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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi ने अमेरिका में उठाए चुनाव पर सवाल, बोले- महाराष्ट्र में दो घंटे में कैसे पड़े 65 लाख वोट?

Congress नेता Rahul Gandhi एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते नजर आए हैं। इस बार उन्होंने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय चुनावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सिर्फ दो घंटे—शाम 5:30 से 7:30 बजे के बीच—में 65 लाख वोट कैसे पड़ सकते हैं? Rahul Gandhi ने यह सवाल उठाते हुए चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक आम आदमी को यह जानने का हक है कि उसका वोट सुरक्षित और सही तरीके से दर्ज हो रहा है या नहीं। “इतने कम समय में इतने ज्यादा वोट पड़ना असंभव सा लगता है,” राहुल ने कहा। Rahul का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में लोकसभा चुनाव का माहौल गरम है और हर पार्टी अपनी रणनीति में जुटी है। राहुल ने यह भी कहा कि आज के समय में लोगों को यह समझना जरूरी है कि लोकतंत्र की बुनियाद क्या है और इसे मजबूत रखने के लिए पारदर्शिता कितनी जरूरी है। उनके इस बयान पर बीजेपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया भी आ सकती है, क्योंकि इससे पहले भी कई बार राहुल गांधी ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठा चुके हैं। हालांकि, राहुल गांधी का मकसद चुनावी प्रक्रिया को और मजबूत और साफ-सुथरा बनाना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सवाल किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र के हक में हैं।
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Joint Operation में Security Forces की बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में Arms और Ammunition बरामद

Joint Operation में Security Forces की बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में Arms और Ammunition बरामद

Manipur में जारी तनावपूर्ण हालातों के बीच Security Forces को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। Assam Rifles और Manipur Police की Joint Operation टीम ने हाल ही में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान भारी मात्रा में arms और ammunition बरामद किए हैं। यह ऑपरेशन Imphal East, Thoubal और Kakching जिलों में अलग-अलग जगहों पर चलाया गया। Security agencies को इन इलाकों में illegal weapons की movement की intelligence inputs मिली थी, जिसके बाद ये coordinated operations शुरू किए गए। तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों ने कुल 6 arms, जिनमें एक AK series rifle, दो Single Barrel Guns, एक .303 Rifle और दो Improvised weapons शामिल हैं, को बरामद किया। इसके साथ-साथ लगभग 17 hand grenades, 5 types के mortars, detonators और बड़ी मात्रा में live ammunition भी जब्त की गई है। इन हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी से साफ है कि कुछ असामाजिक तत्व राज्य में फिर से हिंसा भड़काने की साजिश में लगे हुए हैं। Security Forces की सजगता और सटीक action के चलते एक बड़ी अनहोनी टल गई। इस Joint operation में local police की active भागीदारी भी सराहनीय रही, जिन्होंने ground level पर intelligence sharing और coordination में अहम भूमिका निभाई। Authorities के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि राज्य में peace और stability को सुनिश्चित किया जा सके। State government ने भी इन efforts की सराहना करते हुए कहा है कि किसी भी कीमत पर law and order की स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। देश हरपल की रिपोर्टManipur में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन अभी भी challenges बाकी हैं। ऐसे में इस तरह की joint operations न सिर्फ आतंक के मंसूबों को नाकाम कर रहे हैं, बल्कि आम जनता में सुरक्षा को लेकर विश्वास भी जगा रहे हैं।
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Nishikant Dubye

Supreme Court, Contempt, Nishikant Dubey – अब कानूनी घेरे में घिरते दिख रहे हैं बीजेपी सांसद?

नई दिल्ली।Supreme Court के खिलाफ की गई कथित ‘अवमाननापूर्ण टिप्पणी’ अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने देश के Attorney General (एटॉर्नी जनरल) को एक आधिकारिक चिट्ठी भेजकर निशिकांत दुबे के खिलाफ Contempt of Court (कोर्ट की अवमानना) की कार्यवाही की अनुमति मांगी। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न्यायपालिका के सम्मान और स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवकुमार त्रिपाठी की इस चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने मांग की है कि सांसद दुबे पर Contempt of Court Act, 1971 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते निशिकांत दुबे को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए था, न कि उस पर उंगली उठानी चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अब तक दुबे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि अगर एटॉर्नी जनरल इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हैं और सहमति देते हैं, तो निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की विधिवत सुनवाई शुरू हो सकती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर Judiciary vs Legislature की पुरानी बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा सदस्य न्यायपालिका की आलोचना की आड़ में अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं? अब सबकी निगाहें Attorney General की प्रतिक्रिया और Supreme Court के रुख पर टिकी हैं। क्या यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत के बीच टकराव का कारण बनेगा? देश हरपल इस प्रकरण से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको सबसे पहले देगा।
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"Serious Problem" in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University

Brown University :चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या…’, राहुल गांधी ने अमेरिका में उठाया महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा

“Serious Problem” in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान भारत की चुनाव प्रणाली में ‘गंभीर समस्या’ की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची में अचानक हुए बड़े बदलावों को लेकर चिंता जताई।​ महाराष्ट्र चुनाव पर सवाल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच लगभग 70 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जो हिमाचल प्रदेश की आबादी के बराबर है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव असामान्य है और चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना था कि विपक्ष द्वारा बार-बार अनुरोध करने के बावजूद चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और हरियाणा की मतदाता सूचियाँ प्रदान नहीं कीं।​ चुनाव आयोग पर आरोप गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता में विफल रहा है और विपक्ष को आवश्यक जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोग की जिम्मेदारी है कि वह चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए और सभी पक्षों को आवश्यक जानकारी प्रदान करे।​ अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया मुद्दा ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत के दौरान, राहुल गांधी ने कहा, “हमारे लिए यह बहुत साफ था कि चुनाव आयोग समझौता कर चुका है। यह बहुत साफ है कि सिस्टम में कुछ बहुत गड़बड़ है। हमने इसे सार्वजनिक रूप से कहा है, मैंने इसे कई बार कहा है।” राहुल गांधी का यह बयान भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। उनकी मांग है कि चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों को समान रूप से जानकारी प्रदान करे और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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दिल्ली

दिल्ली के मुस्तफाबाद में 4 मंजिला इमारत ढही, CCTV में कैद हुआ खौफनाक पल; 4 की मौत, कई अब भी मलबे में फंसे

दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके से शनिवार तड़के एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। 14 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन 8-10 लोग अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है। यह दर्दनाक हादसा आसपास के लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। घटना की भयावहता सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें देखा गया कि अचानक एक चिंगारी उठी और कुछ ही सेकंड में गली धूल के गुबार से भर गई, जिससे कैमरा भी कुछ नहीं रिकॉर्ड कर पाया। CCTV Footage: कैसे गिरी इमारत? CCTV फुटेज में दिखा कि इमारत गिरने से पहले एक हल्की चिंगारी उठी और उसके तुरंत बाद धूल का विशाल गुबार फैल गया। ये दृश्य इतने अचानक और भयावह थे कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। 2:50 AM पर मिला फोन कॉल, NDRF और फायर ब्रिगेड ने संभाली कमान डिविजनल फायर ऑफिसर राजेंद्र अटवाल ने बताया कि उन्हें तड़के 2:50 बजे कॉल मिला था। जब उनकी टीम मौके पर पहुंची, तब तक पूरी इमारत जमींदोज हो चुकी थी। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। NDRF अधिकारी ने इस घटना को “पैनकेक कोलैप्स” कहा, यानी जब एक के ऊपर एक फ्लोर गिरते हैं। ऐसी स्थितियों में ज़िंदा बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन हर ज़िंदगी को बचाने की पूरी कोशिश जारी है। घनी बस्ती और तंग गलियों ने बचाव कार्य को बनाया चुनौतीपूर्ण मुस्तफाबाद की तंग गलियों के कारण रेस्क्यू टीम को भारी मशीनें अंदर लाने में परेशानी हो रही है। फिर भी जवान हर हाथ से मलबा हटाकर लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बारिश और आंधी के बाद हुआ हादसा, कारण की जांच जारी हादसे से कुछ घंटे पहले दिल्ली में तेज़ बारिश और आंधी आई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी के बाद इमारत कमजोर हो गई होगी। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि असली वजह की जांच की जा रही है। GTB अस्पताल में चल रहा घायलों का इलाज जो लोग मलबे से निकाले गए हैं, उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है। सरकार और प्रशासन से अपील स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो और क्षेत्र में जर्जर इमारतों का सर्वे कराकर उन्हें खाली कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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Waqf Amendment

Waqf Amendment पर Jagdambika Pal का बड़ा बयान: Report असंवैधानिक निकली तो दे दूंगा इस्तीफा

वक्फ संशोधन ( Waqf Amendment) विधेयक को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर जहां इस बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी सांसद Jagdambika Pal ने बड़ा बयान देकर सभी का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा है कि यदि वक्फ समिति की रिपोर्ट असंवैधानिक पाई जाती है, तो वह तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। क्या है Waqf Amendment विधेयक? वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और अवैध कब्जों को रोकना है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक खासकर पासमांदा मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा करेगा। लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय पर हमला बता रहा है। जगदंबिका पाल का पक्ष संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जगदंबिका पाल ने साफ कहा कि वक्फ अधिनियम कोई धार्मिक कानून नहीं, बल्कि एक वैधानिक व्यवस्था है। इसका मकसद वक्फ संपत्तियों का न्यायसंगत और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। “अगर मेरी अध्यक्षता में बनी रिपोर्ट को अदालत असंवैधानिक मानेगी, तो मैं बिना किसी देरी के इस्तीफा दे दूंगा। हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं,” — जगदंबिका पाल ओवैसी का विरोध और प्रतिक्रिया इस बिल का सबसे तीखा विरोध AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने किया है। उन्होंने संसद में इस बिल की प्रति फाड़ दी और इसे “मुसलमानों पर सीधा हमला” बताया। ओवैसी का आरोप है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। विपक्ष पर पलटवार पाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन और उनकी रक्षा के लिए लाया गया है, ना कि किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक की वैधता को लेकर सुनवाई जारी है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि यह कानून संवैधानिक मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। जगदंबिका पाल का इस्तीफे की पेशकश करना इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।
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Jagdeep Dhankhar, Vice President of India

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर खींची ‘संवैधानिक लक्ष्मण रेखा’, उपराष्ट्रपति ने जताई नाराज़गी

Supreme Court vs President Powers Desh Harpal | 17 अप्रैल 2025By Digital Desk Supreme Court Judgement on Governor and President Powers के तहत सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने की समयसीमा (Time Limit) तय की गई। अदालत ने साफ किया कि राज्य विधानसभा से पास होकर आए बिल को यदि राज्यपाल राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजते हैं, तो राष्ट्रपति को Article 201 के तहत 3 महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? Judicial Review, No Pocket Veto, Mandatory Timeline और No Repeated Returns – इन चार बिंदुओं में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों की स्पष्ट व्याख्या की: राज्यपालों के लिए भी बनी समय सीमा तमिलनाडु मामले में Supreme Court vs Governor Power की बहस में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि राज्यपाल के पास भी कोई Absolute Veto Power नहीं है। उन्हें विधानसभा के पास किए गए किसी भी बिल पर अधिकतम एक महीने के भीतर निर्णय देना होगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, “राज्यपाल सिर्फ प्रतीकात्मक पद नहीं हैं, लेकिन वे राज्य सरकार की सलाह से ही निर्णय ले सकते हैं।” उपराष्ट्रपति की नाराज़गी इस फैसले के बाद Vice President Jagdeep Dhankhar ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “हम ऐसा सिस्टम नहीं बना सकते जहां अदालतें राष्ट्रपति को निर्देश दें। Article 142 के तहत मिला विशेष अधिकार न्यायपालिका के पास 24×7 available nuclear missile जैसा बन गया है।” उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर संस्थाएं अपनी सीमाएं लांघने लगें तो संविधान के संतुलन को खतरा हो सकता है। “कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार सर्वोच्च होती है,” उन्होंने कहा। क्या है Article 201 और Article 142? कपिल सिब्बल ने की तारीफ पूर्व कानून मंत्री Kapil Sibal ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार जानबूझकर राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण बिलों को रोके नहीं रख सकेगी। सुप्रीम कोर्ट का ये रुख federal structure और cooperative federalism को मजबूत करता है। तमिलनाडु केस का बैकग्राउंड सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल R.N. Ravi ने 10 जरूरी बिलों को रोक रखा है। इनमें से कई बिल विधानसभा ने दोबारा पास किए थे, लेकिन राज्यपाल ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। R.N. Ravi पूर्व IPS अधिकारी रहे हैं और 2021 से तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। निष्कर्ष: Supreme Court ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी की है, जो संविधान की व्याख्या और लोकतंत्र के संतुलन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हालांकि यह फैसला केंद्र-राज्य संबंधों को नई बहस में डाल सकता है, परंतु इससे transparency, accountability और timely governance को बल मिलेगा।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

Waqf Act SC Hearing LIVE: संसद ने हिंदुओं पर भी कानून बनाया है… सिब्बल की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया

Desh Harpal Special Report| नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2025 Waqf Act SC Hearing LIVE – सुप्रीम कोर्ट में आज Waqf Act को लेकर एक बेहद अहम सुनवाई हुई, जिसमें वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के हालिया Waqf Act Amendment पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एकतरफा और धर्म विशेष को लक्षित करने वाला बताया। लेकिन कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “Parliament ने केवल मुसलमानों के लिए नहीं, हिंदुओं के लिए भी कानून बनाए हैं।“ क्या है Waqf Act Amendment? केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में Waqf Act 1995 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद कानून बना और तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया। संशोधित कानून के तहत Waqf properties के रिकॉर्ड, उनके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता और accountability सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था। विरोध और विवाद Waqf Act में बदलाव के बाद देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कई जगहों पर violent clashes की खबरें भी आईं। मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि यह कानून उनकी संपत्ति और धार्मिक अधिकारों को सीमित करता है। कोर्ट में क्या हुआ? आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या इस कानून से किसी खास धर्म को निशाना बनाया गया है? जब सिब्बल ने इसे “धर्म विशेष को नियंत्रित करने वाला कानून” कहा, तो कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “Parliament ने हिंदू धर्म के लिए भी कानून बनाए हैं जैसे Hindu Religious and Charitable Endowments Act। इसलिए यह कहना गलत है कि केवल एक धर्म के खिलाफ कानून बनाया जा रहा है।“ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि कानून की वैधता को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। सरकार का पक्ष केंद्र सरकार की ओर से Solicitor General Tushar Mehta ने कहा कि संशोधन का मकसद किसी धर्म को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि Waqf Boards की जवाबदेही तय करना है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार Waqf properties के दुरुपयोग की शिकायतें आई हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 मई 2025 की तारीख तय की है। Desh Harpal इस संवेदनशील मामले की हर अपडेट आपको LIVE और निष्पक्ष रूप में पहुंचाता रहेगा। Waqf Act से जुड़े सामाजिक, कानूनी और धार्मिक प्रभावों पर हम जल्द ही एक विशेष रिपोर्ट भी लेकर आएंगे।
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sagar

Sagar में जहरीली शराब का कहर: 19 मौत, 112 मरीज भर्ती; Liquor Network पर पुलिस का शिकंजा

मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। अब तक 19 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं। मृतकों में पिता-पुत्र के शामिल होने की जानकारी ने इस घटना को और दर्दनाक बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने लाइसेंसी शराब ठेकेदारों समेत 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों की नजर अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसके जरिए कथित तौर पर मिलावटी या जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी। कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को भेजकर लोगों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। 112 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जहरीली शराब की आशंका के बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। 112 लोगों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संदिग्ध शराब पीने वाले किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके। पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ इस हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि शराब की एक बोतल इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। अब लोगों में अवैध और संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर डर भी है और गुस्सा भी। 30 नामजद आरोपियों पर FIR, 10 गिरफ्तार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की सप्लाई कहां से हुई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच में जिस किसी की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के नाम सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि यदि शराब की बिक्री वैध दुकानों से हुई थी, तो उसमें मिलावट कैसे पहुंची। अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि शराब के स्रोत से लेकर इसकी बिक्री तक पूरी चेन का पता लगाया जाए। जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस पुलिस को शक है कि इस मामले के पीछे सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों का हाथ नहीं, बल्कि शराब की सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जांच एजेंसियां शराब की बोतल, लेबल और सप्लाई चैन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। प्रशासन की नजर अब हर कड़ी पर सागर की इस घटना ने अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित लोगों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार अपनों को खोने के दर्द में हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जहरीली शराब की असली सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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