नई दिल्ली। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons को अब शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने Tata Sons की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी का दर्जा छोड़ने की मांग की थी।
Tata Sons ने 2024 में करीब 21,813 करोड़ रुपये का पूरा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का तर्क था कि जब उस पर कोई कर्ज नहीं है, तो उसे NBFC के नियमों और अनिवार्य लिस्टिंग से बाहर रखा जाना चाहिए। हालांकि, RBI ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
पूरे मामले को सवाल-जवाब से समझें
सवाल 1: Tata Sons ने NBFC का दर्जा छोड़ने की अर्जी क्यों दी थी?
जवाब: Tata Sons ने 2024 में अपना करीब 21,813 करोड़ रुपये का पूरा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का कहना था कि अब उस पर कोई कर्ज नहीं है, इसलिए उसे NBFC से जुड़े नियमों और शेयर बाजार में अनिवार्य लिस्टिंग की शर्त से छूट मिलनी चाहिए।
सवाल 2: RBI ने अर्जी क्यों खारिज की?
जवाब: RBI के नियमों के तहत बड़ी वित्तीय कंपनियों को उनकी संपत्ति के आधार पर अपर-लेयर कैटेगरी में रखा जाता है। Tata Sons की कुल संपत्ति निर्धारित सीमा से काफी अधिक है। इसी वजह से कंपनी को इस कैटेगरी से बाहर करने की मांग स्वीकार नहीं की गई।
सवाल 3: Tata Sons को कब तक लिस्ट होना था?
जवाब: RBI ने सितंबर 2022 में Tata Sons को अपर-लेयर NBFC की कैटेगरी में शामिल किया था। नियमों के अनुसार ऐसी कंपनी को 3 साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना होता है।
इस हिसाब से Tata Sons के लिए सितंबर 2025 तक लिस्टिंग की समयसीमा थी। कंपनी की ओर से दर्जे से बाहर निकलने की अर्जी लंबित रहने के कारण मामला आगे बढ़ता रहा। अब अर्जी खारिज होने के बाद लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी होगा।
सवाल 4: Tata Sons की लिस्टिंग से रिटेल निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?
जवाब: Tata Sons के शेयर बाजार में लिस्ट होने से आम निवेशकों को टाटा ग्रुप की कई बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों में अप्रत्यक्ष निवेश का मौका मिल सकता है।
इनमें Air India, Tata Electronics, Tata Digital और Tata Advanced Systems जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो फिलहाल सीधे शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं हैं।
सवाल 5: शेयरहोल्डर्स और कंपनी के वैल्यूएशन पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: Tata Sons की लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों का बाजार मूल्य तय होगा। इससे समूह की अनलिस्टेड कंपनियों की वैल्यूएशन को लेकर भी बाजार में ज्यादा स्पष्टता आ सकती है।
इसका असर Tata Sons की कुल वैल्यूएशन पर पड़ सकता है और कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी का बाजार मूल्य सामने आ सकता है।
सवाल 6: Shapoorji Pallonji Group पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: Shapoorji Pallonji (SP) Group की Tata Sons में करीब 18.4% हिस्सेदारी है। कंपनी के शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद इस हिस्सेदारी का बाजार मूल्य ज्यादा स्पष्ट रूप से सामने आएगा।
भविष्य में अगर SP Group अपनी हिस्सेदारी बेचकर या उसके आधार पर फंड जुटाना चाहता है, तो लिस्टेड शेयर होने से ऐसा करना पहले की तुलना में आसान हो सकता है।
अब Tata Sons के लिए क्या रास्ता है?
RBI की ओर से NBFC कैटेगरी से बाहर निकलने की मांग खारिज होने के बाद Tata Sons को अब नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। इसका सबसे बड़ा असर कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग पर पड़ेगा।
यानी टाटा ग्रुप की इस होल्डिंग कंपनी का IPO आने पर निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी की वैल्यूएशन कितनी तय होती है और उसके शेयरों की बाजार में क्या कीमत बनती है।
