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LPG Supply Update: गैस की नहीं होगी किल्लत | Government का नया प्लान, इन लोगों को मिलेगा Priority Cylinder

LPG Supply Update: गैस की नहीं होगी किल्लत | Government का नया प्लान, इन लोगों को मिलेगा Priority Cylinder

देशभर में LPG सिलेंडर की संभावित कमी को लेकर चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे जरूरतमंद लोगों तक गैस की सप्लाई बिना रुकावट के पहुंच सके। नई योजना के तहत अब LPG सिलेंडर की डिलीवरी को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि कुछ खास वर्गों को सबसे पहले गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। किन लोगों को मिलेगी सबसे पहले LPG? सरकारी योजना के अनुसार, उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवार, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग और जिनके पास गैस का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है—उन्हें सबसे पहले LPG सिलेंडर दिया जाएगा। इसके अलावा अस्पतालों, छोटे ढाबों और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है। क्यों उठाना पड़ा यह कदम? हाल के समय में बढ़ती मांग और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई जगहों पर LPG की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही थी। ऐसे में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है कि कोई भी जरूरतमंद गैस से वंचित न रहे। कैसे काम करेगा नया सिस्टम? इस नई व्यवस्था में गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पहले प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध कराएं। इसके बाद सामान्य उपभोक्ताओं की बारी आएगी। साथ ही, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए सप्लाई पर नजर रखी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। आम लोगों पर क्या होगा असर? इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को थोड़ी देरी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसका मकसद है कि जिनके लिए LPG बेहद जरूरी है, उन्हें समय पर सिलेंडर मिल सके।
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Government vs Court : धार्मिक परंपरा पर बहस, किसका है अंतिम अधिकार?

Government vs Court : धार्मिक परंपरा पर बहस, किसका है अंतिम अधिकार?

देश में एक बार फिर धर्म और कानून को लेकर बहस तेज हो गई है। Government vs Court के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि धार्मिक परंपराओं को अंधविश्वास माना जाए या नहीं, और इसका फैसला कौन करेगा। सरकार का कहना है कि किसी भी धार्मिक परंपरा को अंधविश्वास बताना कोर्ट का काम नहीं है। सरकार के मुताबिक, इस तरह के फैसले लेना विधायिका (Legislature) का अधिकार है, क्योंकि वही जनता द्वारा चुनी गई संस्था है।सरकार ने यह भी कहा कि कोर्ट इस मामले में एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए उसे सीमित दायरे में ही रहकर काम करना चाहिए। वहीं, कोर्ट ने साफ कहा कि उसे किसी भी मामले की समीक्षा (Review) करने का पूरा अधिकार है। अगर किसी परंपरा से लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह संविधान के आधार पर हर मुद्दे को देखने के लिए स्वतंत्र है। इस बहस का असर सीधे आम लोगों की आस्था और अधिकारों पर पड़ सकता है। एक तरफ लोग अपनी धार्मिक परंपराओं को बचाना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ यह भी जरूरी है कि किसी भी परंपरा के नाम पर किसी के अधिकारों का हनन न हो। यह मुद्दा सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि देश में संविधान, आस्था और कानून के बीच संतुलन कैसे बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC का आरोप- चुनाव आयोग ने 5 मिनट में बाहर निकाला

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। Trinamool Congress (TMC) ने आरोप लगाया है कि जब उनके नेता चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर Election Commission of India (EC) के पास पहुंचे, तो उन्हें सिर्फ 5 मिनट के भीतर ही बाहर कर दिया गया। TMC नेताओं का कहना है कि वे SIR (Special Intensive Revision) को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने गए थे। उनका आरोप है कि आयोग ने उनकी बात ठीक से सुनी भी नहीं और उन्हें जल्दबाजी में बाहर जाने को कह दिया। इस घटना के बाद TMC ने चुनाव आयोग के रवैये पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अगर उनकी बात ही नहीं सुनी जाएगी, तो निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव होंगे। वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है, लेकिन साफ कहा है कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह “भयमुक्त और निष्पक्ष” होंगे। आयोग का कहना है कि वह हर मतदाता को सुरक्षित माहौल देने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजनीतिक माहौल को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस बार चुनाव वास्तव में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kanpur Kidney Scam: ‘मेरी किडनी निकाल ली’—Hospital से आए Phone Call ने खोली साजिश की परतें

Kanpur Kidney Scam: ‘मेरी किडनी निकाल ली’—Hospital से आए Phone Call ने खोली साजिश की परतें

Kanpur से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। शहर की पुलिस को एक ऐसा फोन कॉल मिला, जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया। कॉल करने वाले ने घबराई आवाज में बताया कि उसकी किडनी धोखे से निकाल ली गई है। जैसे ही यह सूचना मिली, पुलिस बिना समय गंवाए सीधे उस अस्पताल पहुंची, जहां से कॉल किया गया था। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा और तुरंत जांच शुरू कर दी। पीड़ित की बात सुनकर साफ था कि यह कोई सामान्य मामला नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जांच में कई सवाल खड़े हुए—क्या यह किसी गिरोह का काम है? क्या अस्पताल के अंदर ही कोई मिलीभगत है? इस घटना ने लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। कोई भी यह सोचने पर मजबूर है कि अगर अस्पताल जैसी जगह पर भी ऐसा हो सकता है, तो भरोसा किस पर किया जाए। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और हर एंगल से जांच की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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Delhi Assembly Security Breach: सुरक्षा में बड़ी चूक, 2 Police Officers Suspended; आरोपी की Remand से खुल सकते हैं कई राज

Delhi Assembly Security Breach: सुरक्षा में बड़ी चूक, 2 Police Officers Suspended; आरोपी की Remand से खुल सकते हैं कई राज

देश की राजधानी से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां Delhi Assembly की सुरक्षा में बड़ी सेंध लगने से हड़कंप मच गया। इस चूक के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी किसी तरह सुरक्षा घेरा पार कर अंदर तक पहुंच गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। फिलहाल आरोपी पुलिस रिमांड में है, और उम्मीद की जा रही है कि पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे मामले में कहीं अंदरूनी मदद तो नहीं मिली थी। इस घटना ने न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, बल्कि आम लोगों के मन में भी चिंता बढ़ा दी है। विधानसभा जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की चूक को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। अब सभी की नजर जांच पर टिकी है, क्योंकि आरोपी की रिमांड से ऐसे कई राज सामने आ सकते हैं, जो इस पूरे मामले की असली तस्वीर साफ करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jammu Kashmir में 2 पाकिस्तानी आतंकवादी गिरफ्तार, 16 साल से फरार था एक

Jammu Kashmir में 2 पाकिस्तानी आतंकवादी गिरफ्तार, 16 साल से फरार था एक

Jammu Kashmir में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। यहां 2 पाकिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक आतंकवादी पिछले 16 साल से फरार चल रहा था, जिसे पकड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। जानकारी के मुताबिक, ये दोनों आतंकवादी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से घाटी में सक्रिय थे। सुरक्षा बलों ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए इन्हें दबोच लिया। सिर्फ इतना ही नहीं, इस ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की मदद करने वाले 3 स्थानीय सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये लोग आतंकियों को छिपने की जगह, खाना और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराते थे। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से इलाके में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। साथ ही आने वाले समय में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि ऐसे आतंकियों की मौजूदगी हमेशा आम नागरिकों के लिए खतरा बनी रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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8th Pay Commission Update: DA बढ़ने से Salary में होगा इजाफा, 3 महीने का Arrear भी मिलेगा – आसान भाषा में समझें Calculation

8th Pay Commission Update: DA बढ़ने से Salary में होगा इजाफा, 3 महीने का Arrear भी मिलेगा – आसान भाषा में समझें Calculation

सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है। 8th Pay Commission को लेकर चर्चाएं तेज हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के साथ ही सैलरी में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। खास बात यह है कि कर्मचारियों को तीन महीने का एरियर (Arrear) भी मिल सकता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को काफी राहत मिलेगी। दरअसल, जब भी DA में बढ़ोतरी होती है, उसका सीधा असर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹30,000 है और DA में 4% की बढ़ोतरी होती है, तो हर महीने उसकी सैलरी में ₹1,200 का इजाफा हो जाएगा। अब अगर यह बढ़ोतरी तीन महीने से लागू मानी जाए, तो कर्मचारी को ₹3,600 का एरियर एक साथ मिल सकता है। यही वजह है कि कर्मचारी DA बढ़ने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की भी उम्मीद है। इससे न सिर्फ सैलरी बढ़ेगी, बल्कि अन्य भत्तों में भी सुधार हो सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से चर्चाएं चल रही हैं, उससे साफ है कि आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है। कुल मिलाकर, DA हाइक और एरियर का यह कॉम्बिनेशन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी साबित हो सकता है, जिसका असर उनके मासिक बजट से लेकर बचत तक पर दिखेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Assam Police का कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापा, बयान को लेकर बढ़ा सियासी विवाद

Assam Police का कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापा, बयान को लेकर बढ़ा सियासी विवाद

Assam Police ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा के घर छापेमारी की है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, पवन खेड़ा ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट हैं। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। पुलिस की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि यह सब राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सच को दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा की ओर से कहा गया है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी बेबुनियाद आरोप लगाने की छूट नहीं दी जा सकती। इस पूरे मामले ने आम लोगों के बीच भी चर्चा बढ़ा दी है। कई लोग इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई मान रहे हैं, तो कुछ इसे कानून का सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और सच्चाई क्या सामने आती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sabarimala विवाद: सरकार ने Supreme Court से कहा- धार्मिक मामलों में न हो दखल

Sabarimala विवाद: सरकार ने Supreme Court से कहा- धार्मिक मामलों में न हो दखल

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। इस मामले में सरकार ने Supreme Court में अपनी बात रखते हुए कहा है कि अदालत को धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार का कहना है कि सबरीमाला मंदिर की परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इनका अपना एक धार्मिक महत्व है। यदि इन परंपराओं में बदलाव किया जाता है, तो इससे श्रद्धालुओं की आस्था पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर महिलाओं की एंट्री को लेकर सरकार ने कहा कि यह फैसला मंदिर की मूल परंपरा को बदल सकता है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि हर धर्म और मंदिर की अपनी अलग परंपराएं होती हैं, जिन्हें बनाए रखना जरूरी है। ऐसे मामलों में अदालत को सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। वहीं, इस मुद्दे पर देशभर में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने के पक्ष में हैं, तो कुछ लोग इसे परंपरा के खिलाफ मानते हैं। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि परंपरा और समान अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Digital Shift या System Failure? SWAYAM-NPTEL Courses में क्यों नहीं बढ़ रही छात्रों की दिलचस्पी

Exclusive story:-भारत में SWAYAM और NPTEL ऑनलाइन कोर्स से डिग्री में क्रेडिट लेने का सिस्टम लागू है, लेकिन छात्र और यूनिवर्सिटीज इसे अपनाने में पीछे क्यों हैं?जानिए पूरी पड़ताल। ऑनलाइन एजुकेशन का बड़ा दावा, लेकिन असर सीमित भारत में उच्च शिक्षा को डिजिटल और लचीला बनाने के लिए सरकार ने SWAYAM और NPTEL प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया। उद्देश्य साफ था — छात्र अपने कॉलेज के साथ-साथ ऑनलाइन पढ़ाई करके डिग्री का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर सकें। नीतियों के अनुसार, छात्र अपनी पढ़ाई का लगभग 40% हिस्सा ऑनलाइन कोर्स के जरिए पूरा कर सकते हैं। लेकिन असल स्थिति यह है कि यह सुविधा मौजूद होने के बावजूद ज्यादातर छात्र इसका फायदा नहीं उठा रहे हैं। सिस्टम मौजूद, लेकिन इस्तेमाल कम देशभर की 400 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज इस क्रेडिट सिस्टम से जुड़ चुकी हैं। प्लेटफॉर्म पर हजारों कोर्स भी उपलब्ध हैं। फिर भी, ग्राउंड लेवल पर देखा जाए तो: इससे साफ संकेत मिलता है कि नीति और व्यवहार में बड़ा गैप है। क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम आखिर है क्या? यह सिस्टम छात्रों को यह आज़ादी देता है कि: कागजों पर यह मॉडल काफी मजबूत दिखता है, लेकिन इसे लागू करना उतना आसान नहीं रहा। क्यों नहीं चल पा रहा यह मॉडल? 1. स्टूडेंट्स का कम जुड़ाव कई छात्रों को ये कोर्स अतिरिक्त बोझ लगते हैं। वे इन्हें सीरियसली नहीं लेते या पूरा नहीं कर पाते। 2. यूनिवर्सिटीज का अधूरा इंप्लीमेंटेशन हालांकि कई यूनिवर्सिटीज इस सिस्टम से जुड़ी हैं, लेकिन: 3. टाइमिंग और शेड्यूल का टकराव ऑनलाइन कोर्स और कॉलेज के सेमेस्टर शेड्यूल में तालमेल की कमी है।इस वजह से छात्रों के लिए दोनों को साथ मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। 4. इंडस्ट्री-फोकस्ड कोर्स की कमी आज के समय में छात्र ऐसे कोर्स चाहते हैं जो उन्हें नौकरी दिलाने में मदद करें।लेकिन कई ऑनलाइन कोर्स अभी भी पुराने या कम प्रैक्टिकल माने जाते हैं। 5. जानकारी और गाइडेंस का अभाव कई छात्रों को यह तक नहीं पता कि: क्या हो सकता है समाधान? विशेषज्ञों का मानना है कि इस सिस्टम को सफल बनाने के लिए: ✔ कुछ प्रतिशत क्रेडिट को अनिवार्य किया जाए✔ छात्रों को सही गाइडेंस दी जाए✔ इंडस्ट्री से जुड़े नए कोर्स जोड़े जाएं✔ यूनिवर्सिटीज में इसे गंभीरता से लागू किया जाए प्राइवेट प्लेटफॉर्म क्यों आगे हैं? आज के समय में कई छात्र विदेशी और प्राइवेट प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके पीछे कारण हैं: यही वजह है कि सरकारी प्लेटफॉर्म होते हुए भी कम्पटीशन बढ़ गया है। भविष्य का रास्ता क्या है? SWAYAM और NPTEL जैसे प्लेटफॉर्म भारत के लिए बहुत बड़ा अवसर हैं, खासकर उन छात्रों के लिए जो: लेकिन अगर इन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया, तो यह पहल सिर्फ एक अच्छी योजना बनकर रह जाएग डिजिटल एजुकेशन का यह मॉडल भारत की शिक्षा व्यवस्था को बदल सकता है, लेकिन अभी यह अपने शुरुआती संघर्ष के दौर में है। नीतियों से ज्यादा जरूरी है उनका सही क्रियान्वयन — तभी यह पहल सच में एजुकेशन रिवोल्यूशन बन पाएगी।
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Brazil Adventure Accident: रोमांचक जंप बना आखिरी सफर, 21 वर्षीय मारिया की मौत से सदमे में लोग

Brazil Adventure Accident: रोमांचक जंप बना आखिरी सफर, 21 वर्षीय मारिया की मौत से सदमे में लोग

Brazil में एडवेंचर एक्टिविटी के दौरान हुई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। 21 वर्षीय मारिया एडुआर्दा रोड्रिग्स डी फ्रेटास रोमांचक जंप का अनुभव लेने पहुंची थीं, लेकिन कुछ ही सेकंड में यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे से कुछ समय पहले मारिया ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर की थीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा था कि आखिर कौन उन्हें पुल से कूदने दे रहा है। हादसे के बाद उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इसे बेहद भावुक कर देने वाला बताया। एडवेंचर स्पोर्ट्स की सुरक्षा पर उठे सवाल इस घटना के बाद एडवेंचर स्पोर्ट्स और एडवेंचर टूरिज्म की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बंजी या रोप जंपिंग जैसी गतिविधियों में कई स्तरों पर सुरक्षा जांच की जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि उपकरणों की अंतिम जांच या सुरक्षा प्रक्रिया में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
Gujarat Jama Masjid Controversy: भरुच की 700 साल पुरानी मस्जिद को लेकर नई बहस, वैज्ञानिक सर्वे की मांग

Gujarat Jama Masjid Controversy: भरुच की 700 साल पुरानी मस्जिद को लेकर नई बहस, वैज्ञानिक सर्वे की मांग

Gujarat के भरुच स्थित करीब 700 साल पुरानी जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के बाद इस ऐतिहासिक स्थल के मूल स्वरूप को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वीडियो में मस्जिद के कथित अंडरग्राउंड हिस्से में जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां तथा नक्काशीदार पत्थर दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर या जैन विहार होने का दावा कुछ हिंदू और जैन संगठनों के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि यह स्थल मूल रूप से किसी प्राचीन मंदिर या जैन विहार का हिस्सा था, जिसे बाद में मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। इन दावों के बाद संबंधित पक्षों ने पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने और ऐतिहासिक तथ्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। ASI के संरक्षण में है स्मारक बताया जा रहा है कि यह ऐतिहासिक स्मारक फिलहाल Archaeological Survey of India (ASI) के संरक्षण में है। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन और ASI ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन सतर्क, जांच की मांग तेज स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल मामले पर नजर रखी जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। वहीं, इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक सर्वे और आधिकारिक जांच जरूरी है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग ऐतिहासिक तथ्यों की जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
India-Russia Oil Trade: रूस से सस्ते तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर, मई 2026 में बढ़ा आयात

India-Russia Oil Trade: रूस से सस्ते तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर, मई 2026 में बढ़ा आयात

India और Russia के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत ने मई 2026 में रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल और अन्य जीवाश्म ईंधनों का आयात किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने मई महीने में रूस से करीब 6.7 अरब डॉलर मूल्य के हाइड्रोकार्बन खरीदे। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कच्चे तेल की रही। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों में सस्ते रूसी तेल की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। अप्रैल के मुकाबले 21% बढ़ा आयात यूरोपीय थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चे तेल का भारतीय आयात अप्रैल की तुलना में 21 फीसदी बढ़ा है। वहीं देश के कुल कच्चे तेल आयात में भी 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने मई में लगभग 4.8 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो रूस से आयात किए गए कुल हाइड्रोकार्बन का करीब 83 फीसदी हिस्सा था। भारतीय रिफाइनरियों को मिल रहा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि रियायती दरों पर मिलने वाला रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इससे ईंधन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है और घरेलू बाजार पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। वैश्विक दबाव के बीच मजबूत व्यापारिक रिश्ते यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत बना हुआ है। भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर भारत पर ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए रूस से बढ़ती खरीद पर वैश्विक बाजार और पश्चिमी देशों की नजर बनी हुई है।
Bengaluru Protest: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर Cockroach Party का प्रदर्शन

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Bengaluru में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी के अनुसार रविवार शाम 4 बजे फ्रीडम पार्क में समर्थक जुटेंगे और अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। Freedom Park में होगा प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन Freedom Park में किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से आयोजित होगा। कॉकरोच पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepke ने कहा कि पार्टी सरकार के सामने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन जनता की आवाज उठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील पार्टी ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।
West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal में विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर जांच तेज हो गई है। इसी केस में Abhishek Banerjee रविवार को एक बार फिर CID मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। यह मामला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक पिछली पूछताछ में मिले जवाबों से पूरी संतुष्टि नहीं मिली थी, जिसके बाद उन्हें दोबारा तलब किया गया। कुणाल घोष को भी भेजा गया समन CID ने इस मामले में Kunal Ghosh को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। जानकारी के अनुसार उन्हें दोपहर करीब 3 बजे भवानी भवन स्थित CID कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाकर भी सवाल-जवाब कर सकती है ताकि मामले के अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। जरूरी दस्तावेज भी मांगे गए अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अभिषेक बनर्जी से मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों की मदद से जांच को आगे बढ़ाने और कथित फर्जी हस्ताक्षरों की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है। पहले भी हो चुकी है पूछताछ जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार CID इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि कई सवालों के जवाबों को लेकर एजेंसी को स्पष्टता नहीं मिल पाई थी। इसी वजह से उन्हें दोबारा समन जारी किया गया।

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