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Parliament में विपक्ष का हंगामा, खड़गे बोले- पहले प्रधानमंत्री इस्तीफा दें, फिर होगी चर्चा

Parliament में विपक्ष का हंगामा, खड़गे बोले- पहले प्रधानमंत्री इस्तीफा दें, फिर होगी चर्चा

Parliament के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा और लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। इस दौरान राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री इस्तीफा दें, उसके बाद ही किसी मुद्दे पर चर्चा होगी। सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के कई सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। काले कपड़े पहनकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी भी की। राज्यसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने अपने मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ने पर सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। खड़गे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार चर्चा से बच रही है। लोकसभा में भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। स्थिति को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है, जबकि सरकार सदन की कार्यवाही चलाने की कोशिश कर रही है। अब सभी की नजर बुधवार को होने वाली कार्यवाही पर रहेगी कि क्या संसद में गतिरोध खत्म होगा या फिर हंगामा जारी रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

CJP Protest टकराव नहीं संवाद चाहता संगठन, सरकार के सामने रखी बातचीत की पेशकश

दिल्ली में जारी CJP Protest के बीच संगठन ने बड़ा बयान देकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। CJP ने कहा है कि वह सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए एक Neutral Place (निष्पक्ष स्थान) तय किया जाना चाहिए, जहां दोनों पक्ष शांतिपूर्ण माहौल में अपनी बात रख सकें। प्रदर्शन के बीच आए इस बयान को आंदोलन के रुख में अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। CJP का कहना है कि उसका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना है। संगठन ने सरकार से अपील की है कि वह संवाद के लिए आगे आए और एक उचित मंच उपलब्ध कराए। CJP ने रखा बातचीत का प्रस्ताव CJP की ओर से कहा गया कि लोकतंत्र में हर मुद्दे का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से निकाला जा सकता है। संगठन अपनी मांगों और चिंताओं को सरकार के सामने रखना चाहता है और इसके लिए वह वार्ता के लिए तैयार है। संगठन का कहना है कि बातचीत ऐसी जगह होनी चाहिए, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें। इससे चर्चा सकारात्मक माहौल में हो पाएगी और किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर किया जा सकेगा। Delhi में Protest को देखते हुए सुरक्षा सख्त CJP Protest को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने प्रदर्शन वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। अधिकारियों की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रदर्शन के दौरान यातायात और आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी कई स्तरों पर तैयारियां की गई हैं। सरकार के जवाब पर टिकी नजर CJP के बातचीत के प्रस्ताव के बाद अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है। अगर दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आते हैं तो लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों पर समाधान की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल प्रदर्शन जारी है, लेकिन CJP के नए बयान से बातचीत का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और संगठन के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ladakh मुद्दे पर गतिरोध जारी: कॉकरोच पार्टी ने सरकार को जंतर-मंतर बुलाया

Ladakh मुद्दे पर गतिरोध जारी: कॉकरोच पार्टी ने सरकार को जंतर-मंतर बुलाया

Ladakh से जुड़े मुद्दों को लेकर राजधानी दिल्ली में चल रहे आंदोलन के बीच राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कॉकरोच पार्टी ने केंद्र सरकार से सीधे जंतर-मंतर आकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की मांग की है। वहीं पार्टी प्रमुख दीपके ने सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील की है। दीपके का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो उसे प्रदर्शनकारियों के बीच आकर उनकी बातें सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए ही इस विवाद का स्थायी हल निकल सकता है। दूसरी ओर, लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक का अनशन जारी है। दीपके ने उनसे आग्रह किया कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए अनशन समाप्त करें, ताकि बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, 16 मेट्रो स्टेशन बंद आंदोलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एहतियात के तौर पर दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इन स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री और एग्जिट पर रोक लगाई गई है, जबकि कुछ स्थानों पर केवल इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रैफिक और मेट्रो से जुड़ी ताजा जानकारी जरूर जांच लें। कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया गया है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लद्दाख की मांगों पर टिकी निगाहें लद्दाख के लोगों की प्रमुख मांगों में क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा शामिल है। इन मांगों को लेकर लगातार आंदोलन जारी है और अब सभी की नजर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। फिलहाल, आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण दिल्ली के कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के जरिए जल्द ही इस गतिरोध का समाधान निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kalyan Banerjee

Parliament Monsoon Session: Kalyan Banerjee Suspended, संसद में बढ़ा Political विवाद

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) को लेकर संसद में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लोकसभा ने उन्हें पूरे मानसून सत्र (Monsoon Session) के लिए निलंबित कर दिया है। अब कल्याण बनर्जी इस सत्र की आगे की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। यह कार्रवाई सदन में उनके कथित व्यवहार और टिप्पणियों को लेकर की गई, जिसे लेकर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई थी। लोकसभा में अनुशासन और सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया। सदन में टिप्पणी को लेकर बढ़ा विवाद संसद की कार्यवाही के दौरान कल्याण बनर्जी की एक टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप लगाया गया कि उनकी भाषा सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं थी। इस मुद्दे को लेकर लोकसभा में हंगामा हुआ और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। सत्ता पक्ष ने कहा कि संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और यहां सांसदों से जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है। वहीं विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति जताई और इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा। Lok Sabha का सख्त फैसला, Monsoon Session से बाहर हुए Kalyan Banerjee मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा ने कल्याण बनर्जी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। इसके बाद वह मानसून सत्र की बची हुई अवधि में सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बन सकेंगे। संसदीय नियमों के तहत सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे कदम उठाए जाते रहे हैं। इस बार कार्रवाई TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर हुई है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। TMC के लिए बड़ा झटका, विपक्ष की रणनीति पर असर कल्याण बनर्जी TMC के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और लोकसभा में पार्टी की आवाज को मजबूती से रखने वाले सांसदों में गिने जाते हैं। उनके निलंबन के बाद संसद में TMC की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। मानसून सत्र पहले से ही कई मुद्दों को लेकर हंगामेदार बना हुआ है। ऐसे में एक प्रमुख विपक्षी सांसद का निलंबन सरकार और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को और बढ़ा सकता है। संसद के बाहर भी जारी रहेगी सियासी बहस कल्याण बनर्जी के निलंबन के बाद अब यह मामला संसद के बाहर भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकता है। विपक्ष जहां कार्रवाई को लेकर सवाल उठा सकता है, वहीं सरकार इसे सदन की गरिमा और अनुशासन से जुड़ा फैसला बता रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Anantnag

Kashmir Terror Attack: Anantnag में आतंकियों ने Police Team को बनाया निशाना

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग (Anantnag) जिले से एक बार फिर आतंकी हमले की खबर सामने आई है। Anantnag के व्यस्त लाल चौक इलाके में आतंकियों ने पुलिस टीम को निशाना बनाते हुए फायरिंग कर दी। इस हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आतंकियों की तलाश के लिए सुरक्षाबलों ने बड़ा Search Operation शुरू कर दिया है। लाल चौक में अचानक हुई आतंकी फायरिंग मिली जानकारी के अनुसार, अनंतनाग के लाल चौक इलाके में पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में हेड कॉन्स्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। पुलिस और सुरक्षाबलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे क्षेत्र को घेर लिया और आतंकियों की तलाश शुरू कर दी। Security Forces ने संभाला मोर्चा, Search Operation तेज आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमें लाल चौक और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं। सुरक्षाबल संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और आतंकियों के भागने के संभावित रास्तों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हमले में शामिल आतंकियों को पकड़ने के लिए अभियान लगातार जारी है। शहीद पुलिसकर्मी को दी जा रही श्रद्धांजलि इस हमले में हेड कॉन्स्टेबल की शहादत के बाद पुलिस विभाग और उनके परिवार में दुख का माहौल है। साथी जवानों ने अपने सहयोगी को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने साफ किया है कि आतंक फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। Anantnag Attack के बाद घाटी में बढ़ी सुरक्षा Anantnag आतंकी हमले के बाद घाटी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस, सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब सुरक्षाबल जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब हमले के पीछे की साजिश और इसमें शामिल लोगों की जानकारी जुटाने में लगी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJI Surya Kant

Cockroach Police Action Case: SC में नहीं चली याचिका, CJI Surya Kant की सख्त टिप्पणी से मचा हड़कंप

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक अनोखे मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI Surya Kant ने सख्त टिप्पणी की। कॉकरोचों से जुड़ी कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर Supreme Court ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने वीडियो दिखाने की बात कही तो CJI Surya Kant ने कहा कि अदालत के पास ऐसे वीडियो देखने का समय नहीं है। CJI सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट का समय बेहद कीमती है और इसे ऐसे मामलों में खर्च नहीं किया जा सकता। उन्होंने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि अदालत में आने से पहले यह देखना जरूरी है कि मामला वास्तव में न्यायिक हस्तक्षेप के योग्य है या नहीं। क्या है Cockroach Police Action Case? यह मामला कॉकरोचों को लेकर की गई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। याचिका के समर्थन में कुछ वीडियो और घटनाओं का हवाला दिया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के सामने वीडियो पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन CJI सूर्यकांत ने इसे देखने से इनकार कर दिया। CJI Surya Kant ने क्यों लगाई फटकार? मामले की सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि Supreme Court के सामने देशभर के कई गंभीर और महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं। ऐसे में अदालत का समय उन मामलों में लगाया जाना चाहिए, जहां लोगों के अधिकारों और न्याय से जुड़े बड़े मुद्दे शामिल हों। उन्होंने कहा कि हर मामले में वीडियो या अन्य सामग्री देखने के लिए कोर्ट के पास पर्याप्त समय नहीं होता। अदालत में आने वाली हर याचिका की गंभीरता और जरूरत को समझना जरूरी है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया मामला कॉकरोचों से जुड़े इस केस ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। कई यूजर्स ने इसे असामान्य मामला बताया, जबकि कुछ लोगों ने CJI सूर्यकांत की टिप्पणी को न्यायपालिका के बढ़ते काम के दबाव से जोड़कर देखा। Supreme Court का संदेश इस मामले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अदालतों का समय बेहद महत्वपूर्ण है। न्यायपालिका का उद्देश्य गंभीर मामलों में प्रभावी न्याय देना है, इसलिए जरूरी है कि अदालत में वही मामले लाए जाएं जिनमें वास्तविक कानूनी जरूरत हो। CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद Cockroach Case, Supreme Court Hearing और Court Time Management को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sharad Pawar

Delhi Politics Update: PM मोदी से मिले Sharad Pawar, CJP Chief से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) की मुलाकात ने एक बार फिर देश की राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस बैठक में शरद पवार के साथ उनकी बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले भी मौजूद रहीं। खास बात यह है कि इससे एक दिन पहले शरद पवार ने CJP प्रमुख दीपके से भी मुलाकात की थी, जिसके बाद इन बैठकों को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। प्रधानमंत्री से हुई अहम मुलाकात बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शरद पवार के बीच मुलाकात हुई। बैठक में सुप्रिया सुले की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि, मुलाकात के बाद किसी भी पक्ष ने बातचीत के एजेंडे या किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देश और महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। CJP प्रमुख से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें प्रधानमंत्री से मिलने से ठीक एक दिन पहले शरद पवार ने CJP प्रमुख दीपके से भी मुलाकात की थी। लगातार दो दिनों में हुई इन बैठकों ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि, इन मुलाकातों के बीच किसी तरह का सीधा संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जरूर है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और महाराष्ट्र के समीकरणों पर इन मुलाकातों का असर दिखाई दे सकता है। आधिकारिक बयान का इंतजार अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और एनसीपी (एसपी) की ओर से बैठक के विषय में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बातचीत में कौन-कौन से मुद्दे शामिल रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि संसद के मौजूदा सत्र, महाराष्ट्र की राजनीति, केंद्र और राज्यों से जुड़े विषयों सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक जानकारी आने तक इसे केवल संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। सुप्रिया सुले की मौजूदगी भी रही चर्चा में बैठक में सुप्रिया सुले की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह पिछले कुछ समय से पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की राजनीति में भी लगातार भागीदारी निभा रही हैं। क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह बैठक? शरद पवार भारतीय राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब संसद का सत्र जारी है और देश की राजनीति कई महत्वपूर्ण मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है। ऐसे में इस बैठक को लेकर स्वाभाविक रूप से राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ गई है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है। तब तक इस बैठक के राजनीतिक मायनों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

CJP Protest in Delhi: सुरक्षा के बीच 16 Metro Station बंद, बंगाल से पहुंचे 2 हजार CRPF जवान

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में CJP (Committee for Justice and Peace) के प्रदर्शन ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। एहतियात के तौर पर 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल से करीब 2,000 CRPF जवानों को दिल्ली बुलाया गया है। इस बीच आंदोलन से जुड़े पक्षों की ओर से बातचीत की संभावना भी जताई गई है, जिससे हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है। राजधानी में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह अलर्ट पर हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और सरकारी भवनों, संसद क्षेत्र तथा प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी और क्विक रिस्पॉन्स टीमों की भी मदद ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। 16 Metro Station बंद, यात्रियों को पहले से यात्रा की सलाह प्रदर्शन के असर को देखते हुए दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। कुछ स्टेशनों पर ट्रेनें गुजर रही हैं, लेकिन वहां यात्रियों के चढ़ने और उतरने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। ऐसे में रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक और मेट्रो की ताजा जानकारी देखने की सलाह दी गई है। बंगाल से पहुंचे 2 हजार CRPF जवान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल से लगभग 2,000 CRPF जवान दिल्ली भेजे गए हैं। इन जवानों को प्रदर्शन स्थलों, संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों के आसपास तैनात किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियाती है और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बना हुआ है गतिरोध प्रदर्शन में शामिल संगठनों का कहना है कि वे अपनी लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार से संवाद की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अब तक उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ, इसलिए उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बातचीत के लिए तैयार होने के संकेत घटनाक्रम के बीच ‘कॉकरोच पार्टी’ की ओर से बयान आया है कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है। पार्टी का कहना है कि विवाद का समाधान केवल संवाद के जरिए ही संभव है। हालांकि सरकार की ओर से औपचारिक बातचीत कब शुरू होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रशासन की अपील दिल्ली पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि नागरिक केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और यात्रा के दौरान ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें। फिलहाल राजधानी में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में बातचीत आगे बढ़ती है या प्रदर्शन तेज होता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sikkim

Sikkim Tunnel Accident: लैंडस्लाइड के बाद 20 मजदूरों की मौत, Methane Gas से Rescue Operation प्रभावित

Sikkim में निर्माणाधीन टनल पर हुआ भीषण Landslide पूरे देश को झकझोर देने वाला साबित हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 5 मजदूर अब भी लापता हैं। कई दिनों से लगातार चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद खराब मौसम, भारी मलबा और टनल के भीतर फैली मीथेन गैस (Methane Gas) राहत कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। रेस्क्यू टीम के अधिकारियों का कहना है कि हर पल जोखिम बढ़ रहा है, लेकिन लापता मजदूरों तक पहुंचने के लिए अभियान बिना रुके जारी है। कैसे हुआ Sikkim Tunnel Landslide? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्र में अचानक भूस्खलन हुआ। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा निर्माणाधीन टनल के प्रवेश मार्ग पर आ गिरा। उस समय कई मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे और बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, NDRF, SDRF और भारतीय सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत अभियान शुरू किया गया। 20 शव मिले, 5 मजदूरों की तलाश अभी जारी रेस्क्यू टीम ने लगातार कई दिनों तक मलबा हटाने के बाद अब तक 20 मजदूरों के शव बाहर निकाले हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी 5 मजदूरों के टनल के भीतर फंसे होने की आशंका है। हालांकि समय बीतने के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं, लेकिन बचाव दल का कहना है कि जब तक अंतिम मजदूर का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। Methane Gas बनी सबसे बड़ी चुनौती रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टनल के अंदर मीथेन गैस की मौजूदगी ने हालात और गंभीर बना दिए। गैस का स्तर बढ़ने से कुछ बचावकर्मियों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई कर्मी बेहोश हो गए। इसके बाद ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोककर टनल में गैस की जांच की गई। अब बचाव दल विशेष ऑक्सीजन उपकरण, गैस डिटेक्टर और सुरक्षा किट के साथ अंदर प्रवेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद टनलों में मीथेन गैस का जमा होना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और विस्फोट का खतरा भी बना रहता है। युद्धस्तर पर चल रहा Rescue Operation घटनास्थल पर NDRF, SDRF, भारतीय सेना, पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम लगातार काम कर रही है। भारी मशीनों और आधुनिक ड्रिलिंग उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। लगातार बारिश और पहाड़ी इलाके की कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम चौबीसों घंटे अभियान में जुटी हुई है। सरकार ने मांगी पूरी रिपोर्ट हादसे के बाद राज्य सरकार ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पूरे देश की नजर Rescue Operation पर सिक्किम का यह हादसा केवल एक निर्माण दुर्घटना नहीं, बल्कि उन मजदूर परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। देशभर से लोग लापता मजदूरों के सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और प्रशासन का कहना है कि मौसम चाहे जितनी चुनौती पेश करे, अंतिम मजदूर तक पहुंचने की हर संभव कोशिश की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon Session

Monsoon Session Black Dress में दिखा विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, Rahul Gandhi ने सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) में सियासी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। विपक्ष ने अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए मंगलवार को संसद परिसर में शक्ति प्रदर्शन किया। INDIA गठबंधन के लगभग सभी सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की। विपक्ष का कहना है कि देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर संसद में खुलकर चर्चा नहीं हो रही है। इसी को लेकर सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और सरकार से जवाब देने की मांग उठाई। PM आवास मार्च के बाद Protest हुआ और तेज संसद में विरोध प्रदर्शन से पहले विपक्षी दल प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाल चुके हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें रास्ते में रोक दिया गया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सड़क पर धरना दिया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे। अब उसी विरोध का दूसरा चरण संसद परिसर में देखने को मिला, जहां विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर अपना संदेश देने की कोशिश की। Black Dress में दिखी विपक्ष की एकजुटता मंगलवार सुबह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे। नेताओं ने संसद परिसर में नारेबाजी की और सरकार से विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग दोहराई। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव पूरे प्रदर्शन के दौरान सांसदों के बीच मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। किन मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना? विपक्ष का आरोप है कि बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, चुनाव प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। विपक्ष चाहता है कि इन मुद्दों पर सरकार सदन में विस्तृत जवाब दे। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह संसदीय नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन लगातार हंगामे से सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। संसद की कार्यवाही पर पड़ा असर विपक्ष के प्रदर्शन का असर संसद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। लोकसभा और राज्यसभा में कई बार हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही बाधित रही। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। आगे क्या होगा? INDIA गठबंधन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक रुख नहीं अपनाती है तो संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून सत्र के और अधिक हंगामेदार रहने की संभावना है। राजनीतिक नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कब खत्म होगा और संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चल पाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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