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Pragya Thakur

Supreme Court Closes Plea Against Pragya Thakur’s Bail, Final Verdict in Malegaon Blast Case Awaited

Supreme Court ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में मिली ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट यानी एनआईए अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है, इसलिए अब टॉप कोर्ट का हस्तक्षेप करना ठीक नहीं होगा। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि प्रज्ञा ठाकुर की ज़मानत रद्द की जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “जब निचली अदालत इस पर फैसला देने वाली है, तो हम इसमें दखल नहीं दे सकते।” सितंबर 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए धमाकों में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। बम मोटरसाइकिल पर रखे गए थे। इस मामले में प्रज्ञा ठाकुर को आरोपी बनाया गया था। उन्हें कई साल जेल में रहना पड़ा, फिर 2017 में उन्हें ज़मानत मिली। आज वे भोपाल से सांसद हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि एनआईए कोर्ट ने पूरी सुनवाई कर ली है और अब वो जल्द ही फैसला सुनाएगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का दखल देना ज़रूरी नहीं है। यह फैसला प्रज्ञा ठाकुर के लिए फिलहाल राहत भरा है, लेकिन असली फैसला एनआईए कोर्ट का होगा – जो ये तय करेगा कि वो दोषी हैं या नहीं। यह मामला सिर्फ कानून की किताबों तक सीमित नहीं है। इसमें उन परिवारों की भी बात है जिन्होंने 2008 में अपनों को खोया। पिछले 16 सालों से वे इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, प्रज्ञा ठाकुर, जो अब एक सांसद हैं, खुद को निर्दोष बताती रही हैं। अब सबकी निगाहें एनआईए कोर्ट के आखिरी फैसले पर टिकी हैं।
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Vizhinjam

पीएम मोदी ने किया Vizhinjam International Port राष्ट्र को समर्पित – भारत का पहला Deep Water Transshipment Port अब केरल में

तिरुवनंतपुरम (केरल), 2 मई 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के तट पर बने Vizhinjam International Seaport को देश को समर्पित किया। यह बंदरगाह भारत का पहला Deep Water Transshipment Port है और इसे भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक Game Changer माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अडाणी ग्रुप के सीईओ करण अडाणी भी मौजूद रहे। PM Modi Kerala Visit: Vizhinjam Port से भारत को क्या मिलेगा? विजिंजम पोर्ट की गहराई 24 मीटर है और यह दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह पोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल माइल्स दूर है, जिससे भारत को अब कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 5000+ रोजगार और ₹5000 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट इस प्रोजेक्ट से केरल और भारत दोनों को जबरदस्त आर्थिक और रोजगार लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, यह बंदरगाह 5,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देगा और लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों को भी बूस्ट करेगा। केरल सरकार ने इसके लिए ₹5,000 करोड़ का विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज घोषित किया है, जिसमें सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी को भी सुधारा जाएगा। 10 KM रेलवे टनल और Smart Cargo Handling विजिंजम पोर्ट को Balaramapuram स्टेशन से जोड़ने के लिए 10.2 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन प्रस्तावित है, जिसमें 9.2 किमी लंबी सुरंग (Tunnel) होगी। इससे माल की आवाजाही आसान, तेज़ और सुरक्षित होगी। यह परियोजना पर्यावरण और सामाजिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में है। Adani Ports और सरकार की मजबूत साझेदारी यह पोर्ट भारत सरकार और निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Adani Ports & SEZ Limited की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है। यह एक Public-Private Partnership (PPP) मॉडल का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी कुल लागत करीब ₹8,867 करोड़ है। करण अडाणी ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के “Maritime Amrit Kaal 2047” विजन का अहम हिस्सा बताया और कहा कि यह भारत को आत्मनिर्भर समुद्री राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। PM Modi का संदेश: “विजिंजम भारत की शक्ति का प्रतीक है” प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा:
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WAVES 2025

WAVES 2025 समिट मुंबई में शुरू: भारत बनेगा Global Entertainment Hub, बोले PM मोदी

1 मई 2025 — मुंबई के जिओ वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आज से शुरू हुआ ‘WAVES 2025’ (World Audio Visual and Entertainment Summit) — एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच जो भारत को ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह चार दिवसीय समिट 4 मई तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर कहा, “भारत की रचनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता अब वैश्विक पहचान पा रही है। WAVES 2025 इस बदलाव को और मजबूत करेगा।” PM मोदी ने इस समिट की घोषणा पहले ‘मन की बात’ के 117वें एपिसोड में की थी, और तब से देशभर में इसकी चर्चा जोरों पर है। क्या है WAVES 2025? WAVES 2025 एक अंतरराष्ट्रीय समिट है जिसमें दुनिया भर के मीडिया हाउस, फिल्म निर्माता, एनीमेशन और गेमिंग इंडस्ट्री के दिग्गज, तकनीकी विशेषज्ञ और निवेशक भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य भारत को ऑडियो-विज़ुअल और मनोरंजन उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है। सम्मलेन के प्रमुख उद्देश्य: किसने क्या कहा? भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर हॉलीवुड, बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के टॉप चेहरों तक—हर कोई इस समिट को भारत के लिए “गेम-चेंजर” मान रहा है। यह मंच भारत की soft power को बढ़ावा देगा और दुनिया को यह दिखाएगा कि हम न केवल कंटेंट का उपभोग करते हैं, बल्कि अब उसे गढ़ते भी हैं। पहले गोवा, अब मुंबई गौरतलब है कि यह समिट पहले नवंबर 2024 में गोवा में होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे मुंबई में मई 2025 के लिए रीशेड्यूल किया गया — ताकि अधिक प्रतिभागियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सके। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Supreme Court

Supreme Court ने Pahalgam Terror Attack की Judicial Inquiry वाली PIL को किया खारिज, कहा – “Desh ko Jodne ka Waqt Hai”

1 मई 2025 – Supreme Court ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे गैर-ज़िम्मेदार बताते हुए कहा कि ऐसे वक्त में सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने वाली याचिकाएं नहीं लाई जानी चाहिए। Supreme Court ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को सख्त शब्दों में खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे समय में इस तरह की याचिकाएं देश की सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल गिरा सकती हैं। 22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिनमें कई पर्यटक भी शामिल थे। इस दर्दनाक घटना के बाद तीन नागरिक – मोहम्मद जुनैद, फतेह कुमार साहू और विक्की कुमार – ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की मांग की थी। लेकिन जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस याचिका को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और स्पष्ट शब्दों में कहा: “ऐसी याचिकाएं सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ती हैं। यह समय एकजुट होकर आतंक के खिलाफ खड़े होने का है, न कि जांच के नाम पर अफसरों को कटघरे में खड़ा करने का। देश के लिए जिम्मेदार बनिए।” कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि न्यायिक जांच की मांग क्यों की जा रही है, जबकि जांच की ज़िम्मेदारी पहले से ही एजेंसियों के पास है। “हम न्याय करते हैं, जांच नहीं। रिटायर्ड जज जांच के विशेषज्ञ नहीं होते। हर मामले में न्यायिक आयोग बना देना समाधान नहीं है,” कोर्ट ने कहा। इन सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। Supreme Court ने याचिका को वापस लेने की अनुमति तो दी, लेकिन साफ कर दिया कि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दाखिल करने से पहले राष्ट्रीय भावना और ज़िम्मेदारी को समझना ज़रूरी है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Census

Caste Census अब होगी Main Census का हिस्सा: 1931 के बाद पहली बार होगा जातीय डेटा कलेक्शन

देश की अगली Census अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी — यह भारत के सामाजिक ताने-बाने को एक नई पारदर्शिता के साथ दुनिया के सामने लाएगी। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब जातीय आंकड़ों की गिनती भी मुख्य जनगणना का हिस्सा होगी। यह फैसला न केवल सरकार की सोच में बदलाव दर्शाता है, बल्कि देश की करोड़ों जातियों और उपजातियों को पहली बार मुख्य धारा के डेटा में लाने की कोशिश भी है। अब हर जाति की होगी गिनती, खुलेगा असली सामाजिक चित्र केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि आगामी Census में अब जातीय विवरण भी दर्ज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा, “समाज में बहुत सारी योजनाएं जातीय आधार पर बनती हैं, लेकिन ठोस आंकड़े नहीं होने के कारण असली लाभार्थी वंचित रह जाते हैं।“ अब पहली बार केंद्र सरकार यह जिम्मेदारी खुद उठाकर एक भरोसेमंद जातीय डेटा उपलब्ध कराएगी। राज्यों के जातीय सर्वे को बताया ‘राजनीतिक नाटक’ मंत्री ने कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में हुए जातीय सर्वेक्षणों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ये सर्वे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थे और इनमें पारदर्शिता की भारी कमी रही। केंद्र सरकार का मानना है कि जब तक जातीय Census पूरे देश में एकसमान रूप से नहीं होगी, तब तक इसके आधार पर नीति बनाना गलत होगा। क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक? जातीय आंकड़े क्यों ज़रूरी हैं? भारत एक विविधता से भरा देश है। हर क्षेत्र, हर गाँव और हर समुदाय में अलग-अलग सामाजिक परतें हैं। लेकिन जब योजनाएं बनती हैं, तो बिना आंकड़ों के सिर्फ अनुमान के आधार पर फैसले होते हैं। अब जातीय Census के जरिए सरकार को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि कौन पीछे रह गया है, और किसे वास्तव में मदद की जरूरत है। आम जनता की आवाज को मिलेगा प्लेटफॉर्म यह कदम उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण बनकर आया है जो लंबे समय से कहते आए हैं कि — “हमें गिना नहीं जाता, तो हमें क्यों माना जाएगा?” अब जातियों की पहचान और उनकी समस्याएं सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं रहेंगी, बल्कि नीति और समाधान का हिस्सा बनेंगी। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Digital Access

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: Digital Access अब “मौलिक अधिकार” (Fundamental Right)

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय में डिजिटल एक्सेस (Digital Access) को मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अब सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों — खासकर ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले वर्गों — को समान रूप से डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करे। यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें से एक याचिका एक एसिड अटैक सर्वाइवर ने दायर की थी। पीड़िता ने बैंक में KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया के दौरान आने वाली परेशानियों का ज़िक्र किया था। डिजिटल भेदभाव अब असंवैधानिक कोर्ट ने कहा, “डिजिटल डिवाइड को खत्म करना अब नीति का सवाल नहीं बल्कि संविधानिक कर्तव्य है। जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) में अब डिजिटल पहुंच को भी शामिल करना अनिवार्य हो गया है।” कोर्ट ने बताया कि आज के समय में हेल्थकेयर, बैंकिंग, शिक्षा जैसी ज़रूरी सेवाएं डिजिटल माध्यमों (Digital Access)से ही उपलब्ध होती हैं। ऐसे में जिनके पास इन सेवाओं तक पहुंच नहीं है, वे पीछे छूट रहे हैं। 20 अहम निर्देश दिए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों को KYC प्रक्रिया को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के लिए 20 जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि विशेष रूप से विकलांग और एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव किया जाना चाहिए क्या था मामला? एक एसिड अटैक सर्वाइवर, प्रज्ञा प्रसून, जुलाई 2023 में बैंक में खाता खोलने पहुंची थीं। लेकिन Digital Access डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया के दौरान बैंक ने उनसे “ब्लिंक” करने यानी पलकों को झपकाने की मांग की — ताकि यह साबित हो सके कि वे जीवित हैं। लेकिन उनके चेहरे की स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो पाया। सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद बैंक ने अपवाद के रूप में खाता खोलने की अनुमति दी। प्रज्ञा ने कोर्ट से अपील की थी कि एसिड अटैक पीड़ितों और अन्य विकलांग व्यक्तियों के लिए केंद्र सरकार नई गाइडलाइंस जारी करे, ताकि वे बिना भेदभाव के डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। जजों ने क्या कहा? जस्टिस महादेवन ने इस आदेश को लिखा, जिसे उनके साथी जस्टिस पारदीवाला ने “शानदार” बताते हुए सराहना की। उन्होंने कहा कि अब आर्थिक अवसरों से लेकर मूलभूत सेवाओं तक पहुंच डिजिटल माध्यमों से ही संभव है, इसलिए Article 21 (जीवन का अधिकार) की नई व्याख्या आवश्यक हो गई है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Pahalgam Attack Live

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम हमले पर PM Modi का एक्शन मोड, बोले – सेना को पूरी छूट, मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

PM Modi का एक्शन मोड जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देश में आक्रोश और चिंता का माहौल है। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों – जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे – की जान चली गई। यह हाल के वर्षों में कश्मीर घाटी में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। इस हमले के बाद मंगलवार को PM Modi ने दिल्ली स्थित अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी शामिल हुए। बैठक में PM Modi ने सशस्त्र बलों को यह संदेश दिया कि वे देश के दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए “पूरी तरह से स्वतंत्र” हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “हमारे सैनिक तय करेंगे कि आतंकियों को कैसे, कब और कहां जवाब दिया जाए। उन्हें हर तरह की परिचालन छूट दी गई है।” “आतंकवाद को मिलेगा मुँहतोड़ जवाब” – PM Modi का सख्त संदेश सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर पूरा विश्वास जताते हुए कहा कि आतंक के खिलाफ भारत का रुख बेहद स्पष्ट है – “यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प है कि हम आतंकवाद को जड़ से खत्म करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें भारत की शांति और अखंडता को चुनौती देंगी, उन्हें हर हाल में जवाब मिलेगा – चाहे वह सीमा पार हों या देश के भीतर छिपे हों। CCS बैठक में लिए गए बड़े फैसले – पाकिस्तान को दिया गया कड़ा संदेश हमले के एक दिन बाद 23 अप्रैल को हुई कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक में केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए थे: इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि तय समयसीमा के बाद कोई भी पाकिस्तानी नागरिक भारत में न रुके। हर आतंकी को सजा मिलेगी – पीएम मोदी का संकल्प प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा, “भारत हर एक आतंकी और उनके समर्थकों की पहचान करेगा, उन्हें ढूंढेगा और सजा देगा। हम उन्हें धरती के छोर तक भी क्यों न जाना पड़े, वहां तक पहुंचेंगे।” गृह मंत्रालय की तैयारी भी तेज इसी दिन केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम बैठक की। इसमें BSF, NSG और असम राइफल्स के प्रमुखों के साथ-साथ सशस्त्र सीमा बल (SSB) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इस बैठक में देशभर में सुरक्षा चाक-चौबंद रखने और आतंक विरोधी रणनीतियों पर चर्चा की गई। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Terror Attack

पाहलगाम Terror Attack पर उमर अब्दुल्ला का बयान: “राजनीति इतनी सस्ती नहीं हो सकती”

जम्मू और कश्मीर के पब्लिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन, पाहलगाम की बाइसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले (Terror Attack) में 26 पर्यटकों की जान चली गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद, जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ तौर पर कहा है कि वह इस आतंकवादी हमले को राज्यhood की मांग के लिए राजनीतिक फायदा उठाने का मौका नहीं बनाएंगे। उमर अब्दुल्ला का राजनीति पर अहम बयान उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अगर मैं इस आतंकवादी हमले ( Terror Attack) को राज्यhood की मांग के लिए इस्तेमाल करूं तो मुझे शर्म आनी चाहिए।” उनका मानना है कि एक राष्ट्रीय त्रासदी के बाद किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनका रुख राज्यhood के मुद्दे पर हमेशा एक जैसा रहा है और इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार से एक जिम्मेदार और सम्मानजनक संवाद की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यhood की मांग को इस तरह के संकट के समय में राजनीतिक लाभ के रूप में इस्तेमाल करना उनकी राजनीति के सिद्धांतों के खिलाफ है। उमर अब्दुल्ला का यह बयान यह दर्शाता है कि राजनीति में संवेदनशीलता और समझ होना चाहिए, खासकर ऐसे वक्त में जब पूरा देश एक दर्दनाक घटना से गुजर रहा हो। उनका यह कदम यह साबित करता है कि सही राजनीति कभी भी आतंकी हमले या किसी राष्ट्रीय संकट का फायदा उठाने के लिए नहीं हो सकती। देशहरपाल पर पढ़ें ताज़ा खबरें
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Supreme Court

Supreme Court ने OTT Platforms और Social Media पर Obscene Content को बताया गंभीर चिंता, सरकार लाएगी नए Regulations

Supreme Court ने सोमवार को OTT Platforms और Social Media पर अश्लील और आपत्तिजनक (Obscene and Indecent) कंटेंट के बढ़ते प्रसार पर गहरी चिंता जताई है। Court ने इस मुद्दे पर दायर Public Interest Litigation (PIL) को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और Netflix, Amazon Prime, AltBalaji, Ullu Digital, Mubi, X (Twitter), Google, Meta (Facebook, Instagram) और Apple सहित कई डिजिटल दिग्गजों को नोटिस जारी किया है। Supreme Court ने क्यों जताई चिंता? Justice BR Gavai और Justice AG Masih की बेंच ने कहा कि यह याचिका “महत्वपूर्ण सार्वजनिक चिंता” (Important Public Concern) उठाती है। सुनवाई के दौरान Justice Gavai ने कहा:“Netflix व अन्य प्लेटफॉर्म्स की भी Social Responsibility बनती है।” उन्होंने यह भी कहा कि OTT Platforms और Social Media पर अश्लील कंटेंट का प्रसार समाज के लिए खतरनाक है और इस पर ध्यान देना जरूरी है। Solicitor General ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील Vishnu Shankar Jain ने तर्क दिया कि यह मामला कोई विरोधी मुकदमा (Adversarial Litigation) नहीं, बल्कि एक Genuine Concern को उठाता है। Justice Gavai ने Solicitor General Tushar Mehta से केंद्र सरकार का रुख पूछा। SG Mehta ने सहमति जताते हुए कहा:“कुछ Content इतना Perverted है कि दो सम्माननीय लोग भी साथ बैठकर नहीं देख सकते।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि: Supreme Court का आदेश Supreme Court ने अपने आदेश में कहा:“यह याचिका OTT Platforms और Social Media पर आपत्तिजनक, अश्लील और विकृत (Perverted) कंटेंट के प्रदर्शन पर गंभीर चिंता उठाती है। Solicitor General ने भी माना कि और अधिक Regulations की आवश्यकता है।” याचिकाकर्ता कौन हैं? इस याचिका के मुख्य याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सूचना आयुक्त Uday Mahurkar हैं। उनके साथ Sanjeew Newar, Sudeshna Bhattacharjya Mukherjee, Shatabdi Pande और Svati Goyal अन्य याचिकाकर्ता हैं। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India-France Deal Finalized आज भारत और फ्रांस के बीच एक बड़ी डील पर मुहर लग गई है। भारत अब फ्रांस से 63,000 करोड़ रुपये में 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदेगा। ये खास विमान परमाणु हथियार ले जाने और दागने की क्षमता रखते हैं। इन्हें भारतीय नौसेना (नेवी) के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे समंदर में भारत की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। राफेल मरीन विमान खास तौर पर समुद्र से उड़ान भरने और युद्ध करने के लिए बनाए गए हैं। इन्हें भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट करियर ‘INS विक्रांत’ पर तैनात किया जाएगा। इससे देश की समुद्री सीमा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। इस डील के बाद भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास समंदर से परमाणु हमला करने की ताकत होगी। देशवासियों के लिए यह गर्व का पल है, क्योंकि अब हमारी नौसेना और भी ज्यादा आधुनिक और मजबूत हो जाएगी। भारत-फ्रांस की दोस्ती भी इस डील से और गहरी हो गई है। राफेल विमान पहले भी भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं और अब नेवी में भी राफेल की गड़गड़ाहट सुनाई देगी। सरकार ने इस कदम को भारत की सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है। आने वाले समय में ये राफेल मरीन विमान भारत के दुश्मनों को करारा जवाब देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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Navratri 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पौराणिक कथा और मंत्र

नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, धैर्य और संयम की प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी कथा भक्तों को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है। मां ब्रह्मचारिणी की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी कठिन साधना और अटूट संकल्प के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया। यह कथा धैर्य और दृढ़ निश्चय का संदेश देती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। भोग: मां को शक्कर, मिश्री और पंचामृत अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।
Premanand Maharaj

Premanand Maharaj Viral Video: ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ बयान ने खींचा लोगों का ध्यान

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) अपने प्रवचनों और आध्यात्मिक विचारों को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं। इन दिनों उनके एक वीडियो को लेकर लोगों के बीच काफी दिलचस्पी देखी जा रही है। ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ जैसे शब्दों से चर्चा में आए इस वीडियो को लोग आध्यात्मिक नजरिए से समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस कथन का पूरा संदर्भ समझना जरूरी है, ताकि किसी अधूरी क्लिप के आधार पर गलत मतलब न निकाला जाए। प्रेमानंद महाराज का वीडियो क्यों हो रहा वायरल? Premanand Maharaj के प्रवचनों में अक्सर जीवन, मृत्यु, आत्मा, भगवान की भक्ति और मन की शांति जैसे विषयों पर चर्चा होती है। उनके विचारों को बड़ी संख्या में लोग सुनते और सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। इसी वजह से उनके प्रवचनों के छोटे-छोटे वीडियो भी लोगों का ध्यान खींचते हैं। ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ जैसे कथन को आध्यात्मिक संदर्भ में समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि महाराज किस सवाल का जवाब दे रहे थे और उससे पहले तथा बाद में उन्होंने क्या कहा था। केवल एक वाक्य के आधार पर उनके विचारों का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। जीवन और आत्मा को लेकर क्या है आध्यात्मिक नजरिया? भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में आत्मा, शरीर और जन्म-मृत्यु को लेकर अलग-अलग दार्शनिक व्याख्याएं मिलती हैं। भगवद्गीता में भी आत्मा को शरीर से अलग और अविनाशी बताया गया है। इसी तरह संतों के प्रवचनों में व्यक्ति की वास्तविक पहचान, अहंकार और ईश्वर से जुड़ाव जैसे विषयों पर चर्चा होती रहती है। ऐसे विचारों को समझने के लिए उनके मूल संदर्भ को देखना जरूरी है। किसी आध्यात्मिक कथन का अर्थ सामान्य बोलचाल के अर्थ से अलग भी हो सकता है। प्रेमानंद महाराज का पुराना भावुक वीडियो भी हुआ था वायरल हाल ही में Premanand Maharaj का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि यह वीडियो उनके शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद का है। हालांकि, आजतक की फैक्ट चेक रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो नया नहीं था। इसका लंबा संस्करण प्रेमानंद महाराज के आधिकारिक YouTube चैनल ‘भजन मार्ग’ पर 1 मार्च 2026 को अपलोड किया गया था। वायरल हिस्सा उसी प्रवचन में लगभग 7 मिनट 10 सेकंड पर मौजूद था। इसलिए इसे सितंबर में सामने आई घटना के बाद का वीडियो बताना भ्रामक था। इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की तारीख और संदर्भ की जांच करना जरूरी है। <escape><Cite refs={[“turn157990search0″,”turn157990search1”]}/></escape> आश्रम से जुड़ी घटनाओं के बीच भी चर्चा में हैं महाराज वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े मामले और शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। इस बीच आश्रम से जुड़ी घटनाओं के बारे में अलग-अलग दावे भी किए गए। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है। 9 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रेमानंद महाराज का एक अन्य वीडियो भी चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने भक्ति के मार्ग पर बने रहने की कठिनाई पर बात की। <escape><Cite refs={[“turn157990search2″,”turn585743search3”]}/></escape> वायरल वीडियो को पूरा देखना क्यों जरूरी है? सोशल मीडिया पर किसी संत या सार्वजनिक व्यक्ति के बयान का छोटा हिस्सा तेजी से वायरल हो सकता है। लेकिन कई बार वीडियो का शुरुआती या अंतिम हिस्सा न होने से उसका वास्तविक अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता। इसलिए किसी कथन पर राय बनाने से पहले उसका पूरा वीडियो, तारीख और मूल स्रोत देखना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pakistan

Imran Khan की PTI को झटका! Pakistan के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू

Pakistan की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू करने और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की प्रांतीय सरकार के अधिकार सीमित किए जाने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान की संघीय सरकार और PTI के बीच पहले से जारी टकराव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संघीय कैबिनेट की सिफारिश पर इस फैसले को मंजूरी दी। सरकार ने इसके पीछे आतंकवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख वजह बताया है। वहीं, PTI इस कदम का विरोध कर रही है। हालांकि, प्रांतीय प्रशासन में हुए बदलाव और उसके कानूनी प्रभावों से जुड़ी सभी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। Khyber Pakhtunkhwa में Emergency लगाने की वजह क्या है? पाकिस्तान की संघीय सरकार का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। अफगानिस्तान की सीमा से लगे इस प्रांत में आतंकवादी घटनाओं और सुरक्षा चुनौतियों के कारण लंबे समय से तनाव है। सरकार का आरोप है कि PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही थी। इसी आधार पर संघीय कैबिनेट ने इमरजेंसी लागू करने की सिफारिश की। दूसरी ओर, PTI का कहना है कि सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान राजनीतिक अधिकारों को सीमित करके नहीं किया जा सकता। इस मामले में केंद्र सरकार और विपक्ष के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। Imran Khan की PTI सरकार पर क्या पड़ेगा असर? खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान की पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में यहां प्रशासनिक अधिकारों में बदलाव PTI के लिए अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। यदि प्रांतीय सरकार की शक्तियां निलंबित करके प्रशासन राज्यपाल या संघीय सरकार के नियंत्रण में दिया जाता है, तो इससे शासन व्यवस्था और केंद्र-प्रांत के संबंधों पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, इमरजेंसी लागू होने और निर्वाचित सरकार के अधिकार समाप्त होने के बीच कानूनी अंतर होता है। इसलिए अंतिम स्थिति समझने के लिए राष्ट्रपति के आदेश, संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि आवश्यक है। इमरान खान की रिहाई को लेकर PTI का प्रदर्शन इमरान खान की रिहाई की मांग PTI के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल है। अगस्त 2023 से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थन में पार्टी लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। PTI समर्थकों के इस्लामाबाद की ओर मार्च और संभावित प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। पार्टी चाहती है कि इमरान खान से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए और उनकी रिहाई की मांग पर ध्यान दिया जाए। वहीं, संघीय सरकार के सामने राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। प्रदर्शन, सुरक्षा इंतजाम और केंद्र-विपक्ष के बीच बातचीत का परिणाम आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है। PTI ने फैसले पर उठाए सवाल PTI ने केंद्र सरकार के कदम का विरोध करते हुए इसे प्रांतीय अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी का तर्क है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केंद्र और प्रांत के बीच सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, संघीय सरकार सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अपने फैसले को जरूरी बता रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

Delhi Protest: CJP नेताओं का आरोप- फ्लाइट से किया Kidnap, दिल्ली में दूसरे दिन भी प्रदर्शन

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरम है। 10 अक्टूबर को शुरू हुआ विरोध 11 अक्टूबर को भी जारी रहा। इस बीच CJP के नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया। पार्टी के नेता सौरव दास ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अपने ही लोगों से जंग लड़ रही है। वहीं, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। यह मामला अब केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। हिरासत की कार्रवाई, चुनाव आयोग की भूमिका और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। CJP नेताओं ने क्यों लगाया Kidnap करने का आरोप? अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका 10 अक्टूबर को मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। उन्हें जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होना था। नेताओं के मुताबिक, विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिसकर्मी अंदर आए और उन्हें हिरासत में ले लिया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया गया। सौरव दास ने इसे फ्लाइट से किडनैप किए जाने जैसा बताया और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। हालांकि, पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत का हवाला दिया गया। ऐसे में इस मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और पुलिस का पक्ष अलग-अलग हैं। Delhi Protest: लगातार दूसरे दिन सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। कई इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई, जबकि कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की गई। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता और विरोध प्रदर्शन में शामिल अन्य लोग भी थे। 11 अक्टूबर को भी प्रदर्शन जारी रहने के बीच पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे। CJP समर्थकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना चाहते हैं। उनका आरोप है कि हिरासत में लेकर प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। हिरासत के बाद CJP नेताओं को मिली राहत रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उन्हें शांति बनाए रखने से जुड़ी शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। CJP नेताओं ने हिरासत की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है। इस मामले में हिरासत की परिस्थितियों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। आखिर क्यों हो रहा है Election Commission के खिलाफ प्रदर्शन? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी और उसके समर्थक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। वे इस मामले की जांच और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का बचाव किया है। भाजपा ने भी मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। Democracy में Protest के अधिकार पर फिर छिड़ी बहस दिल्ली में हुई इस कार्रवाई के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अपनी बात रखने और संस्थाओं से जवाब मांगने का अधिकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूसरी ओर, प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और किसी भी आयोजन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के आरोपों की जांच तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर हो। फिलहाल, CJP नेताओं की हिरासत और दिल्ली में लगातार दूसरे दिन हुए प्रदर्शन ने चुनाव आयोग तथा SIR को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक दलों और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gautam Gambhir

Gautam Gambhir in Ujjain: महाकाल मंदिर में टेका माथा, Team India के लिए मांगा आशीर्वाद

भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरे T20 मुकाबले से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir ) उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए। गंभीर ने देश की खुशहाली और टीम इंडिया की सफलता के लिए प्रार्थना की। क्रिकेट के मैदान पर रणनीति बनाने वाले गंभीर का यह धार्मिक दौरा आस्था और खेल के जुड़ाव को दिखाता है। Gautam Gambhir ने बाबा महाकाल से क्या मांगा? उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में गौतम गंभीर ने विधि-विधान से दर्शन किए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ सितांशु कोटक भी मौजूद रहे। गंभीर ने कामना की कि बाबा महाकाल की कृपा देश और भारतीय क्रिकेट टीम पर बनी रहे। उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब टीम इंडिया भारत-वेस्टइंडीज T20 सीरीज के अहम मुकाबले की तैयारी कर रही है। महाकाल मंदिर में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट जगत की हस्तियों का यहां आना भी अक्सर प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है। Mahakal Temple पहुंचे बैटिंग कोच सितांशु कोटक गौतम गंभीर के साथ भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने भी बाबा महाकाल के दर्शन किए। दोनों का उज्जैन दौरा भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले से पहले हुआ। क्रिकेट में खिलाड़ियों की मेहनत, सही रणनीति और दबाव में प्रदर्शन की अहम भूमिका होती है। ऐसे में कई खिलाड़ी और खेल से जुड़े लोग बड़े मुकाबलों से पहले मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं। गंभीर का महाकाल दर्शन भी इसी वजह से चर्चा में है। India vs West Indies 3rd T20: इंदौर में होगी भिड़ंत भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरा T20 इंटरनेशनल मुकाबला इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाना है। इस मैच को लेकर क्रिकेट फैंस के बीच काफी उत्साह है। सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर बनाया, लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने लक्ष्य हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस नतीजे के बाद तीसरे मैच में भारतीय टीम की वापसी पर सबकी नजरें रहेंगी। बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी बेहतर प्रदर्शन करना टीम इंडिया के लिए अहम होगा। Team India की सफलता के लिए की प्रार्थना गौतम गंभीर के लिए यह दौरा केवल मंदिर में दर्शन करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने देश और टीम इंडिया के लिए भी शुभकामनाएं दीं। भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशंसक भी उम्मीद कर रहे हैं कि खिलाड़ी मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे और मुकाबले में जीत हासिल करने की पूरी कोशिश करेंगे। अब सभी की नजरें इंदौर के मैदान पर होने वाले भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले पर हैं। बाबा महाकाल के दरबार में दर्शन के बाद टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर की यह यात्रा खेल और आस्था के खूबसूरत मेल के रूप में देखी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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