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दिल्ली

दिल्ली के मुस्तफाबाद में 4 मंजिला इमारत ढही, CCTV में कैद हुआ खौफनाक पल; 4 की मौत, कई अब भी मलबे में फंसे

दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके से शनिवार तड़के एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। 14 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन 8-10 लोग अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है। यह दर्दनाक हादसा आसपास के लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। घटना की भयावहता सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें देखा गया कि अचानक एक चिंगारी उठी और कुछ ही सेकंड में गली धूल के गुबार से भर गई, जिससे कैमरा भी कुछ नहीं रिकॉर्ड कर पाया। CCTV Footage: कैसे गिरी इमारत? CCTV फुटेज में दिखा कि इमारत गिरने से पहले एक हल्की चिंगारी उठी और उसके तुरंत बाद धूल का विशाल गुबार फैल गया। ये दृश्य इतने अचानक और भयावह थे कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। 2:50 AM पर मिला फोन कॉल, NDRF और फायर ब्रिगेड ने संभाली कमान डिविजनल फायर ऑफिसर राजेंद्र अटवाल ने बताया कि उन्हें तड़के 2:50 बजे कॉल मिला था। जब उनकी टीम मौके पर पहुंची, तब तक पूरी इमारत जमींदोज हो चुकी थी। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। NDRF अधिकारी ने इस घटना को “पैनकेक कोलैप्स” कहा, यानी जब एक के ऊपर एक फ्लोर गिरते हैं। ऐसी स्थितियों में ज़िंदा बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन हर ज़िंदगी को बचाने की पूरी कोशिश जारी है। घनी बस्ती और तंग गलियों ने बचाव कार्य को बनाया चुनौतीपूर्ण मुस्तफाबाद की तंग गलियों के कारण रेस्क्यू टीम को भारी मशीनें अंदर लाने में परेशानी हो रही है। फिर भी जवान हर हाथ से मलबा हटाकर लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बारिश और आंधी के बाद हुआ हादसा, कारण की जांच जारी हादसे से कुछ घंटे पहले दिल्ली में तेज़ बारिश और आंधी आई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी के बाद इमारत कमजोर हो गई होगी। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि असली वजह की जांच की जा रही है। GTB अस्पताल में चल रहा घायलों का इलाज जो लोग मलबे से निकाले गए हैं, उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है। सरकार और प्रशासन से अपील स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो और क्षेत्र में जर्जर इमारतों का सर्वे कराकर उन्हें खाली कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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Waqf Amendment

Waqf Amendment पर Jagdambika Pal का बड़ा बयान: Report असंवैधानिक निकली तो दे दूंगा इस्तीफा

वक्फ संशोधन ( Waqf Amendment) विधेयक को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर जहां इस बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी सांसद Jagdambika Pal ने बड़ा बयान देकर सभी का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा है कि यदि वक्फ समिति की रिपोर्ट असंवैधानिक पाई जाती है, तो वह तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। क्या है Waqf Amendment विधेयक? वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और अवैध कब्जों को रोकना है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक खासकर पासमांदा मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा करेगा। लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय पर हमला बता रहा है। जगदंबिका पाल का पक्ष संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जगदंबिका पाल ने साफ कहा कि वक्फ अधिनियम कोई धार्मिक कानून नहीं, बल्कि एक वैधानिक व्यवस्था है। इसका मकसद वक्फ संपत्तियों का न्यायसंगत और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। “अगर मेरी अध्यक्षता में बनी रिपोर्ट को अदालत असंवैधानिक मानेगी, तो मैं बिना किसी देरी के इस्तीफा दे दूंगा। हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं,” — जगदंबिका पाल ओवैसी का विरोध और प्रतिक्रिया इस बिल का सबसे तीखा विरोध AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने किया है। उन्होंने संसद में इस बिल की प्रति फाड़ दी और इसे “मुसलमानों पर सीधा हमला” बताया। ओवैसी का आरोप है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। विपक्ष पर पलटवार पाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन और उनकी रक्षा के लिए लाया गया है, ना कि किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक की वैधता को लेकर सुनवाई जारी है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि यह कानून संवैधानिक मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। जगदंबिका पाल का इस्तीफे की पेशकश करना इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।
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Jagdeep Dhankhar, Vice President of India

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर खींची ‘संवैधानिक लक्ष्मण रेखा’, उपराष्ट्रपति ने जताई नाराज़गी

Supreme Court vs President Powers Desh Harpal | 17 अप्रैल 2025By Digital Desk Supreme Court Judgement on Governor and President Powers के तहत सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने की समयसीमा (Time Limit) तय की गई। अदालत ने साफ किया कि राज्य विधानसभा से पास होकर आए बिल को यदि राज्यपाल राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजते हैं, तो राष्ट्रपति को Article 201 के तहत 3 महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? Judicial Review, No Pocket Veto, Mandatory Timeline और No Repeated Returns – इन चार बिंदुओं में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों की स्पष्ट व्याख्या की: राज्यपालों के लिए भी बनी समय सीमा तमिलनाडु मामले में Supreme Court vs Governor Power की बहस में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि राज्यपाल के पास भी कोई Absolute Veto Power नहीं है। उन्हें विधानसभा के पास किए गए किसी भी बिल पर अधिकतम एक महीने के भीतर निर्णय देना होगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, “राज्यपाल सिर्फ प्रतीकात्मक पद नहीं हैं, लेकिन वे राज्य सरकार की सलाह से ही निर्णय ले सकते हैं।” उपराष्ट्रपति की नाराज़गी इस फैसले के बाद Vice President Jagdeep Dhankhar ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “हम ऐसा सिस्टम नहीं बना सकते जहां अदालतें राष्ट्रपति को निर्देश दें। Article 142 के तहत मिला विशेष अधिकार न्यायपालिका के पास 24×7 available nuclear missile जैसा बन गया है।” उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर संस्थाएं अपनी सीमाएं लांघने लगें तो संविधान के संतुलन को खतरा हो सकता है। “कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार सर्वोच्च होती है,” उन्होंने कहा। क्या है Article 201 और Article 142? कपिल सिब्बल ने की तारीफ पूर्व कानून मंत्री Kapil Sibal ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार जानबूझकर राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण बिलों को रोके नहीं रख सकेगी। सुप्रीम कोर्ट का ये रुख federal structure और cooperative federalism को मजबूत करता है। तमिलनाडु केस का बैकग्राउंड सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल R.N. Ravi ने 10 जरूरी बिलों को रोक रखा है। इनमें से कई बिल विधानसभा ने दोबारा पास किए थे, लेकिन राज्यपाल ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। R.N. Ravi पूर्व IPS अधिकारी रहे हैं और 2021 से तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। निष्कर्ष: Supreme Court ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी की है, जो संविधान की व्याख्या और लोकतंत्र के संतुलन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हालांकि यह फैसला केंद्र-राज्य संबंधों को नई बहस में डाल सकता है, परंतु इससे transparency, accountability और timely governance को बल मिलेगा।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

Waqf Act SC Hearing LIVE: संसद ने हिंदुओं पर भी कानून बनाया है… सिब्बल की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया

Desh Harpal Special Report| नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2025 Waqf Act SC Hearing LIVE – सुप्रीम कोर्ट में आज Waqf Act को लेकर एक बेहद अहम सुनवाई हुई, जिसमें वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के हालिया Waqf Act Amendment पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एकतरफा और धर्म विशेष को लक्षित करने वाला बताया। लेकिन कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “Parliament ने केवल मुसलमानों के लिए नहीं, हिंदुओं के लिए भी कानून बनाए हैं।“ क्या है Waqf Act Amendment? केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में Waqf Act 1995 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद कानून बना और तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया। संशोधित कानून के तहत Waqf properties के रिकॉर्ड, उनके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता और accountability सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था। विरोध और विवाद Waqf Act में बदलाव के बाद देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कई जगहों पर violent clashes की खबरें भी आईं। मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि यह कानून उनकी संपत्ति और धार्मिक अधिकारों को सीमित करता है। कोर्ट में क्या हुआ? आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या इस कानून से किसी खास धर्म को निशाना बनाया गया है? जब सिब्बल ने इसे “धर्म विशेष को नियंत्रित करने वाला कानून” कहा, तो कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “Parliament ने हिंदू धर्म के लिए भी कानून बनाए हैं जैसे Hindu Religious and Charitable Endowments Act। इसलिए यह कहना गलत है कि केवल एक धर्म के खिलाफ कानून बनाया जा रहा है।“ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि कानून की वैधता को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। सरकार का पक्ष केंद्र सरकार की ओर से Solicitor General Tushar Mehta ने कहा कि संशोधन का मकसद किसी धर्म को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि Waqf Boards की जवाबदेही तय करना है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार Waqf properties के दुरुपयोग की शिकायतें आई हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 मई 2025 की तारीख तय की है। Desh Harpal इस संवेदनशील मामले की हर अपडेट आपको LIVE और निष्पक्ष रूप में पहुंचाता रहेगा। Waqf Act से जुड़े सामाजिक, कानूनी और धार्मिक प्रभावों पर हम जल्द ही एक विशेष रिपोर्ट भी लेकर आएंगे।
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National Herald Case ED

National Herald Case: ED ने सोनिया-राहुल गांधी पर चार्जशीट दायर, कांग्रेस बोली – ‘ये बदले की राजनीति है’

16 अप्रैल 2025 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले और डराने की कोशिश” बताया है और बुधवार को देशभर में ED दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की है। चार्जशीट में कौन-कौन? ED ने 9 अप्रैल को विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे हैं: अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।क्या है नेशनल हेराल्ड केस? यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को लेकर है, जो National Herald अखबार का प्रकाशन करती है। ED का आरोप है कि कांग्रेस ने AJL को ₹50 लाख में यंग इंडियन नाम की कंपनी के ज़रिए अधिग्रहित किया, जबकि उसकी संपत्ति की कीमत ₹2,000 करोड़ से ज्यादा थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ED ने हाल ही में ₹661 करोड़ की संपत्ति दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में जब्त करने के नोटिस भी दिए हैं। जांच की शुरुआत कैसे हुई? ये जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 में दाखिल याचिका के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने इनकम टैक्स विभाग को जांच की अनुमति दी थी। ED ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें ₹18 करोड़ के फर्जी डोनेशन, ₹38 करोड़ के फर्जी किराया और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापन की जानकारी मिली।कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह पूरा मामला फर्जी है। ना कोई पैसा ट्रांसफर हुआ, ना कोई संपत्ति बेची गई। फिर भी सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग बता रही है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा, “मोदी-शाह सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को टारगेट कर रही है। ये केस राजनीति को दबाने का तरीका है।” जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की जब्ती कानून की आड़ में किया गया अपराध है।” भाजपा का पलटवार भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग भ्रष्टाचार और जनता की संपत्ति की लूट में शामिल रहे हैं, अब उन्हें जवाब देना होगा। ED का मतलब अब ‘एंटाइटलमेंट टू डकैती’ नहीं है।”कोर्ट की टिप्पणी विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की कार्रवाई के साथ-साथ CBI की जांच से जुड़ा मामला भी इसी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आदेश जिला जज को देना होगा। DeshHarpal पर पढ़ते रहिए देश-दुनिया की सबसे सटीक और सरल खबरें।
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Bihar Politics: Tejashwi Yadav ने Mahagathbandhan

Tejashwi Yadav CM Face , सीट शेयरिंग पर खोले पत्ते, Delhi में Congress-RJD की बैठक के बाद सियासत गरमाई

Bihar Politics: Tejashwi Yadav, Rahul gandhi Mahagathbandhan Bihar की राजनीति में एक बार फिर उबाल है। 2025 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, Mahagathbandhan के अंदर चल रही खींचतान और रणनीतियों की परतें खुलने लगी हैं। इसी सिलसिले में दिल्ली में Congress और RJD के बीच एक अहम बैठक हुई जिसमें Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और Tejashwi Yadav जैसे बड़े नेता शामिल हुए। बैठक के बाद जब मीडिया ने Tejashwi Yadav से पूछा कि Mahagathbandhan का CM Face कौन होगा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया— “बातचीत के बाद सारी चीज़ें सामने आ जाएंगी।” इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि फॉर्मूला 70 पर चर्चा चल रही है और बहुत जल्द इसका खुलासा होगा। क्या है फॉर्मूला 70? बताया जा रहा है कि ‘फॉर्मूला 70’ का मतलब यह हो सकता है कि RJD 70 से ज़्यादा सीटें अपने पास रखेगा और बाकी सीटों पर Congress, Left पार्टियां, VIP और अन्य सहयोगी दलों के साथ समझौता होगा। लेकिन इसी फॉर्मूले को लेकर अभी भी महागठबंधन के भीतर seat sharing पर रस्साकशी बनी हुई है। Delhi में मंथन, Patna में समीकरण Patna में जहां पार्टी वर्कर्स और जमीनी स्तर पर संगठन एक्टिव हो चुका है, वहीं Delhi में मंथन जारी है। Congress चाहती है कि उसे पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा सीटें मिलें, वहीं RJD का दावा है कि वह सबसे बड़ी पार्टी है और उसी के पास नेतृत्व रहना चाहिए। कुर्बानी कौन देगा? बात सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि leadership की भी है। सूत्रों के मुताबिक Congress यह संकेत दे रही है कि अगर उसे ज़्यादा सीटें नहीं मिलतीं, तो वह campaign में अपने बड़े चेहरों को झोंकने से परहेज़ कर सकती है। वहीं RJD का फोकस Tejashwi Yadav को ही एकमात्र CM Face के तौर पर प्रोजेक्ट करने पर है। Left और VIP का रोल Mahagathbandhan में Left पार्टियां और VIP जैसे दल भी शामिल हैं। इनकी मांगें भी equation को complex बना रही हैं। Left पार्टियां जनाधार के आधार पर अधिक सीटें चाहती हैं, जबकि VIP जैसी छोटी पार्टियां symbolic सीटों से संतुष्ट नहीं हैं। Desh Harpal की Exclusive जानकारी के अनुसार, Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi ने Tejashwi Yadav को भरोसा दिलाया है कि सभी दलों की सहमति से एक common minimum programme और CM Face पर फैसला लिया जाएगा। लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर आखिरी निर्णय मई के पहले हफ्ते तक आ सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या Bihar में Mahagathbandhan अपने अंदरुनी मतभेद सुलझाकर एक united front के रूप में सामने आएगा या फिर सीटों और leadership की ‘कुर्बानी’ की राजनीति उसे कमजोर कर देगी। Desh Harpal आपके लिए आगे भी इस developing political story पर नजर बनाए रखेगा।
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SP MLA Indrajeet Saroj:

SP MLA Indrajeet Saroj: ‘श्राप दे देते भगवान ताकि भस्म हो जाते मुसलमान…’

Controversial Statement Again by SP MLA Indrajeet Saroj: Desh Harpal | 15 अप्रैल 2025 | उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विवाद की चिंगारी सुलग उठी है। Samajwadi Party के कद्दावर नेता और मौजूदा विधायक इंद्रजीत सरोज ने एक विवादित बयान देकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। पहले मंदिरों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर दिये गए उनके पुराने बयान ने खूब तूल पकड़ा था, और अब एक बार फिर उन्होंने अपने उसी बयान को दोहराते हुए कहा है – “अगर भगवान चाहते तो मुसलमानों को श्राप दे देते और वे भस्म हो जाते।” क्या है पूरा मामला? दरअसल, इंद्रजीत सरोज का ये बयान तब आया जब उनसे मीडिया ने उनके पुराने बयान पर प्रतिक्रिया मांगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर भगवान वाकई होते तो वो मंदिरों को तोड़ने वालों को भस्म कर देते।” इस पर सफाई देने के बजाय इंद्रजीत सरोज ने और भी तीखा बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि जब मुगलों ने मंदिर तोड़े, तब भगवान ने कुछ नहीं किया, इसका मतलब भगवान नहीं थे या फिर वो सिर्फ किताबों में हैं। उन्होंने ये भी कहा कि “अगर भगवान होते तो मस्जिदों में तो नहीं रहते, फिर मंदिरों में ही क्यों नहीं बचा पाए खुद को?” इस बयान ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और अब BJP समेत कई हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। सियासी घमासान BJP नेताओं ने इस बयान को Hindu sentiments के खिलाफ बताया है और तुरंत माफी मांगने की मांग की है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर ज़बरदस्त बवाल मचा है। कई users ने इंद्रजीत सरोज को “Hinduphobic” कहा है, तो कुछ ने उन्हें पार्टी से निकालने की मांग की है। Akhilesh Yadav की चुप्पी पर सवाल अब सवाल उठ रहा है कि क्या Samajwadi Party इस बयान से खुद को अलग करेगी या फिर Akhilesh Yadav इस पर चुप्पी साधे रहेंगे? क्योंकि पहले भी पार्टी के कुछ नेताओं के विवादित बयानों पर पार्टी ने कोई ठोस एक्शन नहीं लिया था। Desh Harpal का विश्लेषण ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में धार्मिक भावनाएं बेहद संवेदनशील मुद्दा हैं। किसी भी राजनेता को ऐसा बयान देने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसके शब्द समाज पर क्या असर डाल सकते हैं। इंद्रजीत सरोज का यह बयान सिर्फ राजनीतिक विवाद ही नहीं बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने वाला है। Desh Harpal यह मानता है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। खासतौर पर उन नेताओं के लिए जो लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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“Coca-Cola ने मुसलमानों के लिए की पीली केप वाली कोल्ड ड्रिंक….?

Coca-Cola Special Coldrink Only For One Religion? Here’s The Truth | देश हरपल स्पेशल रिपोर्ट Coca-Cola की एक खास बोतल चर्चा में है — जिसकी कैप है पीले रंग की, और बताया जा रहा है कि यह केवल एक खास धर्म के लिए बनाई गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे ने कई लोगों को चौंका दिया है। दावा ये भी किया जा रहा है कि यह “Special Coldrink” सिर्फ रमज़ान के महीने में बनाई जाती है और इसमें इस्तेमाल होने वाले Ingredients बाकी कोल्ड्रिंक्स से अलग हैं। लेकिन क्या यह सच है? चलिए देश हरपल पर जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई। वायरल क्या हुआ? कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Coca-Cola की एक बोतल की तस्वीर वायरल हो रही है जिसकी Yellow Cap है। दावा किया जा रहा है कि ये बोतल सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बनाई गई है और इसमें इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट्स को Halal Certified किया गया है। ये Yellow Cap आखिर है क्या? असल में, कोका-कोला कंपनी रमज़ान के मौके पर Middle East और कुछ अन्य मुस्लिम देशों में एक खास पैकेजिंग के साथ अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करती है। ये Yellow Cap उसी कस्टम पैकेजिंग का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि यह सिर्फ एक धर्म विशेष के लिए है। Coca-Cola का क्या कहना है? Coca-Cola Middle East की ओर से स्पष्ट किया गया है कि Yellow Cap Bottles में ऐसा कुछ भी नहीं है जो केवल किसी एक धर्म विशेष के लिए बनाया गया हो। बल्कि, यह Marketing Strategy है, ताकि रमज़ान के दौरान consumers को special feel दिया जा सके। इसके साथ ही ये Cap कुछ खास Instructions को Represent करता है जैसे कि “Halal Certified” होने की जानकारी। Halal Certification क्या होता है? Halal एक Arabic Word है जिसका मतलब होता है “वो जो अनुमति प्राप्त हो”। खाने-पीने के Products के लिए Halal Certification यह बताता है कि उसमें ऐसा कोई Ingredient नहीं है जो इस्लामिक कानून के विरुद्ध हो। भारत सहित कई देशों में Halal और Vegetarian दोनों तरह के Certification आम हैं। क्या भारत में भी यह Yellow Cap Bottle मिलती है? नहीं। यह पैकेजिंग केवल Middle East और कुछ चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है। भारत में फिलहाल ऐसी कोई Coca-Cola Bottle officially Launch नहीं की गई है। अफवाह क्यों फैली? Social Media पर आधी-अधूरी जानकारी के साथ Sensational Claims करना आजकल आम हो गया है। कुछ लोगों ने बिना पुख्ता जानकारी के सिर्फ Cap के रंग को देखकर यह मान लिया कि पूरी Drink एक धर्म विशेष के लिए बनाई गई है, जो कि ग़लत है। Coca-Cola की Yellow Cap वाली Bottle कोई धार्मिक पक्षपात नहीं बल्कि एक खास त्योहार के लिए मार्केटिंग रणनीति है। यह Drink सभी के लिए है, और इसमें ऐसा कुछ नहीं जो किसी एक धर्म के लिए Exclusively बनाया गया हो। Desh Harpal आपसे अपील करता है कि ऐसी अफवाहों से बचें और किसी भी खबर को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता ज़रूर जांचें।
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Robert Vadra

Robert Vadra पहुंचें ED ऑफिस – बोले, “Parliament में Rahul की आवाज़ दबाई जाती है, यहां मेरी…”

दिल्ली: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और बिज़नेसमैन Robert Vadra आज एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष पेश हुए। यह पेशी गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदे (Shikohpur Land Deal) को लेकर है, जिसमें Vadra की कंपनी Skylight Hospitality पर अवैध रूप से जमीन खरीदने और बेचने के आरोप हैं। यह मामला हरियाणा के NTC यानी National Tasking Committee की रिपोर्ट और शिकायत के आधार पर उभरा है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, Skylight Hospitality ने गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। आरोप है कि इस जमीन की कीमत बाज़ार मूल्य से बहुत कम दिखाई गई थी, और बाद में इसे भारी मुनाफे पर DLF जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनी को बेच दिया गया। इस डील में सरकारी नियमों की अनदेखी और राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप है। ED की तरफ से Vadra को दूसरी बार समन भेजा गया, जिसके बाद आज वे दिल्ली स्थित कार्यालय पहुंचे। उनसे पूछताछ में प्रॉपर्टी डील के दस्तावेज़, लेन-देन की जानकारी, और संबंधित अधिकारियों से संपर्कों के बारे में सवाल किए गए। Vadra का पलटवार – सरकार पर लगाया बड़ा आरोप ED ऑफिस पहुंचने से पहले Robert Vadra ने मीडिया से बात करते हुए कहा – राजनीतिक रंग लेता मामला इस केस ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार selective targeting कर रही है, ताकि विपक्ष को दबाया जा सके। वहीं, भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और no one is above the law। आगे क्या? ED इस मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। अगर Vadra जांच में सहयोग नहीं करते हैं या आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला लंबा खिंच सकता है और कानूनी पेंच और भी गहरे हो सकते हैं। Desh Harpal इस मामले से जुड़ी हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। बने रहिए हमारे साथ।
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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