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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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Skoda

Skoda RS Heritage Returns: भारत में आएगी 7-Seater Kodiaq RS SUV, जानें डिटेल्स

मुंबई में Škoda Auto ने अपनी मशहूर RS (Rally Sport) विरासत को भारत में एक नए स्तर पर ले जाने का ऐलान किया है। कंपनी जल्द ही अपनी नई Kodiaq RS SUV लॉन्च करने जा रही है, जो परफॉर्मेंस, स्पेस और लग्ज़री का एक मजबूत कॉम्बिनेशन लेकर आएगी। यह SUV सिर्फ एक नई गाड़ी नहीं, बल्कि Škoda की 50 साल से ज्यादा पुरानी RS रेसिंग विरासत और 125 साल से अधिक के मोटरस्पोर्ट इतिहास की आगे बढ़ती कहानी है। इसकी बुकिंग 22 जून 2026 से शुरू होगी। RS DNA के साथ आई एक दमदार SUV Škoda की RS लाइनअप हमेशा से उन लोगों के लिए रही है जो ड्राइविंग में सिर्फ सफर नहीं, बल्कि एक एक्सपीरियंस ढूंढते हैं। नई Kodiaq RS में कंपनी ने वही DNA और भी शार्प अंदाज़ में पेश किया है—जहां एक तरफ आपको मिलती है 7-सीटर फैमिली SUV की प्रैक्टिकलिटी, वहीं दूसरी तरफ मिलता है एक स्पोर्टी और एग्रेसिव परफॉर्मेंस का फील। Škoda Auto India का दावा है कि यह SUV भारत में अब तक की सबसे तेज़ Škoda SUV हो सकती है। कंपनी का नजरिया: सिर्फ कार नहीं, एक Emotion Škoda Auto India के ब्रांड डायरेक्टर आशीष गुप्ता ने बताया कि RS बैज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक “emotion of performance” है। उनके मुताबिक, भारत में Octavia RS को लोगों ने जिस तरह प्यार दिया, वह इस सेगमेंट में बहुत खास था। पिछली Octavia RS कुछ ही मिनटों में पूरी तरह बिक गई थी, जो यह दिखाता है कि भारत में परफॉर्मेंस कारों का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। अब Kodiaq RS के साथ कंपनी उसी भरोसे और जुनून को आगे बढ़ा रही है। परफॉर्मेंस + 4×4 का पावरफुल कॉम्बिनेशन Kodiaq RS को खास बनाते हैं इसके कई मजबूत फीचर्स: यह SUV खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो एक ही कार में फैमिली कम्फर्ट और स्पोर्ट्स कार वाला thrill चाहते हैं। Motorsport Heritage जो इसे खास बनाता है Škoda का मोटरस्पोर्ट इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। यही वजह है कि RS मॉडल्स सिर्फ दिखने में स्पोर्टी नहीं होते, बल्कि उनके अंदर रेसिंग-ग्रेड इंजीनियरिंग भी होती है। ब्रांड की Kylaq, Kushaq, Slavia, Kodiaq और Octavia RS जैसी कारों ने ट्रैक पर अपनी परफॉर्मेंस साबित की है। Coimbatore के CoASTT ट्रैक पर कंपनी ने एक रिकॉर्ड भी बनाया था, जिसमें सभी मॉडल्स ने मिलकर तेज़ लैप टाइम हासिल किया और अपनी इंजीनियरिंग क्षमता को साबित किया। क्यों खास है Kodiaq RS? Kodiaq RS को अगर आसान भाषा में समझें, तो यह उन लोगों के लिए है जो: यानी एक ही गाड़ी में comfort + speed + control + luxury का पूरा पैकेज। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
चांदी

Gold Silver Rate Today: चांदी ₹4,421 टूटी, सोना भी हुआ सस्ता

सोना और चांदी के बाजार में आज अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। लगातार बदलते ग्लोबल संकेतों के बीच कीमती धातुओं की कीमतें टूट गईं, जिससे आम निवेशकों से लेकर ज्वैलरी कारोबारियों तक सभी प्रभावित हुए हैं। बाजार में आज का दिन पूरी तरह “ड्रॉप” वाला रहा। चांदी में तेज गिरावट, ₹2.47 लाख के करीब पहुंची कीमत चांदी के दामों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई। जानकारी के मुताबिक चांदी करीब ₹4,421 प्रति किलो सस्ती होकर लगभग ₹2.47 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। लगातार कमजोर मांग और अंतरराष्ट्रीय दबाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। सोना भी टूटा, ₹552 की गिरावट सोने की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। आज सोना करीब ₹552 सस्ता होकर लगभग ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। इससे शादी-ब्याह और ज्वैलरी खरीदने वाले ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए यह नुकसान का संकेत माना जा रहा है। कैरेट के हिसाब से सोने के रेट आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम? बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं: आगे क्या हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोना-चांदी के दामों में फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हालात और नीतिगत फैसले इस ट्रेंड को सीधे प्रभावित करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मदनमहल रेलवे स्टेशन की लिफ्ट में फंसे यात्री, 50 मिनट बाद सुरक्षित निकाले गए

जबलपुर के तेजी से विकसित हो रहे मदनमहल रेलवे स्टेशन पर रविवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर लगी लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई और उसमें सवार यात्री अंदर फंस गए। करीब 50 मिनट तक लिफ्ट में बंद रहे यात्रियों को गर्मी और घुटन का सामना करना पड़ा। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, रात में अमरकंटक एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन से बाहर निकलने के लिए लिफ्ट का उपयोग कर रहे थे। इसी दौरान करीब 15 यात्री अपने सामान के साथ लिफ्ट में सवार हो गए। क्षमता से अधिक भार होने के कारण लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और लॉक हो गई। लिफ्ट बंद होते ही अंदर मौजूद यात्रियों में घबराहट फैल गई। बच्चों और महिलाओं के रोने-चिल्लाने की आवाजें बाहर तक सुनाई देने लगीं। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। मुख्य स्टेशन से बुलाना पड़ा विशेषज्ञ मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने लिफ्ट को चालू करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद मुख्य रेलवे स्टेशन से लिफ्ट विशेषज्ञ को बुलाया गया। तकनीकी सुधार के बाद करीब 50 मिनट बाद लिफ्ट को सुरक्षित नीचे लाया गया और सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। ओवरलोडिंग बनी वजह रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लिफ्ट में क्षमता से अधिक यात्री और भारी सामान होने के कारण तकनीकी समस्या आई। घटना रात करीब 9:40 बजे से 10:30 बजे के बीच की बताई जा रही है। यात्रियों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल घटना के बाद यात्रियों ने स्टेशन पर तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे व्यस्त रेलवे स्टेशन पर हर समय तकनीकी स्टाफ मौजूद रहना चाहिए ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि लिफ्ट का उपयोग करते समय निर्धारित क्षमता और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
G7 Summit

G7 Summit ट्रम्प-मेलोनी ने फ्रांस में की एंट्री, मोदी आज पहुंचेंगे Trump–Modi Meet पर दुनिया की नजर

फ्रांस के खूबसूरत शहर Evian-les-Bains में चल रहे G7 Summit 2026 में इस बार वैश्विक राजनीति का माहौल काफी गर्म है। दुनिया के कई बड़े नेता पहले ही फ्रांस पहुंच चुके हैं, जबकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इस हाई-प्रोफाइल समिट में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी पहले ही फ्रांस में मौजूद हैं। इस बार का G7 सिर्फ एक मीटिंग नहीं, बल्कि आने वाले समय की वैश्विक नीतियों की दिशा तय करने वाला मंच माना जा रहा है। Trump–Modi Meeting: 16 महीने बाद हो सकती है अहम मुलाकात इस समिट की सबसे बड़ी चर्चा यही है कि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच करीब 16 महीने बाद आमने-सामने मुलाकात हो सकती है। सूत्रों के अनुसार: यह मुलाकात सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार समीकरणों पर असर डाल सकती है। G7 Summit Agenda: किन मुद्दों पर होगी बड़ी चर्चा? इस साल G7 समिट में कई अहम वैश्विक मुद्दे शामिल किए गए हैं: इन मुद्दों पर बड़े फैसले आने की उम्मीद जताई जा रही है। फ्रांस की मेजबानी और हाई-लेवल डिप्लोमेसी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस समिट की मेजबानी कर रहे हैं। उन्होंने दुनिया के प्रमुख नेताओं के लिए कई bilateral meetings की व्यवस्था की है ताकि अलग-अलग देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। फ्रांस की कोशिश है कि इस समिट से: भारत के लिए क्यों खास है G7 Summit 2026? भारत की भागीदारी इस बार कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है:

महिला पत्रकार के खिलाफ FIR और चार्जशीट रद्द, हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करते हुए कहा है कि बिना किसी ठोस कारण के जांच और चार्जशीट दाखिल करने में 6 साल से अधिक की देरी करना आरोपी को प्रताड़ित करने के समान है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले त्वरित न्याय और शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन माना। यह फैसला रमेश सिन्हा और रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। 2018 की घटना से जुड़ा मामला याचिकाकर्ता श्रिया पांडेय वर्ष 2018 में एक न्यूज चैनल में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थीं। उस दौरान पुलिसकर्मियों का आंदोलन चल रहा था। 20 जून 2018 को आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों की पत्नियों को महिला थाने में बैठाए जाने की सूचना मिलने पर श्रिया अपनी टीम के साथ जानकारी लेने महिला थाना पहुंची थीं। पत्रकार पर दर्ज कर दिया गया था केस याचिका के अनुसार, जानकारी मांगने पर पुलिसकर्मियों ने सहयोग नहीं किया और बाद में श्रिया पांडेय के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर दिया गया था। हाईकोर्ट पहुंची पत्रकार पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए श्रिया पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना वर्ष 2018 की थी, जबकि पुलिस ने चार्जशीट नवंबर 2024 में पेश की। इस छह साल की देरी को लेकर पुलिस विभाग कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका। कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मिला अदालत ने केस डायरी और चार्जशीट का अवलोकन करने के बाद कहा कि पूरा मामला केवल पुलिसकर्मियों और उनसे जुड़े गवाहों के बयानों पर आधारित था। घटनास्थल पर कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं और पत्रकार द्वारा अपराध किए जाने का कोई प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। कानून के दुरुपयोग पर अदालत की टिप्पणी डिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसे मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल तक मुकदमे की प्रक्रिया में उलझाकर रखना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

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