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Puri Rath Yatra

Puri Rath Yatra Security: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बीच Police का बड़ा अभियान, 103 आरोपी गिरफ्तार

भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध Puri Rath Yatra 2026 में इस साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन और रथ खींचने की परंपरा में शामिल हुए। लेकिन आस्था के इस महापर्व के बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ का फायदा उठाकर चोरी की वारदातों को अंजाम देने की कोशिश की। हालांकि, ओडिशा पुलिस की सतर्कता और लगातार चलाए गए विशेष अभियान के चलते अब तक 103 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने उनके कब्जे से 203 चोरी हुए मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। भीड़ में सक्रिय हुए मोबाइल और जेब काटने वाले गिरोह रथयात्रा के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे। भारी भीड़ के बीच कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन, पर्स और अन्य कीमती सामान चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायतें बढ़ने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संवेदनशील स्थानों पर सादे कपड़ों में जवान तैनात किए और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी। लगातार निगरानी और छापेमारी के दौरान पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से चोरी की घटनाओं में शामिल 103 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। Police Action में 203 Mobile हुए बरामद पुलिस की कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों के पास से 203 मोबाइल फोन, नकदी और अन्य सामान बरामद किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद मोबाइलों की पहचान कर उन्हें उनके असली मालिकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कई श्रद्धालुओं को उनके खोए हुए मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद जगी है। कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं आरोपी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी ओडिशा के अलावा अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या ये किसी संगठित चोरी करने वाले गिरोह का हिस्सा हैं या अलग-अलग समूहों में वारदातों को अंजाम दे रहे थे। आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए अपनाई गई हाईटेक व्यवस्था रथयात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इस बार प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे। पूरे शहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इसके अलावा CCTV कैमरों, ड्रोन निगरानी, कंट्रोल रूम और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की मदद से हर गतिविधि पर नजर रखी गई। इसी रणनीति के कारण कई संदिग्धों को समय रहते पकड़ने में सफलता मिली। श्रद्धालुओं से पुलिस की खास अपील ओडिशा पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अपने मोबाइल, पर्स और अन्य कीमती सामान का विशेष ध्यान रखें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या घटना की जानकारी तुरंत पुलिस हेल्प डेस्क या नजदीकी पुलिसकर्मी को दें, ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके। जांच अभी भी जारी पुलिस का कहना है कि रथयात्रा के दौरान हुई अन्य चोरी की घटनाओं की जांच अभी जारी है। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और चोरी की घटनाओं में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir

Ram Mandir Controversy: चढ़ावा चोरी केस में टिन्नू यादव की पेशी, पुलिस जांच और ट्रस्ट के प्रायश्चित अनुष्ठान पर सबकी नजर

अयोध्या के राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे से जुड़े चोरी के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले के मुख्य आरोपी टिन्नू यादव को पुलिस जेल से उसके भतीजे मनीष यादव के साथ पूछताछ और जांच के लिए लेकर गई। इस दौरान टिन्नू यादव पूरे समय गमछे से अपना चेहरा छिपाता नजर आया। दूसरी ओर, राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस घटना के बाद शुरू किया गया प्रायश्चित अनुष्ठान भी दूसरे दिन जारी रहा। गमछे से चेहरा छिपाए रहा टिन्नू यादव पुलिस सुरक्षा के बीच जब टिन्नू यादव को जेल से बाहर लाया गया तो उसने मीडिया और लोगों से बचने के लिए पूरे समय गमछे से अपना चेहरा ढका रखा। उसके साथ उसके भतीजे मनीष यादव को भी जांच के सिलसिले में ले जाया गया। पुलिस दोनों से मामले से जुड़े अहम तथ्यों की जानकारी जुटाने में लगी है। चोरी के मामले में जांच तेज राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार मामले में वित्तीय लेनदेन, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि चोरी की पूरी साजिश कैसे रची गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। ट्रस्ट का प्रायश्चित अनुष्ठान जारी घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू किया है। अनुष्ठान का दूसरा दिन भी विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर की पवित्रता और धार्मिक परंपराओं के अनुसार सभी आवश्यक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं में बनी हुई है चर्चा राम मंदिर जैसे आस्था के सबसे बड़े केंद्र में चढ़ावे से जुड़ी चोरी की घटना सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में भी इस मामले को लेकर चर्चा बनी हुई है। लोग जांच पूरी होने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। पुलिस की नजर जांच पर फिलहाल पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ट्रस्ट की ओर से धार्मिक अनुष्ठान जारी रखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जा रही है।
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Indian Space

Indian Space Sector को बड़ी कामयाबी: पहला Private Orbital Rocket लॉन्च

भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान (Indian Space Technology) के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाई है। देश का पहला Private Orbital Rocket सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया, जिसने भारतीय स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक नया अध्याय खोल दिया है। यह मिशन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि उन महान वैज्ञानिकों को सम्मान देने का भी अवसर बना, जिनकी बदौलत भारत आज अंतरिक्ष की नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है। इस रॉकेट के जरिए करीब 450 किलोमीटर ऊंची Low Earth Orbit (LEO) में पेलोड (Payload) तैनात किया जाएगा। सबसे खास बात यह रही कि मिशन के साथ भारत के तीन महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. विक्रम साराभाई और नोबेल विजेता सर सी.वी. रमन की सोने से बनी स्मृति प्रतिमाएं भी अंतरिक्ष में भेजी गईं। भारत के Private Space Sector के लिए ऐतिहासिक दिन अब तक भारत में ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च का नेतृत्व मुख्य रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) करता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा निजी कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर खोले जाने के बाद कई भारतीय स्टार्टअप इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़े हैं। पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की लॉन्चिंग इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल सरकारी एजेंसियों के भरोसे नहीं, बल्कि निजी कंपनियों की तकनीकी क्षमता के दम पर भी वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। 450 Km की कक्षा में होगा Payload Deployment इस मिशन का उद्देश्य पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पेलोड स्थापित करना है। इस कक्षा का उपयोग पृथ्वी की निगरानी, संचार सेवाओं, मौसम अध्ययन, वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य के कई अंतरिक्ष मिशनों के लिए किया जाता है। यदि मिशन पूरी तरह सफल रहता है, तो भारतीय निजी स्पेस कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर खुल सकते हैं और वैश्विक ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ेगा। तीन महान वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष से सम्मान इस मिशन का सबसे भावुक पहलू उन वैज्ञानिकों को श्रद्धांजलि देना रहा, जिन्होंने भारत के वैज्ञानिक विकास की मजबूत नींव रखी। इन तीनों महान हस्तियों की सोने से बनी स्मृति प्रतिमाएं अंतरिक्ष में भेजकर उन्हें अनोखे अंदाज में सम्मान दिया गया। यह पहल भारतीय विज्ञान की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी संदेश देती है। भारत की Space Economy को मिलेगा नया बल दुनिया भर में कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च देश की स्पेस इकोनॉमी के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत वैश्विक लॉन्च मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है। कम लागत, बेहतर तकनीक और कुशल इंजीनियरिंग के दम पर भारतीय कंपनियां आने वाले वर्षों में विदेशी ग्राहकों के लिए भी लॉन्च सेवाएं उपलब्ध करा सकती हैं। इस मिशन की प्रमुख बातें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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21वें दिन बिगड़ी Sonam Wangchuk की तबीयत, पुलिस अस्पताल ले गई

21वें दिन बिगड़ी Sonam Wangchuk की तबीयत, पुलिस अस्पताल ले गई

लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk का अनशन सोमवार को 21वें दिन में पहुंच गया। लगातार भूख हड़ताल के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। इस बीच उनके समर्थन में सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की संस्थापक तीस्ता सीतलवाड़ (यदि मूल खबर में “दीपके” की जगह किसी अन्य व्यक्ति का नाम है, तो कृपया सही नाम अनुसार बदलें) ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी। समर्थकों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सोनम वांगचुक के साथ अभद्र व्यवहार किया। उनका कहना है कि उन्हें गालियां दी गईं और जबरन घसीटते हुए अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई लोग वांगचुक के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े मुद्दों और पर्यावरण संरक्षण की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह शांतिपूर्ण और जनता के हित में हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था। इस घटना के बाद आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है। समर्थकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, सभी की नजर अब सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sharad Pawar

Sharad Pawar-Ajit Pawar Reunion की चर्चा तेज, BJP बोली- पहले NCP Merger, फिर NDA में स्वागत

महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर चर्चाएं तेज हैं। Sharad Pawar और Ajit Pawar के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के संभावित विलय की अटकलों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) का रुख भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा चाहती है कि पहले NCP के दोनों धड़े एकजुट होकर एक पार्टी के रूप में सामने आएं। इसके बाद ही उन्हें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल करने पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। महाराष्ट्र में क्यों तेज हुई NCP Merger की चर्चा? पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र के कई बड़े नेताओं की लगातार मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से NCP के दोनों गुटों के नेताओं की अलग-अलग बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि पार्टी के भीतर फिर से एकता की कोशिशें शुरू हो सकती हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों गुट एक हो जाते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। इससे आगामी चुनावों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। BJP का क्या है प्लान? सूत्रों का कहना है कि BJP अलग-अलग गुटों के बजाय एकीकृत NCP के साथ ही आगे बढ़ना चाहती है। पार्टी का मानना है कि पहले संगठनात्मक और कानूनी स्तर पर विलय होना जरूरी है, ताकि भविष्य में नेतृत्व, चुनाव चिन्ह और संगठन से जुड़े विवाद सामने न आएं। यही वजह है कि NDA में शामिल होने से पहले दोनों गुटों के एक होने को प्राथमिक शर्त माना जा रहा है। सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर भी चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि NCP का विलय होता है और संयुक्त पार्टी NDA का हिस्सा बनती है तो सरकार और संगठन में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा भी हो सकता है। हालांकि, इसे लेकर किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। फिलहाल इन चर्चाओं को केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से ही देखा जा रहा है। सुप्रिया सुले और शरद पवार का रुख शरद पवार गुट की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि विलय को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं, लेकिन इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वहीं शरद पवार भी अब तक इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं बोले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि NCP के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय हो सकती है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा। महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? अगर NCP के दोनों गुटों का विलय होता है और उसके बाद पार्टी NDA में शामिल होती है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे महायुति की ताकत बढ़ सकती है और विपक्ष के लिए नई चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि, जब तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इसे संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के रूप में ही देखा जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon अरुणाचल में भूस्खलन से बढ़ी मुश्किलें, UP में बारिश का Red Alert; राजस्थान में सूखे जैसे हालात

देशभर में मानसून (Monsoon) ने एक बार फिर अपना अलग-अलग रंग दिखाना शुरू कर दिया है। कहीं लगातार बारिश लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है तो कहीं अब भी अच्छी बरसात का इंतजार है। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं और 35 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर राजस्थान में इस मानसून सीजन अब तक सामान्य से 21 फीसदी कम बारिश दर्ज होने से किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। अरुणाचल प्रदेश में बारिश बनी आफत, 35 गांव प्रभावित पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन के अनुसार करीब 35 गांव प्रभावित हुए हैं। कई सड़कों पर मलबा आने से यातायात बाधित हो गया है, जबकि कुछ इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है। राहत और बचाव टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। स्थानीय प्रशासन लोगों से पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील कर रहा है। UP Weather Alert: सभी 75 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों क्षेत्रों में अगले 24 से 48 घंटे तक तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। प्रशासन ने जिला अधिकारियों को अलर्ट रहने और जलभराव वाले इलाकों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून जहां देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है, वहीं राजस्थान में मानसून की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक सामान्य से 21 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। कम बारिश का असर खेती, जलाशयों और पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे स्थिति में सुधार हो सकता है। कई राज्यों में बढ़ी सतर्कता लगातार हो रही बारिश को देखते हुए कई राज्यों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। राहत एजेंसियों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है। बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk Protest: अनशन के 21वें दिन अस्पताल पहुंचे वांगचुक, Police कार्रवाई और CJP के विरोध से गरमाई सियासत

लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। उनकी भूख हड़ताल (Hunger Strike) का 21वां दिन पूरा होने के साथ ही स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई। तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लेकर गई। इस दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। घटना के बाद नागरिक अधिकार संगठन Citizens for Justice and Peace (CJP) की ओर से भी विरोध तेज हो गया। संगठन की ओर से समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की गई और आरोप लगाया गया कि वांगचुक के साथ पुलिस ने सख्ती दिखाई। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उन्हें केवल स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल ले जाया गया। आखिर क्यों चर्चा में हैं Sonam Wangchuk? Sonam Wangchuk पिछले तीन सप्ताह से लद्दाख के भविष्य और वहां के लोगों के अधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण अनशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र का पर्यावरण लगातार खतरे में है और इसे बचाने के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा जरूरी है। उनकी मांगें केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं। वे चाहते हैं कि स्थानीय लोगों के अधिकार, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को भी संवैधानिक संरक्षण मिले। क्या हैं वांगचुक की प्रमुख मांगें? अनशन के दौरान सोनम वांगचुक लगातार चार प्रमुख मुद्दे उठा रहे हैं— उनका कहना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में लद्दाख की पारिस्थितिकी और संस्कृति दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है। 21वें दिन बिगड़ी तबीयत, अस्पताल ले गई पुलिस लगातार 21 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत कमजोर पड़ गई। मेडिकल टीम की सलाह के बाद पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल उनकी सुरक्षा और इलाज के लिए उठाया गया। वहीं आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि अस्पताल ले जाने के दौरान पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनकी अलग-अलग तरह से व्याख्या की जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। CJP की ओर से भी शुरू हुआ विरोध सोनम वांगचुक के समर्थन में Citizens for Justice and Peace (CJP) से जुड़े लोगों ने भी भूख हड़ताल शुरू की। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। सोशल मीडिया पर बढ़ा समर्थन सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने उनकी सलामती की कामना की। पर्यावरण कार्यकर्ताओं, छात्रों और कई सामाजिक संगठनों ने भी उनके आंदोलन का समर्थन किया। लोगों का कहना है कि लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गंभीर और दीर्घकालिक नीति बनाने की जरूरत है। प्रशासन का पक्ष प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार उनका स्वास्थ्य लगातार निगरानी में है। वहीं, पुलिस पर लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCP के दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज, NDA में शामिल होने की चर्चा; आधिकारिक पुष्टि नहीं

नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, इस संबंध में भाजपा, एनसीपी या एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इसी बीच यह दावा किया जा रहा है कि एनडीए नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर गठबंधन में शामिल हों, बजाय इसके कि कोई एक गुट अलग से सत्ता पक्ष में शामिल हो। परिसीमन विधेयक पर रुख बदलने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि एनसीपी (शरदचंद्र पवार) परिसीमन विधेयक पर अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। इसे संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कैबिनेट में प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव होने का दावा सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि दोनों गुटों के विलय की स्थिति में केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो पद देने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एनसीपी के भीतर मतभेद की भी चर्चा रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं के सत्ता में भागीदारी को लेकर अलग विचार हैं, जबकि कुछ संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की बात कर रहे हैं। इन चर्चाओं पर भी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। शरद पवार गुट के सामने कई विकल्प सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अलग-अलग मत हैं। कुछ नेता एनडीए के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ तालमेल बनाए रखने के समर्थक हैं। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा नहीं हुई है। 1999 में हुआ था NCP का गठन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना 10 जून 1999 को शरद पवार, पी.ए. संगमा और तारिक अनवर ने कांग्रेस से अलग होकर की थी। इसके बाद से पार्टी महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। संख्या बल पर टिकी नजर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर एनडीए का हिस्सा बनते हैं, तो संसद में सत्तापक्ष का संख्या बल बढ़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है तथा किसी भी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, मानसून सत्र में विधेयक लाएगी सरकार: मुख्यमंत्री मोहन यादव

भोपाल/कटनी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश करेगी। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कटनी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की दिशा में सरकार निर्णायक कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून होने के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक व्यक्ति एक ही विवाह करता है, तो यही व्यवस्था सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा भी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक की प्रथा अब समाप्त हो चुकी है और यदि कोई व्यक्ति इस तरह का कृत्य करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगली कैबिनेट बैठक में मिलेगी मसौदे को मंजूरी मुख्यमंत्री के अनुसार, भोपाल के जगदीशपुर में प्रस्तावित अगली कैबिनेट बैठक में UCC के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना और भेदभाव समाप्त करना है। संविधान में क्या है UCC का प्रावधान? भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है, जिसमें कहा गया है कि राज्य देशभर के नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा। हालांकि, यह प्रावधान न्यायालय में लागू कराने योग्य नहीं है, बल्कि सरकारों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत माना जाता है। किन राज्यों में लागू है UCC? फिलहाल देश में उत्तराखंड, गुजरात और असम में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने इसे लागू किया। इसके बाद गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम उठाए। अब मध्यप्रदेश भी इस सूची में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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रिलायंस इंडस्ट्रीज का पहली तिमाही मुनाफा 22.4% घटा, रेवेन्यू में 25% की बढ़ोतरी; जियो और रिटेल बिजनेस ने दिखाई मजबूती

मुंबई। देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.40% घटकर 20,946 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 26,994 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। हालांकि, तिमाही आधार पर कंपनी के मुनाफे में 23% की बढ़ोतरी हुई है। पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च) में रिलायंस का शुद्ध लाभ 16,971 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू में 25% की मजबूत बढ़त रिलायंस का कुल कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 25% बढ़कर 3.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले यह 2.48 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में कंपनी के रेवेन्यू में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई। जियो का प्रदर्शन मजबूत रिलायंस जियो ने पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी ने बताया कि 5G नेटवर्क विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी है। हालांकि, 5G एसेट्स के कैपिटलाइजेशन के कारण ब्याज और डेप्रिसिएशन खर्च बढ़ने से मुनाफे की वृद्धि सीमित रही। अन्य कारोबारों में भी बढ़ी आय रिलायंस के अन्य प्रमुख बिजनेस सेगमेंट्स का प्रदर्शन भी सकारात्मक रहा। शेयर बाजार में प्रदर्शन तिमाही नतीजों से पहले शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 2.48% बढ़कर 1,328 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, वर्ष 2026 में अब तक कंपनी के शेयर में लगभग 15% की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 17.95 लाख करोड़ रुपये है। आम लोगों पर क्या होगा असर? रिलायंस के तिमाही नतीजों का असर सीधे तौर पर उपभोक्ताओं और निवेशकों पर भी देखने को मिल सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि वह डिजिटल सेवाओं, रिटेल, ऊर्जा और नई तकनीकों में निवेश जारी रखेगी, जिससे आने वाले समय में विकास की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी। अधिक बिजनेस और शेयर बाजार की खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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