आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलPM Modi on Paper Leak: युवाओं को दिया भरोसा, Fast Track Courts का ऐलान; राहुल गांधी का पलटवारBREAKINGदेश-हरपलड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयारBREAKINGदेश-हरपलअजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदातBREAKINGबिज़नेसBPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजेBREAKINGBreaking Newsफ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पदBREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचेBREAKINGप्रदेशबिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री की 17 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, लोकायुक्त जांच में आय से 627% अधिक संपत्ति मिलीBREAKINGमध्य प्रदेशभोपाल में अरेरा हिल्स थाना प्रभारी और आरक्षक निलंबित, महिला से अनैतिक संबंध के आरोपों पर विभागीय जांच शुरूBREAKINGदेश-हरपलPM Modi on Paper Leak: युवाओं को दिया भरोसा, Fast Track Courts का ऐलान; राहुल गांधी का पलटवारBREAKINGदेश-हरपलड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयारBREAKINGदेश-हरपलअजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदातBREAKINGबिज़नेसBPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजेBREAKINGBreaking Newsफ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पदBREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचेBREAKINGप्रदेशबिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री की 17 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, लोकायुक्त जांच में आय से 627% अधिक संपत्ति मिलीBREAKINGमध्य प्रदेशभोपाल में अरेरा हिल्स थाना प्रभारी और आरक्षक निलंबित, महिला से अनैतिक संबंध के आरोपों पर विभागीय जांच शुरू

NE

News Elementor

Latest Posts

Mod. Yunus

चिकन नेक कॉरिडोर पर यूनुस का बयान: ‘हम बांग्लादेश को तोड़कर समंदर तक अपना रास्ता बना सकते हैं…’, पूर्वोत्तर में भड़के विरोध के स्वर

नई दिल्ली। बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के एक बयान ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। यूनुस ने कथित तौर पर कहा कि अगर बांग्लादेश भारत के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो वह समुद्र तक अपना रास्ता बना सकता है। यह टिप्पणी भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर की गई, जिसे देश के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाली पतली ज़मीन की पट्टी माना जाता है। यूनुस का विवादित बयान और पृष्ठभूमि खबरों के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस हाल ही में चीन की यात्रा पर थे, जहां उन्होंने कथित तौर पर बांग्लादेश को चीन के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश एक लैंडलॉक्ड (चारों ओर से भूमि से घिरा) देश नहीं है और अगर वह भारत से टकराने को तैयार हो, तो समुद्र तक अपनी पहुंच बना सकता है। यूनुस के इस बयान के बाद पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई नेताओं और संगठनों ने इसे भारत की अखंडता के खिलाफ खुली धमकी बताया है। क्या है चिकन नेक कॉरिडोर? चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए एक अत्यंत संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र है। यह सिर्फ 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि पट्टी है, जो देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ती है। चीन और बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब स्थित इस क्षेत्र को रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। यदि इस क्षेत्र पर किसी तरह का बाहरी खतरा उत्पन्न होता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों का भारत से संपर्क कट सकता है। पूर्वोत्तर में भड़का गुस्सा यूनुस के बयान के बाद असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया है। असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के नेताओं ने इस बयान को पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर खतरा बताया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा,“भारत का कोई भी हिस्सा, खासकर पूर्वोत्तर, बाहरी ताकतों के लिए कभी कमजोर नहीं रहा। हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और कोई भी व्यक्ति या देश हमारी संप्रभुता को चुनौती नहीं दे सकता।” इसके अलावा, कई राष्ट्रवादी संगठनों और छात्र संघों ने भी यूनुस के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत की सुरक्षा पर असर? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बांग्लादेश के भीतर ऐसी भावनाएं पनपती हैं, तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, भारत और बांग्लादेश के रिश्ते अभी तक सकारात्मक रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत हैं। लेकिन इस तरह की बयानबाजी से पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया अब तक बांग्लादेश सरकार की ओर से यूनुस के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, बांग्लादेश के कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस बयान को व्यक्तिगत विचार बताते हुए कहा कि यह सरकारी नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। निष्कर्ष मोहम्मद यूनुस का यह बयान भारत के लिए सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल में ऐसे बयान आग में घी डालने का काम कर सकते हैं। अब देखना होगा कि भारत सरकार और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा एजेंसियां इस मामले पर क्या कदम उठाती हैं।
Read more

BREAKING NEWS:वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में कल 12 बजे होगी चर्चा: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, बड़ा सियासी संग्राम तय

नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विधेयक कल दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिस पर 8 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। हालांकि, विपक्ष ने इस चर्चा को 12 घंटे तक बढ़ाने की मांग की है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा टकराव हो सकता है। क्या है वक्फ संशोधन विधेयक? वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को नियंत्रित करता है। हालांकि, समय-समय पर इस अधिनियम को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए संशोधन में क्या बदलाव किए जा रहे हैं? विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे समुदाय के खिलाफ बताया और कहा,“सरकार बिना सभी पक्षों को सुने यह विधेयक लाना चाहती है, जो पूरी तरह अनुचित है। यह मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे।” कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा,“यह कानून देश के लाखों लोगों को प्रभावित करेगा, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। केवल 8 घंटे की चर्चा काफी नहीं है।” योगी आदित्यनाथ का समर्थन, कहा- बदलाव समय की मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा,“देश में वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग बहुत ज़रूरी है। यह संशोधन पारदर्शिता लाने और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जा रहा है।” योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि,“वक्फ संपत्तियों को लेकर वर्षों से विवाद और अनियमितताएं रही हैं। अगर कोई बदलाव किया जा रहा है, तो वह राष्ट्रहित और समाजहित में है।” विधेयक के समर्थक और विरोधी कौन? इस विधेयक को लेकर दो खेमे बन चुके हैं।✅ समर्थक (BJP, JDU, AIADMK) – इन दलों का कहना है कि यह विधेयक संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करेगा और भ्रष्टाचार को रोकेगा।❌ विरोधी (SP, Congress, TMC, AIMIM, Left) – विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार इस कानून के ज़रिए वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करना चाहती है और अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अब आगे क्या होगा? निष्कर्ष: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है। सरकार इसे भ्रष्टाचार रोकने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ साजिश करार दे रहा है। कल संसद में होने वाली बहस के बाद ही यह तय होगा कि यह विधेयक पास होगा या नहीं।
Read more

क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
Read more
Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
Read more
PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
Read more

सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
Read more
SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
Read more
1 185 186 187

Editor's Picks

PM Modi

PM Modi on Paper Leak: युवाओं को दिया भरोसा, Fast Track Courts का ऐलान; राहुल गांधी का पलटवार

देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच PM Modi ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब और सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने घोषणा की कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए Fast Track Courts का गठन किया जाएगा, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। ऐसे में पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। PM मोदी बोले- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी छात्र की मेहनत और सपनों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी और ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए Fast Track Courts स्थापित किए जाएंगे। इससे जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार तकनीक के बेहतर उपयोग, कड़ी निगरानी और सख्त कानूनों के जरिए भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनका कहना था कि दोषियों को किसी भी हाल में बचने नहीं दिया जाएगा। राहुल गांधी ने सरकार से पूछे सवाल प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि केवल घोषणाएं करने से समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को भरोसा तभी मिलेगा, जब दोषियों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। छात्रों की उम्मीदें बढ़ीं पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित छात्र लंबे समय से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ऐसे में Fast Track Courts की घोषणा को कई छात्र सकारात्मक कदम मान रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि इस फैसले का वास्तविक असर तभी दिखेगा, जब दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई होगी और भविष्य में परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.