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North Korea

उत्तर कोरिया (North Korea) ने पहली बार माना – रूस (Russia) के लिए यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) में भेजे सैनिक

उत्तर कोरिया (North Korea) ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने रूस (Russia) का समर्थन करते हुए यूक्रेन (Ukraine) के खिलाफ अपने सैनिक भेजे हैं। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, किम जोंग उन (Kim Jong Un) के आदेश पर, उनके सैनिकों ने रूस के साथ मिलकर “कुर्स्क (Kursk) सीमा क्षेत्र को पूरी तरह से मुक्त” किया। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले ही रूस के चीफ ऑफ स्टाफ वालेरी गेरासिमोव (Valery Gerasimov) ने उत्तर कोरियाई सैनिकों की “वीरता” की सराहना की थी। यह पहली बार है जब रूस ने भी सार्वजनिक रूप से उत्तर कोरियाई सैनिकों की भागीदारी को स्वीकार किया है। North Korea से भेजे गए लगभग 11,000 सैनिकों में से कम से कम 1,000 सैनिक युद्ध में मारे गए हैं।यूक्रेन (Ukraine) ने रूस के कुर्स्क (Kursk) क्षेत्र पर दोबारा नियंत्रण पाने के दावे को खारिज कर दिया है। वहीं अमेरिका (USA) ने उत्तर कोरिया को चेताया है कि उसे अब इस युद्ध को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी उठानी होगी। क्यों भेजे सैनिक? KCNA के मुताबिक, सैनिकों की तैनाती, प्योंगयांग और मास्को (Moscow) के बीच हुई एक आपसी रक्षा संधि के तहत की गई थी। किम जोंग उन ने कहा, “जो न्याय के लिए लड़े, वे हमारे देश की प्रतिष्ठा और सम्मान के प्रतिनिधि हैं।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुर्स्क (Kursk) में उत्तर कोरिया और रूस ने “रक्त से साबित भाईचारे और गठबंधन” का प्रदर्शन किया है, जो दोनों देशों के रिश्तों को हर स्तर पर मजबूत करेगा। KCNA ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिशन समाप्त होने के बाद उत्तर कोरियाई सैनिकों का क्या होगा और क्या उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दी जाएगी। किस तरह के सैनिक भेजे गए? सूत्रों के अनुसार, उत्तर कोरिया (North Korea) ने अपनी एक “एलीट यूनिट” स्टॉर्म कॉर्प्स (Storm Corps) से सैनिक भेजे थे। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये सैनिक आधुनिक युद्ध की वास्तविकताओं के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं। पूर्व ब्रिटिश सेना के टैंक कमांडर कर्नल हैमिश डी ब्रेटन-गॉर्डन (Col. Hamish de Bretton-Gordon) ने कहा था, “ये मुश्किल से प्रशिक्षित सैनिक हैं, जिन्हें रूसी अधिकारियों के तहत लड़ना पड़ रहा है, जिनकी भाषा वे समझते भी नहीं।” यूक्रेन के लिए क्यों बना खतरा? भले ही उत्तर कोरियाई सैनिकों को कमजोर माना गया हो, लेकिन यूक्रेन के शीर्ष सैन्य कमांडर जनरल ओलेक्जेंडर सिरस्की (Gen. Oleksandr Syrskyi) ने चेताया कि ये सैनिक यूक्रेनी मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये सैनिक बड़ी संख्या में हैं। 11,000 से 12,000 तक अत्यधिक प्रेरित और प्रशिक्षित सैनिक आक्रामक कार्रवाइयों में जुटे हैं। ये सोवियत रणनीतियों पर आधारित तरीकों से लड़ रहे हैं और अपनी भारी संख्या पर निर्भर कर रहे हैं।” ताज़ा खबरें और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहिए – Deshharpal
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Pope Francis

Pope Francis के Funeral में शामिल हुए Droupadi Murmu, Donald Trump, Volodymyr Zelenskyy समेत कई वर्ल्ड लीडर्स

रोम (इटली):वैटिकन सिटी के सेंट पीटर्स स्क्वायर में आज Pope Francis का अंतिम संस्कार आयोजित किया गया, जिसमें दुनियाभर से करीब 2 लाख श्रद्धालु और 130 से अधिक विदेशी प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वभर के कई प्रमुख नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी श्रद्धांजलि भारत की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Pope Francis को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और गोवा के डिप्टी स्पीकर जॉशुआ डी सूजा भी मौजूद रहे। अमेरिका से डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन पहुंचे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इसके अलावा वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी जिल बाइडेन भी उपस्थित रहे। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी पहुंचे यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और फर्स्ट लेडी ओलेना जेलेंस्का भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। खबरों के अनुसार, जेलेंस्की ने इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप से एक निजी बैठक भी की। अन्य देशों से भी पहुंचे प्रमुख नेता अंतिम संस्कार समारोह की खास बातें देश-दुनिया की नई खबरों के लिए जुड़े रहें Deshharpal के साथ
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India-Saudi Arabia

India-Saudi Arabia Strategic Partnership Council: रणनीतिक साझेदारी से बढ़े द्विपक्षीय रिश्ते

India-Saudi Arabia के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 2019 में रणनीतिक साझेदारी परिषद (Strategic Partnership Council) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के बाद एक उच्च-स्तरीय परिषद की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को दिशा देना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “सभी क्षेत्रों में सहयोग के एक नए युग की शुरुआत” बताया था। उन्होंने कहा था कि व्यापार, निवेश, सुरक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध पहले से ही मजबूत हैं और भविष्य में यह और गहरे होंगे। India-Saudi Arabia ऊर्जा और व्यापारिक साझेदारी में मजबूती India-Saudi Arabia के बीच व्यापारिक संबंध पिछले वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। आज भारत, सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि सऊदी अरब भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में सऊदी अरब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता रहा, जो ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे सहयोग को दर्शाता है। India-Saudi Arabia रक्षा और रणनीतिक सहयोग में प्रगति भारत और सऊदी अरब के बीच रक्षा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, क्षमतावृद्धि और संयुक्त अभ्यासों के जरिए रणनीतिक सहयोग को मजबूत किया है। इसके अलावा, सऊदी अरब ने संकट की घड़ी में भारत की मदद भी की। सूडान में संकट के दौरान सऊदी अरब ने 3,500 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में भारत को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया। यह सहायता जेद्दा के जरिए सुरक्षित ट्रांजिट सुनिश्चित करके दी गई थी। हज समझौता: लोगों के बीच संपर्क को मजबूती भारत और सऊदी अरब के बीच 2024 के लिए द्विपक्षीय हज समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत भारत को कुल 1,75,025 हज यात्रियों का कोटा आवंटित किया गया है। इनमें से 1,40,020 सीटें हज कमेटी के लिए और 35,005 सीटें हज ग्रुप ऑपरेटर्स के लिए निर्धारित की गई हैं। यह विशेष रूप से पहली बार हज पर जाने वालों के लिए लाभकारी है। इस्लामी जगत में सऊदी अरब की भूमिका और भारत के लिए रणनीतिक महत्व सऊदी अरब, इस्लामी दुनिया में एक प्रमुख शक्ति है और मध्य पूर्व में इसका बढ़ता प्रभाव भारत के साथ उसके संबंधों को और अधिक रणनीतिक बनाता है। इस दृष्टि से भारत-सऊदी अरब साझेदारी न केवल आर्थिक बल्कि भूराजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी यात्रा: संबंधों को और मजबूती देने का अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्तमान सऊदी अरब यात्रा भारत-सऊदी अरब संबंधों को और नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी का विस्तार हो रहा है और यह सहयोग भविष्य में और भी मजबूत होने की संभावना रखता है।
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Modi-Vance

Modi-Vance की मुलाकात: Trade Deal में प्रगति, बढ़ते Tariffs से पहले बातचीत तेज

नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2025 –Modi-Vance की मुलाकात, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों ने इस दिशा में “सार्थक प्रगति” की बात कही है। वेंस अपनी पत्नी उषा और तीन बच्चों के साथ चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। सोमवार रात प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सम्मान में अपने आवास पर डिनर भी आयोजित किया। Modi-Vance ने बढ़ते टैरिफ से पहले समझौते की कोशिश अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को जुलाई 9 तक बढ़े हुए टैरिफ से राहत दी है। भारत पर 27% तक के टैरिफ लागू होने थे, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 90 दिनों की मोहलत दी, जिससे बातचीत को गति मिली है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार असंतुलन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। वेंस से मुलाकात के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने बयान जारी कर भारत के साथ “व्यापार में गंभीर असमानता” की बात दोहराई। भारत ने कम किए टैरिफ, लेकिन कृषि क्षेत्र बना रोड़ा भारत ने हाल के महीनों में कई उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की है, लेकिन कृषि क्षेत्र पर अमेरिका को ज्यादा पहुंच देने की मांग अब भी विवाद का कारण बनी हुई है। ट्रंप चाहते हैं कि भारत अमेरिकी मक्का (कॉर्न) खरीदे, लेकिन भारत ने कृषि को लेकर हमेशा से सख्त रुख अपनाया है। Modi-Vance ने 🇮🇳 रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर भी चर्चा Modi-Vance ने के बीच सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि रक्षा, रणनीतिक तकनीक और ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि वे “अमेरिका के साथ व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में पारस्परिक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे राष्ट्रपति ट्रंप की इस साल भारत यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ट्रंप के इस साल क्वाड समिट के दौरान भारत आने की संभावना है। वेंस परिवार की भारत यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र उप-राष्ट्रपति वेंस की यह यात्रा व्यक्तिगत और सांस्कृतिक रंगों से भी भरपूर रही। उनकी पत्नी उषा वेंस के माता-पिता आंध्र प्रदेश से अमेरिका गए थे। यह दंपति अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराने के लिए उत्साहित है। वेंस के तीन बच्चों की पारंपरिक भारतीय परिधानों में तस्वीरें सोशल मीडिया और भारतीय मीडिया में छाई हुई हैं — दोनों बेटे कुर्ता-पायजामा में और तीन वर्षीय मिराबेल लहंगे में नजर आईं। जयपुर से आगरा तक: सांस्कृतिक सफर मोदी से मुलाकात के बाद वेंस परिवार जयपुर रवाना हुआ, जहां उन्होंने ऐतिहासिक आमेर किले का दौरा किया। वे जयपुर में भारत-अमेरिका संबंधों पर एक भाषण भी देंगे। बुधवार को परिवार आगरा जाकर ताजमहल का दीदार करेगा और फिर गुरुवार को अमेरिका के लिए रवाना होगा। लेटेस्ट इंटरनेशनल न्यूज, ट्रेड अपडेट्स और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स के लिए जुड़े रहें Deshharpal.com से।
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भारत आए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस: 3 महीने में 5 विदेशी दौरे और हर जगह विवाद, अब भारत कैसे करेगा स्वागत?

BHARAT आए AMERICA के VICE PRESIDENT JD VANCE: 3 महीने में 5 विदेशी दौरे और हर जगह विवाद, अब भारत कैसे करेगा स्वागत?

नई दिल्ली – अमेरिका के नए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं। वजह है उनके एक के बाद एक विदेशी दौरे – और हर दौरे के बाद उठता कोई न कोई विवाद। अब जब वे भारत पहुंचे हैं, तो सवाल ये है – भारत उनका स्वागत कैसे करेगा और रिश्तों को कैसे संभालेगा? 3 महीने में 5 दौरे, हर जगह विवाद जेडी वेंस ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से अब तक 5 देशों का दौरा कर लिया है – और ये सब सिर्फ तीन महीने के अंदर। हर दौरे के बाद अमेरिका को सफाई देनी पड़ी या संबंधों को संभालना पड़ा। भारत को क्यों है ये दौरा खास? भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और एशिया की राजनीति – हर स्तर पर दोनों देश एक-दूसरे के नजदीक आ रहे हैं। भारत के लिए ये दौरा एक मौका भी है और चुनौती भी। जेडी वेंस के साथ बातचीत में ये देखा जाएगा कि अमेरिका की नई सरकार भारत को किस नजर से देखती है। जेडी वेंस का राजनीतिक स्टाइल वेंस को अमेरिका में बोल्ड और विवादास्पद नेता के रूप में जाना जाता है। वे बिना लाग-लपेट के बात करते हैं, जो कई बार राजनयिकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देती है।लेकिन वहीं, वे एक ईमानदार और स्पष्ट सोच वाले नेता भी माने जाते हैं, जो अमेरिका की घरेलू समस्याओं को समझते हैं। भारत की तैयारी भारत इस दौरे को डिप्लोमैटिक बैलेंस के रूप में देख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय इस बात को लेकर सतर्क हैं कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जाए।सूत्रों के मुताबिक, व्यापार, तकनीक ट्रांसफर, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बातचीत होगी। क्या कहता है आम भारतीय? दिल्ली की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, लोग जेडी वेंस को लेकर मिश्रित भावनाएं रखते हैं। कोई उन्हें अमेरिका का ट्रंप 2.0 कहता है, तो कोई उन्हें बदलाव की उम्मीद मानता है। रजनीश कुमार, एक युवा उद्यमी कहते हैं – “हमें उम्मीद है कि भारत को मजबूत साझेदार की तरह देखा जाएगा, न कि सिर्फ एक बाजार की तरह।”
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जिस बांग्लादेश की मदद में भारत ने लगाए हजारों करोड़, अब वही दिखा रहा आंखें – क्या PM मोदी देंगे करारा जवाब?

जिस BANGLADESH की मदद में भारत ने लगाए हजारों करोड़, अब वही दिखा रहा आंखें – क्या PM मोदी देंगे करारा जवाब?

भारत ने बांग्लादेश को हमेशा एक अच्छे पड़ोसी और दोस्त की तरह देखा। जब भी बांग्लादेश को ज़रूरत पड़ी, भारत ने दिल खोलकर मदद की – फिर चाहे बात आज़ादी की लड़ाई की हो, विकास परियोजनाओं की या आर्थिक सहायता की। लेकिन आज हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। भारत की दरियादिली पर बांग्लादेश की सियासत भारी?बीते कुछ समय में बांग्लादेश की ओर से ऐसे बयान और कदम सामने आ रहे हैं, जो भारत के लिए चौंकाने वाले हैं। बांग्लादेश सरकार का चीन के साथ बढ़ता गठजोड़, भारत के खिलाफ तल्ख़ रुख और कई द्विपक्षीय मुद्दों पर टकराव – ये सभी इशारा कर रहे हैं कि रिश्तों में दरार आ चुकी है। हजारों करोड़ की मदद – लेकिन फिर भी उपेक्षा!भारत ने अब तक बांग्लादेश को करीब 8 बिलियन डॉलर (65 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) की आर्थिक सहायता दी है। सड़कें, रेल, बिजली और शिक्षा – हर सेक्टर में भारत ने अपना हाथ बढ़ाया। लेकिन इसके बदले में हाल ही में जो रवैया देखने को मिल रहा है, वो कड़वा है। चीन का खेल और बांग्लादेश की चुप्पीबांग्लादेश अब चीन की ओर झुकता दिख रहा है। चीन वहाँ भारी निवेश कर रहा है और रणनीतिक तौर पर भारत की घेराबंदी की कोशिश कर रहा है। ऐसे में बांग्लादेश की चुप्पी और भारत के खिलाफ बयान चिंता का कारण हैं। क्या मोदी सरकार दिखाएगी सख्ती?मोदी सरकार अब इस पूरे मामले पर बारीकी से नज़र रखे हुए है। जानकारों का मानना है कि भारत जल्द ही कड़ा संदेश दे सकता है। यह वक्त है जब भारत को अपनी उदारता और राष्ट्रीय हितों में संतुलन बैठाना होगा।
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Saudi Arabia

PM Modi की Saudi Arabia यात्रा 22-23 April को, Strategic Ties और Trade Cooperation पर होगी चर्चा: MEA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22-23 अप्रैल 2025 को Saudi Arabia की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर हो रही है। यह मोदी जी की सऊदी अरब की तीसरी यात्रा होगी, इससे पहले वे 2016 और 2019 में वहां गए थे।​ 🇮🇳 भारत-Saudi Arabia रणनीतिक साझेदारी: एक नया अध्याय प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सितंबर 2023 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की भारत यात्रा के बाद हो रही है, जब उन्होंने G20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद की पहली बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस परिषद की स्थापना 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। प्रमुख एजेंडा: ऊर्जा, सुरक्षा और व्यापार इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेता ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य देखभाल और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की प्रगति पर भी विचार किया जाएगा, जो सितंबर 2023 में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया गया था। ​ भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका सऊदी अरब में भारतीय प्रवासी समुदाय इस यात्रा को लेकर उत्साहित है। रियाद और जेद्दा में भारतीय समुदाय के संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे पहले, 2024 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सऊदी अरब में भारतीय दूतावास और सऊदी खेल मंत्रालय के सहयोग से योग कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें सऊदी महिला प्रशिक्षकों ने भी भाग लिया था। आर्थिक संबंधों में वृद्धि भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2022-2023 में $52.8 बिलियन से अधिक रहा। दोनों देश ऊर्जा, पेट्रोलियम भंडारण, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन उत्पादन, और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर प्रदान करेगी। इससे न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी दोनों देशों की भूमिका सुदृढ़ होगी।
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मेरठ में आंधी-बारिश का कहर: दो मकान गिरे, 9 महीने की मासूम समेत दो की दर्दनाक मौत; कई राज्यों में मौसम ने बदला मिजाज

MEERUT में आंधी-बारिश का कहर: दो मकान गिरे, 9 महीने की मासूम समेत दो की दर्दनाक मौत; कई राज्यों में मौसम ने बदला मिजाज

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीती रात तेज आंधी और बारिश ने बड़ा कहर मचाया। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के चलते दो मकान ढह गए। इस हादसे में एक 9 महीने की मासूम बच्ची और एक बुजुर्ग की जान चली गई। परिवार के लिए यह एक ऐसा ग़म बन गया है, जो उम्र भर नहीं भरेगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसा देर रात हुआ, जब सभी लोग गहरी नींद में थे। अचानक ज़ोरदार आवाज़ के साथ दीवारें गिर गईं और सब कुछ मलबे में तब्दील हो गया। पड़ोसियों ने तुरंत मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक दो लोगों की सांसे थम चुकी थीं। राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में ओलावृष्टि: दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में मौसम ने करवट ली और जोरदार ओले गिरे। खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। किसान परेशान हैं, क्योंकि उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। राजस्थान में हीटवेव का अलर्ट: राजस्थान के कई जिलों में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मौसम विभाग ने हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। जयपुर, बीकानेर, जोधपुर समेत कई जगहों पर तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। लोगों को दिन में बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। देश के कोने-कोने में मौसम का कहर:एक ओर बारिश और तूफान जान ले रहे हैं, तो दूसरी ओर गर्मी से लोग बेहाल हैं। मौसम का यह बदलता रूप आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। ज़रूरत है सतर्क रहने की, ताकि जान-माल का नुकसान रोका जा सके।
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क्या हिंदू कार्ड से बंगाल फतेह करेगी BJP? 2026 के मिशन की रणनीति संघ ने तय की, 4% वोट दिला सकता है सत्ता

क्या HINDU CARD से BENGAL फतेह करेगी BJP? 2026 के मिशन की रणनीति संघ ने तय की, 4% वोट दिला सकता है सत्ता KOLKATA।

क्या बंगाल में फिर से सियासी तूफान लाने की तैयारी में है बीजेपी? 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत की सक्रियता कुछ बड़ा संकेत दे रही है। सूत्रों की मानें तो संघ ने बंगाल में हिंदू वोट बैंक को जोड़ने के लिए एक ठोस रणनीति बना ली है। टारगेट है सिर्फ 4% अतिरिक्त वोट… जो गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। क्यों खास है ये 4%? बीजेपी को साल 2021 में लगभग 38% वोट मिले थे, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने 47.9% वोटों के साथ सत्ता कायम रखी। विश्लेषकों की मानें तो अगर बीजेपी को 2026 में 42% से ज्यादा वोट मिलते हैं, तो वो सीधे सरकार बनाने की दौड़ में आ सकती है। और यही 4% वोट अब बीजेपी और संघ का फोकस बन गए हैं। भागवत ने तय की दिशा मोहन भागवत का बंगाल दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं थी। उन्होंने संघ के स्थानीय कार्यकर्ताओं और बीजेपी के रणनीतिकारों से लंबी बैठकें कीं। बैठक में साफ कहा गया कि बंगाल में ‘हिंदू पहचान’ को केंद्र में लाकर जनमानस को जोड़ा जाएगा। क्या बदलेगा मुद्दों का रुख? जहां TMC ममता बनर्जी के विकास मॉडल और बंगाली अस्मिता की बात करती है, वहीं बीजेपी अब मंदिर, गोरक्षा, लव जिहाद और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दों को फिर से धार दे सकती है। संघ का मानना है कि बंगाल में हिंदू समाज के कई वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इन्हीं भावनाओं को चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। ग्राउंड लेवल पर तैयारी शुरू संघ की शाखाएं गांव-गांव में तेज़ी से फैल रही हैं। युवाओं को जोड़ने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, धर्म-सभाएं और सेवा कार्यों पर ज़ोर है। बीजेपी भी बूथ लेवल मैनेजमेंट को मज़बूत कर रही है। ममता के लिए खतरे की घंटी? अगर बीजेपी अपना 4% टारगेट पूरा कर लेती है, तो ममता बनर्जी की सत्ता को सीधी चुनौती मिल सकती है। मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण TMC के पक्ष में पहले से है, लेकिन अगर हिंदू वोट एकजुट हो गया, तो तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
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PM Modi और Elon Musk

PM Modi और Elon Musk की बातचीत: टेक्नोलॉजी, स्पेस और AI में भारत-अमेरिका साझेदारी को नया मुकाम

भारत और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसी कड़ी में PM Modi और Elon Musk Tesla तथा SpaceX के CEO के बीच एक अहम बातचीत हुई। पीएम मोदी ने X (पूर्व में Twitter) पर जानकारी दी कि उन्होंने मस्क से पहले की वाशिंगटन बैठक में उठाए गए मुद्दों पर फिर से चर्चा की है। “Spoke to Elon Musk and talked about various issues, including the topics we covered during our meeting in Washington DC earlier this year,” – PM Modi on X उन्होंने यह भी कहा कि भारत टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्पेस, AI और इनोवेशन में सहयोग की अपार संभावनाएं Elon Musk, जिनकी कंपनियां Tesla और SpaceX टेक्नोलॉजी और स्पेस इनोवेशन की अगली पंक्ति में खड़ी हैं, ने फरवरी 2024 में वाशिंगटन में पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उस समय मस्क अपने तीन बच्चों के साथ Blair House पहुंचे थे, जहां प्रधानमंत्री रुके हुए थे। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने स्पेस एक्सप्लोरेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सस्टेनेबल डेवलपमेंट, और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ में भारत-अमेरिका सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया। MEA (विदेश मंत्रालय) के अनुसार, बातचीत में गुड गवर्नेंस, एंटरप्रेन्योरशिप, और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती देने की बात कही गई। PM Modi और Elon Musk की पुरानी मुलाकातें यह पहला मौका नहीं है जब मोदी और मस्क आमने-सामने आए हों। इससे पहले 2015 में California और 2023 में New York में दोनों की मुलाकात हो चुकी है। हर बार दोनों नेताओं के बीच भविष्य की तकनीकों पर संवाद हुआ है, जो भारत की डिजिटल और वैज्ञानिक दिशा को मजबूत करता है। Elon Musk: टेक्नोलॉजी के साथ पॉलिसी में भी प्रभावशाली Elon Musk को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देखा गया है। वे Department of Government Efficiency (DOGE) का हिस्सा रहे हैं, जिसका उद्देश्य सरकारी खर्चों में कटौती और नीतिगत सुधार करना था।
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Iran का दावा- कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम और ड्रोन हैंगर किए तबाह

Iran का दावा- कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम और ड्रोन हैंगर किए तबाह

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। America ने Iran–Iraq सीमा के पास सैन्य कार्रवाई करते हुए हमला किया, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हमले के जवाब में ईरान ने भी बड़ा दावा किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी जवाबी कार्रवाई में कुवैत स्थित अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली और ड्रोन हैंगर को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि, अमेरिका की ओर से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सीमा पर बढ़ा तनाव जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान समर्थित ठिकानों को निशाना बनाकर यह कार्रवाई की। इस दौरान हुए हमले में दो लोगों की मौत हुई, जबकि कुछ अन्य घायल होने की भी खबर है। घटना के बाद सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। ईरान का पलटवार ईरान का कहना है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की। ईरानी मीडिया के अनुसार, कुवैत में मौजूद अमेरिकी Patriot Air Defense System और ड्रोन रखने वाले हैंगर को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। दुनिया की बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Abhijeet Deepke ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगाए पत्थरबाजी के आरोप

Abhijeet Deepke ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगाए पत्थरबाजी के आरोप

Abhijeet Deepke ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं, उन्होंने दावा किया कि हिंसा के दौरान भाजपा के लोग ही पत्थरबाजी कर रहे थे और पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। अभिजीत दीपके ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। मेट्रो स्टेशन बंद होने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट इधर, हिंसा के बाद सुरक्षा कारणों से कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करेगा। सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद माना जा रहा है कि अदालत पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर उचित आदेश जारी कर सकती है। लोगों की परेशानी बढ़ी मेट्रो स्टेशन बंद होने से रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द हालात सामान्य कर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बहाल करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। जांच और कार्रवाई पर सबकी नजर फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच लोगों की उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America

America-Iran Tension: ईरान पर US की बड़ी कार्रवाई, Trump का दावा- ‘Iran बुरी तरह पिट रहा’

मध्य पूर्व (Middle East) में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। America और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर अमेरिका ने लगातार 12वें दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, तो दूसरी ओर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार दोनों पर दबाव बढ़ गया है। लगातार 12वें दिन US Airstrikes, कई ठिकाने बने निशाना America सेना ने Iran के चार प्रांतों में मौजूद सैन्य अड्डों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और ड्रोन से जुड़े ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन ऑपरेशनों का उद्देश्य क्षेत्र में ईरान की सैन्य गतिविधियों को सीमित करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान लगातार 12 दिनों से जारी है और आने वाले दिनों में भी हालात के मुताबिक आगे की रणनीति तय की जाएगी। Trump का दावा- “Iran लगातार कमजोर हो रहा” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान पर की जा रही कार्रवाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता लगातार कमजोर हो रही है और यदि अमेरिकी हितों या सहयोगी देशों को निशाना बनाया गया तो जवाब और भी सख्त होगा। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। Houthi Rebels ने Saudi के दो Oil Tankers पर किया हमला इसी बीच ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया है। विद्रोहियों के अनुसार यह कार्रवाई उनके समुद्री अभियान का हिस्सा थी। हमले के बाद जहाजों की आवाजाही वाले अहम समुद्री मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी बड़े तेल रिसाव या भारी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। Global Oil Market पर बढ़ा दबाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस स्थिति में दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। क्या कूटनीति से निकलेगा समाधान? हालांकि सैन्य कार्रवाई जारी है, लेकिन अमेरिका ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाता है तो बातचीत की संभावना बनी रह सकती है। वहीं ईरान ने भी साफ संकेत दिए हैं कि वह लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। Middle East Crisis पर दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां, तेल टैंकरों पर हमले और लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Slavia Monte Carlo

Škoda Slavia Monte Carlo Limited Edition: नए Dual-Tone Colors और दमदार TSI Engine के साथ हुई पेश

अगर आप ऐसी प्रीमियम सेडान की तलाश में हैं जो सड़क पर सबसे अलग नजर आए, तो Škoda Auto India ने आपके लिए एक खास पेशकश की है। कंपनी ने अपनी लोकप्रिय Slavia Monte Carlo को अब दो नए Dual-Tone Color Options – Shimla Green और Steel Grey – के साथ लॉन्च किया है। खास बात यह है कि इन नए रंगों वाली कार की केवल 200 यूनिट्स ही बनाई जाएंगी, जिससे इसकी एक्सक्लूसिविटी और भी बढ़ जाती है। नई लिमिटेड एडिशन Slavia Monte Carlo उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो सिर्फ एक कार नहीं बल्कि एक अलग पहचान और प्रीमियम ड्राइविंग अनुभव चाहते हैं। दो नए रंगों से और आकर्षक बनी Slavia Monte Carlo Škoda ने Slavia Monte Carlo में पहली बार Shimla Green और Steel Grey जैसे नए डुअल-टोन कलर शामिल किए हैं। इन रंगों के साथ कार का स्पोर्टी डिजाइन पहले से ज्यादा प्रीमियम और स्टाइलिश नजर आता है। कंपनी का कहना है कि यह एडिशन Monte Carlo की खास पहचान को और मजबूत करेगा। यह लिमिटेड एडिशन केवल 1.0 TSI Automatic और 1.5 TSI DSG Automatic वेरिएंट्स में उपलब्ध कराया गया है। ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला Škoda Auto India के ब्रांड डायरेक्टर आशीष गुप्ता के मुताबिक, Slavia Monte Carlo को भारतीय ग्राहकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। इसकी स्पोर्टी स्टाइलिंग, शानदार ड्राइविंग अनुभव और मोटरस्पोर्ट विरासत लोगों को लगातार आकर्षित कर रही है। उन्होंने कहा कि नए रंग विकल्प ग्राहकों को ज्यादा पर्सनलाइजेशन और एक्सक्लूसिविटी का अनुभव देंगे। डिजाइन में मिलेगा वही स्पोर्टी Monte Carlo लुक नई कलर स्कीम के अलावा Slavia Monte Carlo के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें पहले की तरह ब्लैक फिनिश एक्सटीरियर, Monte Carlo बैजिंग, रेड और ब्लैक थीम वाला प्रीमियम इंटीरियर, स्पोर्टी सीट्स और फीचर-लोडेड केबिन मिलता है। यही स्पोर्टी स्टाइल इसे Slavia लाइनअप के सबसे आकर्षक मॉडल्स में शामिल करता है। दमदार इंजन के साथ शानदार परफॉर्मेंस Slavia Monte Carlo में कंपनी दो पेट्रोल इंजन विकल्प देती है। 1.0-लीटर TSI इंजन 1.5-लीटर TSI इंजन दोनों इंजन बेहतर परफॉर्मेंस, स्मूद ड्राइविंग और लंबी दूरी के सफर के लिए बेहतरीन माने जाते हैं। Active Cylinder Technology से होगी ईंधन की बचत 1.5 TSI इंजन में मिलने वाली Active Cylinder Technology (ACT) इसे अपने सेगमेंट में खास बनाती है। सामान्य ड्राइविंग के दौरान जब इंजन पर कम लोड होता है, तब यह तकनीक अपने आप दो सिलेंडर बंद कर देती है। इससे ईंधन की खपत कम होती है और बेहतर माइलेज मिलता है। इसके अलावा इंजन में Plasma-Coated Cylinder Liners भी दिए गए हैं, जो इंजन की दक्षता और हीट मैनेजमेंट को बेहतर बनाते हैं। Monte Carlo नाम के पीछे है रेसिंग की विरासत Škoda के लिए Monte Carlo सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि उसकी मोटरस्पोर्ट विरासत का प्रतीक है। कंपनी पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से रैली रेसिंग से जुड़ी रही है और Rallye Monte Carlo में कई यादगार सफलताएं हासिल कर चुकी है। हाल ही में Škoda की पांच कारों—Slavia Monte Carlo, Kushaq Monte Carlo, Kylaq, Kodiaq और Octavia RS—ने मिलकर India Book of Records और Asia Book of Records में ‘The Fastest Multi-Car Relay of a Single Manufacturer on a Circuit’ का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। कोयंबटूर के CoASTT ट्रैक पर इन कारों ने कुल 12 मिनट 30.97 सेकंड का लैप टाइम दर्ज किया। क्यों खरीदें यह Limited Edition? अगर आप ऐसी सेडान चाहते हैं जो शानदार डिजाइन, दमदार इंजन, आधुनिक तकनीक और सीमित उपलब्धता के कारण सड़क पर अलग पहचान बनाए, तो नई Škoda Slavia Monte Carlo Limited Edition आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। नए रंग, स्पोर्टी डिजाइन और प्रीमियम फीचर्स इसे पहले से ज्यादा खास बनाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament के बाहर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने, राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में शामिल

Parliament के बाहर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने, राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में शामिल

Parliament के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को संसद परिसर के बाहर सत्ता पक्ष (NDA) और विपक्ष (INDIA गठबंधन) के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी-अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल हुए। संसद के बाहर कुछ देर तक माहौल काफी गर्म रहा। दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष पर निशाना साधते रहे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया। संसद के अंदर भी नहीं चल सकी कार्यवाही बाहर के हंगामे का असर संसद के भीतर भी देखने को मिला। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने अपने मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध किया। लगातार शोर-शराबे और हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। स्थिति को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। मुद्दों को लेकर जारी है राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार अपने पक्ष को मजबूती से रख रही है। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। आने वाले दिनों में भी संसद के मानसून सत्र के दौरान हंगामे और तीखी बहस देखने को मिल सकती है, क्योंकि कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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