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Study Abroad अब India में: 15 International Universities को मिली मंजूरी, अगस्त से शुरू हो सकता है पहला बैच

Study Abroad अब India में: 15 International Universities को मिली मंजूरी, अगस्त से शुरू हो सकता है पहला बैच

भारत की higher education system में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब छात्रों को विदेश जाकर पढ़ाई करने की जरूरत पहले जैसी नहीं रहेगी। सरकार और UGC ने करीब 15 विदेशी यूनिवर्सिटियों को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी दे दी है। यह कदम NEP 2020 के तहत education को global बनाने की दिशा में काफी अहम माना जा रहा है। अगले कुछ महीनों में कई कैंपस की शुरुआत होने वाली है और रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त 2026 से पहले बैच की पढ़ाई भी शुरू हो सकती है। भारत में Global Education का नया दौर शुरू अब UK, Australia और अन्य देशों की टॉप यूनिवर्सिटियां भारत में अपने independent campuses खोलेंगी। इसका मतलब यह है कि छात्रों को: सरल शब्दों में कहें तो, “अब विदेश वाली पढ़ाई भारत में ही”। सबसे बड़ा फायदा: कम खर्च में Foreign Degree इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा middle-class families को मिलने वाला है। विदेश जाकर पढ़ाई करने की तुलना में: यानी quality education अब ज्यादा affordable हो जाएगी। किन शहरों में खुल सकते हैं कैंपस? हालांकि final list हर university के हिसाब से अलग होगी, लेकिन शुरुआती संकेतों के मुताबिक major cities में campuses आने की संभावना है: कुछ universities पहले ही groundwork शुरू कर चुकी हैं। कौन-कौन सी यूनिवर्सिटियां आ सकती हैं? सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ बड़ी international universities शामिल हैं: इनका focus mainly professional और industry-oriented courses पर होगा। छात्रों को क्या-क्या मिलेगा? इस बदलाव से students को कई बड़े फायदे मिलेंगे: International Degree in India अब भारत में रहकर ही foreign degree हासिल की जा सकेगी। Global Curriculum AI, Data Science, Business, Engineering जैसे modern courses। Industry Exposure Internships और practical learning पर ज्यादा focus। Safe & Affordable Option विदेश जाने का risk और cost दोनों कम हो जाएंगे। कब से शुरू होगा एडमिशन? भारत के लिए इसका मतलब क्या है? यह सिर्फ education reform नहीं है, बल्कि एक बड़ा shift है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बैंक

July Bank Holidays: बैंक जाने से पहले देखें जुलाई की 12 दिनों की Holiday List, नहीं होगी परेशानी

अगर आप जुलाई महीने में बैंक जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले यह खबर पढ़ लें। अगले महीने देशभर में बैंक कुल 12 दिन बंद रहने वाले हैं। ऐसे में अगर आपको चेक जमा करना है, कैश निकालना है, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है या कोई दूसरा जरूरी बैंकिंग काम करना है, तो छुट्टियों की तारीखें पहले से जान लेना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी बैंक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, जुलाई 2026 में नियमित साप्ताहिक अवकाश के अलावा कई राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण भी बैंक बंद रहेंगे। जुलाई में क्यों बंद रहेंगे बैंक? जुलाई में कुल 12 बैंक हॉलिडे होंगे। इनमें चार रविवार और दूसरा-चौथा शनिवार शामिल हैं। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में स्थानीय पर्व और क्षेत्रीय आयोजनों के चलते छह अतिरिक्त दिनों तक बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। पूरे देश में बैंक इन तारीखों पर रहेंगे बंद इसके अलावा विभिन्न राज्यों में स्थानीय त्योहारों और सार्वजनिक अवकाश के कारण छह अन्य दिनों में भी बैंक बंद रहेंगे। इन छुट्टियों की तारीखें हर राज्य में अलग-अलग हो सकती हैं। बैंक बंद रहेंगे, लेकिन ये सेवाएं मिलती रहेंगी बैंक शाखाओं में कामकाज भले ही बंद रहेगा, लेकिन ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग सेवाओं में कोई परेशानी नहीं होगी। आप पहले की तरह इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे— यानी रोजमर्रा के डिजिटल लेनदेन बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें अगर आपको बैंक शाखा में जाकर कोई जरूरी काम करना है, तो छुट्टियों से पहले ही उसे पूरा कर लें। लगातार छुट्टियों के दौरान कई बार बैंक खुलने पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है, जिससे काम में देरी हो सकती है। विशेष रूप से कैश जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस, केवाईसी अपडेट, लॉकर संचालन और डिमांड ड्राफ्ट जैसे कार्यों के लिए पहले से योजना बनाना बेहतर रहेगा। एक नजर में अगर आपका कोई जरूरी बैंकिंग काम लंबित है, तो आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय छुट्टियों से पहले उसे पूरा कर लेना सबसे बेहतर विकल्प होगा। इससे आपको अनावश्यक परेशानी और भीड़ दोनों से बचने में मदद मिलेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP

Weather Update: MP में बिजली गिरने से 4 लोगों की मौत, UP में मानसून की दस्तक संभव

कई राज्यों में झमाझम बारिश लोगों को गर्मी से राहत दे रही है, लेकिन कुछ जगहों पर यही मौसम जानलेवा भी साबित हो रहा है। MP आकाशीय बिजली गिरने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर, पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का असर अभी भी कायम है और कई इलाकों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। MP में Lightning बनी जानलेवा रविवार को मध्य प्रदेश के कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक के बीच अलग-अलग स्थानों पर बिजली गिरने की घटनाएं हुईं। इन हादसों में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की मदद शुरू कर दी है और लोगों से खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के शुरुआती दौर में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में खुले मैदान, खेत या पेड़ों के नीचे खड़े रहना बेहद खतरनाक हो सकता है। 22 राज्यों तक पहुंचा Monsoon, UP में आज दस्तक की संभावना भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून अब देश के 22 राज्यों तक पहुंच चुका है। मौसम की मौजूदा परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं और संभावना है कि आज उत्तर प्रदेश में भी मानसून की एंट्री हो जाएगी। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे किसानों को राहत मिलेगी और भीषण गर्मी से परेशान लोगों को भी सुकून मिलेगा। इन राज्यों में Heavy Rain और Thunderstorm का Alert मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। Rajasthan में अभी भी Heatwave का असर जहां देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून राहत दे रहा है, वहीं पश्चिमी राजस्थान अभी भी भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। कई शहरों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मानसून उत्तर-पश्चिम भारत की ओर तेजी से बढ़ेगा। इसके बाद राजस्थान के कई हिस्सों में भी बारिश शुरू हो सकती है और तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। मौसम विभाग की सलाह बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। बिजली चमकने के समय खुले स्थानों, खेतों या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। सुरक्षित भवन या वाहन में शरण लें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। किसानों और बाहर काम करने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही अपने दैनिक कार्यों की योजना बनाएं। अगले 48 घंटे क्यों हैं महत्वपूर्ण? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले 48 घंटे उत्तर और मध्य भारत के लिए काफी अहम रहने वाले हैं। कई राज्यों में मानसून और सक्रिय होगा, जिससे तेज बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद उत्तर भारत के बड़े हिस्से को भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। देशभर में बदलता मौसम यह संकेत दे रहा है कि मानसून अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। ऐसे में थोड़ी-सी सावधानी और मौसम विभाग की सलाह का पालन लोगों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi in Seychelles: राष्ट्रपति रामकलावन से मिले PM मोदी, रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर हुई बड़ी चर्चा

PM Modi अपने तीन देशों के विदेश दौरे के तहत रविवार को हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स (Seychelles) पहुंचे। राजधानी विक्टोरिया में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सेशेल्स के राष्ट्रपति वावेल रामकलावन ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें औपचारिक Guard of Honour दिया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। भारत और सेशेल्स के रिश्तों को नई मजबूती देने के लिहाज से प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में हुआ भव्य स्वागत सेशेल्स पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक सम्मान के साथ स्वागत किया गया। सैन्य टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए। इसके बाद राष्ट्रपति रामकलावन और प्रधानमंत्री मोदी ने एक-दूसरे के प्रतिनिधिमंडलों से परिचय किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने मुस्कुराते हुए गर्मजोशी से मुलाकात की, जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। भारत-सेशेल्स के बीच कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रामकलावन के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। वार्ता के दौरान समुद्री सुरक्षा, हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, ब्लू इकोनॉमी, डिजिटल सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और क्षमता निर्माण जैसे विषय प्रमुख रहे। भारत पहले से ही सेशेल्स में कई विकास परियोजनाओं का साझेदार है। ऐसे में इस यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कई समझौतों पर लग सकती है मुहर प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान रक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, समुद्री निगरानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास से जुड़े कई MoUs (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाना है। शाम को संसद को करेंगे संबोधित अपने आधिकारिक कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार शाम सेशेल्स की संसद को भी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि अपने भाषण में वह लोकतांत्रिक मूल्यों, भारत-सेशेल्स की ऐतिहासिक मित्रता, हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। इस संबोधन पर दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। भारतीय समुदाय से भी करेंगे मुलाकात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स में रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। भारतीय समुदाय लंबे समय से सेशेल्स के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में यह मुलाकात दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर मानी जा रही है। क्यों खास है PM Modi का Seychelles दौरा? सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक अहम रणनीतिक साझेदार है। भारत की Neighbourhood First और SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति में इस देश की महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात और हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी। साथ ही रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।
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West Bengal

West Bengal Politics: TMC के बागी गुट की बैठक पर विवाद, 47 पूर्व पार्षद शामिल; चुनाव आयोग पहुंचा मामला

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बार फिर आंतरिक विवादों को लेकर चर्चा में है। पार्टी के बागी गुट ने 47 पूर्व पार्षदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसके बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। बैठक में टीएमसी के झंडे और पार्टी से जुड़े प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया गया है कि बागी नेताओं ने बिना अधिकार पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का उपयोग किया, जिससे कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। 47 पूर्व पार्षदों के साथ हुई अहम बैठक मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में 47 पूर्व पार्षदों के अलावा कई स्थानीय नेता और पुराने कार्यकर्ता भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन की मौजूदा स्थिति, भविष्य की रणनीति और राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा करना बताया गया। हालांकि, बैठक के दौरान टीएमसी के झंडे और पार्टी की पहचान से जुड़े प्रतीकों के उपयोग ने विवाद को जन्म दे दिया। इसी मुद्दे पर अब पार्टी के दोनों गुट आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। Mamata Camp ने चुनाव आयोग से की शिकायत बैठक के बाद ममता बनर्जी समर्थक गुट ने चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि केवल अधिकृत नेतृत्व को ही पार्टी के आधिकारिक नाम, झंडे और चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने का अधिकार है। पार्टी का आरोप है कि यदि कोई अन्य समूह इन प्रतीकों का उपयोग करता है, तो इससे मतदाताओं में भ्रम फैल सकता है और चुनावी नियमों का उल्लंघन भी माना जा सकता है। इसी आधार पर मामले में कार्रवाई की मांग की गई है। बागी गुट ने क्या कहा? बागी नेताओं का कहना है कि बैठक पूरी तरह संगठनात्मक चर्चा के लिए आयोजित की गई थी। उनका दावा है कि वे पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श कर रहे थे और उनका उद्देश्य किसी तरह का विवाद पैदा करना नहीं था। हालांकि, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए आरोपों पर उन्होंने विस्तृत प्रतिक्रिया देने से फिलहाल परहेज किया है। चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक चुनौती राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि टीएमसी के भीतर गुटबाजी इसी तरह जारी रहती है, तो इसका असर आने वाले स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम को मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकता है। वहीं, पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट बनाए रखने की होगी, ताकि चुनावी तैयारियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े। फिलहाल क्या है स्थिति? शिकायत दर्ज होने के बाद अब सभी की नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर है। यदि जांच में पार्टी के नाम या चुनाव चिन्ह के गलत इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल दोनों गुट अपने-अपने दावों पर कायम हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह विवाद लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ketan Murder Case

Ketan Murder Case: Lohagad Fort पर हुआ Crime Scene Recreation

Pune Murder Case की जांच अब बेहद अहम दौर में पहुंच गई है। चर्चित केतन हत्याकांड (Ketan Murder Case) में पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया को लेकर रविवार को लोहगढ़ किला (Lohagad Fort) पहुंचकर पूरे घटनाक्रम का Crime Scene Recreation किया। इस दौरान पुलिस ने एक डमी (Dummy) को उसी जगह से नीचे गिराया, जहां से केतन के गिरने की बात सामने आई थी। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि आरोपी के बयान और घटनास्थल के हालात एक-दूसरे से मेल खाते हैं या नहीं। पुलिस को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से हत्या की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलेगी और अब तक मिले डिजिटल व फॉरेंसिक सबूतों को और मजबूती मिलेगी। लोहगढ़ किले पर घंटों चली जांच रविवार सुबह पुलिस, फॉरेंसिक टीम और क्राइम ब्रांच के अधिकारी कड़ी सुरक्षा के बीच सिया को लेकर लोहगढ़ किले पहुंचे। जांच टीम ने उस स्थान की पहचान कराई, जहां कथित तौर पर केतन को खाई में धक्का दिया गया था। इसके बाद एक डमी को उसी स्थान से नीचे गिराकर देखा गया कि घटना का क्रम किस प्रकार रहा होगा। अधिकारियों ने मौके की दूरी, ऊंचाई और अन्य परिस्थितियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया वैज्ञानिक जांच का हिस्सा है और इससे केस के कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। Google Search ने बढ़ाया शक जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस से कई अहम जानकारियां मिली हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि घटना से पहले कथित तौर पर इंटरनेट पर ऐसे स्थानों की तलाश की गई थी, जहां किसी व्यक्ति के गिरने की घटना को हादसे का रूप दिया जा सके। इसी डिजिटल ट्रेल ने पुलिस का शक और गहरा कर दिया। अब साइबर एक्सपर्ट इन रिकॉर्ड्स का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं ताकि घटना से पहले की पूरी प्लानिंग स्पष्ट हो सके। क्या पहले से रची गई थी साजिश? जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। इसी वजह से पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन, चैट हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि डिजिटल सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और क्राइम सीन रीक्रिएशन एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं, तो यह चार्जशीट में बेहद मजबूत साक्ष्य साबित होंगे। Crime Scene Recreation क्यों है अहम? किसी भी हत्या के मामले में क्राइम सीन रीक्रिएशन जांच की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। इसके जरिए पुलिस यह परखती है कि आरोपी द्वारा बताए गए घटनाक्रम के अनुसार घटना वास्तव में संभव थी या नहीं। इससे जांच एजेंसियों को बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले सबूतों का मिलान करने में मदद मिलती है। क्या है पूरा मामला? केतन की मौत को शुरुआत में एक हादसा माना गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने हत्या की आशंका को मजबूत किया। पुलिस का दावा है कि मामले में पहले से योजना बनाने के संकेत मिले हैं। इसी वजह से डिजिटल सबूत, फॉरेंसिक जांच और घटनास्थल पर रीक्रिएशन जैसी प्रक्रियाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। चार्जशीट को मजबूत करने की तैयारी पुलिस अब तक जुटाए गए सभी वैज्ञानिक, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों को एक साथ जोड़कर चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और हर पहलू की पुष्टि के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में कुछ और अहम खुलासे हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mann Ki Baat

Mann Ki Baat शास्त्रार्थ की परंपरा को फिर मिली नई पहचान, PM Modi ने गिनाईं भारत की खूबियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 135वें एपिसोड में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से चर्चा की। अपने संबोधन में उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने शास्त्रार्थ (Shastrarth) की ऐतिहासिक परंपरा को फिर से जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया है। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की बौद्धिक पहचान और लोकतांत्रिक संवाद की मजबूत नींव बताया। नालंदा विश्वविद्यालय का किया विशेष उल्लेख पीएम मोदी ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा का प्रतीक है। यहां कभी दुनिया के अलग-अलग देशों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। आज जब विश्वविद्यालय फिर से शास्त्रार्थ की संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है, तो यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत हमेशा विचारों के खुले आदान-प्रदान और सकारात्मक संवाद में रही है। अलग-अलग मतों को सुनना और तर्क के आधार पर चर्चा करना ही भारतीय सभ्यता की असली पहचान है। शास्त्रार्थ केवल बहस नहीं, सीखने का माध्यम प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि शास्त्रार्थ का उद्देश्य किसी को हराना नहीं, बल्कि सत्य तक पहुंचना होता है। उन्होंने कहा कि जब लोग अपने विचार साझा करते हैं और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझते हैं, तभी समाज में नई सोच और नए समाधान जन्म लेते हैं। उनके अनुसार, आज के समय में भी स्वस्थ संवाद और विचार-विमर्श की संस्कृति पहले से अधिक जरूरी है। युवाओं से सीखने और सवाल पूछने की अपील पीएम मोदी ने देश के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे केवल जानकारी जुटाने तक सीमित न रहें, बल्कि सीखने, प्रश्न पूछने और विचार साझा करने की आदत विकसित करें। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा और संवाद ही किसी भी समाज को आगे बढ़ाते हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को समझें और उसे आधुनिक सोच के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएं। भारत की ज्ञान परंपरा दुनिया के लिए प्रेरणा अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सदियों से दुनिया को ज्ञान, दर्शन और शिक्षा का मार्ग दिखाया है। नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इस गौरवशाली इतिहास के जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि नई पीढ़ी इस विरासत को आगे ले जाकर भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड की खास बातें इस बार के एपिसोड में प्रधानमंत्री ने शिक्षा, संस्कृति, समाज में सकारात्मक बदलाव और जनभागीदारी जैसे विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने देशवासियों से प्रेरणादायक कार्यों को अपनाने और समाज के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Operation Sindoor

Operation Sindoor Controversy: शहीदों की जानकारी छिपाने के आरोप

‘Operation Sindoor’ को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। इस बार मामला शहीद जवानों की जानकारी से जुड़ा हुआ है, जिस पर विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि इस ऑपरेशन में शहीद हुए जवानों की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया और जनता से तथ्यों को छिपाया गया। वहीं सरकार ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह दावा न केवल गलत है बल्कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। Congress का आरोप: पारदर्शिता पर सवाल, शहीदों की जानकारी छिपाने का दावा Indian National Congress ने आरोप लगाया है कि सरकार ने ‘Operation Sindoor’ से जुड़े शहीदों की जानकारी को सार्वजनिक करने में पारदर्शिता नहीं दिखाई। विपक्ष का कहना है कि देश के लिए जान देने वाले जवानों की जानकारी छिपाना गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि जनता को सच्चाई जानने का पूरा अधिकार है और इस तरह की जानकारी को दबाना उचित नहीं है। Government का पलटवार: आरोप गलत, बयान को गलत तरीके से पेश किया गया सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि शहीदों की जानकारी छिपाने का कोई सवाल ही नहीं है। सरकारी पक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और भ्रामक बताया है। सरकार का कहना है कि रक्षा मंत्रालय या रक्षा मंत्री के किसी भी बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है, जिससे गलत धारणा बनाई जा रही है। इस पूरे विवाद में रक्षा मंत्री Rajnath Singh का नाम भी सामने आया है, जिनके बयान को लेकर विपक्ष ने अलग व्याख्या की है। Operation Sindoor बना राजनीतिक बहस का केंद्र ‘Operation Sindoor’ अब केवल एक सैन्य अभियान नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे पूरी तरह गलतफहमी और राजनीतिक हमला बता रहा है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज होने से यह मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बारिश

बारिश संकट: 40% Rain Deficit के साथ सबसे सूखा June, IMD ने बताए कारण

इस साल जून का महीना भारत के मौसम इतिहास में एक अलग ही कहानी लिख गया है। जहां आमतौर पर जून की बारिश से खेतों में हरियाली छा जाती है, वहीं 2026 का जून लोगों को सूखा और गर्मी दोनों की मार देकर गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक यह पिछले 146 सालों में सबसे सूखा जून रहा है, जिसमें देशभर में सामान्य से करीब 40% कम बारिश दर्ज की गई। इस बारिश की कमी ने सिर्फ मौसम वैज्ञानिकों को ही नहीं, बल्कि किसानों और आम लोगों की दिनचर्या तक को प्रभावित किया है। IMD की रिपोर्ट क्या कहती है? India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, इस बार मानसून की शुरुआत समय पर हुई थी, लेकिन उसकी रफ्तार और फैलाव दोनों ही कमजोर रहे। जून के ज्यादातर दिनों में बारिश देने वाले सिस्टम सक्रिय नहीं हो पाए, जिससे कई राज्यों में लंबे सूखे हालात बने रहे। मानसून इतना कमजोर क्यों पड़ा? (5 बड़े कारण) मानसून ट्रफ का कमजोर होना मानसून ट्रफ इस बार अपनी सामान्य स्थिति में नहीं रही, जिससे बारिश लाने वाले बादलों का सही तरीके से गठन नहीं हो सका। El Niño का असर प्रशांत महासागर में विकसित El Niño स्थिति ने भारतीय मानसून को कमजोर कर दिया, जिसका सीधा असर बारिश की मात्रा पर पड़ा। समुद्री सिस्टम की कमी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर सिस्टम की कमी रही, जिससे नमी की सप्लाई कमजोर पड़ गई। जेट स्ट्रीम में बदलाव ऊपरी वायुमंडल में हवा के प्रवाह (Jet Stream) में बदलाव ने मानसून की गति और दिशा दोनों को प्रभावित किया। जलवायु परिवर्तन का असर लगातार बढ़ते तापमान और बदलते मौसम पैटर्न ने मानसून को अस्थिर बना दिया है, जिससे बारिश का वितरण असमान हो गया है। आम जिंदगी पर असर इस सूखे जून का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर जमीन पर साफ दिखा— आगे क्या उम्मीद है? मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में मानसून कुछ गति पकड़ सकता है, लेकिन जून की भारी कमी को पूरी तरह भर पाना मुश्किल रहेगा। आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम होंगे, क्योंकि वही तय करेंगे कि इस साल की बारिश का कुल संतुलन कैसा रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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