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Pune शादी से पहले युवक की मौत का सच! Lohagad Fort Case में Fiancée समेत 8 लोगों पर हत्या का आरोप

Pune में लोहागढ़ किले (Lohagad Fort) पर हुई एक युवक की मौत ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। शुरुआत में इसे ट्रेकिंग के दौरान हुआ एक दर्दनाक हादसा माना गया था, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो मामला पूरी तरह बदल गया। अब इस केस में मृतक की मंगेतर (Fiancée) समेत आठ लोगों के खिलाफ हत्या (Murder) और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है। इस घटनाक्रम ने लोगों को चर्चित “सोनम केस” की याद दिला दी है, हालांकि पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं। क्या है पूरा मामला? मृतक की पहचान केतन विशाल अग्रवाल (26) के रूप में हुई है। वह पुणे के गहुंजे इलाके का रहने वाला था और परिवार के रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा हुआ था। कुछ महीनों बाद उसकी शादी होने वाली थी और घर में तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। 14 जून को केतन अपनी मंगेतर का जन्मदिन मनाने के लिए दोस्तों के साथ लोनावला स्थित प्रसिद्ध लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के लिए पहुंचा था। बताया गया कि ट्रेकिंग के दौरान फोटो खींचते समय उसका संतुलन बिगड़ गया और वह करीब 400 फीट गहरी खाई में गिर गया। रेस्क्यू टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद उसका शव बाहर निकाला था। शुरुआती जांच में इसे एक दुर्घटना माना गया। जांच में आया बड़ा Twist घटना के बाद पुलिस ने मौके से मिले सबूत, मोबाइल रिकॉर्ड, साथ मौजूद लोगों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों की गहन जांच की। जांच के दौरान कई ऐसी बातें सामने आईं, जिनसे पुलिस को शक हुआ कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। इसी आधार पर पुलिस ने मृतक की मंगेतर, उसके एक करीबी दोस्त और अन्य सहयोगियों सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ हत्या (IPC की संबंधित धाराएं) और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है। फिलहाल सभी आरोपों की जांच की जा रही है और पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर पहलू की पड़ताल कर रही है। शादी की खुशियां पलभर में बदलीं मातम में परिजनों के मुताबिक, केतन की शादी जल्द होने वाली थी। घर में विवाह की तैयारियां चल रही थीं और परिवार खुशियों में डूबा हुआ था। लेकिन लोहागढ़ किले पर हुई इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। पहले इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा माना गया, लेकिन अब हत्या के केस दर्ज होने के बाद परिवार न्याय की मांग कर रहा है। ‘सोनम केस’ से क्यों हो रही तुलना? सोशल मीडिया पर कई लोग इस मामले की तुलना चर्चित ‘सोनम केस’ से कर रहे हैं। वजह यह है कि दोनों मामलों में शुरुआत में दुर्घटना की बात सामने आई थी और बाद में हत्या की आशंका ने जांच की दिशा बदल दी। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों का आपस में कोई संबंध नहीं है और पुणे मामले की जांच पूरी तरह स्वतंत्र रूप से की जा रही है। पुलिस ने क्या कहा? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और जांच पूरी होने का इंतजार करें।
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UBT

Maharashtra Politics: Shiv Sena UBT में बढ़ी बेचैनी, उद्धव ठाकरे की अहम बैठक से 4 नेता रहे नदारद

शिवसेना (UBT) को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसके छह लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इन सांसदों ने पहले अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया पूरी की और उसके बाद शिंदे गुट में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। एकनाथ शिंदे ने इसे अपनी पार्टी की मजबूती बताते हुए कहा कि उनकी शिवसेना लगातार विस्तार कर रही है। वहीं, शिंदे गुट के कई नेताओं ने संकेत दिए कि आने वाले समय में और भी नेता उनके संपर्क में हैं। उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुंचे चार जनप्रतिनिधि सांसदों के जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने विधानसभा के मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए पार्टी के सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक बुलाई। इस बैठक का मकसद संगठन की एकजुटता दिखाना और विपक्ष की भूमिका को मजबूत करना था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में तीन विधायक और एक एमएलसी मौजूद नहीं रहे। इनमें संजय पोटनिस, राहुल पाटिल, डेरकर और विधान परिषद सदस्य सुनील शिंदे का नाम सामने आया। उनकी गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सभी ने पहले ही अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दे दी थी और इसके पीछे व्यक्तिगत या पूर्व निर्धारित कार्यक्रम थे। लेकिन विपक्ष इस दलील से संतुष्ट नहीं दिख रहा है। ‘Operation Tiger’ की फिर होने लगी चर्चा छह सांसदों के जाने और अब विधायकों की गैरहाजिरी के बाद एक बार फिर “Operation Tiger” चर्चा का विषय बन गया है। शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि यह राजनीतिक अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरे उनके साथ आ सकते हैं। हालांकि, शिवसेना (UBT) की ओर से इन दावों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी का कहना है कि कुछ नेताओं की अनुपस्थिति को बगावत से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी बैठक में मौजूद नेताओं के साथ उद्धव ठाकरे ने आगामी विधानसभा सत्र की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। पार्टी ने फैसला किया है कि किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, महंगाई, कानून-व्यवस्था और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना ही इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। क्या फिर बदलेंगे महाराष्ट्र की राजनीति के समीकरण? साल 2022 में हुई बड़ी बगावत के बाद शिवसेना (UBT) लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। छह सांसदों का साथ छोड़ना और उसके तुरंत बाद महत्वपूर्ण बैठक में चार जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दी है। हालांकि अभी तक किसी विधायक ने पार्टी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tamil Nadu की राजनीति में नई पारी शुरू कर चुके अभिनेता से नेता बने Vijay ने विधानसभा में अपना पहला बड़ा भाषण देकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

Tamil Nadu Vidhan Sabha में CM Vijay का पहला बड़ा भाषण

Tamil Nadu की राजनीति में नई पारी शुरू कर चुके अभिनेता से नेता बने Vijay ने विधानसभा में अपना पहला बड़ा भाषण देकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अपने संबोधन में उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA), करूर भगदड़ हादसे और राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ प्रबंधन जैसे कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। विजय ने कहा कि जनता की सुरक्षा किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने करूर में हुई भगदड़ की घटना का जिक्र करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि ऐसे हादसों से सबक लेकर भविष्य में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। अपने भाषण में विजय ने राजनीतिक आयोजनों और फिल्मी कार्यक्रमों में बढ़ती भीड़ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चाहे कोई राजनीतिक रैली हो, धार्मिक आयोजन हो या किसी अभिनेता का कार्यक्रम, लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से ऐसे आयोजनों के लिए मजबूत सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था बनाने की मांग की। CAA के मुद्दे पर बोलते हुए विजय ने अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कानून और नीतियां ऐसी होनी चाहिएं जो सभी नागरिकों में भरोसा पैदा करें और समाज में किसी तरह की आशंका या विभाजन की भावना न बढ़े। विधानसभा में विजय का यह भाषण इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह उनके राजनीतिक सफर के शुरुआती महत्वपूर्ण संबोधनों में से एक है। भाषण के दौरान उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों, सामाजिक सद्भाव और सुशासन पर जोर दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय ने अपने पहले बड़े विधानसभा भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे केवल फिल्मी दुनिया के लोकप्रिय चेहरा नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों पर मुखर नेता की भूमिका भी निभाना चाहते हैं। अधिक समाचार और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें Deshharpal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Varanasi में 17 अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का खुलासा, मानसिक रोगियों को जंजीरों से बांधकर रखने का आरोप

Varanasi में 17 अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का खुलासा, मानसिक रोगियों को जंजीरों से बांधकर रखने का आरोप

उत्तर प्रदेश के Varanasi में चल रहे 17 अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इन केंद्रों में मानसिक रोगियों और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने की शिकायतें मिली हैं। जांच के दौरान पता चला कि कई मरीजों को जंजीरों से बांधकर रखा गया था, जिससे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न नशा मुक्ति केंद्रों पर छापेमारी की। इस दौरान कई केंद्र बिना किसी वैध अनुमति और आवश्यक सुविधाओं के संचालित होते पाए गए। अधिकारियों के अनुसार, इन केंद्रों में मरीजों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की भी कमी थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कुछ केंद्रों में मानसिक रूप से बीमार मरीजों को जंजीरों में जकड़कर रखा गया था। कई मरीजों की स्थिति बेहद दयनीय मिली। कुछ परिजनों ने बताया कि वे अपने प्रियजनों के इलाज की उम्मीद लेकर इन केंद्रों में पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें उचित इलाज के बजाय प्रताड़ना झेलनी पड़ी। प्रशासन ने सभी 17 अवैध केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने और उनके बेहतर उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नशे और मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को संवेदनशील देखभाल, चिकित्सकीय उपचार और पारिवारिक सहयोग की जरूरत होती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। इस मामले ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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George Kurian

George Kurian राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया स्वीकार

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन (George Kurian) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन ने उनके इस्तीफे को मंजूरी भी दे दी है। इस घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार में संभावित Cabinet Reshuffle को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद लिया बड़ा फैसला जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनके मंत्री पद छोड़ने की चर्चा पहले से चल रही थी। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें नए राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया था। इसके बाद माना जा रहा था कि वे जल्द ही मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ इस पर आधिकारिक मुहर लग गई है। किन मंत्रालयों की संभाल रहे थे जिम्मेदारी? मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री (Minister of State) के रूप में कार्य कर रहे थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई। Cabinet Reshuffle की चर्चाओं को मिला बल जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार कुछ मंत्रालयों में नए चेहरों को जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि फिलहाल सरकार या भाजपा नेतृत्व की ओर से किसी नए मंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है। भाजपा संगठन में मिल सकती है नई जिम्मेदारी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे जॉर्ज कुरियन को भविष्य में पार्टी के भीतर कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब आगे क्या? राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार उनकी जगह किसे जिम्मेदारी सौंपती है। यदि निकट भविष्य में कैबिनेट विस्तार होता है, तो कई मंत्रालयों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रमुख बातें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lucknow

Lucknow Fire Tragedy: आग से हिला शहर, 4 अफसर सस्पेंड और 4 आरोपी गिरफ्तार

Lucknow से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर की एक अवैध रिहायशी/कमर्शियल बिल्डिंग में भीषण आग लगने से करीब 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा सिर्फ एक आग नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर चूक और लंबे समय से चल रही लापरवाही की कहानी भी उजागर करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग धुएं और आग की चपेट में आ गई। कैसे हुआ Lucknow Fire Incident? शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, लेकिन फाइनल रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद इतने बड़े नुकसान को टाला जा सकता था। बड़ा खुलासा: 2016 से अवैध थी बिल्डिंग इस हादसे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह बिल्डिंग अवैध रूप से बनी हुई थी।सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, इसे 2016 में ही गिराने (demolition) का आदेश जारी किया गया था, लेकिन सालों तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी लापरवाही ने आज एक बड़े अग्निकांड को जन्म दिया। Rescue Operation: राहत और बचाव कार्य घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे।काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन की सख्त कार्रवाई हादसे के बाद प्रशासन ने तेजी से कदम उठाते हुए कार्रवाई की: लोगों में गुस्सा और दर्द इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा और दुख दोनों है।लोग सवाल उठा रहे हैं कि: यह हादसा उन परिवारों के लिए कभी न भरने वाला दर्द छोड़ गया है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lucknow

Lucknow Fire Breaking इंस्टीट्यूट में आग से मची अफरा-तफरी, कई छात्र घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक इंस्टीट्यूट में अचानक लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद छात्र-छात्राएं और स्टाफ घबरा गए। धुआं भरते ही बिगड़े हालात प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही आग लगी, पूरे भवन में घना धुआं फैल गया और बाहर निकलने के रास्ते बंद होने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती इस हादसे में कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। एक छात्र के नीचे गिरने से लोहे की ग्रिल से टकराने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mayawati

UP Election 2027: Mayawati का बड़ा Brahmin दांव, BSP ने घोषित किए 2 उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने एक बार फिर अपने पुराने दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले पर भरोसा जताते हुए बड़ा चुनावी संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण समाज का सम्मान और हित बसपा में ही सुरक्षित है।” इसी के साथ पार्टी ने दो ब्राह्मण चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इस कदम को आगामी चुनावों के लिए बसपा की नई रणनीति माना जा रहा है। चुनाव से पहले Mayawati का बड़ा राजनीतिक दांव मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि बसपा ही ऐसी पार्टी है जिसने सत्ता में रहते हुए सभी वर्गों को समान सम्मान और भागीदारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान ब्राह्मण समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिला और पार्टी आज भी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती एक बार फिर 2007 के सफल दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को दोहराने की कोशिश कर रही हैं। इसी रणनीति ने उस समय बसपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। बसपा ने घोषित किए दो ब्राह्मण चेहरे पार्टी ने फिलहाल दो विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। बसपा की संगठनात्मक परंपरा के अनुसार, विधानसभा प्रभारी को बाद में उम्मीदवार बनाया जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है। पार्टी जल्द ही अन्य सीटों पर भी उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। क्या सपा की बढ़ सकती है मुश्किल? मायावती ने अपने बयान में बिना नाम लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा द्वारा ब्राह्मण उम्मीदवारों को आगे लाने से विरोधी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बसपा दलित और ब्राह्मण वोटों को एक साथ जोड़ने में सफल रहती है, तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। फिलहाल सपा PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में बसपा का यह नया कदम मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बसपा की नई रणनीति बसपा ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर यह संकेत दिया है कि पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की तैयारी में जुट चुकी है। पार्टी की कोशिश केवल अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि ब्राह्मण, सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों को भी अपने साथ जोड़ने की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सामाजिक समीकरण मजबूत होता है, तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा रोचक हो सकता है। आने वाले महीनों में बसपा की अगली उम्मीदवार सूची और मायावती की चुनावी रणनीति पर सभी दलों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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West Bengal

West Bengal Budget DA में इजाफा, महिलाओं के लिए Free Bus Service और 1 लाख सरकारी नौकरियां

West Bengal सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए सरकारी कर्मचारियों, महिलाओं, युवाओं और आम लोगों के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। विधानसभा चुनाव से पहले आए इस बजट को राज्य सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। DA Hike, महिलाओं के लिए Free Bus Travel, 1 लाख सरकारी नौकरियां और सामाजिक कल्याण योजनाओं के विस्तार जैसे फैसले इस बजट की सबसे बड़ी खासियत रहे। सरकार का दावा है कि इन घोषणाओं से राज्य में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, महिलाओं को आर्थिक राहत मिलेगी और आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचेगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए DA में बढ़ोतरी बजट में सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत देते हुए महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया। बढ़ती महंगाई के बीच इस फैसले से लाखों कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों की आय में इजाफा होगा। हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि केंद्र और राज्य के DA के बीच अभी भी बड़ा अंतर है, इसलिए आगे भी इस मुद्दे पर उनकी मांग जारी रहेगी। महिलाओं को मिलेगा Free Bus Travel महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्य संचालित बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा की है। यह योजना पूरे पश्चिम बंगाल में लागू होगी। शुरुआती दौर में महिलाएं पहचान पत्र दिखाकर यात्रा कर सकेंगी, जबकि बाद में QR Code आधारित स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे लाखों कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को हर महीने यात्रा खर्च में राहत मिलेगी। युवाओं के लिए 1 लाख सरकारी नौकरियों का ऐलान रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़ा दांव खेला है। बजट में 1 लाख नई सरकारी नौकरियां देने की घोषणा की गई है। विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों पर चरणबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और सरकारी सेवाओं में भी आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं पर बढ़ा फोकस इस बार के बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है। महिला सशक्तिकरण, किसानों के कल्याण और गरीब परिवारों को राहत देने वाली योजनाओं के लिए भी आवंटन बढ़ाया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि विकास और जनकल्याण दोनों को साथ लेकर चलने की रणनीति के तहत यह बजट तैयार किया गया है। Budget 2026 की बड़ी घोषणाएं चुनाव से पहले सरकार का बड़ा दांव राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पेश किया गया यह बजट कर्मचारियों, महिलाओं और युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। महंगाई भत्ता बढ़ाने, मुफ्त बस यात्रा और सरकारी नौकरियों जैसी घोषणाएं सीधे तौर पर बड़ी आबादी को प्रभावित करेंगी। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Update: देश में दूसरा सबसे सूखा June, 42% कम Rainfall; MP-UP में Heatwave Alert

इस साल जून का महीना मौसम (Weather) के लिहाज से कई मायनों में असामान्य साबित हो रहा है। देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं हो पाया है। इसका नतीजा यह है कि अब तक पूरे देश में सामान्य से करीब 42 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश की स्थिति में बड़ा सुधार नहीं हुआ, तो यह जून पिछले कई दशकों का दूसरा सबसे सूखा जून बन सकता है। बारिश की कमी का असर अब केवल मौसम तक सीमित नहीं है। खेती, पेयजल, जलाशयों के जलस्तर और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी इसका प्रभाव साफ दिखाई देने लगा है। कई राज्यों में बारिश का इंतजार, खेतों में बढ़ी चिंता देश के कई हिस्सों में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई का समय निकल रहा है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई कई इलाकों में प्रभावित हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून जल्द रफ्तार नहीं पकड़ता, तो इसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। MP और UP में फिर बढ़ेगी तपिश मानसून की धीमी चाल के कारण मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर गर्मी का असर बढ़ गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दोनों राज्यों के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) चलने की चेतावनी जारी की है। दिन के समय तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव करने की सलाह दी है। Rajasthan में ओलावृष्टि ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल एक ओर देश के कई हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं राजस्थान के कुछ इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी, गरज-चमक और ओलावृष्टि दर्ज की गई। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। हालांकि, ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसलों और बागवानी को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। जलाशयों का स्तर भी चिंता का कारण बारिश में कमी का असर देश के कई प्रमुख जलाशयों पर भी दिखने लगा है। कई बांधों और जलाशयों में जलस्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में सिंचाई और पेयजल की चुनौती बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून का असर बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन पर भी पड़ सकता है। IMD का ताजा Forecast मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ सकता है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना है, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में अभी भी सामान्य से कम बारिश रहने के आसार हैं। कुछ राज्यों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोगों को फिलहाल गर्मी और लू से राहत मिलने की संभावना कम है। आने वाले दिन रहेंगे अहम मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जून के अंतिम दिनों और जुलाई की शुरुआत में मानसून की रफ्तार पर सभी की नजर रहेगी। यदि बारिश सामान्य होती है, तो खेती और जल संसाधनों को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि बारिश में देरी जारी रही, तो इसका असर कृषि, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर और गहरा हो सकता है। फिलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, कहीं लू से जूझ रहे हैं और कहीं ओलावृष्टि किसानों की चिंता बढ़ा रही है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

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