के मुकाबले जरूरी स्तर से काफी ऊपर रहा। इसी आधार पर BSE को Nifty 50 में जगह मिली है। सीधी भाषा में कहें तो बाजार में BSE का बढ़ता आकार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी अब उसे Nifty 50 की शीर्ष कंपनियों की सूची तक ले आई है। Wipro की Nifty 50 से होगी Exit इस बदलाव का दूसरा बड़ा पहलू Wipro का Nifty 50 से बाहर होना है। कंपनी लंबे समय से इस benchmark index का हिस्सा रही है, लेकिन अब इसका free-float market capitalisation इंडेक्स की मौजूदा जरूरत के मुकाबले कम हो गया है। Wipro को Nifty 50 से हटाकर Nifty Next 50 में शामिल किया जाएगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी के कारोबार पर कोई सीधा फैसला हो गया है। यह मुख्य रूप से इंडेक्स के तय नियमों और बाजार पूंजीकरण से जुड़ा बदलाव है। 30 सितंबर से लागू होगा नया बदलाव NSE Indices ने साफ किया है कि बदलाव 29 सितंबर 2026 को बाजार बंद होने के बाद प्रभावी होंगे। इसके बाद 30 सितंबर से Nifty 50 में BSE की जगह पक्की हो जाएगी और Wipro बाहर होगी। यह बदलाव सिर्फ इंडेक्स की सूची तक सीमित नहीं है। Nifty 50 को ट्रैक करने वाले कई passive funds और ETFs को भी अपनी holdings में बदलाव करना पड़ सकता है। इसी वजह से बदलाव की तारीख के आसपास संबंधित शेयरों में खरीद-बिक्री बढ़ सकती है। BSE Share में क्यों बढ़ी हलचल? BSE के Nifty 50 में शामिल होने की खबर बाजार के लिए काफी अहम रही। Reuters के अनुसार घोषणा के बाद BSE के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी देखने को मिली, जबकि Wipro के शेयर में करीब 1.1 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, शेयर बाजार में किसी कंपनी के इंडेक्स में शामिल होने या बाहर होने को देखकर अकेले निवेश का फैसला करना ठीक नहीं है। शेयर की कीमत पर कंपनी के नतीजे, valuation, बाजार की स्थिति और कई दूसरे factors भी असर डालते हैं। Nifty 50 के लिए क्या बदलेगा? Nifty 50 को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख benchmark माना जाता है। इसमें देश की बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। समय-समय पर NSE Indices इसकी समीक्षा करता है, ताकि इंडेक्स बदलती market conditions को बेहतर तरीके से दर्शा सके। BSE की entry इसी बदलती तस्वीर की एक मिसाल है। एक तरफ stock exchange कारोबार से जुड़ी कंपनी का बाजार में बढ़ता महत्व नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ लंबे समय से Nifty 50 में मौजूद Wipro को अब Next 50 में जाना होगा। निवेशकों की नजर अब सितंबर के बदलाव पर फिलहाल बाजार की नजर 30 सितंबर 2026 पर है। उस दिन से Nifty 50 में BSE की नई पारी शुरू होगी और Wipro की benchmark index से विदाई हो जाएगी। यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार में बदलते market dynamics की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में निवेशक BSE और Wipro दोनों के शेयरों में होने वाली गतिविधियों के साथ-साथ Nifty 50 में होने वाले दूसरे बदलावों पर भी नजर रखेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Rate: सोने में फिर आया बड़ा उछाल, अगस्त में ₹9,630 महंगा; चांदी भी चमकी

सोना खरीदने वालों के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर है। देश के सर्राफा बाजार में Gold Price में तेज उछाल देखने को मिला है। सोने की कीमत एक दिन में ₹1,849 बढ़कर करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है। खास बात यह है कि अगस्त की शुरुआत से ही सोने के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं और अब तक इसमें करीब ₹9,630 की बढ़ोतरी हो चुकी है। सोने के साथ-साथ चांदी ने भी तेजी का नया दौर देखा है। Silver Price में एक दिन में ₹15,985 का बड़ा उछाल आया और चांदी करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। अगस्त में सोने ने बढ़ाया खरीदारी का खर्च अगस्त महीने में Gold Rate में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। अब तक सोना करीब ₹9,630 महंगा हो चुका है। ऐसे में जिन लोगों के घर में शादी या कोई बड़ा समारोह है, उनके लिए गहनों की खरीदारी पहले के मुकाबले काफी महंगी पड़ सकती है। सोने की कीमत में इतनी तेजी के बाद आम खरीदार अब बाजार में भाव देखकर ही खरीदारी का फैसला कर रहे हैं। कई लोग जरूरत की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने पर भी विचार कर सकते हैं। Silver Price में भी जोरदार उछाल चांदी की कीमतों ने भी इस बार तेजी के मामले में सोने को पीछे छोड़ दिया है। एक दिन में ही Silver Rate में ₹15,985 की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद चांदी करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो के भाव पर पहुंच गई। चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर बाजार की मांग और निवेशकों की गतिविधियों का असर दिखाई देता है। क्यों महंगा हो रहा है Gold और Silver? सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल भी अहम भूमिका निभाती है। निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने पर अक्सर Gold की कीमतों को सहारा मिलता है। इसके अलावा डॉलर की चाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के भाव और घरेलू मांग जैसे कई कारक भी सोने-चांदी के रेट को प्रभावित करते हैं। खरीदारों के लिए बढ़ी मुश्किल Gold Price के लगातार बढ़ने से सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें आने वाले दिनों में आभूषण खरीदने हैं। शादी और त्योहारों के सीजन में सोने की मांग बढ़ने के साथ कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के साथ आम खरीदारों की नजर भी अब अगले कुछ दिनों के Gold Rate और Silver Rate पर रहेगी। Gold-Silver Price की एक नजर हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gautam Adani

Gautam Adani को US Court से राहत, Bribery और Fraud के आरोपों वाला केस हुआ खत्म

अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी (Gautam Adani) को अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी संघीय अदालत ने अडाणी और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह मामला नवंबर 2024 में सामने आया था और तब से ही अडाणी समूह के लिए बड़ी कानूनी चुनौती बना हुआ था। अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि अडाणी और उनके सहयोगियों ने भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना बनाई थी। साथ ही आरोप था कि इस कथित योजना की जानकारी अमेरिकी निवेशकों से छिपाई गई। अडाणी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया था। 2024 में शुरू हुआ था Adani का US Case इस पूरे विवाद की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी। अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी और अन्य लोगों पर कथित रिश्वत योजना से जुड़े आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष का कहना था कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए अधिकारियों को कथित तौर पर करीब 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी। इसके अलावा अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की गतिविधियों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी नहीं देने का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि, अडाणी समूह ने शुरुआत से ही किसी भी गलत काम से इनकार किया। Justice Department ने केस आगे बढ़ाने से किया इनकार मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिकी Justice Department ने अभियोजन को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद मामला अदालत के सामने पहुंचा। अमेरिकी जिला जज निकोलस गारॉफिस ने पहले DOJ से इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करने को कहा था। अमेरिकी सरकार की ओर से दलील दी गई कि मामले का बड़ा हिस्सा अमेरिका के बाहर हुई कथित गतिविधियों से जुड़ा है और इसे अमेरिकी कानून के तहत साबित करना मुश्किल हो सकता है। अभियोजन पक्ष ने मामले की विदेशी प्रकृति और कानूनी जटिलताओं को भी अपने फैसले की वजह बताया। अमेरिकी कोर्ट ने 10 अगस्त को खत्म किया मामला आखिरकार 10 अगस्त 2026 को अमेरिकी अदालत ने गौतम अडाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज कर दिए। इस फैसले के साथ 2024 से चल रहा हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामला अमेरिकी अदालत में समाप्त हो गया। हालांकि, फैसले के दौरान जज ने Justice Department की ओर से केस छोड़ने की प्रक्रिया को लेकर चिंता भी जताई। उनका सवाल मुख्य रूप से इस बात पर था कि मामले को खत्म करने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया गया और क्या जांच में शामिल अधिकारियों की राय को पर्याप्त महत्व दिया गया था। Adani Group के लिए बड़ी राहत अमेरिकी कोर्ट का यह फैसला अडाणी समूह के लिए इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह मामला लंबे समय से कंपनी की अंतरराष्ट्रीय छवि और कारोबार पर नजर रखने वाले निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। फैसले के बाद अडाणी समूह की कई कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक 11 अगस्त को समूह की कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में करीब 3 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। गौतम अडाणी ने फैसले का किया स्वागत केस खारिज होने के बाद गौतम अडाणी ने अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनका विश्वास सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में बना रहा। अडाणी के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 में आरोप सामने आने के बाद इस मामले ने दुनियाभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब अमेरिकी आपराधिक केस खत्म होने से समूह को इस मोर्चे पर राहत मिली है। क्या अब अडाणी पर कोई मामला नहीं बचा? यहां एक बात समझना जरूरी है। अमेरिकी अदालत द्वारा आपराधिक केस खारिज किए जाने का मतलब यह नहीं है कि अडाणी से जुड़े हर अमेरिकी कानूनी या नियामकीय मामले का भी अंत हो गया है। इससे संबंधित कुछ civil और regulatory proceedings अलग प्रक्रिया के तहत चल सकती हैं। Reuters के अनुसार, अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी ने संबंधित अमेरिकी Securities and Exchange Commission मामले में भुगतान को लेकर समझौता किया था। यानी फिलहाल सबसे बड़ी खबर यह है कि 2024 में शुरू हुआ अमेरिकी आपराधिक रिश्वत और Fraud Case अब अदालत में खत्म हो गया है। इससे गौतम अडाणी और Adani Group को निश्चित तौर पर बड़ी कानूनी राहत मिली है, जबकि इससे जुड़े अन्य मामलों की स्थिति अलग हो सकती है। Adani Case की पूरी कहानी: 2024 में लगे गंभीर आरोपों से लेकर Justice Department के केस वापस लेने और अब अमेरिकी कोर्ट द्वारा आरोप खारिज किए जाने तक यह मामला करीब दो साल तक चर्चा में रहा। ताजा फैसले के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस कानूनी राहत का अडाणी समूह के कारोबार और निवेशकों के भरोसे पर आगे क्या असर पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG और LNG सप्लायर, होर्मुज संकट के बाद बदली ऊर्जा रणनीति

होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट के बाद भारत की ऊर्जा आयात रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG (रसोई गैस) सप्लायर बन गया है और देश की जरूरत की करीब 67% एलपीजी अब अमेरिका से आ रही है। उन्होंने यह जानकारी शुक्रवार को कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में दी। LNG सप्लाई में भी अमेरिका पहले स्थान पर इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लायर भी बन गया है। मई से जुलाई 2026 के दौरान: इस अवधि में अमेरिका ने 2.19 मिलियन टन LNG की आपूर्ति की, जबकि नाइजीरिया 1.31 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं ओमान से LNG सप्लाई में 341% की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। भारत में गैस की मांग बढ़ी रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 में भारत में प्राकृतिक गैस की कुल मांग बढ़कर 197 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) पहुंच गई। मुख्य आंकड़े: सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सबसे बड़ा उपभोक्ता क्षेत्रवार गैस खपत में: हालांकि पेट्रोकेमिकल सेक्टर की मांग पिछले वर्ष की तुलना में अब भी करीब 48% कम बनी हुई है। वैश्विक कीमतें ऊंची, फिर भी मजबूत रहा आयात रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई स्पॉट LNG की कीमतें 20 डॉलर प्रति MMBtu से ऊपर बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत का LNG आयात मजबूत रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में गैस की मांग मजबूत बनी रहेगी, जबकि अगस्त में मौसमी कारणों से कुछ नरमी आ सकती है। होर्मुज संकट के बावजूद नहीं हुई ईंधन की कमी हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज मार्ग प्रभावित होने के बावजूद देश में एलपीजी या पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होने दी गई। उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले भारत: इसी समुद्री मार्ग से आयात करता था। संकट के दौरान भारत ने तुरंत वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाया और घरेलू उत्पादन में भी वृद्धि की। मंत्री ने कहा कि देश के 1.07 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से एक भी फ्यूल आउटलेट खाली नहीं रहा। 41 देशों तक बढ़ाया कच्चे तेल का आयात भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए: ‘समुद्र मंथन’ योजना को मिली मंजूरी सरकार ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए 84,000 करोड़ रुपये की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देना है। हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि ड्रिलिंग का कार्य निजी कंपनियां करेंगी। सरकार जोखिम वाले ऑफशोर प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ाने के लिए प्रति कुएं 650 करोड़ रुपये तक या ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराएगी। देश, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र की ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Gold

Gold Rate Today: सोना खरीदना हुआ महंगा, 6 दिनों में ₹5,501 की बढ़त

सोना (Gold) खरीदने वालों के लिए आज बाजार से बड़ी खबर सामने आई है। देश के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। सोना (Gold) आज ₹2,735 महंगा होकर ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। लगातार बढ़ते भाव ने खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं निवेशकों के लिए यह तेजी चर्चा का विषय बनी हुई है। 6 दिनों में सोने की कीमत में ₹5,501 का इजाफा सोने के भाव में तेजी का सिलसिला पिछले कुछ दिनों से जारी है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते 6 दिनों में सोने की कीमत ₹5,501 प्रति 10 ग्राम तक बढ़ चुकी है। इतनी तेज बढ़त ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। शादी-ब्याह के सीजन में सोना खरीदने वाले ग्राहक अब बढ़ी हुई कीमतों का सामना कर रहे हैं। Silver Rate Today: चांदी ने भी बनाया नया रिकॉर्ड सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। आज चांदी का भाव ₹931 बढ़कर ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। चांदी में आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। क्यों बढ़ रहे हैं Gold और Silver के दाम? सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई बाजार कारण माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की मांग, आर्थिक अनिश्चितता, निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर रुझान और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर दिखाई दे रहा है। सोना हमेशा से भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण निवेश विकल्प भी रहा है। ऐसे में कीमतों में तेजी आने पर खरीदारों के साथ-साथ निवेशकों की नजर भी बाजार की अगली चाल पर रहती है। ग्राहकों के लिए क्या है सलाह? बढ़ती कीमतों के बीच अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार भाव की जानकारी लेने के बाद ही फैसला करना बेहतर रहेगा। छोटी अवधि में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए खरीदारी करते समय सही समय और बजट का ध्यान रखना जरूरी है। फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही रिकॉर्ड स्तरों के आसपास कारोबार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Indian Stock Market

Indian Stock Market में तेजी: Banking और Energy Shares के दम पर Sensex-Nifty में बढ़त

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में आज खरीदारी का माहौल देखने को मिला। मजबूत बैंकिंग और Energy सेक्टर के प्रदर्शन के चलते घरेलू बाजार हरे निशान में कारोबार करता नजर आया। कारोबारी सत्र के दौरान Sensex करीब 250 अंक की बढ़त के साथ 78,850 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty ने भी मामूली तेजी दर्ज करते हुए 24,650 के आसपास कारोबार किया। Banking और Energy Stocks में दिखी मजबूत खरीदारी बाजार में तेजी का सबसे बड़ा कारण बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में आई खरीदारी रही। निवेशकों ने इन सेक्टरों के प्रमुख शेयरों में दिलचस्पी दिखाई, जिससे बाजार के प्रमुख इंडेक्स को मजबूती मिली। बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, वहीं Energy Stocks में मजबूती ने भी बाजार को सपोर्ट दिया। चुनिंदा बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को फायदा मिला। Investors की नजर Global Market और Economic Data पर मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और नए आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। निवेशक अब कंपनियों के प्रदर्शन, ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी बड़े फैसले से पहले बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और कंपनियों के फंडामेंटल्स को ध्यान में रखना चाहिए। Market Outlook: आगे कैसी रह सकती है चाल? फिलहाल बैंकिंग और Energy सेक्टर में मजबूती ने बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखा है। अगर घरेलू और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत जारी रहते हैं, तो बाजार में आगे भी चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, आज के कारोबारी सत्र में Banking और Energy Stocks की तेजी ने Stock Market को मजबूती दी और Sensex-Nifty बढ़त के साथ बंद होने की दिशा में आगे बढ़े। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court

Car-Bike Insurance पर Supreme Court सख्त, नई Car के लिए 4 साल और Bike के लिए 6 साल का Cover

अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो वाहन के इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर आपके काम की है। Supreme Court ने बिना वैध बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की जरूरत बताई है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब ऐसे इंतजाम पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहन सड़कों पर न चल सकें और उन्हें पेट्रोल-डीजल भी आसानी से न मिल पाए। इस मामले में नई गाड़ियों के लिए लंबी अवधि के बीमा कवर की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ है। इसके तहत नई कार के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की बात सामने आई है। इसका मकसद वाहन खरीदने के कुछ समय बाद इंश्योरेंस खत्म होने और उसके बाद बिना बीमा वाहन चलाने की समस्या पर लगाम लगाना है। बिना Insurance गाड़ी चलाने वालों पर बढ़ेगी सख्ती देश में कई वाहन ऐसे हैं जिनका इंश्योरेंस खत्म हो चुका होता है, लेकिन वे फिर भी सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। सड़क दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहनों के कारण पीड़ितों को मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि वैध Motor Insurance को लेकर नियमों के पालन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। Supreme Court की ओर से जिस व्यवस्था पर जोर दिया गया है, उसमें पेट्रोल पंप पर वाहन का Insurance Status चेक करने की संभावना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे Petrol या Diesel देने पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। नई Car खरीदने वालों के लिए 4 साल का Insurance नई कार खरीदने वालों के लिए 4 साल का बीमा कवर एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। इससे ग्राहक को कार खरीदने के बाद शुरुआती वर्षों में बीमा रिन्यू कराने की परेशानी कम होगी। इसी तरह नई बाइक खरीदने वालों के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। लंबी अवधि का बीमा होने से दोपहिया वाहन मालिकों के लिए पॉलिसी की वैधता बनाए रखना आसान हो सकता है। Petrol Pump पर कैसे होगी Insurance की जांच? अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पेट्रोल पंप पर वाहन का नंबर डालकर उसके Insurance की वैधता जांची जा सकती है। इसके लिए सरकारी वाहन रिकॉर्ड और Insurance Database को आपस में जोड़ना होगा। ऐसी व्यवस्था सफल रहती है तो पेट्रोल पंप पर ही बिना बीमा वाले वाहन की पहचान की जा सकेगी। इससे वाहन मालिकों पर अपने इंश्योरेंस को समय पर Renew कराने का दबाव बढ़ेगा। वाहन मालिक अभी से कर लें यह काम अगर आपके पास Car, Bike या कोई अन्य वाहन है, तो सबसे पहले अपनी Insurance Policy की Expiry Date चेक कर लें। बीमा खत्म हो गया है तो वाहन चलाने से पहले उसे Renew कराना जरूरी है। सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी Valid Insurance बेहद जरूरी है। खासकर पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। क्यों अहम है Supreme Court का यह निर्देश? इस पूरी कवायद का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों को बीमा के दायरे में लाना और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अगर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को भी वैध Insurance से जोड़ दिया जाता है, तो बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर प्रभावी रोक लग सकती है। यानी आने वाले समय में वाहन मालिकों के लिए RC और Driving Licence के साथ Valid Insurance रखना भी उतना ही जरूरी हो सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर इसका सीधा असर वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों, दोनों पर देखने को मिलेगा।
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, प्रदूषण से निपटने के लिए 334 टीमें करेंगी निगरानी; 1 नवंबर से सख्ती

दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के कारण इस बार पिछले वर्षों की तुलना में GRAP-1 देर से लागू हुआ है। सिरसा के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार 11 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम कर रही है। इसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। 334 टीमें करेंगी निगरानी, मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़कर होंगे 60 पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि आसपास के राज्यों और क्षेत्रों से 60 से 65% प्रदूषण आता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे NCR में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। 1 नवंबर से प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कदम सरकार की ओर से साझा की गई योजना के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय किए जाने हैं। 1. वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं देने का प्रावधान है। 2. बाहरी राज्यों के वाहनों पर प्रतिबंध योजना के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट देने की बात कही गई है। 3. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के आधे कर्मचारियों से घर से काम कराने की योजना भी शामिल है। 4. सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव योजना के मुताबिक, नगर निगम (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाने का प्रस्ताव है। 5. पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। मेट्रो पार्किंग को इससे छूट देने की बात कही गई है। 6. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की योजना भी बताई गई है।

दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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