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Stock Market Crash: 10 मिनट में ₹18 लाख करोड़ की डूबत – Investors को संभलने का मौका तक नहीं मिला

सोमवार, 7 अप्रैल 2025 को भारतीय शेयर बाजार में अचानक आई भारी गिरावट ने निवेशकों को झकझोर कर रख दिया। बाजार खुलते ही सिर्फ 10 मिनट में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹18 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। ये गिरावट इतनी तेज थी कि कई निवेशक बाजार को समझने से पहले ही भारी नुकसान झेल गए। कैसे हुआ इतना बड़ा नुकसान? बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) शुक्रवार को ₹4,04 लाख करोड़ था, जो सोमवार को सिर्फ 10 मिनट के भीतर घटकर ₹3,86 लाख करोड़ पर पहुंच गया। यानी कुल ₹18,07,639 करोड़ की संपत्ति महज कुछ मिनटों में वाष्पित हो गई। इस गिरावट की वजहें वैश्विक स्तर पर फैली चिंता से जुड़ी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा घोषित नए और सख्त टैरिफ, दुनिया भर के निवेशकों के लिए झटका साबित हुए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने पहले ही महंगाई और विकास दर को लेकर चिंता जताई थी, और अब इन टैरिफ्स ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। सेक्टर्स पर असर: आईटी, मेटल और मिडकैप्स सबसे ज्यादा गिरे इस गिरावट का असर हर सेक्टर पर दिखाई दिया। बीएसई के सभी 13 प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में रहे। सबसे ज्यादा गिरावट मेटल और आईटी सेक्टर में दर्ज की गई: क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ? बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ एक शुरुआत हो सकती है। बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ में 0.30% की कटौती का अनुमान लगाया है, वहीं गोल्डमैन सैक्स ने अगले कुछ वर्षों में कॉर्पोरेट आय में 2-3% की गिरावट की आशंका जताई है। वैश्विक बाजारों की स्थिति भी चिंताजनक यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स भी 6.5% तक गिरा है, जिससे साफ है कि वैश्विक बाजारों में भी डर का माहौल है। निवेशक फिलहाल जोखिम से दूर रहना चाहते हैं और इसलिए बिकवाली का सिलसिला जारी है। निष्कर्ष: क्या निवेशकों को घबराना चाहिए? अभी बाजार में अस्थिरता का दौर है और ऐसे में घबराकर कोई भी बड़ा निर्णय लेना नुकसानदेह हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक फिलहाल धैर्य रखें, पोर्टफोलियो को दोबारा परखें और लॉन्ग टर्म दृष्टिकोण अपनाएं।
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Wall Street में भारी गिरावट

Wall Street में भारी गिरावट: Trump के tariff फैसले से Nasdaq bear market के करीब, $4 trillion का नुकसान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने के फैसले ने वॉल स्ट्रीट को हिला कर रख दिया है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंताएं और भी गहरी हो गई हैं। महज दो दिनों में अमेरिकी शेयर बाजारों से करीब 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 334 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति का नुकसान हुआ है। Nasdaq बेयर मार्केट के करीब टेक कंपनियों से जुड़ा Nasdaq Composite इंडेक्स इस गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यह इंडेक्स लगभग 4.5% से अधिक गिर चुका है, जिससे यह बेयर मार्केट के करीब पहुंच गया है। Nasdaq की यह स्थिति 2020 में कोविड-19 के दौरान आई मंदी के बाद सबसे खराब मानी जा रही है। Dow Jones और S&P 500 भी लुढ़के Dow Jones Industrial Average और S&P 500 इंडेक्स में भी भारी गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। चीन ने दी जवाबी कार्रवाई, तनाव और गहरा ट्रंप के टैरिफ के जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं पर 34% तक आयात शुल्क लगा दिया है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध और गहरा गया है, जिससे निवेशकों की बेचैनी और बढ़ गई है। मंदी का खतरा मंडराने लगा आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इन टैरिफ्स के चलते महंगाई बढ़ सकती है और इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी की स्थिति बन सकती है। इस बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी यह साफ कर दिया है कि ब्याज दरों में जल्द कोई राहत नहीं दी जाएगी, जिससे बाजार की गिरावट और तेज हो गई। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और जल्दबाज़ी में किसी भी प्रकार का बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। यह स्थिति अभी कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती है।
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सोना 3,200 डॉलर पार!

सोना 3,200 डॉलर पार! ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद रिकॉर्ड हाई, जानिए कीमतों में तेजी की वजह

गोल्ड ने फिर बनाया नया रिकॉर्ड! अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई हैं। COMEX पर सोना $3,200 के पार निकल गया, जबकि MCX पर 91,423 रुपये तक चढ़ा। इस साल अब तक सोने में 20% की बढ़त दर्ज की गई है। क्यों बढ़ी सोने की कीमतें? गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा इन्वेस्टर्स तेजी से गोल्ड ETF में निवेश कर रहे हैं। पिछले 8 हफ्तों से लगातार इनफ्लो बना हुआ है, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। घरेलू और ग्लोबल बाजार में ताजा भाव क्या आगे भी बढ़ेगी कीमत? विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेड वॉर, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महंगाई के चलते सोने की मांग बनी रहेगी। अगर फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, तो सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
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आरबीआई की नई डिप्टी गवर्नर बनीं पूनम गुप्ता

आरबीआई की नई डिप्टी गवर्नर बनीं पूनम गुप्ता, सरकार ने दी तीन साल की नियुक्ति

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को आखिरकार नया डिप्टी गवर्नर मिल गया है। सरकार ने पूनम गुप्ता को तीन साल के लिए आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी है। पूनम गुप्ता इससे पहले नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की महानिदेशक थीं। डिप्टी गवर्नर का पद खाली था जनवरी 2024 में माइकल देबव्रत पात्रा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आरबीआई का एक डिप्टी गवर्नर पद खाली था। अब सरकार ने इस अहम पद के लिए पूनम गुप्ता को चुना, जो एक जानी-मानी अर्थशास्त्री हैं और कई प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी रही हैं। कौन हैं पूनम गुप्ता? मौद्रिक नीति समिति (MPC) में होंगी अहम सदस्य आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) में अब पूनम गुप्ता भी शामिल होंगी। यह समिति रेपो रेट और अन्य मौद्रिक नीतियों से जुड़े अहम फैसले लेती है। शैक्षिक योग्यता और उपलब्धियां अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या होगा असर?
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Travel Pass

Paytm Travel ने किया Travel Pass सब्सक्रिप्शन लॉन्च, जिसमें मुफ्त रद्दीकरण, बीमा, और ₹15,200 तक की सीट बुकिंग छूट शामिल

Paytm Travel Pass: व्यवसायिक यात्रियों और फ्रीक्वेंट फ्लायर्स के लिए एक नई सुविधा भारत की प्रमुख भुगतान और वित्तीय सेवा वितरण कंपनी Paytm (One97 Communications Limited) ने हाल ही में एक नई सेवा, Paytm Travel Pass, लॉन्च की है। यह विशेष रूप से उन यात्रियों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है जो नियमित रूप से यात्रा करते हैं या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उड़ानें भरते हैं। ₹1,299 में उपलब्ध यह सब्सक्रिप्शन-आधारित पास यात्रियों को कई फायदे प्रदान करता है, जिनमें लागत में बचत, यात्रा सुरक्षा, और बदलाव की सुविधा शामिल है। Paytm Travel Pass की विशेषताएँ: Vikash Jalan, CEO – Paytm Travel, ने इस पहल पर कहा:“हमारा उद्देश्य उन यात्रियों को सेवाएँ प्रदान करना है जो अक्सर यात्रा करते हैं और व्यावसायिक यात्रियों के बढ़ते वर्ग को लक्षित कर रहे हैं। Paytm Travel Pass के साथ, यात्रियों को मुफ्त रद्दीकरण, यात्रा बीमा और सीट छूट का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा और अधिक सुखद और किफायती बनेगी। यह हमारे दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें हम यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अभिनव समाधान प्रदान कर रहे हैं।” इस नई पेशकश से यात्रियों को न केवल वित्तीय लचीलापन मिलेगा, बल्कि यात्रा की मानसिक शांति भी मिलेगी। Paytm Travel Pass एक ऐसा आदर्श समाधान बनता जा रहा है जो यात्रियों के लिए किफायती, सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है।
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1 अप्रैल से बदल गए कई नियम: टैक्स छूट, सिलेंडर सस्ता, कारें महंगी, यूनिफाइड पेंशन स्कीम शुरू

1 अप्रैल से बदल गए कई नियम: टैक्स छूट, सिलेंडर सस्ता, कारें महंगी, यूनिफाइड पेंशन स्कीम शुरू

नया महीना यानी अप्रैल 2025 कई बड़े बदलाव लेकर आया है। इन बदलावों का असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इनकम टैक्स में छूट से लेकर सिलेंडर की कीमतों में गिरावट और कारों के दाम बढ़ने तक, यहां जानिए 1 अप्रैल से लागू हुए 10 बड़े बदलाव: 1. कॉमर्शियल सिलेंडर हुआ सस्ता अगर आप होटल या रेस्तरां चलाते हैं, तो यह आपके लिए राहत की खबर है। 19 किलो वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹44.50 तक की गिरावट आई है। हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में यह अभी भी ₹803 और मुंबई में ₹802.50 पर मिल रहा है। 2. 12 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री अब नई टैक्स व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। नौकरीपेशा लोगों को 75 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलेगा, जिससे यह छूट 12.75 लाख रुपये तक हो जाएगी। 3. महिला सम्मान सेविंग्स सर्टिफिकेट स्कीम बंद महिलाओं के लिए खास महिला सम्मान सेविंग्स सर्टिफिकेट स्कीम (MSSC) को सरकार ने बंद कर दिया है। इसमें 7.5% का सालाना ब्याज मिलता था और 2 लाख रुपये तक निवेश की सीमा थी। 4. गाड़ियों की कीमतों में इजाफा अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, किआ इंडिया, हुंडई और होंडा ने अपने वाहनों की कीमतें बढ़ा दी हैं। 5. इनएक्टिव मोबाइल नंबरों पर UPI बंद अगर आपका बैंक से लिंक किया हुआ मोबाइल नंबर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो अब उस नंबर से UPI पेमेंट नहीं कर पाएंगे। ऐसे नंबर UPI सिस्टम से हटा दिए जाएंगे। 6. सीनियर सिटीजन को ब्याज पर दोगुनी टैक्स छूट अब वरिष्ठ नागरिकों को बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा राशि के ब्याज पर टैक्स छूट 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। इससे उन्हें ज्यादा बचत करने का मौका मिलेगा। 7. केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) अब नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत आने वाले केंद्रीय कर्मचारी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का लाभ उठा सकेंगे। 8. ULIP पर कैपिटल गेन टैक्स अगर आपका यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) का सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से ज्यादा है, तो अब उस पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। 9. बैंक में मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियम बदले SBI, PNB और केनरा बैंक समेत कई बैंकों ने मिनिमम बैलेंस रखने के नियमों में बदलाव किया है। अब यह बैलेंस इस बात पर निर्भर करेगा कि खाता शहरी, अर्ध-शहरी या ग्रामीण इलाके में है। न्यूनतम बैलेंस न रखने पर जुर्माना भी लग सकता है। 10. हवाई सफर हो सकता है सस्ता एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें ₹6,064.1 तक घटाई गई हैं। इससे हवाई टिकटों के दाम कम होने की संभावना है। निष्कर्ष 1 अप्रैल से लागू इन बदलावों का असर हर किसी पर पड़ेगा। कुछ मामलों में राहत मिलेगी, तो कुछ चीजें महंगी हो जाएंगी। इनकम टैक्स की छूट और पेंशन स्कीम जैसी सुविधाएं फायदेमंद साबित हो सकती हैं, जबकि कारों की कीमत बढ़ने और बैंक नियमों के बदलाव से लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। अगर आप इन परिवर्तनों के बारे में अपडेट रहना चाहते हैं, तो देश हरपाल न्यूज के साथ जुड़े रहें!
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1 अप्रैल 2025 से बदल जाएंगे ये 6 बड़े नियम: नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को मिलेगा बड़ा फायदा

1 अप्रैल 2025 से बदल जाएंगे ये 6 बड़े नियम: नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को मिलेगा बड़ा फायदा

1 अप्रैल 2025 से नया बजट लागू हो रहा है। 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में कई बड़े बदलाव किए गए थे, जो अब लागू होंगे। इनमें टैक्स में राहत, रेंटल इनकम पर छूट और विदेश में पढ़ाई के लिए फंड ट्रांसफर पर टैक्स में बदलाव शामिल हैं। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट में क्या-क्या बदलेगा और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। 1. टैक्स स्लैब में बदलाव: नौकरीपेशा लोगों को 75 हजार की अतिरिक्त राहत बदलाव: असर: 2. TDS छूट बढ़ी: रेंटल इनकम और सीनियर सिटीजन्स को राहत बदलाव: असर: 3. विदेश में पढ़ाई के लिए टैक्स छूट: अब 10 लाख तक बिना TCS कटे भेज सकेंगे पैसा बदलाव: असर: 4. अपडेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए अब 48 महीने तक का समय बदलाव: असर: 5. यूलिप पर कैपिटल गेन टैक्स: हाई-इनकम ग्रुप के लिए नया नियम बदलाव: असर: 6. कस्टम ड्यूटी में बदलाव: 150-200 प्रोडक्ट होंगे सस्ते या महंगे बदलाव: सस्ते होंगे: महंगे होंगे: असर: सरकारी योजनाओं का फायदा कब से मिलेगा?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लागू होने से पहले वैश्विक शेयर बाजारों में हड़कंप

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (Reciprocal Tariff) अगले महीने 2 अप्रैल से लागू होने जा रहा है। इससे पहले ही दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। जापान का निक्केई (Nikkei), दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) और अन्य एशियाई शेयर बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजारों पर भी इसका असर दिख रहा है। क्या है रेसिप्रोकल टैरिफ? रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिकी व्यापार नीति का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका उन देशों पर समान शुल्क लगाएगा जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचा आयात शुल्क लगाते हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह नीति अमेरिकी कंपनियों और निर्यातकों के हितों की रक्षा करेगी। वैश्विक बाजारों पर असर भारतीय बाजारों पर असर भारतीय शेयर बाजार भी वैश्विक गिरावट की चपेट में आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका अपने टैरिफ नीति को सख्ती से लागू करता है, तो भारतीय कंपनियों को भी नुकसान हो सकता है, खासतौर पर आईटी, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर को। आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका अपनी इस नीति को पूरी तरह लागू करता है तो यह कई देशों के लिए चुनौती बन सकता है। कई सरकारें अमेरिका के इस फैसले का विरोध कर सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में व्यापार युद्ध (Trade War) की स्थिति भी बन सकती है। (देश हरपल के लिए विशेष रिपोर्ट)
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1 अप्रैल से लागू होगा नया बजट: जानिए 6 बड़े बदलाव, नौकरीपेशा को मिलेगा ₹75,000 तक का फायदा

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल से नया बजट लागू होने जा रहा है। इस बजट में खासतौर पर नौकरीपेशा, करदाताओं और छोटे व्यापारियों के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं। केंद्र सरकार ने आम आदमी को राहत देने के उद्देश्य से कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनका असर हर करदाता और वेतनभोगी वर्ग पर पड़ेगा। आइए जानते हैं 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाले 6 बड़े बदलाव और इनका आप पर क्या असर पड़ेगा। 1. इनकम टैक्स स्लैब में राहत, ₹75,000 तक का फायदा वेतनभोगी वर्ग के लिए इनकम टैक्स में बड़ा बदलाव किया गया है। नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। अब वेतनभोगी करदाता को अधिक टैक्स सेविंग का मौका मिलेगा, जिससे उसकी नेट इनकम बढ़ जाएगी। 2. सैलरीड क्लास के लिए HRA और 80C में राहत घर किराए पर रहने वाले लोगों को बजट 2025 में HRA (House Rent Allowance) में अतिरिक्त छूट दी गई है। साथ ही, सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए निवेश की सीमा भी बढ़ाई गई है, जिससे मिडिल क्लास फैमिली को अधिक बचत करने का अवसर मिलेगा। 3. EPF और PPF पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर ब्याज दरों में वृद्धि की घोषणा की है। EPF पर नई ब्याज दर 8.25% कर दी गई है, जबकि PPF पर अब 7.8% ब्याज मिलेगा। इससे नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलेगा। 4. MSME और छोटे व्यापारियों के लिए टैक्स में राहत माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को सरकार ने टैक्स में छूट दी है। सरकार ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सीमा को बढ़ाने के साथ ही छोटे व्यापारियों को कंप्लायंस में राहत दी है, जिससे उन्हें व्यापार करने में आसानी होगी। 5. डिजिटल पेमेंट्स पर नए प्रोत्साहन डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने UPI और ऑनलाइन पेमेंट्स पर कुछ नए इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। छोटे कारोबारियों और दुकानदारों के लिए UPI ट्रांजेक्शन पर ट्रांजेक्शन फीस को कम किया गया है। 6. एलपीजी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर सब्सिडी महिलाओं और गरीब परिवारों को राहत देते हुए सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए EV खरीदने पर टैक्स छूट और सब्सिडी दी जाएगी। कैसे होगा असर? 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन बदलावों से देश के करोड़ों करदाताओं, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा। टैक्स बचत से आम लोगों की इनकम बढ़ेगी, EPF-PFF की बढ़ी हुई ब्याज दरों से निवेशकों को अधिक रिटर्न मिलेगा, और MSME सेक्टर को राहत मिलेगी जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। निष्कर्ष वित्त वर्ष 2025 के बजट में सरकार ने आम जनता और खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों को राहत देने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। इनकम टैक्स में छूट, HRA और 80C की राहत, PF की ब्याज दरों में बढ़ोतरी, छोटे व्यापारियों को राहत, डिजिटल पेमेंट्स पर प्रोत्साहन और EV सब्सिडी जैसे बदलावों का असर लंबे समय तक देखने को मिलेगा। (देश हरपल न्यूज के लिए रिपोर्टिंग: निखिल
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HDFC बैंक टॉप गेनर, मार्केट कैप 44,934 करोड़ बढ़ा, इंफोसिस और रिलायंस की वैल्यू घटी

HDFC बैंक टॉप गेनर, मार्केट कैप 44,934 करोड़ बढ़ा, इंफोसिस और रिलायंस की वैल्यू घटी

पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में हलचल देखने को मिली। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 8 की मार्केट वैल्यू में जबरदस्त उछाल आया, जिससे कुल वैल्यू 88,086 करोड़ रुपये बढ़ गई। इस हफ्ते HDFC बैंक टॉप गेनर के रूप में उभरा, जबकि इंफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज को नुकसान झेलना पड़ा। HDFC बैंक की बड़ी छलांग HDFC बैंक का मार्केट कैप 44,934 करोड़ रुपये बढ़कर 13.99 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मार्केट वैल्यू 16,600 करोड़ रुपये बढ़कर 6.89 लाख करोड़ रुपये हो गई। अन्य कंपनियों में भी तेजी दिखी: इंफोसिस और रिलायंस को झटका हालांकि, कुछ कंपनियों को नुकसान भी हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू 9,136 करोड़ रुपये घटकर 6.52 लाख करोड़ रुपये पर आ गई। इंफोसिस को भी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, रिलायंस का कुल मार्केट कैप 1,962 करोड़ रुपये बढ़कर 17.25 लाख करोड़ रुपये हो गया। सेंसेक्स और निफ्टी का हाल सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन (शुक्रवार, 28 मार्च) को सेंसेक्स 198 अंक गिरकर 77,414 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में 72 अंकों की गिरावट आई और यह 23,519 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 280 अंक चढ़ा। NSE के 50 शेयरों में से 19 शेयरों में तेजी रही, जबकि 31 में गिरावट आई। निफ्टी मीडिया इंडेक्स 2.29% गिरा, निफ्टी IT में 1.76% और निफ्टी रियल्टी में 1.42% की गिरावट रही।
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PM Modi on Paper Leak: युवाओं को दिया भरोसा, Fast Track Courts का ऐलान; राहुल गांधी का पलटवार

देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच PM Modi ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब और सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने घोषणा की कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए Fast Track Courts का गठन किया जाएगा, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। ऐसे में पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। PM मोदी बोले- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी छात्र की मेहनत और सपनों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी और ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए Fast Track Courts स्थापित किए जाएंगे। इससे जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार तकनीक के बेहतर उपयोग, कड़ी निगरानी और सख्त कानूनों के जरिए भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनका कहना था कि दोषियों को किसी भी हाल में बचने नहीं दिया जाएगा। राहुल गांधी ने सरकार से पूछे सवाल प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि केवल घोषणाएं करने से समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को भरोसा तभी मिलेगा, जब दोषियों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। छात्रों की उम्मीदें बढ़ीं पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित छात्र लंबे समय से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ऐसे में Fast Track Courts की घोषणा को कई छात्र सकारात्मक कदम मान रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि इस फैसले का वास्तविक असर तभी दिखेगा, जब दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई होगी और भविष्य में परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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