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अमेरिकी संसद में IRAN WAR रोकने का प्रस्ताव पास, Trump के 4 सांसदों ने किया विरोध में मतदान

अमेरिकी संसद में IRAN WAR रोकने का प्रस्ताव पास, Trump के 4 सांसदों ने किया विरोध में मतदान

अमेरिका में IRAN के साथ बढ़ते तनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़ा एक प्रस्ताव पास हो गया। खास बात यह रही कि राष्ट्रपति Donald Trump की पार्टी के 4 सांसदों ने भी उनके रुख के खिलाफ जाकर प्रस्ताव के समर्थन में वोटिंग की। यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से लाया गया था। सांसदों का कहना है कि बिना संसद की मंजूरी के किसी भी बड़े युद्ध में अमेरिका को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। प्रस्ताव के पास होने के बाद अब यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। हालांकि, मौजूदा राष्ट्रपति के पास इस प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार अभी भी मौजूद है। यानी अगर राष्ट्रपति चाहें तो इस प्रस्ताव को रोक सकते हैं। ऐसे में अंतिम फैसला अभी बाकी माना जा रहा है। अमेरिका और Iran के बीच पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ता रहा है। इसी बीच संसद में हुई यह वोटिंग कई मायनों में अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अमेरिका के भीतर युद्ध को लेकर बढ़ती चिंता को भी दिखाता है। इस मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ कुछ नेता सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं, वहीं दूसरी ओर कई सांसद युद्ध से बचने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस प्रस्ताव पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के रिश्तों का असर पूरी दुनिया की राजनीति और तेल बाजार पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Xi Jinping

China Russia Summit: Xi Jinping बोले– युद्ध रोकना जरूरी, दुनिया अस्थिर

बीजिंग में हुई हाई-लेवल बैठक ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान रूस और चीन की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की ओर खींच लिया है। इस मुलाकात में चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने न सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों पर बात की, बल्कि पूरी दुनिया की मौजूदा स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की। बैठक का सबसे चर्चित बयान Xi Jinping का रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था कमजोर हो रही है और दुनिया धीरे-धीरे “जंगलराज” जैसी स्थिति की ओर बढ़ती दिख रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कई देशों में युद्ध, तनाव और राजनीतिक अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। Iran War Alert: युद्ध रोकना जरूरी, नहीं तो बढ़ेगा संकट चर्चा के दौरान पश्चिम एशिया के हालात और Iran को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। जिनपिंग ने साफ कहा कि किसी भी तरह के युद्ध को आगे बढ़ने से रोकना अब बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सप्लाई और व्यापार व्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा। China-Russia Relations: साझेदारी और मजबूत करने पर सहमति बैठक में दोनों नेताओं ने अपने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति जताई। ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रूस और चीन की यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाती है। Global Politics का बदलता चेहरा आज की दुनिया लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात, युद्धों और आर्थिक दबावों से गुजर रही है। ऐसे में जिनपिंग का “जंगलराज” वाला बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था पर गहरा सवाल भी खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिकी संसद में IRAN युद्ध रोकने का प्रस्ताव पास, ट्रम्प की पार्टी के 4 सांसदों ने किया विरोध में वोट

अमेरिकी संसद में IRAN युद्ध रोकने का प्रस्ताव पास, ट्रम्प की पार्टी के 4 सांसदों ने किया विरोध में वोट

अमेरिका में IRAN के साथ बढ़ते तनाव के बीच संसद में एक बड़ा फैसला लिया गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन में ऐसा प्रस्ताव पास हुआ है, जिसका मकसद राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करना और ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध को रोकना है। खास बात यह रही कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के ही 4 सांसदों ने उनके खिलाफ जाकर इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि बिना संसद की मंजूरी के अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं करेगा। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी नेताओं के बीच ईरान को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। हालांकि, यह प्रस्ताव पास होने के बाद भी अंतिम फैसला पूरी तरह तय नहीं माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इस प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार मौजूद है। यानी राष्ट्रपति चाहें तो इस फैसले को रोक सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहा तनाव इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद और चर्चा में आ गया है। आम अमेरिकी नागरिकों के बीच भी युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है, क्योंकि किसी भी बड़े संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रम्प के अपने सांसदों का विरोध में जाना यह दिखाता है कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ईरान नीति को लेकर एकजुटता नहीं है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में और गरमा सकता है। Deshharpal पर देश-दुनिया की हर बड़ी खबर सबसे पहले पढ़ें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Internet

Iran Internet Warning: क्या दुनिया का Internet खतरे में है? जानें पूरा मामला

ईरान की ओर से दिए गए एक बयान के बाद दुनिया भर में Internet को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर टेक एक्सपर्ट्स तक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या भविष्य में किसी बड़े साइबर संकट या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी भी आधिकारिक संस्था या बड़ी टेक कंपनी ने यह नहीं कहा है कि वैश्विक स्तर पर इंटरनेट बंद हो सकता है, लेकिन इस बयान ने डिजिटल दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा को लेकर नई चिंता जरूर पैदा कर दी है। Iran Statement के बाद क्यों बढ़ी हलचल? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की तरफ से साइबर सुरक्षा और ग्लोबल इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कुछ टिप्पणियां सामने आई हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या भविष्य में किसी बड़े संघर्ष या साइबर वॉर जैसी स्थिति में इंटरनेट सिस्टम पर असर पड़ सकता है। आज इंटरनेट पूरी दुनिया को जोड़ने वाला सबसे बड़ा नेटवर्क है, लेकिन इसके अलग-अलग हिस्से जैसे सर्वर, डेटा रूटिंग और नेटवर्क कंट्रोल कई देशों और कंपनियों के हाथ में हैं। क्या सच में बंद हो सकता है Global Internet? टेक एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर काफी साफ हैं: इसलिए “ग्लोबल इंटरनेट ब्लैकआउट” की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। लोगों में चिंता क्यों बढ़ रही है? आज की डिजिटल लाइफ में इंटरनेट हर चीज का हिस्सा बन चुका है—बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, पढ़ाई, सरकारी सेवाएं और बिजनेस सब कुछ इसी पर निर्भर है। ऐसे में जब इंटरनेट को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता की खबर आती है, तो लोगों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। Experts क्या कहते हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों को सीधे इंटरनेट बंद होने की चेतावनी के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह ज्यादा एक “साइबर सिक्योरिटी अलर्ट” जैसा संकेत है, जो डिजिटल सिस्टम की मजबूती और रिस्क को समझने की जरूरत बताता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Russia

Russia Oil Import India: भारत ने साफ किया रुख, खरीद जारी रहेगी

भारत ने साफ कर दिया है कि वह रूस (Russia) से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा और अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों का देश की ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि प्राथमिकता आम लोगों के लिए सस्ता ईंधन और स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करना है। अमेरिका के नए प्रतिबंध और 30 दिन की राहत हाल ही में अमेरिका ने Russia से जुड़े कुछ तेल ढुलाई जहाजों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए थे, जिससे कुछ शिपमेंट प्रभावित हुए। हालांकि, पहले से चल रहे सौदों को पूरा करने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी गई है, ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो। भारत की ऊर्जा नीति क्या कहती है? सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह आर्थिक और रणनीतिक संतुलन पर आधारित है। देश का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर आम जनता पर न पड़े। सस्ता तेल और आर्थिक स्थिरता लंबे समय से अलग-अलग देशों से तेल आयात करता रहा है। रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल देश के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन गया है, जिससे आयात बिल नियंत्रित रहता है और महंगाई पर भी असर कम पड़ता है। भारत का कड़ा संदेश भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा। वहीं रूस से तेल खरीद को एक आर्थिक निर्णय माना जा रहा है, न कि किसी राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump ने टाला Iran पर हमला, बोले- समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े एक्शन के लिए तैयार

Trump ने टाला Iran पर हमला, बोले- समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े एक्शन के लिए तैयार

Donald Trump ने ईरान पर होने वाले प्रस्तावित अमेरिकी हमले को फिलहाल टाल दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गल्फ देशों की अपील के बाद ट्रम्प ने यह फैसला लिया। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी। इसके बाद ट्रम्प ने हमले की योजना को रोक दिया। ट्रम्प ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका अब तक का सबसे बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी स्वीकार करे, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर कायम है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालें ताकि मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध टाला जा सके। अंतरराष्ट्रीय और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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43 साल बाद नॉर्वे पहुंचे PM MODI, भारत-नॉर्डिक समिट में लेंगे हिस्सा; 5 देशों के नेताओं से करेंगे मुलाकात

43 साल बाद नॉर्वे पहुंचे PM MODI, भारत-नॉर्डिक समिट में लेंगे हिस्सा; 5 देशों के नेताओं से करेंगे मुलाकात

PM Narendra Modi सोमवार को नॉर्वे पहुंच गए। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का 43 साल बाद पहला नॉर्वे दौरा है। पीएम मोदी यहां तीसरे भारत-नॉर्डिक समिट में हिस्सा लेंगे और नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे। यह दौरा भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के अलावा स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी और समुद्री सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी का यह पहला नॉर्वे दौरा है। इससे पहले साल 1983 में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की यात्रा की थी। ऐसे में इस दौरे को ऐतिहासिक माना जा रहा है। दौरे के दौरान पीएम मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और क्वीन सोन्या से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही भारत-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट को संबोधित करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America ने Iran के सामने रखीं 5 बड़ी शर्तें, जंग खत्म करने के लिए यूरेनियम सौंपने की मांग

America ने Iran के सामने रखीं 5 बड़ी शर्तें, जंग खत्म करने के लिए यूरेनियम सौंपने की मांग

United States और Iran के बीच जारी तनाव के बीच अब युद्ध खत्म करने को लेकर नई शर्तें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने 5 बड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने और परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने पास मौजूद करीब 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिकी निगरानी में दे दे। इसके अलावा ईरान को अपनी परमाणु सुविधाओं को भी सीमित करना होगा। अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि युद्ध से हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशों में जमा ईरान की जब्त संपत्तियों में से केवल 25% हिस्सा ही वापस किया जाएगा। वहीं, किसी भी सीजफायर को बातचीत की प्रगति से जोड़ने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। ईरान चाहता है कि सभी मोर्चों पर युद्ध पूरी तरह खत्म हो, आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में फंसी उसकी पूरी संपत्ति वापस की जाए। साथ ही युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी की गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WHO

WHO Ebola Warning: कांगो और युगांडा में फैला वायरस, घोषित हुई Health Emergency

अफ्रीका में इबोला वायरस का नया प्रकोप एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। हालात को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित कर दिया है, यानी अब यह एक वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति बन चुका है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में संक्रमण के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और मौतों की संख्या भी बढ़ रही है। अफ्रीका में कहां फैला है इबोला? ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले मध्य और पूर्वी अफ्रीका के दो देशों में मिले हैं: युगांडा में मिले कुछ मरीज हाल ही में कांगो से यात्रा करके आए थे, जिससे क्रॉस-बॉर्डर संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है। अब तक क्या है स्थिति? उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हालात चिंताजनक हैं: इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। WHO की चेतावनी क्या कहती है? World Health Organization ने साफ कहा है कि यह स्थिति अब सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरा बन सकती है। हालांकि WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह स्थिति महामारी (pandemic) घोषित नहीं हुई है, लेकिन अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो हालात बिगड़ सकते हैं। कौन सा वायरस स्ट्रेन जिम्मेदार है? इस बार का प्रकोप Ebola virus disease के Bundibugyo strain से जुड़ा बताया जा रहा है। यह स्ट्रेन अपेक्षाकृत कम पाया जाता है, लेकिन इसे गंभीर और खतरनाक माना जाता है। इबोला कैसे फैलता है? इबोला वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क से फैलता है, खासकर: क्यों बढ़ रही है चिंता? इबोला कोई सामान्य वायरस नहीं है। इसकी वजह से चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hormuz

Hormuz Strait ईरान लगाएगा Ship Traffic Tax, UAE-Oman के साथ बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व से एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर नया कदम उठाने की तैयारी कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान यहां एक नया ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के साथ-साथ जहाजों पर “सर्विस टैक्स” लगाने पर भी विचार कर रहा है। इस फैसले को लेकर जहां वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है, वहीं UAE और ओमान के साथ क्षेत्रीय तनाव भी और गहराने की आशंका जताई जा रही है। क्या है ईरान का नया ट्रैफिक सिस्टम प्लान? जानकारी के अनुसार, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में: सरल शब्दों में कहा जाए तो इस रूट से गुजरने वाले हर जहाज पर अब अतिरिक्त नियम और खर्च लागू हो सकते हैं। क्यों इतना अहम है Hormuz Strait? Strait of Hormuz सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन माना जाता है। इसी वजह से यहां होने वाली हर हलचल पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। UAE और Oman के साथ बढ़ा तनाव ईरान के इस कदम ने क्षेत्रीय तनाव को और हवा दे दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक: हालांकि अभी तक किसी देश की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है। दुनिया पर क्या होगा असर? अगर ईरान यह नया सिस्टम लागू करता है तो इसका असर सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Abhijeet Dipke

Education Politics: Dharmendra Pradhan Resignation के बाद Abhijeet Dipke ने बताया आंदोलन का अगला कदम

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने इस पूरे घटनाक्रम को आंदोलन की पहली जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और छात्रों के अधिकार, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। Abhijeet Dipke के इस बयान के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से उठ रही आवाज अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। Dharmendra Pradhan Resignation पर Abhijeet Dipke का बड़ा बयान धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद Abhijeet Dipke ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं था। उनका कहना है कि असली मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि “अभी तो ये शुरुआत हुई है।” उनके अनुसार आने वाले समय में छात्रों से जुड़े कई अन्य मुद्दों को लेकर भी आवाज उठाई जाएगी। NEET Controversy और Student Protest बना बड़ा मुद्दा NEET परीक्षा और कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। कई छात्र संगठनों और युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों छात्रों का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है। Jantar Mantar Protest से तेज हुई थी मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए गए। CJP और अन्य प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और छात्रों की समस्याओं के समाधान की मांग रखी। आंदोलन के दौरान युवाओं ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और भविष्य की परीक्षाओं को बेहतर तरीके से आयोजित करने की जरूरत पर जोर दिया। “लड़ाई अभी बाकी है” — युवाओं को लेकर दीपके का संदेश अभिजीत दीपके का कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे किसी एक घटना तक सीमित नहीं हैं। उनका फोकस युवाओं की आवाज को मजबूत करना और शिक्षा क्षेत्र में स्थायी बदलाव की मांग करना है। उनके बयान से साफ है कि आंदोलनकारी अब आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच किस तरह की बातचीत होती है। Education Reform को लेकर बढ़ी बहस धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक बार फिर देश में शिक्षा सुधार, परीक्षा सुरक्षा और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। युवाओं का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत नियम, पारदर्शी प्रक्रिया और समय पर समाधान जरूरी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र को लेकर क्या बड़े फैसले सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sonam Wangchuk

Youth Power & Education Debate: Sonam Wangchuk बोले- Gen Z की आवाज से शुरू होगा Accountability और सुधार का दौर

शिक्षा और राजनीति से जुड़े विवाद के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के एक बयान ने नई चर्चा शुरू कर दी है। धर्मेंद्र प्रधान को लेकर चल रहे विवाद और इस्तीफे की मांग के बीच वांगचुक ने Gen Z युवाओं की सक्रियता की तारीफ की और कहा कि जवाबदेही (Accountability) किसी भी व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम होती है। उन्होंने युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि अब जरूरत सिर्फ सवाल उठाने की नहीं, बल्कि सुधार और समाधान की ओर बढ़ने की है। Sonam Wangchuk ने Gen Z की आवाज को बताया बदलाव की ताकत Sonam Wangchuk ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक है। सोशल मीडिया और लोकतांत्रिक माध्यमों से Gen Z लगातार अपनी बात रख रही है। उनके अनुसार, जब युवा शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल उठाते हैं, तो इससे संस्थानों को अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देने का मौका मिलता है। Dharmendra Pradhan Controversy: शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल धर्मेंद्र प्रधान को लेकर विवाद की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उठे सवालों के बाद तेज हुई। विपक्ष और कई छात्र संगठनों ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। छात्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और बेहतर व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। वहीं सरकार की ओर से भी कई बार कहा गया है कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। Accountability से Reform तक का संदेश सोनम वांगचुक ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी भी व्यवस्था में सुधार के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बदलाव केवल विरोध से नहीं, बल्कि संवाद और सकारात्मक प्रयासों से आता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में युवाओं की भागीदारी और उनकी आवाज को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। Gen Z और Youth Movement क्यों बन रहा चर्चा का विषय? आज की युवा पीढ़ी शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रक्रिया और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रही है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने युवाओं को अपनी बात बड़े स्तर तक पहुंचाने का मंच दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है और नीतियों में सुधार की प्रक्रिया को गति दे सकती है। धर्मेंद्र प्रधान मामले पर आगे की नजर धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े इस विवाद के बीच सोनम वांगचुक का बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर इसे युवाओं की ताकत और जवाबदेही से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार के अगले कदमों पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बने रह सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Dharmendra Pradhan

Education Politics: Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग पर सियासत गर्म

शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के बीच अब उनके इस्तीफे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच दीपक के बयान ने इस पूरे मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है। दीपक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय कहा जाता था कि “इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते”, लेकिन जब जनता और विपक्ष की आवाज मजबूत होती है तो हालात बदल सकते हैं। उन्होंने कहा, “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। Paper Leak और Education System को लेकर बढ़ा दबाव शिक्षा मंत्रालय लगातार कई मुद्दों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहा है। खासतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। दीपक का बयान बना चर्चा का विषय दीपक के बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा बढ़ा दी है। उनके शब्दों को सरकार पर दबाव बनाने वाले राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने इशारों में कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे अहम होती है और जब किसी मुद्दे पर लगातार सवाल उठते हैं तो सरकारों को उसका जवाब देना पड़ता है। क्या धर्मेंद्र प्रधान देंगे इस्तीफा? फिलहाल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से भी इस मामले में कोई संकेत नहीं दिया गया है। हालांकि, विपक्ष लगातार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। राजनीतिक घमासान जारी Education Sector से जुड़े फैसले और परीक्षाओं की विश्वसनीयता इस समय देश में बड़ा मुद्दा बने हुए हैं। जहां विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपने काम और सुधारों को लेकर अपना पक्ष रख रही है। धर्मेंद्र प्रधान को लेकर शुरू हुई यह Resignation Controversy फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन इसने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और सरकार की जिम्मेदारी पर बहस को तेज कर दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP Protest

CJP Protest Controversy: Fake News पर Delhi Police सख्त, Social Media Accounts की जांच शुरू

दिल्ली में चल रहे CJP Protest के बीच दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि प्रदर्शन से जुड़े मामले में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए भ्रामक और झूठे पोस्ट वायरल किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, इनमें से कुछ अकाउंट्स को पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा है और इनके जरिए माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। Delhi Police ने Social Media Campaign पर जताई चिंता दिल्ली पुलिस ने बताया कि वह प्रदर्शन से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर रख रही है। अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट सामने आए हैं जिनमें तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल मैसेज, वीडियो या पोस्ट को बिना पुष्टि किए शेयर न करें। अधिकारियों का कहना है कि अफवाहों से बचना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी से स्थिति बिगड़ सकती है। Protest को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त CJP Protest को देखते हुए दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। Fake News फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर फर्जी जानकारी फैलाने वाले अकाउंट्स की पहचान की जा रही है। जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों वाले अकाउंट्स को ट्रैक किया जा रहा है। पुलिस ने साफ किया कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लोगों से जिम्मेदारी के साथ Social Media इस्तेमाल करने की अपील आज के समय में सोशल मीडिया खबरों का तेज माध्यम बन चुका है, लेकिन कई बार इसका गलत इस्तेमाल भी देखने को मिलता है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। CJP Protest Latest Update फिलहाल CJP Protest को लेकर दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड में है। सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध पोस्ट करने वाले अकाउंट्स पर नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि राजधानी में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
EPFO

PF Interest Update: EPFO खाते में आया ब्याज, Missed Call और SMS से ऐसे Check करें PF Balance

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। PF Account में जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज (PF Interest) अब कई सदस्यों के खातों में दिखना शुरू हो गया है। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपके PF खाते में ब्याज आया है या नहीं, तो इसे घर बैठे आसानी से चेक किया जा सकता है। EPFO ने कर्मचारियों के लिए PF Balance Check करने के कई आसान विकल्प उपलब्ध कराए हैं। अब न तो ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत है और न ही लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। मोबाइल फोन से सिर्फ कुछ मिनटों में Missed Call, SMS, UMANG App और EPFO Portal के जरिए PF Account की जानकारी मिल सकती है। PF Interest Update: खाते में कैसे जुड़ता है ब्याज? EPFO हर वित्त वर्ष के लिए PF खाताधारकों को ब्याज देता है। कर्मचारी और कंपनी की ओर से जमा किए गए अंशदान पर यह ब्याज तय नियमों के अनुसार जोड़ा जाता है। ब्याज राशि अपडेट होने के बाद कर्मचारी अपनी EPF Passbook में जाकर देख सकते हैं कि उनके खाते में कितनी राशि जमा हुई है और कितना ब्याज मिला है। Missed Call से Check करें PF Balance अगर आपके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, तब भी आप आसानी से PF Balance पता कर सकते हैं। ऐसे करें PF Balance Check: ध्यान रखें कि यह सुविधा लेने के लिए आपका UAN Active होना और मोबाइल नंबर EPFO खाते से लिंक होना जरूरी है। SMS के जरिए जानें PF Account की पूरी जानकारी EPFO अपने सदस्यों को SMS Service की सुविधा भी देता है। Process: अगर आपको हिंदी में जानकारी चाहिए तो ENG की जगह HIN लिखकर भेज सकते हैं। UMANG App से घर बैठे देखें PF Balance सरकार का UMANG App भी PF Account की जानकारी देखने का आसान माध्यम है। Steps Follow करें: EPFO Website से Online Check करें PF Passbook जो कर्मचारी ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे EPFO Portal के जरिए भी अपना PF Balance देख सकते हैं। कैसे देखें: PF Balance Check करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान PF खाते की जानकारी देखने से पहले इन जरूरी बातों को जरूर जांच लें: कर्मचारियों के लिए क्यों खास है PF Interest Update? PF सिर्फ नौकरी के दौरान जमा होने वाली बचत नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का बड़ा साधन भी है। खाते में ब्याज जुड़ने से कर्मचारियों की कुल जमा राशि बढ़ती है और रिटायरमेंट के समय उन्हें इसका फायदा मिलता है। EPFO की डिजिटल सुविधाओं ने अब PF Account को Manage करना पहले से काफी आसान बना दिया है। कर्मचारी कभी भी अपने मोबाइल से यह पता कर सकते हैं कि उनके खाते में कितना Balance है और ब्याज की राशि अपडेट हुई है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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