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Raghav Chadha

“आई एम द राइट मैन इन रॉन्ग पार्टी “:Raghav Chadha AAP से इस्तीफा और 7 सांसदों के साथ BJP में एंट्री

देश की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा तेजी से फैल रहा है कि उन्होंने AAP से इस्तीफा दे दिया है और जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि यह भी कहा जा रहा है कि कुछ सांसद उनके साथ पार्टी बदल सकते हैं। हालांकि, अब तक इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आखिर क्या है पूरा मामला? पिछले कुछ समय से AAP के भीतर संगठनात्मक बदलाव और नेतृत्व स्तर पर कुछ फैसलों के बाद राघव चड्ढा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी बीच उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। इन अटकलों ने तब और जोर पकड़ा जब सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि Raghav Chadha AAP छोड़कर BJP में शामिल हो सकते हैं। कुछ पोस्ट्स में तो यह भी कहा गया कि उनके साथ कई सांसद भी पार्टी बदल सकते हैं। क्या राघव चड्ढा ने इस्तीफा दिया है? ताजा और उपलब्ध जानकारी के अनुसार: पहले भी उड़ चुकी हैं ऐसी खबरें यह पहली बार नहीं है जब राघव चड्ढा को लेकर ऐसी राजनीतिक चर्चाएं सामने आई हों। इससे पहले भी उनके पार्टी में स्थिति और भविष्य को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल चुकी हैं, जिन्हें समय-समय पर खारिज किया गया है। राजनीतिक माहौल में बढ़ी अटकलें चुनावी माहौल और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच इस तरह की खबरें अक्सर तेजी से फैलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक इन दावों को केवल अटकल ही माना जाना चाहिए। राघव चड्ढा के AAP छोड़ने और BJP में जाने की खबरें फिलहाल अफवाह और अनकन्फर्म्ड रिपोर्ट्स हैं। किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान का इंतजार करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mojtaba Khamenei injured, Iran Supreme Leader health update, plastic surgery face burn Iran, US Iran war news, Mojtaba Khamenei condition

Iran Crisis: मोहतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल, चेहरे पर जलन… कई सर्जरी के बाद भी हालत नाजुक

ईरान के सर्वोच्च नेता मोहतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उनके चेहरे पर गंभीर जलन, पैर की तीन बार सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर संकट, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट ईरान के सर्वोच्च नेता मोहतबा खामेनेई को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वे गंभीर रूप से घायल हैं और लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।बताया जा रहा है कि उनकी हालत इतनी गंभीर है कि वे सामान्य रूप से बोलने तक में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। चेहरे और होंठ बुरी तरह झुलसे, प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए, जिससे उनकी बोलने की क्षमता प्रभावित हुई है।डॉक्टरों का मानना है कि आगे चलकर उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। पैर की तीन बार सर्जरी, कृत्रिम अंग लगाने की तैयारी सबसे गंभीर चोट उनके पैर में बताई जा रही है, जहां एक पैर की तीन बार सर्जरी हो चुकी है अब उन्हें कृत्रिम पैर (prosthetic leg) लगाने की जरूरत पड़ सकती है साथ ही उनके एक हाथ का भी ऑपरेशन किया गया है और धीरे-धीरे रिकवरी हो रही है। हमले के बाद से सार्वजनिक रूप से गायब, गुप्त तरीके से हो रहा संपर्क बताया जा रहा है कि फरवरी में हुए हमले के बाद से वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनके संदेश लिखित रूप में भेजे जा रहे हैं, सुरक्षा कारणों से उनकी लोकेशन पूरी तरह गुप्त रखी गई है ,रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी सुरक्षा को लेकर इतना खतरा है कि वरिष्ठ अधिकारी भी उनसे सीधे नहीं मिल रहे। मानसिक रूप से सक्रिय, लेकिन फैसलों पर असर हालांकि अधिकारियों का दावा है कि वे मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय हैं, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति का असर देश के फैसलों पर साफ दिख रहा है।कई अहम निर्णय अब सैन्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के जरिए लिए जा रहे हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी चिंता यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।खामेनेई की खराब सेहत को इस पूरे क्षेत्र की राजनीतिक और सैन्य स्थिति के लिए अहम माना जा रहा है।मोहतबा खामेनेई की गंभीर चोटों ने ईरान के नेतृत्व को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि उनकी सेहत और देश की राजनीतिक स्थिति आगे क्या मोड़ लेती है।=
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पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान: BJP या ममता बनर्जी, किसे मिलेगा फायदा?

पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान: BJP या ममता बनर्जी, किसे मिलेगा फायदा?

पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी माहौल काफी गर्म है। वोटिंग के दौरान अब तक का सबसे ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने ज्यादा मतदान का फायदा आखिर किसे मिलेगा — भारतीय जनता पार्टी (BJP) को या फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को? रिकॉर्ड वोटिंग से बढ़ी सियासी टेंशन इस बार मतदान प्रतिशत पिछले सभी चुनावों की तुलना में ज्यादा देखा गया है। कई इलाकों में लोगों ने बड़ी संख्या में वोट डाले, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि जनता इस बार बदलाव या फिर मजबूती से वापसी के मूड में है। BJP की उम्मीदें क्या कहती हैं? BJP का मानना है कि ज्यादा मतदान उनके पक्ष में जा सकता है। पार्टी का दावा है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है। खासकर युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं पर BJP की नजर है। ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ वहीं, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC का कहना है कि यह वोटिंग उनके जनाधार की मजबूती को दिखाती है। TMC को भरोसा है कि ग्रामीण इलाकों और महिलाओं का समर्थन उन्हें फिर से सत्ता तक पहुंचा सकता है। जनता का मूड बना सबसे बड़ा फैक्टर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ज्यादा वोटिंग से नतीजों का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। असली खेल यह है कि यह वोट किस दिशा में गया है — बदलाव के लिए या फिर मौजूदा सरकार को बनाए रखने के लिए। अब निगाहें नतीजों पर अब सभी की नजरें वोटों की गिनती पर टिकी हैं। नतीजे ही तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता पर कौन राज करेगा — BJP या फिर ममता बनर्जी की सरकार एक बार फिर वापसी करेगी।
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West Bengal Election 2026, Tamil Nadu Election 2026, Phase 1 Voting turnout, 89 percent voting Bengal, 82 percent Tamil Nadu voting, Election LIVE Indi

West Bengal Phase 1 & Tamil Nadu Election 2026: शाम 5 बजे तक बंपर वोटिंग, बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग। शाम 5 बजे तक बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज, जानें पूरी अपडेट। देश में लोकतंत्र का उत्सव, रिकॉर्ड वोटिंग ने चौंकाया 23 अप्रैल 2026 को देश के दो बड़े राज्यों पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने रिकॉर्ड बना दिया।शाम 5 बजे तक पश्चिम बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज किया गया, जो इस चुनाव को बेहद खास बना रहा है। सुबह से ही दिखा उत्साह, महिलाओं और युवाओं की लंबी कतारें सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग में शुरुआत से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।मतदान केंद्रों के बाहर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की लंबी कतारें नजर आईं, जिसने लोकतंत्र की ताकत को फिर साबित किया। बंगाल में छुट-पूट हिंसा के बीच भी भारी मतदान जहां एक तरफ रिकॉर्ड वोटिंग हुई, वहीं पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में झड़प, बमबाजी और राजनीतिक तनाव की खबरें आईं। इसके बावजूद सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते मतदान प्रक्रिया जारी रही और लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तमिलनाडु में शांतिपूर्ण मतदान, जनता का भरोसा कायम तमिलनाडु में मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हुआ।यहां 234 सीटों पर एक ही चरण में वोटिंग हो रही है और भारी मतदान ने यह संकेत दे दिया है कि जनता बदलाव या स्थिरता—जो भी चाहती है—उसे मजबूती से दर्ज कर रही है। किसके बीच है मुख्य मुकाबला? दोनों राज्यों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। बड़े नेताओं की अपील का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं ने मतदाताओं से ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की थी, जिसका असर अब आंकड़ों में साफ दिख रहा है। रिकॉर्ड वोटिंग, अब नतीजों का इंतजार बंपर वोटिंग ने साफ कर दिया है कि इस बार जनता पूरी तरह सक्रिय है।अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि किसके हाथ में सत्ता जाएगी।
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Bengal Election 2026, Phase 1 voting Bengal, Mamata Banerjee vs BJP, West Bengal politics, voter turnout Bengal, TMC vs BJP analysis, election news India

Breaking Update: बंगाल में चुनावी रण शुरू, 152 सीटों पर वोटिंग… BJP vs Mamata सीधी टक्कर!

West Bengal Assembly Election 2026 Phase 1 voting begins across 152 seats. Mamata Banerjee vs BJP battle intensifies with high voter turnout, key issues and political analysis. “ममता का गढ़ vs बीजेपी की चुनौती” – पहले चरण में ही दिखा असली मुकाबला पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव का आगाज़ हो चुका है और पहले चरण में ही सियासी तापमान अपने चरम पर पहुंच गया है।23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग के साथ यह साफ हो गया है कि इस बार मुकाबला सीधा है — ममता बनर्जी vs बीजेपी। क्या है इस चुनाव का सबसे बड़ा नैरेटिव? यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं…👉 बल्कि वेलफेयर vs बदलाव👉 स्थानीय पकड़ vs राष्ट्रीय चेहरा👉 और सबसे अहम… जमीनी नेटवर्क vs राजनीतिक विस्तार ममता बनर्जी की पार्टी TMC अपनी ग्रासरूट पकड़ और योजनाओं के दम पर मैदान में है, जबकि बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और मजबूत संगठन के सहारे सेंध लगाने की कोशिश में है। बंगाल की लड़ाई क्यों है हाई-वोल्टेज? इन सभी फैक्टर्स ने इस चुनाव को “साधारण चुनाव” नहीं, बल्कि सियासी टर्निंग पॉइंट बना दिया है। ग्राउंड रिपोर्ट क्या कहती है? यानी साफ है —👉 सिर्फ रैली नहीं, ग्राउंड पर माइक्रो मैनेजमेंट ही जीत तय करेगा बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के लिए असली लड़ाई सीट जीतने की नहीं…👉 बल्कि ममता के मजबूत इलाकों में सेंध लगाने की है क्योंकि: ये फैक्टर्स बीजेपी के लिए चुनौती बने हुए हैं। देश हरपल Analysis 👉 बंगाल में चुनाव सिर्फ “लहर” से नहीं जीते जाते👉 यहां वोट का ठोस गणित + लोकल कनेक्शन ही गेम तय करता है और पहले चरण ने साफ कर दिया है —🔥 2026 का चुनाव आसान नहीं… बल्कि सबसे कठिन मुकाबला पहले चरण की वोटिंग ने संकेत दे दिए हैं —यह चुनाव सिर्फ सत्ता बचाने या बदलने का नहीं,👉 बल्कि बंगाल की राजनीतिक दिशा तय करने का चुनाव है अब नजर अगले चरणों पर होगी…जहां असली तस्वीर और साफ होगी।
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30 साल की हरियाणवी एक्ट्रेस Divyanka Sirohi का अचानक निधन, घर पर बेहोश होने के बाद नहीं बची जान, परिवार सदमे में

30 साल की हरियाणवी एक्ट्रेस Divyanka Sirohi का अचानक निधन, घर पर बेहोश होने के बाद नहीं बची जान, परिवार सदमे में

मनोरंजन जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी 30 साल की एक्ट्रेस Divyanka Sirohi का अचानक निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि वह अपने घर पर अचानक बेहोश हो गई थीं, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना के बाद उनके परिवार और करीबी लोग गहरे सदमे में हैं। अचानक बिगड़ी तबीयत जानकारी के मुताबिक, एक्ट्रेस अपने घर पर सामान्य दिन की तरह थीं, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश हो गईं। परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, जो सफल नहीं हो सकी। परिवार में मातम का माहौल इस अचानक हुए निधन से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घर में शोक का माहौल है और रिश्तेदार व करीबी लोग लगातार पहुंच रहे हैं। हरियाणवी इंडस्ट्री में शोक उनके निधन की खबर से हरियाणवी मनोरंजन जगत में भी शोक की लहर है। कई कलाकारों और सहयोगियों ने सोशल मीडिया पर दुख जताया है। जांच या कारणों की जानकारी नहीं फिलहाल मौत के सही कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। परिजन और डॉक्टर स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
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Jharkhand में मौत का हाईवे: ट्रक-टैंकर की भीषण टक्कर, कार खाई में गिरी, 3 की मौत और 9 घायल

Jharkhand में मौत का हाईवे: ट्रक-टैंकर की भीषण टक्कर, कार खाई में गिरी, 3 की मौत और 9 घायल

Jharkhand से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। यहां एक हाईवे पर ट्रक और टैंकर की जोरदार भिड़ंत हो गई, जबकि इसी दौरान एक कार अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई और 9 लोग घायल हुए हैं। कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के चलते यह बड़ा हादसा हुआ। पहले ट्रक और टैंकर में जोरदार टक्कर हुई, जिससे सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। उसी समय एक कार चालक ने नियंत्रण खो दिया और वाहन सीधा खाई में जा गिरा। मौके पर मचा हाहाकार हादसे के बाद वहां चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई। घायलों को किसी तरह बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। राहत और बचाव कार्य जारी पुलिस और राहत टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। इलाके में शोक का माहौल इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। मृतकों के परिवार गहरे सदमे में हैं और लोग इस घटना को लेकर दुख जता रहे हैं।
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Delhi हत्याकांड: जींस-जूते तक छोड़कर फरार हुआ आरोपी, एक छोटी गलती से पुलिस के हाथ लगा… पूरी टाइमलाइन सामने आई

Delhi हत्याकांड: जींस-जूते तक छोड़कर फरार हुआ आरोपी, एक छोटी गलती से पुलिस के हाथ लगा… पूरी टाइमलाइन सामने आई

Delhi में हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। आरोपी ने खुद को बचाने के लिए पूरी प्लानिंग की थी और यहां तक कि IRS अधिकारी के घर पर रखे अपने जींस-जूते तक छोड़कर फरार हो गया, लेकिन एक छोटी सी गलती ने उसकी पूरी साजिश को उजागर कर दिया। अब इस मामले की पूरी टाइमलाइन भी सामने आ चुकी है। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? दिल्ली में एक IRS अधिकारी के घर के आसपास अचानक संदिग्ध गतिविधियां देखने को मिलीं। कुछ ही समय बाद एक गंभीर हत्या की घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया। आरोपी की भागने की प्लानिंग हत्या के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए सबूत मिटाने की कोशिश की। उसने जल्दबाजी में अपने कपड़े और जूते तक वहीं छोड़ दिए, ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर सके। वह अलग-अलग जगहों पर छिपता रहा और अपनी पहचान बदलने की कोशिश करता रहा। एक गलती बनी उसकी गिरफ्तारी की वजह पुलिस जांच के दौरान आरोपी से जुड़ी एक छोटी लेकिन अहम गलती सामने आई। इसी सुराग ने जांच टीम को उसके करीब पहुंचा दिया। टेक्निकल सर्विलांस और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए आखिरकार पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूरी टाइमलाइन पुलिस की बड़ी सफलता इस मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब उससे पूछताछ जारी है और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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UP: मिर्जापुर में भीषण सड़क हादसा, ट्रक और बोलेरो की टक्कर में 11 लोगों की दर्दनाक मौत

UP: मिर्जापुर में भीषण सड़क हादसा, ट्रक और बोलेरो की टक्कर में 11 लोगों की दर्दनाक मौत

UP के मिर्जापुर जिले से एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। यहां एक तेज रफ्तार ट्रक और बोलेरो के बीच जोरदार टक्कर हो गई, जिसमें 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बोलेरो में कई लोग सवार थे और वह किसी काम से जा रहे थे। तभी सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। मौके पर मची अफरा-तफरी हादसे के बाद आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। कई लोगों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि कुछ लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। मामले की जांच जारी है। पूरे इलाके में मातम इस दर्दनाक हादसे ने पूरे मिर्जापुर क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और लोग इस घटना से गहरे सदमे में हैं।
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बंगाल में ‘करो या मरो’ की लड़ाई! पहले चरण का चुनाव BJP और TMC दोनों के लिए क्यों है इतना अहम?

बंगाल में ‘करो या मरो’ की लड़ाई! पहले चरण का चुनाव BJP और TMC दोनों के लिए क्यों है इतना अहम?

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरम होता जा रहा है। पहले चरण के मतदान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों ही पार्टियों के लिए यह मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। इसे कई राजनीतिक जानकार “करो या मरो” की स्थिति बता रहे हैं। पहले चरण पर क्यों टिकी है सबकी नजर? पहले चरण का चुनाव सिर्फ शुरुआत नहीं है, बल्कि यही तय कर सकता है कि आगे की लड़ाई किस दिशा में जाएगी। यही वजह है कि दोनों पार्टियां पूरी ताकत झोंक रही हैं। TMC के लिए चुनौती ममता बनर्जी की पार्टी TMC के लिए यह चरण अपनी पकड़ बनाए रखने की परीक्षा जैसा है। पार्टी चाहती है कि वह अपने मजबूत इलाकों में जीत दर्ज कर एक बार फिर भरोसा कायम रखे। BJP की रणनीति वहीं BJP इस चुनाव को बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने का बड़ा मौका मान रही है। पार्टी का फोकस शुरुआती चरण में अच्छा प्रदर्शन कर राजनीतिक बढ़त बनाने पर है। क्यों है यह चुनाव इतना अहम? पहले चरण के नतीजे आने वाले चरणों की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दोनों ही दल इसे सिर्फ चुनाव नहीं बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर मैदान में हैं।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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