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LPG Supply Update: गैस की नहीं होगी किल्लत | Government का नया प्लान, इन लोगों को मिलेगा Priority Cylinder

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देशभर में LPG सिलेंडर की संभावित कमी को लेकर चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे जरूरतमंद लोगों तक गैस की सप्लाई बिना रुकावट के पहुंच सके।

नई योजना के तहत अब LPG सिलेंडर की डिलीवरी को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि कुछ खास वर्गों को सबसे पहले गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

किन लोगों को मिलेगी सबसे पहले LPG?

सरकारी योजना के अनुसार, उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवार, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग और जिनके पास गैस का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है—उन्हें सबसे पहले LPG सिलेंडर दिया जाएगा। इसके अलावा अस्पतालों, छोटे ढाबों और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।

क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

हाल के समय में बढ़ती मांग और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई जगहों पर LPG की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही थी। ऐसे में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है कि कोई भी जरूरतमंद गैस से वंचित न रहे।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

इस नई व्यवस्था में गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पहले प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध कराएं। इसके बाद सामान्य उपभोक्ताओं की बारी आएगी। साथ ही, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए सप्लाई पर नजर रखी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को थोड़ी देरी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसका मकसद है कि जिनके लिए LPG बेहद जरूरी है, उन्हें समय पर सिलेंडर मिल सके।

Manya

manyajadoun42@gmail.com

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फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री की 17 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, लोकायुक्त जांच में आय से 627% अधिक संपत्ति मिली

मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल के खिलाफ लोकायुक्त की जांच में आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़े खुलासे हुए हैं। इंदौर, पीथमपुर, धार और मुरैना समेत 9 ठिकानों पर हुई छापामार कार्रवाई के बाद लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच में उनके और उनके परिवार के नाम पर करीब 17 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति और निवेश का पता लगाया है। लोकायुक्त के अनुसार, शिवराम सेमिल ने 33 वर्षों की सरकारी सेवा में लगभग 2 करोड़ रुपये की वैध आय अर्जित की, जबकि अब तक सामने आई संपत्तियों और निवेश का मूल्य करीब 17 करोड़ रुपये आंका गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह उनकी वैध आय से लगभग 627 प्रतिशत अधिक है। जांच के दौरान पीथमपुर सेक्टर-3 स्थित ‘शुभम इलेक्ट्रिकल’ नामक ट्रांसफॉर्मर निर्माण इकाई मिली, जिसकी अनुमानित कीमत 1.06 करोड़ रुपये है। इसी क्षेत्र में एक अन्य औद्योगिक इकाई (करीब 71 लाख रुपये) और धार जिले के उज्जैनी औद्योगिक क्षेत्र में एसएस इलेक्ट्रिकल्स नामक फैक्ट्री भी मिली, जिसकी अनुमानित कीमत 2.06 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा कृष्णा पावर नाम से निर्माणाधीन फैक्ट्री में भी करीब 10 लाख रुपये का निवेश सामने आया है। लोकायुक्त को इंदौर के अंजली नगर में फैक्ट्री और कार्यालय परिसर, पीथमपुर में मशीनरी व औद्योगिक निवेश, मुरैना में मकान, इंदौर की सिलिकॉन सिटी में आलीशान तीन मंजिला मकान, एक अन्य निर्माणाधीन भवन, लग्जरी कार और अन्य अचल संपत्तियों की जानकारी भी मिली है। सिलिकॉन सिटी स्थित निर्माणाधीन भवन पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक आकलन है। संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद आय से अधिक संपत्ति के मामले में नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

भोपाल में अरेरा हिल्स थाना प्रभारी और आरक्षक निलंबित, महिला से अनैतिक संबंध के आरोपों पर विभागीय जांच शुरू

भोपाल पुलिस कमिश्नर ने अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्रवाई एक युवक की शिकायत के बाद की गई, जिसमें थाना प्रभारी पर शिकायतकर्ता की पत्नी से कथित अनैतिक संबंध रखने, पद का दुरुपयोग करने और आरक्षक पर सहयोग करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत के साथ कुछ कथित साक्ष्य भी सौंपे थे। प्रारंभिक परीक्षण में मामला गंभीर और दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरक्षक नंदकिशोर को थाना प्रभारी की गतिविधियों की जानकारी थी और उसने महिला पर दबाव बनाने में भी कथित भूमिका निभाई। इन आरोपों की सत्यता की जांच अब विभागीय स्तर पर की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी सुनील शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। जांच में पुलिस आचरण नियमों के उल्लंघन, पद के दुरुपयोग और अन्य आरोपों की विस्तृत पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। डीसीपी विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत पर प्रारंभिक जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

16 साल बाद भारत लौट सकते हैं IPL के संस्थापक ललित मोदी, FEMA मामले में ट्रिब्यूनल से मिली बड़ी राहत

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के संस्थापक ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटने की तैयारी में हैं। 16 जुलाई को अपीलीय ट्रिब्यूनल ने IPL 2009 के दक्षिण अफ्रीका आयोजन से जुड़े विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) मामले में उन्हें बड़ी राहत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया। फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि अब उनकी भारत वापसी का रास्ता साफ हो गया है और वह इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में भारत लौट सकते हैं। यह मामला 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान IPL को भारत से दक्षिण अफ्रीका स्थानांतरित किए जाने से जुड़ा था। टूर्नामेंट के आयोजन के लिए BCCI ने दक्षिण अफ्रीका करीब 243.45 करोड़ रुपये भेजे थे। ED का आरोप था कि यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्व मंजूरी के बिना विदेश भेजी गई, जिससे FEMA का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर 2018 में ललित मोदी पर 10.65 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि दक्षिण अफ्रीका भेजी गई राशि करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन थी, न कि कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन। ऐसे में इसके लिए RBI की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं थी। साथ ही ट्रिब्यूनल ने माना कि ललित मोदी व्यक्तिगत रूप से BCCI की ओर से FEMA अनुपालन के लिए जिम्मेदार नहीं थे और उनके पास वे वित्तीय अधिकार भी नहीं थे, जिनका दावा ED ने किया था। हालांकि यह राहत केवल IPL 2009 के FEMA मामले तक सीमित है। ललित मोदी के खिलाफ IPL ब्रॉडकास्ट राइट्स, मनी लॉन्ड्रिंग और BCCI की अनुशासनात्मक कार्रवाई सहित अन्य मामले अब भी अलग-अलग स्तर पर लंबित हैं। 2013 में BCCI ने उन्हें क्रिकेट से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। ललित मोदी वर्ष 2010 से लंदन में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अक्टूबर में बच्चे को जन्म देने वाली है, जिसके बाद वह भारत लौटने की योजना बना रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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