नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पेश की गई रिपोर्ट में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा के 543 सांसदों में से 251 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 170 मामले गंभीर श्रेणी के हैं। वहीं, राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट के अनुसार, मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ देशभर में 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं। यह एफिडेविट वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने दाखिल किया है। वह जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे से जुड़ी जनहित याचिका में कोर्ट की सहायता कर रहे हैं।
तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी पर 89 मामले
एफिडेविट में मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज मामलों का भी जिक्र किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर 89 मामले दर्ज हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर 29 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर 19 मामले बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं।
2025 में 1,243 मामलों का हुआ निपटारा
हाईकोर्ट से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सांसदों और विधायकों से जुड़े 1,243 आपराधिक मामलों का फैसला हुआ, जबकि इसी दौरान 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। इसके बावजूद कुल 4,192 मामले अभी लंबित हैं।
राज्यसभा के 33% सदस्यों पर आपराधिक मामले
एफिडेविट के मुताबिक, राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 यानी करीब 33% सदस्यों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 40 मामले गंभीर श्रेणी के हैं, जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो सकता है।
लोकसभा के 251 सांसदों पर मामलों में से 170 को गंभीर श्रेणी में रखा गया है।
केरल के 95% सांसदों पर मामले
राज्यवार आंकड़ों में केरल सबसे ऊपर है। वहां 20 में से 19 सांसदों यानी 95% सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें 11 सांसद गंभीर मामलों का सामना कर रहे हैं।
इसके अलावा तेलंगाना के 17 में से 14, ओडिशा के 21 में से 16, झारखंड के 14 में से 10 और तमिलनाडु के 39 में से 26 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी करीब आधे सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
विशेष अदालतों को लेकर मांग
वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की निगरानी की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों को प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि सांसदों और विधायकों के लिए बनाई गई विशेष अदालतों में पहले केवल जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई पूरी की जाए, उसके बाद ही अन्य मामलों को लिया जाए।


