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Supreme Court ने OTT Platforms और Social Media पर Obscene Content को बताया गंभीर चिंता, सरकार लाएगी नए Regulations

Supreme Court ने सोमवार को OTT Platforms और Social Media पर अश्लील और आपत्तिजनक (Obscene and Indecent) कंटेंट के बढ़ते प्रसार पर गहरी चिंता जताई है। Court ने इस मुद्दे पर दायर Public Interest Litigation (PIL) को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और Netflix, Amazon Prime, AltBalaji, Ullu Digital, Mubi, X (Twitter), Google, Meta (Facebook, Instagram) और Apple सहित कई डिजिटल दिग्गजों को नोटिस जारी किया है। Supreme Court ने क्यों जताई चिंता? Justice BR Gavai और Justice AG Masih की बेंच ने कहा कि यह याचिका “महत्वपूर्ण सार्वजनिक चिंता” (Important Public Concern) उठाती है। सुनवाई के दौरान Justice Gavai ने कहा:“Netflix व अन्य प्लेटफॉर्म्स की भी Social Responsibility बनती है।” उन्होंने यह भी कहा कि OTT Platforms और Social Media पर अश्लील कंटेंट का प्रसार समाज के लिए खतरनाक है और इस पर ध्यान देना जरूरी है। Solicitor General ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील Vishnu Shankar Jain ने तर्क दिया कि यह मामला कोई विरोधी मुकदमा (Adversarial Litigation) नहीं, बल्कि एक Genuine Concern को उठाता है। Justice Gavai ने Solicitor General Tushar Mehta से केंद्र सरकार का रुख पूछा। SG Mehta ने सहमति जताते हुए कहा:“कुछ Content इतना Perverted है कि दो सम्माननीय लोग भी साथ बैठकर नहीं देख सकते।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि: Supreme Court का आदेश Supreme Court ने अपने आदेश में कहा:“यह याचिका OTT Platforms और Social Media पर आपत्तिजनक, अश्लील और विकृत (Perverted) कंटेंट के प्रदर्शन पर गंभीर चिंता उठाती है। Solicitor General ने भी माना कि और अधिक Regulations की आवश्यकता है।” याचिकाकर्ता कौन हैं? इस याचिका के मुख्य याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सूचना आयुक्त Uday Mahurkar हैं। उनके साथ Sanjeew Newar, Sudeshna Bhattacharjya Mukherjee, Shatabdi Pande और Svati Goyal अन्य याचिकाकर्ता हैं। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India-France Deal Finalized आज भारत और फ्रांस के बीच एक बड़ी डील पर मुहर लग गई है। भारत अब फ्रांस से 63,000 करोड़ रुपये में 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदेगा। ये खास विमान परमाणु हथियार ले जाने और दागने की क्षमता रखते हैं। इन्हें भारतीय नौसेना (नेवी) के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे समंदर में भारत की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। राफेल मरीन विमान खास तौर पर समुद्र से उड़ान भरने और युद्ध करने के लिए बनाए गए हैं। इन्हें भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट करियर ‘INS विक्रांत’ पर तैनात किया जाएगा। इससे देश की समुद्री सीमा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। इस डील के बाद भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास समंदर से परमाणु हमला करने की ताकत होगी। देशवासियों के लिए यह गर्व का पल है, क्योंकि अब हमारी नौसेना और भी ज्यादा आधुनिक और मजबूत हो जाएगी। भारत-फ्रांस की दोस्ती भी इस डील से और गहरी हो गई है। राफेल विमान पहले भी भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं और अब नेवी में भी राफेल की गड़गड़ाहट सुनाई देगी। सरकार ने इस कदम को भारत की सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है। आने वाले समय में ये राफेल मरीन विमान भारत के दुश्मनों को करारा जवाब देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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Pakistan’s Nuclear Threats to India

Pakistan’s Nuclear Threats to India

130 Nuclear Weapons Aimed at India: Why Does Pakistan Keep Threatening a Nuclear Attack? जब भी INDIA और PAKISTAN के बीच तनाव बढ़ता है, पाकिस्तान अक्सर परमाणु हमले की धमकी देने लगता है। हाल ही में फिर से पाकिस्तान ने कहा कि उसके पास भारत को निशाना बनाने के लिए 130 परमाणु हथियार हैं। सवाल उठता है — पाकिस्तान बार-बार ऐसी धमकियाँ क्यों देता है और भारत इसका सामना कैसे करेगा? पाकिस्तान की धमकी का कारण पाकिस्तान जानता है कि पारंपरिक युद्ध में वह भारत का मुकाबला नहीं कर सकता। भारत की सेना, वायुसेना और नौसेना, तीनों ही पाकिस्तान से कई गुना मजबूत हैं। इसलिए पाकिस्तान “न्यूक्लियर थ्रेट” का सहारा लेता है ताकि भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके। यह उसकी एक पुरानी रणनीति है — डर दिखाकर दुनिया का ध्यान खींचना और भारत को बातचीत की टेबल पर मजबूर करना। भारत का जवाब शांत लेकिन सख्त भारत हमेशा से संयमित रहा है। हमारे देश की “नो फर्स्ट यूज़” (पहले हमला नहीं करेंगे) नीति बहुत साफ है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि भारत कमजोर है। अगर पाकिस्तान किसी तरह की नादानी करता है, तो भारत के पास भी पूरी तैयारी है। भारत की परमाणु ताकत न सिर्फ जवाब देने में सक्षम है, बल्कि किसी भी दुश्मन को पूरी तरह खत्म करने की ताकत रखती है। दुनिया क्या सोचती है? पाकिस्तान की बार-बार की धमकियों से उसकी साख खुद कमजोर हो गई है। दुनियाभर के देश जानते हैं कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं से घिरा हुआ है — आर्थिक संकट, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता। भारत एक जिम्मेदार परमाणु ताकत के रूप में देखा जाता है, जबकि पाकिस्तान पर भरोसा करने से कई देश कतराते हैं।
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सिंधु जल समझौता: सूखा और बाढ़ से मची अफरा-तफरी, क्या भारत ने शुरू किया बड़ा खेल?

“Sindhu Water Treaty: Drought Followed by Floods, Is India Playing a Big Game?”

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए सिंधु जल समझौते पर अब असर दिखने लगा है। पहले जहां पाकिस्तान को सूखे का सामना करना पड़ा, अब वहां बाढ़ जैसी हालात बन रहे हैं। इस अचानक बदलते मौसम और जल संकट के पीछे क्या भारत की कोई बड़ी रणनीति है? पिछले कुछ महीनों में भारत ने सिंधु नदी के पानी के बहाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जानकारों का मानना है कि भारत अब समझौते की हर एक शर्त को सख्ती से लागू कर रहा है, ताकि पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सके। पहले पानी की कमी ने पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी पर असर डाला। अब ज्यादा पानी छोड़ने से वहां बाढ़ जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। आम जनता में बढ़ी बेचैनीपाकिस्तान के गांवों और शहरों में पानी को लेकर अफरा-तफरी मची है। एक तरफ खेत सूखे से झुलस गए थे, अब वहीं पानी में डूब रहे हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर यह सब अचानक कैसे हो रहा है? सरकारें भी इस संकट से निपटने के लिए तैयार नहीं दिख रही हैं। भारत का ‘सॉफ्ट पावर’ गेम?कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने यह जल नीति सोच-समझकर अपनाई है। युद्ध के बिना ही पाकिस्तान को पानी के जरिए मुश्किल में डालना एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। वैसे भी, पानी को ‘नीला सोना’ कहा जाता है और इसकी अहमियत आने वाले समय में और बढ़ने वाली है। क्या आगे और बढ़ेगा दबाव?अगर भारत सिंधु जल समझौते में और सख्ती दिखाता है, तो पाकिस्तान को और बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में भारत किस तरह कदम बढ़ाता है, उस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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Indus Water

भारत-पाकिस्तान टकराव: Indus Water Treaty पर India के फैसले से Pakistan में बौखलाहट

भारत (India) द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर लिए गए नए फैसले पर पाकिस्तान (Pakistan) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने चेतावनी दी है कि अगर भारत ने पानी के प्रवाह को रोका, तो पाकिस्तान उसका “मुंहतोड़ जवाब” देगा। शरीफ ने भारत के कदम को “उकसाने वाला” और “आक्रामक” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय शांति (regional peace) के लिए गंभीर खतरा है। 🇮🇳 भारत ने क्यों भेजा Indus Treaty Review Notice? भारत ने 1960 में हुई सिंधु जल (Indus Water) संधि की पुनरावलोकन (review) के लिए पाकिस्तान को आधिकारिक नोटिस भेजा है। इसमें भारत ने कई आधुनिक कारण गिनाए हैं — जैसे जनसंख्या वृद्धि (population growth), पर्यावरणीय परिवर्तन (climate change), स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता (need for clean energy) और सीमा पार आतंकवाद (cross-border terrorism)। भारत का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में यह संधि अब अप्रासंगिक होती जा रही है और पाकिस्तान ने कई मौकों पर इसके प्रावधानों का दुरुपयोग किया है। 🇵🇰 Pakistan’s Response: चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय मंच की धमकी शहबाज शरीफ ने कहा, “पाकिस्तान किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत को गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए।” पाकिस्तान ने यह भी इशारा किया है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। बढ़ता Indo-Pak तनाव: Visa, Trade और Security इस ताजा विवाद के चलते भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और गहरा हो गया है। खबरों के मुताबिक:
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Pahalgam Terror Attack

Pahalgam Attack: इसी महिला की बहादुरी से सामने आया आतंकी का चेहरा

​ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई। इस हमले में एक बहादुर महिला की सूझबूझ और साहस ने आतंकियों की पहचान में अहम भूमिका निभाई।​ 📸 महिला ने खींची आतंकी की तस्वीर Pahalgam Attack के दौरान, जब गोलियों की बौछार से लोग इधर-उधर भाग रहे थे, तब एक महिला ने साहस दिखाते हुए हमलावर की तस्वीर अपने मोबाइल फोन से खींच ली। इस तस्वीर में आतंकी का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को उनकी पहचान करने में मदद मिली। इस महिला की बहादुरी की सराहना पूरे देश में हो रही है।​ 🕵️‍♂️ आतंकियों की पहचान और जांच सुरक्षा एजेंसियों ने हमले के पीछे तीन आतंकियों की पहचान की है: असीफ फूजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा। ये सभी आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन “द रेजिस्टेंस फ्रंट” (TRF) से जुड़े हुए हैं। हमलावरों ने बायसरण घाटी में पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए। ​ 🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की कार्रवाई हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने पाकिस्तान के नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं और कूटनीतिक स्तर पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की निंदा करते हुए दोषियों को सजा दिलाने का संकल्प लिया है। ​ 🧭 निष्कर्ष पहलगाम आतंकी हमले में महिला की बहादुरी ने आतंकियों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि आम नागरिकों की सतर्कता और साहस से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद मिल सकती है।​
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Pahalgam Terror Attack

Cross-Border Marriage Crisis: अब फस गयी पाकिस्तान में ब्याही महिलाएं

नई दिल्ली।Pahalgam Terror Attack के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की खाई और चौड़ी हो गई है। इस बार सिर्फ राजनयिक बयानबाज़ी नहीं हुई, Diplomatic Fallout इतना गहरा है कि दोनों देशों की सरकारों ने एक-दूसरे के नागरिकों को फौरन देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। लेकिन इस एक फैसले ने एक अनदेखी Fault Line को सबके सामने उजागर कर दिया है—उन भारतीय महिलाओं की, जिन्होंने पाकिस्तानियों से शादी की थी। इनमें से अधिकांश महिलाएं जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से हैं, जो कभी प्यार तो कभी धोखे में सीमा पार चली गई थीं। अब जबकि दोनों देशों के बीच तनातनी चरम पर है, तो पाकिस्तान सरकार ने उन्हें वापसी देने से इनकार कर दिया है। भारत सरकार की तरफ से उन्हें अपने वीज़ा या निवास को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं मिल रहे हैं, जिससे वे Legal Limbo में फंस गई हैं। Cross-Border Marriage Crisis: पाकिस्तान से रिश्ता, भारत में शक भारत में इन महिलाओं को दोहरी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है—एक तरफ वे कानूनी मान्यता के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन पर पाकिस्तानी जासूसी एजेंसियों से जुड़े होने का शक किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे मामलों में महिलाएं कई बार अनजाने में या मजबूरी में Spy Tools बन जाती हैं। Social और National Security Concern बनती महिलाएंजानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में कई बार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इन महिलाओं का इस्तेमाल ‘स्लीपर सेल’ या ‘soft espionage’ के लिए करती है। उन्हें भारत भेज कर संवेदनशील इलाकों में बसाया जाता है।जब ये महिलाएं लौटती हैं, तो उनके पास Pakistan की रहन-सहन, नेटवर्क और विचारधारा का असर होता है, जो आगे जाकर भारत की सुरक्षा नीति के लिए चिंता बन सकता है।
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Pakistan Terror Support Confession

Pakistan Terror Support Confession पाक के रक्षा मंत्री ने खुद कबूली 30 साल की गलती

Pakistan Terror Support Confession डेस्क रिपोर्ट।“Terror Support”, “Freedom Fighters”, “Nuclear Threats” – ये तीन keywords पिछले 24 घंटे में पाकिस्तान की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि पर सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरे हैं। एक ओर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने British चैनल ‘The Sky’ को दिए इंटरव्यू में ये कबूल किया कि उनका देश 30 सालों से आतंकियों को ट्रेनिंग देता रहा है और ये सब अमेरिका और पश्चिमी देशों के कहने पर किया गया, वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री इशाक डार ने आतंकियों को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। ❝ Terrorism को पालना एक बड़ी गलती थी, अब हम उसकी सज़ा भुगत रहे – ख्वाजा आसिफ ❞ ब्रिटिश एंकर यल्दा हकीम के एक तीखे सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ(Khawaja Asif) ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने वैश्विक शक्तियों के कहने पर कई आतंकी गुटों को सपोर्ट किया और ये गंदा काम 30 साल तक चलता रहा। उन्होंने माना कि अगर पाकिस्तान ने 1980 के दशक में सोवियत यूनियन के खिलाफ जंग में दखल न दिया होता और 9/11 के बाद अमेरिका के साथ जुड़कर आतंक के खिलाफ लड़ाई न लड़ी होती, तो आज उनका देश ‘बेदाग’ होता। आसिफ ने साफ कहा – “हमने एक बहुत बड़ी भूल की और अब इसकी सजा भुगत रहे हैं। पाकिस्तान को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया।” ❝ Nuclear Powers के बीच Conflict दुनिया के लिए खतरा – पाकिस्तान ❞ कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले को लेकर जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा, तो ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि “अगर भारत ने कोई एक्शन लिया, तो पाकिस्तान जवाब देने को मजबूर होगा।”उन्होंने कहा – “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं रहेगा। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए दुनिया को इस टकराव से डरना चाहिए।”हालांकि उन्होंने ये उम्मीद भी जताई कि मामला बातचीत से सुलझ सकता है। ❝ TRF और LeT? हमें तो नाम भी नहीं पता – पाकिस्तान ❞ जब इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या TRF यानी ‘The Resistance Front’ लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने इस नाम को पहली बार सुना है। और फिर लश्कर-ए-तैयबा को ही ‘पुराना और अप्रासंगिक’ बता दिया। ❝ ये आतंकी नहीं, Freedom Fighters हो सकते हैं – विदेश मंत्री इशाक डार ❞ दूसरी तरफ पाकिस्तान के विदेश मंत्री और डिप्टी PM इशाक डार (Iswhaq Dar ) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो कहा, उसने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा – “हमें शुक्रगुजार होना चाहिए कि ये लोग फ्रीडम फाइटर्स भी हो सकते हैं। हमें नहीं पता ये कौन हैं, पर भारत हमेशा अपनी नाकामी का दोष पाकिस्तान पर डालता है।” उन्होंने भारत की तरफ से मिले सबूतों की मांग करते हुए कहा कि “अगर उनके पास कुछ है, तो दुनिया के सामने पेश करें।” साथ ही उन्होंने बांग्लादेश और अफगानिस्तान की अपनी यात्राएं रद्द कर दी हैं ताकि इस मसले पर कूटनीतिक प्रतिक्रिया तैयार की जा सके। 🔴 निष्कर्ष: पाकिस्तान की सरकार के दो शीर्ष मंत्रियों ने इस पूरे मामले में जो बयान दिए हैं, उसने उसकी विदेश नीति, आंतरिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर आतंकियों को 30 साल तक समर्थन देने की स्वीकारोक्ति और दूसरी ओर उन्हें ‘फ्रीडम फाइटर’ कहने की कोशिश – यह स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान आज भी उस दोराहे पर खड़ा है, जहाँ उसे तय करना होगा कि वह आतंक का साथ देगा या शांति का। 👉 अधिक अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Desh Harpal से।
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Waqf Act

Waqf संशोधन कानून 2025 पर बढ़ा विवाद: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अहम आश्वासन, अगली सुनवाई 5 मई को

25 अप्रैल 2025 — Waqf (संशोधन) अधिनियम 2025 को लेकर देशभर में मचा सियासी घमासान अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है। मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर संभावित असर के बीच केंद्र सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कुछ विवादित प्रावधानों पर फिलहाल रोक लगाने का आश्वासन दिया है। क्या है मामला? वक्फ एक्ट 2025 में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनमें से कुछ प्रावधानों पर खासा विरोध हो रहा है। इसमें वक्फ संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया, ‘waqf बाय यूजर’ की समाप्ति, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति जैसी बातें शामिल हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फिलहाल गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्डों में शामिल करने और कोर्ट द्वारा घोषित वक्फ संपत्तियों को डीनोटिफाई करने जैसे प्रावधान लागू नहीं किए जाएंगे। सरकार का पक्ष क्या है? सरकार ने हलफनामे में कहा कि यह कानून मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता। बल्कि इसका मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि संशोधन केवल प्रशासनिक और नियामक प्रकृति के हैं, धार्मिक अधिकारों से इनका कोई लेना-देना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का रुख मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सरकार के आश्वासन को दर्ज करते हुए साफ किया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक कोई नई नियुक्ति या डीनोटिफिकेशन की प्रक्रिया नहीं होगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी। विवादास्पद प्रावधान जिन पर मचा है बवाल Waqf संशोधन अधिनियम 2025 अभी कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। जहां एक ओर सरकार इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं मुस्लिम समाज इसे धार्मिक हस्तक्षेप मान रहा है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस अहम मामले पर क्या फैसला सुनाता है। DeshHarpal पर जुड़े रहें ऐसे ही खबरों के लिए।
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Rahul Gandhi

Supreme Court Warning: सावरकर पर बयानबाज़ी पर Rahul Gandhi को दी चेतावनी

Controversial remarks के चलते कांग्रेस नेता Rahul Gandhi एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। वीर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें सख्त लहजे में warning देते हुए स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ कोई भी गैर-जिम्मेदार बयानबाज़ी अब सहन नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, “अगर कोई कह दे कि महात्मा गांधी अंग्रेजों के नौकर थे, तो क्या हम उसे भी सही मान लेंगे?” यह टिप्पणी कोर्ट ने राहुल गांधी के सावरकर को लेकर दिए गए एक पुराने बयान के संदर्भ में कही। कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी एक public figure हैं, और उनकी हर बात का असर देशभर में होता है। ऐसे में उन्हें अपनी responsibility समझनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की बयानबाज़ी न केवल freedom fighters का अपमान है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचा सकती है। राहुल गांधी पर वीर सावरकर को ‘ब्रिटिश सहयोगी’ बताने और जेल से रिहा होने के लिए ‘माफीनामा’ लिखने जैसे आरोप हैं, जिनका कई बार उन्होंने public speeches में ज़िक्र किया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि historical figures के बारे में बिना ठोस तथ्यों के कोई भी टिप्पणी, इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने के समान है। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी टिप्पणी से बचें वरना कोर्ट को कड़ा रुख अपनाना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि freedom movement में योगदान देने वाले हर व्यक्ति के त्याग का सम्मान होना चाहिए, चाहे वे किसी भी विचारधारा से जुड़े हों। इस मामले ने एक बार फिर से देश में विचारधाराओं की लड़ाई और free speech vs responsible speech की बहस को तेज कर दिया है। Desh Harpal इस मामले की आगामी सुनवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर नज़र बनाए रखेगा।
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NEET पेपर लीक मामला: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, दर्ज होंगे आपराधिक केस

नई दिल्ली। देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। समाचार एजेंसी ANI के सूत्रों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। यह कार्रवाई परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। एक दिन पहले हुए थे बड़े प्रशासनिक फेरबदल इससे पहले गुरुवार को केंद्र सरकार ने 17 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति के आदेश जारी किए थे। सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा मंत्रालय में हुआ, जहां 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। इसके अलावा 1995 बैच के IAS अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को पदोन्नत कर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। पेपर लीक पर सरकार लगातार दे रही सख्त संदेश पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर लगातार कड़े रुख के संकेत दिए हैं। 24 जुलाई: सख्त कानून लाने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने वाला विधेयक संसद में लाया जाएगा। 23 जुलाई: फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। 21 जुलाई: “पेपर लीक घोर पाप है” एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने बताया कि मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही राज्यों से भी इस तरह की घटनाओं को रोकने में सहयोग की अपील की गई। युवाओं के भविष्य पर सरकार का फोकस सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी सुधार और जांच प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। देश, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हर बड़ी और विश्वसनीय खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बस्तर: रेप केस दर्ज कराने वाली युवती ने आरोपी से जेल में रचाई शादी, कोर्ट की अनुमति से लिए सात फेरे

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां रेप केस दर्ज कराने वाली युवती ने बाद में उसी युवक से कोर्ट की अनुमति के बाद जगदलपुर केंद्रीय जेल में विवाह कर लिया। शादी वैदिक रीति-रिवाजों से जेल परिसर में कराई गई, जिसमें दोनों परिवारों के सदस्य, पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता और जेल प्रशासन मौजूद रहे। हालांकि, विवाह के बाद भी युवक को जेल से रिहाई नहीं मिली है। वह न्यायिक हिरासत में रहेगा और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उसकी रिहाई पर फैसला होगा। प्रेम संबंध से शुरू हुई कहानी, कानूनी विवाद तक पहुंची जानकारी के अनुसार, मनमती कश्यप और सुरेश सेठिया जगदलपुर के एक पेट्रोल पंप पर साथ काम करते थे। इसी दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। दोनों विवाह करना चाहते थे, लेकिन युवक के परिजनों ने इस रिश्ते का विरोध किया। युवती का आरोप है कि सुरेश ने उससे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में परिवार के दबाव में शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद युवती ने परपा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर युवक को गिरफ्तार किया। SC/ST एक्ट सहित अन्य धाराएं लगने के कारण वह पिछले सात महीने से जेल में बंद है। जेल में भी मिलती रही युवती जेल में बंद रहने के दौरान मनमती कई बार सुरेश से मिलने पहुंची। दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने और विवाह करने का निर्णय लिया। इसके बाद युवती ने अधिवक्ता की मदद से अदालत में आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं। अदालत ने आवेदन पर सुनवाई के बाद जेल प्रशासन को नियमों के अनुसार विवाह कराने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश पर जेल में सजा मंडप कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद जगदलपुर केंद्रीय जेल परिसर में विवाह की तैयारियां की गईं। जेल प्रशासन ने मंडप बनवाया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोनों का विवाह संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। विवाह समारोह में दोनों परिवारों के सदस्य, पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता और जेल प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। युवती बोली- समाज में सम्मान बचाने के लिए दर्ज कराई थी FIR मनमती कश्यप ने बताया कि जब सुरेश ने शादी से इनकार किया तो समाज में उनकी बदनामी हुई और इसी कारण उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बाद में दोनों के बीच बातचीत हुई और उन्होंने आपसी सहमति से विवाह करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि अब उनकी इच्छा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके पति जल्द जेल से बाहर आएं। युवक ने कहा- अब दोनों ने मिलकर लिया फैसला सुरेश सेठिया ने कहा कि पारिवारिक विरोध के कारण स्थिति बिगड़ गई थी। बाद में दोनों ने बातचीत कर विवाद सुलझाया और अदालत की अनुमति से शादी कर ली। उन्होंने कहा कि अब वे कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। जेल अधीक्षक बोले- पहली बार हुआ ऐसा विवाह जगदलपुर केंद्रीय जेल के अधीक्षक एस.एल. नायर ने बताया कि जेल में विवाह का यह पहला मामला है। अदालत के आदेश और जेल नियमावली के तहत सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर विवाह कराया गया। वहीं, अधिवक्ता अवधेश झा ने बताया कि दोनों बालिग हैं और संयुक्त आवेदन के आधार पर विशेष न्यायालय ने विवाह की अनुमति दी थी। छत्तीसगढ़, बस्तर और देश की ताज़ा एवं विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

गुना रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेनों में दो चोरी की वारदात, यात्रियों के लाखों के सामान पर हाथ साफ

गुना। मध्य प्रदेश के गुना रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेनों में चोरी की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं। दोनों मामलों में अज्ञात चोर यात्रियों के सिरहाने रखे लेडीज पर्स चोरी कर फरार हो गए। सूचना मिलने पर जीआरपी थाना गुना ने दोनों प्रकरणों में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहली घटना: लाखों के जेवर, मोबाइल और नकदी चोरी पहली घटना में रीवा जिले के बदराव निवासी पंकज चतुर्वेदी अपनी पत्नी अपर्णा और बच्चों के साथ ट्रेन संख्या 08611 से दमोह से कोटा (सोगरिया) की यात्रा कर रहे थे। बताया गया कि तड़के करीब 4:15 बजे, जब ट्रेन गुना रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, तभी बी-1 कोच की सीट नंबर 7 पर सो रही उनकी पत्नी के सिरहाने रखा लेडीज पर्स चोरी हो गया। पीड़ित के अनुसार पर्स में सोने की एक चेन, तीन सोने की अंगूठियां, तीन मोबाइल फोन, एक हाथ घड़ी और 6 हजार रुपये नकद रखे थे। वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार चोरी गए सामान की कीमत करीब 2.75 लाख रुपये आंकी जा रही है। वहीं एफआईआर में सोने की चेन, तीन अंगूठियों की कीमत 62 हजार रुपये तथा नकदी का उल्लेख किया गया है। चोरी हुए मोबाइल में वनप्लस 9 प्रो, ओप्पो और वीवो कंपनी के फोन शामिल हैं। पीड़ित ने पहले कोटा जीआरपी में शिकायत दर्ज कराई थी। घटना गुना रेलखंड की होने के कारण मामला जीआरपी थाना गुना को स्थानांतरित कर दिया गया। दूसरी घटना: नकदी और मोबाइल लेकर फरार हुए चोर दूसरे मामले में भिंड निवासी धर्मेंद्र सिंह मौर्य (39) अपनी पत्नी के साथ ट्रेन संख्या 11085 के एस-1 कोच में ग्वालियर की यात्रा कर रहे थे। गुना स्टेशन के पास उनकी नींद खुली तो सिरहाने रखा लेडीज पर्स गायब मिला। पर्स में करीब 16 हजार रुपये कीमत के दो मोबाइल, 7,200 रुपये नकद और कई जरूरी दस्तावेज रखे थे। इस मामले में पहले ग्वालियर जीआरपी में शून्य एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे बाद में जांच के लिए जीआरपी थाना गुना भेज दिया गया। जीआरपी ने शुरू की जांच जीआरपी थाना गुना ने दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(सी) के तहत प्रकरण दर्ज कर अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में लगे सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। मध्य प्रदेश, गुना और रेलवे से जुड़ी ताज़ा एवं विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CJI सूर्यकांत की सफाई: CJP लाठीचार्ज मामले में सुनवाई से इनकार नहीं किया, मीडिया रिपोर्टों को बताया गलत

नई दिल्ली। भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस लाठीचार्ज और ज्यादती से जुड़ी किसी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी, इसलिए सुनवाई से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता। मीडिया रिपोर्टों पर जताई नाराजगी CJI सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्टों की आलोचना की, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मीडिया ने गलत रिपोर्ट किया कि मैंने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। पिछले दो दिनों से पूरी तरह गलत जानकारी दी जा रही है। जबकि इस मामले में एक भी पन्ना दाखिल नहीं हुआ था। केवल एक प्रतिनिधित्व भेजा गया था, जिसे मिश्रा या किसी अन्य व्यक्ति ने प्रस्तुत किया था।” पहले वीडियो देखने पर की थी टिप्पणी इससे पहले बुधवार को अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने दिल्ली में CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के मामले में तत्काल सुनवाई की मौखिक मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, के समक्ष यह अनुरोध रखा गया था। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा था कि अदालत के पास वीडियो देखने का समय नहीं है। जब वकील ने दूसरी बार वीडियो देखने का आग्रह किया, तो उन्होंने कहा कि अदालत और अपना समय व्यर्थ न करें। इसी टिप्पणी के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया, जिस पर अब CJI ने स्थिति स्पष्ट की है। कैसे चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’? कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत मई 2026 में सोशल मीडिया पर हुई थी। इसका नाम CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद चर्चा में आया और देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान युवा वकीलों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा था कि कई युवा रोजगार के अभाव में सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म की ओर बढ़ रहे हैं। इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से अभियान शुरू हुआ, जिसने बाद में एक बड़े ऑनलाइन आंदोलन का रूप ले लिया। अधिक राष्ट्रीय, न्यायपालिका और राजनीति से जुड़ी ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

राहुल गांधी ने घायल छात्र के साथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस, बोले- ‘धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही होगा’

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने आवास 10 जनपथ पर NEET परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शन में घायल हुए छात्र साहिल लोचाब के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि “धर्मेंद्र प्रधान एक अपराधी शिक्षा मंत्री हैं। वे देश की शिक्षा व्यवस्था के ध्वस्त होने का प्रतीक बन चुके हैं। उन्हें अपने पद से हटना ही होगा। उनकी नीतियों की वजह से हजारों छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।” प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने घायल छात्र के हाथ, पीठ और छाती पर लगे घाव भी दिखाए। उन्होंने कहा कि साहिल शांतिपूर्ण तरीके से हाथ में तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तभी उन्हें पैलेट गन का सामना करना पड़ा। NEET पेपर लीक के विरोध में हुआ था प्रदर्शन 20 जुलाई को NEET पेपर लीक मामले के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों द्वारा संसद मार्च निकाला गया था। इस दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें 100 से अधिक छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। साहिल लोचाब भी इसी घटना में गंभीर रूप से घायल हुए। साहिल लोचाब की आंख की रोशनी जाने का खतरा 19 वर्षीय साहिल लोचाब दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ के निवासी हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) के छात्र हैं। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन लगने से उनकी दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। उनका इलाज AIIMS के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में किया गया, जहां उनकी सर्जरी भी हुई। परिजनों के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया है कि घायल आंख की रोशनी वापस आने की संभावना केवल 1 प्रतिशत है, क्योंकि आंख की पुतली को गंभीर नुकसान पहुंचा है। परिवार ने क्या कहा? साहिल की मां ज्योति ने बताया कि उनका बेटा पहले भी छात्र आंदोलनों में हिस्सा ले चुका था। उन्होंने कहा कि साहिल का मानना था कि NEET से जुड़ा यह मुद्दा उसके भविष्य और शिक्षा से सीधे जुड़ा है। परिवार के अनुसार, साहिल का सपना पुलिस अधिकारी बनने का है। अधिक राष्ट्रीय, राजनीति और शिक्षा से जुड़ी ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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