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Pragya Thakur

Supreme Court Closes Plea Against Pragya Thakur’s Bail, Final Verdict in Malegaon Blast Case Awaited

Supreme Court ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में मिली ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट यानी एनआईए अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है, इसलिए अब टॉप कोर्ट का हस्तक्षेप करना ठीक नहीं होगा। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि प्रज्ञा ठाकुर की ज़मानत रद्द की जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “जब निचली अदालत इस पर फैसला देने वाली है, तो हम इसमें दखल नहीं दे सकते।” सितंबर 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए धमाकों में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। बम मोटरसाइकिल पर रखे गए थे। इस मामले में प्रज्ञा ठाकुर को आरोपी बनाया गया था। उन्हें कई साल जेल में रहना पड़ा, फिर 2017 में उन्हें ज़मानत मिली। आज वे भोपाल से सांसद हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि एनआईए कोर्ट ने पूरी सुनवाई कर ली है और अब वो जल्द ही फैसला सुनाएगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का दखल देना ज़रूरी नहीं है। यह फैसला प्रज्ञा ठाकुर के लिए फिलहाल राहत भरा है, लेकिन असली फैसला एनआईए कोर्ट का होगा – जो ये तय करेगा कि वो दोषी हैं या नहीं। यह मामला सिर्फ कानून की किताबों तक सीमित नहीं है। इसमें उन परिवारों की भी बात है जिन्होंने 2008 में अपनों को खोया। पिछले 16 सालों से वे इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, प्रज्ञा ठाकुर, जो अब एक सांसद हैं, खुद को निर्दोष बताती रही हैं। अब सबकी निगाहें एनआईए कोर्ट के आखिरी फैसले पर टिकी हैं।
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Vizhinjam

पीएम मोदी ने किया Vizhinjam International Port राष्ट्र को समर्पित – भारत का पहला Deep Water Transshipment Port अब केरल में

तिरुवनंतपुरम (केरल), 2 मई 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के तट पर बने Vizhinjam International Seaport को देश को समर्पित किया। यह बंदरगाह भारत का पहला Deep Water Transshipment Port है और इसे भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक Game Changer माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अडाणी ग्रुप के सीईओ करण अडाणी भी मौजूद रहे। PM Modi Kerala Visit: Vizhinjam Port से भारत को क्या मिलेगा? विजिंजम पोर्ट की गहराई 24 मीटर है और यह दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह पोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल माइल्स दूर है, जिससे भारत को अब कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 5000+ रोजगार और ₹5000 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट इस प्रोजेक्ट से केरल और भारत दोनों को जबरदस्त आर्थिक और रोजगार लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, यह बंदरगाह 5,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देगा और लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों को भी बूस्ट करेगा। केरल सरकार ने इसके लिए ₹5,000 करोड़ का विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज घोषित किया है, जिसमें सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी को भी सुधारा जाएगा। 10 KM रेलवे टनल और Smart Cargo Handling विजिंजम पोर्ट को Balaramapuram स्टेशन से जोड़ने के लिए 10.2 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन प्रस्तावित है, जिसमें 9.2 किमी लंबी सुरंग (Tunnel) होगी। इससे माल की आवाजाही आसान, तेज़ और सुरक्षित होगी। यह परियोजना पर्यावरण और सामाजिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में है। Adani Ports और सरकार की मजबूत साझेदारी यह पोर्ट भारत सरकार और निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Adani Ports & SEZ Limited की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है। यह एक Public-Private Partnership (PPP) मॉडल का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी कुल लागत करीब ₹8,867 करोड़ है। करण अडाणी ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के “Maritime Amrit Kaal 2047” विजन का अहम हिस्सा बताया और कहा कि यह भारत को आत्मनिर्भर समुद्री राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। PM Modi का संदेश: “विजिंजम भारत की शक्ति का प्रतीक है” प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा:
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WAVES 2025

WAVES 2025 समिट मुंबई में शुरू: भारत बनेगा Global Entertainment Hub, बोले PM मोदी

1 मई 2025 — मुंबई के जिओ वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आज से शुरू हुआ ‘WAVES 2025’ (World Audio Visual and Entertainment Summit) — एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच जो भारत को ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह चार दिवसीय समिट 4 मई तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर कहा, “भारत की रचनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता अब वैश्विक पहचान पा रही है। WAVES 2025 इस बदलाव को और मजबूत करेगा।” PM मोदी ने इस समिट की घोषणा पहले ‘मन की बात’ के 117वें एपिसोड में की थी, और तब से देशभर में इसकी चर्चा जोरों पर है। क्या है WAVES 2025? WAVES 2025 एक अंतरराष्ट्रीय समिट है जिसमें दुनिया भर के मीडिया हाउस, फिल्म निर्माता, एनीमेशन और गेमिंग इंडस्ट्री के दिग्गज, तकनीकी विशेषज्ञ और निवेशक भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य भारत को ऑडियो-विज़ुअल और मनोरंजन उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है। सम्मलेन के प्रमुख उद्देश्य: किसने क्या कहा? भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर हॉलीवुड, बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के टॉप चेहरों तक—हर कोई इस समिट को भारत के लिए “गेम-चेंजर” मान रहा है। यह मंच भारत की soft power को बढ़ावा देगा और दुनिया को यह दिखाएगा कि हम न केवल कंटेंट का उपभोग करते हैं, बल्कि अब उसे गढ़ते भी हैं। पहले गोवा, अब मुंबई गौरतलब है कि यह समिट पहले नवंबर 2024 में गोवा में होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे मुंबई में मई 2025 के लिए रीशेड्यूल किया गया — ताकि अधिक प्रतिभागियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सके। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Supreme Court

Supreme Court ने Pahalgam Terror Attack की Judicial Inquiry वाली PIL को किया खारिज, कहा – “Desh ko Jodne ka Waqt Hai”

1 मई 2025 – Supreme Court ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे गैर-ज़िम्मेदार बताते हुए कहा कि ऐसे वक्त में सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने वाली याचिकाएं नहीं लाई जानी चाहिए। Supreme Court ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को सख्त शब्दों में खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे समय में इस तरह की याचिकाएं देश की सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल गिरा सकती हैं। 22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिनमें कई पर्यटक भी शामिल थे। इस दर्दनाक घटना के बाद तीन नागरिक – मोहम्मद जुनैद, फतेह कुमार साहू और विक्की कुमार – ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की मांग की थी। लेकिन जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस याचिका को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और स्पष्ट शब्दों में कहा: “ऐसी याचिकाएं सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ती हैं। यह समय एकजुट होकर आतंक के खिलाफ खड़े होने का है, न कि जांच के नाम पर अफसरों को कटघरे में खड़ा करने का। देश के लिए जिम्मेदार बनिए।” कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि न्यायिक जांच की मांग क्यों की जा रही है, जबकि जांच की ज़िम्मेदारी पहले से ही एजेंसियों के पास है। “हम न्याय करते हैं, जांच नहीं। रिटायर्ड जज जांच के विशेषज्ञ नहीं होते। हर मामले में न्यायिक आयोग बना देना समाधान नहीं है,” कोर्ट ने कहा। इन सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। Supreme Court ने याचिका को वापस लेने की अनुमति तो दी, लेकिन साफ कर दिया कि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दाखिल करने से पहले राष्ट्रीय भावना और ज़िम्मेदारी को समझना ज़रूरी है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Census

Caste Census अब होगी Main Census का हिस्सा: 1931 के बाद पहली बार होगा जातीय डेटा कलेक्शन

देश की अगली Census अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी — यह भारत के सामाजिक ताने-बाने को एक नई पारदर्शिता के साथ दुनिया के सामने लाएगी। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब जातीय आंकड़ों की गिनती भी मुख्य जनगणना का हिस्सा होगी। यह फैसला न केवल सरकार की सोच में बदलाव दर्शाता है, बल्कि देश की करोड़ों जातियों और उपजातियों को पहली बार मुख्य धारा के डेटा में लाने की कोशिश भी है। अब हर जाति की होगी गिनती, खुलेगा असली सामाजिक चित्र केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि आगामी Census में अब जातीय विवरण भी दर्ज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा, “समाज में बहुत सारी योजनाएं जातीय आधार पर बनती हैं, लेकिन ठोस आंकड़े नहीं होने के कारण असली लाभार्थी वंचित रह जाते हैं।“ अब पहली बार केंद्र सरकार यह जिम्मेदारी खुद उठाकर एक भरोसेमंद जातीय डेटा उपलब्ध कराएगी। राज्यों के जातीय सर्वे को बताया ‘राजनीतिक नाटक’ मंत्री ने कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में हुए जातीय सर्वेक्षणों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ये सर्वे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थे और इनमें पारदर्शिता की भारी कमी रही। केंद्र सरकार का मानना है कि जब तक जातीय Census पूरे देश में एकसमान रूप से नहीं होगी, तब तक इसके आधार पर नीति बनाना गलत होगा। क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक? जातीय आंकड़े क्यों ज़रूरी हैं? भारत एक विविधता से भरा देश है। हर क्षेत्र, हर गाँव और हर समुदाय में अलग-अलग सामाजिक परतें हैं। लेकिन जब योजनाएं बनती हैं, तो बिना आंकड़ों के सिर्फ अनुमान के आधार पर फैसले होते हैं। अब जातीय Census के जरिए सरकार को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि कौन पीछे रह गया है, और किसे वास्तव में मदद की जरूरत है। आम जनता की आवाज को मिलेगा प्लेटफॉर्म यह कदम उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण बनकर आया है जो लंबे समय से कहते आए हैं कि — “हमें गिना नहीं जाता, तो हमें क्यों माना जाएगा?” अब जातियों की पहचान और उनकी समस्याएं सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं रहेंगी, बल्कि नीति और समाधान का हिस्सा बनेंगी। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Digital Access

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: Digital Access अब “मौलिक अधिकार” (Fundamental Right)

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय में डिजिटल एक्सेस (Digital Access) को मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अब सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों — खासकर ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले वर्गों — को समान रूप से डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करे। यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें से एक याचिका एक एसिड अटैक सर्वाइवर ने दायर की थी। पीड़िता ने बैंक में KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया के दौरान आने वाली परेशानियों का ज़िक्र किया था। डिजिटल भेदभाव अब असंवैधानिक कोर्ट ने कहा, “डिजिटल डिवाइड को खत्म करना अब नीति का सवाल नहीं बल्कि संविधानिक कर्तव्य है। जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) में अब डिजिटल पहुंच को भी शामिल करना अनिवार्य हो गया है।” कोर्ट ने बताया कि आज के समय में हेल्थकेयर, बैंकिंग, शिक्षा जैसी ज़रूरी सेवाएं डिजिटल माध्यमों (Digital Access)से ही उपलब्ध होती हैं। ऐसे में जिनके पास इन सेवाओं तक पहुंच नहीं है, वे पीछे छूट रहे हैं। 20 अहम निर्देश दिए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों को KYC प्रक्रिया को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के लिए 20 जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि विशेष रूप से विकलांग और एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव किया जाना चाहिए क्या था मामला? एक एसिड अटैक सर्वाइवर, प्रज्ञा प्रसून, जुलाई 2023 में बैंक में खाता खोलने पहुंची थीं। लेकिन Digital Access डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया के दौरान बैंक ने उनसे “ब्लिंक” करने यानी पलकों को झपकाने की मांग की — ताकि यह साबित हो सके कि वे जीवित हैं। लेकिन उनके चेहरे की स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो पाया। सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद बैंक ने अपवाद के रूप में खाता खोलने की अनुमति दी। प्रज्ञा ने कोर्ट से अपील की थी कि एसिड अटैक पीड़ितों और अन्य विकलांग व्यक्तियों के लिए केंद्र सरकार नई गाइडलाइंस जारी करे, ताकि वे बिना भेदभाव के डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। जजों ने क्या कहा? जस्टिस महादेवन ने इस आदेश को लिखा, जिसे उनके साथी जस्टिस पारदीवाला ने “शानदार” बताते हुए सराहना की। उन्होंने कहा कि अब आर्थिक अवसरों से लेकर मूलभूत सेवाओं तक पहुंच डिजिटल माध्यमों से ही संभव है, इसलिए Article 21 (जीवन का अधिकार) की नई व्याख्या आवश्यक हो गई है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Pahalgam Attack Live

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम हमले पर PM Modi का एक्शन मोड, बोले – सेना को पूरी छूट, मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

PM Modi का एक्शन मोड जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देश में आक्रोश और चिंता का माहौल है। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों – जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे – की जान चली गई। यह हाल के वर्षों में कश्मीर घाटी में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। इस हमले के बाद मंगलवार को PM Modi ने दिल्ली स्थित अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी शामिल हुए। बैठक में PM Modi ने सशस्त्र बलों को यह संदेश दिया कि वे देश के दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए “पूरी तरह से स्वतंत्र” हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “हमारे सैनिक तय करेंगे कि आतंकियों को कैसे, कब और कहां जवाब दिया जाए। उन्हें हर तरह की परिचालन छूट दी गई है।” “आतंकवाद को मिलेगा मुँहतोड़ जवाब” – PM Modi का सख्त संदेश सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर पूरा विश्वास जताते हुए कहा कि आतंक के खिलाफ भारत का रुख बेहद स्पष्ट है – “यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प है कि हम आतंकवाद को जड़ से खत्म करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें भारत की शांति और अखंडता को चुनौती देंगी, उन्हें हर हाल में जवाब मिलेगा – चाहे वह सीमा पार हों या देश के भीतर छिपे हों। CCS बैठक में लिए गए बड़े फैसले – पाकिस्तान को दिया गया कड़ा संदेश हमले के एक दिन बाद 23 अप्रैल को हुई कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक में केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए थे: इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि तय समयसीमा के बाद कोई भी पाकिस्तानी नागरिक भारत में न रुके। हर आतंकी को सजा मिलेगी – पीएम मोदी का संकल्प प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा, “भारत हर एक आतंकी और उनके समर्थकों की पहचान करेगा, उन्हें ढूंढेगा और सजा देगा। हम उन्हें धरती के छोर तक भी क्यों न जाना पड़े, वहां तक पहुंचेंगे।” गृह मंत्रालय की तैयारी भी तेज इसी दिन केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम बैठक की। इसमें BSF, NSG और असम राइफल्स के प्रमुखों के साथ-साथ सशस्त्र सीमा बल (SSB) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इस बैठक में देशभर में सुरक्षा चाक-चौबंद रखने और आतंक विरोधी रणनीतियों पर चर्चा की गई। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Terror Attack

पाहलगाम Terror Attack पर उमर अब्दुल्ला का बयान: “राजनीति इतनी सस्ती नहीं हो सकती”

जम्मू और कश्मीर के पब्लिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन, पाहलगाम की बाइसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले (Terror Attack) में 26 पर्यटकों की जान चली गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद, जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ तौर पर कहा है कि वह इस आतंकवादी हमले को राज्यhood की मांग के लिए राजनीतिक फायदा उठाने का मौका नहीं बनाएंगे। उमर अब्दुल्ला का राजनीति पर अहम बयान उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अगर मैं इस आतंकवादी हमले ( Terror Attack) को राज्यhood की मांग के लिए इस्तेमाल करूं तो मुझे शर्म आनी चाहिए।” उनका मानना है कि एक राष्ट्रीय त्रासदी के बाद किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनका रुख राज्यhood के मुद्दे पर हमेशा एक जैसा रहा है और इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार से एक जिम्मेदार और सम्मानजनक संवाद की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यhood की मांग को इस तरह के संकट के समय में राजनीतिक लाभ के रूप में इस्तेमाल करना उनकी राजनीति के सिद्धांतों के खिलाफ है। उमर अब्दुल्ला का यह बयान यह दर्शाता है कि राजनीति में संवेदनशीलता और समझ होना चाहिए, खासकर ऐसे वक्त में जब पूरा देश एक दर्दनाक घटना से गुजर रहा हो। उनका यह कदम यह साबित करता है कि सही राजनीति कभी भी आतंकी हमले या किसी राष्ट्रीय संकट का फायदा उठाने के लिए नहीं हो सकती। देशहरपाल पर पढ़ें ताज़ा खबरें
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Supreme Court

Supreme Court ने OTT Platforms और Social Media पर Obscene Content को बताया गंभीर चिंता, सरकार लाएगी नए Regulations

Supreme Court ने सोमवार को OTT Platforms और Social Media पर अश्लील और आपत्तिजनक (Obscene and Indecent) कंटेंट के बढ़ते प्रसार पर गहरी चिंता जताई है। Court ने इस मुद्दे पर दायर Public Interest Litigation (PIL) को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और Netflix, Amazon Prime, AltBalaji, Ullu Digital, Mubi, X (Twitter), Google, Meta (Facebook, Instagram) और Apple सहित कई डिजिटल दिग्गजों को नोटिस जारी किया है। Supreme Court ने क्यों जताई चिंता? Justice BR Gavai और Justice AG Masih की बेंच ने कहा कि यह याचिका “महत्वपूर्ण सार्वजनिक चिंता” (Important Public Concern) उठाती है। सुनवाई के दौरान Justice Gavai ने कहा:“Netflix व अन्य प्लेटफॉर्म्स की भी Social Responsibility बनती है।” उन्होंने यह भी कहा कि OTT Platforms और Social Media पर अश्लील कंटेंट का प्रसार समाज के लिए खतरनाक है और इस पर ध्यान देना जरूरी है। Solicitor General ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील Vishnu Shankar Jain ने तर्क दिया कि यह मामला कोई विरोधी मुकदमा (Adversarial Litigation) नहीं, बल्कि एक Genuine Concern को उठाता है। Justice Gavai ने Solicitor General Tushar Mehta से केंद्र सरकार का रुख पूछा। SG Mehta ने सहमति जताते हुए कहा:“कुछ Content इतना Perverted है कि दो सम्माननीय लोग भी साथ बैठकर नहीं देख सकते।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि: Supreme Court का आदेश Supreme Court ने अपने आदेश में कहा:“यह याचिका OTT Platforms और Social Media पर आपत्तिजनक, अश्लील और विकृत (Perverted) कंटेंट के प्रदर्शन पर गंभीर चिंता उठाती है। Solicitor General ने भी माना कि और अधिक Regulations की आवश्यकता है।” याचिकाकर्ता कौन हैं? इस याचिका के मुख्य याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सूचना आयुक्त Uday Mahurkar हैं। उनके साथ Sanjeew Newar, Sudeshna Bhattacharjya Mukherjee, Shatabdi Pande और Svati Goyal अन्य याचिकाकर्ता हैं। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India-France Deal Finalized आज भारत और फ्रांस के बीच एक बड़ी डील पर मुहर लग गई है। भारत अब फ्रांस से 63,000 करोड़ रुपये में 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदेगा। ये खास विमान परमाणु हथियार ले जाने और दागने की क्षमता रखते हैं। इन्हें भारतीय नौसेना (नेवी) के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे समंदर में भारत की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। राफेल मरीन विमान खास तौर पर समुद्र से उड़ान भरने और युद्ध करने के लिए बनाए गए हैं। इन्हें भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट करियर ‘INS विक्रांत’ पर तैनात किया जाएगा। इससे देश की समुद्री सीमा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। इस डील के बाद भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास समंदर से परमाणु हमला करने की ताकत होगी। देशवासियों के लिए यह गर्व का पल है, क्योंकि अब हमारी नौसेना और भी ज्यादा आधुनिक और मजबूत हो जाएगी। भारत-फ्रांस की दोस्ती भी इस डील से और गहरी हो गई है। राफेल विमान पहले भी भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं और अब नेवी में भी राफेल की गड़गड़ाहट सुनाई देगी। सरकार ने इस कदम को भारत की सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है। आने वाले समय में ये राफेल मरीन विमान भारत के दुश्मनों को करारा जवाब देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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Education पर Rahul Gandhi का बड़ा बयान, Dharmendra Pradhan को बताया ‘क्रिमिनल शिक्षा मंत्री’

देश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय की कथित लापरवाही के कारण हजारों छात्र परेशान हैं और अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं। Rahul Gandhi ने शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए उन्हें “क्रिमिनल शिक्षा मंत्री” बताया और कहा कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं और सरकार की जवाबदेही को लेकर केंद्र पर कई सवाल उठाए। Student Protest को लेकर राहुल का बड़ा हमला राहुल गांधी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भरोसा प्रभावित हुआ है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जिन छात्रों ने मेहनत करके अपने भविष्य के लिए तैयारी की, उन्हें अब अनिश्चितता और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से छात्रों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की। घायल छात्र की चोट दिखाकर सरकार को घेरा प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने एक घायल छात्र का मुद्दा उठाया। उन्होंने छात्र की टी-शर्ट उठाकर उसकी चोट दिखाई और आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में छात्र घायल हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुने और उनकी मांगों पर बातचीत करे। Education System पर उठे सवाल राहुल गांधी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों की परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है और जिम्मेदारी तय करने से बच रही है। Dharmendra Pradhan पर बढ़ा राजनीतिक दबाव राहुल गांधी के बयान के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। वहीं, इस मामले में सरकार और बीजेपी की प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छात्रों से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में संसद और चुनावी राजनीति में बड़ा विषय बन सकते हैं। छात्रों के भविष्य को लेकर जारी है बहस शिक्षा किसी भी देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा सबसे अहम मुद्दा है। यही वजह है कि परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों की सुरक्षा जैसे सवालों पर लगातार चर्चा हो रही है। राहुल गांधी के इस हमले के बाद अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और विपक्ष के आगे के रुख पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

CJP Protest Update: सरकार से बातचीत Positive, दो मांगों पर बनी सहमति; प्रधान के इस्तीफे पर कल फैसला

CJP Protest को लेकर चल रही हलचल के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच हुई अहम बैठक खत्म हो गई है। बातचीत के बाद CJP नेताओं ने दावा किया कि सरकार ने उनकी दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। वहीं, प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने अंतिम निर्णय के लिए कल दोपहर तक का समय मांगा है। बैठक के बाद CJP नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ हुई बातचीत उम्मीद के मुताबिक रही। प्रदर्शनकारियों ने अपनी सभी मांगों को मजबूती से रखा और सरकार को इससे जुड़ा Demand Letter भी सौंपा। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है। दो मांगों पर सरकार का Positive Response CJP नेताओं के मुताबिक, बातचीत के दौरान सरकार ने उनकी दो मांगों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। हालांकि, इन मांगों पर आधिकारिक कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द इस मामले में ठोस फैसला ले। प्रधान के इस्तीफे पर कल दोपहर तक इंतजार CJP की ओर से उठाई गई प्रमुख मांगों में प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी शामिल है। इस मांग पर सरकार ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और विचार करने के लिए कल दोपहर तक का समय मांगा है। CJP नेताओं ने कहा कि वे सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे। इसके बाद ही आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। सरकार को सौंपा गया था 5 Paragraph का Demand Letter इससे पहले CJP प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को रखते हुए एक विस्तृत Demand Letter सौंपा था। इस पत्र में संगठन की प्रमुख मांगों और समस्याओं का जिक्र किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना है और वे सरकार से सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। अब कल के फैसले पर टिकी सभी की नजर सरकार और CJP के बीच हुई इस बातचीत के बाद अब अगला बड़ा अपडेट कल दोपहर तक आने की उम्मीद है। अगर सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सकारात्मक फैसला लेती है तो विवाद को खत्म करने की दिशा में यह अहम कदम हो सकता है। फिलहाल, CJP Protest को लेकर माहौल शांत है और सभी की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

CJP Protest Update: सरकार से बातचीत खत्म, Protesters ने सौंपा 5 पैराग्राफ का Demand Letter

सरकार और CJP (Citizen Justice Party) नेताओं के बीच चल रही बातचीत का दौर अब खत्म हो गया है। बैठक के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने 5 पैराग्राफ का लिखित Demand Letter सौंपा। इस पत्र में प्रदर्शन से जुड़े प्रमुख मुद्दों और उनकी अपेक्षाओं को विस्तार से रखा गया है। बैठक के दौरान CJP नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय तक चर्चा हुई। प्रदर्शनकारियों ने अपनी समस्याओं को सामने रखते हुए कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। CJP Leaders Meeting में रखी गईं प्रमुख मांगें CJP नेताओं ने बातचीत के दौरान अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सरकार के सामने रखा। प्रदर्शनकारियों की ओर से दिए गए लिखित पत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर जल्द निर्णय लेने से लोगों की चिंताओं को दूर किया जा सकता है। प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। नेताओं ने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए सकारात्मक समाधान निकलेगा। Government Talks के बाद आगे क्या? बैठक खत्म होने के बाद अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। हालांकि, अभी तक किसी अंतिम फैसले या आधिकारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। सरकार की प्रतिक्रिया के बाद ही आगे की स्थिति साफ हो पाएगी। दोनों पक्षों के बीच हुई यह बातचीत मामले को सुलझाने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे और इसके बाद अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे। Protesters की नजर अब सरकार के फैसले पर CJP नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने बातचीत के रास्ते से समाधान निकालने पर जोर दिया है। वहीं, सरकार की ओर से भी सभी पहलुओं पर विचार करने की बात कही गई है। अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए इस पूरे मामले का समाधान निकल पाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
ChatGPT

ChatGPT New Feature: मेडिकल रिपोर्ट समझना हुआ आसान, AI देगा Health Report की पूरी जानकारी

आज के डिजिटल दौर में टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी को लगातार आसान बना रही है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हेल्थ सेक्टर में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। ChatGPT का नया हेल्थ फीचर लोगों को अपनी मेडिकल रिपोर्ट समझने में मदद कर सकता है। इससे मरीज डॉक्टर के पास जाने से पहले अपनी रिपोर्ट से जुड़ी बेसिक जानकारी हासिल कर सकेंगे। कई बार मेडिकल रिपोर्ट में लिखे शब्द और आंकड़े आम लोगों के लिए समझना मुश्किल होते हैं। ब्लड टेस्ट, MRI, CT Scan, एक्स-रे या दूसरी जांच रिपोर्ट में मौजूद मेडिकल टर्म्स को समझने के लिए लोगों को अक्सर डॉक्टर या विशेषज्ञ की मदद लेनी पड़ती है। अब AI की मदद से इन रिपोर्ट्स को आसान भाषा में समझने का विकल्प मिल सकता है। ChatGPT कैसे करेगा Medical Report Analysis? ChatGPT जैसे AI टूल मेडिकल डॉक्यूमेंट्स को पढ़कर उसमें मौजूद जानकारी को सरल भाषा में समझाने में सहायता कर सकते हैं। यूजर अपनी रिपोर्ट को अपलोड कर उससे जुड़े सवाल पूछ सकते हैं और रिपोर्ट में दिए गए अलग-अलग पैरामीटर का सामान्य मतलब जान सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति अपनी टेस्ट रिपोर्ट में मौजूद किसी वैल्यू का अर्थ समझना चाहता है तो AI उसे आसान शब्दों में समझा सकता है। इससे मरीजों को अपनी हेल्थ कंडीशन के बारे में शुरुआती जानकारी मिल सकती है। डॉक्टर की जगह नहीं लेगा AI AI हेल्थ टेक्नोलॉजी भले ही तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन यह डॉक्टर का विकल्प नहीं है। ChatGPT केवल जानकारी समझने और रिपोर्ट की व्याख्या करने में मदद कर सकता है। बीमारी की सही पहचान, दवा लेने या इलाज से जुड़े किसी भी फैसले के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी रहेगा। खासकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में विशेषज्ञ की राय सबसे महत्वपूर्ण होती है। Health Technology में नई क्रांति पिछले कुछ सालों में AI का इस्तेमाल हेल्थकेयर इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ा है। मेडिकल रिसर्च, बीमारी की पहचान, हेल्थ रिकॉर्ड मैनेजमेंट और मरीजों की देखभाल जैसे क्षेत्रों में AI नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। ChatGPT का मेडिकल रिपोर्ट समझाने वाला फीचर भी इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। इससे लोगों को अपनी सेहत से जुड़ी जानकारी को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है। आम लोगों को क्या फायदा मिलेगा? AI इस्तेमाल करते समय रखें ध्यान मेडिकल जानकारी के मामले में सावधानी रखना बेहद जरूरी है। AI द्वारा दी गई जानकारी को अंतिम मेडिकल सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से संपर्क करना सबसे सुरक्षित तरीका है। आने वाले समय में AI और हेल्थ टेक्नोलॉजी मिलकर मेडिकल सुविधाओं को और आसान बना सकती हैं। हालांकि, बेहतर इलाज के लिए टेक्नोलॉजी के साथ डॉक्टरों की विशेषज्ञता भी उतनी ही जरूरी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
DMRC

Metro Service नई दिल्ली Metro Station अस्थायी रूप से बंद, सफर से पहले जान लें DMRC का अपडेट

राजधानी दिल्ली में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सुरक्षा कारणों के चलते नई दिल्ली Metro Station को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने जानकारी दी है कि स्टेशन पर फिलहाल Entry, Exit और Interchange की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी। नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण मेट्रो स्टेशनों में से एक है। यहां रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं और यह स्टेशन Yellow Line और Airport Express Line को जोड़ने वाला प्रमुख इंटरचेंज पॉइंट है। स्टेशन बंद होने से रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और सेंट्रल दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। DMRC ने क्यों बंद किया New Delhi Metro Station? DMRC ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। राजधानी में बढ़ी सुरक्षा गतिविधियों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी को देखते हुए कुछ मेट्रो स्टेशनों पर अस्थायी पाबंदियां लगाई गई हैं। मेट्रो प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे सफर शुरू करने से पहले अपने रूट की जानकारी जरूर ले लें। DMRC समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर रहा है और हालात सामान्य होने पर सेवाओं में बदलाव किया जा सकता है। Interchange सुविधा बंद होने से यात्रियों को दिक्कत नई दिल्ली Metro Station बंद होने का सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा, जो यहां से लाइन बदलकर आगे का सफर करते हैं। खासकर: इन यात्रियों को अब वैकल्पिक रूट का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। यात्रियों के लिए DMRC की सलाह DMRC ने यात्रियों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। मेट्रो सेवाओं से जुड़ी किसी भी अपडेट के लिए DMRC के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर नजर बनाए रखें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके। Delhi Metro Latest Update: यात्रियों को रखना होगा ध्यान नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रांजिट पॉइंट्स में शामिल है। ऐसे में स्टेशन बंद होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि DMRC स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा।

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