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Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
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बांग्लादेश बोला- भारत के साथ रिश्ते रीसेट करना चाहते हैं, आपसी हितों के आधार पर नए सिरे से संबंध बनाने की इच्छा

बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करने की इच्छा जताई है। रविवार को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि ढाका नई दिल्ली के साथ संबंधों को ‘रीसेट’ करना चाहता है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच नया रिश्ता आपसी हितों और संतुलित दृष्टिकोण के आधार पर बनाया जाना चाहिए। कबीर ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों को असहज बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब भारत के साथ एक नए रिश्ते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है और इसके लिए दोनों देशों के बीच सीधे द्विपक्षीय संवाद जरूरी है। बहुपक्षीय मंच के बजाय द्विपक्षीय बातचीत पर जोर हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए नहीं, बल्कि सीधे द्विपक्षीय स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ संबंधों को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान केंद्रित करने वाली सोच से बाहर निकलना होगा। भारत के साथ रिश्तों को संतुलित नजरिए से देखते हुए दोनों देशों के साझा हितों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। कबीर के मुताबिक, नई दिल्ली के साथ संबंध बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ रिश्तों का भी एक हिस्सा हैं। BRICS समिट में शामिल नहीं हुए थे PM तारिक रहमान बांग्लादेश का यह बयान भारत में आयोजित BRICS समिट के समाप्त होने के बाद आया है। बांग्लादेश ने पहले बताया था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें व्यक्तिगत हैसियत से आमंत्रित नहीं किया गया था। ढाका के अनुसार, तारिक रहमान को BIMSTEC के अध्यक्ष के तौर पर आमंत्रित किया गया था। BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है, जो क्षेत्रीय सहयोग और विकास को बढ़ावा देता है। अगस्त में भी टल गया था भारत दौरा BRICS समिट से पहले भारत ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठक के लिए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत आने का निमंत्रण दिया था। उन्हें 22 अगस्त को भारत आना था, लेकिन दौरे से पहले ही कार्यक्रम टल गया। उस दौरान बांग्लादेश की ओर से भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया गया था। इस मामले को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से तनाव बना हुआ है। उस समय हुमायूं कबीर ने कहा था कि जब दोनों देशों के बीच माहौल अनुकूल होगा, तब द्विपक्षीय दौरे होंगे और इसमें जल्दबाजी की जरूरत नहीं है।

भारत ने 8वीं बार जीता विमेंस एशिया कप, श्रीलंका को 72 रन से हराया

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विमेंस एशिया कप का खिताब 8वीं बार अपने नाम कर लिया है। दुबई में खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा किया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट पर 183 रन बनाए थे। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की पूरी टीम 20 ओवर में 111 रन पर ऑलआउट हो गई। शेफाली और स्मृति ने दिलाई शानदार शुरुआत भारत की जीत की नींव ओपनर शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने रखी। दोनों ने पहले विकेट के लिए शानदार 129 रन की साझेदारी की। शेफाली ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 68 रन, जबकि स्मृति मंधाना ने 59 रन की बेहतरीन पारी खेली। दोनों की शानदार शुरुआत की बदौलत भारत ने फाइनल में मजबूत स्कोर खड़ा किया। श्री चरणी और दीप्ति की घातक गेंदबाजी 184 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। श्री चरणी ने 4 विकेट लेकर श्रीलंका की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं दीप्ति शर्मा ने 3 विकेट झटकते हुए श्रीलंका पर लगातार दबाव बनाए रखा। भारतीय गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के चलते श्रीलंका की पूरी टीम 111 रन पर सिमट गई। इस जीत के साथ भारत ने महिला एशिया कप में अपना 8वां खिताब जीतकर एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी।

उज्जैन में चोरी के मामलों का खुलासा: सोने का हार और चोरी की बाइक-स्कूटी बरामद, 2 आरोपी गिरफ्तार

उज्जैन पुलिस ने रविवार को चोरी की अलग-अलग वारदातों का खुलासा करते हुए कार्रवाई की है। पंवासा और महाकाल थाना पुलिस ने मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर सोने के आभूषण के साथ चोरी की बाइक और स्कूटी बरामद की हैं। एक नाबालिग को भी हिरासत में लेकर किशोर न्यायालय में पेश किया गया है। पंवासा थाना पुलिस ने सूने मकानों में चोरी के मामले में फरार चल रहे 19 वर्षीय गजा उर्फ गज्जू लोहार को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर करीब 2.20 लाख रुपए कीमत का सोने का हार बरामद किया गया है। गरोठ ब्रिज के नीचे से पकड़ा गया गज्जू पुलिस के मुताबिक, सूने मकानों में चोरी के दो मामलों का पहले ही खुलासा हो चुका था। उस दौरान चोरी की नकदी के साथ सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए थे। इन मामलों में गजा उर्फ गज्जू लोहार फरार चल रहा था। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी गरोठ ब्रिज के नीचे मौजूद है। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में गज्जू ने बताया कि कार्तिक बैडवाल ने उसे 11 पत्तियों वाला सोने का हार बेचने के लिए दिया था। आरोपी ने हार अपने घर में छिपाकर रखा था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हार बरामद कर लिया। बाइक और एक्टिवा चोरी के मामले में गिरफ्तारी इधर, महाकाल थाना पुलिस ने 10 सितंबर को दर्ज वाहन चोरी के दो मामलों में कार्रवाई करते हुए पंवासा निवासी विशाल उर्फ मयंक कौशल (19) को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी की स्प्लेंडर बाइक (MP09AM5169) और होंडा एक्टिवा (MP13ET5577) बरामद की हैं। दोनों वाहनों की कुल अनुमानित कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस के अनुसार, मामले में एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। आरोपी विशाल को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक आदेश पर जेल भेज दिया गया, जबकि नाबालिग को किशोर न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस अब चोरी की इन वारदातों से जुड़े अन्य लोगों और आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

सागर में दर्दनाक हादसा: पोखर में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत, खेलते समय हुआ हादसा

सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र में रविवार को दर्दनाक हादसा हो गया। भापेल के पास गोढ़ीखैर में पोखर में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई। दोनों बच्चे पोखर के पास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी में गिर गए। हादसा होते देख ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही मोतीनगर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित किया अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान 5 वर्षीय जागेंद्र आदिवासी और 3 वर्षीय गजेंद्र आदिवासी, पिता विनोद आदिवासी के रूप में हुई है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। विधायक ने परिजनों से की बात घटना की जानकारी मिलने पर नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने मृतक बच्चों के परिजनों से बात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दोनों बच्चों के परिवारों को नियमानुसार 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कराने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

भारत ने अफगानिस्तान को पहले टी-20 में 7 विकेट से हराया, अभिषेक शर्मा ने 32 गेंदों पर जड़ा 82 रन

भारत ने पहले टी-20 मुकाबले में अफगानिस्तान को 7 विकेट से हरा दिया। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मैच में अफगानिस्तान ने भारत को 157 रन का लक्ष्य दिया था, जिसे टीम इंडिया ने महज 13.4 ओवर में 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया। भारत की जीत के हीरो अभिषेक शर्मा रहे। उन्होंने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 32 गेंदों में 82 रन की शानदार पारी खेली। अभिषेक ने अपनी पारी में 7 चौके और 7 छक्के लगाए। अभिषेक और ईशान के बीच 121 रन की साझेदारी लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी की। ईशान किशन ने भी उपयोगी पारी खेलते हुए 42 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद अभिषेक ने तेजी से रन बनाते हुए टीम को जीत के करीब पहुंचाया। उमरजई की फिफ्टी बेकार, अर्शदीप ने लिए 3 विकेट इससे पहले अफगानिस्तान ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 156 रन बनाए थे। टीम की ओर से अजमतुल्लाह उमरजई ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 64 रन बनाए। भारत की गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह सबसे सफल रहे। उन्होंने 3 विकेट अपने नाम किए। भारतीय गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में अफगानिस्तान पर दबाव बनाए रखा और उसे बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया। अभिषेक शर्मा की विस्फोटक पारी के दम पर भारत ने लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया और सीरीज में जीत के साथ शुरुआत की।

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