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Five State Assembly Elections : 3 राज्यों में BJP अब तक नहीं जीत पाई

Five State Assembly Elections : 3 राज्यों में BJP अब तक नहीं जीत पाई

इस साल भारत के Five State Assembly Elections होने हैं, जिनमें से 3 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब तक सत्ता में नहीं आ सकी है। इन चुनावों के जरिए देश की करीब 17 प्रतिशत आबादी अपनी नई सरकार चुनेगी। किन राज्यों में होंगे चुनाव? इन राज्यों के चुनाव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेंगे। खास बात यह है कि कुछ राज्यों में BJP लगातार कोशिशों के बावजूद अब तक जीत दर्ज नहीं कर पाई है, ऐसे में इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प माना जा रहा है। जनता के सामने बड़े सवाल महंगाई, रोजगार, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे आम लोगों के लिए सबसे अहम हैं। हर राज्य में जनता यह तय करेगी कि वो बदलाव चाहती है या मौजूदा सरकार को एक और मौका। सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया में भी चुनावी साल साल 2026 सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनावी साल है। दुनिया के 36 देशों में इस साल चुनाव होने हैं, जहां करोड़ों लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ना तय है। क्यों अहम हैं ये चुनाव? इन 5 राज्यों के नतीजे आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल का संकेत देंगे। पार्टियों के लिए यह जनता का मूड समझने का बड़ा मौका है, वहीं आम लोगों के लिए अपने भविष्य की दिशा तय करने का। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Deva ने 20 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर, सुकमा–Bijapur में 14 माओवादी ढेर

Deva ने 20 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर, सुकमा–Bijapur में 14 माओवादी ढेर

कुख्यात नक्सली Deva ने अपने 20 साथियों के साथ आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। वहीं, अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 14 नक्सली मारे गए हैं। सुकमा में 12 नक्सली ढेर सुकमा जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 12 माओवादी मारे गए। मुठभेड़ के बाद इलाके से नक्सलियों के शव और हथियार बरामद किए गए हैं। बीजापुर में 2 नक्सली मारे गए इसी तरह बीजापुर जिले में हुई कार्रवाई में 2 नक्सली ढेर किए गए। सुरक्षाबलों ने दोनों के शवों के साथ हथियार भी जब्त किए हैं। लगातार चल रहा सर्च ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित करने तक अभियान जारी रहेगा। शांति की ओर एक बड़ा कदम देवा समेत 20 नक्सलियों का सरेंडर इस बात का संकेत है कि सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति असर दिखा रही है। यह कदम न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि इलाके में शांति और विकास की उम्मीद भी बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SPICE-1000

SPICE-1000 Weapon System दुश्मन पर दूर से सटीक वार करने वाली Indian Air Force की नई ताकत

भारत लगातार अपनी वायु शक्ति को आधुनिक बनाने में जुटा है और इसी कड़ी में SPICE-1000 Precision Guided Bomb एक अहम भूमिका निभाने जा रहा है। हाल ही में सरकार ने इस अत्याधुनिक हथियार प्रणाली की खरीद को मंज़ूरी दी है, जिससे भारतीय वायुसेना की long-range strike capability और भी मज़बूत होगी। SPICE-1000 आखिर है क्या? SPICE-1000 कोई साधारण बम नहीं है। यह इज़राइल की मशहूर डिफेंस कंपनी Rafael Advanced Defense Systems द्वारा विकसित एक Precision Guidance Kit है, जिसे पारंपरिक 1,000 पाउंड के बम पर लगाया जाता है। इस किट के लगते ही सामान्य बम एक high-accuracy smart bomb में बदल जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो SPICE-1000 पुराने बमों को नई तकनीक के साथ बेहद खतरनाक और सटीक हथियार बना देता है। कैसे करता है यह Smart Bomb काम? मिशन से पहले लक्ष्य की तस्वीरें और लोकेशन सिस्टम में पहले से फीड की जाती हैं। जब लड़ाकू विमान—जैसे Rafale, Su-30 MKI या Mirage-2000—सुरक्षित दूरी से बम छोड़ता है, तो: खास बात यह है कि SPICE-1000 GPS जैमिंग की स्थिति में भी असरदार रहता है, क्योंकि इसमें INS और इमेज-मैचिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। SPICE-1000 की प्रमुख खूबियाँ भारत के लिए क्यों है इतना अहम? भारत पहले ही SPICE सीरीज़ के हथियारों का इस्तेमाल कर चुका है। 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक में इन हथियारों ने अपनी क्षमता साबित की थी। अब SPICE-1000 की बड़ी संख्या में खरीद से: रणनीतिक रूप से क्या बदलता है? आज के युद्ध सिर्फ़ ताक़त के नहीं, बल्कि precision और technology के होते हैं। SPICE-1000 भारत को वही बढ़त देता है। यह हथियार दुश्मन को साफ़ संदेश देता है कि भारत बिना सीमा पार किए भी सटीक और प्रभावी जवाब देने में सक्षम है। SPICE-1000 केवल एक गाइडेड बम नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के लिए एक game-changer weapon system है। यह भारत की रक्षा रणनीति, deterrence capability और आधुनिक युद्ध तैयारियों को नई ऊँचाई देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pune

Pune Election नगर निगम चुनाव में टूटे पुराने गठबंधन, उभरी नई सियासत

पुणे (Pune) महानगरपालिका चुनाव 2025 इस बार सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला बड़ा संकेत बनता जा रहा है। शहर की गलियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक ही सवाल गूंज रहा है — इस बार किसका साथ, किसके खिलाफ? पुराने गठबंधन टूटे, नई रणनीति बनी अब तक महाराष्ट्र की राजनीति दो खेमों में बंटी दिखती थी —महा युति और महा विकास आघाड़ी (MVA)। लेकिन पुणे के नगर निगम चुनाव में यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है। यहां पार्टियां अपने पुराने फॉर्मूले छोड़कर स्थानीय समीकरणों के हिसाब से नए गठबंधन बना रही हैं। BJP–Shiv Sena (Shinde) Alliance: साथ लेकिन पूरी तरह सहज नहीं Pune में बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि, अंदरखाने सीटों को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आ रही हैं। जमीन पर कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बना पाना इस गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। Pawar Family Politics: सियासत में फिर करीब इस चुनाव की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर पवार परिवार से जुड़ी है। अजित पवार और शरद पवार गुट के बीच पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में स्थानीय स्तर पर साथ आने के संकेत मिल रहे हैं। अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय लिख सकता है। Congress–Thackeray Group: पुणे में अलग रास्ता कांग्रेस ने भी Pune में पारंपरिक लाइन से हटकर फैसला लिया है। यहां पार्टी ठाकरे गुट के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। यह गठबंधन राज्य के अन्य शहरों से अलग है और साफ बताता है कि कांग्रेस इस बार ग्राउंड रिपोर्ट को प्राथमिकता दे रही है। Pune Politics में Three-Corner Fight इन बदले हुए समीकरणों के चलते पुणे महानगरपालिका चुनाव अब दो नहीं बल्कि तीन प्रमुख राजनीतिक मोर्चों के बीच मुकाबला बनता जा रहा है: इस तीन-तरफा मुकाबले ने चुनाव को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। क्यों अहम है Pune Municipal Election? Pune को इस बार राजनीतिक विश्लेषक महाराष्ट्र की ‘Political Testing Lab’ कह रहे हैं। यहां जो भी समीकरण कामयाब होंगे, उनकी झलक आने वाले नगर निगम, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकती है। आम मतदाता के लिए यह चुनाव सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि शहर के भविष्य, विकास और स्थिर नेतृत्व का सवाल भी है। Pune महानगरपालिका चुनाव 2025 यह साबित कर रहा है कि अब राजनीति सिर्फ बड़े गठबंधनों तक सीमित नहीं रही। स्थानीय मुद्दे, चेहरे और भरोसा ही जीत का असली मंत्र बनते जा रहे हैं। अब देखना यह है कि पुणे की जनता किस नए राजनीतिक प्रयोग पर अपनी मुहर लगाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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New Year 2026

New Year 2026 Celebration विश्वभर में खुशियों और उत्सवों के साथ शुरुआत

नया साल 2026 (New Year 2026) दुनिया भर में बड़े उत्साह और खुशियों के साथ शुरू हुआ। सबसे पहला नया साल किरिबाती (Kiritimati Island, Kiribati) में मनाया गया, जहां सूर्योदय और रंग-बिरंगी आतिशबाज़ियों के बीच लोग नए साल का स्वागत कर रहे थे। यह जश्न पूरी दुनिया के लिए नई उम्मीद और ऊर्जा का प्रतीक बन गया। एशिया में New Year 2026 Celebration टोक्यो, जापान: लोग हत्सुमोदे (Hatsumode) के लिए मंदिर गए और घंटियाँ बजाकर बीते साल की बुराइयों को दूर किया।बैंकाक, थाईलैंड: रात के समय आकाश में उड़ते लालटेन और नदी में तैरते दीपकों ने नया साल 2026 खास बना दिया। अमेरिका में New Year Parties और Family Celebration न्यूयॉर्क सिटी: टाइम्स स्क्वायर बॉल ड्रॉप ने लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया।रियो डी जनेरियो, ब्राजील: सफेद कपड़ों में सजे लोग सांबा, आतिशबाज़ी और समुद्र के किनारे नए साल 2026 का जश्न मना रहे थे।मेक्सिको: पारंपरिक व्यंजन और प्रार्थनाओं के साथ परिवार नए साल का स्वागत कर रहे थे। अफ्रीका में Cultural New Year Celebration केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका: रंग-बिरंगे परेड और संगीत ने शहर को जीवंत बना दिया।लागोस, नाइजीरिया: संगीत और सामुदायिक पार्टियों ने नए साल को यादगार बनाया। नया साल 2026 की खास बातें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Swiggy

Swiggy-Zomato Delivery Partners हड़ताल New Year Eve 2026 में डिलीवरी प्रभावित

नए साल की पूर्व संध्या पर यानी New Year Eve 2026 पर देशभर में गिग वर्कर्स (Delivery Partners) हड़ताल करने वाले हैं। इस हड़ताल का असर Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto और अन्य Quick Commerce Apps पर महसूस होगा। दिल्ली-एनसीआर सहित बड़े शहरों में डिलीवरी सेवाओं में डिले और रुकावटें देखने को मिल सकती हैं। हड़ताल के पीछे वजह वर्कर्स ने अपनी सुरक्षा और न्यायसंगत कमाई के लिए कई मुद्दों पर हड़ताल का निर्णय लिया है: अन्य प्रमुख मांगें Gig and Platform Services Workers Union (GIPSWU) ने वर्कर्स के लिए और भी कई मांगें रखी हैं: हड़ताल का असर वर्कर्स की दुविधा कुछ वर्कर्स के लिए हड़ताल करना आसान नहीं है, क्योंकि इससे उनकी पहले से कमाई प्रभावित होती है। गिग वर्कर्स की यह हड़ताल New Year Eve 2026 पर Quick Commerce और Food Delivery Services को प्रभावित कर सकती है। ग्राहकों को देर या ऑर्डर कैंसलेशन की संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए। व्यवसायिक स्तर पर भी रेस्टोरेंट्स और delivery platforms तैयारी में हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Fog & Pollution Crisis साल के आखिरी दिन कोहरे ने रोकी रफ्तार, उड़ानें रद्द

साल के आखिरी दिन राजधानी दिल्ली (Delhi) ने एक बार फिर घने कोहरे (Dense Fog) और खतरनाक वायु प्रदूषण (Air Pollution) का सामना किया। सुबह होते ही दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई, जिससे आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। ठंड, नमी और शांत हवाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया। Delhi Fog का असर: सड़क से लेकर आसमान तक परेशानी सुबह के समय Delhi, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के कई हिस्सों में कोहरा इतना घना रहा कि सड़क पर गाड़ियाँ रेंगती नजर आईं। कई जगहों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही कोहरे को लेकर Yellow और Orange Alert जारी किया था। ऑफिस जाने वाले लोग देर से निकले, स्कूल बसें धीमी रफ्तार में चलीं और हाईवे पर वाहनों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। Flights Cancelled: IGI Airport पर सबसे ज्यादा असर घने कोहरे का सबसे बड़ा असर Indira Gandhi International Airport पर दिखा। कम दृश्यता के कारण लगभग 150 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई फ्लाइट्स घंटों देरी से चलीं।IndiGo, SpiceJet और अन्य एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी कि वे घर से निकलने से पहले Flight Status जरूर चेक करें। नए साल से पहले यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति काफी परेशानी भरी रही। Delhi AQI: हवा बनी सेहत के लिए खतरा कोहरे के साथ-साथ Delhi की हवा भी बेहद खराब रही। राजधानी का AQI ज्यादातर इलाकों में “Very Poor” (300–400) दर्ज किया गया, जबकि कुछ जगहों पर यह “Severe” (400+) स्तर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में हवा की रफ्तार कम होने और नमी बढ़ने से प्रदूषण जमीन के पास ही जमा हो जाता है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। Health Advisory: बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा डॉक्टरों ने खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सुबह-शाम बाहर न निकलने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि: New Year Weather Outlook: क्या मिलेगी राहत? मौसम विभाग के अनुसार नए साल के शुरुआती दिनों में भी कोहरा और खराब हवा बनी रह सकती है। हालांकि हल्की बारिश या तेज हवा चलने की स्थिति में AQI में कुछ सुधार संभव है। साल 2025 का अंत दिल्ली (Delhi) के लिए एक बार फिर Fog और Pollution Crisis के साथ हुआ। यह हालात याद दिलाते हैं कि बदलता मौसम और बढ़ता प्रदूषण आम लोगों की जिंदगी को कैसे प्रभावित कर रहा है। फिलहाल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amit Shah का ममता सरकार पर हमला: बोले- बंगाल में घुसपैठ रोकने में नाकाम

Amit Shah का ममता सरकार पर हमला: बोले- बंगाल में घुसपैठ रोकने में नाकाम

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार राज्य में अवैध घुसपैठ को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। शाह ने दावा किया कि बंगाल की सीमाएं असुरक्षित हैं और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अमित शाह ने कहा, “अगर पश्चिम बंगाल में हमारी सरकार बनी तो हालात पूरी तरह बदल जाएंगे। उस समय न तो कोई घुसपैठिया घुस पाएगा और न ही परिंदा भी पर मार सकेगा।” उन्होंने साफ कहा कि BJP की सरकार बनने पर अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा। गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के चलते घुसपैठ पर आंखें मूंदे हुए है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की सुरक्षा, संस्कृति और रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है। अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि BJP की प्राथमिकता देश और राज्य की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की जाएगी और कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CWC

कांग्रेस CWC बैठक 2025 Rahul-Sonia की मौजूदगी में रणनीति और जन आंदोलन की तैयारी

कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक समिति, कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) 2025 की अहम बैठक नई दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार की नीतियों का विश्लेषण करना और पार्टी के आगामी विरोध अभियान की रूपरेखा तय करना है। बैठक में प्रमुख नेता बैठक में शामिल नेता: कुछ नेताओं को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया, जैसे डीके शिवकुमार, जो इस बैठक के माहौल में चर्चा का विषय बने। MGNREGA और “जी-राम-जी” बिल पर रणनीति बैठक का मुख्य एजेंडा MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) और केंद्र सरकार द्वारा पारित “विकसित भारत-जी राम जी बिल, 2025” रहा। कांग्रेस का आरोप है कि यह बिल मनरेगा की मूल भावना और ग्रामीण रोजगार की सुरक्षा को कमजोर कर रहा है। बैठक में तय किया गया कि जनवरी 2026 से पूरे देश में “MGNREGA बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण जनता को जागरूक करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। अन्य राजनीतिक मुद्दे बैठक में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय चुनावों की रणनीति, बिहार विधानसभा चुनाव के अनुभव और अरावली संरक्षण जैसे स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई। वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि बैठक में राजनीतिक विमर्श और बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। निष्कर्ष कुल मिलाकर, यह बैठक कांग्रेस की अगली रणनीति और जन आंदोलन की रूपरेखा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी का फोकस ग्रामीण रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा पर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Operation Aaghat 3.0 में Police की सख्ती, हथियार-नशा बरामद, 285 Arrest

नए साल की रौनक से पहले राजधानी दिल्ली (Delhi) में सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने Operation Aaghat 3.0 के तहत एक बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए शहर के कई संवेदनशील इलाकों में रातभर छापेमारी की। इस अभियान में 285 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 500 से ज्यादा संदिग्धों को निवारक हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस विशेष ड्राइव का उद्देश्य नए साल के जश्न के दौरान किसी भी तरह की आपराधिक घटना को रोकना और आम लोगों को सुरक्षित माहौल देना था। ऑपरेशन खासतौर पर दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के उन इलाकों में चलाया गया, जहां पहले अपराध की घटनाएं सामने आती रही हैं। Arms Act से लेकर NDPS तक, कई मामलों में केस दर्ज ऑपरेशन के दौरान पकड़े गए आरोपियों पर Arms Act, NDPS Act, Excise Act और Gambling Act जैसी धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने इस कार्रवाई में 116 आदतन अपराधियों, जिन्हें स्थानीय भाषा में “बैड कैरेक्टर” कहा जाता है, को भी हिरासत में लिया। हथियार, शराब और ड्रग्स की बड़ी बरामदगी छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाली बरामदगियां लगीं। इनमें शामिल हैं: आम लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन आघात 3.0 का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ना और लोगों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना है। पुलिस का कहना है कि ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे, खासकर त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान। नए साल के मौके पर दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि जश्न में कोई खलल न पड़े। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Update राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी

देश के कई हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। राजस्थान में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी देखने को मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट की खबर है। मौसम में आए इस बदलाव से कहीं गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, तो कहीं किसानों और यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ ओलावृष्टि राजस्थान के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से मौसम सुहावना होने के साथ ठंडा भी हो गया है। अचानक बदले मौसम का असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी, पहाड़ों पर बढ़ी ठंड उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यहां जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा की तैयारी सावधानी से करनी चाहिए। खासतौर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। UP-Bihar Rain Alert: इन राज्यों में भी बदल सकता है मौसम राजस्थान और उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को लेकर अलर्ट की खबर सामने आई है। बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। इसलिए अपने इलाके के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें। किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह बदलते मौसम को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। वहीं, पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री मौसम और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। Weather Update Today: आगे कैसा रहेगा मौसम? अक्टूबर के मध्य में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का रुख बदल दिया है। राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तराखंड में बर्फ गिरने के बीच दूसरे राज्यों के लोगों की नजर भी बारिश के पूर्वानुमान पर है। मौसम से जुड़ी योजनाएं बनाने से पहले अपने शहर का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament

Parliament Special Session: इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का सत्र, लोकसभा सीटें बढ़ाने पर नजर

संसद (Parliament) के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज होने की चर्चा है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार जरूरी समर्थन जुटा पाएगी? अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में सरकार के सामने अब राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा फिलहाल लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। प्रस्तावित योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की बात सामने आई है। इस बदलाव का संबंध महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है। अगर लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो संसदीय क्षेत्रों और राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या और उनके बंटवारे को लेकर स्थिति विधेयक के प्रावधानों तथा संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। Delimitation Bill क्या है और इससे क्या बदलेगा? परिसीमन यानी Delimitation का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना है। इसके जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जा सकता है। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि परिसीमन का असर संसद में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने चिंता जताई है कि आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनका मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार की प्रस्तावित योजना में लोकसभा की सीटें बढ़ाने का मुद्दा शामिल है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं का किस तरह समाधान किया जाता है। महिला आरक्षण 2029 से लागू करने की तैयारी? महिला आरक्षण भी इस पूरे मामले का एक अहम हिस्सा है। संसद ने 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पारित किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इसी वजह से परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। अप्रैल में क्यों पास नहीं हो पाया था बिल? अप्रैल 2026 में लोकसभा में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। इसके बावजूद जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक पारित नहीं हुआ। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों की जरूरत होती है। कुछ संविधान संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से मंजूरी लेना भी जरूरी होता है। यानी सरकार के लिए केवल सांसदों की साधारण बहुमत संख्या पर्याप्त नहीं होगी। उसे संवैधानिक नियमों के मुताबिक जरूरी समर्थन हासिल करना होगा। DMK समेत दूसरे दलों से संपर्क की चर्चा मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार विधेयकों के समर्थन में राजनीतिक दलों से बातचीत कर रही है। इसमें डीएमके (DMK) और कुछ छोटे दलों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन दलों के अंतिम रुख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंताओं में परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों का प्रतिनिधित्व और प्रस्तावित बदलावों पर व्यापक चर्चा शामिल है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने पर संसद में इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। कब हो सकता है संसद का Special Session? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। 26 और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित BRICS Parliamentary Forum के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सत्र की तारीखें तय किए जाने की संभावना भी जताई गई है। लेकिन अभी तक विशेष सत्र का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए तारीखों और विधेयकों को लेकर सामने आ रही जानकारियों को संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब सरकार के सामने क्या चुनौती है? सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, विधेयकों के लिए जरूरी संवैधानिक समर्थन जुटाना और दूसरी, परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंताओं पर सहमति बनाना। अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी, महिला आरक्षण और राज्यों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे फिर से चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा और राजनीतिक दलों के रुख पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में वर्ल्ड स्पाइन डे पर डॉक्टरों ने निकाली साइक्लोथॉन, सर्जरी के बाद मरीजों ने भी चलाई साइकिल

इंदौर: वर्ल्ड स्पाइन डे के अवसर पर शुक्रवार को इंदौर में रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए डॉक्टरों ने साइक्लोथॉन निकाली। इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन (ISSA) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 70 से 80 वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन, स्पाइन सर्जन और एनेस्थेटिस्ट शामिल हुए। साइक्लोथॉन के जरिए लोगों को नियमित व्यायाम, फिटनेस और रीढ़ की हड्डी की देखभाल का संदेश दिया गया। साथ ही, स्पाइन सर्जरी को लेकर लोगों के मन में मौजूद डर और भ्रांतियों को दूर करने की अपील की गई। स्पाइन सर्जरी करा चुके मरीजों ने भी लिया हिस्सा इस साइक्लोथॉन की खास बात यह रही कि हाल ही में स्पाइन सर्जरी करा चुके एक-दो मरीज भी डॉक्टरों के साथ साइकिल चलाते नजर आए। उनकी भागीदारी के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उचित इलाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रिकवरी के बाद मरीज दोबारा सक्रिय जीवनशैली अपना सकते हैं। ISSA के सचिव डॉ. अविनाश जैन ने बताया कि समाज में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ लोग ऑपरेशन के बाद सामान्य जीवन नहीं जी पाने की आशंका के कारण इलाज कराने से हिचकते हैं। ऐसे में सर्जरी के बाद मरीजों का साइकिल चलाना लोगों का भरोसा बढ़ाने वाला संदेश है। वरिष्ठ स्पाइन सर्जनों ने किया नेतृत्व साइक्लोथॉन का नेतृत्व ISSA के अध्यक्ष डॉ. एसके लूनावत, उपाध्यक्ष डॉ. प्रसाद पटगांवकर और सचिव डॉ. अविनाश जैन ने किया। एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स ऑफ इंदौर (AOSI) के सचिव डॉ. प्रणव महाजन भी आयोजन में शामिल हुए। वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मसंद और डॉ. मनचंदा सहित अन्य चिकित्सकों ने भी साइक्लोथॉन में भाग लेकर जागरूकता अभियान को समर्थन दिया। साइकिल राइडर्स के साथ यातायात पुलिस ने दिया सहयोग कार्यक्रम में शहर के सक्रिय साइकिल राइडर्स ने भी हिस्सा लिया। डॉक्टरों ने नियमित शारीरिक गतिविधि को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और लोगों से अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करने की अपील की। साइक्लोथॉन के सुरक्षित और सुचारू संचालन में इंदौर यातायात पुलिस ने सहयोग किया। आयोजन के अंत में ISSA की ओर से इसमें शामिल चिकित्सकों, एनेस्थीसिया क्लब के सदस्यों, साइकिल राइडर्स और प्रशासन का आभार जताया गया।

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