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Monsoon Session

Modi Government Bills 2026: संसद के Monsoon Session में FCRA, Supreme Court और MSME समेत कई बड़े विधेयक संभव

Parliament Monsoon Session 2026 की शुरुआत 20 जुलाई से होने जा रही है। हर बार की तरह इस बार भी देश की नजर संसद के मानसून सत्र पर टिकी हुई है। वजह साफ है—केंद्र की मोदी सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों (Bills) को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। इनमें विदेशी फंडिंग के नियमों से लेकर आयकर व्यवस्था, MSME सेक्टर, शिक्षा और न्यायपालिका से जुड़े बड़े बदलाव शामिल हो सकते हैं। सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि विपक्ष ने भी इस सत्र के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर कई अहम मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिल सकती है। मानसून सत्र में सरकार किन नए Bills को पेश कर सकती है? सरकारी सूत्रों और सामने आई संभावित विधायी सूची के अनुसार, इस बार कई नए विधेयकों को संसद में पेश किया जा सकता है। 1. FCRA Amendment Bill 2026 सरकार Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) में संशोधन कर सकती है। इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है। यदि यह बिल पारित होता है तो विदेशी अनुदान प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए कुछ नए प्रावधान लागू हो सकते हैं। 2. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन का प्रस्ताव भी सरकार ला सकती है। इसका मकसद कानून को समय के अनुसार अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। 3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक सरकार जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और आसान बनाने की दिशा में यह विधेयक ला सकती है। इससे सरकारी रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से अपडेट करने में मदद मिलने की उम्मीद है। 4. Supreme Court Judges Bill देशभर में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी इस सत्र में लाया जा सकता है। इससे मामलों के तेजी से निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है। 5. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक उच्च शिक्षा और रिसर्च को नई दिशा देने के उद्देश्य से सरकार यह नया विधेयक पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि इससे शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली और शोध गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। इन दो अहम Bills पर भी रहेगी नजर नए विधेयकों के अलावा सरकार दो महत्वपूर्ण लंबित बिलों को भी आगे बढ़ा सकती है। Income Tax Amendment Bill सरकार आयकर कानून में कुछ बड़े बदलाव कर टैक्स सिस्टम को पहले से अधिक सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठा सकती है। MSME Development Amendment Bill सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए इस विधेयक में कई नए प्रावधान जोड़े जा सकते हैं। इससे छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स को राहत मिलने की उम्मीद है। क्या महिला आरक्षण और Delimitation Bill पर होगी चर्चा? संसद सत्र से पहले महिला आरक्षण और Delimitation (परिसीमन) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि अभी तक सरकार की आधिकारिक विधायी सूची में इन मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है। फिर भी विपक्ष लगातार इन विषयों पर चर्चा की मांग कर रहा है और सत्र के दौरान ये मुद्दे जोर-शोर से उठ सकते हैं। विपक्ष सरकार को किन मुद्दों पर घेरेगा? कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मानसून सत्र के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। इसलिए इस बार संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। क्यों अहम माना जा रहा है Parliament Monsoon Session 2026? इस बार का मानसून सत्र सिर्फ नए कानून बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार जहां आर्थिक सुधार, प्रशासनिक बदलाव, शिक्षा और न्याय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष भी कई संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। ऐसे में संसद का यह सत्र देश की राजनीति और नीति निर्माण, दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अनुराग कुमार

Delhi Police New Commissioner: अनुराग कुमार के हाथों में राजधानी की कमान, सतीश गोलचा की छुट्टी

देश की राजधानी दिल्ली की पुलिस व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने 1994 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया Commissioner of Police नियुक्त किया है। वे अब सतीश गोलचा की जगह राजधानी की कानून-व्यवस्था की कमान संभालेंगे। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के बाद यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, साइबर अपराध, वीआईपी सुरक्षा और खुफिया समन्वय जैसे कई अहम मुद्दों पर लगातार फोकस किया जा रहा है। गृह मंत्रालय ने जारी किया नियुक्ति आदेश गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, अनुराग कुमार की नियुक्ति उनके कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। वहीं, मौजूदा पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को नई जिम्मेदारी के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) के पास रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सरकार ने इस बदलाव की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है, लेकिन इसे नियमित प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा माना जा रहा है। कौन हैं अनुराग कुमार? अनुराग कुमार AGMUT कैडर के 1994 बैच के IPS अधिकारी हैं। पुलिस सेवा में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले अनुराग कुमार ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली पुलिस से की थी। इसके बाद उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और हाल तक Special Director के पद पर कार्यरत रहे। उनका नाम उन अधिकारियों में गिना जाता है जिन्होंने खुफिया तंत्र और सुरक्षा प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में लंबा अनुभव हासिल किया है। यही अनुभव अब दिल्ली पुलिस के नेतृत्व में भी अहम भूमिका निभा सकता है। सतीश गोलचा का कार्यकाल क्यों चर्चा में है? सतीश गोलचा ने अगस्त 2025 में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का पद संभाला था। उनका कार्यकाल अभी बाकी था और उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2027 में प्रस्तावित थी। लेकिन नए आदेश के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बदलाव किन कारणों से किया गया। फिलहाल उन्हें अगली नियुक्ति का इंतजार करने के लिए कहा गया है। दिल्ली पुलिस के सामने क्या होंगी प्राथमिक चुनौतियां? देश की राजधानी होने के कारण दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। यहां संसद, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेशी दूतावास और कई राष्ट्रीय संस्थानों की सुरक्षा भी दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके अलावा आने वाले समय में इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है— इंटेलिजेंस ब्यूरो में लंबे अनुभव के कारण अनुराग कुमार से इन मोर्चों पर बेहतर रणनीति और तेज फैसलों की उम्मीद की जा रही है। राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को मिल सकती है नई दिशा पुलिस प्रशासन में शीर्ष स्तर पर होने वाला हर बदलाव सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग की रणनीति को प्रभावित करता है। ऐसे में अनुराग कुमार की नियुक्ति को केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस की भविष्य की कार्यशैली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि नए पुलिस कमिश्नर राजधानी में अपराध नियंत्रण, आधुनिक पुलिसिंग और जनता के साथ बेहतर संवाद को लेकर किस तरह की प्राथमिकताएं तय करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Update देशभर में बारिश की वापसी, 60% India में Rain Alert जारी

भारत में मानसून (Monsoon) ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के अनुसार, देश के करीब 60% हिस्से में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने वाला है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों तक कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश और बिहार में देखने को मिल सकता है, जहां अगले सात दिनों तक Heavy Rain Alert जारी किया गया है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में पिछले 15 दिनों के भीतर 16 बार Cloudburst की घटनाएं सामने आने से पहाड़ी क्षेत्रों में हालात गंभीर बने हुए हैं। IMD का ताजा Weather Update मौसम विभाग के अनुसार, मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) सक्रिय होने के साथ-साथ कई मौसम प्रणालियां एक साथ प्रभावी हो गई हैं। यही वजह है कि देश के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बारिश खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन लगातार तेज वर्षा के कारण कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। UP-Bihar में अगले 7 दिन बारिश का दौर IMD ने उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों के लिए अगले सात दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक, तेज हवाएं और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की एडवाइजरी पर नजर बनाए रखें। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। Jammu-Kashmir में लगातार Cloudburst से बढ़ी मुश्किलें इस बार मानसून का सबसे गंभीर असर जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में देखने को मिल रहा है। पिछले 15 दिनों में 16 बार Cloudburst की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं के कारण कई जगह अचानक बाढ़, भूस्खलन और सड़कें बंद होने जैसी स्थितियां बनी हैं। राहत एवं बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इन राज्यों में भी होगी तेज बारिश मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में इन राज्यों में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है— इन राज्यों के कई जिलों में स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ और जलभराव को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। आखिर क्यों बढ़ रही हैं Cloudburst की घटनाएं? मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि Climate Change, बढ़ता तापमान और वातावरण में नमी की अधिक मात्रा पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और Cloudburst जैसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। बारिश के दौरान क्या रखें सावधानी? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi Flags Off Hydrogen Train: भारत बना दुनिया का 5वां देश, Green Railway की ओर बड़ा कदम

भारत ने रेलवे और हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। शुक्रवार को PM Modi ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली Hydrogen Fuel Cell Train को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने रेलवे में हाइड्रोजन तकनीक का सफल उपयोग किया है। यह कदम न केवल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन (Sustainable Transport) के भविष्य की भी मजबूत नींव है। जींद से सोनीपत के बीच चलेगी भारत की पहली Hydrogen Train देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच लगभग 89 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर संचालित होगी। शुरुआत में इसे ट्रायल और निर्धारित शेड्यूल के अनुसार चलाया जाएगा। ट्रेन में कुल 10 आधुनिक कोच लगाए गए हैं और इसकी अधिकतम डिजाइन स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ एक नई ट्रेन शुरू करना नहीं, बल्कि भविष्य में डीजल इंजनों की जगह पर्यावरण अनुकूल तकनीक को बढ़ावा देना भी है। भारत बना दुनिया का 5वां देश हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के साथ भारत ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों के बाद हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अपनाने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे भारत की तकनीकी क्षमता और स्वदेशी नवाचार (Innovation) को भी नई पहचान मिली है। कैसे काम करती है Hydrogen Fuel Cell Train? यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन से बिल्कुल अलग तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार की जाती है, जो ट्रेन को चलाने का काम करती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। ट्रेन से केवल पानी की भाप (Water Vapour) निकलती है। यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए सबसे सुरक्षित और स्वच्छ रेल तकनीकों में से एक माना जा रहा है। Hydrogen Train की प्रमुख विशेषताएं रेलवे के Green Mission को मिलेगी नई रफ्तार भारतीय रेलवे अगले कुछ वर्षों में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विस्तार के साथ अब हाइड्रोजन ट्रेन भी इस मिशन का हिस्सा बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में देश के कई अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। इससे डीजल की खपत कम होगी, ईंधन आयात पर निर्भरता घटेगी और रेलवे का संचालन अधिक पर्यावरण अनुकूल बनेगा। PM मोदी ने दी कई विकास परियोजनाओं की सौगात हाइड्रोजन ट्रेन को रवाना करने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। भारत के रेलवे इतिहास में ऐतिहासिक दिन देश की पहली Hydrogen Train केवल एक नई रेल सेवा नहीं है, बल्कि यह भारत के तकनीकी विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में यदि इस तकनीक का विस्तार होता है, तो भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे आधुनिक और हरित रेल नेटवर्क में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। भारत की यह उपलब्धि इस बात का संकेत भी है कि भविष्य की रेल यात्रा अब केवल तेज़ ही नहीं, बल्कि पहले से कहीं अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होने वाली है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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पुरी जगन्नाथ रथयात्रा में भगदड़: एक श्रद्धालु की मौत, बारिश के बीच 10 लाख से अधिक लोग पहुंचे

ओडिशा के पुरी में गुरुवार को आयोजित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि कई लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना शाम करीब 5 बजे उस समय हुई, जब पारंपरिक पहांडी रस्म के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथों की ओर बढ़ने लगे। भीड़ बढ़ने से मची अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रा मार्ग पर तैनात स्वयंसेवक (वॉलेंटियर) भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को पीछे हटाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अफरा-तफरी में कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और कुछ श्रद्धालुओं को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। तेज बारिश के बीच उमड़ी भारी भीड़ हादसे के समय पुरी में तेज बारिश हो रही थी। इसके बावजूद रथयात्रा मार्ग पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। भारी भीड़ और खराब मौसम के कारण व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शाम को आगे बढ़ा भगवान जगन्नाथ का रथ भगदड़ की घटना के बाद कुछ समय के लिए रथयात्रा प्रभावित रही। शाम करीब 7:30 बजे भगवान जगन्नाथ का रथ आगे बढ़ाया गया, लेकिन कुछ ही दूरी तय करने के बाद पहले दिन की यात्रा रोक दी गई। अब यात्रा शुक्रवार सुबह दोबारा शुरू होगी और लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर तक पहुंचेगी। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान इससे पहले भी भगदड़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 18 जुलाई 2015 नवकलेवर वर्ष होने के कारण लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे थे। भगवान बलभद्र के रथ के पास अचानक भीड़ बढ़ने से भगदड़ मच गई थी। हादसे में दो महिलाओं की मौत हुई थी, जबकि छह लोग घायल हुए थे। 29 जून 2025 गुंडिचा मंदिर के बाहर सरधाबली क्षेत्र में दर्शन के लिए जुटी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे तथा लापरवाही के आरोप में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। देश-दुनिया, धर्म और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सख्ती: गगनयान समेत अहम मिशनों को देखते हुए DoS ने बदले नियम

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफों तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS) ने 14 जुलाई को जारी निर्देश में कहा है कि अब ग्रुप-ए वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS आवेदन पहले की तरह सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूर नहीं किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि हाल के महीनों में वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफों का असर गगनयान सहित कई राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजनाओं पर पड़ सकता है। अब अंतिम फैसला करेगा अंतरिक्ष विभाग नए आदेश के अनुसार, ISRO के विभिन्न केंद्रों से आने वाले वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या VRS आवेदन अब संबंधित केंद्र निदेशक की स्पष्ट सिफारिश के साथ सीधे अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे। इन मामलों में अंतिम मंजूरी अब विभाग स्तर पर ही दी जाएगी। इससे पहले वर्ष 2020 में ISRO के केंद्र निदेशकों को ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था। किन केंद्रों पर लागू होंगे नए नियम यह निर्देश ISRO के कई प्रमुख संस्थानों को भेजा गया है, जिनमें शामिल हैं— 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले लगभग 10 महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी ISRO छोड़ चुके हैं। सबसे अधिक इस्तीफे बेंगलुरु स्थित यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) और तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से सामने आए हैं। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे VSSC में GSLV Mk-III (LVM3) परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रह चुके हैं। यही लॉन्च व्हीकल भविष्य के गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा। निजी स्पेस स्टार्टअप्स की ओर बढ़ रहा रुझान रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISRO छोड़ने वाले कई वैज्ञानिक अब निजी अंतरिक्ष कंपनियों से जुड़ रहे हैं। वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 लागू होने के बाद देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में भारत में 400 से अधिक पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप्स कार्यरत हैं, जिनमें अब तक करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश हो चुका है। केवल वर्ष 2025 में ही इस क्षेत्र में लगभग 150 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। प्रमुख भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स में शामिल हैं— पूर्व ISRO प्रमुख भी स्टार्टअप से जुड़े ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ भी अब चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने जनवरी 2025 तक ISRO का नेतृत्व किया और उनके कार्यकाल में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता तथा आदित्य-L1 मिशन का प्रक्षेपण हुआ। लगातार दो PSLV मिशन रहे असफल हाल के समय में ISRO को कुछ तकनीकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इन घटनाओं ने ISRO की भविष्य की परियोजनाओं को लेकर चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कई बड़े मिशनों पर जारी है काम चुनौतियों के बावजूद ISRO अपने महत्वाकांक्षी मिशनों पर तेजी से काम कर रहा है। इनमें शामिल हैं— इनमें सबसे महत्वपूर्ण गगनयान मिशन है, जिसके सफल होने पर भारत अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। विज्ञान, अंतरिक्ष और तकनीक से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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विप्रो का Q1 मुनाफा 3,352 करोड़ रुपये, ₹2 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान; रेवेन्यू अनुमान से रहा कम

नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 3,330 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। तिमाही नतीजों के साथ कंपनी के बोर्ड ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को भी मंजूरी दी है। रेवेन्यू में 10.6% की बढ़ोतरी, लेकिन अनुमान से कम पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 24,479 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.6% अधिक है। हालांकि, यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों के अनुमान से थोड़ा कम रहा। रॉयटर्स-LSEG के अनुसार, विश्लेषकों ने कंपनी का रेवेन्यू लगभग 24,776 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था। तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी के कुल राजस्व में करीब 1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईटी सर्विसेज कारोबार में मिली-जुली तस्वीर विप्रो के प्रमुख आईटी सर्विसेज बिजनेस का राजस्व 2.61 बिलियन डॉलर रहा। वहीं, कॉन्सटेंट करेंसी के आधार पर आईटी सर्विसेज रेवेन्यू में: बड़ी डील्स में 12.9% की शानदार बढ़ोतरी तिमाही के दौरान कंपनी की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो पिछली तिमाही की तुलना में 2.4% कम है। हालांकि, बड़ी डील्स (Large Deals) की बुकिंग में 12.9% की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इसे कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऑपरेटिंग मार्जिन और एट्रिशन विप्रो का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन इस तिमाही में 16% रहा। इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपये रहा, जो शुद्ध आय (Net Income) का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों का वॉलंटरी एट्रिशन रेट (स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर) 13.9% दर्ज किया गया। दूसरी तिमाही के लिए कंपनी का अनुमान जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए विप्रो ने अपने आईटी सर्विसेज कारोबार का राजस्व 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान जताया है। कंपनी के अनुसार, कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ अगली तिमाही में -1.5% से 0.5% के बीच रह सकती है। क्या है कॉन्सोलिडेटेड रिजल्ट? कंपनियां आमतौर पर दो तरह के वित्तीय परिणाम जारी करती हैं— इसी वजह से निवेशक किसी कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति समझने के लिए कॉन्सोलिडेटेड परिणामों को अधिक महत्व देते हैं। कॉन्सटेंट करेंसी क्या होती है? आईटी कंपनियों को अपने विदेशी ग्राहकों से डॉलर, यूरो और अन्य विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। विनिमय दरों (Exchange Rate) में उतार-चढ़ाव से वास्तविक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कॉन्सटेंट करेंसी के आधार पर आंकड़े जारी किए जाते हैं, जिसमें मुद्रा विनिमय दर को स्थिर मानकर कंपनी की वास्तविक कारोबारी वृद्धि का आकलन किया जाता है। विप्रो के बारे में विप्रो लिमिटेड भारत की प्रमुख टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल है और दुनिया के 65 देशों में अपनी सेवाएं प्रदान करती है। अजीम प्रेमजी ने वर्ष 1966 में 21 वर्ष की आयु में कंपनी की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नेतृत्व में विप्रो ने वनस्पति तेल के कारोबार से आगे बढ़ते हुए आईटी सेवाओं, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस और वैश्विक कंसल्टिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई। बिजनेस, शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Koel Mallick

West Bengal Politics Update: Koel Mallick Resigns, TMC के सामने खड़ी हुई नई चुनौती

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक (Koel Mallick) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कोयल मल्लिक के इस्तीफे को टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब टीएमसी के अंदर संगठन और नेतृत्व को लेकर कई मुद्दे चर्चा में हैं। पार्टी पहले ही कुछ नेताओं के रुख बदलने और अंदरूनी मतभेदों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में एक राज्यसभा सांसद का पद छोड़ना पार्टी के लिए चिंता बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। Koel Mallick Resignation: TMC के लिए क्यों अहम है यह झटका? कोयल मल्लिक बंगाली फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम रही हैं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने टीएमसी के साथ अपनी नई पारी शुरू की और पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। उनकी पहचान सिर्फ एक सांसद के तौर पर ही नहीं, बल्कि बंगाल के सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े चेहरे के रूप में भी रही है। उनके इस्तीफे से टीएमसी को संसद के उच्च सदन में एक सीट का नुकसान हुआ है। साथ ही पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। Mamata Banerjee की बढ़ी मुश्किलें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए पिछले कुछ समय से पार्टी को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है। बंगाल की राजनीति में लगातार बदलते समीकरणों के बीच नेताओं के फैसले पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कोयल मल्लिक का इस्तीफा केवल एक सांसद का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह टीएमसी के अंदर चल रहे बदलावों की ओर भी इशारा कर सकता है। हालांकि, कोयल मल्लिक के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। West Bengal Politics में बढ़ी हलचल कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। टीएमसी अब इस नुकसान को कैसे संभालती है और पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोयल मल्लिक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या फैसला लेती हैं और क्या उनका यह कदम बंगाल के सियासी समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव लाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delimitation Bill

Congress Strategy on Delimitation Bill: परिसीमन बिल को लेकर पार्टी की हाईलेवल मीटिंग

परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति को धार देने के लिए बुधवार को बड़ी बैठक की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस बैठक में शामिल हुए। बैठक में परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े राजनीतिक, संवैधानिक और चुनावी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर नजर आ रही है, क्योंकि भविष्य में होने वाले लोकसभा सीटों के पुनर्गठन (Lok Sabha Seat Reorganisation) का असर देश की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। Delimitation Bill को लेकर कांग्रेस की क्या चिंता है? कांग्रेस नेताओं का मानना है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है तो उन राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, जिन्होंने पिछले वर्षों में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतर काम किया है। पार्टी खासतौर पर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को सामने रख रही है। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी परिसीमन प्रक्रिया में सभी राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कम न हो। Rahul Gandhi और Kharge ने नेताओं के साथ बनाई रणनीति बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी नेताओं से इस मुद्दे पर राय ली। कांग्रेस की कोशिश है कि संसद के अंदर और बाहर परिसीमन बिल को लेकर अपनी स्थिति मजबूती से रखी जाए। पार्टी इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत कर सकती है, ताकि एक साझा रणनीति तैयार की जा सके। Women Reservation और सीटों के समीकरण पर भी चर्चा परिसीमन के साथ महिला आरक्षण कानून (Women Reservation Law) और नई लोकसभा सीटों के संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने के साथ-साथ राज्यों के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक संतुलन का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। Election Strategy के लिए अहम मुद्दा कांग्रेस के लिए परिसीमन का मुद्दा आने वाले चुनावों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी इसे संविधान, राज्यों के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। बैठक के बाद कांग्रेस जल्द ही Delimitation Bill को लेकर अपनी आगे की रणनीति और राजनीतिक रुख स्पष्ट कर सकती है। वहीं, इस पूरे मामले पर अब सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD

IMD Weather UP-Bihar के 18 जिलों में Heavy Rain Alert, Assam-Arunachal में बाढ़ का संकट

देश में मानसून इस समय दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक ओर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दूसरी तरफ असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। UP-Bihar में Heavy Rain का Alert मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। Assam Flood: 99 गांव पानी में डूबे असम में लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राज्य के 99 गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी तथा स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। Arunachal Pradesh में 1 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित अरुणाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई नदियां उफान पर हैं और कई सड़कें बंद होने से गांवों का संपर्क टूट गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब एक लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। MP के 35 जिलों में बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता जहां देश के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी IMD ने भारी बारिश वाले राज्यों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में जिन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। एक ही मानसून, लेकिन अलग-अलग तस्वीर इस बार मानसून ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग असर दिखाया है। पूर्वोत्तर, उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग बाढ़ और भारी बारिश से जूझ रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के कई किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मौसम का यह असंतुलन सिर्फ आम जनजीवन ही नहीं, बल्कि खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की चाल कैसी रहती है, इस पर लाखों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन, राहत एजेंसियां और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपदा से समय रहते निपटा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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