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DMRC

Metro Service नई दिल्ली Metro Station अस्थायी रूप से बंद, सफर से पहले जान लें DMRC का अपडेट

राजधानी दिल्ली में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सुरक्षा कारणों के चलते नई दिल्ली Metro Station को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने जानकारी दी है कि स्टेशन पर फिलहाल Entry, Exit और Interchange की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी। नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण मेट्रो स्टेशनों में से एक है। यहां रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं और यह स्टेशन Yellow Line और Airport Express Line को जोड़ने वाला प्रमुख इंटरचेंज पॉइंट है। स्टेशन बंद होने से रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और सेंट्रल दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। DMRC ने क्यों बंद किया New Delhi Metro Station? DMRC ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। राजधानी में बढ़ी सुरक्षा गतिविधियों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी को देखते हुए कुछ मेट्रो स्टेशनों पर अस्थायी पाबंदियां लगाई गई हैं। मेट्रो प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे सफर शुरू करने से पहले अपने रूट की जानकारी जरूर ले लें। DMRC समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर रहा है और हालात सामान्य होने पर सेवाओं में बदलाव किया जा सकता है। Interchange सुविधा बंद होने से यात्रियों को दिक्कत नई दिल्ली Metro Station बंद होने का सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा, जो यहां से लाइन बदलकर आगे का सफर करते हैं। खासकर: इन यात्रियों को अब वैकल्पिक रूट का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। यात्रियों के लिए DMRC की सलाह DMRC ने यात्रियों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। मेट्रो सेवाओं से जुड़ी किसी भी अपडेट के लिए DMRC के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर नजर बनाए रखें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके। Delhi Metro Latest Update: यात्रियों को रखना होगा ध्यान नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रांजिट पॉइंट्स में शामिल है। ऐसे में स्टेशन बंद होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि DMRC स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा।
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Monsoon Session

Parliament Monsoon Session: पेपर लीक मुद्दे पर संसद में हंगामा, Rajya Sabha में Vande Mataram Bill पेश

संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी गर्मी बढ़ गई है। गुरुवार को भी संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसदों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों से लाखों युवाओं की मेहनत प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। Paper Leak Issue पर संसद में विपक्ष का प्रदर्शन पेपर लीक का मुद्दा संसद में एक बार फिर प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है। सांसदों ने मांग की कि सरकार इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा करे और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठाए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई। हालांकि सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई। Rajya Sabha में Vande Mataram Bill पेश पेपर लीक विवाद के बीच राज्यसभा में Vande Mataram Bill पेश किया गया। इस बिल को लेकर संसद में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उससे जुड़े नियमों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है। बिल पेश होने के बाद सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसके प्रावधानों पर चर्चा की जरूरत बताई। संसद में आगे भी जारी रह सकता है टकराव मानसून सत्र में पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं से जुड़े मुद्दे और नए विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही हंगामेदार रहने के संकेत हैं। देशभर के छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के अगले कदमों पर है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना इस समय सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET Exam Controversy: डॉ. मनोज शिरूरे को नहीं मिली राहत, Court ने खारिज की जमानत अर्जी

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG Paper Leak Case में आरोपी डॉक्टर मनोज शिरूरे को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी Bail Plea (जमानत याचिका) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद डॉ. मनोज शिरूरे को अभी न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। Court ने क्यों नहीं दी जमानत? डॉ. मनोज शिरूरे की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान CBI (Central Bureau of Investigation) ने इसका विरोध किया। जांच एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि NEET पेपर लीक मामला केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। CBI का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल बाकी है। एजेंसी ने कोर्ट से कहा कि आरोपी को राहत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है। NEET Paper Leak Case में आरोपी डॉक्टर पर गंभीर आरोप जांच एजेंसी के अनुसार, डॉ. मनोज शिरूरे पर कथित तौर पर पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप हैं। CBI इस मामले में आरोपियों के बीच संपर्क, संदिग्ध लेन-देन और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। एजेंसी का दावा है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक होना बेहद गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों मेहनती छात्रों के सपनों पर असर पड़ता है। CBI कर रही बड़े नेटवर्क की जांच NEET Paper Leak Case की जांच में CBI कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी का फोकस इस बात का पता लगाना है कि पेपर लीक की पूरी साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसका नेटवर्क कितना बड़ा था। CBI डिजिटल सबूत, बातचीत के रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर मामले में और खुलासे हो सकते हैं। छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला NEET UG परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के लिए मेडिकल करियर का रास्ता तय करती है। ऐसे में पेपर लीक जैसे मामले छात्रों के भरोसे और परीक्षा की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। कई छात्रों और अभिभावकों की मांग रही है कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। अब आगे क्या होगा? कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद डॉ. मनोज शिरूरे को फिलहाल राहत नहीं मिली है। वहीं CBI अपनी जांच जारी रखेगी। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की कार्रवाई और कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jamshedpur

Jamshedpur डिमना डैम में डूबे दो Junior Doctors, Rescue Operation के बाद बरामद हुए शव

झारखंड के जमशेदपुर (Jamshedpur) से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। शहर के डिमना डैम में हुए हादसे में एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों की मौत हो गई। दोनों डॉक्टर अपने साथियों के साथ डैम घूमने गए थे, लेकिन अचानक हुए हादसे ने एक पल में खुशियों को मातम में बदल दिया। करीब छह घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों के शव बरामद किए गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही एमजीएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में शोक का माहौल छा गया। साथी डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और परिजन इस हादसे से गहरे सदमे में हैं। मोबाइल निकालने के दौरान हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के कुछ जूनियर डॉक्टर डिमना डैम क्षेत्र में घूमने पहुंचे थे। इसी दौरान एक डॉक्टर का मोबाइल पानी में गिर गया। मोबाइल निकालने की कोशिश के दौरान दोनों डॉक्टर गहरे पानी में चले गए और डूब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और बचाव दल को दी। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाश अभियान शुरू किया। 6 घंटे तक चला Search Operation हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, सिविल डिफेंस टीम और स्थानीय गोताखोरों ने डिमना डैम में खोज अभियान शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद दोनों डॉक्टरों के शव पानी से बाहर निकाले गए। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे। हादसे के बाद पूरे इलाके में गम का माहौल देखने को मिला। MGM Medical College में पसरा मातम दोनों जूनियर डॉक्टर एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े हुए थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही कॉलेज और अस्पताल परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। साथी डॉक्टरों ने इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त की और मृतकों के परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति जताई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। बारिश के मौसम में जलाशयों से सावधानी की जरूरत डिमना डैम हादसा एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने का संदेश देता है। बारिश के मौसम में तालाब, डैम और नदियों में पानी का स्तर बढ़ जाता है और कई बार गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता रहा है कि जलाशयों में बिना सुरक्षा इंतजाम के उतरने से बचें और किसी भी तरह का जोखिम न लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Commonwealth Games 2026

Team India at Commonwealth Games 2026: तिरंगे के साथ Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain की दमदार एंट्री

कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) 2026 का आगाज शानदार उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। रोशनी, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और हजारों दर्शकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारत के लिए सबसे खास पल वह रहा, जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय दल की अगुआई की। दोनों खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और गर्व पूरे देश के लिए यादगार क्षण बन गया। Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain बनीं भारत की Flag Bearer भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस बार महिला खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन को ध्वजवाहक चुना। जैसे ही भारतीय दल स्टेडियम में पहुंचा, वहां मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का स्वागत किया। तिरंगे के साथ दोनों खिलाड़ियों की तस्वीरें कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। यह सम्मान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कई बड़े मंचों पर गौरवान्वित कर चुकी हैं। King Charles ने किया Commonwealth Games 2026 का उद्घाटन उद्घाटन समारोह में King Charles ने आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत की घोषणा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न देशों और संस्कृतियों को जोड़ने का सबसे मजबूत जरिया भी हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए खेल भावना को सर्वोपरि रखने की अपील की। Opening Ceremony में दिखी संस्कृति और तकनीक की शानदार झलक ओपनिंग सेरेमनी में मेजबान देश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ पेश किया। पारंपरिक नृत्य, लाइव म्यूजिक, लेजर शो, ड्रोन डिस्प्ले और आतिशबाजी ने समारोह को यादगार बना दिया। दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में हिस्सा लिया और अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया। भारत को इन खेलों में पदकों की बड़ी उम्मीद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दल कई खेलों में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा प्रतिभाएं भी इस बार भारत की पदक तालिका को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। देशवासियों की उम्मीदों के साथ शुरू हुआ सफर उद्घाटन समारोह के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। भारतीय खिलाड़ियों के सामने अब देश की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन द्वारा तिरंगा लेकर स्टेडियम में प्रवेश करना पूरे देश के लिए गर्व का क्षण रहा। अब खेल प्रेमियों की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारत अधिक से अधिक पदक जीतकर अपना दम दिखाने की कोशिश करेगा. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

US Trade Policy: भारत के Export पर असर? अमेरिका ने लगाया 10% Extra Tariff, 60 देश भी निशाने पर

अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लेते हुए भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत पर 10% Extra Tariff लगाया गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर यह शुल्क 12.5% तक रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन उत्पादों की सप्लाई चेन में Forced Labour (जबरन मजदूरी) से जुड़े जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों की नजर अब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिक गई है। क्या है अमेरिका का नया टैरिफ फैसला? अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की Section 301 के तहत यह कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस का कहना है कि कई देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में इन देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत भारत, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ समेत कुल 60 देशों को इस दायरे में रखा गया है। भारत पर सिर्फ 10% Extra Tariff क्यों? अमेरिकी प्रशासन के अनुसार जिन देशों ने Forced Labour को रोकने के लिए कुछ ठोस नीतियां लागू की हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि जिन देशों के प्रयास कमजोर माने गए हैं, उनके लिए यह दर 12.5% तक तय की गई है। हालांकि अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संबंधित देश अपनी नीतियों में सुधार करते हैं तो भविष्य में इन टैरिफ की समीक्षा की जा सकती है। किन उत्पादों पर नहीं लगेगा असर? नई टैरिफ नीति में कुछ आवश्यक वस्तुओं को राहत दी गई है। इनमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा (USMCA) समझौते के तहत आने वाले सामान शामिल हैं। इसके अलावा अधिकांश आयातित वस्तुओं पर नया शुल्क लागू होगा। भारतीय कारोबार पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ अन्य निर्यात आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। यदि अतिरिक्त शुल्क लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान इस मुद्दे पर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। कई देशों ने जताई नाराजगी अमेरिका के इस फैसले पर कई देशों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एकतरफा टैरिफ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत के लिए आगे की राह भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और अमेरिका के साथ व्यापारिक संवाद को मजबूत करना होगी। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो भविष्य में इस अतिरिक्त टैरिफ पर राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार जगत के लिए भी एक बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात और व्यापारिक संबंधों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lok Sabha

Lok Sabha Rajya Sabha Kharge बोले- PM सदन में आकर दें जवाब, हंगामे के बीच कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। Kharge ने PM Modi से क्या कहा? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की। विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा? सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें। हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब आगे क्या होगा? अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk सरकार से समझौते के बाद खत्म हुई भूख हड़ताल, Written Assurance मिलने का दावा

पिछले 27 दिनों से जारी सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की भूख हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति के चलते केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। अनशन खत्म होने के बाद वांगचुक ने कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधान के इस्तीफे की मांग इस समझौते का हिस्सा नहीं बनी है। यह घटनाक्रम पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन का अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार अपने वादों को तय समय में किस तरह लागू करती है। 27 दिनों तक चला आंदोलन, बातचीत से निकला समाधान सोनम वांगचुक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार 27 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस दौरान आंदोलन को देश के कई हिस्सों से समर्थन मिला। छात्रों, सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई चरणों में बातचीत हुई। शुरुआती दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका, लेकिन लगातार संवाद के बाद दोनों पक्ष एक साझा सहमति तक पहुंचे। इसके बाद सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने पर वांगचुक ने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। किन मांगों पर बनी सहमति? अनशन खत्म करने के बाद मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन अहम मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन के दौरान उठाई गई प्रधान के इस्तीफे की मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया और यह समझौते का हिस्सा नहीं है। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन का मकसद किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोगों से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना था। नड्डा ने पिलाया जूस, खत्म हुआ 27 दिनों का अनशन समझौते के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा स्वयं पहुंचे और उन्होंने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इस दौरान सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आंदोलन से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। अनशन खत्म होने के साथ ही लंबे समय से जारी गतिरोध भी समाप्त हो गया। अब वादों को पूरा करने की चुनौती सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सरकार के लिखित आश्वासन पर भरोसा करते हुए अपना अनशन समाप्त किया है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की है कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है, उन पर समयबद्ध तरीके से अमल किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तय वादों को लागू नहीं किया गया, तो आगे की रणनीति पर आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ मिलकर फैसला लिया जाएगा। आंदोलन का संदेश करीब चार सप्ताह तक चला यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल नहीं, बल्कि कई सामाजिक और जनहित के मुद्दों को लेकर चल रही आवाज का प्रतीक बन गया। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनने से फिलहाल विवाद का समाधान निकलता दिखाई दे रहा है, लेकिन असली परीक्षा अब उन आश्वासनों को जमीन पर उतारने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Heavy Rain

Heavy Rain Alert: UP में बढ़ा Flood Risk, Gujarat के कई जिले पानी में डूबे; Bihar में IMD की बड़ी चेतावनी

देशभर में मानसून अब अपने सबसे सक्रिय दौर में पहुंच चुका है। लगातार हो रही बारिश (Heavy Rain) ने उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी भारत तक कई राज्यों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना समेत 10 प्रमुख नदियां उफान पर हैं, गुजरात के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं और बिहार के 19 जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटे कई राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में बढ़ा बाढ़ का खतरा, गंगा-यमुना समेत 10 नदियों का जलस्तर बढ़ा उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण गंगा, यमुना, घाघरा, शारदा, राप्ती, सरयू और अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जिलों के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी की जा रही है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। Gujarat Flood: लगातार बारिश से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित गुजरात में मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कई सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। Bihar Weather: 19 जिलों में Heavy Rain Alert जारी बिहार में भी मानसून का असर लगातार देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। जिला प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। IMD Weather Forecast: अगले 48 घंटे रहेंगे बेहद अहम मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले दो दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में जलभराव, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले से ही नदियां उफान पर हैं, वहां लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखना सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। लोगों के लिए जरूरी सलाह बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने, जलभराव वाले रास्तों का उपयोग न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। जरूरत पड़ने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा राहत टीम से संपर्क करने की सलाह भी दी गई है। देश के कई हिस्सों में मानसून अभी और सक्रिय रहने वाला है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

Government-CJP Talks Today: PM के वीडियो पर CJP का बड़ा दावा, बोले- दबाव में आया सरकार का रुख

Cockroach Party Protest को लेकर देश में सियासी हलचल तेज हो गई है। आंदोलन के बीच आज सरकार और CJP (Cockroach Justice Platform) के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस बातचीत को गतिरोध खत्म करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, लेकिन बैठक से पहले ही CJP ने साफ कर दिया है कि केवल बातचीत से आंदोलन खत्म नहीं होगा। संगठन का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों पर ठोस फैसला होने और संबंधित प्रधान के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में आज की बैठक पर प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों की भी नजर बनी हुई है। CJP का दावा- बढ़ते दबाव के बाद बदला सरकार का रुख बैठक से पहले CJP ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा देर रात जारी किया गया वीडियो संदेश बढ़ते जनदबाव का परिणाम है। संगठन के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार पहले ही प्रदर्शनकारियों की बात सुन लेती, तो हालात इतने तनावपूर्ण नहीं होते। CJP का आरोप है कि लंबे समय तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब जब आंदोलन को देश के कई हिस्सों में समर्थन मिलने लगा है, तब सरकार बातचीत के लिए आगे आई है। PM के देर रात वीडियो पर उठे सवाल प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश को लेकर भी CJP ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि वीडियो ऐसे समय जारी किया गया, जब आंदोलन लगातार चर्चा में था और सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ रहा था। हालांकि सरकार की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश कर रही है और सभी पक्षों की बात गंभीरता से सुनी जाएगी। बातचीत होगी, लेकिन आंदोलन नहीं रुकेगा CJP ने स्पष्ट किया है कि वह सरकार के साथ बातचीत में शामिल होगा, लेकिन इससे आंदोलन समाप्त नहीं माना जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तथा संबंधित प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी भी अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। आज की बैठक से क्या निकल सकता है? सरकार और CJP के बीच होने वाली बैठक से किसी सकारात्मक समाधान की उम्मीद जरूर जताई जा रही है। यदि दोनों पक्ष कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमत होते हैं तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। हालांकि फिलहाल CJP अपने रुख में किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत सफल रहती है तो गतिरोध कम हो सकता है, लेकिन यदि कोई ठोस निर्णय नहीं निकलता, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल स्थिति क्या है? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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