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Ethanol

Ethanol Blending Policy: सुप्रीम कोर्ट में मामला, क्या महंगा होगा या सस्ता Petrol?

भारत में पेट्रोल में एथेनॉल (Ethanol) मिलाने की नीति (E20 Fuel Policy) को लेकर चल रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। इस मामले ने सिर्फ एक तकनीकी मुद्दे को नहीं, बल्कि आम लोगों की रोज़मर्रा की ईंधन लागत और गाड़ियों की परफॉर्मेंस से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए साफ किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चल रही राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि: सरकार ने यह भी कहा कि यह नीति भारत को विदेशी तेल पर निर्भरता से कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। Ethanol Blending क्या है और क्यों लागू किया गया? आसान भाषा में समझें तो: पेट्रोल में एथेनॉल (जो कि गन्ने जैसी फसलों से बनने वाला बायो-फ्यूल है) मिलाया जाता है। अभी भारत में E20 पेट्रोल यानी 20% एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। सरकार के अनुसार इसके फायदे: लोगों की चिंता कहाँ है? इस नीति को लेकर आम लोगों और याचिकाकर्ताओं की कुछ चिंताएँ भी सामने आई हैं: इन मुद्दों को लेकर ही यह मामला अदालत तक पहुंचा है। सरकार का मजबूत पक्ष केंद्र सरकार का कहना है कि: सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि E20 को लेकर सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों की लगातार समीक्षा की जा रही है। क्या पेट्रोल का फॉर्मूला बदलने वाला है? फिलहाल स्थिति बिल्कुल साफ है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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नितिन नवीन

UP Politics: नितिन नवीन का दौरा, BJP की सत्ता की हैट्रिक का रोडमैप तैयार

बिहार सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन का पहला उत्तर प्रदेश दौरा राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति तय करने की दिशा में अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश, जो देश की राजनीति का सबसे निर्णायक राज्य माना जाता है, वहां भाजपा लगातार तीसरी जीत यानी “सत्ता की हैट्रिक” के लक्ष्य को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। ऐसे में नितिन नवीन का यह दौरा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की बड़ी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। संगठन को मजबूत करने पर खास फोकस इस दौरे के दौरान नितिन नवीन पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ कई अहम बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन विस्तार, बूथ मैनेजमेंट, युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। पार्टी की कोशिश है कि हर बूथ तक संगठन की पकड़ मजबूत हो और कार्यकर्ता सीधे जनता से जुड़कर सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से पहुंचा सकें। UP में सत्ता की हैट्रिक का रोडमैप भाजपा का फोकस इस समय उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने पर है। इसके लिए संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने के साथ-साथ ग्राउंड लेवल पर एक्टिव कार्यकर्ताओं की भूमिका को बढ़ाया जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरे सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह आने वाले चुनावों के लिए रणनीतिक दिशा तय करने का काम करते हैं। राजनीतिक संदेश भी साफ नितिन नवीन का यह पहला यूपी दौरा पार्टी के भीतर एक मजबूत संदेश भी देता है कि संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारी अब और तेज की जाएगी। भाजपा का फोकस साफ है—हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और जनता के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bullet Train

India First Bullet Train: 100 KM के Surat-Vapi सेक्शन पर अगले साल शुरू होगी हाई-स्पीड सेवा

भारत में हाई-स्पीड रेल का सपना अब हकीकत बनने के बेहद करीब है। लंबे समय से चर्चा में रही मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Bullet Train) परियोजना का पहला चरण अगले साल शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआती दौर में गुजरात के सूरत से वापी के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर बुलेट ट्रेन दौड़ सकती है। यह सिर्फ एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ेगी। अगले साल यात्रियों को मिल सकती है पहली Bullet Train की सौगात परियोजना पर काम कर रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार, सूरत-वापी सेक्शन का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। ट्रैक, स्टेशन, बिजली व्यवस्था और सिग्नलिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य अंतिम चरण में हैं। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो अगले साल इसी सेक्शन पर नियमित संचालन शुरू किया जा सकता है। 320 KM/H की रफ्तार से बदलेगा सफर का अनुभव भारत की पहली बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि सामान्य परिचालन के दौरान इसकी गति करीब 300 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है। इससे यात्रियों का सफर पहले की तुलना में काफी तेज और आरामदायक हो जाएगा। जिन यात्राओं में आज कई घंटे लगते हैं, उन्हें भविष्य में बहुत कम समय में पूरा किया जा सकेगा। जापान की Shinkansen तकनीक से तैयार हो रहा है प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट जापान के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इसमें Shinkansen तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, जिसे दुनिया की सबसे सुरक्षित और समय की पाबंद हाई-स्पीड रेल सेवाओं में गिना जाता है। यही तकनीक जापान में दशकों से लाखों यात्रियों को सुरक्षित सफर का अनुभव दे रही है। 508 KM लंबे कॉरिडोर से जुड़ेगा मुंबई और अहमदाबाद पूरी परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच करीब 508 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर तैयार होगा। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। तेजी से आगे बढ़ रहा है निर्माण कार्य परियोजना के तहत एलिवेटेड ट्रैक, स्टेशन, पुल, सुरंग और विद्युत प्रणाली का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। गुजरात में कई हिस्सों में सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि ट्रैक बिछाने और आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का काम लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण को तय समय पर शुरू करने के लिए सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं बुलेट ट्रेन में यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। आरामदायक सीटें, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, बेहतर स्टेशन, समय की बचत और तेज यात्रा इसका सबसे बड़ा आकर्षण होंगे। इसके अलावा यह परियोजना पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देगी। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में जुड़ेगा नया अध्याय विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की मजबूत नींव भी रखेगी। यदि पहला चरण सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी परियोजनाओं को गति मिल सकती है। Highlights
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CM Yogi

CM Yogi Statement: ‘जय श्री राम’ पर सपा को घेरा, बोले- जनता सब कुछ याद रखती है

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग कभी ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वालों पर लाठी चलाते थे और राम भक्तों पर गोली चलाने के लिए बदनाम थे, वही आज राम भक्ति की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता इतिहास को भूली नहीं है और सच को अच्छी तरह जानती है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखा है। उनके अनुसार, पहले जिन मुद्दों पर राजनीति होती थी, आज वही लोग बदलते माहौल को देखकर अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं। सपा पर सीधा राजनीतिक हमला योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए जिन लोगों ने राम भक्तों की भावनाओं की परवाह नहीं की, वे आज खुद को राम भक्त बताने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को सब याद है और लोकतंत्र में जनता ही अंतिम फैसला करती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में अब कानून-व्यवस्था पहले से कहीं बेहतर हुई है। धार्मिक आयोजनों को सम्मान मिल रहा है और सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करने का काम कर रही है। अयोध्या, विकास और आस्था का किया जिक्र अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर, धार्मिक पर्यटन और प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को भी मजबूत करना है। योगी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश आज निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और धार्मिक आस्था—चारों क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास और सुशासन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। बयान के बाद सियासत तेज होने के आसार मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है। भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच पहले से जारी राजनीतिक मुकाबले के बीच इस बयान को आगामी चुनावी माहौल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल, समाजवादी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री योगी के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। क्या है पूरा मामला? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि “जो जय श्री राम बोलने पर लाठी चलाते थे और राम भक्तों पर गोली चलाते थे, वे आज राम भक्ति की दुहाई दे रहे हैं।” इस बयान को भाजपा ने अपनी वैचारिक राजनीति से जोड़कर पेश किया है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बता सकता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर, आस्था और विकास जैसे मुद्दे लंबे समय से चुनावी विमर्श का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम में चर्चा का केंद्र बन सकता है।
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Amarnath Yatra

Amarnath Yatra Update: 5-8 घंटे का सफर अब 30 मिनट में, 2029 तक शुरू होगी Cable Car Service

Amarnath Yatra Cable Car Project: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। लेकिन कठिन पहाड़ी रास्ते और कई घंटे की पैदल यात्रा अक्सर श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बन जाती है। अब इस परेशानी को काफी हद तक कम करने की तैयारी हो चुकी है। सरकार अमरनाथ यात्रा को अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए केबल कार प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। तय योजना के मुताबिक अप्रैल 2027 से निर्माण कार्य शुरू होगा, जबकि 2029 तक केबल कार सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। 5 से 8 घंटे की यात्रा घटकर होगी सिर्फ 30 मिनट फिलहाल अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को बालटाल और पहलगाम मार्ग से लंबी चढ़ाई करनी पड़ती है। मौसम, भीड़ और रास्ते की स्थिति के अनुसार यह सफर करीब 5 से 8 घंटे तक का हो सकता है। केबल कार शुरू होने के बाद यही दूरी करीब 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए भी बाबा बर्फानी के दर्शन पहले से कहीं ज्यादा सरल हो जाएंगे। अप्रैल 2027 से शुरू होगा निर्माण कार्य परियोजना की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। संबंधित एजेंसियां तकनीकी और पर्यावरण से जुड़ी सभी जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। योजना के अनुसार अप्रैल 2027 से Construction शुरू किया जाएगा, ताकि वर्ष 2029 तक केबल कार सेवा श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध हो सके। आधुनिक तकनीक से होगी सुरक्षित यात्रा यह केबल कार परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार विकसित की जाएगी। पर्वतीय इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम को ध्यान में रखते हुए पूरी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिल सके। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी सबसे बड़ी राहत अभी तक कई श्रद्धालु स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या अधिक उम्र की वजह से पूरी यात्रा नहीं कर पाते थे। केबल कार शुरू होने के बाद ऐसे श्रद्धालु बिना लंबी पैदल चढ़ाई किए आसानी से अमरनाथ गुफा तक पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा के दौरान होने वाली थकान और जोखिम भी काफी कम होंगे। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने के बाद जम्मू-कश्मीर में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। यात्रा आसान होने से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय होटल, टैक्सी, दुकानदारों और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को मिलेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अमरनाथ यात्रा बनेगी पहले से ज्यादा आसान बीते कुछ वर्षों में अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। अब केबल कार परियोजना भी उसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि सब कुछ तय समय पर पूरा हुआ, तो 2029 से श्रद्धालु केवल 30 मिनट में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए गुफा तक पहुंच सकेंगे।
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Bengal

Pipeline Fire in Bengal: भीषण आग से दहला इलाका, 2 की हालत गंभीर, ट्रेन संचालन प्रभावित

Bengal में मंगलवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब एक पेट्रोकेमिकल्स पाइपलाइन में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग की ऊंची लपटों और घने धुएं ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में कम से कम 15 लोग झुलस गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि आग इतनी तेज थी कि दूर-दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दे रहा था। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र को खाली कराना शुरू कर दिया, ताकि किसी और को नुकसान न पहुंचे। Railway Track के पास लगी आग, ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हादसे का असर पास से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर भी पड़ा। आग और धुएं को देखते हुए रेलवे अधिकारियों ने एहतियातन कुछ समय के लिए ट्रेनों की आवाजाही रोक दी। इससे कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ और यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा। रेलवे की तकनीकी टीम ने ट्रैक का निरीक्षण किया और सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद सेवाओं को सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू की। दमकल और राहत दल ने संभाला मोर्चा आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। पुलिस, आपदा प्रबंधन टीम और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काफी हद तक काबू पाया गया, हालांकि प्रभावित इलाके की निगरानी अभी भी जारी है ताकि दोबारा कोई खतरा पैदा न हो। शुरुआती जांच में तकनीकी खराबी की आशंका फिलहाल आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जांच में पाइपलाइन में तकनीकी खराबी या गैस रिसाव की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों की टीम पूरे घटनास्थल की जांच कर रही है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी। प्रशासन ने लोगों से की अपील प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रभावित क्षेत्र के आसपास भीड़ न लगाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। साथ ही घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और स्थिति को जल्द सामान्य करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अहमियत को सामने लाता है। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो नुकसान कहीं अधिक बड़ा हो सकता था। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है तथा पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जनरल उपेंद्र द्विवेदी

Army Chief Retirement: ‘हर जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई’, विदाई में बोले जनरल उपेंद्र द्विवेदी

भारतीय सेना के नेतृत्व में मंगलवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपने कार्यकाल के पूरा होने के बाद सेवानिवृत्त हो गए। विदाई समारोह में उन्होंने देश की सुरक्षा में सेना की भूमिका, जवानों के समर्पण और हाल के सैन्य अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने हर चुनौती का पूरी तैयारी और जिम्मेदारी के साथ सामना किया है। अपने संबोधन में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता और मजबूत रणनीति का प्रतीक बताया। वहीं, अब सेना की कमान जनरल धीरज सेठ संभालेंगे, जो मंगलवार को नए Chief of Army Staff के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे। “हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया” विदाई समारोह के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि सेना की असली ताकत उसके जवान और अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा से लेकर हर संवेदनशील अभियान तक, भारतीय सेना ने हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने सैनिकों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात के बीच भी सेना ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी दक्षता और अनुशासन के साथ निभाया। उनके अनुसार, यह सामूहिक प्रयास ही भारतीय सेना की सबसे बड़ी पहचान है। Operation Sindoor को बताया सेना की क्षमता का प्रमाण अपने भाषण में जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने यह साबित किया कि भारतीय सेना किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में तेज़, सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने इसे केवल एक सफल सैन्य अभियान नहीं, बल्कि सेना के बेहतर समन्वय, आधुनिक रणनीति और जवानों के साहस का उदाहरण बताया। आज जनरल धीरज सेठ के हाथों में होगी कमान जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के नए प्रमुख के रूप में पदभार संभालेंगे। उनके सामने सेना के आधुनिकीकरण, सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने, नई रक्षा तकनीकों को अपनाने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सैन्य तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि नए नेतृत्व में भारतीय सेना तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनने के साथ-साथ आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली को भी नई गति दे सकती है। उपलब्धियों से भरा रहा जनरल द्विवेदी का कार्यकाल जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सैन्य प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने और नई तकनीकों को अपनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा सेना ने कई बड़े सैन्य अभ्यासों और रणनीतिक अभियानों के जरिए अपनी परिचालन क्षमता को भी मजबूत किया। उनके नेतृत्व में सेना ने बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के अनुसार खुद को लगातार तैयार रखा और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। नए नेतृत्व से बढ़ीं उम्मीदें जनरल धीरज सेठ के सेना प्रमुख बनने के साथ भारतीय सेना एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। रक्षा विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में सेना आधुनिकीकरण की रफ्तार तेज करेगी, नई सैन्य तकनीकों को अपनाएगी और सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। जनरल उपेंद्र द्विवेदी की विदाई केवल एक कार्यकाल का अंत नहीं है, बल्कि भारतीय सेना के लिए नए नेतृत्व और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। देश की सुरक्षा के प्रति सेना की प्रतिबद्धता पहले की तरह मजबूत रहेगी और यही विश्वास देशवासियों के मन में भी कायम है।
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PM Modi

PM Modi Meeting आज सचिवों के साथ बड़ी बैठक, Reforms और Investment पर रहेगा फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के सचिवों (Secretaries) के साथ एक अहम हाई-लेवल बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक को सरकार की आने वाली नीतियों और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में देश की अर्थव्यवस्था को गति देने, निवेश बढ़ाने और सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा होगी। सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन को भी तेज और पारदर्शी बनाना है। ऐसे में इस बैठक से मंत्रालयों को कई नए दिशा-निर्देश मिलने की संभावना जताई जा रही है। Ease of Doing Business को मिलेगा और बढ़ावा बैठक का सबसे अहम एजेंडा Ease of Doing Business को और बेहतर बनाना माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि उद्योगों और निवेशकों को कारोबार शुरू करने और विस्तार करने में कम से कम प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़े। इसके लिए मंजूरी की प्रक्रियाओं को आसान बनाने, अनावश्यक नियमों में कमी लाने और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। इसका सीधा फायदा देश में निवेश और रोजगार के अवसरों को मिलने की उम्मीद है। Next Generation Reforms पर होगा फोकस प्रधानमंत्री मोदी प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर लगातार जोर देते रहे हैं। इसी दिशा में बैठक में Next Generation Reforms पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसमें डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करना, सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज बनाना जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। आत्मनिर्भर भारत मिशन को मिलेगी नई रफ्तार बैठक में आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए भी रणनीति तैयार की जा सकती है। घरेलू विनिर्माण (Manufacturing), निर्यात बढ़ाने, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार का मानना है कि मजबूत औद्योगिक ढांचा देश की आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंत्रालयों के कामकाज की होगी समीक्षा बैठक में विभिन्न मंत्रालयों की प्रमुख योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा होगी। जिन योजनाओं में देरी हो रही है, उनके कारणों पर चर्चा कर समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। साथ ही, मंत्रालयों को तय लक्ष्यों के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने और आम लोगों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा। Investment और Employment बढ़ाने पर भी होगी चर्चा सूत्रों के मुताबिक, सरकार निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए भी कई अहम पहलुओं पर विचार कर सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी, उद्योगों को सहयोग और नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रह सकते हैं। क्या आज होंगे बड़े ऐलान? फिलहाल सरकार की ओर से किसी नई नीति या बड़े फैसले की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। हालांकि राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि बैठक के बाद विभिन्न मंत्रालयों को सुधारों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकते हैं। यदि बैठक में लिए गए फैसलों पर तेजी से अमल होता है, तो आने वाले समय में कारोबार, निवेश, रोजगार और सरकारी सेवाओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Uddhav Thackeray

Uddhav Thackeray Shock: सचिन अहीर ने छोड़ा UBT का साथ, Deputy Chairman पद के लिए भरा नामांकन

Maharashtra Politics में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद के Deputy Chairman (उपसभापति) पद के लिए भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की बदलती सियासत का अहम मोड़ मान रहे हैं। इससे न सिर्फ शिंदे गुट की ताकत बढ़ी है, बल्कि उद्धव ठाकरे खेमे के सामने नई राजनीतिक चुनौती भी खड़ी हो गई है। शिंदे गुट को मिला अनुभवी चेहरा सचिन अहीर महाराष्ट्र की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे लंबे समय तक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े रहे और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2019 में उन्होंने एनसीपी छोड़कर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का साथ चुना था। अब करीब सात साल बाद उनका शिंदे गुट में जाना महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। उनके शिंदे सेना में शामिल होने को महायुति सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे विधान परिषद में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी। Deputy Chairman चुनाव पर टिकी निगाहें शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के Deputy Chairman पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। यह कदम साफ संकेत देता है कि सत्तारूढ़ महायुति अपने संख्याबल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अहीर इस चुनाव में जीत हासिल करते हैं तो यह केवल एक संवैधानिक पद की जीत नहीं होगी, बल्कि शिंदे गुट की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने वाला संदेश भी होगा। उद्धव ठाकरे के लिए क्यों अहम है यह झटका? पिछले कुछ वर्षों में शिवसेना (UBT) के कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। ऐसे में सचिन अहीर जैसे वरिष्ठ नेता का जाना उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा और विधान परिषद दोनों स्तरों पर पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए उद्धव ठाकरे को अब संगठनात्मक रणनीति पर अधिक ध्यान देना होगा। लगातार हो रहे दल-बदल से विपक्षी खेमे की चिंता भी बढ़ी है। विपक्ष ने साधा निशाना इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने राज्य की राजनीति में लगातार हो रहे दल-बदल पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर राजनीतिक समीकरण बदल रहा है। वहीं, शिंदे गुट का कहना है कि उनकी सरकार के कामकाज और नेतृत्व से प्रभावित होकर नेता स्वेच्छा से उनके साथ जुड़ रहे हैं। आगे क्या? अब सभी की नजरें महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव पर हैं। चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि विधान परिषद में महायुति की पकड़ कितनी मजबूत होती है। साथ ही यह भी साफ होगा कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

India Weather UP-Bihar में बारिश बनी आफत, MP-Gujarat में रुका Monsoon, Delhi में भीषण गर्मी

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम (Weather) ने दो बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश की हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में तेज बारिश, आंधी और आकाशीय बिजली लोगों के लिए आफत बन गई है। वहीं मध्य प्रदेश और गुजरात में मानसून की रफ्तार थमने से बारिश का इंतजार लंबा हो गया है। दूसरी ओर दिल्ली और हरियाणा में भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, जहां तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। बारिश और Lightning ने ली 13 लोगों की जान पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में कुल 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। कुछ स्थानों पर तेज हवा के कारण बड़े-बड़े पेड़ सड़क और मकानों पर गिर गए, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने की बात कही है। MP और Gujarat में मानसून की चाल धीमी जहां उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश का असर दिख रहा है, वहीं मध्य प्रदेश और गुजरात में मानसून फिलहाल कमजोर पड़ गया है। कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई कर चुके किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की यह धीमी चाल लंबे समय तक नहीं रहेगी। जुलाई के शुरुआती दिनों में बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है, जिससे खेती और जलस्तर दोनों को राहत मिल सकती है। Delhi-Haryana में Heat Wave जैसे हालात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा और आसपास के इलाकों में मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई जगह अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तेज धूप और उमस के कारण लोगों का दिनभर बाहर निकलना मुश्किल हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के आगे बढ़ने के बाद तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने लोगों को किया सतर्क भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जिन राज्यों में बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की गई है। वहीं जिन इलाकों में गर्मी का प्रकोप जारी है, वहां लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में लंबे समय तक न रहने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। देशभर में मौसम का बदला मिजाज एक ओर बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है, तो दूसरी ओर कई राज्य अब भी मानसून का इंतजार कर रहे हैं। मौसम के इस बदले हुए स्वरूप ने साफ कर दिया है कि आने वाले कुछ दिन देश के कई हिस्सों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं। ऐसे में मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखना और सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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