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BMC

Mumbai BMC Election 2026 उद्धव-राज ठाकरे गठबंधन से राजनीति में बड़ा मोड़

आगामी Mumbai BMC Election 2026 से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में सनसनीखेज बदलाव देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव फाड़ गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने दो दशकों बाद सियासी गठबंधन कर लिया है। इस गठबंधन का औपचारिक ऐलान 24 दिसंबर 2025 को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया गया। गठबंधन का ढांचा और सीटों का बंटवारा राजनीतिक महत्त्व यह गठबंधन ठाकरे बंधुओं — उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे — का लगभग 20 साल बाद राजनीतिक रूप से मिलना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन मुंबई की सियासी दिशा बदल सकता है और महापौर की सीट पर सीधी टक्कर ला सकता है। दोनों नेताओं की बात उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह गठबंधन मराठी समाज और जनता की भलाई के लिए किया गया है।राज ठाकरे ने भी इसे मराठी मतदाताओं की शक्ति को एकजुट करने वाला कदम बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सीटों का बंटवारा पारदर्शी और समझौते के तहत किया गया है, ताकि हर वार्ड में साझा रणनीति के अनुसार उम्मीदवार मैदान में उतरे। विशेष जानकारी Mumbai BMC Election 2026 में उद्धव और राज ठाकरे का गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में नया इतिहास रच सकता है। यह गठबंधन मराठी मतदाताओं के लिए निर्णायक साबित होगा और शहर की सत्ता पर बड़ा असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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करबीांगलॉन्ग

Assam Karbi Anglong Violence असम में करबीांगलॉन्ग और वेस्ट करबीांगलॉन्ग हिंसा पर अपडेट

असम के करबीांगलॉन्ग (Karbi Anglong) और वेस्ट करबीांगलॉन्ग (West Karbi Anglong) जिलों में हाल के दिनों में बढ़ती हिंसा और अशांति ने लोगों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है। यह तनाव मुख्य रूप से भूमि विवाद (land dispute) और अवैध अतिक्रमण (illegal encroachment) के कारण उत्पन्न हुआ है। Violence और Protest की वजह स्थानीय आदिवासी और करबी समुदाय ने संरक्षित चरागाह भूमि (protected grazing land) पर अवैध अतिक्रमण को लेकर विरोध किया। ये भूमि छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत सुरक्षित हैं। Casualties और Injuries Internet Shutdown और Security Measures असम सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर अफवाहों और भड़काऊ सामग्री को फैलने से रोकना है। Police और Government Response हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ISRO

ISRO Satellite Launch BlueBird Block-2 Mission से बदलेगा Mobile Connectivity का भविष्य

श्रीहरिकोटा से जब LVM3 ‘बाहुबली’ रॉकेट ने आसमान की ओर उड़ान भरी, तो यह सिर्फ़ एक उपग्रह प्रक्षेपण नहीं था, बल्कि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष ताक़त का साफ़ संदेश था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस मिशन के ज़रिये BlueBird Block-2 Communication Satellite को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया, जो आने वाले समय में दुनिया के मोबाइल संचार को नई दिशा देगा। यह ऐतिहासिक लॉन्च आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से किया गया। मिशन की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत अब सिर्फ़ अंतरिक्ष अनुसंधान में ही नहीं, बल्कि Commercial Space Launch Services में भी वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद नाम बन चुका है। क्या है BlueBird Block-2 Satellite? BlueBird Block-2 उपग्रह को अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile ने विकसित किया है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य है — बिना मोबाइल टावर के, सीधे सामान्य स्मार्टफोन तक 4G और 5G नेटवर्क पहुँचाना। यानी अब भविष्य में पहाड़ों, जंगलों, समुद्रों या दूर-दराज़ इलाकों में भी मोबाइल कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी। इस उपग्रह की तकनीक इतनी उन्नत है कि इसके लिए किसी विशेष सैटेलाइट फोन की ज़रूरत नहीं होगी। आम मोबाइल फोन से ही कॉल, मैसेज, इंटरनेट और वीडियो सेवाएँ मिल सकेंगी। ISRO का अब तक का सबसे भारी Commercial Payload करीब 6,100 किलोग्राम वज़न वाला यह उपग्रह, ISRO द्वारा लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में भेजा गया अब तक का सबसे भारी व्यावसायिक पेलोड है। इसमें लगा विशाल फेज़्ड-एरे एंटीना (लगभग 223 वर्ग मीटर) इसे दुनिया के सबसे आधुनिक संचार उपग्रहों में शामिल करता है। इस भारी पेलोड को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित करना LVM3 रॉकेट की क्षमता और ISRO की इंजीनियरिंग दक्षता का बड़ा प्रमाण है। भारत की Commercial Space Power को मिली मजबूती यह मिशन ISRO की व्यावसायिक शाखा NewSpace India Limited (NSIL) के माध्यम से किया गया। इससे भारत की छवि एक मजबूत Commercial Satellite Launch Partner के रूप में और पुख्ता हुई है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का ISRO पर बढ़ता भरोसा, भारत के लिए नए निवेश और रोज़गार के रास्ते खोल रहा है। प्रधानमंत्री और देश की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण पर ISRO के वैज्ञानिकों को बधाई दी और इसे भारत की तकनीकी क्षमता का गर्वपूर्ण उदाहरण बताया। देशभर में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह और गर्व का माहौल देखा गया। क्यों खास है यह मिशन? भारत की अंतरिक्ष यात्रा का अगला कदम ISRO BlueBird Block-2 Mission यह दिखाता है कि भारत अब केवल अंतरिक्ष में पहुँचने वाला देश नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से दुनिया को जोड़ने वाला देश बन रहा है। यह मिशन आने वाले वर्षों में डिजिटल कनेक्टिविटी, संचार तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मजबूत आधार साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कारोबारी Vijay Mallya-Lalit Modi का वीडियो वायरल: खुद को बताया भारत के “दो सबसे बड़े भगोड़े”

कारोबारी Vijay Mallya-Lalit Modi का वीडियो वायरल: खुद को बताया भारत के “दो सबसे बड़े भगोड़े”

देश से बाहर रह रहे भगोड़े कारोबारी Vijay Mallya और Lalit Modi एक बार फिर चर्चा में हैं। दोनों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे खुद को भारत के “दो सबसे बड़े भगोड़े” बताते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दोनों हँसी-मजाक के अंदाज़ में बात करते दिखते हैं, लेकिन यह वीडियो सामने आते ही देश में राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। आम लोगों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि जिन पर हजारों करोड़ रुपये के घोटालों के आरोप हैं, वे इतने बेफिक्र कैसे दिखाई दे रहे हैं। मुंबई हाईकोर्ट का सख्त सवाल इस वीडियो के वायरल होने के बाद मुंबई हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ तौर पर सवाल उठाया है कि विजय माल्या आखिर भारत कब लौटेंगे?हाईकोर्ट ने कहा कि जब माल्या सार्वजनिक तौर पर वीडियो में नजर आ सकते हैं, तो फिर भारत लौटने से क्यों बच रहे हैं। लंबे समय से विदेश में हैं दोनों विजय माल्या पर बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेकर देश छोड़ने का आरोप है, वहीं ललित मोदी पर आईपीएल से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं। दोनों ही कई सालों से विदेश में रह रहे हैं और भारत की जांच एजेंसियां उनकी वापसी की कोशिशों में जुटी हैं। जनता में नाराज़गी वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ नजर आ रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि कानून से भागे लोग खुलेआम मज़ाक कैसे कर सकते हैं और उन्हें कब तक जवाबदेही से बचने दिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या अगला कदम उठाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Pollution Control प्रदूषण पर सरकार का बड़ा फैसला, 800 फैक्ट्रियां बंद

राजधानी दिल्ली (Delhi) में लगातार गंभीर होते वायु प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनका उद्देश्य राजधानी की जहरीली हवा को साफ करना है। 800 प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियां होंगी बंद सरकार ने आदेश दिया है कि दिल्ली (Delhi) में चल रही लगभग 800 प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों (फैक्ट्रियों) को तुरंत बंद किया जाएगा। जो फैक्ट्रियां बिना अनुमति या पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रही हैं, उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के सील किया जाएगा। इस कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम (MCD) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को सौंपी गई है। सड़कों पर केवल DTC बसें प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए सरकार ने निजी वाहनों पर सख्ती करते हुए बड़ा फैसला लिया है।अब दिल्ली की सड़कों पर मुख्य रूप से केवल दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसें ही चलेंगी। लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों का इस्तेमाल न करें और सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। इससे वाहनों से निकलने वाले धुएं में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। PUC नियमों का सख्त पालन वाहनों के लिए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट को लेकर अब किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।बिना वैध PUC के पकड़े जाने पर पूरा चालान काटा जाएगा और लोक अदालतों में भी जुर्माना माफ नहीं किया जाएगा। ई-रिक्शा और ट्रैफिक पर नियंत्रण सरकार ई-रिक्शाओं के लिए नई गाइडलाइंस लाने जा रही है ताकि अव्यवस्थित ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके। इससे जाम की समस्या कम होगी और अप्रत्यक्ष रूप से प्रदूषण पर भी असर पड़ेगा। GRAP-IV के तहत आपात कदम दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण GRAP-IV (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) लागू किया गया है। इसके तहत: सरकार की अपील दिल्ली सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे: सरकार का कहना है कि ये सख्त फैसले अस्थायी हैं लेकिन जनता की सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं। स्थिति सामान्य होने तक इन नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dipu Das

Delhi Protest VHP और Bajrang Dal ने Dipu Das Murder पर जताया गुस्सा

बांग्लादेश के हिन्दू नागरिक दीपु चंद्र दास (Dipu Das) की निर्मम हत्या ने भारत में आक्रोश और शोक की लहर पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि उनकी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की गई और शव को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना ने दोनों देशों में समुदायों के बीच सुरक्षा और न्याय को लेकर चिंता बढ़ा दी है। VHP और बजरंग दल का दिल्ली में प्रदर्शन 23 दिसंबर 2025 को विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और बजरंग दल के सदस्यों ने बांग्लादेश उच्चायोग, दिल्ली के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए जैसे: कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड तोड़ने का प्रयास भी किया। प्रदर्शन का उद्देश्य बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हत्या के दोषियों को सजा दिलाने की मांग करना था। पुलिस और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। कुछ मामूली झड़पें हुईं, लेकिन प्रदर्शन को बिना बड़े नुकसान के काबू में कर लिया गया। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि उच्चायोग तक प्रवेश करने के मीडिया रिपोर्ट्स अत्यधिक अतिशयोक्ति हैं। देश के अन्य शहरों में असंतोष Delhi तक ही यह क्रोध सीमित नहीं रहा। कोलकाता, हैदराबाद और भोपाल जैसे शहरों में भी प्रदर्शन और मोमबत्ती जलाई गई। बांग्लादेश में भी हिन्दू समुदाय ने बढ़ती हिंसा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव इस घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है: एक मानवीय दृष्टिकोण यह त्रासदी केवल राजनीतिक नहीं है, यह गहन रूप से व्यक्तिगत और भावनात्मक है। परिवार शोक में हैं, समुदाय भयभीत हैं और न्याय की आवाज़ हर प्रदर्शन में सुनाई देती है। दीपु चंद्र दास की कहानी हमें सहनशीलता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवता के महत्व की याद दिलाती है। “हम Dipu Das के लिए न्याय चाहते हैं और बांग्लादेश में हर हिन्दू की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए,” एक VHP कार्यकर्ता ने भावुक स्वर में कहा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shakti Peeth

बांग्लादेश के Shakti Peeth Cultural Heritage और Spiritual Tourism पर खतरा

बांग्लादेश में स्थित प्राचीन Shakti Peeth आज एक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। ये स्थल न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि बांग्लादेश की Hindu cultural heritage का अहम हिस्सा भी हैं। हाल की रिपोर्टों में सामने आया है कि राजनीतिक अस्थिरता, सामाजिक दबाव और सुरक्षा की कमी के कारण इन पवित्र मंदिरों की रक्षा खतरे में है। Shakti Peeth क्यों हैं खास? शक्ति पीठ हिंदू धर्म में देवी सती के अंगों के गिरने से जुड़े पवित्र स्थल हैं। हर शक्तिपीठ का अपना spiritual और cultural significance है। बांग्लादेश में प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल हैं: ये मंदिर न केवल religious tourism के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय हिंदू समुदायों के जीवन और त्योहारों का केंद्र भी हैं। दुर्गा पूजा, कल्याण पूजा और अन्य धार्मिक उत्सव इन मंदिरों की spiritual aura को जीवित रखते हैं। खतरे की वजहें हाल के वर्षों में इन शक्तिपीठों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। इसके मुख्य कारण हैं: Cultural Impact यदि इन शक्तिपीठों की सुरक्षा नहीं हुई, तो बांग्लादेश की Hindu cultural legacy को गंभीर नुकसान होगा। मंदिरों की मूर्तियाँ, शिल्पकला और धार्मिक परंपराएं नष्ट हो सकती हैं। यह सिर्फ धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक नुकसान भी है। क्या किया जा सकता है? सरकार, स्थानीय समुदाय और NGO को मिलकर मंदिरों की सुरक्षा, संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता पर ध्यान देना होगा। समय रहते कदम उठाने से न केवल धर्मिक आस्था सुरक्षित रहेगी, बल्कि बांग्लादेश की cultural identity भी बची रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dhaka

Dhaka ISI Cell Controversy बांग्लादेश हिंसा और Pakistan Army Chief Asim Munir का नाम

बांग्लादेश में जारी हिंसा, छात्र आंदोलनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। भारतीय मीडिया रिपोर्टों और सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने Dhaka में एक गुप्त सेल (ISI Cell in Dhaka) सक्रिय किया है, जिसे लेकर Pakistan Army Chief Asim Munir पर सीधे आरोप लगाए जा रहे हैं। क्या है ISI Dhaka Cell का दावा? रिपोर्टों के मुताबिक, यह ISI सेल Dhaka स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के भीतर से काम कर रहा है। कहा जा रहा है कि इसकी कमान पाकिस्तानी सेना के एक ब्रिगेडियर के हाथों में है और इसका उद्देश्य बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करना है। हालाँकि, यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इसे नज़रअंदाज़ करने के पक्ष में भी नहीं हैं। बांग्लादेश में हिंसा और छात्र आंदोलन का कनेक्शन पिछले कुछ समय से बांग्लादेश में: इसी पृष्ठभूमि में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह हिंसा सिर्फ आंतरिक असंतोष है या इसके पीछे बाहरी ताकतों की भूमिका भी है? जमात-ए-इस्लामी और कट्टरपंथी नेटवर्क कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ISI की गतिविधियाँ स्थानीय इस्लामी संगठनों, विशेषकर जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नेटवर्कों के साथ तालमेल में हो सकती हैं।हालाँकि, इन दावों पर भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ इन्हें गंभीरता से देख रही हैं। भारत क्यों है सबसे ज़्यादा सतर्क? भारत के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति से जुड़ा हो सकता है, जिसमें वह भारत को चारों ओर से रणनीतिक दबाव में लाने की कोशिश करता रहा है। बांग्लादेश-पाकिस्तान रिश्तों में बदलाव राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बांग्लादेश में सत्ता संतुलन में बदलाव के बाद: लेकिन 1971 के ऐतिहासिक अनुभव को देखते हुए, बांग्लादेशी समाज में पाकिस्तान को लेकर अब भी गहरा अविश्वास मौजूद है। आधिकारिक बयान क्यों नहीं? अब तक: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Indian Constitution पर Rahul Gandhi का हमला बोले– BJP संस्थाओं को कर रही कमजोर

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन (Berlin) में एक संवाद कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी भारत के संविधान (Indian Constitution) को धीरे-धीरे कमजोर करने की कोशिश कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बना रही है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान केवल कानूनों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों लोगों के अधिकार, समानता और सम्मान की गारंटी है। उनके मुताबिक, जब संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पातीं, तो आम नागरिक का भरोसा टूटता है। ED-CBI के इस्तेमाल पर सवाल राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में ED और CBI जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल निष्पक्ष जांच के बजाय राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता या संगठन सरकार की नीतियों से सवाल पूछते हैं, उन्हें जांच में फंसा दिया जाता है। उनका कहना था,“हमारी लड़ाई बीजेपी से नहीं, बल्कि उस सोच से है जो संस्थाओं को कमजोर कर रही है और संविधान की आत्मा को नुकसान पहुँचा रही है।” लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया पर चिंता राहुल गांधी ने भारतीय लोकतंत्र को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनावों में पैसे की ताकत और संस्थागत दबाव लोकतांत्रिक संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। इससे जनता की आवाज़ कमजोर होती जा रही है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। दुनिया के लिए भी अहम है भारत का लोकतंत्र राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारत का लोकतंत्र सिर्फ देश तक सीमित नहीं है।“भारत एक वैश्विक उदाहरण रहा है। अगर यहां लोकतंत्र कमजोर होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा,” उन्होंने कहा। भारत में सियासी हलचल तेज राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज होने की संभावना है। बीजेपी पहले भी इस तरह के आरोपों को खारिज करती रही है और दावा करती है कि देश की सभी संस्थाएं संविधान के दायरे में स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में संविधान, लोकतंत्र और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Political Unrest एक के बाद एक गोलीकांड

Bangladesh इस समय एक गंभीर राजनीतिक संकट (Political Crisis) के दौर से गुजर रहा है। बीते कुछ हफ्तों में हुई राजनीतिक हत्याओं, नेताओं पर गोलीबारी और हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आम लोगों के मन में डर है, गुस्सा है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी। युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत ने बढ़ाया आक्रोश दिसंबर 2025 में ढाका में युवा राजनीतिक नेता शरीफ उस्मान हादी पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चला दी। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, लेकिन कई दिनों तक ज़िंदगी और मौत से जूझने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। हादी की मौत की खबर फैलते ही पूरे बांग्लादेश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई। उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए और “न्याय चाहिए” के नारे गूंजने लगे। कई जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ इलाकों में हालात बिगड़ गए। प्रदर्शन बने हिंसक, आम लोग फँसे डर के साए में हादी की हत्या के बाद ढाका, चटगांव और अन्य बड़े शहरों में प्रदर्शन तेज हो गए। कई स्थानों पर आगजनी, तोड़फोड़ और झड़पों की खबरें सामने आईं। इस दौरान कुछ दुखद घटनाएँ भी हुईं, जिनमें आम नागरिकों की जान जाने की खबरें आईं। अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब नेता सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा कौन करेगा? NCP नेता मोतालेब सिकदार पर हमला, हिंसा की कड़ी आगे बढ़ी इसी बीच एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के श्रमिक संगठन के केंद्रीय नेता मोतालेब सिकदार को खुलना में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह हमला साफ दिखाता है कि बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा अब थमने का नाम नहीं ले रही। चुनाव से पहले बिगड़ते हालात Bangladesh में फरवरी 2026 में राष्ट्रीय चुनाव होने हैं। ऐसे में लगातार हो रही हिंसक घटनाएँ सरकार और चुनाव आयोग दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। सरकार ने हमलों की निंदा की है और जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। आम नागरिकों को डर है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो चुनावी माहौल और ज्यादा हिंसक हो सकता है। आम लोगों की चिंता और देश का भविष्य आज बांग्लादेश का आम नागरिक यही सवाल पूछ रहा है—क्या राजनीति की कीमत इंसानी जान से चुकानी पड़ेगी? नेताओं पर हमले, सड़कों पर हिंसा और लगातार बढ़ता असंतोष देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक शांति के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी हालात पर नज़र बनाए हुए है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। Bangladesh इस समय केवल एक राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ रहा, बल्कि शांति, सुरक्षा और भरोसे की लड़ाई लड़ रहा है। अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो इसका असर न सिर्फ चुनावों पर बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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