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Israel Tour PM Modi ने Yad Vashem में दी श्रद्धांजलि, Defence Deal पर बड़ी चर्चा

होलोकॉस्ट स्मारक Yad Vashem में श्रद्धांजलि इज़राइल दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने Jerusalem स्थित ऐतिहासिक होलोकॉस्ट स्मारक Yad Vashem में नाजी शासन के दौरान मारे गए लगभग 60 लाख यहूदियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थल द्वितीय विश्व युद्ध के उस दर्दनाक इतिहास की याद दिलाता है, जब मानवता ने अपने सबसे कठिन दौर का सामना किया था। होलोकॉस्ट के दौरान Adolf Hitler के नेतृत्व में नाजी शासन ने लाखों निर्दोष लोगों का सुनियोजित नरसंहार किया था। प्रधानमंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर मौन रखा और शांति व सह-अस्तित्व का संदेश दिया। President Isaac Herzog से अहम मुलाकात अपनी यात्रा के दौरान PM Modi ने इज़राइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में रक्षा सहयोग, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। Defence Deal और Strategic Partnership पर फोकस सूत्रों के अनुसार, भारत और Israel के बीच संभावित Defence Deal को लेकर भी सकारात्मक बातचीत हुई है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। भारत के लिए इज़राइल आधुनिक रक्षा तकनीक का अहम साझेदार रहा है, जबकि इज़राइल भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक सहयोगी के रूप में देखता है। भावनात्मक और कूटनीतिक रूप से अहम दौरा PM Modi की यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि ऐतिहासिक संवेदनाओं से जुड़ा एक भावनात्मक क्षण भी साबित हुई। होलोकॉस्ट स्मारक पर उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि इतिहास की त्रासदियों को याद रखना और उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस दौरे से भारत-इज़राइल संबंधों को नई ऊर्जा मिली है और आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

India AI Summit विवाद BJP का दावा Congress ने पैसे देकर कराई Online बदनामी

भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इस ग्लोबल टेक इवेंट को भारत की डिजिटल ताकत का प्रतीक बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर यह आयोजन अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी ने कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे का ऑफर देकर AI समिट के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस संबंध में कुछ वीडियो और चैट स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसों के बदले समिट की आलोचना करने की बात कही गई है। BJP का आरोप क्या है? भाजपा प्रवक्ताओं के अनुसार, कुछ इन्फ्लुएंसर्स को मैसेज भेजकर कहा गया कि वे AI Summit से जुड़ी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें। आरोप है कि इसके बदले उन्हें तय रकम देने का प्रस्ताव रखा गया। पार्टी का कहना है कि यह केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। मामले को लेकर आधिकारिक जांच या किसी एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है। Youth Congress Protest से बढ़ा विवाद विवाद तब और गहरा गया जब AI समिट के दौरान Indian Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर नारेबाजी की। पुलिस ने इसे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया और कई लोगों को हिरासत में लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन को “सुनियोजित” करार देते हुए कहा कि यह आयोजन की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया कदम था। वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा था और सरकार को आलोचना स्वीकार करनी चाहिए। Congress का पक्ष कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पार्टी का किसी भी इन्फ्लुएंसर को पैसे देने से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि जब भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठते हैं, तो सत्ता पक्ष उसे देश विरोधी करार दे देता है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि AI Summit जैसे बड़े आयोजन पर सवाल उठाना या प्रदर्शन करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे देश की छवि से जोड़कर देखना सही नहीं है। Political Narrative और Public Perception AI Summit, जिसे भारत की तकनीकी प्रगति और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम माना जा रहा था, अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आम नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे विवाद देश की छवि पर असर डाल सकते हैं। वहीं कई लोग इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा बताते हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद खुलकर सामने आते हैं। आगे क्या? फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है। यदि आरोपों से जुड़े वीडियो और सबूतों की जांच होती है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। तब तक यह मुद्दा सियासी गर्मी बढ़ाता रहेगा। AI Summit Controversy अब केवल एक टेक इवेंट की खबर नहीं रह गई है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण बन गई है कि डिजिटल युग में राजनीति, सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन किस तरह एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या यह विवाद भी भारतीय राजनीति की कई बहसों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Row NCERT बदलाव पर Supreme Court बोला– सिर्फ माफी काफी नहीं

देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला स्कूल की किताबों और उनमें किए गए बदलावों से जुड़ा है। हाल ही में National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा कुछ पाठ्यपुस्तकों में संशोधन किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामला अदालत तक पहुंचा और सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है तो “सिर्फ माफी काफी नहीं” मानी जाएगी। क्या है पूरा मामला? NCERT ने हाल के समय में पाठ्यक्रम को “रैशनलाइज” करने और छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के उद्देश्य से कुछ अध्यायों और अंशों में बदलाव किए। इन बदलावों में इतिहास, लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाया या संक्षिप्त किया गया। यहीं से विवाद शुरू हुआ। कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या इन संशोधनों से छात्रों को देश की संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका की पूरी और संतुलित जानकारी मिल पाएगी? सुप्रीम कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सामग्री बेहद संवेदनशील विषय है। कोर्ट की टिप्पणी का सार यह था कि अगर किसी संस्था—खासकर न्यायपालिका—को बदनाम करने की मंशा से बदलाव किए गए हैं, तो केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, क्योंकि स्कूल की किताबें ही छात्रों की सोच और समझ की नींव रखती हैं। NCERT का पक्ष क्या है? NCERT का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया शैक्षणिक समीक्षा का हिस्सा थी। संस्था के अनुसार: हालांकि, आलोचकों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों का प्रभाव लंबे समय तक छात्रों की समझ पर पड़ सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद? यह मुद्दा केवल एक अध्याय या किताब तक सीमित नहीं है। यह बहस तीन बड़े सवालों को सामने लाती है: जब न्यायपालिका जैसी संस्था इस पर टिप्पणी करती है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। शिक्षा और समाज पर संभावित असर स्कूल की किताबें सिर्फ परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं होतीं। वे समाज, संविधान और लोकतंत्र की समझ विकसित करती हैं। ऐसे में अगर किसी भी बदलाव को लेकर संदेह पैदा होता है, तो उसका असर भरोसे पर पड़ता है—चाहे वह छात्रों का हो, अभिभावकों का या शिक्षकों का। इस पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा नीति में किया गया हर छोटा बदलाव भी व्यापक सामाजिक और संवैधानिक चर्चा का विषय बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी

PM मोदी की Israel यात्रा Defense, Technology और Trade में नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25-26 फरवरी 2026 को इज़राइल के लिए दो दिवसीय राजकीय दौरे पर गए। इस यात्रा को इज़रायली मीडिया ने “Strategic Reset” और “Landmark Moment” बताया है, यानी इसे भारत-इज़राइल संबंधों में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह मोदी का इज़राइल में दूसरा दौरा है, पिछला दौरा 2017 में हुआ था। इज़राइल में मोदी का गर्मजोशी से स्वागत इज़राइल में पीएम मोदी का स्वागत बेहद भव्य और रंगीन रहा। सड़कों पर “Namaste” के नारे लगे और भारतीय तिरंगे की रोशनी से जगह-जगह इमारतें जगमगा उठीं। संसद भवन कनेसट को भी भारतीय तिरंगे के रंगों में रोशन किया गया। मीडिया ने इस स्वागत को भारत और इज़राइल के बीच मित्रता और साझा सम्मान का प्रतीक बताया। Strategic Reset: क्या है खास? “Strategic Reset” का मतलब है कि भारत और इज़राइल अब अपने रिश्तों को सिर्फ औपचारिक दोस्ती तक सीमित नहीं रखेंगे। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, निवेश और व्यापार सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की योजना है। यानी यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) का मार्ग प्रशस्त करने वाला कदम है। मोदी का कार्यक्रम और ऐतिहासिक बातें पीएम मोदी इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। वे कनेसट (इज़राइली संसद) को संबोधित करेंगे, और इस तरह मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जिन्होंने यह अवसर प्राप्त किया। इसके अलावा मोदी याद वशेम (Holocaust Memorial) का दौरा भी करेंगे, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और सम्मान को दर्शाता है। रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों की संभावनाएँ भी हैं। क्यों कहा जा रहा है ‘New Phase’? इज़रायली मीडिया और विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत-इज़राइल रिश्तों में नए अध्याय (New Phase) की शुरुआत है। पिछली यात्राओं के मुकाबले अब सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा और व्यापक है। रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। राजनीतिक और वैश्विक प्रभाव इस दौरे से क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। इज़राइल के प्रधानमंत्री ने इसे स्थिरता और साझेदारी के प्रतीक के रूप में बताया। वहीं कुछ आलोचक, विशेषकर भारत में विपक्ष, यह कहते हैं कि भारत को फिलीस्तीन संकट जैसे मानवीय मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Debate NCERT के ‘Judicial Corruption’ चैप्टर पर CJI का सख्त स्टैंड

देश की स्कूली शिक्षा और न्यायपालिका—दोनों ही लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। ऐसे में जब National Council of Educational Research and Training (NCERT) की एक किताब में शामिल ‘Judicial Corruption’ (ज्यूडिशियल करप्शन) चैप्टर को लेकर विवाद खड़ा हुआ, तो मामला सीधे देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि मामला पहली नजर में सोचा-समझा कदम लगता है और वे स्वयं इस केस को देखेंगे। क्या है NCERT Judicial Corruption Controversy? विवाद उस अध्याय को लेकर है जिसमें न्यायिक भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भ और उदाहरण शामिल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका की छवि को लेकर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उनका कहना है कि स्कूल स्तर पर पढ़ाई जाने वाली किताबों में संवैधानिक संस्थाओं के बारे में संतुलित और जिम्मेदार भाषा होनी चाहिए। दूसरी तरफ कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मत है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और संस्थाओं की आलोचनात्मक समझ भी जरूरी है। उनके अनुसार, यदि विषय तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ रखा गया है, तो इसे शिक्षा के दायरे में ही देखा जाना चाहिए, न कि संस्थान के खिलाफ अभियान के रूप में। CJI का सख्त रुख सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि न्यायपालिका की साख और विश्वसनीयता पर आंच नहीं आने दी जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि अगर सामग्री भ्रामक या एकतरफा पाई गई तो अदालत जरूरी निर्देश दे सकती है। CJI का खुद इस मामले को देखने का फैसला बताता है कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद को बेहद गंभीरता से ले रहा है। Education vs Institution Reputation: बड़ा सवाल यह मामला केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े सवाल को सामने लाता है—क्या पाठ्यपुस्तकों में संवैधानिक संस्थाओं की आलोचनात्मक चर्चा होनी चाहिए? अगर हां, तो उसकी सीमा क्या हो? एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, दूसरी ओर संस्थाओं की गरिमा। संतुलन कहां बनेगा, यह अब अदालत के फैसले से तय होगा। आगे क्या हो सकता है? आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि: देशभर के अभिभावक, शिक्षक और छात्र अब इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि यह मामला केवल एक चैप्टर का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और न्यायपालिका के बीच भरोसे के रिश्ते का भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala

Kerala का नाम बदलेगा अब “Keralam” होगा आधिकारिक नाम

देश की राजनीति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने केरल (Kerala) का नाम बदलकर “केरलम (Keralam)” करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले के बाद अब आधिकारिक रूप से राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह प्रस्ताव पहले ही केरल विधानसभा द्वारा पारित किया जा चुका था। विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र से आग्रह किया था कि राज्य का पारंपरिक और स्थानीय नाम “केरलम” ही संविधान और सभी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किया जाए। मलयालम भाषा में राज्य को लंबे समय से “केरलम” कहा जाता रहा है, इसलिए इसे औपचारिक मान्यता देने की मांग उठी थी। क्यों बदला जा रहा है Kerala का नाम? राज्य सरकार का कहना है कि “केरल” नाम अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में प्रचलित रूप है, जबकि स्थानीय भाषा मलयालम में सही उच्चारण और ऐतिहासिक पहचान “केरलम” है। इस बदलाव को सांस्कृतिक सम्मान और भाषाई अस्मिता से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। उनका तर्क था कि जब कई राज्यों ने अपने पारंपरिक नामों को आधिकारिक रूप दिया है, तो केरल भी अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। अब आगे क्या होगा? कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला कदम संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाना होगा। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत और पहली अनुसूची में संशोधन के जरिए “केरल” की जगह “केरलम” दर्ज किया जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा। इसके बाद सरकारी दस्तावेज, आधिकारिक वेबसाइटें, साइनबोर्ड और अन्य प्रशासनिक अभिलेखों में भी नया नाम अपडेट किया जाएगा। राजनीतिक और सांस्कृतिक मायने यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की चर्चा भी तेज हो रही है। हालांकि सरकार इसे पूरी तरह सांस्कृतिक और भाषाई सम्मान से जुड़ा कदम बता रही है। कई लोगों के लिए यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और परंपरा को पहचान देने का प्रयास है। “केरलम” शब्द राज्य की मिट्टी, भाषा और इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prayagraj Controversy शंकराचार्य को गिरफ्तारी का अंदेशा, IPS अधिकारी पर साजिश का आरोप

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि प्रयागराज में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और प्रशासनिक तंत्र उनके विरुद्ध सक्रिय है। इस घटनाक्रम ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? शंकराचार्य का आरोप है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि हाल के दिनों में जिस तरह की प्रशासनिक गतिविधियां हुई हैं, उससे उन्हें अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि बिना निष्पक्ष जांच के कोई कठोर कदम न उठाया जाए। करीबी सूत्रों के मुताबिक, शंकराचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत और संस्थागत तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “सारा सिस्टम” उनके खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है। हाईकोर्ट से क्या मांग? याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं: कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि अदालत को प्रथम दृष्टया मामला गंभीर लगा, तो अंतरिम राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही होगा। क्यों बढ़ी चर्चा? यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं है। एक प्रमुख धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा खुले तौर पर गिरफ्तारी की आशंका जताना कई सवाल खड़े करता है। समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक आवाज को दबाने की कोशिश है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? अब सभी की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत प्रशासन से जवाब तलब कर सकती है और यह तय करेगी कि शंकराचार्य को तत्काल राहत मिलेगी या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Nitish

Bihar Political Drama लाठीचार्ज मुद्दे पर विधानसभा में टकराव, CM Nitish ने दिया करारा जवाब

बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चौकीदारों और दफेदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा ऐसा उठा कि सदन में तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे का माहौल बन गया। बात इतनी बढ़ी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बीच खुली नोकझोंक देखने को मिली। क्या है पूरा मामला? हाल ही में पटना में अपनी मांगों को लेकर चौकीदार और दफेदार सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना था कि वे लंबे समय से वेतन, सेवा शर्तों और सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसे विपक्ष ने “अनावश्यक लाठीचार्ज” बताया। इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और जवाब की मांग की। सदन में क्यों बढ़ी तल्खी? बहस के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) ने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका इशारा इस ओर था कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ रहे थे। लेकिन भाई वीरेंद्र ने सरकार के इस पक्ष को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठी क्यों चली? इसी बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने माहौल और गर्म कर दिया। RJD का हमला, सरकार का बचाव मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इसे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार समय रहते संवाद करती, तो नौबत लाठीचार्ज तक नहीं पहुंचती। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mexico में ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद भड़की हिंसा: 25 सैनिकों समेत 32 की मौत, 20 बैंक फूंके

Mexico में ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद भड़की हिंसा: 25 सैनिकों समेत 32 की मौत, 20 बैंक फूंके

Mexico में एक बड़े ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। देश के करीब 20 राज्यों में हिंसा भड़क उठी है। अब तक 32 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 25 सैनिक भी शामिल हैं। कई जगह आगजनी, फायरिंग और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। गर्लफ्रेंड से मिली लोकेशन, फिर हुआ एनकाउंटर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को ड्रग माफिया की लोकेशन उसकी गर्लफ्रेंड के जरिए मिली। इसके बाद ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें माफिया सरगना मारा गया। लेकिन उसकी मौत के बाद उसके गैंग के लोगों ने बदला लेने के लिए कई शहरों में हिंसा शुरू कर दी। 20 राज्यों में आगजनी और हमला हिंसा की लहर इतनी तेज रही कि करीब 20 राज्यों में सरकारी और निजी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। 20 से ज्यादा बैंकों को आग के हवाले कर दिया गया। कई जगहों पर सड़कों को ब्लॉक किया गया और वाहनों में आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसा डर और तनाव पहले कभी नहीं देखा। आम नागरिक अपने घरों में छिपने को मजबूर हो गए। स्कूल और बाजार बंद कर दिए गए हैं। सेना और पुलिस अलर्ट पर मेक्सिको सरकार ने हालात को काबू में करने के लिए सेना और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की है। कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। आम लोगों पर सबसे ज्यादा असर इस हिंसा का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। रोज कमाने-खाने वाले लोगों का काम ठप हो गया है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। मेक्सिको में ड्रग माफिया की जड़ें लंबे समय से मजबूत रही हैं। ऐसे में यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अपराध के खिलाफ लड़ाई कितनी चुनौतीपूर्ण है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश, 7 की मौत: रांची से दिल्ली जा रहा था विमान

Jharkhand के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश, 7 की मौत: रांची से दिल्ली जा रहा था विमान

Jharkhand के चतरा जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। रांची से दिल्ली जा रहा एक एयर एंबुलेंस विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि टेकऑफ के करीब 20 मिनट बाद ही विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया था। क्या हुआ हादसे के दिन? जानकारी के मुताबिक, विमान ने Ranchi से उड़ान भरी थी और उसे New Delhi पहुंचना था। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद पायलट से संपर्क टूट गया। बाद में खोजबीन के दौरान विमान का मलबा Chatra जिले के एक दूरदराज इलाके में मिला। स्थानीय प्रशासन और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की जान चली गई। राहत और जांच कार्य जारी हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन ने इलाके को घेर लिया। बचाव दल और पुलिस ने शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, खराब मौसम या तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, असली कारण जांच के बाद ही साफ होगा। केंद्र और राज्य सरकार ने हादसे पर दुख जताया है। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ एयर एंबुलेंस का काम ही जिंदगी बचाना होता है, लेकिन इस बार वही उड़ान कई परिवारों के लिए अंतिम सफर बन गई। जिन लोगों ने अपनों को सुरक्षित पहुंचाने की उम्मीद की थी, उन्हें यह दुखद खबर मिली। पूरे इलाके में शोक का माहौल है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी कारण सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां कात्यायनी

Navratri 2026: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा, जानें महिषासुर वध की कथा और मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मां कात्यायनी की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी की कठोर आराधना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायीं। मान्यता है कि देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। भोग: मां को शहद अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

लिव-इन पार्टनर की हत्या कर दर्ज कराई गुमशुदगी, पुलिस पूछताछ में खुला राज

मध्यप्रदेश के भिंड में लिव-इन पार्टनर की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि भिंड निवासी सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव ने बिहार निवासी नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता की हत्या कर शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया। इसके बाद उसने पुलिस को गुमशुदगी का आवेदन देकर मामले को छिपाने की कोशिश की। पुलिस की पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। फिलहाल पुलिस टीम नदी में शव की तलाश कर रही है। कॉलेज में हुई थी पहचान, लिव-इन में रहने लगे दोनों जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा था और उसकी कोई संतान नहीं थी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उसका संपर्क स्नेहलता से हुआ। बाद में दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। इस दौरान उनका एक बेटा भी हुआ। बताया जा रहा है कि सत्यप्रकाश का अपनी पत्नी से विवाद चल रहा था। इसी के चलते उसने स्नेहलता की हत्या की साजिश रची। 8 अक्टूबर को उसने अपने बेटे को पत्नी के हवाले कर दिया। कानपुर घुमाने के बहाने ले गया, रास्ते में हत्या का आरोप आरोप है कि बेटे को पत्नी को सौंपने के बाद सत्यप्रकाश स्नेहलता को कानपुर घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया। इस दौरान एंबुलेंस चालक राजवीर खन्ना और एक अन्य साथी भी उसके साथ थे। पुलिस के मुताबिक, रास्ते में स्नेहलता की हत्या कर दी गई और शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया गया। गुमशुदगी का आवेदन देकर छिपाने की कोशिश हत्या के बाद सत्यप्रकाश ने सिटी कोतवाली पुलिस को लिखित आवेदन देकर स्नेहलता के लापता होने की सूचना दी। बताया गया है कि उसने गुमशुदगी को लेकर पर्चे भी छपवाए थे, ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि, पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पूछताछ के दौरान सत्यप्रकाश ने हत्या की बात कबूल कर ली। अब पुलिस नदी में शव की तलाश कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और घटना से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस ने क्या कहा? सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मुकेश शाक्य के मुताबिक, लापता युवती की हत्या किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस टीम शव की तलाश कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
PM Modi

PM Modi Ladakh Visit: लद्दाख की नई पीढ़ी पर फोकस, ₹3,350 करोड़ के Projects शुरू

लद्दाख में विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने 15 अक्टूबर 2026 को लद्दाख में करीब ₹3,350 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लद्दाख का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और यहां की नई पीढ़ी का भविष्य सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इन परियोजनाओं का सीधा संबंध लद्दाख की कनेक्टिविटी, बिजली, पानी, पर्यटन और स्थानीय लोगों की सुविधाओं से है। सरकार का जोर सिर्फ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर नहीं, बल्कि युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार के बेहतर अवसर देने पर भी है। लद्दाख के युवाओं के लिए क्या है सरकार का Plan? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में लद्दाख के युवाओं की क्षमता और उनके भविष्य पर जोर दिया। उनका कहना है कि क्षेत्र के युवाओं को बेहतर शिक्षा, आधुनिक तकनीक और खेलों में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। लद्दाख में पर्यटन के विस्तार, विंटर टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय कारोबार और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार ग्रीनहाउस खेती को भी बढ़ावा दे रही है। लद्दाख जैसे ठंडे क्षेत्र में खेती करना आसान नहीं है, इसलिए ग्रीनहाउस तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। Leh Airport पर ₹640 करोड़ का बड़ा Investment लद्दाख में पर्यटन और हवाई यात्रा को बेहतर बनाने के लिए लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया गया। इस परियोजना पर करीब ₹640 करोड़ खर्च किए गए हैं। लगभग 23,800 वर्ग मीटर में बने इस टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता 35 लाख बताई गई है। यहां आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ लद्दाख की स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला की झलक भी देखने को मिलेगी। टर्मिनल में ऊर्जा की खपत कम करने के लिए जियोथर्मल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बेहतर एयरपोर्ट से पर्यटकों को सुविधा मिलने के साथ लद्दाख के पर्यटन कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है। Nimmu-Padum-Darcha Road से आसान होगा सफर लद्दाख की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दरचा सड़क भी महत्वपूर्ण है। यह मार्ग लेह के निमू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ता है और जांस्कर घाटी से होकर गुजरता है। इस सड़क का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लद्दाख पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध होगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों और सुरक्षा बलों की आवाजाही भी आसान हो सकती है। इस क्षेत्र में बेहतर सड़क संपर्क का मतलब सिर्फ कम समय में सफर पूरा करना नहीं है। इससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और जरूरी सामान तक पहुंच बनाने में भी मदद मिल सकती है। Power Projects से मजबूत होगी बिजली की व्यवस्था लद्दाख में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए हाइड्रोपावर और ट्रांसमिशन से जुड़ी परियोजनाओं पर भी ध्यान दिया गया है। 9 मेगावाट क्षमता वाला हानू स्मॉल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है। वहीं, 66 केवी की दाह-हानू-खाल्त्सी ट्रांसमिशन लाइन बिजली नेटवर्क को मजबूत करने में मदद करेगी। इन परियोजनाओं से बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इससे घरों के साथ स्थानीय कारोबार और दूसरी जरूरी सेवाओं को भी फायदा मिल सकता है। लद्दाख की ऐतिहासिक विरासत को मिलेगा संरक्षण विकास परियोजनाओं के बीच लद्दाख की प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखने पर भी ध्यान दिया गया है। लेह के सिंधु घाट पर पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्घाटन किया गया। पेट्रोग्लिफ ऐसी प्राचीन आकृतियां होती हैं, जिन्हें चट्टानों पर उकेरा जाता है। इनमें उस दौर के लोगों के जीवन, जानवरों और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां मिल सकती हैं। ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। इससे लद्दाख के इतिहास को समझने और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है। Project Him Sarovar: 40 गांवों में बने जल निकाय लद्दाख में पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। खासकर खेती के मौसम में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी जुटाना कई इलाकों में मुश्किल हो सकता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Project Him Sarovar के तहत 40 गांवों में 40 जल निकाय विकसित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य पानी को संरक्षित करना और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल आसान बनाना है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए मदद मिल सकती है। साथ ही, जल संरक्षण की बेहतर व्यवस्था क्षेत्र की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी हो सकती है। Tourism और रोजगार पर भी रहेगा जोर लद्दाख अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बौद्ध मठों, पहाड़ों और एडवेंचर गतिविधियों के लिए जाना जाता है। बेहतर एयरपोर्ट और सड़क संपर्क से यहां आने वाले पर्यटकों की यात्रा आसान हो सकती है। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए गाइड, होटल, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय उत्पादों से जुड़े काम के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, पर्यटन का विस्तार पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति को ध्यान में रखकर करना जरूरी होगा। लद्दाख जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। लद्दाख के लिए क्यों अहम हैं ₹3,350 करोड़ के Projects? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित और शुरू की गई इन परियोजनाओं का महत्व केवल बड़ी रकम तक सीमित नहीं है। इनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। बेहतर सड़कें और एयरपोर्ट सफर को आसान बना सकते हैं। बिजली परियोजनाएं ऊर्जा व्यवस्था मजबूत कर सकती हैं, जबकि जल निकाय खेती में मदद कर सकते हैं। दूसरी ओर, शिक्षा, खेल और पर्यटन पर ध्यान देने से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं। निष्कर्ष: लद्दाख में ₹3,350 करोड़ की विकास परियोजनाएं क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अब इनकी सफलता इस बात से तय होगी कि इनका लाभ स्थानीय लोगों, किसानों, कारोबारियों और युवाओं तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचता है। प्रधानमंत्री का लद्दाख की नई पीढ़ी पर जोर इस बात को रेखांकित करता है कि विकास...

भोपाल न्यू मार्केट आग मामले में छोले-भटूरे दुकान संचालक पर FIR, आज से हॉकर्स की शिफ्टिंग

भोपाल। न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस की जांच में सामने आया कि दुकान में भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी, जिसके बाद लपटें फैल गईं। हादसे में आसपास की चार अन्य दुकानों और 12 से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। आग से करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार से हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी है। निगम ने चेतावनी दी है कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स का सामान जब्त किया जा सकता है। भट्टी के पास रखे कपड़े में लगी थी आग पुलिस की जांच के मुताबिक, बालाजी छोले-भटूरे दुकान में भट्टी जल रही थी। इसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में आम्रपाली रेस्टोरेंट, विजय स्टोर, एक कैफे और मोबाइल दुकान को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने दुकान संचालक के खिलाफ लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक, आग भट्टी के पास रखे कपड़े से शुरू हुई थी। वहीं, दुकान में अग्नि सुरक्षा के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं, इसकी जांच नगर निगम कर रहा है। न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच जांचने के लिए मॉकड्रिल आग की घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच और रास्तों में आने वाली बाधाओं की जांच शुरू की है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई। इस दौरान दो दमकल वाहनों को पूरे मार्केट में घुमाया गया। जहां दमकल को रुकना पड़ा, वहां से निगम ने सामान जब्त किया। 8 अक्टूबर को आग लगने के दौरान दुकानों के सामने रखा सामान दमकल वाहनों के रास्ते में बाधा बना था। इसी को देखते हुए निगम ने बाजार में अतिक्रमण हटाने और रास्ते खाली रखने की कार्रवाई तेज की है। टीटी नगर स्टेडियम के पास शिफ्ट होंगे हॉकर्स नगर निगम ने बुधवार को पूरे दिन मुनादी कराकर हॉकर्स को गुरुवार से निर्धारित स्थान पर जाने की सूचना दी। अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया के मुताबिक, न्यू मार्केट के नो-व्हीकल जोन में रेहड़ी लगाकर व्यवसाय करने वाले हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास स्थित हाट बाजार में विस्थापित किया जाएगा। निगम की योजना न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की है, ताकि बाजार के रास्ते खुले रहें और आपात स्थिति में दमकल वाहनों को पहुंचने में परेशानी न हो। दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग नगर निगम दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग भी कर रहा है। बुधवार से यह प्रक्रिया शुरू की गई। दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पीली लाइन से आगे सामान रखने पर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। निगम का उद्देश्य दुकानों के सामने का रास्ता खाली रखना है, ताकि आग या किसी अन्य आपात स्थिति में बचाव कार्य प्रभावित न हो। आग वाली जगह से 100 फीट दूर भी जलती हैं भट्टियां आग लगने वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर छोले-भटूरे की दो अन्य दुकानें भी संचालित हो रही हैं। आसपास दो से तीन नमकीन की दुकानें भी हैं, जहां सुबह से रात तक भट्टियां जलती हैं। ऐसे में आग से बचाव के इंतजामों और भट्टियों के आसपास रखे सामान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दुकानों में अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है। चौक बाजार में 22 लाख का फायर हाइड्रेंट सिस्टम भी सवालों में शहर के पुराने बाजारों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। जानकारी के मुताबिक, चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में आग बुझाने के लिए नगर निगम ने करीब 22 लाख रुपये की लागत से अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया था। जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान इस सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसके बाद सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। जुमेराती, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत शहर के आठ प्रमुख बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच और रखरखाव की जरूरत बताई जा रही है। बैरागढ़ के फायर सेफ्टी सिस्टम के रखरखाव पर भी सवाल 17 दिसंबर 2017 को बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लगी थी, जिसमें 100 से ज्यादा कपड़े की दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। घटना के बाद होज-रील पाइप, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर वाटर पंप लगाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिस्टम लगाने के बाद उसके रखरखाव में कमी और उपकरणों पर जंग लगने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। मेन कॉरिडोर में अतिक्रमण और मॉकड्रिल नहीं होने की बात भी कही गई है। न्यू मार्केट की आग के बाद अब सवाल केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि बाजारों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच, रखरखाव और आपातकालीन रास्ते खुले रखने का भी है।

भारत की हार पर भड़के सुनील गावस्कर, बोले- पिच नहीं, खराब गेंदबाजी जिम्मेदार

हैदराबाद। वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी-20 मुकाबले में भारतीय टीम की 24 रन से हार के बाद पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने गेंदबाजों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत की हार की वजह पिच नहीं, बल्कि खराब गेंदबाजी थी। गावस्कर के मुताबिक, भारतीय गेंदबाजों ने कई फुलटॉस और खराब लेंथ की गेंदें डालीं, जिससे वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को बड़ा स्कोर बनाने का मौका मिला। गावस्कर ने कहा कि अगर गेंदबाज अपनी रणनीति को सही तरीके से लागू नहीं कर पाते, तो इसके लिए पिच को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी माना कि गेंदबाजी में तय योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं कर पाना टीम पर भारी पड़ा। गावस्कर बोले- फुलटॉस डालकर पिच को दोष नहीं दे सकते गावस्कर ने जियोहॉटस्टार पर कहा कि भारतीय गेंदबाजों की कमियों के कारण वेस्टइंडीज बड़ा स्कोर बनाने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि अक्सर पिच को लेकर शिकायत की जाती है और कहा जाता है कि वह गेंदबाजों की मदद नहीं कर रही, लेकिन फुलटॉस डालने पर पिच को दोष देना सही नहीं है। उन्होंने गेंदबाजों को सलाह दी कि परिस्थितियों का फायदा उठाने के लिए सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करना जरूरी है। फुलटॉस और बल्लेबाजों के लिए अनुकूल लेंथ पर गेंद डालने से उन्हें आसानी से रन बनाने का मौका मिलता है। गावस्कर के मुताबिक, वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने बाद में सही लेंथ और यॉर्कर का इस्तेमाल किया, जिससे भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाया जा सका। दोबारा बिछाई गई पिच पर गेंद रुककर आने की शिकायत हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम की दोबारा बिछाई गई पिच से गेंदबाजों को कुछ मदद मिलने की बात सामने आई। खिलाड़ियों ने बताया कि कुछ मौकों पर गेंद पिच पर रुककर आई और उछाल में भी बदलाव देखने को मिला। हालांकि, गावस्कर का मानना था कि गेंदबाजों को इन परिस्थितियों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए था। उनके अनुसार, पिच से मिलने वाली संभावित मदद तभी उपयोगी साबित होती है, जब गेंदबाज सही जगह गेंद डालें। इससे पहले भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर भी ऐसी पिचों की जरूरत पर जोर दे चुके हैं, जिन पर बल्लेबाज और गेंद के बीच बेहतर मुकाबला देखने को मिले। शमार जोसेफ की गेंदबाजी पर भी उठाए सवाल गावस्कर ने वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज शमार जोसेफ की गेंदबाजी के तरीके पर भी सवाल उठाए। मैच के दौरान जोसेफ की एक बाउंसर भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह के कंधे पर लगी। इसके बाद अर्शदीप विकेट छोड़कर बल्लेबाजी करने लगे, लेकिन जोसेफ ने उनके खिलाफ बॉडीलाइन पर गेंदबाजी जारी रखी और एक और बाउंसर डाल दी। इस पर कमेंट्री के दौरान गावस्कर ने कहा कि जोसेफ स्टंप्स पर गेंदबाजी करने के बजाय अर्शदीप को निशाना बना रहे थे, जबकि उस समय स्टंप्स असुरक्षित थे। दूसरी बार चोटिल होने से बाल-बाल बचने के बाद अर्शदीप आगे बल्लेबाजी जारी नहीं रख सके और 5 रन पर रिटायर हर्ट हो गए। 24 रन से हारा भारत बुधवार को हैदराबाद में खेले गए चौथे टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत को 24 रन से हराया। मैच के बाद भारतीय गेंदबाजी की रणनीति और पिच की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। गावस्कर की टिप्पणी ने साफ कर दिया कि उनके मुताबिक, हार के लिए परिस्थितियों से ज्यादा गेंदबाजों का प्रदर्शन जिम्मेदार था।

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