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Joint Operation में Security Forces की बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में Arms और Ammunition बरामद

Joint Operation में Security Forces की बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में Arms और Ammunition बरामद

Manipur में जारी तनावपूर्ण हालातों के बीच Security Forces को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। Assam Rifles और Manipur Police की Joint Operation टीम ने हाल ही में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान भारी मात्रा में arms और ammunition बरामद किए हैं। यह ऑपरेशन Imphal East, Thoubal और Kakching जिलों में अलग-अलग जगहों पर चलाया गया। Security agencies को इन इलाकों में illegal weapons की movement की intelligence inputs मिली थी, जिसके बाद ये coordinated operations शुरू किए गए। तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों ने कुल 6 arms, जिनमें एक AK series rifle, दो Single Barrel Guns, एक .303 Rifle और दो Improvised weapons शामिल हैं, को बरामद किया। इसके साथ-साथ लगभग 17 hand grenades, 5 types के mortars, detonators और बड़ी मात्रा में live ammunition भी जब्त की गई है। इन हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी से साफ है कि कुछ असामाजिक तत्व राज्य में फिर से हिंसा भड़काने की साजिश में लगे हुए हैं। Security Forces की सजगता और सटीक action के चलते एक बड़ी अनहोनी टल गई। इस Joint operation में local police की active भागीदारी भी सराहनीय रही, जिन्होंने ground level पर intelligence sharing और coordination में अहम भूमिका निभाई। Authorities के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि राज्य में peace और stability को सुनिश्चित किया जा सके। State government ने भी इन efforts की सराहना करते हुए कहा है कि किसी भी कीमत पर law and order की स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। देश हरपल की रिपोर्टManipur में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन अभी भी challenges बाकी हैं। ऐसे में इस तरह की joint operations न सिर्फ आतंक के मंसूबों को नाकाम कर रहे हैं, बल्कि आम जनता में सुरक्षा को लेकर विश्वास भी जगा रहे हैं।
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Nishikant Dubye

Supreme Court, Contempt, Nishikant Dubey – अब कानूनी घेरे में घिरते दिख रहे हैं बीजेपी सांसद?

नई दिल्ली।Supreme Court के खिलाफ की गई कथित ‘अवमाननापूर्ण टिप्पणी’ अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने देश के Attorney General (एटॉर्नी जनरल) को एक आधिकारिक चिट्ठी भेजकर निशिकांत दुबे के खिलाफ Contempt of Court (कोर्ट की अवमानना) की कार्यवाही की अनुमति मांगी। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न्यायपालिका के सम्मान और स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवकुमार त्रिपाठी की इस चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने मांग की है कि सांसद दुबे पर Contempt of Court Act, 1971 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते निशिकांत दुबे को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए था, न कि उस पर उंगली उठानी चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अब तक दुबे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि अगर एटॉर्नी जनरल इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हैं और सहमति देते हैं, तो निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की विधिवत सुनवाई शुरू हो सकती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर Judiciary vs Legislature की पुरानी बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा सदस्य न्यायपालिका की आलोचना की आड़ में अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं? अब सबकी निगाहें Attorney General की प्रतिक्रिया और Supreme Court के रुख पर टिकी हैं। क्या यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत के बीच टकराव का कारण बनेगा? देश हरपल इस प्रकरण से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको सबसे पहले देगा।
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"Serious Problem" in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University

Brown University :चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या…’, राहुल गांधी ने अमेरिका में उठाया महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा

“Serious Problem” in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान भारत की चुनाव प्रणाली में ‘गंभीर समस्या’ की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची में अचानक हुए बड़े बदलावों को लेकर चिंता जताई।​ महाराष्ट्र चुनाव पर सवाल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच लगभग 70 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जो हिमाचल प्रदेश की आबादी के बराबर है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव असामान्य है और चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना था कि विपक्ष द्वारा बार-बार अनुरोध करने के बावजूद चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और हरियाणा की मतदाता सूचियाँ प्रदान नहीं कीं।​ चुनाव आयोग पर आरोप गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता में विफल रहा है और विपक्ष को आवश्यक जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोग की जिम्मेदारी है कि वह चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए और सभी पक्षों को आवश्यक जानकारी प्रदान करे।​ अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया मुद्दा ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत के दौरान, राहुल गांधी ने कहा, “हमारे लिए यह बहुत साफ था कि चुनाव आयोग समझौता कर चुका है। यह बहुत साफ है कि सिस्टम में कुछ बहुत गड़बड़ है। हमने इसे सार्वजनिक रूप से कहा है, मैंने इसे कई बार कहा है।” राहुल गांधी का यह बयान भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। उनकी मांग है कि चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों को समान रूप से जानकारी प्रदान करे और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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दिल्ली

दिल्ली के मुस्तफाबाद में 4 मंजिला इमारत ढही, CCTV में कैद हुआ खौफनाक पल; 4 की मौत, कई अब भी मलबे में फंसे

दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके से शनिवार तड़के एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। 14 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन 8-10 लोग अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है। यह दर्दनाक हादसा आसपास के लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। घटना की भयावहता सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें देखा गया कि अचानक एक चिंगारी उठी और कुछ ही सेकंड में गली धूल के गुबार से भर गई, जिससे कैमरा भी कुछ नहीं रिकॉर्ड कर पाया। CCTV Footage: कैसे गिरी इमारत? CCTV फुटेज में दिखा कि इमारत गिरने से पहले एक हल्की चिंगारी उठी और उसके तुरंत बाद धूल का विशाल गुबार फैल गया। ये दृश्य इतने अचानक और भयावह थे कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। 2:50 AM पर मिला फोन कॉल, NDRF और फायर ब्रिगेड ने संभाली कमान डिविजनल फायर ऑफिसर राजेंद्र अटवाल ने बताया कि उन्हें तड़के 2:50 बजे कॉल मिला था। जब उनकी टीम मौके पर पहुंची, तब तक पूरी इमारत जमींदोज हो चुकी थी। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। NDRF अधिकारी ने इस घटना को “पैनकेक कोलैप्स” कहा, यानी जब एक के ऊपर एक फ्लोर गिरते हैं। ऐसी स्थितियों में ज़िंदा बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन हर ज़िंदगी को बचाने की पूरी कोशिश जारी है। घनी बस्ती और तंग गलियों ने बचाव कार्य को बनाया चुनौतीपूर्ण मुस्तफाबाद की तंग गलियों के कारण रेस्क्यू टीम को भारी मशीनें अंदर लाने में परेशानी हो रही है। फिर भी जवान हर हाथ से मलबा हटाकर लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बारिश और आंधी के बाद हुआ हादसा, कारण की जांच जारी हादसे से कुछ घंटे पहले दिल्ली में तेज़ बारिश और आंधी आई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी के बाद इमारत कमजोर हो गई होगी। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि असली वजह की जांच की जा रही है। GTB अस्पताल में चल रहा घायलों का इलाज जो लोग मलबे से निकाले गए हैं, उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है। सरकार और प्रशासन से अपील स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो और क्षेत्र में जर्जर इमारतों का सर्वे कराकर उन्हें खाली कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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Waqf Amendment

Waqf Amendment पर Jagdambika Pal का बड़ा बयान: Report असंवैधानिक निकली तो दे दूंगा इस्तीफा

वक्फ संशोधन ( Waqf Amendment) विधेयक को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर जहां इस बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी सांसद Jagdambika Pal ने बड़ा बयान देकर सभी का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा है कि यदि वक्फ समिति की रिपोर्ट असंवैधानिक पाई जाती है, तो वह तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। क्या है Waqf Amendment विधेयक? वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और अवैध कब्जों को रोकना है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक खासकर पासमांदा मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा करेगा। लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय पर हमला बता रहा है। जगदंबिका पाल का पक्ष संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जगदंबिका पाल ने साफ कहा कि वक्फ अधिनियम कोई धार्मिक कानून नहीं, बल्कि एक वैधानिक व्यवस्था है। इसका मकसद वक्फ संपत्तियों का न्यायसंगत और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। “अगर मेरी अध्यक्षता में बनी रिपोर्ट को अदालत असंवैधानिक मानेगी, तो मैं बिना किसी देरी के इस्तीफा दे दूंगा। हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं,” — जगदंबिका पाल ओवैसी का विरोध और प्रतिक्रिया इस बिल का सबसे तीखा विरोध AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने किया है। उन्होंने संसद में इस बिल की प्रति फाड़ दी और इसे “मुसलमानों पर सीधा हमला” बताया। ओवैसी का आरोप है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। विपक्ष पर पलटवार पाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन और उनकी रक्षा के लिए लाया गया है, ना कि किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक की वैधता को लेकर सुनवाई जारी है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि यह कानून संवैधानिक मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। जगदंबिका पाल का इस्तीफे की पेशकश करना इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।
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Jagdeep Dhankhar, Vice President of India

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर खींची ‘संवैधानिक लक्ष्मण रेखा’, उपराष्ट्रपति ने जताई नाराज़गी

Supreme Court vs President Powers Desh Harpal | 17 अप्रैल 2025By Digital Desk Supreme Court Judgement on Governor and President Powers के तहत सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने की समयसीमा (Time Limit) तय की गई। अदालत ने साफ किया कि राज्य विधानसभा से पास होकर आए बिल को यदि राज्यपाल राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजते हैं, तो राष्ट्रपति को Article 201 के तहत 3 महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? Judicial Review, No Pocket Veto, Mandatory Timeline और No Repeated Returns – इन चार बिंदुओं में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों की स्पष्ट व्याख्या की: राज्यपालों के लिए भी बनी समय सीमा तमिलनाडु मामले में Supreme Court vs Governor Power की बहस में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि राज्यपाल के पास भी कोई Absolute Veto Power नहीं है। उन्हें विधानसभा के पास किए गए किसी भी बिल पर अधिकतम एक महीने के भीतर निर्णय देना होगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, “राज्यपाल सिर्फ प्रतीकात्मक पद नहीं हैं, लेकिन वे राज्य सरकार की सलाह से ही निर्णय ले सकते हैं।” उपराष्ट्रपति की नाराज़गी इस फैसले के बाद Vice President Jagdeep Dhankhar ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “हम ऐसा सिस्टम नहीं बना सकते जहां अदालतें राष्ट्रपति को निर्देश दें। Article 142 के तहत मिला विशेष अधिकार न्यायपालिका के पास 24×7 available nuclear missile जैसा बन गया है।” उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर संस्थाएं अपनी सीमाएं लांघने लगें तो संविधान के संतुलन को खतरा हो सकता है। “कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार सर्वोच्च होती है,” उन्होंने कहा। क्या है Article 201 और Article 142? कपिल सिब्बल ने की तारीफ पूर्व कानून मंत्री Kapil Sibal ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार जानबूझकर राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण बिलों को रोके नहीं रख सकेगी। सुप्रीम कोर्ट का ये रुख federal structure और cooperative federalism को मजबूत करता है। तमिलनाडु केस का बैकग्राउंड सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल R.N. Ravi ने 10 जरूरी बिलों को रोक रखा है। इनमें से कई बिल विधानसभा ने दोबारा पास किए थे, लेकिन राज्यपाल ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। R.N. Ravi पूर्व IPS अधिकारी रहे हैं और 2021 से तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। निष्कर्ष: Supreme Court ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी की है, जो संविधान की व्याख्या और लोकतंत्र के संतुलन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हालांकि यह फैसला केंद्र-राज्य संबंधों को नई बहस में डाल सकता है, परंतु इससे transparency, accountability और timely governance को बल मिलेगा।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

Waqf Act SC Hearing LIVE: संसद ने हिंदुओं पर भी कानून बनाया है… सिब्बल की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया

Desh Harpal Special Report| नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2025 Waqf Act SC Hearing LIVE – सुप्रीम कोर्ट में आज Waqf Act को लेकर एक बेहद अहम सुनवाई हुई, जिसमें वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के हालिया Waqf Act Amendment पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एकतरफा और धर्म विशेष को लक्षित करने वाला बताया। लेकिन कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “Parliament ने केवल मुसलमानों के लिए नहीं, हिंदुओं के लिए भी कानून बनाए हैं।“ क्या है Waqf Act Amendment? केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में Waqf Act 1995 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद कानून बना और तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया। संशोधित कानून के तहत Waqf properties के रिकॉर्ड, उनके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता और accountability सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था। विरोध और विवाद Waqf Act में बदलाव के बाद देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कई जगहों पर violent clashes की खबरें भी आईं। मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि यह कानून उनकी संपत्ति और धार्मिक अधिकारों को सीमित करता है। कोर्ट में क्या हुआ? आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या इस कानून से किसी खास धर्म को निशाना बनाया गया है? जब सिब्बल ने इसे “धर्म विशेष को नियंत्रित करने वाला कानून” कहा, तो कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “Parliament ने हिंदू धर्म के लिए भी कानून बनाए हैं जैसे Hindu Religious and Charitable Endowments Act। इसलिए यह कहना गलत है कि केवल एक धर्म के खिलाफ कानून बनाया जा रहा है।“ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि कानून की वैधता को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। सरकार का पक्ष केंद्र सरकार की ओर से Solicitor General Tushar Mehta ने कहा कि संशोधन का मकसद किसी धर्म को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि Waqf Boards की जवाबदेही तय करना है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार Waqf properties के दुरुपयोग की शिकायतें आई हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 मई 2025 की तारीख तय की है। Desh Harpal इस संवेदनशील मामले की हर अपडेट आपको LIVE और निष्पक्ष रूप में पहुंचाता रहेगा। Waqf Act से जुड़े सामाजिक, कानूनी और धार्मिक प्रभावों पर हम जल्द ही एक विशेष रिपोर्ट भी लेकर आएंगे।
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National Herald Case ED

National Herald Case: ED ने सोनिया-राहुल गांधी पर चार्जशीट दायर, कांग्रेस बोली – ‘ये बदले की राजनीति है’

16 अप्रैल 2025 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले और डराने की कोशिश” बताया है और बुधवार को देशभर में ED दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की है। चार्जशीट में कौन-कौन? ED ने 9 अप्रैल को विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे हैं: अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।क्या है नेशनल हेराल्ड केस? यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को लेकर है, जो National Herald अखबार का प्रकाशन करती है। ED का आरोप है कि कांग्रेस ने AJL को ₹50 लाख में यंग इंडियन नाम की कंपनी के ज़रिए अधिग्रहित किया, जबकि उसकी संपत्ति की कीमत ₹2,000 करोड़ से ज्यादा थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ED ने हाल ही में ₹661 करोड़ की संपत्ति दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में जब्त करने के नोटिस भी दिए हैं। जांच की शुरुआत कैसे हुई? ये जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 में दाखिल याचिका के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने इनकम टैक्स विभाग को जांच की अनुमति दी थी। ED ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें ₹18 करोड़ के फर्जी डोनेशन, ₹38 करोड़ के फर्जी किराया और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापन की जानकारी मिली।कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह पूरा मामला फर्जी है। ना कोई पैसा ट्रांसफर हुआ, ना कोई संपत्ति बेची गई। फिर भी सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग बता रही है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा, “मोदी-शाह सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को टारगेट कर रही है। ये केस राजनीति को दबाने का तरीका है।” जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की जब्ती कानून की आड़ में किया गया अपराध है।” भाजपा का पलटवार भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग भ्रष्टाचार और जनता की संपत्ति की लूट में शामिल रहे हैं, अब उन्हें जवाब देना होगा। ED का मतलब अब ‘एंटाइटलमेंट टू डकैती’ नहीं है।”कोर्ट की टिप्पणी विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की कार्रवाई के साथ-साथ CBI की जांच से जुड़ा मामला भी इसी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आदेश जिला जज को देना होगा। DeshHarpal पर पढ़ते रहिए देश-दुनिया की सबसे सटीक और सरल खबरें।
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China

US China Conflict ईरान मुद्दे पर बढ़ा टकराव, बीजिंग ने दी सख्त चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं China, United States और Iran। चीन ने अमेरिका को साफ और सख्त शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन के इस बयान को केवल एक सामान्य कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे वैश्विक शक्ति संतुलन में एक अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। चीन का साफ रुख: “दखलअंदाजी स्वीकार नहीं” बीजिंग ने दो टूक कहा है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और वह अपने साझेदार देशों के साथ रिश्तों को अपनी रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से आगे बढ़ाता है। अमेरिका पर निशाना साधते हुए चीन ने कहा कि लगातार प्रतिबंध और दबाव की राजनीति अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए ठीक नहीं है। ईरान के साथ मजबूत होते रिश्ते चीन और ईरान के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। ऊर्जा, तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग को लेकर दोनों देश लगातार करीब आ रहे हैं। चीन का यह रुख पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अमेरिका को स्पष्ट संदेश चीन ने अमेरिका को यह भी संदेश दिया है कि उसे दूसरे देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए। बीजिंग का कहना है कि वैश्विक व्यवस्था तभी संतुलित रह सकती है जब सभी देश एक-दूसरे की सीमाओं और नीतियों का सम्मान करें। वैश्विक तनाव की नई लहर चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव चल रहा है, और अब ईरान का मुद्दा इस टकराव को और जटिल बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति और बढ़ी, तो इसका असर वैश्विक राजनीति के साथ-साथ ऊर्जा बाजार पर भी दिख सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bihar

Bihar New CM Announcement 2026 कल NDA Meeting में होगा बड़ा फैसला

Bihar की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। सत्ता परिवर्तन की आहट साफ सुनाई दे रही है और अब सबकी निगाहें कल शाम 4 बजे होने वाली NDA (National Democratic Alliance) की अहम बैठक पर टिकी हैं। इसी बैठक में राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। मौजूदा मुख्यमंत्री Nitish Kumar के इस्तीफे की अटकलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। पटना से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, जिससे साफ है कि सत्ता का समीकरण बदलने वाला है। सम्राट चौधरी के नाम की चर्चा तेज इस पूरे घटनाक्रम के बीच Samrat Choudhary का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल सचिव का उनके आवास पहुंचना राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। हालांकि पार्टी या गठबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। NDA बैठक में कैसे होगा फैसला कल होने वाली बैठक में सभी सहयोगी दलों के विधायक शामिल होंगे। बैठक की प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी: इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए Shivraj Singh Chouhan को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है, जो पूरी बैठक में अहम भूमिका निभाएंगे। लोगों में बढ़ी उत्सुकता पटना की सड़कों से लेकर गांवों तक एक ही सवाल चर्चा में है—बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोग भी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। क्या बदल सकता है अगर BJP का चेहरा मुख्यमंत्री बनता है, तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। लंबे समय बाद राज्य में नेतृत्व का नया चेहरा देखने को मिल सकता है, जो आने वाले चुनावों की दिशा भी तय करेगा। कब होगा शपथ ग्रहण संभावना है कि NDA बैठक में नाम तय होने के बाद अगले दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण कराया जा सकता है। कुल मिलाकर, कल शाम 4 बजे होने वाली यह बैठक सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है—जहां से राज्य को नया नेतृत्व मिलने का रास्ता साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Maharashtra

Maharashtra Accident ठाणे में दर्दनाक हादसा, वैन-ट्रक टक्कर में 11 लोगों की जान गई

महाराष्ट्र (Maharashtra) के ठाणे जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। सोमवार को मुरबाड इलाके में हुए एक भीषण सड़क हादसे में 11 लोगों की जान चली गई। इस हादसे ने कई परिवारों को एक झटके में उजाड़ दिया और पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। हादसे का पूरा घटनाक्रम जानकारी के मुताबिक, यह हादसा मुरबाड के गोविली गांव के पास रैता पुल पर हुआ। एक वैन, जिसमें कई लोग सवार थे, सामने से आ रहे सीमेंट मिक्सर ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए और अंदर बैठे लोग बुरी तरह फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद कुछ देर तक मौके पर चीख-पुकार मची रही। स्थानीय लोग सबसे पहले मदद के लिए आगे आए और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश की। 11 लोगों की मौत, महिलाएं भी शामिल इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 3 महिलाएं भी शामिल हैं। कई लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि कुछ ने अस्पताल पहुंचने के बाद आखिरी सांस ली।वहीं, 2 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है। राहत-बचाव कार्य में जुटा प्रशासन हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर सड़क पर यातायात भी बहाल किया गया। हादसे की वजह क्या मानी जा रही है? प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को इस हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस मामले की जांच कर रही है और हर पहलू को ध्यान में रखा जा रहा है। एक पल की लापरवाही, कई घरों में मातम यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उन परिवारों की दर्दनाक कहानी है, जिनके अपने अब कभी वापस नहीं आएंगे। एक पल की लापरवाही ने कई जिंदगियां खत्म कर दीं और पीछे छोड़ गया सिर्फ दर्द और खालीपन। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Asha Bhosle

Asha Bhosle Funeral नम आंखों से देश ने दी विदाई, शाम 4 बजे मुखाग्नि

भारतीय संगीत जगत की महान आवाज Asha Bhosle को आज हमेशा के लिए अलविदा कहा जा रहा है। उनके निधन की खबर ने हर उम्र के लोगों को भावुक कर दिया है। दशकों तक अपनी सुरीली आवाज से दिलों को छूने वाली आशा भोसले की अंतिम यात्रा आज पूरे सम्मान के साथ निकाली जा रही है। तिरंगे में लिपटी देह को दी गई अंतिम सलामी आशा भोसले (Asha Bhosle) के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इस दौरान उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं—जैसे किसी अपने को विदा कर रहे हों। कुछ ही देर में निकलेगी अंतिम यात्रा परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में उनकी अंतिम यात्रा कुछ ही देर में शुरू होगी। प्रशासन की ओर से भी व्यवस्था की गई है ताकि अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। शाम 4 बजे दी जाएगी मुखाग्नि परिजनों के अनुसार, आज शाम 4 बजे पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिवार ने लोगों से अपील की है कि वे सीमित संख्या में ही शामिल हों, ताकि श्रद्धांजलि की गरिमा बनी रहे। सचिन तेंदुलकर भी हुए भावुक इस दौरान क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले Sachin Tendulkar भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। आशा भोसले को अंतिम विदाई देते समय सचिन की आंखें भर आईं। यह पल वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया। हर दिल में जिंदा रहेंगी आशा भोसले Asha Bhosle सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि एक एहसास थीं—जिनकी आवाज ने प्यार, दर्द, खुशी हर भावना को सुर दिए। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाए गीत हमेशा उन्हें जिंदा रखेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Statement महिलाओं की जिम्मेदारी और Economic Strength पर बड़ी बात

देश के PM Modi ने महिलाओं की भूमिका और उनकी बढ़ती आर्थिक ताकत को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। अपने संबोधन में उन्होंने बेहद सहज अंदाज में कहा,“मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन मैं सब जानता हूं।” उनका यह बयान सुनते ही सभा में मौजूद लोगों के बीच हल्की मुस्कान भी देखने को मिली, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर संदेश भी छिपा था। “घर नहीं बसाया, लेकिन समझता हूं जिम्मेदारियां” PM Modi ने साफ किया कि भले ही उन्होंने पारिवारिक जीवन नहीं जिया, लेकिन एक महिला की जिम्मेदारियों, उसकी चुनौतियों और उसके योगदान को वे अच्छी तरह समझते हैं।उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों में महिलाएं सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक फैसलों में भी बराबर की भागीदार बन रही हैं। सरकारी योजनाओं से बदली महिलाओं की जिंदगी अपने भाषण में PM Modi ने बताया कि पिछले कुछ सालों में चलाई गई योजनाओं का सीधा फायदा महिलाओं को मिला है। इन योजनाओं ने उनकी जिंदगी को आसान बनाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत भी किया है। कुछ प्रमुख पहलें: इनके कारण अब महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित नहीं, बल्कि कमाई और बचत दोनों में आगे बढ़ रही हैं। गांव से शहर तक बदल रही तस्वीर PM Modi ने कहा कि आज गांवों में महिलाएं समूह बनाकर छोटे व्यवसाय चला रही हैं, जबकि शहरों में वे नौकरी और स्टार्टअप के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं।यह बदलाव सिर्फ उनके जीवन को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को मजबूत कर रहा है। बयान में छिपा बड़ा संदेश PM Modi का यह बयान सिर्फ एक हल्की-फुल्की टिप्पणी नहीं था। इसमें यह साफ संदेश था कि देश की महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार उन्हें और आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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