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नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह नजरबंद, मुकदमा चलाने की तैयारी, राजा समर्थक बड़े नेता गिरफ्तार

नेपाल में हाल ही में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह के समर्थकों द्वारा राजशाही की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेपाल में राजशाही की वापसी संभव नहीं है। प्रधानमंत्री ओली ने सुझाव दिया कि यदि पूर्व राजा को अपनी लोकप्रियता पर विश्वास है, तो उन्हें संविधान के अनुसार अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए नेपाल में राजशाही समर्थक गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है, जिसमें पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह की सक्रिय भूमिका की चर्चा हो रही है। राजशाही समर्थक पार्टी ‘राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी’ भी देश के विभिन्न हिस्सों में राजशाही की बहाली के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित कर रही है प्रधानमंत्री ओली ने इन गतिविधियों के पीछे भारत की भूमिका का आरोप लगाया है और संसद में इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह को गिरफ्तार कराने की भी कसम खाई है इन घटनाओं के बीच, नेपाल की राजनीतिक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पूर्व राजा के समर्थकों की बढ़ती सक्रियता और सरकार की सख्त प्रतिक्रिया से देश में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति में और भी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
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भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में भारी तबाही, 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका

भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में भारी तबाही, 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका

म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार को आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, इस भूकंप में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है। भूकंप की तीव्रता 7.7 थी और इसके झटके भारत, बांग्लादेश और चीन तक महसूस किए गए। बैंकॉक में गिरी 30 मंजिला इमारत थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में इस भूकंप के कारण एक 30 मंजिला इमारत गिर गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 110 लोग मलबे में दब गए। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। म्यांमार में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इस आपदा के कारण म्यांमार के 6 राज्यों में और पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लागू कर दी गई है। https://twitter.com/Top_Disaster/status/1905545455364194747 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि यह म्यांमार और थाईलैंड में पिछले 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप है। लोग डर के कारण घरों से बाहर आ गए और कई जगहों पर सड़कें फट गईं। भारत ने भेजी राहत सामग्री भूकंप के तुरंत बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार ने म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री की पहली खेप भेजी है। इस मिशन को ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ नाम दिया गया है। राहत सामग्री में दवाइयां, भोजन और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई आपबीती बैंकॉक में रह रहे भारतीय नागरिकों ने इस भूकंप के अनुभव साझा किए। एक व्यक्ति ने कहा, ‘हमने अपनी आंखों के सामने बिल्डिंग गिरते देखी, यह बहुत डरावना था। ऐसा पहले कभी नहीं देखा।’ अभी भी जारी हैं राहत कार्य मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर लोगों की मदद कर रहे हैं।
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ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते

ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते? जानिए इस विवाद का सच

अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में हाल ही में तनाव बढ़ गया है। इसकी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान हैं, जिनमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका में मिलाने का सुझाव दिया। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया। इस बयानबाजी के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं कि इस विवाद का क्या असर हो सकता है। ट्रंप ने दिया कनाडा को अमेरिका में शामिल करने का सुझाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि अमेरिका हर साल कनाडा को 100 अरब डॉलर से अधिक की सब्सिडी देता है। इस आधार पर उन्होंने सुझाव दिया कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बना देना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि इससे दोनों देशों को आर्थिक और सुरक्षा लाभ होंगे। ट्रूडो ने दिया करारा जवाब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को सख्ती से नकार दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा हमेशा स्वतंत्र और संप्रभु रहेगा। ट्रूडो ने स्पष्ट किया कि उनका देश अमेरिका के अधीन नहीं जाएगा और अपनी स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा। क्या कनाडा ने अमेरिका से तोड़ दिए रिश्ते? हालांकि, इस बयानबाजी के बाद भी कनाडा और अमेरिका के बीच राजनयिक और व्यापारिक रिश्ते यथावत हैं। अभी तक दोनों देशों ने अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों में तनाव जरूर बढ़ गया है। इस विवाद का असर क्या होगा? इस तरह के बयानों से दोनों देशों के व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रूडो सरकार अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह विवाद और कितना गहराता है या फिर दोनों देश इसे सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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Vladimir Putin India Visit Update; PM Narendra Modi

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आएंगे, तैयारियां शुरू

मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल भारत की यात्रा करेंगे। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के दौरे की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने इस यात्रा की सटीक तारीख या महीने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लावरोव ने यह बयान ‘रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ समिट के दौरान दिया। इस बैठक का आयोजन रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (RIAC) द्वारा किया गया था। मोदी के रूस दौरे के बाद पुतिन भारत आएंगे रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की थी। अब हमारी बारी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत सरकार का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2024 में दो बार रूस की यात्रा की थी। वह 22 अक्टूबर को BRICS समिट के लिए रूस गए थे। इससे पहले, जुलाई में भी उन्होंने रूस का दौरा किया था और इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का आमंत्रण दिया था। 2021 में आखिरी बार भारत आए थे पुतिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पिछली बार 6 दिसंबर 2021 को भारत का दौरा किया था। वह केवल चार घंटे के लिए भारत आए थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच 28 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें सैन्य और तकनीकी समझौते भी शामिल थे। यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद यह राष्ट्रपति पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 2030 तक के आर्थिक रोडमैप को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और रूस अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करते हुए इसे 100 अरब डॉलर से अधिक करने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल, दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है। अरेस्ट वारंट के बाद अंतरराष्ट्रीय दौरे से बचते रहे पुतिन मार्च 2023 में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। उन पर यूक्रेन में बच्चों के अपहरण और जबरन डिपोर्टेशन के आरोप लगे थे। यह पहली बार था जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के किसी स्थायी सदस्य देश के शीर्ष नेता के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया। इस वारंट के बाद से पुतिन विदेश यात्राओं से बचते रहे हैं। वह 2023 में भारत में हुए G20 समिट में शामिल नहीं हुए थे और इस साल ब्राजील में हो रहे G20 समिट में भी हिस्सा नहीं लिया है। उनकी जगह दोनों सम्मेलनों में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया। राष्ट्रपति पुतिन की आगामी भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की

ज़ेलेंस्की को उम्मीद – अमेरिका रूसी मांगों के सामने मज़बूती से खड़ा रहेगा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका रूस की शर्तों के सामने झुकेगा नहीं और मजबूती से खड़ा रहेगा। रूस ने काला सागर में युद्धविराम के लिए शर्त रखी है कि पश्चिमी देश उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। रूस की नई शर्तें और ज़ेलेंस्की की प्रतिक्रिया मंगलवार को रूस ने घोषणा की कि वह काला सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए युद्धविराम के लिए तैयार है। लेकिन उसने शर्त रखी कि पश्चिमी देश रूस के खाद्य और उर्वरक व्यापार से जुड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। ज़ेलेंस्की ने पेरिस में यूरोप के कई पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका रूसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। जब बीबीसी ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका रूस की इन मांगों को मान सकता है, तो उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। भगवान करे, वे मजबूती से खड़े रहें। लेकिन देखना होगा कि आगे क्या होता है।” अमेरिका और यूरोप का जवाब व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच सऊदी अरब में तीन दिन की बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी है। लेकिन कुछ ही घंटे बाद क्रेमलिन ने बयान जारी कर कुछ शर्तें रख दीं। रूस ने मांग की है कि उसके कृषि व्यापार से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम SWIFT तक दोबारा पहुंच दी जाए। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार इस अनुरोध पर विचार कर रही है। लेकिन यूरोपीय संघ (EU) ने साफ कर दिया कि जब तक रूसी सेना पूरी तरह यूक्रेनी सीमा से पीछे नहीं हटती, तब तक प्रतिबंधों को हटाने का सवाल ही नहीं उठता। अमेरिका में रूस के प्रभाव की चिंता ज़ेलेंस्की ने कहा कि वे अमेरिकी समर्थन के लिए आभारी हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि कुछ लोग “रूसी प्रचार” के प्रभाव में आ सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम रूस के इन झूठे नैरेटिव्स को स्वीकार नहीं कर सकते।” जब उनसे पूछा गया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का रिश्ता उनके साथ ज्यादा अच्छा है या पुतिन के साथ, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता। यह कहना मुश्किल है। मैं नहीं जानता कि उनकी कितनी बार किससे बातचीत हुई है।” यूरोप की भूमिका और ट्रंप के दूत की टिप्पणी पिछले हफ्ते ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ़ ने कहा था कि यूरोप द्वारा यूक्रेन की मदद के लिए “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” (इच्छुक देशों का गठबंधन) बनाने का प्रयास बेकार है। इस पर ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह इस पर जल्दबाज़ी में निष्कर्ष नहीं निकालेंगे। उन्होंने कहा, “जहां तक मैं जानता हूं, विटकॉफ़ को रियल एस्टेट खरीदने और बेचने का अच्छा अनुभव है, लेकिन यह मामला अलग है।” इतिहास में ज़ेलेंस्की की पहचान? बीबीसी ने ज़ेलेंस्की से पूछा कि भविष्य में इतिहास उन्हें कैसे याद करेगा – यूक्रेन को बचाने वाले नेता के रूप में या इसे गिरते देखने वाले व्यक्ति के रूप में? इस पर ज़ेलेंस्की ने भावुक होते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि इतिहास की किताबों में मेरे बारे में क्या लिखा जाएगा। लेकिन मेरा मकसद यह नहीं है। मेरा लक्ष्य है – अपने देश की रक्षा करना और यह देखना कि मेरे बच्चे बिना किसी डर के अपनी सड़कों पर चल सकें।“ उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी आखिरी सांस तक यूक्रेन की रक्षा करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा।” नाटो में यूक्रेन की एंट्री का मुद्दा ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का नाटो में शामिल होना गठबंधन को और मजबूत करेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फिलहाल यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा। निष्कर्ष यूक्रेन और रूस के बीच जंग अब भी जारी है, और ज़ेलेंस्की को उम्मीद है कि अमेरिका रूस की शर्तों को नहीं मानेगा। हालांकि, रूस का दबाव बढ़ता जा रहा है, और अमेरिका की नीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। Deshharpal पर ताज़ा ख़बरों के लिए जुड़े रहें!
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ट्रम्प का बड़ा फैसला: अब वोटिंग के लिए पासपोर्ट अनिवार्य, भारत की बायोमीट्रिक प्रणाली का दिया हवाला!

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की मुख्य बातें: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिकी नागरिकों को वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। ​ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: कानूनी चुनौतियां: कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति के पास राज्यों के चुनावी प्रक्रियाओं पर इस प्रकार के आदेश जारी करने का अधिकार सीमित है, और यह आदेश अदालतों में चुनौती का सामना कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रम्प का यह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर अमेरिकी चुनावी प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का प्रयास है। हालांकि, इसकी कानूनी वैधता और प्रभावशीलता पर बहस जारी है, और यह संभवतः अदालतों में चुनौती का सामना करेगा।
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Iran का दावा- कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम और ड्रोन हैंगर किए तबाह

Iran का दावा- कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम और ड्रोन हैंगर किए तबाह

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। America ने Iran–Iraq सीमा के पास सैन्य कार्रवाई करते हुए हमला किया, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हमले के जवाब में ईरान ने भी बड़ा दावा किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी जवाबी कार्रवाई में कुवैत स्थित अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली और ड्रोन हैंगर को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि, अमेरिका की ओर से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सीमा पर बढ़ा तनाव जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान समर्थित ठिकानों को निशाना बनाकर यह कार्रवाई की। इस दौरान हुए हमले में दो लोगों की मौत हुई, जबकि कुछ अन्य घायल होने की भी खबर है। घटना के बाद सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। ईरान का पलटवार ईरान का कहना है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की। ईरानी मीडिया के अनुसार, कुवैत में मौजूद अमेरिकी Patriot Air Defense System और ड्रोन रखने वाले हैंगर को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। दुनिया की बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Abhijeet Deepke ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगाए पत्थरबाजी के आरोप

Abhijeet Deepke ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगाए पत्थरबाजी के आरोप

Abhijeet Deepke ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं, उन्होंने दावा किया कि हिंसा के दौरान भाजपा के लोग ही पत्थरबाजी कर रहे थे और पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। अभिजीत दीपके ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। मेट्रो स्टेशन बंद होने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट इधर, हिंसा के बाद सुरक्षा कारणों से कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करेगा। सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद माना जा रहा है कि अदालत पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर उचित आदेश जारी कर सकती है। लोगों की परेशानी बढ़ी मेट्रो स्टेशन बंद होने से रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द हालात सामान्य कर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बहाल करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। जांच और कार्रवाई पर सबकी नजर फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच लोगों की उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America

America-Iran Tension: ईरान पर US की बड़ी कार्रवाई, Trump का दावा- ‘Iran बुरी तरह पिट रहा’

मध्य पूर्व (Middle East) में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। America और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर अमेरिका ने लगातार 12वें दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, तो दूसरी ओर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार दोनों पर दबाव बढ़ गया है। लगातार 12वें दिन US Airstrikes, कई ठिकाने बने निशाना America सेना ने Iran के चार प्रांतों में मौजूद सैन्य अड्डों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और ड्रोन से जुड़े ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन ऑपरेशनों का उद्देश्य क्षेत्र में ईरान की सैन्य गतिविधियों को सीमित करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान लगातार 12 दिनों से जारी है और आने वाले दिनों में भी हालात के मुताबिक आगे की रणनीति तय की जाएगी। Trump का दावा- “Iran लगातार कमजोर हो रहा” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान पर की जा रही कार्रवाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता लगातार कमजोर हो रही है और यदि अमेरिकी हितों या सहयोगी देशों को निशाना बनाया गया तो जवाब और भी सख्त होगा। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। Houthi Rebels ने Saudi के दो Oil Tankers पर किया हमला इसी बीच ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया है। विद्रोहियों के अनुसार यह कार्रवाई उनके समुद्री अभियान का हिस्सा थी। हमले के बाद जहाजों की आवाजाही वाले अहम समुद्री मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी बड़े तेल रिसाव या भारी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। Global Oil Market पर बढ़ा दबाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस स्थिति में दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। क्या कूटनीति से निकलेगा समाधान? हालांकि सैन्य कार्रवाई जारी है, लेकिन अमेरिका ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाता है तो बातचीत की संभावना बनी रह सकती है। वहीं ईरान ने भी साफ संकेत दिए हैं कि वह लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। Middle East Crisis पर दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां, तेल टैंकरों पर हमले और लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Slavia Monte Carlo

Škoda Slavia Monte Carlo Limited Edition: नए Dual-Tone Colors और दमदार TSI Engine के साथ हुई पेश

अगर आप ऐसी प्रीमियम सेडान की तलाश में हैं जो सड़क पर सबसे अलग नजर आए, तो Škoda Auto India ने आपके लिए एक खास पेशकश की है। कंपनी ने अपनी लोकप्रिय Slavia Monte Carlo को अब दो नए Dual-Tone Color Options – Shimla Green और Steel Grey – के साथ लॉन्च किया है। खास बात यह है कि इन नए रंगों वाली कार की केवल 200 यूनिट्स ही बनाई जाएंगी, जिससे इसकी एक्सक्लूसिविटी और भी बढ़ जाती है। नई लिमिटेड एडिशन Slavia Monte Carlo उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो सिर्फ एक कार नहीं बल्कि एक अलग पहचान और प्रीमियम ड्राइविंग अनुभव चाहते हैं। दो नए रंगों से और आकर्षक बनी Slavia Monte Carlo Škoda ने Slavia Monte Carlo में पहली बार Shimla Green और Steel Grey जैसे नए डुअल-टोन कलर शामिल किए हैं। इन रंगों के साथ कार का स्पोर्टी डिजाइन पहले से ज्यादा प्रीमियम और स्टाइलिश नजर आता है। कंपनी का कहना है कि यह एडिशन Monte Carlo की खास पहचान को और मजबूत करेगा। यह लिमिटेड एडिशन केवल 1.0 TSI Automatic और 1.5 TSI DSG Automatic वेरिएंट्स में उपलब्ध कराया गया है। ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला Škoda Auto India के ब्रांड डायरेक्टर आशीष गुप्ता के मुताबिक, Slavia Monte Carlo को भारतीय ग्राहकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। इसकी स्पोर्टी स्टाइलिंग, शानदार ड्राइविंग अनुभव और मोटरस्पोर्ट विरासत लोगों को लगातार आकर्षित कर रही है। उन्होंने कहा कि नए रंग विकल्प ग्राहकों को ज्यादा पर्सनलाइजेशन और एक्सक्लूसिविटी का अनुभव देंगे। डिजाइन में मिलेगा वही स्पोर्टी Monte Carlo लुक नई कलर स्कीम के अलावा Slavia Monte Carlo के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें पहले की तरह ब्लैक फिनिश एक्सटीरियर, Monte Carlo बैजिंग, रेड और ब्लैक थीम वाला प्रीमियम इंटीरियर, स्पोर्टी सीट्स और फीचर-लोडेड केबिन मिलता है। यही स्पोर्टी स्टाइल इसे Slavia लाइनअप के सबसे आकर्षक मॉडल्स में शामिल करता है। दमदार इंजन के साथ शानदार परफॉर्मेंस Slavia Monte Carlo में कंपनी दो पेट्रोल इंजन विकल्प देती है। 1.0-लीटर TSI इंजन 1.5-लीटर TSI इंजन दोनों इंजन बेहतर परफॉर्मेंस, स्मूद ड्राइविंग और लंबी दूरी के सफर के लिए बेहतरीन माने जाते हैं। Active Cylinder Technology से होगी ईंधन की बचत 1.5 TSI इंजन में मिलने वाली Active Cylinder Technology (ACT) इसे अपने सेगमेंट में खास बनाती है। सामान्य ड्राइविंग के दौरान जब इंजन पर कम लोड होता है, तब यह तकनीक अपने आप दो सिलेंडर बंद कर देती है। इससे ईंधन की खपत कम होती है और बेहतर माइलेज मिलता है। इसके अलावा इंजन में Plasma-Coated Cylinder Liners भी दिए गए हैं, जो इंजन की दक्षता और हीट मैनेजमेंट को बेहतर बनाते हैं। Monte Carlo नाम के पीछे है रेसिंग की विरासत Škoda के लिए Monte Carlo सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि उसकी मोटरस्पोर्ट विरासत का प्रतीक है। कंपनी पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से रैली रेसिंग से जुड़ी रही है और Rallye Monte Carlo में कई यादगार सफलताएं हासिल कर चुकी है। हाल ही में Škoda की पांच कारों—Slavia Monte Carlo, Kushaq Monte Carlo, Kylaq, Kodiaq और Octavia RS—ने मिलकर India Book of Records और Asia Book of Records में ‘The Fastest Multi-Car Relay of a Single Manufacturer on a Circuit’ का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। कोयंबटूर के CoASTT ट्रैक पर इन कारों ने कुल 12 मिनट 30.97 सेकंड का लैप टाइम दर्ज किया। क्यों खरीदें यह Limited Edition? अगर आप ऐसी सेडान चाहते हैं जो शानदार डिजाइन, दमदार इंजन, आधुनिक तकनीक और सीमित उपलब्धता के कारण सड़क पर अलग पहचान बनाए, तो नई Škoda Slavia Monte Carlo Limited Edition आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। नए रंग, स्पोर्टी डिजाइन और प्रीमियम फीचर्स इसे पहले से ज्यादा खास बनाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament के बाहर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने, राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में शामिल

Parliament के बाहर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने, राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में शामिल

Parliament के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को संसद परिसर के बाहर सत्ता पक्ष (NDA) और विपक्ष (INDIA गठबंधन) के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी-अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल हुए। संसद के बाहर कुछ देर तक माहौल काफी गर्म रहा। दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष पर निशाना साधते रहे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया। संसद के अंदर भी नहीं चल सकी कार्यवाही बाहर के हंगामे का असर संसद के भीतर भी देखने को मिला। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने अपने मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध किया। लगातार शोर-शराबे और हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। स्थिति को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। मुद्दों को लेकर जारी है राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार अपने पक्ष को मजबूती से रख रही है। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। आने वाले दिनों में भी संसद के मानसून सत्र के दौरान हंगामे और तीखी बहस देखने को मिल सकती है, क्योंकि कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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